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                <title>ऊर्जा सुरक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ऊर्जा सुरक्षा RSS Feed</description>
                
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                <title>बढ़ती कीमतों से बिगड़ी मध्यवर्गीय सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180351/middle-class-socio-economic-system-deteriorated-due-to-rising-prices"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images-(1)2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मानवी अहंकार के परिणाम स्वरूप अमेरिका ईरान इजरायल और यूक्रेन रूस युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगभग विश्व के हर देश में बढ़ गए हैं। इसी परिपेक्ष में भारत में भी बढ़ते पेट्रोल डीजल के दामों के करण भारतीय मध्यम वर्गीय अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक संरचना बृहद रूप में प्रभावित हुई है । विश्व स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्धों और शक्ति-संघर्षों का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध तथा मध्य-पूर्व में इजरायल से जुड़े संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि ने लगभग प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने विशेष रूप से भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक संरचना को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल केवल वाहन चलाने के साधन नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ हैं। परिवहन, कृषि, उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र लगभग सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन पर निर्भर हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">डीजल की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। देश में अधिकांश माल ढुलाई ट्रकों के माध्यम से होती है। जब डीजल महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि खाद्यान्न, फल-सब्जियां, दूध, दालें, निर्माण सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें स्वतः बढ़ने लगती हैं। व्यापारी अतिरिक्त लागत का भार अंततः उपभोक्ताओं पर डाल देते हैं। इस प्रकार महंगाई का एक ऐसा चक्र प्रारंभ हो जाता है, जिससे सामान्य नागरिक बच नहीं पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय मध्यम वर्ग पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने उसकी मासिक आय और व्यय के संतुलन को और बिगाड़ दिया है। जिन परिवारों के पास निजी वाहन हैं, उनके लिए कार्यालय, विद्यालय और अन्य आवश्यक यात्राओं का खर्च बढ़ गया है। वहीं रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट को प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप परिवारों को अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच समझौता करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महंगाई का सामाजिक प्रभाव भी कम गंभीर नहीं है। जब आय स्थिर हो और खर्च लगातार बढ़ता जाए, तो परिवारों में तनाव बढ़ने लगता है। आर्थिक दबाव पारिवारिक संबंधों, सामाजिक सहभागिता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। मध्यम वर्ग, जो समाज की स्थिरता और विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है, स्वयं असुरक्षा और भविष्य की चिंताओं से घिर जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">कृषि क्षेत्र भी इससे प्रभावित हुआ है। डीजल से चलने वाले पंप, ट्रैक्टर और कृषि यंत्रों की लागत बढ़ने से खेती महंगी हो गई है। उत्पादन लागत बढ़ने पर किसान अपनी उपज का उचित मूल्य चाहते हैं, जिससे बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इस प्रकार महंगाई का प्रभाव खेत से लेकर थाली तक दिखाई देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अर्थशास्त्री लंबे समय से कहते रहे हैं कि ऊर्जा की कीमतें किसी भी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक होती हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने अनेक अवसरों पर ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक बताया था। वहीं अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भी विकास को केवल आय वृद्धि नहीं बल्कि जीवन-स्तर की गुणवत्ता से जोड़कर देखा है। यदि बढ़ती महंगाई लोगों की बुनियादी आवश्यकताओं को प्रभावित करती है, तो विकास का वास्तविक लाभ समाज तक नहीं पहुंच पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्ष की राजनीति के स्थान पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में और अधिक प्रयास करने होंगे। सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और विद्युत वाहनों को बढ़ावा देकर पेट्रोलियम पर निर्भरता कम की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती पेट्रोलियम कीमतें केवल आर्थिक समस्या नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक स्थिरता और जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई हैं। युद्धों और वैश्विक तनावों की कीमत अंततः आम नागरिक चुकाता है। इसलिए विश्व शांति, ऊर्जा सुरक्षा और संतुलित आर्थिक नीतियां ही मध्यम वर्ग को राहत प्रदान कर सकती हैं। जब तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर नियंत्रण नहीं होगा, तब तक महंगाई का दबाव भारतीय मध्यम वर्ग की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करता रहेगा।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:43:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177302/one-day-seminar-organized-on-strait-of-hormuz-gateway-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260426-wa0006.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली। </strong>महाराजा अग्रसेन महाविद्यालय में भूगोल विभाग द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश द्वार शीर्षक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. आर. पी. सिंह पूर्व कुलपति, सदस्य उत्तर प्रदेष उच्च शिक्षा सेवा आयोग एवं पूर्व प्राचार्य बरेली काॅलेज बरेली, शैक्षिक  उन्नयन समिति के चेयरमैन अजय कुमार अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य अशोक कुमार गोयल, निदेषक डाॅ. प्रवीन कुमार अग्रवाल, अतिथि पवन कुलश्रेष्ठ, महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल, कला संकाय समन्वयक डाॅ. सीमा श्रीवास्तव, कार्यक्रम समन्वयक भूगोल विभाग के प्रवक्ता डाॅ. तरूण पाण्डेय, सह समन्वयक राकेश कुमार द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम की रूपरेखा डाॅ. तरूण पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत की गई। संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्यः ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेश शीर्षक पर अपने विचार प्रस्तुत किये गये। आज की संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने भू-राजनीति एवं जलमार्गो के वर्चस्व पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि भू-राजनीति में जल मार्गो का विशेष महत्व है क्योंकि यही जलमार्ग किसी देश की अर्थव्यवस्था का आधार बनते है। वर्तमान में ईरान एवं अमेरिका के मध्य चल रहे युद्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस समय पर फारस की खाड़ी एवं ओमान की खाड़ी के मध्य स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य एक ऐसा जल मार्ग है जहां से होकर विभिन्न देशो के लिए कच्चा तेल एवं गैस से लदे मालवाहक जहाज निकलते है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में चल रहे विवाद के कारण यहां से निकलने वाले मालवाहक जहाजो को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। जो कि आयात-निर्यात में बाधा उत्पन्न कर रहें है। जिससे विभिन्न देशो की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ रहा है।  शैक्षिक उन्नयन समिति के चेयरमैन ने अपने अविभाषण में होर्मुज जलडमरूमध्य के अतिरिक्त विश्व के अन्य महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य पर प्रकाश डाला। निदेशक महोदय ने ईरान आयातित तेल एवं गैस के बढ़ते हुए मूल्यों पर चिंता व्यक्त की।इस कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ प्रतिभागियों को पुरूस्कृत किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संगोष्ठी के अन्त में प्रबन्ध समिति ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान भूगोल विभाग के दोनों प्रवक्ताओं को भी उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. सौरभ अग्रवाल ने सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठी से छात्र-छात्राओं के चहुंमुखी विकास में सार्थक सिद्ध होती है। मंच संचालन भूगोल विभाग के प्रवक्ता राकेश कुमार ने किया । संगोष्ठी को सफल बनाने में डाॅ. आरती बंसल, प्रीती यादव, डाॅ. बृजेश नंदिनी, गोविन्द सिंह, रामलखन, संगीता चैहान का विशेष योगदान रहा। संगोष्ठी में डाॅ. के.के.अग्रवाल, डाॅ. के.के. मेहरोत्रा, डाॅ. रेशु जौहरी, मंयक षर्मा, शोभित अग्रवाल, अजीत सिंह, डाॅ. सुमित अग्रवाल, डाॅ. निशा परवीन, डाॅ. पूजा अग्रवाल, डाॅ. राजपाल वर्मा, प्रथमेश कुमार, प्रफुल्ल पाठक सहित तमाम स्टाफ मौजूद रहा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Apr 2026 18:09:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गेल के माध्यम से कई जिलों को पीएनजी से जोड़ा जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार के सबसे बड़े उपक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा एक अनुमान के तहत देश में </span>16,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोमीटर से अधिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेल द्वारा </span>2,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोमीटर से अधिक एलपीजी गैस पाइपलाइन का भी संचालन किया जाता है। गेल इंडिया लिमिटेड के माध्यम से देश के </span>22 <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के लगभग </span>90 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके जरिए सीएनजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी तथा कुछ जिलों में पीएनजी गैस की आपूर्ति भी की जा रही है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि भारत सरकार अपने इस प्रमुख प्राकृतिक गैस उपक्रम के</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175389/many-districts-should-be-connected-to-png-through-gail"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत सरकार के सबसे बड़े उपक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा एक अनुमान के तहत देश में </span>16,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोमीटर से अधिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गेल द्वारा </span>2,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">किलोमीटर से अधिक एलपीजी गैस पाइपलाइन का भी संचालन किया जाता है। गेल इंडिया लिमिटेड के माध्यम से देश के </span>22 <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्यों के लगभग </span>90 <span lang="hi" xml:lang="hi">से अधिक जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके जरिए सीएनजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एलपीजी तथा कुछ जिलों में पीएनजी गैस की आपूर्ति भी की जा रही है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि भारत सरकार अपने इस प्रमुख प्राकृतिक गैस उपक्रम के सहयोग से उन राज्यों के जिलों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां से गैस पाइपलाइन गुजरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर जिला एवं तहसील मुख्यालयों को पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी) से जोड़ने की दिशा में ठोस पहल करे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आमजन को गैस सिलेंडर के झंझट से काफी हद तक मुक्ति मिल सकती है। निस्संदेह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएनजी गैस एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित है और इससे प्रत्येक घर की रसोई में चौबीसों घंटे गैस की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकती है। साथ ही उपभोक्ताओं को उनकी वास्तविक खपत के अनुसार ही भुगतान करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इसे और अधिक सुविधाजनक बनाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">   वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ऊर्जा संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते विश्व स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर भारत सहित अन्य देशों पर भी स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। ऐसे समय में भारत सरकार यदि उन राज्यों और जिलों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां से गैस पाइपलाइन गुजरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीएनजी कनेक्शन के विस्तार की योजना को प्राथमिकता देते हुए उसे क्रियान्वित करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे देश पर गैस आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम किया जा सकता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राज्य सरकारों को भी चाहिए कि वे अपने-अपने राज्यों में गैस आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने के लिए पीएनजी परियोजनाओं को प्राथमिकता दें और उन्हें शीघ्रता से लागू करें। यह न केवल नागरिकों के जीवन को सुगम बनाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि ऊर्जा के सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुलभ और सतत उपयोग को भी सुनिश्चित करेगा।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>                                                                                                अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 18:07:56 +0530</pubDate>
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