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                <title>Custodial violence India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Custodial violence India RSS Feed</description>
                
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                <title>दो निवाले ज्यादा मांगने के जुर्म में जेल के आला अधिकारियों ने कैदी को पेड़ से बांधकर जानवरों की तरह पीटा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिला जेल बस्ती से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जेल प्रशासन के 'सुधार गृह' वाले मुखौटे को उतार फेंका है। जेल के भीतर रक्षकों ने ही भक्षक बनकर एक कैदी पर वह कहर ढाया है जिसे सुनकर रूह कांप जाए। सिर्फ दो निवाले ज्यादा मांगने के जुर्म में जेल के आला अधिकारियों ने कैदी को पेड़ से बांधकर जानवरों की तरह पीटा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​वर्दियों के पीछे छिपे 'दरिंदे' नामजद शिकायत</strong></div>
<div style="text-align:justify;">​कैदी सूरज चौधरी की पत्नी अंजनी ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में जेल के रसूखदार अधिकारियों को बेनकाब किया है। पीड़िता ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175615/for-asking-for-two-morsels-more-top-jail-officials-tied"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260409-wa0059.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।</strong> जिला जेल बस्ती से मानवता को शर्मसार करने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने जेल प्रशासन के 'सुधार गृह' वाले मुखौटे को उतार फेंका है। जेल के भीतर रक्षकों ने ही भक्षक बनकर एक कैदी पर वह कहर ढाया है जिसे सुनकर रूह कांप जाए। सिर्फ दो निवाले ज्यादा मांगने के जुर्म में जेल के आला अधिकारियों ने कैदी को पेड़ से बांधकर जानवरों की तरह पीटा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​वर्दियों के पीछे छिपे 'दरिंदे' नामजद शिकायत</strong></div>
<div style="text-align:justify;">​कैदी सूरज चौधरी की पत्नी अंजनी ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में जेल के रसूखदार अधिकारियों को बेनकाब किया है। पीड़िता ने सीधे तौर पर जेल अधीक्षक शिव प्रताप मिश्र, डिप्टी जेलर त्रिलोकी नाथ, वंदना त्रिपाठी, रोशन आरा और सिपाही प्रदीप कुमार पर जानलेवा हमले का आरोप लगाया है। आरोप है कि इनके साथ 20 अन्य सिपाहियों ने मिलकर सूरज को 'सबक' सिखाने के नाम पर नंगा नाच किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​अमानवीय टॉर्चर पेड़ से बांधा, पाइप से पीटा और आंख में जूते मारे​शिकायत के अनुसार, सूरज का कसूर बस इतना था कि उसने भूख लगने पर थोड़े और खाने की मांग की थी। इस 'गुस्ताखी' पर भड़के अधिकारियों ने उसे पेड़ से जकड़ दिया। फिर शुरू हुआ मौत का तांडव—प्लास्टिक की पाइप (बेंत) से शरीर का कोई कोना नहीं छोड़ा गया, जूतों से चेहरे को कुचला गया और उसे तब तक मारा गया जब तक वह बेहोश होकर गिर नहीं गया। क्रूरता की हद तो तब हो गई जब उसकी आंख पर सीधे प्रहार किए गए, जिससे उसकी आंख खून से भर गई है और उसे दिखना बंद हो गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>​अपराध छिपाने के लिए 'किलेबंदी'</strong></div>
<div style="text-align:justify;">​अपनी खाल बचाने के लिए जेल प्रशासन ने अब पीड़ित कैदी को दुनिया से काट दिया है। पत्नी का आरोप है कि उसे पति से मिलने नहीं दिया जा रहा और सरकारी फोन तक बंद कर दिए गए हैं ताकि अंदर की चीखें बाहर न आ सकें। जेल की चारदीवारी के भीतर एक इंसान को इलाज के अभाव में मरने के लिए छोड़ दिया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">​प्रशासन पर सवाल: क्या यही है न्याय ​एक तरफ सरकार मानवाधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ शिव प्रताप मिश्र और उनकी टीम पर लगे ये आरोप व्यवस्था पर तमाचा हैं। पीड़िता ने गुहार लगाई है कि उसके पति को बाहर के अस्पताल में भर्ती कराया जाए, वरना वह जेल के भीतर ही दम तोड़ देगा।​अब सवाल यह है कि क्या इन वर्दीधारी 'गुंडों' पर एफआईआर होगी या प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए इस खूनी खेल पर पर्दा डालेगा?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 19:32:52 +0530</pubDate>
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                <title>पुलिस हिरासत में मौत का मामला: मदुरै कोर्ट ने नौ पुलिसकर्मियों को दिया मृत्युदंड</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:mangal, serif;">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong>मदुरै की जिला अदालत ने सोमवार को सातांकुलम में हिरासत में मौत के मामले में दोषी पाए गए नौ पुलिस कर्मियों को मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने कहा कि यह मामला 'दुर्लभतम' श्रेणी का है। इन पुलिसकर्मियों को जून 2020 में पी. जेयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में हत्या और यातना के मामले में दोषी पाया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">जज मुथुकुमारन ने कहा, यदि आम नागरिक ने यह अपराध किया होता, तो सामान्य सजा दी जा सकती थी। लेकिन अपराध पुलिस ने किया है। इसलिए साधारण सजा नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यह हिरासत में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175442/case-of-death-in-police-custody-madurai-court-gives-death"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/custody-death.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><span style="font-family:mangal, serif;">ब्यूरो प्रयागराज। </span></strong>मदुरै की जिला अदालत ने सोमवार को सातांकुलम में हिरासत में मौत के मामले में दोषी पाए गए नौ पुलिस कर्मियों को मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने कहा कि यह मामला 'दुर्लभतम' श्रेणी का है। इन पुलिसकर्मियों को जून 2020 में पी. जेयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की हिरासत में हत्या और यातना के मामले में दोषी पाया गया। </p>
<p style="text-align:justify;">जज मुथुकुमारन ने कहा, यदि आम नागरिक ने यह अपराध किया होता, तो सामान्य सजा दी जा सकती थी। लेकिन अपराध पुलिस ने किया है। इसलिए साधारण सजा नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि यह हिरासत में हिंसा का स्पष्ट उदाहरण है।</p>
<p style="text-align:justify;">साक्ष्यों से पता चला कि पिता और पुत्र को पुलिस हिरासत में बुरी तरह पीटा गया। निरीक्षक एस श्रीधर ने हमले के लिए उकसाया। जबकि, अन्य कर्मी हिंसा और उसके बाद सबूतों को छिपाने में शामिल थे। पुलिसकर्मियों पर हत्या, गंभीर चोट पहुंचाने, साक्ष्य गढ़ने और झूठे मामले दर्ज करने के आरोप शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस ने जेयराज (58 वर्षीय) और बेनिक्स (31 वर्षीय) को 19 जून 2020 को हिरासत में लिया था। उन पर कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान नियम तोड़ने का आरोप लगाया गया था। कुछ दिनों बाद उनकी कोविलपत्ती सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी। जांच में पता चला कि पुलिस हिरासत में उन्हें क्रूर यातना दी गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने फॉरेंसिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान के आधार पर साबित किया कि सातांकुलम थाने में उन पर क्रूर हमला हुआ था। थाने में पाए गए खून के धब्बे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें मुख्य साक्ष्य रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी विशेष उप-निरीक्षक पॉल्दुराई की मुकदमे के दौरान कोरोना से मौत हो गई थी। यह मामला पूरे देश में हिरासत में हिंसा और पुलिस की जवाबदेही पर बहस का केंद्र बन गया था। अब सजा सुनाए जाने के बाद मामला अंतिम चरण में प्रवेश कर गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 20:15:54 +0530</pubDate>
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