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                <title>मध्य पूर्व संकट - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>मध्य पूर्व संकट RSS Feed</description>
                
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                <title>युद्ध के मुहाने से लौटी दुनिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया कभी-कभी ऐसे मोड़ों पर आ खड़ी होती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक निर्णय पूरी सभ्यता के भविष्य को बदल सकता है। हाल के घटनाक्रम में यही स्थिति तब बनी जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया। वातावरण इतना तनावपूर्ण था कि किसी भी क्षण युद्ध का विस्तार एक बड़े विनाश में बदल सकता था। अमेरिका की सेना और उसके रक्षा तंत्र पूरी तरह तैयार थे और संकेत का इंतजार कर रहे थे कि कब हमला शुरू किया जाए। दूसरी ओर ईरान भी अपनी रक्षा और जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार बैठा था। यह</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175592/the-world-returned-from-the-edge-of-war"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas6.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया कभी-कभी ऐसे मोड़ों पर आ खड़ी होती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ एक निर्णय पूरी सभ्यता के भविष्य को बदल सकता है। हाल के घटनाक्रम में यही स्थिति तब बनी जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच गया। वातावरण इतना तनावपूर्ण था कि किसी भी क्षण युद्ध का विस्तार एक बड़े विनाश में बदल सकता था। अमेरिका की सेना और उसके रक्षा तंत्र पूरी तरह तैयार थे और संकेत का इंतजार कर रहे थे कि कब हमला शुरू किया जाए। दूसरी ओर ईरान भी अपनी रक्षा और जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार बैठा था। यह केवल दो देशों का संघर्ष नहीं रह गया था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे क्षेत्र और विश्व व्यवस्था के लिए एक गंभीर संकट बन चुका था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए बड़े पैमाने पर हमले की चेतावनी दे दी थी। यदि यह हमला होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो ईरान के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँच सकता था। इसके परिणामस्वरूप ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो पूरे मध्यपूर्व को युद्ध की आग में झोंक सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम में आम लोगों की स्थिति सबसे अधिक भयावह थी। ईरान के भीतर लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में निकलने लगे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि खाड़ी क्षेत्र के देश भी संभावित हमलों से बचने की तैयारी कर रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसी बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेजी से चल रहे थे। कई देशों ने इस संकट को टालने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इन प्रयासों का उद्देश्य था कि किसी तरह दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहे और युद्ध टल सके। ईरान की ओर से एक प्रस्ताव सामने आया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें कई शर्तें रखी गई थीं। शुरू में इस प्रस्ताव को स्वीकार्य नहीं माना गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बातचीत की प्रक्रिया जारी रही। धीरे-धीरे यह स्पष्ट होने लगा कि दोनों पक्ष युद्ध से बचना चाहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भले ही सार्वजनिक रूप से वे कठोर रुख अपनाए हुए हों।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद अनिश्चित और उलझी हुई थी। अमेरिका के भीतर भी यह स्पष्ट नहीं था कि अंतिम निर्णय क्या होगा। स्वयं उसके नेतृत्व के करीबी लोगों को भी यह अंदाजा नहीं था कि अगला कदम क्या होगा। एक ओर कठोर बयान दिए जा रहे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी ओर बातचीत के रास्ते खुले रखे जा रहे थे। यह द्वंद्व इस बात को दर्शाता है कि आधुनिक राजनीति में शक्ति और कूटनीति दोनों साथ-साथ चलते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान के भीतर भी निर्णय लेने की प्रक्रिया जटिल थी। वहाँ की सत्ता संरचना में अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व के हाथ में होता है। इस कारण अंतिम सहमति मिलने में समय लगा। लेकिन जब अंततः समझौते की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत मिला</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो बातचीत ने तेजी पकड़ ली। बताया जाता है कि यह निर्णय आसान नहीं था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसमें सैन्य नेतृत्व और अन्य शक्तिशाली संस्थाओं को भी सहमत करना पड़ा। इसके बावजूद यह कदम उठाया गया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो इस बात का संकेत है कि युद्ध की कीमत दोनों पक्ष समझ रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अंततः जो समझौता सामने आया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वह स्थायी शांति नहीं बल्कि अस्थायी विराम था। दोनों पक्षों ने कुछ समय के लिए संघर्ष रोकने पर सहमति जताई। इस समझौते के तहत समुद्री मार्ग को फिर से खोलने और आगे की बातचीत जारी रखने का रास्ता बनाया गया। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इस मार्ग से विश्व का बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति पर निर्भर करता है। यदि यह बंद रहता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हालाँकि यह समझौता होने के बाद भी स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई। कई जगहों पर संघर्ष जारी रहने की खबरें सामने आईं और इस बात को लेकर भी मतभेद रहे कि समझौते की शर्तें क्या हैं और उनका पालन कैसे किया जाएगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल एक अस्थायी राहत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">न कि स्थायी समाधान। दोनों पक्षों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिन पर अभी भी गहरे मतभेद हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे परमाणु कार्यक्रम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम से एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों से नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कूटनीति से भी लड़े जाते हैं। कई बार पर्दे के पीछे होने वाली बातचीत ही युद्ध को टाल देती है। इस मामले में भी अंतिम क्षणों में हुई बातचीत ने एक बड़े विनाश को रोक दिया। यदि यह बातचीत विफल हो जाती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस संकट में कई देशों ने सक्रिय भूमिका निभाई। यह दर्शाता है कि आज की दुनिया में कोई भी बड़ा संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहता। उसका प्रभाव वैश्विक होता है और उसे सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक होता है। इसी सहयोग ने इस बार भी युद्ध को टालने में मदद की।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह शांति स्थायी होगी। इतिहास बताता है कि अस्थायी समझौते अक्सर स्थायी समाधान में बदलने में सफल नहीं होते। जब तक मूल कारणों का समाधान नहीं होता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक संघर्ष की संभावना बनी रहती है। इस मामले में भी कई ऐसे मुद्दे हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका समाधान अभी बाकी है। यदि इन पर सहमति नहीं बनती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो भविष्य में फिर से तनाव बढ़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अंत में यह कहा जा सकता है कि यह घटना केवल एक राजनीतिक या सैन्य घटनाक्रम नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि यह मानवता के लिए एक चेतावनी भी है। यह दिखाती है कि दुनिया कितनी तेजी से विनाश के करीब पहुँच सकती है और किस तरह अंतिम क्षणों में लिया गया एक निर्णय सब कुछ बदल सकता है। यह भी स्पष्ट होता है कि शांति केवल शक्ति से नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संवाद और समझ से संभव है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" xml:lang="en-us"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी गंभीर क्यों न हों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि बातचीत के रास्ते खुले रहें तो विनाश को टाला जा सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि दोनों पक्ष अपने मतभेदों को समझदारी से सुलझाने की इच्छा रखें। यही इस घटना का सबसे बड़ा संदेश है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:48:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पहले सभ्यता मिटाने की धमकी और फिर ईरान को रिकंस्ट्रक्शन में मदद का वादा, 24 घंटे में ट्रंप के पलटने की पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महज 24 घंटे पहले ईरान को नेस्तनाबूद करने की धमकी दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान उनकी बात नहीं मानता, तो “मंगलवार रात पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।“ उनके इस बयान से पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बन गया था। लेकिन ट्रंप अब ईरान के पुनर्निर्माण में मदद की बात कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में युद्धविराम समझौते को ‘‘विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन’’ घोषित किया और कहा कि अमेरिका ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के यातायात की भीड़ को कम करने में मदद</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175576/first-the-threat-of-destroying-civilization-and-then-the-promise"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/top_news_today_1775567346779_1775567356175.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महज 24 घंटे पहले ईरान को नेस्तनाबूद करने की धमकी दे रहे थे। उन्होंने कहा था कि अगर ईरान उनकी बात नहीं मानता, तो “मंगलवार रात पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।“ उनके इस बयान से पूरी दुनिया में दहशत का माहौल बन गया था। लेकिन ट्रंप अब ईरान के पुनर्निर्माण में मदद की बात कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में युद्धविराम समझौते को ‘‘विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन’’ घोषित किया और कहा कि अमेरिका ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के यातायात की भीड़ को कम करने में मदद करेगा।’’ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘बहुत सारे सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे!’’</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, ‘‘इससे खूब आय होगी। ईरान पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू कर सकता है। हम हर तरह की आपूर्ति लेकर जाएंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए वहीं मौजूद रहेंगे कि सब कुछ ठीक से चले। मुझे पूरा भरोसा है कि ऐसा ही होगा।’’</p>
<p style="text-align:justify;">ट्रंप की ‘ट्रुथ सोशल’ वेबसाइट पर दिए गए संदेश से वाशिंगटन की इस चिंता का संकेत मिलता है कि ईरान फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने पर अपना नियंत्रण बनाए हुए है, जिससे शांति काल में कुल तेल और प्राकृतिक गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि यह यू-टर्न सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि  राजनीतिक भी हो सकता है। अमेरिका में चुनावी माहौल गर्म है और इस जंग के कारण ट्रंप की लोकप्रियता पर असर पड़ा है। ऐसे में शांति का संदेश देना उनके लिए फायदेमंद हो सकता है। दूसरी तरफ, ईरान भी लगातार दबाव में था। आर्थिक संकट, सैन्य नुकसान और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उसे भी बातचीत का रास्ता अपनाना पड़ा।राजनीतिक विश्लेषण सेवा</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दावा किया कि आज (मंगलवार) रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी। ट्रंप ने ट्रुथ पोस्ट में लिखा कि "आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही ट्रंप ने विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वो इसकी ख्वाहिश नहीं रखते। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद हो जाए।" फिर दावा किया कि अब ईरान में पूर्ण सत्ता परिवर्तन की गुंजाइश है। उनके मुताबिक, इस बदलाव के साथ ही सत्ता पर ज्यादा होशियार और कम रेडिकल सोच वाले लोग काबिज होंगे। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि अगर ऐसा हुआ तो "शायद कुछ बहुत ही शानदार हो जाए।" ट्रंप ने अपनी बातों को विराम देते हुए कहा- आज की रात दुनिया के इतिहास की एक बहुत बड़ी और खास पल साबित हो सकती है। पिछले 47 साल से चल रहे दमन, भ्रष्टाचार और हिंसा का अंत हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>WORLD NEWS</category>
                                            <category>Featured</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 22:04:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बहुत आपत्तिजनक हैं ट्रंप के असंयमित असभ्य बयान </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रम्प इन दिनों काफी असंयमित भाषा बोल रहे हैं। अमेरिकी नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को धमकाते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया. ट्रंप ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और पुलों पर हमले की चेतावनी दी. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा… होर्मुज स्ट्रेट खोलो, नहीं तो नर्क में जीओगे.'यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस सप्लाई रूट्स में से एक है,</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जो फरवरी के अंत में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175393/trumps-uncontrolled-rude-statements-are-very-objectionable"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/c0eb6ec0-68a6-11f0-83d0-5d68283eb47c.jpg.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डोनाल्ड ट्रम्प इन दिनों काफी असंयमित भाषा बोल रहे हैं। अमेरिकी नेताओं ने डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर गहरी चिंता जताई है, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान को धमकाते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया. ट्रंप ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और पुलों पर हमले की चेतावनी दी. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट और ब्रिज डे होगा… होर्मुज स्ट्रेट खोलो, नहीं तो नर्क में जीओगे.'यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस सप्लाई रूट्स में से एक है,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से लगभग बंद है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. ट्रंप ने होर्मुज को लेकर ईरान को कई बार धमकी दी है और इस समुद्री मार्ग को खोलने का अल्टीमेटम दे चुके हैं. उन्होंने होर्मुज को खोलने में अमेरिका की मदद नहीं करने के लिए यूरोपीय व नाटो सहयोगियों पर भी नाराजगी जताई है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रंप ने यहां तक चेतावनी दी कि अमेरिका नाटो से बाहर निकल सकता है. अपने इस पोस्ट में ट्रंप ने ईरान के लिए ऐसे अपशब्दों का इस्तेमाल किया, जिसकी किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष से उम्मीद नहीं की जाती. हालांकि हम जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप पर कभी कोई मुकदमा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दर्ज होगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता। लेकिन इस समय उनकी भाषा में जो गिरावट स्पष्ट स्पष्ट परिलक्षित है, कम से कम उसका विश्व समुदाय को विरोध करना चाहिए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल ईरान पर अमेरिका और इजरायल को जंग छेड़े छह सप्ताह हो चुके हैं, जिसमें कई बार जीत का दावा करने के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप जीत के लक्षण नहीं दिखा पाए। बल्कि बार-बार युद्धविराम की अवधि को बदलते हैं और साथ ही उनकी धमकियां भी बदल रही हैं। ईरान में सत्ता परिवर्तन के ऐलान से शुरु हुआ यह युद्ध अब नागरिकों को निशाने पर लेने की धमकियों पर उतर आया है। रविवार को ईस्टर के मौके पर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टूथ पर ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि 48 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग खोलो वर्ना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो।</div>
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<div style="text-align:justify;">ट्रंप ने लिखा कि मंगलवार को ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर व्यापक हमले हो सकते हैं, और इसे संघर्ष का निर्णायक क्षण बताया। लेकिन यह सब इसी तरह की शालीन भाषा में नहीं लिखा गया, बल्कि उन्होंने अपशब्दों का इस्तेमाल किया। और यह पहली बार नहीं है कि ट्रंप ने इस तरह सार्वजनिक तौर पर अपशब्द कहे हों। इससे पहले उन्हें पत्रकारों से चर्चा के दौरान या भाषण देते हुए भी अपशब्द बोलते देखा गया है। यह किसी लिहाज से स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और वैश्विक नेताओं को खुलकर इसकी भर्त्सना करना चाहिए। नरेन्द्र मोदी से इसकी शुरुआत हो तो कितना अच्छा रहेगा।</div>
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<div style="text-align:justify;">अमेरिकी सीनेट के सदस्य और डेमोक्रेटिक पार्टी के ​वरिष्ठ नेता चक शूमर ने ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान को 'एक असंतुलित व्यक्ति की बकवास बताया'. उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह रवैया अमेरिका के सहयोगियों को उससे दूर कर रहा है. उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति के हालिया बयान को युद्ध अपराध की धमकी देने जैसा बताया. ट्रंप की पूर्व सहयोगी मार्जरी टेलर ग्रीन ने भी उनके बयान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति 'पागलपन' की स्थिति में हैं. उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के लोगों से दखल देने की अपील की. टेलर ग्रीन ने कहा कि यह युद्ध बिना उकसावे के शुरू किया गया और इससे निर्दोष लोगों की जान जा रही है.</div>
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<div style="text-align:justify;">वैसे संयुक्त राष्ट्र में  ईरानी ई मिशन ने ट्रंप की की नवीनतम टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में' नागरिकों के जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने' की धमकी दे रहे हैं। मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, 'यदि संयुक्त राष्ट्र की अंतरात्मा जीवित होती, तो वह युद्ध भड़काने तो वह युद्ध भड़काने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की खुली और बेशर्म धमकी पर चुप नहीं रहती। ट्रंप इस क्षेत्र को एक अंतहीन युद्ध में घसीटना चाहते हैं।' इसमें कहा गया, 'यह नागरिकों को आतंकित करने के लिए प्रत्यक्ष और सार्वजनिक उकसावा है और युद्ध अपराध करने के इरादे का स्पष्ट प्रमाण है।'</div>
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<div style="text-align:justify;">इसमें आगे कहा गया- 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सभी राज्यों का यह कानूनी दायित्व है कि वे युद्ध अपराधों के ऐसे जघन्य कृत्यों को रोकें। उन्हें अभी कार्रवाई करनी चाहिए। कल बहुत देर हो जाएगी।' वहीं ईरानी संसद के अध्यक्ष गलिबाफ ने कहा कि ट्रंप के 'लापरवाह कदमों से अमेरिका के हर परिवार को एक जीती-जागती नरक में धकेला जा रहा है, हमारा पूरा क्षेत्र जल उठेगा क्योंकि आप नेतन्याहू के आदेशों का पालन करने पर अड़े हैं।' गुलिबाफ के इस बयान से असहमत होने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि ट्रंप जिस तरह अपने बयान बदल रहे हैं, उसमें यही लगता है कि पटकथा कोई और लिख रहा है, केवल संवाद अदायगी ट्रंप की है। क्योंकि अपशब्द वाले बयान के बाद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के एक पत्रकार से कहा, मुझे लगता है कि सोमवार को समझौता होने की अच्छी संभावना है, वे (ईरान) अभी बातचीत कर रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">तो ट्रंप को लगता है कि ईरान अब भी उनसे बात कर समझौता करेगा, जबकि ईरान की सबसे बड़ी सैन्य कमांड यूनिट खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने कहा, 'अगर आम लोगों पर हमले दोहराए गए, तो हमारे अगले हमले और जवाबी कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और बड़े पैमाने पर होंगे।' ध्यान देने वाली बात यह है कि ईरान केवल धमका नहीं रहा है, अपनी बात पर अमल भी कर रहा है। </div>
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<div style="text-align:justify;">अमेरिका का साथ देने वाले खाड़ी देशों समेत इजरायल पर ईरान के हमलों को कोई रोक नहीं पा रहा है, वहीं अमेरिका के लड़ाकू विमानों पर हुए हमले और एक अमेरिकी पायलट के लापता होने की घटना ने भी जाहिर कर दिया है कि अमेरिका उतना भी ताकतवर देश नहीं है, जितना बड़ा उसका हौव्वा खड़ा किया गया है। ईरान की पहाड़ियों में लापता पायलट को बचाने का दावा ट्रंप ने किया है, हालांकि ईरान ने कहा है कि उसने बचाव के लिए आए सैन्य दस्ते पर भी हमला किया है। अब किसका दावा सही है और किसका गलत, यह तय नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना तो नजर आ ही रहा है कि इस युद्ध में अमेरिका को वैसी ही चोट पड़ रही है, जो पहले इराक, अफगानिस्तान, क्यूबा और वियतनाम में पड़ चुकी है।</div>
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<div style="text-align:justify;">आपको पता है कि 2019 में ट्रंप ने खुद एक पोस्ट में प. एशिया में अमेरिका की सैन्य दखलंदाजी और युद्ध को गलत ठहराया था, क्योंकि उसमें अरबों डॉलर खर्च हुए और सैनिकों का नुकसान हुआ। लेकिन अब संभवतः एपस्टीन फाइल्स के खुलासे के दबाव में ट्रंप ने पूरी दुनिया को युद्ध की बर्बादी में झोंक दिया है। अपनी गलती मानने की जगह रोजाना बेतुके, निर्लज्ज बयानों से उसे सही भी ठहरा रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">ईरान में परमाणु हथियार और सत्ता बदलने के नाम पर शुरु किया गया युद्ध मीनाब की मासूम बच्चियों का कातिल बना और उसके बाद ईरान की अधोसंरचना पर हमले ही किए जा रहे हैं, कम से कम 30 विश्वविद्यालयों और कई अस्पतालों, दवा कारखानों को बारुद से ढेर कर दिया गया है। यह सीधे-सीधे मानवता के खिलाफ अपराध है, जिसे रोकने के लिए वैश्विक समुदाय को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।</div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:20:36 +0530</pubDate>
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