<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/69800/healthy-life" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>स्वस्थ जीवन - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/69800/rss</link>
                <description>स्वस्थ जीवन RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी हर काम से नहीं हटती पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        </div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1"><strong>महराजगंज/रायबरेली:</strong></blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां बढ़ती उम्र के साथ अधिकांश लोग दूसरों के सहारे जीवन व्यतीत करने लगते हैं, वहीं विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत सुल्तानपुर निवासी 90 वर्ष से अधिक आयु की बुजुर्ग मां पुरबिन आज भी अपनी मेहनत, आत्मनिर्भरता और अदम्य जीवटता से नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी दिनचर्या किसी युवा महिला से कम नहीं है। घर के लगभग सभी काम वह स्वयं करती हैं और अपनी सक्रिय जीवनशैली से यह साबित कर रही हैं कि, इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र केवल एक संख्या बनकर रह जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">      आपको बता दें कि, मां पुरबिन का परिवार भरा-पूरा है। उनके एक पुत्र संतलाल लोधी हैं, जो वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं, जबकि उनकी दो बेटियां विवाह के बाद अपने-अपने परिवारों में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रही हैं। परिवार में बहू, दो नाती, दो नातिन और दो पनाती भी हैं। परिवार के सभी सदस्य उनका सम्मान करते हैं और उनकी देखभाल के लिए तत्पर रहते हैं, फिर भी मां पुरबिन आत्मनिर्भर जीवन जीना ही पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         बुजुर्ग मां पुरबिन की एक विशेष इच्छा भी है। वह चाहती हैं कि, अपने जीवनकाल में अपने एक अविवाहित नाती का विवाह अपनी आंखों से देखें। यही इच्छा उनके जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">         उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी दिनचर्या आज भी बेहद सक्रिय है। वह घर में झाड़ू लगाने से लेकर भोजन बनाने तक के सभी कार्य स्वयं करती हैं। पशुओं की देखभाल, गाय-भैंस का दूध निकालना, खैलर चलाकर मट्ठा तैयार करना, गोबर उठाना, चावल साफ करना तथा अपने हाथों से आटा गूंधकर मिट्टी के चूल्हे पर रोटियां बनाना उनके रोजमर्रा के कार्यों में शामिल है। उम्र के प्रभाव से उनकी कमर भले ही झुक गई हो, लेकिन उनके हौसले और कार्य करने की क्षमता में आज भी कोई कमी दिखाई नहीं देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        ग्रामीण परिवेश में सादगीपूर्ण जीवन, नियमित शारीरिक श्रम और अनुशासित दिनचर्या को ही वह अपनी अच्छी सेहत का राज मानती हैं। उनका कहना है कि, शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए लगातार काम करना जरूरी है। यही कारण है कि, परिवार के मना करने के बावजूद वह स्वयं अपने काम करना पसंद करती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन बताती हैं कि, उनका बेटा ग्राम प्रधान होने के नाते उन्हें आराम करने की सलाह देता है, लेकिन वह मानती हैं कि, निष्क्रियता शरीर को कमजोर बना देती है। इसलिए वह अपने दैनिक कार्यों को ही व्यायाम और स्वास्थ्य का आधार मानती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आज के समय में, जब कम उम्र में ही लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, मां पुरबिन की जीवनशैली समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आती है। उनकी मेहनत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता यह सिखाती है कि, नियमित श्रम, सकारात्मक सोच और सक्रिय जीवनशैली इंसान को लंबे समय तक स्वस्थ, सक्षम और आत्मविश्वासी बनाए रख सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        मां पुरबिन की यह प्रेरणादायी कहानी न केवल ग्रामीण महिलाओं के लिए बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए एक मिसाल है। उनकी जीवटता और कर्मशीलता को देखकर सहज ही कहा जा सकता है कि, उम्र भले ही 90 पार कर जाए, लेकिन हौसले जवान हों तो जीवन की रफ्तार कभी नहीं थमती।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टेक्नोलॉजी</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>लाइफस्टाइल</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181678/purbin-an-elderly-mother-of-more-than-90-years-of</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 22:17:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/img-20260619-wa0383.jpg"                         length="160937"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुद्ध आहार से स्वस्थ जीवन और धर्म साधना का मार्ग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मानव जीवन को यदि गहराई से समझा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि शरीर केवल भोग का साधन नहीं बल्कि धर्म साधना का आधार है। प्राचीन वचनों में कहा गया है कि शरीर ही धर्म का पहला साधन है। जब तक शरीर स्वस्थ और समर्थ है तभी तक मनुष्य अपने कर्तव्यों का पालन कर सकता है और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसलिए शरीर की रक्षा और उसका संतुलन बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का प्रथम दायित्व बन जाता है। इसी संदर्भ में आहार का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जैसा आहार होगा वैसा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175391/path-to-healthy-life-and-religious-practice-through-pure-diet"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/path-to-spiritual-nourishment.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मानव जीवन को यदि गहराई से समझा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि शरीर केवल भोग का साधन नहीं बल्कि धर्म साधना का आधार है। प्राचीन वचनों में कहा गया है कि शरीर ही धर्म का पहला साधन है। जब तक शरीर स्वस्थ और समर्थ है तभी तक मनुष्य अपने कर्तव्यों का पालन कर सकता है और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसलिए शरीर की रक्षा और उसका संतुलन बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का प्रथम दायित्व बन जाता है। इसी संदर्भ में आहार का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जैसा आहार होगा वैसा ही विचार और व्यवहार भी होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज के समय में आहार को लेकर अनेक प्रकार की भ्रांतियां समाज में फैली हुई हैं। कुछ लोग यह मानते हैं कि शरीर को बलवान बनाने के लिए मांसाहार आवश्यक है। यह धारणा केवल अज्ञान और भ्रम का परिणाम है। वास्तव में मनुष्य एक विवेकशील प्राणी है और उसकी शारीरिक संरचना भी इस बात की ओर संकेत करती है कि वह शाकाहार के लिए अधिक उपयुक्त है। शाकाहार न केवल शरीर को आवश्यक पोषण देता है बल्कि मन को भी शुद्ध और शांत बनाए रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इतिहास और परंपरा के अनेक उदाहरण इस सत्य को प्रमाणित करते हैं कि शाकाहार अपनाकर भी व्यक्ति अत्यंत शक्तिशाली और तेजस्वी बन सकता है। हमारे देश के अनेक महापुरुषों ने शाकाहार को अपनाकर न केवल आत्मिक ऊंचाई प्राप्त की बल्कि समाज को भी दिशा दी। उनके जीवन से यह स्पष्ट होता है कि शुद्ध आहार केवल शरीर को ही नहीं बल्कि आत्मा को भी पवित्र करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आहार के विषय में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल क्या खाया जाए यह ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि कितना और कैसे खाया जाए यह भी उतना ही आवश्यक है। हिताहार मिताहार और अल्पाहार का सिद्धांत हमें यह सिखाता है कि भोजन संतुलित और संयमित होना चाहिए। अधिक भोजन शरीर को रोगी बनाता है जबकि संतुलित भोजन शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखता है। जो व्यक्ति अपने आहार पर नियंत्रण रखता है वह स्वयं ही अपना वैद्य बन जाता है और उसे बार बार चिकित्सा की आवश्यकता नहीं पड़ती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आधुनिक जीवन शैली में आहार की शुद्धता धीरे धीरे समाप्त होती जा रही है। बाजार में मिलने वाली अनेक वस्तुएं देखने में तो आकर्षक होती हैं लेकिन उनमें ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जो शाकाहार की श्रेणी में नहीं आते। कई बार लोग अनजाने में ऐसी वस्तुओं का सेवन कर लेते हैं जो उनके सिद्धांतों के विपरीत होती हैं। इसलिए आज के समय में सजगता अत्यंत आवश्यक हो गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हर व्यक्ति को यह जानने का प्रयास करना चाहिए कि वह जो खा रहा है वह वास्तव में शुद्ध है या नहीं। इसके साथ ही जल और वायु की शुद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। शुद्ध हवा जीवन का आधार है और उसके बाद जल का स्थान आता है। भोजन तीसरे स्थान पर आता है। यदि वायु और जल शुद्ध नहीं होंगे तो उत्तम भोजन भी शरीर को पूर्ण लाभ नहीं दे पाएगा। इसलिए स्वस्थ जीवन के लिए इन तीनों का संतुलन आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज विश्व में जो अशांति और असंतुलन देखने को मिल रहा है उसका एक कारण आहार में आया परिवर्तन भी है। तामसिक भोजन मन में उग्रता और असंयम को बढ़ाता है जबकि सात्विक भोजन शांति और संतुलन को प्रोत्साहित करता है। यदि समाज को शांत और संतुलित बनाना है तो आहार की शुद्धता पर ध्यान देना अनिवार्य है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं में भी खानपान की आदतों में तेजी से बदलाव आ रहा है। आकर्षक विज्ञापन और आधुनिक जीवन शैली के प्रभाव में आकर वे ऐसी वस्तुओं का सेवन करने लगे हैं जो उनके स्वास्थ्य और संस्कार दोनों के लिए हानिकारक हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए परिवार और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करना होगा। बच्चों को प्रारंभ से ही शुद्ध और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शाकाहार केवल एक खानपान की पद्धति नहीं है बल्कि यह एक जीवन दर्शन है। यह हमें दया करुणा और अहिंसा का संदेश देता है। जब हम शाकाहार अपनाते हैं तो हम केवल अपने शरीर की रक्षा नहीं करते बल्कि अन्य जीवों के प्रति भी संवेदना प्रकट करते हैं। यही संवेदना आगे चलकर समाज में प्रेम और सौहार्द का वातावरण बनाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल विचारों तक सीमित न रहें बल्कि व्यवहार में भी परिवर्तन लाएं। शुद्ध आहार को अपनाकर हम अपने जीवन को स्वस्थ और संतुलित बना सकते हैं। इसके साथ ही समाज में भी जागरूकता फैलाकर एक सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। यदि हम सभी मिलकर इस दिशा में प्रयास करें तो एक ऐसा समाज निर्मित हो सकता है जिसमें शांति संतुलन और करुणा का वास हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि शुद्ध आहार ही स्वस्थ जीवन और धर्म साधना का आधार है। शरीर की रक्षा और उसकी पवित्रता बनाए रखने के लिए हमें अपने आहार पर विशेष ध्यान देना होगा। यही मार्ग हमें न केवल शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करेगा बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी ले जायगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175391/path-to-healthy-life-and-religious-practice-through-pure-diet</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/175391/path-to-healthy-life-and-religious-practice-through-pure-diet</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:14:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/path-to-spiritual-nourishment.png"                         length="2456247"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        