<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/70232/court-judgment-india" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Court judgment India - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/70232/rss</link>
                <description>Court judgment India RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वाराणसी 'टकसाल शूटआउट':  24 साल बाद धनंजय सिंह और अभय सिंह की अदावत पर आया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>उत्तर प्रदेश की सियासत और जरायम की दुनिया के दो बड़े नामों, धनंजय सिंह और अभय सिंह के बीच चली आ रही दो दशक पुरानी कानूनी जंग में आज वाराणसी की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कैंट थाना क्षेत्र के चर्चित 'टकसाल सिनेमा शूटआउट' मामले में विशेष न्यायालय (MP-MLA) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2002 से चले आ रहे इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे में आज फैसले की घड़ी थी। फैसला आने से पहले ही विधायक अभय सिंह</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176307/varanasi-mint-shootout-verdict-on-feud-between-dhananjay-singh-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dhananjay-singh.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>उत्तर प्रदेश की सियासत और जरायम की दुनिया के दो बड़े नामों, धनंजय सिंह और अभय सिंह के बीच चली आ रही दो दशक पुरानी कानूनी जंग में आज वाराणसी की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कैंट थाना क्षेत्र के चर्चित 'टकसाल सिनेमा शूटआउट' मामले में विशेष न्यायालय (MP-MLA) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साल 2002 से चले आ रहे इस हाई-प्रोफाइल मुकदमे में आज फैसले की घड़ी थी। फैसला आने से पहले ही विधायक अभय सिंह अपने समर्थकों के साथ कचहरी परिसर पहुंच गए थे। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए अभय सिंह (विधायक-गोसाईगंज), विनीत सिंह (एमएलसी), संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह और सत्येंद्र सिंह को दोषमुक्त करार दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना 4 अक्टूबर 2002 की शाम करीब 6 बजे की है। तत्कालीन केराकत विधायक धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ सफारी गाड़ी से एक मरीज को देखकर जौनपुर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी गाड़ी नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास पहुंची, बोलेरो सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोप था कि विधायक अभय सिंह ने अपने साथियों के साथ उतरकर ललकारा और धनंजय सिंह की गाड़ी पर अत्याधुनिक असलहों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस जानलेवा हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर और ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें इलाज के लिए सिंह मेडिकल में भर्ती कराया गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मामले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने उनके वहन पर फायरिंग किए जाने का आरोप लगाया था और इस मामले में एमएलसी विनीत सिंह, विधायक अभय सिंह समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस शूटआउट में पूर्व सांसद धनंजय सिंह के गनर और ड्राइवर को गोली लगी थी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/176307/varanasi-mint-shootout-verdict-on-feud-between-dhananjay-singh-and</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/176307/varanasi-mint-shootout-verdict-on-feud-between-dhananjay-singh-and</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 21:25:37 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/dhananjay-singh.webp"                         length="52328"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट ने पाक्सो के आरोपी को किया बरी, कहा– नाबालिग अपनी मर्जी से गई थी, परिस्थितियां देखना भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले से जुड़े एक चर्चित POCSO मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मामले में केवल पीड़िता की उम्र को आधार बनाकर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि पूरे घटनाक्रम, साक्ष्यों और परिस्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को असंगत मानते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा.</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 13 सितंबर 2022 का है. मुंगेली</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175919/high-court-acquitted-pocso-accused-and-said-%E2%80%93-the-minor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/chhattisgarh-high-court-jobs_650x400_41472110383.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले से जुड़े एक चर्चित POCSO मामले में अहम फैसला सुनाते हुए बड़ा संदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी मामले में केवल पीड़िता की उम्र को आधार बनाकर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि पूरे घटनाक्रम, साक्ष्यों और परिस्थितियों का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी है. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को असंगत मानते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया. कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा.</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला 13 सितंबर 2022 का है. मुंगेली जिले की एक नाबालिग लड़की स्कूल जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला तो पिता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. शिकायत में आशंका जताई गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है.</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के बाद विशेष POCSO कोर्ट, मुंगेली ने आरोपी दीपक वैष्णव को IPC की धारा 363 और 366 के साथ-साथ POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी माना था. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को गंभीर अपराध का दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी.</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट में आरोपी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से संपर्क था. दोनों के बीच फोन पर बातचीत होती थी और लड़की ने खुद अपनी इच्छा से आरोपी के साथ जाने का फैसला किया. दोनों ने मुंगेली, रायपुर, हैदराबाद और विजयवाड़ा जैसे शहरों की यात्रा की और करीब एक महीने तक साथ रहे. बचाव पक्ष का कहना था कि पूरे मामले में कहीं भी जबरदस्ती, दबाव या लालच के कोई साक्ष्य नहीं हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि पीड़िता नाबालिग थी, इसलिए उसकी सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं है. आरोपी ने उसे उसके माता-पिता की देखरेख से दूर ले जाकर अपराध किया है, जो सीधे तौर पर POCSO एक्ट के तहत दंडनीय है.</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से समीक्षा करने के बाद हाईकोर्ट ने साफ कहा कि “ले जाना” और “साथ जाना” दोनों अलग-अलग बातें हैं. कोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने पीड़िता को जबरदस्ती या धोखे से उसके अभिभावकों की देखरेख से दूर किया. कोर्ट के अनुसार, यदि कोई लड़की खुद अपनी मर्जी से किसी के साथ जाती है, तो केवल इसी आधार पर अपहरण का अपराध सिद्ध नहीं किया जा सकता.</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने मेडिकल जांच और FSL रिपोर्ट पर भी गौर किया. रिपोर्ट्स में जबरन शारीरिक संबंध या हिंसा के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले. इस आधार पर कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करने में विफल रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने पाया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र करीब 15 वर्ष 10 माह थी. वह नाबालिग जरूर थी, लेकिन कोर्ट ने यह भी कहा कि हर मामले में केवल उम्र के आधार पर दोष तय नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जब परिस्थितियां यह दिखाती हों कि पीड़िता अपनी इच्छा से गई थी और कोई जोर-जबरदस्ती नहीं हुई, तो ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>अन्य राज्य</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175919/high-court-acquitted-pocso-accused-and-said-%E2%80%93-the-minor</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/175919/high-court-acquitted-pocso-accused-and-said-%E2%80%93-the-minor</guid>
                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:39:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/chhattisgarh-high-court-jobs_650x400_41472110383.jpg"                         length="141748"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मतदाता सूची पर बड़ा फैसला: गुजरात हाईकोर्ट ने कहा— राज्य निर्वाचन आयोग नाम जोड़ने-हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं रखता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं है। आयोग केवल विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को ही अपनाने (प्रतिरूपित करने) का काम करता है।</p><p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक महिला ने अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में भाग लेने के लिए अपनी नामावली में नाम शामिल करने की मांग की थी। बता दें, महिला का नाम पहले प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि बाद में उसका आवेदन स्वीकार कर लिया गया।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175916/big-decision-on-voter-list-gujarat-high-court-said-%E2%80%93"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/gujarat-high-court-1764609941926.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं है। आयोग केवल विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची को ही अपनाने (प्रतिरूपित करने) का काम करता है।</p><p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक महिला ने अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में भाग लेने के लिए अपनी नामावली में नाम शामिल करने की मांग की थी। बता दें, महिला का नाम पहले प्रारंभिक सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि बाद में उसका आवेदन स्वीकार कर लिया गया।</p><p style="text-align:justify;">जस्टिस एन.एस. संजय गौड़ा और जस्टिस जे.एल. ओदेदरा की खंडपीठ ने कहा, “राज्य निर्वाचन आयोग का यह तर्क कि याचिकाकर्ता का नाम प्रारंभिक सूची प्रकाशित होने के बाद जोड़ा गया, इसलिए उसे शामिल नहीं किया जा सकता यह तर्क असंगत और निरर्थक है। आयोग का कार्य केवल विधानसभा की मतदाता सूची को अपनाना है, न कि उसमें स्वतंत्र रूप से बदलाव करना।”</p><p style="text-align:justify;">मामले के अनुसार महिला का नाम पहले संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में नहीं था, जो नगर निगम की मतदाता सूची का आधार होती है। उसने 23 मार्च, 2026 को अपना नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जिसे 1 अप्रैल, 2026 को स्वीकार कर लिया गया।</p><p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि कानूनी रूप से इसका अर्थ यह है कि महिला का नाम विधानसभा की मतदाता सूची में मान्य माना जाएगा। चूंकि नगर निगम की सूची उसी पर आधारित होती है, इसलिए उसे मतदान और चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार मिल जाता है।</p><p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि महिला का आवेदन नामांकन की अंतिम तिथि से पहले स्वीकार कर लिया गया, इसलिए उसे चुनाव में भाग लेने से वंचित नहीं किया जा सकता।</p><p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष मजबूत तरीके से साबित किया है और उसका नाम साबरमती वार्ड संख्या 4 की मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उसे चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार भी मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175916/big-decision-on-voter-list-gujarat-high-court-said-%E2%80%93</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/175916/big-decision-on-voter-list-gujarat-high-court-said-%E2%80%93</guid>
                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 21:31:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/gujarat-high-court-1764609941926.webp"                         length="42618"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अधिवक्ता समीर हत्याकांड: फांसी की सजा का फैसला सुन फीके पड़े चेहरे, 52 पेज का फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली इलाके के मोहल्ला लद्दावाला निवासी अधिवक्ता समीर सैफी (28) की सात साल पहले अपहरण के बाद हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, अदालत ने साक्ष्य खुदबुर्द करने में दिनेश को सात साल की कैद की सजा सुनाई। सभी पर कुल 15 लाख 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने फैसले में लिखा है कि हमला केवल अधिवक्ताओं</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175447/advocate-sameer-murder-case-faces-pale-after-hearing-death-sentence"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(2)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>मुजफ्फरनगर शहर कोतवाली इलाके के मोहल्ला लद्दावाला निवासी अधिवक्ता समीर सैफी (28) की सात साल पहले अपहरण के बाद हुई हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, अदालत ने साक्ष्य खुदबुर्द करने में दिनेश को सात साल की कैद की सजा सुनाई। सभी पर कुल 15 लाख 30 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। अदालत ने फैसले में लिखा है कि हमला केवल अधिवक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि एक संस्था पर हमले के समान है। एडवोकेट बार को सीधे चुनौती देने जैसा है। अधिवक्ता की हत्या न हो, इसलिए मृत्युदंड देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता समीर सैफी ने 15 अक्तूबर 2019 को अपने चैंबर का उद्घाटन किया था। इसके बाद शाम को संदिग्ध हालात में लापता हो गए थे। पिता अजहर ने गुमशुदगी दर्ज कराई। 19 अक्तूबर को भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी से उनका शव बरामद हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने अधिवक्ता के दोस्त सिंगोल अल्वी से पूछताछ की तो हत्या की वारदात का खुलासा हुआ। पुलिस ने अल्वी, उसके ड्राइवर सोनू उर्फ रिजवान, नौकर शालू उर्फ अरबाज एवं दिनेश को गिरफ्तार किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि अपहरण के बाद अधिवक्ता को भोपा रोड पर स्थित पेट्रोल पंप के पास ले गए। रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। दोनों मोबाइल कूकड़ा रोड स्थित नाले में फेंक दिए। इसके बाद शव को बोरे में बंद कर सीकरी फार्म हाउस में गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुर्गी फार्म के 40 लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में इस वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। वादी के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि छह गवाह पेश किए गए। चार अप्रैल को आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर के बकरा मार्केट निवासी सोनू उर्फ रिजवान, सिंगोल अल्वी, शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई गई। भोपा के सीकरी गांव निवासी दिनेश को सात साल कारावास की सजा हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">समीर सैफी हत्याकांड में अदालत ने शैलेंद्र जसवंत भाई बनाम स्टेट ऑफ गुजरात, माछी सिंह, बच्चन सिंह, निर्मल सिंह, धनंजय चटर्जी, शंकर लाल, त्रिवेणी बेन, मुकेश और पुरुषोत्तम केस की रुलिंग भी लिखी गई है। इनके हवाले से पूरे प्रकरण को स्पष्ट करने की कोशिश की गई ।</p>
<p style="text-align:justify;">मुजफ्फरनगर के लद्दावाला के समीर सैफी (28) की हत्या के मामले में अदालत ने करीब सात साल बाद फांसी की सजा का फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने अपने 52 पेजों के फैसले में रिश्तों में हत्या, मानवीय पहलू, अधिवक्ताओं के अधिकार और विवेचना की स्थिति पर टिप्पणी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175447/advocate-sameer-murder-case-faces-pale-after-hearing-death-sentence</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/175447/advocate-sameer-murder-case-faces-pale-after-hearing-death-sentence</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 20:26:00 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/images-%282%291.jpg"                         length="71205"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        