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                <title>Climate Smart Agriculture - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Climate Smart Agriculture RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>खेत बचाओ अभियान–2026: प्राकृतिक खेती, मृदा संरक्षण एवं पोषण सुरक्षा पर किसानों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम,</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181012/farm-save-campaign-%E2%80%93-2026-farmers-made-aware-on-natural"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0058-(45).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong> बस्ती जिले के सदर विकासखंड अंतर्गत खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत ग्राम पंचायत बभनगांव एवं मझौवा दूधनाथ में किसान जागरूकता कार्यक्रम  आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण, पोषण सुरक्षा तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल, संयुक्त कृषि निदेशक बस्ती मंडल श्रीराम बचन राम, उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार, मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य, अमित शुक्ला (पूर्व प्रदेश मंत्री, एबीवीपी), ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव, एडीओ (कृषि), एटीएम, बीटीएम तथा कृषि विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में ब्लॉक प्रमुख श्री जटाशंकर शुक्ल ने किसानों से मिट्टी एवं जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया। संयुक्त कृषि निदेशक श्रीराम बचन राम ने मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने तथा विभागीय योजनाओं का लाभ उठाने पर बल दिया। उप निदेशक कृषि श्री अशोक कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण एवं जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। मंडल अध्यक्ष श्री राम मौर्य ने पर्यावरण संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की, जबकि अमित शुक्ला ने युवाओं को कृषि नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव ने किसानों से वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने का आह्वान किया। कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वैज्ञानिक डॉ. वी. बी. सिंह ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, जीवामृत, घनजीवामृत, मृदा परीक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन एवं जल संरक्षण** की तकनीकों की जानकारी दी। वहीं डॉ. अंजली वर्मा ने पोषण वाटिका, श्री अन्न, संतुलित आहार, स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग तथा भोजन में तेल, नमक एवं चीनी की मात्रा कम करने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वस्थ परिवार एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया | कार्यक्रम के दौरान किसानों को “मिट्टी बचाओ–खेत बचाओ, प्राकृतिक खेती अपनाओ, जल बचाओ–भविष्य बचाओ तथा स्वस्थ भोजन–स्वस्थ जीवन” का संदेश दिया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:07:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलवायु अनुकूलन खेती आज के समय कि मांग - नसीम अंसारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> पृथ्वी दिवस सप्ताह के अवसर पर प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शनिवार को स्वयंसेवी संस्था तरुण चेतना द्वारा ग्राम रामपुर बेला में पृथ्वी दिवस समारोह उत्साहपूर्वक मनाया गया।इस अवसर पर 'तरुण चेतना' के निदेशक नसीम अंसारी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में पृथ्वी को बचाना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी अनिवार्यता बन गई है।अंसारी ने जलवायु-स्मार्ट कृषि पर जोर देते हुए बताया कि यह पद्धति एक एकीकृत दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य बदलते मौसम में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177247/climate-adaptation-farming-is-the-need-of-the-hour-%E2%80%93"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260425-wa00641.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> पृथ्वी दिवस सप्ताह के अवसर पर प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शनिवार को स्वयंसेवी संस्था तरुण चेतना द्वारा ग्राम रामपुर बेला में पृथ्वी दिवस समारोह उत्साहपूर्वक मनाया गया।इस अवसर पर 'तरुण चेतना' के निदेशक नसीम अंसारी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में पृथ्वी को बचाना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी अनिवार्यता बन गई है।अंसारी ने जलवायु-स्मार्ट कृषि पर जोर देते हुए बताया कि यह पद्धति एक एकीकृत दृष्टिकोण है, जिसका उद्देश्य बदलते मौसम में कृषि उत्पादकता बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन विकसित करना और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में पृथ्वी संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए संस्था के उप निदेशक श्याम शंकर शुक्ला ने कहा कि वैज्ञानिक और प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम मिट्टी की उर्वरता बनाए रख सकते हैं और जल संरक्षण को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।संस्था के उप निदेशक श्याम शंकर शुक्ला ने पृथ्वी संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्षा जल संचयन और पानी की बर्बादी रोकने के तरीकों पर चर्चा करते हुए एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करने की अपील की। इस अवसर पर ग्राम प्रधान शिवकुमारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ग्राम स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने ग्रामीणों से स्वच्छता और हरियाली बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। इसी क्रम में समाजसेवी रामआसरे वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए और अपने दैनिक जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए जो प्रकृति के अनुकूल हों। इस मौके पर तरुण चेतना के अभियान समन्वयक हुश्नारा बानो ने कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण छोड़ना हमारा नैतिक कर्तव्य है।कार्यक्रम का संचालन बाल अधिकार परियोजना के कोऑर्डिनेटर रजनीश कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में कलावती, संस्था के सह-निदेशक हकीम अंसारी, शोभावती मौर्या, सावित्री देवी, बृजलाल वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 18:12:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलवायु-अनुकूल खेती : जब खेतों ने मौसम से हारना छोड़ दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब आसमान आग उगलने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बादल कहर बनकर टूट पड़ें और धरती की दरारें किसान की हथेली से भी गहरी हो जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केवल फसल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा जीवन उजड़ जाता है। बीते वर्षों में भारत के करोड़ों किसानों ने यही दर्द झेला है। </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">में करीब</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>9.47 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलियन हेक्टेयर</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फसल क्षेत्र सूखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाढ़ और लू जैसी चरम मौसम घटनाओं से प्रभावित हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। जहां कभी हरियाली लहराती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां निराशा का सन्नाटा छा गया। लेकिन इसी अंधेरे से एक नई उम्मीद उभरी है। जलवायु-अनुकूल खेती</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">क्लाइमेट रेजिलिएंट फार्मिंग</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175383/climate-friendly-farming-when-fields-are-left-to-lose-to-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/124933457.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब आसमान आग उगलने लगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बादल कहर बनकर टूट पड़ें और धरती की दरारें किसान की हथेली से भी गहरी हो जाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब केवल फसल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा जीवन उजड़ जाता है। बीते वर्षों में भारत के करोड़ों किसानों ने यही दर्द झेला है। </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">में करीब</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>9.47 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलियन हेक्टेयर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फसल क्षेत्र सूखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाढ़ और लू जैसी चरम मौसम घटनाओं से प्रभावित हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। जहां कभी हरियाली लहराती थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां निराशा का सन्नाटा छा गया। लेकिन इसी अंधेरे से एक नई उम्मीद उभरी है। जलवायु-अनुकूल खेती</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>(<span lang="hi" xml:lang="hi">क्लाइमेट रेजिलिएंट फार्मिंग</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">अब केवल खेती का तरीका नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि किसान के भविष्य की सबसे मजबूत ढाल बन चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रकृति से लड़कर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके साथ चलकर ही खेती सुरक्षित बनती है। वर्षों तक किसान एक खेत में केवल एक फसल बोते रहे। मौसम बिगड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पूरी मेहनत एक झटके में खत्म हो गई।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब खेतों में बदलाव दिख रहा है। गेहूं के साथ दालें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तिलहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मोटे अनाज और सब्जियां भी उगाई जा रही हैं। यदि गर्मी गेहूं को नुकसान पहुंचाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी फसलें किसान की कमाई बचा लेती हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इससे मिट्टी की ताकत बनी रहती है और उत्पादन भी स्थिर रहता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में इस तरीके से फसल नुकसान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">काफी हद तक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">घटा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब किसान समझ रहे हैं— खेत में जितनी अधिक विविधता होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उतनी ही अधिक सुरक्षा भी मिलेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मिट्टी बची रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी खेती की ताकत कायम रहेगी। वर्षों तक उपेक्षित यह मिट्टी रासायनिक उर्वरकों से कमजोर हो गई थी—नमी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरता और जीवन शक्ति खो गई थी। अब जलवायु-अनुकूल खेती ने इसे सुधारना शुरू किया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मिट्टी स्वास्थ्य पत्रक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ने किसानों को बताया कि किस खेत को किस पोषण की जरूरत है। गोबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम्पोस्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैविक खाद और फसल अवशेषों से बनी खाद का प्रयोग तेजी से बढ़ा है। नतीजा साफ है—मिट्टी लंबे समय तक नमी रखती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कम बारिश में भी जड़ें सूखी नहीं होतीं। जैविक तत्व मिट्टी को इतना मजबूत बनाते हैं कि तेज धूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सूखा और अनियमित बारिश में भी फसल सुरक्षित रहती है। इसलिए आज मिट्टी केवल जमीन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह खेत की जीवित शक्ति और किसान की सबसे बड़ी सुरक्षा बन चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां खेती बारिश पर निर्भर हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां पानी की हर बूंद अनमोल है। पहले एक हेक्टेयर खेत की सिंचाई में लगभग </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार लीटर पानी लगता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी फसल सुरक्षित नहीं रहती थी। अब ड्रिप और स्प्रिंकलर इरिगेशन ने यह तस्वीर बदल दी है—वही खेत अब केवल </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार लीटर पानी में सींचे जा रहे हैं। जलवायु-अनुकूल खेती हर बूंद बचाने की सीख देती है। वर्षा जल संचयन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेत तालाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलग्रहण और भूजल पुनर्भरण जैसे उपायों से सूखे क्षेत्रों में नई उम्मीद जगी है। किसान अब बारिश का पानी बहने नहीं देते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि कठिन दिनों के लिए सहेजते हैं। इससे पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली और सिंचाई की लागत घटती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और जहां पहले सूखा फसल नष्ट कर देता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां अब फसल बचने की संभावना दोगुनी हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बदलते मौसम के सामने अब खेती ने हार मानना छोड़ दिया है। ऐसे गेहूं तैयार हुए हैं जो कम पानी में भी मजबूत रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे धान विकसित हुए हैं जो बाढ़ में भी नहीं डूबते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ऐसी दालें सामने आई हैं जो तेज गर्मी व लू झेल सकती हैं। इसी ने खेती में नई क्रांति पैदा की है। </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">के बीच भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने</span> 2900 <span lang="hi" xml:lang="hi">फसल किस्में विकसित की हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें से </span>2661 <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु-अनुकूल हैं। राष्ट्रीय जलवायु-अनुकूल कृषि नवाचार योजना के जरिए ये बीज गांव-गांव पहुंच रहे हैं। इनके साथ शून्य जुताई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फसल अवशेष प्रबंधन और सामुदायिक बीज भंडार जैसी व्यवस्थाएं भी जुड़ रही हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पंजाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के कई गांवों में इन उपायों से फसल हानि </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>35 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत तक घट चुकी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब किसान अकेला नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरा गांव मौसम की मार से लड़ रहा है। जलवायु-अनुकूल खेती की सबसे बड़ी ताकत यही है। देश के </span>151 <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु-संवेदनशील जिलों में </span>448 <span lang="hi" xml:lang="hi">जलवायु-अनुकूल गांव बन चुके हैं। किसान उत्पादक संगठन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वयं सहायता समूह और ग्राम समितियां मिलकर मौसम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बीज और पानी की जानकारी बांट रही हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि विज्ञान केंद्र</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में महिलाएं और युवा प्रशिक्षण लेकर पशुपालन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुर्गीपालन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुमक्खी पालन और मत्स्यपालन जैसे काम भी कर रहे हैं। इससे आय के कई रास्ते खुल रहे हैं। एक फसल खराब हो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब भी दूसरा काम परिवार को संभाले रखता है। यही कारण है कि यह मॉडल केवल खेती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गांव की नई ताकत बन गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब असर खेतों में साफ दिखाई दे रहा है। जहां पहले मौसम की मार से फसलों का नुकसान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">काफी अधिक</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">होता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं जलवायु-अनुकूल खेती अपनाने वाले क्षेत्रों में नुकसान</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">काफी कम</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हो गया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">किसानों की आय </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत तक बढ़ी है। मिट्टी फिर से उपजाऊ हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जलस्तर सुधर रहा है और खेतों में जैव विविधता लौट रही है। जिन खेतों से पक्षी और छोटे जीव गायब हो गए थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां फिर जीवन दिखाई देने लगा है। मिट्टी की कार्बन रोकने की क्षमता भी बढ़ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पर्यावरण को लाभ मिल रहा है। </span>651 <span lang="hi" xml:lang="hi">जिलों में जलवायु जोखिम का अध्ययन हो चुका है और </span>310 <span lang="hi" xml:lang="hi">जिलों के लिए विशेष योजनाएं बन चुकी हैं। यह केवल खेती की जीत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आने वाले कल की सुरक्षा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि जलवायु-अनुकूल खेती कुछ इलाकों तक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे देश तक पहुंचे। हर खेत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर गांव और हर किसान इसका हिस्सा बने। सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कृषि वैज्ञानिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान संगठन और स्थानीय संस्थाएं मिलकर काम करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत खेती का नया वैश्विक मॉडल बन सकता है। सबसे छोटे किसान तक बेहतर बीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी बचाने की तकनीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता पहुंचनी चाहिए। जिस दिन देश का हर खेत मौसम की मार के सामने मजबूती से खड़ा होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस दिन किसान केवल सुरक्षित नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्ध भी होगा। आने वाले वर्षों में यही मॉडल भारत को खाद्य सुरक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकसित भारत </span>2047 <span lang="hi" xml:lang="hi">की दिशा में सबसे आगे ले जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Apr 2026 17:50:36 +0530</pubDate>
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