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                <title>Pakistan Diplomacy Role - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>जंग रुकी, शक नहीं: पाकिस्तान की भूमिका पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य पूर्व की धधकती धरती पर जब चारों ओर बारूद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धमकियों और विनाश की गूंज फैल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी अचानक शांति की ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कुछ घंटे पहले तक ईरान को “सभ्यता के अंत” की चेतावनी दे रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अचानक दो सप्ताह के युद्ध विराम के लिए तैयार हो गए। उनकी केवल एक शर्त थी—ईरान तुरंत और सुरक्षित ढंग से होर्मुज स्ट्रेट खोल दे। यही वह समुद्री मार्ग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल पहुंचता है। अब सबसे बड़ा सवाल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175508/there-is-no-doubt-that-the-war-has-stopped-why"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य पूर्व की धधकती धरती पर जब चारों ओर बारूद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धमकियों और विनाश की गूंज फैल रही थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी अचानक शांति की ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कुछ घंटे पहले तक ईरान को “सभ्यता के अंत” की चेतावनी दे रहे थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अचानक दो सप्ताह के युद्ध विराम के लिए तैयार हो गए। उनकी केवल एक शर्त थी—ईरान तुरंत और सुरक्षित ढंग से होर्मुज स्ट्रेट खोल दे। यही वह समुद्री मार्ग है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल पहुंचता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह फैसला पाकिस्तान की चौंकाने वाली कूटनीति की जीत था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या फिर अमेरिका अपनी ही भड़काई आग में फंसकर पीछे हटने पर मजबूर हो गया</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रंप की इस घोषणा ने वैश्विक राजनीति की पूरी बिसात ही पलट दी। दुनिया युद्ध के छठे सप्ताह में पहुंच चुकी थी। तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही थीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शेयर बाजार दहशत में डूबे थे और पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं पर संकट की रेखाएं साफ नजर आने लगी थीं। ऐसे निर्णायक मोड़ पर ट्रंप ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बातचीत के बाद उन्होंने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को दो सप्ताह के लिए टालने का फैसला किया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसके तुरंत बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत तय हुई और पूरे क्षेत्र में पहली बार ऐसा लगा कि बारूद के बीच भी शांति की राह निकल सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट में पाकिस्तान ने खुद को केवल पड़ोसी देश नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि मुख्य मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की। शहबाज शरीफ ने ट्रंप से युद्ध टालने की अपील की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान से होर्मुज स्ट्रेट खोलने को कहा। रातभर आसिम मुनीर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस और विशेष दूतों के संपर्क में रहे। दावा है कि ईरान की दस सूत्रीय योजना भी पाकिस्तान के जरिए वॉशिंगटन पहुंची। इस्लामाबाद ने ईरान से पुराने रिश्तों और अमेरिका से सैन्य साझेदारी के बीच संतुलन साधा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसी ने उसकी नीयत पर सवाल खड़े कर दिए। मिस्र और तुर्की को साथ जोड़कर पाकिस्तान ने संकेत दिया कि वह केवल क्षेत्रीय खिलाड़ी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संकट में खुद को अनिवार्य शक्ति साबित करना चाहता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान की यह भूमिका जितनी प्रभावशाली दिखती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही संदेहों से घिरी भी है। कई विश्लेषकों का मानना है कि इस्लामाबाद ने शांति से अधिक अपनी घटती वैश्विक हैसियत बचाने का मौका देखा। एक तरफ वह अमेरिका का करीबी सुरक्षा साझेदार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ ईरान से उसके धार्मिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भौगोलिक और राजनीतिक संबंध हैं। ऐसे में दोनों पक्षों को साथ रखने की उसकी कोशिश क्या वास्तव में संतुलन है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या केवल अपना प्रभाव बढ़ाने की चाल</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल यह रणनीति उसके पक्ष में दिख रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यही दांव आगे सबसे बड़ा संकट बन सकता है। वार्ता विफल हुई या किसी एक पक्ष ने उसे पक्षपाती माना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पाकिस्तान दोनों ओर से अविश्वास और अलगाव का सामना कर सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रंप के कदम पीछे खींचने की असली वजह पाकिस्तान नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका की बढ़ती मजबूरी थी। होर्मुज स्ट्रेट बंद होते ही तेल आपूर्ति पर असर पड़ा और अमेरिकी बाजार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई व ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ गया। चुनावी माहौल में ट्रंप जानते थे कि महंगाई की चोट उन्हें राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकती है। इजरायल लगातार ईरान पर कड़ी कार्रवाई चाहता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन लंबा युद्ध अमेरिका की छवि भी बिगाड़ रहा था। वह “विश्व पुलिस” नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि “युद्ध को हवा देने वाली शक्ति” नजर आने लगा था। ऐसे में ट्रंप के सामने विकल्प साफ था—या तो युद्ध बढ़ाकर संकट गहराएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या पीछे हटकर नुकसान सीमित करें। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान ने युद्धविराम को दबाव में लिया गया फैसला नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि शर्तों से जुड़ा समझौता माना। तेहरान ने साफ कर दिया कि उसे कुछ दिनों की राहत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थायी समाधान चाहिए। उसकी मांगों में प्रतिबंधों में ढील</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुनर्निर्माण सहायता और भविष्य में हमले न करने की गारंटी शामिल है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के संकेत दिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदले में अमेरिका से स्पष्ट राजनीतिक भरोसा मांगा। इसी वजह से वह शुरुआत में दो सप्ताह के अस्थायी विराम पर तैयार नहीं हुआ। पाकिस्तान बीच में अपनी भूमिका दिखाता रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन निर्णायक दबाव चीन ने बनाया। इससे साफ है कि यह केवल दो देशों का टकराव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस युद्धविराम का सबसे गहरा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा। होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से तेल बाजार को राहत मिली। भारत जैसे देशों के लिए यह अहम है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि उनका अधिकांश तेल इसी रास्ते से आता है। रास्ता बंद रहता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पेट्रोल-डीजल और खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती थीं। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। इजरायल सतर्क है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेबनान और हिजबुल्लाह के बीच तनाव जारी है। ऐसे में क्या इस्लामाबाद की वार्ता सचमुच समाधान दे पाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या केवल संकट को कुछ समय के लिए टाल रही है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर दो सप्ताह बाद बातचीत विफल हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह टकराव और खतरनाक हो सकता है। यह युद्धविराम शांति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल अस्थायी विराम लगता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धुआं अभी थमा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबसे बड़ा सवाल बाकी है—इस विराम के पीछे असली जीत किसकी है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पाकिस्तान खुद को संकट का समाधानकर्ता बता रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर क्या उसने सचमुच हालात बदले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या केवल अमेरिका की मजबूरी को अपनी उपलब्धि बना लिया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका पहले ही महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चुनावी दबाव और वैश्विक आलोचना से घिरा था। दूसरी ओर ईरान ने दिखा दिया कि होर्मुज स्ट्रेट बंद कर वह पूरी दुनिया पर दबाव बना सकता है। अब फैसला </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">अप्रैल की वार्ता करेगी। वहीं साफ होगा कि यह शांति की शुरुआत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अगली टकराव से पहले का सन्नाटा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 18:21:22 +0530</pubDate>
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