<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/69524/supreme-court-hearing" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Supreme Court Hearing - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/69524/rss</link>
                <description>Supreme Court Hearing RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बांग्लादेश डिपोर्ट किए गए कुछ लोगों को वापस भारत लाया जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ब्यूरो प्रयागराज -</span></strong><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने निर्वासित करके बांग्लादेश भेजे गए कुछ लोगों को भारत वापस लाने का फैसला किया है और उसके बाद उनकी भारतीय नागरिकता के दावे की पुष्टि की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और इसे अन्य मामलों में अनुकरणीय मिसाल न मानते हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेहता ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि सरकार उन्हें वापस लाएगी और उसके बाद उनकी स्थिति की जांच करेगी। परिणाम के आधार पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हम तदनुसार कदम उठाएंगे। शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि इन व्यक्तियों को भारत वापस लाने में 8-10 दिन लग सकते हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख जुलाई में तय की है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उच्चतम न्यायालय केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के 26 सितंबर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें उच्च न्यायालय ने सुनाली खातून और अन्य को बांग्लादेश निर्वासित करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था और इसे ‘अवैध’ करार दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल तीन दिसंबर को शीर्ष अदालत ने ‘मानवीय आधार’ पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को बांग्लादेश भेजे जाने के महीनों बाद भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी।अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की देखभाल करने का निर्देश दिया था और बीरभूम जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गर्भवती खातून को मुफ्त प्रसव की सुविधा सहित हर संभव चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">न्यायालय ने 24 अप्रैल को केंद्र सरकार को अंतिम अवसर दिया और उसके अधिवक्ता को इस मामले में निर्देश लेकर अदालत को अवगत कराने को कहा। खातून के पिता भोदु शेख की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और संजय हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार का यह रवैया ‘कुछ हद तक अनुचित’ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने इस मामले में न्यायालय को अपने विचार नहीं बताए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">क्षेत्र के सेक्टर 26 में दो दशकों से अधिक समय से दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे इन परिवारों को पिछले साल 18 जून को बांग्लादेशी होने के संदेह में पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में 27 जून को सीमा पार धकेल दिया। कि निर्वासित किए गए छह नागरिकों को एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाए और आदेश पर अस्थायी रोक लगाने की सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/179984/some-people-deported-to-bangladesh-will-be-brought-back-to</guid>
                <pubDate>Sat, 23 May 2026 21:31:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/img-20260523-wa0013-960x640.jpg"                         length="61900"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोएडा हिंसा मामला: 'हाईकोर्ट जाइए, यहां पहले ही 93000 केस लंबित'</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार एक छात्रा को जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील से कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में जाएं। पीठ ने कहा, आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके यहां आता है। सुप्रीम कोर्ट में 93 हजार मामले पहले से ही  लंबित हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आकृति चौधरी के वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178831/noida-violence-case-go-to-high-court-already-93000-cases"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/noida-1778235469797.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार एक छात्रा को जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील से कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में जाएं। पीठ ने कहा, आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके यहां आता है। सुप्रीम कोर्ट में 93 हजार मामले पहले से ही  लंबित हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आकृति चौधरी के वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस ने गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए और जमानत की मांग की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं। शीर्ष कोर्ट ने केशव आनंद नाम के व्यक्ति की याचिका पर पुलिस अधिकारियों को नोटिस भी जारी किया, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा की एक कोर्ट ने पहले तीन महिलाओं आकृति चौधरी, मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता की शर्तों के साथ पुलिस रिमांड की अनुमति दी थी। इन पर 13 अप्रैल के औद्योगिक मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच के दौरान उनके वकीलों को मौजूद रहने की अनुमति होगी। आकृति चौधरी और सृष्टि गुप्ता दोनों दिल्ली की रहने वाली हैं और उनकी उम्र 20 के आसपास है।चौधरी ने दौलत राम कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर किया है, जबकि मनीषा नोएडा की एक औद्योगिक इकाई में काम करती हैं।पुलिस ने हिरासत के लिए दायर आवेदन में कहा था कि आरोपियों के घर से अहम साक्ष्य मिलने की पूरी संभावना है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा में पिछले महीने फैक्टरी मजदूरों का विरोध प्रदर्शन वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, कई औद्योगिक इकाइयों के मजदूर लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग को लेकर इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। हालांकि, यह प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया क्योंकि कुछ लोगों ने कथित तौर पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, पत्थर फेंके और एक वाहन में आग लगा दी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178831/noida-violence-case-go-to-high-court-already-93000-cases</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/178831/noida-violence-case-go-to-high-court-already-93000-cases</guid>
                <pubDate>Sat, 09 May 2026 22:22:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-05/noida-1778235469797.webp"                         length="84038"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की  अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177745/supreme-court-reserves-verdict-on-pawan-khedas-anticipatory-bail-plea"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/pawan-khera-2.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप ट्रायल का विषय हैं और गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें से कई जमानती हैं और बाकी में भी गिरफ्तारी जरूरी नहीं है, इसलिए अग्रिम जमानत से इनकार करना उचित नहीं होगा। सिंहवी ने यह भी तर्क दिया कि यदि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत नहीं दी जाती, तो इस कानूनी प्रावधान का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं, असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि खेड़ा ने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट से जुड़े फर्जी और छेड़छाड़ किए गए दस्तावेज पेश किए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खेड़ा जांच से बच रहे हैं और लगातार वीडियो जारी कर गलत तथ्यों को प्रचारित कर रहे हैं। मेहता ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार और गलत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पवन खेड़ा ने 24 अप्रैल को गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इस राहत पर अंतरिम रोक लगा दी और खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करने को कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, जो तय करेगा कि पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत मिलेगी या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/177745/supreme-court-reserves-verdict-on-pawan-khedas-anticipatory-bail-plea</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/177745/supreme-court-reserves-verdict-on-pawan-khedas-anticipatory-bail-plea</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 23:12:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/pawan-khera-2.webp"                         length="38368"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरुणाचल के सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों की होगी सीबीआई जांच, 1270 करोड़ के घोटाले का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175321/cbi-probe-into-contracts-related-to-arunachal-cms-family-allegation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को मामले की सुनवाई के दौरान सुरक्षित रखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में प्रस्तुत याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले 10 वर्षों में चार कंपनियों को, जो सीएम पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी हैं, करीब 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके दिए गए। याचिकाकर्ता एनजीओ, सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों में स्पष्ट कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट पाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सीएम पेमा खांडू, उनके पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रिमा और भतीजा त्सेरिंग ताशी को पार्टी प्रतिवादी बनाया गया है। दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और अप्रैल 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हुआ था। याचिका में यह भी बताया गया कि रिंचिन ड्रिमा की कंपनी, ब्रांड ईगल्स को कई सरकारी ठेके मिले, जो विवादित और पारिवारिक संबंधों के कारण सवाल उठाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से अब राज्य में सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और सीएम परिवार के ठेकों की कानूनी जांच संभव हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175321/cbi-probe-into-contracts-related-to-arunachal-cms-family-allegation</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/175321/cbi-probe-into-contracts-related-to-arunachal-cms-family-allegation</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:07:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/images-%281%291.jpg"                         length="76159"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        