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                <title>मुख्यमंत्री शिकायत - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>मुख्यमंत्री शिकायत RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>निगोहां में फर्जी दस्तावेज के सहारे पैतृक मकान हड़पने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>निगोहां थाना क्षेत्र के करनपुर गांव में कर्ज के लेनदेन के बाद कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर पैतृक मकान पर कब्जा करने का मामला सामने आया है। पीड़ित राज कुमार ने पड़ोसी महिला और उसके परिजनों पर घर में घुसकर मारपीट करने, गाली-गलौज और मकान खाली कर गांव छोड़ने की धमकी देने का आरोप लगाया है। स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज कुमार के मुताबिक, वर्ष 2024 में बेटे के इलाज के लिए उन्होंने पड़ोसी माधुरी देवी से 30</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185581/allegation-of-grabbing-ancestral-house-in-nigohan-with-the-help"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/img-20240906-wa05195.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ। </strong>निगोहां थाना क्षेत्र के करनपुर गांव में कर्ज के लेनदेन के बाद कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर पैतृक मकान पर कब्जा करने का मामला सामने आया है। पीड़ित राज कुमार ने पड़ोसी महिला और उसके परिजनों पर घर में घुसकर मारपीट करने, गाली-गलौज और मकान खाली कर गांव छोड़ने की धमकी देने का आरोप लगाया है। स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज कुमार के मुताबिक, वर्ष 2024 में बेटे के इलाज के लिए उन्होंने पड़ोसी माधुरी देवी से 30 हजार रुपये उधार लिए थे। इसके एवज में उन्होंने अपना खेत सुरक्षा के तौर पर गिरवी रखा था। पीड़ित का दावा है कि वर्ष 2025 में उन्होंने पूरी रकम वापस कर हिसाब चुकता कर दिया। आरोप है कि इसके बावजूद माधुरी देवी ने एक स्टाम्प पेपर के आधार पर उनके पैतृक मकान पर दावा कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित के अनुसार, मकान को लेकर विवाद फिलहाल सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। आरोप है कि मामला न्यायालय में लंबित होने के बावजूद विपक्षी पक्ष मकान पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। राज कुमार ने स्थानीय पुलिस पर भी विपक्षी पक्ष के प्रभाव में एकतरफा कार्रवाई करने और मकान खाली करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज कुमार का आरोप है कि दो अगस्त को माधुरी देवी, उनके पति रमेश और बेटे सूरज उनके घर में घुस आए। विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए उनके साथ मारपीट की गई। पत्नी के बीच-बचाव करने पर उसके साथ भी हाथापाई की गई। आरोपियों ने मकान खाली कर गांव छोड़ने की धमकी भी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, कथित जालसाजी और मारपीट के मामले में मुकदमा दर्ज करने तथा पैतृक मकान को अवैध कब्जे से सुरक्षित कराने की मांग की है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>अपराध/हादशा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 21:27:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;">  काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों</strong></h4>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181682/fake-payment-of-rs-5-crore-using-ai-photo-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781878450387.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format1"><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात संवाददाता</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>हरीश कुमार चौधरी</strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर ।</strong></div></blockquote></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जिले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में कथित तौर पर वित्तीय अनियमितता की खबरें सामने आईं हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बानगंगा बैराज की नहर प्रणाली और उससे निकलने वाली सभी नहरों में सिल्ट सफाई और ढलान घास कटाई का काम ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को सौंपा गया था।</div><div style="text-align:justify;"> काम के नाम पर सिर्फ धोखा किया गया। जहां नहर सड़क को पार करती है, वहां मात्र 100 मीटर इधर-उधर ही सफाई कराई गई। बाकी लंबी-लंबी नहरें सिल्ट भरी हुई जैसी की तैसी छोड़ दी गईं। स्थानीय निवासी जयंत्री  पाण्डेय ने यह आरोप लगाया है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर के अधिशासी अभियंता, सहायक अधिशासी अभियंता और जूनियर इंजीनियरों ने सिल्ट सफाई और अन्य कार्यों के नाम पर लगभग 5 करोड़ सरकारी धन का भारी भ्रष्टाचार और बंदरबांट किया गया है। सरकार की मंशा के उलट बड़े पैमाने पर पैसे का दुरुपयोग किया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने 12 अप्रैल 2026 को जनसुनवाई (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सहायक अभियंता चतुर्थ मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  आरोप है कि निविदा शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बिना कोई वास्तविक काम किए सरकारी धन का गबन किया गया। ट्रेजरी से अवैध भुगतान, कार्यस्थल बदलना, हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन का इस्तेमाल न करना, और AI से फर्जी फोटो जेनरेट कर विभाग को गुमराह करना मुख्य आरोप हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>कागजों पर AI से काम दिखाया, जमीन पर बदहाल है हाल</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> जयंत्री पांडेय ने कई तकनीति बिंदुओं पर सिंचाई विभाग में धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि बाणगंगा नहर प्रणाली और जमींदारी नहर प्रणाली की पट्टियों पर सड़क की गड्ढामुक्ति और नवीनीकरण का काम कागजों पर दिखाया गया लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। AI की मदद से बनाई गई तस्वीरों को असली कहकर पेश किया गया। बस्ती के अधीक्षण अभियंता, गंडक बाढ़ मंडल ने 11 सितंबर 2025 को जारी निविदा (नंबर-03/2025-26) जारी की। इसके तहत सिद्धार्थनगर जिले में नहरों और सड़कों की मरम्मत का काम 2.40 करोड़ रुपये की लागत से कराया जाना था। काम में अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, बानगंगा बैराज, अलीदापुर पश्चिमी नहर, बजहा सागर, बटुआ सागर समेत कई नहरों और नौगढ़ कालोनी के सर्विस रोड को गड्ढामुक्त करना था।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/1781878450406.jpg" alt="सिद्धार्थनगर : सिंचाई विभाग में AI  फोटो का इस्तेमाल कर 5 करोड़ का फर्जी भुगतान" width="1080" height="556"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> निर्माण स्थल की कुल लंबाई 13.9 किलोमीटर थी। काम पूरा करने की समयसीमा सिर्फ एक महीने की रखी गई थी। निविदा में साफ शर्त थी कि काम हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन से ही होना चाहिए। ठेकेदार को प्लांट अपनी या लीज पर होने का शपथ-पत्र भी देना था।सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना जमीन पर हुए किसी काम के ट्रेजरी से भुगतान पूरा कर लिया गया। वाउचर इसकी पुष्टि करते हैं कि धन उस काम के लिए निकाला गया जो जमीन पर हुआ ही नहीं। यह राजकीय धन का खुला गबन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  जयंत्री पांडेय ने इस पूरे मामले में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है।  सहायक अभियंता मालविका जैसल और अधिशासी अभियंता की मिलीभगत से बिना किसी ठोस काम के ट्रेजरी से पूरा पैसा निकाल लिया गया। वाउचर दिखाते हैं कि पैसे तो निकल गए, लेकिन जमीन पर काम हुआ ही नहीं। यह खुला गबन है। अधिशासी अभियंता के पत्रांक 1829 में निविदा में तय जगहों, अतरी माइनर, नौगढ़ माइनर, सिसवा नेउरा आदि पर काम नहीं कराया गया। अधिशासी अभियंता के एक पत्र में दूसरी जगहों का जिक्र किया गया, जिसका फायदा उठाकर असल काम स्थल पर कुछ नहीं किया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> फर्जी फोटो और AI का इस्तेमालः काम न होने के बावजूद मालविका जैसल पर आरोप है कि उन्होंने AI टूल और मोबाइल एडिटिंग से फर्जी तस्वीरें बनाईं और विभाग को गुमराह किया। इन फर्जी तस्वीरों के आधार पर भुगतान को वैध ठहराने की कोशिश की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह अनिश्चित है कि काम कहीं हुआ भी या सिर्फ कागजों पर घर की खेती कर सरकारी पैसा बांट लिया गया।जयंत्री पांडेय ने कहा है कि तकनीकी शर्तों का उल्लंघन किया गया है। निविदा शर्त 31 का खुला उल्लंघन किया गया है। बिना हॉट मिक्स प्लांट और पेवर मशीन के काम दिखाया गया। शर्त साफ थी कि काम इन्हीं मशीनों से होना है। बिना प्लांट के सड़क निर्माण तकनीकी रूप से मानकहीन है।जयंत्री पांडेय ने आरोप लगाया, 'शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्त होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने एस्टीमेट और NIT बदलकर उच्च अधिकारियों को बिना बताए काम कराया। कार्यस्थल हटने को शर्त 28 के तहत अनुबंध निरस्तीकरण और विभागीय कार्रवाई का आधार बताया गया। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नहर पट्टियों के बजाय बजट अपनी मर्जी से कहीं और खर्च करना तकनीकी अपराध है। बिना भौतिक मापन के पैसा बांट लिया गया।निविदा में जिन जगहों का जिक्र है, उनमें बटुआ सागर, बसंतपुर नहर, नौगढ़ कालोनी की पटरी, अलीदापुर पश्चिमी नहर, सिरवत कोठी, सिसवा नेउरा नहर, अतरी माइनर पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। जयंत्री पांडेय ने तस्वीरें भी साझा की हैं। बटुआ सागर में कच्चे रास्ते दिख रहे हैं, कोई मरम्मत नहीं दिख रहा है। बसंतपुर नहर पर पुरानी सड़क घास से भरी हुई है। अलीदापुर पश्चिमी नहर पर पुरानी टूटी सड़क दिख रही है। सिसवा नेउरा और अतरी माइनर पर भी कच्चे रास्ते या टूटी सड़कें हैं। फोटो में तारीखें अप्रैल 2026 की हैं, जो काम पूरा होने के बाद की स्थिति दर्शाती हैं। इन फोटो में GPS लोकेशन, एलिवेशन, समय आदि डिटेल्स मौजूद हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><h4 style="text-align:justify;"><strong>जहां सफाई का दावा किया गया, वहां घास उगी है</strong></h4><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जयंत्री पांडेय ने केवल IGRS पर ही नहीं, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और अन्य अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजी हैं।ट्रेजरी वाउचर की जांच कर अवैध भुगतान की रिकवरी मालविका जैसल द्वारा भेजी फोटो की फोरेंसिक जांच दोषी अधिकारियों पर तत्काल कठोर विभागीय और</div><div style="text-align:justify;">अनुशासनात्मक कार्रवाई विभागीय दस्तावेजों में क्या खामी गिनाई गई है?</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">ठेकेदार को कार्यस्थल की जानकारी पहले लेनी होती है। प्री-बिड मीटिंग 18 सितंबर 2025 को बस्ती में होनी थी। टेक्निकल बिड खुलने के 24 घंटे में आपत्ति ईमेल से दर्ज करानी होती है। बजट आवंटन पर ही फाइनेंशियल बिड खुलती है। यह सिर्फ एक सड़क निर्माण का मामला नहीं है। नहर पट्टियों पर बनी सड़कें सिंचाई क्षेत्र में किसानों, आम लोगों की सुविधा के लिए होती हैं। 13.9 किमी सड़क का 4.81 करोड़ का काम अगर कागजों पर रह गया तो विकास योजनाओं का पैसा बर्बाद हो रहा है। AI का इस्तेमाल फर्जी सबूत बनाने में सरकारी विभाग में नई समस्या पैदा कर रहा है। फोरेंसिक जांच जरूरी है ताकि असली और नकली फोटो में फर्क साबित हो। शिकायककर्ता का कहना है कि विभागीय मिलीभगत से ट्रेजरी भुगतान, कार्यस्थल बदले गए, शर्तों की अनदेखी की गई। ये सभी बिंदु ऐसे हैं, जिनकी विभागीय जांच होनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस मामले की शिकायत अधीक्षण अभियंता गंडक बाढ़ मंडल बस्ती, मुख्य अभियंता गोरखपुर, आयुक्त बस्ती, जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को पत्र भेज कर की गई है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><blockquote class="format2">इस पूरे प्रकरण में जांच के लिए जो टीम गठित की गई थी ।इसी मंडल के ही अधिकारी शामिल थे । जबकि शासनादेश है कि जिस मंडल का मामला होता है उस मंडल के अधिकारियों को जांच नहीं सौंपी जानी चाहिए। जिसे शासन ने संज्ञान में लेते हुए जांच टीम निरस्त कर दी और दूसरी जांच टीम गठित कर दी है। यह जांच टीम सिद्धार्थनगर कभी धमक सकती है।</blockquote></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रहीमाबाद पुलिस पर ₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप, पैसे न देने पर युवकों को उठाकर थाने में बंद करने व बदले की भावना का बेहद गंभीर आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजधानी-लखनऊ</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">राजधानी लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि रहीमाबाद पुलिस के कुछ कर्मियों ने न केवल रिश्वत की मांग की, बल्कि पैसे न देने पर निर्दोष युवकों को उठाकर थाने में बंद कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र के अनुसार, ग्राम बांक मजरा खड़ौहा, थाना रहीमाबाद निवासी नरेश पुत्र रामचंदर ने बताया कि उन्होंने पहले एक मारपीट के मामले में थाने में शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि विपक्षियों ने उनके साथ मारपीट कर गंभीर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175500/rahimabad-police-accused-of-demanding-bribe-of-%E2%82%B9-50-thousand"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-07-at-06.49.35.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजधानी-लखनऊ</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">राजधानी लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। एक पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि रहीमाबाद पुलिस के कुछ कर्मियों ने न केवल रिश्वत की मांग की, बल्कि पैसे न देने पर निर्दोष युवकों को उठाकर थाने में बंद कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र के अनुसार, ग्राम बांक मजरा खड़ौहा, थाना रहीमाबाद निवासी नरेश पुत्र रामचंदर ने बताया कि उन्होंने पहले एक मारपीट के मामले में थाने में शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि विपक्षियों ने उनके साथ मारपीट कर गंभीर चोटें पहुंचाई थीं, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय इसे एनसीआर में दर्ज कर दिया। जबकि घटना में लाठी-डंडों से हमला कर गंभीर रूप से घायल किया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />पीड़ित ने बताया कि 4 मार्च 2026 को इस मामले को एनसीआर में दर्ज किया गया, जबकि यह संगीन अपराध की श्रेणी में आता था। इसके बाद उन्होंने 13 मार्च 2026 को सहायक पुलिस आयुक्त को भी प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।<br />सबसे गंभीर आरोप 8 मार्च से जुड़ा है, जब पीड़ित के अनुसार रहीमाबाद थाने के दो पुलिसकर्मी—सुमित और शेषपाल—ने उनसे ₹50,000 की रिश्वत मांगी।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कहा कि यदि पैसा दिया जाता है तो मामले में मदद की जाएगी, अन्यथा उन्हें ही फंसाकर गंभीर धाराएं लगा दी जाएंगी। वहीं इससे पहले इन्हीं दोनों सिपाहियों की इसी पूर्व मामले में रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी, व पूर्व में इसपर खबर भी प्रकाशित हो चुकी है परन्तु अभी तक एक महीना बीत गया किसी प्रकार की कोई कारवाही नहीं हुई है l</p>
<p style="text-align:justify;"><br />वहीं पीड़ित का कहना है कि उन्होंने रिश्वत देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद 6 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 8 बजे इन्हीं दोनों पुलिसकर्मी द्वारा सादी वर्दी में उनके पुत्र नीरज और हिमांशु को सड़क से उठाकर थाने ले जाकर बंद कर दिया। इस दौरान कुछ स्थानीय लोगों—जिनमें उमा शंकर, गोलू, अर्जुन, अनिल और रानी जैसे नाम शामिल हैं—की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया है, जिन्होंने कथित रूप से पुलिस के साथ मिलकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक स्थानीय व्यक्ति, जो शराब का आदी बताया गया है, पुलिस और आम लोगों के बीच दलाली का काम करता है। आरोप है कि वही व्यक्ति पुलिसकर्मियों से मिलकर लोगों पर दबाव बनवाता है और रिश्वत की मांग करवाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि जिन असली आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए था, उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि निर्दोष युवकों को फंसाकर थाने में बंद कर दिया गया। इससे साफ होता है कि पूरे मामले में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं पीड़ित को बार बार यह दोनों ही पुलिसकर्मियों द्वारा परेशान किया जा रहा, उसको झूठे केसों में इन दोनों पुलिसकर्मी द्वारा फंसाया जा रहा है, क्या अब पुलिस पीड़ितों से बदले की कार्यवाही करेगी, बड़ा सवाल है?? अंत में पीड़ित ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जिन निर्दोष युवकों को बंद किया गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही, पूरे प्रकरण में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है और लोगों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर असंतोष देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 15:17:37 +0530</pubDate>
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