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                <title>चुनाव आयोग विवाद - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>चुनाव आयोग विवाद RSS Feed</description>
                
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                <title>बंगाल में उन सीटों पर पुनर्मतदान हो जहां जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम है: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178551/re-polling-should-be-held-in-bengal-on-those-seats-where"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/tasuezpp.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में उन सीटों पर फिर से मतदान कराया जाना चाहिए जहां जीत का अंतर एसआईआर के तहत मतदाता सूची से हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। खेड़ा ने यह उम्मीद भी जताई कि उच्चतम न्यायालय इस मामले का संज्ञान लेगा और न्याय करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस लड़ाई में ‘इंडिया’ गठबंधन तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी पर बड़े पैमाने पर जनादेश की चोरी करने, 100 से अधिक सीटों पर परिणामों में हेरफेर करने का आरोप है। यह संस्थागत चुनावी लूट है। लोकतांत्रिक संकट के इस निर्णायक क्षण में ‘इंडिया’ गठबंधन स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के साथ खड़ा है। ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का उनका संकल्प सुनियोजित हेराफेरी के खिलाफ संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा को दर्शाता है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, "...ज़रा उनके टूलकिट पर नज़र डालिए: पहले कीचड़ फैलाया जाता है; फिर कमल खिलता है। अगर आप और मैं सही समय पर नहीं जागे तो ठीक यही होगा।" खेड़ा ने आगे कहा, "...इलेक्शन कमीशन का काम था कि इस कीचड़ को फैलने से रोके, हेट स्पीच का सख्ती से जवाब दे, एक्शन ले, और शिकायतों पर ध्यान दे। इसके बजाय, खुद उसी कीचड़ में लोटकर, इलेक्शन कमीशन ने डेमोक्रेसी को तार-तार कर दिया है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन इसको लेकर एकमत है कि पश्चिम बंगाल में जो कुछ हुआ वह चुनाव परिणाम नहीं है, बल्कि हेरफेर के माध्यम से थोपा गया एक मनगढ़ंत जनादेश है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जैसे महाराष्ट्र में लक्षित करके लाखों वोट जोड़े गए थे, वैसे ही पश्चिम बंगाल और असम में 'टारगेट' कर लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल में जिन मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित रखा गया, उन सीटों पर जीत का अंतर एसआईआर के तहत हटाए गए वोटों की संख्या से कम है। यानी सबकुछ सामने है, दूध का दूध और पानी का पानी।’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘ऐसे में हमें लगता है कि उन सीटों पर दोबारा मतदान होना चाहिए, क्योंकि इनमें से बहुत से लोग अभी भी वोट के अधिकार का इंतजार कर रहे हैं। हमें उच्चतम न्यायालय पर पूरा भरोसा है कि वो संविधान को ध्यान में रखते हुए न्याय करेगा।’’</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:14:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>EVM गड़बड़ी पर ममता की सख्त चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईवीएम अनियमितताओं के आरोपों के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर मतदान मशीनों या मतगणना प्रक्रिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की कोशिश हुई, तो वह “जीने-मरने की लड़ाई” लड़ेंगी। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रांगरूम का दौरा किया, जहां भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम और मतपत्र रखे गए हैं। उन्होंने यहां तीन घंटे से अधिक समय बिताया। यह दौरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177865/mamatas-strict-warning-on-evm-glitches"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईवीएम अनियमितताओं के आरोपों के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर मतदान मशीनों या मतगणना प्रक्रिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ की कोशिश हुई, तो वह “जीने-मरने की लड़ाई” लड़ेंगी। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रांगरूम का दौरा किया, जहां भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की ईवीएम और मतपत्र रखे गए हैं। उन्होंने यहां तीन घंटे से अधिक समय बिताया। यह दौरा उस समय हुआ जब तृणमूल कांग्रेस लगातार एक वायरल वीडियो के आधार पर स्ट्रांगरूम के आसपास संदिग्ध गतिविधियों का आरोप लगा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्ट्रांगरूम से बाहर निकलने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि अगर कोई ईवीएम मशीन चुराने या मतगणना में गड़बड़ी करने की कोशिश करेगा, तो वह जान की बाजी लगाकर उसका मुकाबला करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह पूरी जिंदगी इस मुद्दे पर लड़ाई जारी रखेंगी। सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद ही उन्होंने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षाबलों ने उन्हें शुरुआत में स्ट्रांगरूम में प्रवेश से रोका। हालांकि, उम्मीदवार होने के अधिकार का हवाला देने पर उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि चुनाव नियमों के तहत उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि सीलबंद कक्ष तक जा सकते हैं। साथ ही उन्होंने प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के एक प्रतिनिधि को गिरफ्तार किया गया है और एकतरफा कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मतगणना से पहले विवाद उस समय और गहरा गया जब तृणमूल कांग्रेस ने एक वीडियो जारी कर चुनाव सामग्री के प्रबंधन में गंभीर खामियों का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि वीडियो में अधिकृत प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में मतपेटियों को खोला जा रहा है, जो नियमों का उल्लंघन है। TMC ने इस मामले में बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:42:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नारी बन्दन बिल के सहारे  बीजेपी बंगाल जीतना चाहती थी या चीन मॉडल लागू करना चाहती थी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> देश में एक तरफचुनाव का वातावरण बना था पांच राज्यों में चुनाव हो रहा था ।तीन राज्यों का चुनाव भी एक चरण में पूरा होगया है ।दो मजबूत राज्यों बंगाल और तामिलनाडु में तीन चरणों में चुनाव होने वाला है।बंगाल के चुनाव में नब्बे लाख वैध मतदान का नाम चुनाव आयोग हटा दिया है । चुनाव आयोग के इस कृत्य को देश की जनता सब देख रही है। सुन रही जान रही पर मौन है।मौन जब तुटता है तो तूफ़ान  आ जाता है । भारत की जनता  कब अपना मौन तोड़ेगी यह समय बतायेगा।पर बंगाल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176611/bjp-wanted-to-win-bengal-with-the-help-of-nari"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img_20260417_2100471.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रोफेसर अशोक कुमार </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> देश में एक तरफचुनाव का वातावरण बना था पांच राज्यों में चुनाव हो रहा था ।तीन राज्यों का चुनाव भी एक चरण में पूरा होगया है ।दो मजबूत राज्यों बंगाल और तामिलनाडु में तीन चरणों में चुनाव होने वाला है।बंगाल के चुनाव में नब्बे लाख वैध मतदान का नाम चुनाव आयोग हटा दिया है । चुनाव आयोग के इस कृत्य को देश की जनता सब देख रही है। सुन रही जान रही पर मौन है।मौन जब तुटता है तो तूफ़ान  आ जाता है । भारत की जनता  कब अपना मौन तोड़ेगी यह समय बतायेगा।पर बंगाल के चुनाव में जो भी वोटर लिस्ट में धांधली हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">  यह एक लोकतांत्रिक देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।  अपने ही नागरिकों का वोट का अधिकार छीन कर उनको विदेशी नागरिक कहना उचित नहीं है पर 2014से एक धर्म विशेष के लोगों को हर राज्य में नया नामकरण दिया गया घूसपैठिये और आज तक यानि 2014से अब तक कितने घुसपैठिए हर राज्य में मिले भारत सरकार जनता को चुनाव में नहीं बता पा रही है।  बस एक नरेटिव कि बंगाल में ममता चुनाव घुसपैठियों के वोट से जीत रही है एक धर्म के वोट से जीत रही  है उनको वोट के अधिकार से वंचित करना है । जो चुनाव आयोग सरकार का कठपुतली बन कर कर दिया। नब्बे लाख का नाम काट दिया।  अब चुनाव में वोट नहींदेगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष का आरोप सही कि देश की सभी सम्वैधानिक संस्थानों पर व  न्यायालय हो चुनाव आयोग हो ई डी सी बी आई हर पर एक पार्टी एक विचार धारा का कब्जा हो गया है।यह बात भारत के जनमानस के  साथ  विश्व के जनमानस में भी यही गुज रहा है कि 2014के बाद भारत में लोकतंत्र कमजोर होगया।  बस एक नेता एक पार्टी कीबात होनेलगी है विपक्ष कहीं जिन्दा नहीं  रहे।उसको संसद से सड़क तक लड़ने का अधिकार नहीं जब जब संसद से सड़क पर आया लड़ने उसको देशद्रोही पाक परस्त छदम सेकुलर अवसर वादी न जाने किन किन अलंकरणों से भारतीय मिडिया भाजपा का आईटी सेल सोशल मिडिया अलंकृत करता रहता है ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बंगाल के चुनाव में एक और बात बहुत दिलचप्स  हो रही की कभी ममता के विधायक रहे हुमाऊ कबीर ममता को छोड़ कर भाजपा में गये फिर वहां से सौदे बाजी करके अलग पार्टी बनाया। भाजपा ने ममता को हराने के लिए एक हजार करोड़ और उपमुख्यमंत्री के पद पर समझौता किया यह बात एक स्टिंग ऑपरेशन करके किसी ने खुलासाकर दिया  विडियो बनाकर  सोशल मिडिया में चला रहा है। मैं यह नहीं कह सकता हूं दावे के साथ की यह विडियो सही या ग़लत  है।जो सोशल मिडिया पर चल रहा उसी की बात कर रहा हूं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सच क्या है जांच हो तो सब जनता जाने ।इसी विडियो से  परेशान होकर देश की सरकार  जो हर समय बस  चुनाव में रहती हैं परेशान हो ग ई जीत का सपना जो बंगाल में  देख रही थी  काबफूर होने लगा। तब वह  एक नया गेम प्लान लेकर आई कि बीच चुनाव में ही संसद का विशेष सत्र तीन दिन का बुला लिया कि अब देश की नारी आधी आबादी शायद बंगाल जीतादे।  जो  नारी शक्ति वन्दन बिल यानि महिला आरक्षण 2023मे पास हो चुका है और 2029के चुनाव में लागू होगा  जिसमें जनगणना और परिसीमन की बात थी ।उसको बदलने के लिए ही विशेष सत्र को बुलाया जो गलत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लोकतंत्र में संख्या बल का खेल है। तो सरकार सत्ता में संसद का विशेष सत्र बुला लिया।और तीन अलग अलग बिल पेश कर दिया। 16अप्रैल से बहस चल रही है 17शाम चार बजे के बाद वोटिंग होगी  इस में भी सरकारकिस नियम से वोटिंग करायेगी।इस महिला बिल का विपक्ष समर्थन कर रहा उनका कहना है महिलाओं को आरक्षण 545सासद के वर्तमान नम्बर में से कर दिया जाये।  लेकिन भाजपा कह रही हम देश में नये राजाओं की संख्या बढायेंगे वह 850करके उस संख्या में से महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने की बात कर रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन इस आरक्षण में भी एक खेल होगया अनुसुचित जाति और अनुसूचितजन जाति को तो लिया है परन्तु पिछड़ी जाति को आरक्षण में नहीं लिया है।विपक्ष का कहना है फिर परिसीमन  नहीं हो गा तबतक जब तक  जनगणना नही हो जायेगी जनगणना जातिय आधार पर होगी उसके बाद ही महिलाओं को आरक्षण और संसदों तथा प्रदेश में विधानसभा में विधायकों की संख्या बढ़ेगी। भाजपा परिसीमन को जनगणना से नहीं जोड़ना चाहती है भाजपा कि एक मंशा यह भी होगी कि परिसीमन बिल पास कराले। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">न ई जनगणना में जातियों की गणना नहीं करायेगे यह आशंका है कि जातिय जनगणाना भाजपा नहीं करना चाहती है।अगर जातिय जन गणना देश की होगी तो बहुत कुछ देश में बदल जायेगा राजनिति का सन्तुलन भी गड़बड़ होगा फिर नारा वहीं चलेगा जिसकी जितनी सख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी ।इसी कारण से यह तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया।है या इस सत्र के परिणाम को जनता में ले जाकर सहानभूति लेने का राजनिति चाल  था।  बंगाल के चुनाव प्रचार में पता चलेगा बिल के पीछे का असली मकसद  क्या था या नकली चेहरा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी कारण भाजपा 2011या किसी भी जनगणना से किसी भी राज्य की संसदों की सख्या निर्धारित करने का एकाधिकार चाहती है। जो बहुत ग़लत है विपक्ष विरोध कर रहा यह तो निश्चित है जिस राज्य में जन संख्या कम होगी वहां सांसद कम होंगे इस बिल से उत्तर भारत में यूं पी बिहार राजस्थान  एम पी में सांसदों की संख्या बढ़ेगी और इन राज्यो  की तुलना में दक्षिण राज्यों में कम संख्या सांसदों की होगी पूर्वोत्तर राज्यों में भी कामोवेश यही होगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब एक न ई लड़ाई इस बिल से उत्तर भारत और दक्षिण भारत में शुरू होगया है यह सब एक सुनियोजित चाल से भारत में लोकतंत्र को चीनी लोकतंत्र में बदलने का कुचक्र  तो नहीं चल रहा है कि चुनाव में दो तिहाई बहुमत मिले सम्विधान बदले और चीनी राष्ट्रपति की प्रणाली बना कर  भाजपा सत्ता में सदा के लिए बनी रहे  अगर मंशा साफ होता तो  महिलाओं को आरक्षण  तो2024मे दे दिया होता। पर नारी के पीछे छिपकर देश में नया लोकतंत्र स्थापित करने की एक मंशा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परन्तु इस बिल में एक बात और है कि राज्य सभा कि सीट नहीं बढ़ाया जा रहा अनुपातिक तौर पर राज्य सभा में भी सीट बढ़े।  कारण अगर विधानसभा में हर राज्य में पचास प्रतिशत सीट बढ़ रही है तो राज्य सभा का क्योंनही बढ़ेगी। यह और तरह का खेल है कि अगर राज्य सभा में बहुमत नहीं होगा तो दोनों सदनों को मिलाकर कोई बिल‌विधेयक पास हो जायेगा विपक्ष यहां क्यौ मौन है राज्य  सभा में बढ़े पचास प्रतिशत।विपक्ष यह चाल भाजपा का समझ गया और या जाल मेंनही फंसा उस कबुतर की तरह । इस बिल से आभास हो रहा है नाम नारी शक्ति वन्दन पर खेल कुछ और है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब बंगाल का चुनाव बिल पास होगा तब भी नहीं पास होगा तब भी नारीशक्ति वन्दन के सहारे चलेगा सारा फोकस भाजपा का यही होगा  कि हम नारी सम्मान करतेहै  बिल आपके लिए शक्ति देगा नहीं पास हुआ तो  विपक्ष नारी विरोधी है यही गुंजेगा।परन्तु एक बात जो जनता को पूछना होगा अपने नेताओं से कि हम भारत के नागरिक इतने अमीर हो गये है कि 545राजा ससद के चार हजार विधानसभा के राजाओं  के ऐशो आराम के लिए जो अभी टैक्स दे रहे हैं। फिर 307सासदो और 2100 विधायको को जो बिल पास होने के बाद आयेंगे इनको पालने के लिए कितना और टैक्स देंगे लगभग हर वर्ष सभी राजाओं को पालने ऐशो आराम के लिए पन्द्रह हजार करोड़ लगेगा कहा से आयेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कैसे आयेगा क्या और टैक्स लगेगा कोई राजनेता संसद में यह बात नहीं कर रहा नहीं सत्ता पक्ष यह जनता को बता रहा हैं कि इन सभी राजाओं को पालने का खर्च किस मद से होगा बस नारी शक्ति वन्दन हो रहा है। इन राजाओं के साथ साथ देश की जनता पूर्व सांसदों विधायकों को भी पाल रही है।इनके लालनपालन पर हर वर्ष ग्यारह हजार करोड़ खर्च होता पेंशन और मुफ्त यात्रा में यह सब गरीब भारत की जनता है पांच किलो मुफ्त राशन वाले असृसी करोड़ भी इनके लालपाल में अपना योगदान दे रहे हैं।अब भारत इतना अमीर तो नहीं है कि हजारों राजाओं को अपने। जनता के टैक्स पर पाले जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">देश के उस समय अटल की सरकार ने 2003मे सरकारी कर्मचारियों का पेंशन यह कह कर बन्द कर दिया कि देश की जीडीपी पेंशन के भार को नहीं उठा पायेगी परन्तु इन राजाओं का  पेंशन वेतन मुफ्त आवास चिकित्सा यात्रा भत्ता देश  उठा रहा है।पर हम जनता मौन है। अपने लड़कों के हक में नहीं बोल रहे हैं।यह बिल जो लाया गया है देश हित में नहीं है जितनी पहले सांसदों की सख्या है उसी में से महिलाओं को आरक्षण दिया जाये सांसदों और विधायकों की सख्या न बढ़ाई जाये नहीं तो जनता कभी भी सड़क पर आयेगी तो क्या दृश्य होगा इसकी कल्पना कोई राजनेता या ज्योतिषी नहीं कर सकता है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि नये राजाओं की संख्या देश में बढ़ी तो शायद फिर देश में कोई नया गांधी सुभाष आजाद भगत बनकर जरूर आयेगा इन राज्यों से मुक्ति जनता को मिलेगी जैसे मुगलों से अग्रेजो से देशी राजाओं से मिला था उसी तरह फिर लड़ना होगा नये राजाओ को हटाने के लिए ।भाजपा का मकसद नारी के नाम को चुनाव में लेकर सत्ता तक पहुचना है। वह नारी सम्मान कितना किये है और करेंगे संसद में  दिये गये भाषण को जनता याद कर रही कि आज वही व्यक्ति नारी वन्दन कर रहा जो कभी किसी नारी को विधवा न जाने कैसे कैसे अलंकरणों से सुशोभित किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा के ऊपर जो तमाम आरोप लग रहे हैं उसी से जनता और महिलाओं के ध्यान को हटाने के लिए बंगाल तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए यह बिल लाया गया भाजपा को पता है बिल पास नहीं होगा फिर भी यह खेल किया कि चुनाव में विपक्ष को महिलाओं के विरोधी के रुप में स्थापित करके अपनी छबि को बचाने का नया कुचक्र  है।विपक्ष जब मांग कर रहा था कि ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर बहस के लिए विशेष संसद का सत्र बुलाने की मांग नहीं माना और चर्चा नहीं हुआ वह ईरान पर मौन बस इजरायल अमेरिका के साथ खड़े हैं अब क्यों अमेरिका इजरायल के साथ है यह कूटनिती की कोई भाषा होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कल संसद में मोदी गारंटी दे रहे थे बिल की पर शायद वह हर चुनाव में गारंटी देते आरहे है क्यो पूरा नहीं हुआ दोकरोड रोजगार बिहार में उघोग सौ स्मार्ट सीटी सब कहां  है।अब तो बिल पास नहीं हुआ। यह जो बिल गिरा भारत बच गया अगर बिल पास होगया होता तो 2029मेका आखिरी चुनाव होता या 2027मे मध्यावधि चुनाव कराकर सम्विधान बदले देते की भारत में एक दलित प्रणाली ही होगी।पर विपक्ष की गजब की एक जुटता कल देखने को मिला बिल गिर गया देश बच गया।अब  पांच राज्योचुनाव परिणाम का इन्तजार करे वैसे महंगाई के लिए भी जनता कमर कस ले।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">29अप्रैल शाम पांच बजे देश का मौसम गुलाबी होगा जब तेल के दाम बढ़ेंगे यानही बढ़ेंगे  तब भी  भी मौसम गुलाबी रहेगा कारण पांच राज्यों का एक्जिट पोल पर बहस होगी कौन मुख्य मंत्री बनेगा तमाम बातें होंगी फिर लोग नारी शक्ति वन्दन भूल जायेंगे। इस माडल को हराने में दक्षिण के राज्य तृणमूल कांग्रेस के सहयोग की सराहना होनी चाहिए भाजपा समर्थक ससद दक्षिण के जो थे जनता उनसे हिसाब ले क्यों दक्षिण से धोखा किया।।अभी इसे जीत न माने न खुशी माने यह तो बस आरम्भ है।अभी सत्ता से विपक्ष को और लड़ना होगा जनता को भी  लड़ना होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 19:55:11 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के 193 सांसदों द्वारा पेश किए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव के सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद इसे अस्वीकार कर दिया। यह फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए बड़ी राहत है।</p>
<p style="text-align:justify;">12 मार्च 2026 को राज्यसभा के 63 सदस्यों द्वारा एक प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था। यह नोटिस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175440/impeachment-motion-against-chief-election-commissioner-gyanesh-kumar-rejected"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के 193 सांसदों द्वारा पेश किए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव के सभी पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद इसे अस्वीकार कर दिया। यह फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए बड़ी राहत है।</p>
<p style="text-align:justify;">12 मार्च 2026 को राज्यसभा के 63 सदस्यों द्वारा एक प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था। यह नोटिस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) तथा जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 के प्रावधानों के तहत दिया गया था। इस प्रस्ताव के जरिए भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा सभापति ने नोटिस पर विचार करने के बाद और सभी संबंधित पहलुओं व मुद्दों का सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष आकलन करने के उपरांत इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। सभापति ने यह निर्णय जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3 के तहत उन्हें प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया। इस फैसले के साथ ही ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से जुड़ी यह प्रक्रिया फिलहाल समाप्त हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि विपक्ष ने लोकसभा और राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था। विपक्ष के कुल 193 सांसदों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। विपक्ष ने उन पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया था। उनके खिलाफ सात गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें दफ्तर में पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया, दुर्व्यवहार, चुनावी धोखाधड़ी और वोट देने का अधिकार छीनना जैसे आरोप थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 20:11:10 +0530</pubDate>
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