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                <title>Bureau Prayagraj News - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>विद्युत शवदाह का भूमि पूजन महापौर के द्वारा संपन्न</title>
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                        <![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज।</strong> विद्युत शवदाह का डीपीएस स्कूल के सामने भूमि पूजन महापौर के द्वारा हुआ।महापौर गणेश केसरवानी ने कहा कि हम लोगों का सौभाग्य है कि हम लोग को जमुनापार के नैनी क्षेत्र में शवदाह विद्युत का भूमि पूजन का अवसर प्राप्त हुआ।पार्षद मयंक यादव ने कहा कि हम लोगों का सपना पूरा हो रहा है जो समस्या बहुत बड़ी जमुनापार के लोगों की थी अपर आयुक्त अरविंद राय, चीप इंजीनियर विद्युत संजय कटिहार, चीफ इंजीनियर सिविल संजय सचान के द्वारा सभी पार्षदों का स्वागत वंदन अभिनंदन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन प्रदीप महरा ने किया।शवदाह विद्युत मे मुख्य भूमिका निभाने</div></div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175345/bhoomi-pujan-of-electric-cremation-performed-by-the-mayor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260406-wa0122.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी,प्रयागराज।</strong> विद्युत शवदाह का डीपीएस स्कूल के सामने भूमि पूजन महापौर के द्वारा हुआ।महापौर गणेश केसरवानी ने कहा कि हम लोगों का सौभाग्य है कि हम लोग को जमुनापार के नैनी क्षेत्र में शवदाह विद्युत का भूमि पूजन का अवसर प्राप्त हुआ।पार्षद मयंक यादव ने कहा कि हम लोगों का सपना पूरा हो रहा है जो समस्या बहुत बड़ी जमुनापार के लोगों की थी अपर आयुक्त अरविंद राय, चीप इंजीनियर विद्युत संजय कटिहार, चीफ इंजीनियर सिविल संजय सचान के द्वारा सभी पार्षदों का स्वागत वंदन अभिनंदन किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का संचालन प्रदीप महरा ने किया।शवदाह विद्युत मे मुख्य भूमिका निभाने वाले जमीन दानदाता बबलू पांडे के पिता स्वर्गीय रामनरेश पांडे की स्मृति में जो जमीन दान दी है उन का महापौर एवं समस्त पार्षदों द्वारा उनका माल्यार्पण करके हार्दिक स्वागत अभिनंदन आभार व्यक्त किया और इस पुनीत कार्य को करने हेतु यमुनापार की समस्त जनता ऋणी रहेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर पार्षद मयंक यादव, पार्षद रण विजय सिंह डब्बू,पवन यादव, अनूूप पासी,संजय पासवान,लाल बहादुर साहू, बलराज पटेल,राकेश जयसवाल, दिलीप केसरवानी,राकेश जयसवाल,भगवती प्रसाद पांडे, सुविख्यात समाज सेवी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र,क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविंदर सिंह,भाजपा नेता नर सिंह,शिव शंकर दीक्षित, भाजपा नेता प्रदीप तिवारी,कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय श्रीवास्तव, नैनी मंडल महामंत्री दिनेश सिंह,ओम प्रकाश मिश्र,मंडल अध्यक्ष रजत दुबे, मंडल अध्यक्ष हरिकृष्ण पांडे, घनश्याम जायसवाल, कार्तिकेय पुरी,बाबूजी यादव,सहित कई अतिविशिष्ट गणमान्य लोग उपस्थित रहे।</div>
</div>
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</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 21:07:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक विशेष अभियान के तहत ग्राम पंचायतवार कैंप लगाकर छूटे हुए कृषकों फार्मर आईडी से किया जाएगा संतृप्त</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> मुख्य सचिव के निर्देश पर दिनांक 6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक फार्मर आईडी विशेष अभियान का आयोजन किया जाना है, जिसमें जनपद के छूटे हुए कृषकों का ग्राम पंचायतवार कैंप लगाकर संतृप्तिकरण किया जाएगा। इसमें राजस्व विभाग,कृषि विभाग, ग्राम विकास, पंचायत राज विभाग, उद्यान विभाग, आपूर्ति विभाग एवं अन्य विभाग मिलकर ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित अभियान को सफल बनाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा उक्त कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की जाएगी तथा कंट्रोल रूम द्वारा भी कर्मचारियों की प्रगति को मॉनिटर किया जाएगा। फार्मर आईडी से कृषकों को खाद, बीज, केसीसी तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि जैसी</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175341/under-the-special-campaign-from-6th-april-to-15th-april"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/farmer--1750940633624.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> मुख्य सचिव के निर्देश पर दिनांक 6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक फार्मर आईडी विशेष अभियान का आयोजन किया जाना है, जिसमें जनपद के छूटे हुए कृषकों का ग्राम पंचायतवार कैंप लगाकर संतृप्तिकरण किया जाएगा। इसमें राजस्व विभाग,कृषि विभाग, ग्राम विकास, पंचायत राज विभाग, उद्यान विभाग, आपूर्ति विभाग एवं अन्य विभाग मिलकर ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित अभियान को सफल बनाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनपद स्तर के अधिकारियों द्वारा उक्त कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की जाएगी तथा कंट्रोल रूम द्वारा भी कर्मचारियों की प्रगति को मॉनिटर किया जाएगा। फार्मर आईडी से कृषकों को खाद, बीज, केसीसी तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि जैसी योजनाओं के साथ अन्य योजनाओं से भी आच्छादित और लाभान्वित करने में मदद मिलेगी। उपनिदेशक कृषि ने बताया कि जिला अधिकारी  द्वारा उक्त कार्यक्रम हेतु विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।</div>]]>
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                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/175341/under-the-special-campaign-from-6th-april-to-15th-april</link>
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 21:02:49 +0530</pubDate>
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                <title>मृत व्यक्ति के खिलाफ अपील दाखिल करने पर फटकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार की अपील खारिज की</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने पर उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने उस अपील को खारिज किया, जो सरकार ने ऐसे व्यक्ति के खिलाफ दाखिल की थी, जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है और उसके कानूनी वारिसों को पक्षकार भी नहीं बनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि राज्य की ओर से अपील दाखिल करने में घोर लापरवाही बरती गई और केवल यह कहकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता कि अपील दाखिल करने की अनुमति देर से मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने टिप्पणी की, “राज्य की ओर से मृत</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175325/allahabad-high-court-reprimanded-for-filing-appeal-against-dead-person"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1200-675-23912190-thumbnail-16x9-image18.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर लापरवाही का मामला सामने आने पर उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने उस अपील को खारिज किया, जो सरकार ने ऐसे व्यक्ति के खिलाफ दाखिल की थी, जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है और उसके कानूनी वारिसों को पक्षकार भी नहीं बनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि राज्य की ओर से अपील दाखिल करने में घोर लापरवाही बरती गई और केवल यह कहकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता कि अपील दाखिल करने की अनुमति देर से मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने टिप्पणी की, “राज्य की ओर से मृत प्रतिवादी के खिलाफ अपील दाखिल की गई और तीन साल से अधिक समय तक उसके कानूनी वारिसों को रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया, जबकि इसकी जानकारी थी। इसके लिए कोई उचित कारण नहीं है, क्योंकि वारिसों को शामिल करने के लिए किसी उच्च अधिकारी की अनुमति आवश्यक नहीं होती।”</p>
<p style="text-align:justify;">मामला भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 54 के तहत दायर अपील से जुड़ा है, जिसमें राज्य सरकार ने मुआवजा कम करने की मांग की थी। यह अपील 1516 दिनों की देरी से दाखिल की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का तर्क था कि वर्ष 2018 में पारित आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति 2022 में मिली, जिसके बाद अपील दाखिल की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि 2025 में वाद समाप्ति के आवेदन आने के बाद ही उन्हें प्रतिवादी की मृत्यु की जानकारी हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिवादी के वारिसों की ओर से बताया गया कि उन्होंने पहले ही कार्यान्वयन कार्यवाही में हलफनामा देकर मृत्यु की जानकारी दी थी और वहां वारिसों को प्रतिस्थापित भी किया जा चुका था। इसके बावजूद राज्य ने हाईकोर्ट में उन्हें पक्षकार नहीं बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का तर्क था कि वर्ष 2018 में पारित आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति 2022 में मिली, जिसके बाद अपील दाखिल की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि 2025 में वाद समाप्ति के आवेदन आने के बाद ही उन्हें प्रतिवादी की मृत्यु की जानकारी हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रतिवादी के वारिसों की ओर से बताया गया कि उन्होंने पहले ही कार्यान्वयन कार्यवाही में हलफनामा देकर मृत्यु की जानकारी दी थी और वहां वारिसों को प्रतिस्थापित भी किया जा चुका था। इसके बावजूद राज्य ने हाईकोर्ट में उन्हें पक्षकार नहीं बनाया।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य को प्रतिवादी की मृत्यु की जानकारी होने के बावजूद उसने आवश्यक कदम नहीं उठाए। अदालत ने कहा कि ऐसे में अपील मृत व्यक्ति के खिलाफ दायर होने के कारण कानूनी रूप से शून्य (नॉन-एस्ट) है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने स्पष्ट किया, “यदि अपील दाखिल होने के बाद मृत्यु होती तो प्रतिस्थापन का आवेदन किया जा सकता था। हालांकि, यहां अपील ही मृत व्यक्ति के खिलाफ दायर की गई, जो कानूनन मान्य नहीं है।” इसी आधार पर अदालत ने देरी माफी आवेदन, प्रतिस्थापन आवेदन और अपील सभी खारिज की।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:17:07 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]>
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                <title>म्यूटेशन कार्यवाही में नहीं तय होगा मालिकाना हक: इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि म्यूटेशन (नामांतरण) की कार्यवाही का उद्देश्य संपत्ति के मालिकाना हक का फैसला करना नहीं है। ऐसे विवादों का समाधान केवल सिविल कोर्ट में ही किया जा सकता है। जस्टिस जे.जे. मुनीर ने यह फैसला सुनाते हुए नायब तहसीलदार के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें 34 साल बाद दायर नामांतरण निरस्तीकरण की अर्जी को खारिज कर दिया गया। अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच का विवाद जटिल मालिकाना हक से जुड़ा है, जिसे म्यूटेशन अधिकारी तय नहीं कर सकते।”</p><p style="text-align:justify;">मामले में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि विवादित</p>...]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175323/ownership-rights-will-not-be-decided-in-mutation-proceedings-clear"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2025-12-27-at-114044-pm_1774421573.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि म्यूटेशन (नामांतरण) की कार्यवाही का उद्देश्य संपत्ति के मालिकाना हक का फैसला करना नहीं है। ऐसे विवादों का समाधान केवल सिविल कोर्ट में ही किया जा सकता है। जस्टिस जे.जे. मुनीर ने यह फैसला सुनाते हुए नायब तहसीलदार के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें 34 साल बाद दायर नामांतरण निरस्तीकरण की अर्जी को खारिज कर दिया गया। अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच का विवाद जटिल मालिकाना हक से जुड़ा है, जिसे म्यूटेशन अधिकारी तय नहीं कर सकते।”</p><p style="text-align:justify;">मामले में याचिकाकर्ता ने दावा किया कि विवादित भूमि उसके पूर्वजों की भुमिधारी संपत्ति है और वह लगातार कब्जे में रहा है। उसने यह भी कहा कि वर्ष 1970 में प्रतिवादी का नाम धोखाधड़ी और गलत तथ्यों के आधार पर दर्ज कर दिया गया हालांकि, अदालत ने पाया कि उस समय प्रतिवादी भी जमीन पर कब्जे में था और पारिवारिक नामों में समानता के कारण म्यूटेशन के दौरान भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई होगी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में उत्तराधिकार से जुड़े जटिल प्रश्न शामिल हैं, जिन्हें म्यूटेशन कार्यवाही में नहीं सुलझाया जा सकता।</p><p style="text-align:justify;">अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में सही उपाय सिविल कोर्ट में वाद दायर कर मालिकाना हक की घोषणा कराना है। अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता द्वारा 1970 के आदेश को चुनौती देने में अत्यधिक देरी हुई, जिससे उसकी अर्जी समय-सीमा के कारण भी स्वीकार नहीं की जा सकती।हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर करता है तो नायब तहसीलदार की टिप्पणियां उस पर बाध्यकारी नहीं होंगी और अदालत स्वतंत्र रूप से मामले का निर्णय करेगी। इस प्रकार हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए यह दोहराया कि म्यूटेशन केवल राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया है, न कि संपत्ति के अधिकार तय करने का मंच।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:11:33 +0530</pubDate>
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                <title>अरुणाचल के सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों की होगी सीबीआई जांच, 1270 करोड़ के घोटाले का आरोप</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175321/cbi-probe-into-contracts-related-to-arunachal-cms-family-allegation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सीबीआई को आदेश दिया है कि वह अरुणाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़े कंपनियों को दिए गए सरकारी ठेकों की प्रारंभिक जांच दो सप्ताह के भीतर शुरू करे। न्यायाधीश विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जांच में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में हुए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और वर्क ऑर्डर्स की समीक्षा शामिल होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सीबीआई इस मामले की स्थिति रिपोर्ट 16 हफ्तों के भीतर सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करे। अदालत ने यह आदेश फरवरी 17 को मामले की सुनवाई के दौरान सुरक्षित रखा था।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में प्रस्तुत याचिकाओं में दावा किया गया है कि पिछले 10 वर्षों में चार कंपनियों को, जो सीएम पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी हैं, करीब 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके दिए गए। याचिकाकर्ता एनजीओ, सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट को बताया कि सीएम के परिवार से जुड़े ठेकों में स्पष्ट कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट पाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मामले में सीएम पेमा खांडू, उनके पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रिमा और भतीजा त्सेरिंग ताशी को पार्टी प्रतिवादी बनाया गया है। दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और अप्रैल 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हुआ था। याचिका में यह भी बताया गया कि रिंचिन ड्रिमा की कंपनी, ब्रांड ईगल्स को कई सरकारी ठेके मिले, जो विवादित और पारिवारिक संबंधों के कारण सवाल उठाते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से अब राज्य में सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और सीएम परिवार के ठेकों की कानूनी जांच संभव हो सकेगी।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:07:31 +0530</pubDate>
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                <title>दीवानी मामलों के लिए पुलिस के पास जाने की प्रवृत्ति कानून के शासन को कमज़ोर करती है</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात को 'परेशान करने वाला' बताया कि जनता दीवानी मामलों के समाधान के लिए पुलिस और कलेक्टरों के पास जाती है, क्योंकि यह प्रवृत्ति कानून के शासन की बुनियाद को कमज़ोर करती है। ऐसे मामलों में समाधान के लिए उन गैर-कानूनी एजेंसियों को बढ़ावा देती है, जिनका उन मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दलजीत सिंह और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।उनकी याचिका में एक FIR को चुनौती दी</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175319/the-tendency-to-approach-the-police-for-civil-matters-undermines"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज- </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात को 'परेशान करने वाला' बताया कि जनता दीवानी मामलों के समाधान के लिए पुलिस और कलेक्टरों के पास जाती है, क्योंकि यह प्रवृत्ति कानून के शासन की बुनियाद को कमज़ोर करती है। ऐसे मामलों में समाधान के लिए उन गैर-कानूनी एजेंसियों को बढ़ावा देती है, जिनका उन मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दलजीत सिंह और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।उनकी याचिका में एक FIR को चुनौती दी गई, जो मूल रूप से एक व्यावसायिक विवाद से संबंधित थी। यह विवाद याचिकाकर्ताओं द्वारा अपने माल को अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने के लिए किराए पर लिए गए वाहनों के भाड़े का भुगतान न करने को लेकर था।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उस पर गोली चलाई गई, लेकिन गोली किसी को लगी नहीं। खंडपीठ ने गौर किया कि यह पहली नज़र में "दिखावटी आरोप" था, जिसे जान-बूझकर एक दीवानी विवाद को आपराधिक रंग देने के लिए गढ़ा गया।खंडपीठ ने टिप्पणी की, "यह बहुत परेशान करने वाली बात है कि समाज के हर तबके के लोग सभी प्रकार के दीवानी मामलों के समाधान के लिए पुलिस और ज़िलों के कलेक्टरों के पास जाने की ज़िद करते हैं, जबकि इन मामलों पर अधिकार क्षेत्र दीवानी अदालत का होता है। यह प्रवृत्ति, जिसे समाज के सभी वर्गों द्वारा बढ़ावा दिया जाता है, कानून के शासन की बुनियाद को कमज़ोर करने और ऐसे मामलों में समाधान के लिए उन गैर-कानूनी एजेंसियों को बढ़ावा देने की संभावना रखती है, जिनका उन मामलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं होता।"</p>
<p style="text-align:justify;">इस पृष्ठभूमि में पहली नज़र में मामला बनता देख, अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली और नोटिस जारी किए।खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी और निर्देश दिया कि जब तक कोई अगला आदेश नहीं आ जाता, तब तक उन्हें BNS की धारा 109(1), 116(2) और 352 के तहत दर्ज FIR में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।। अदालत ने मुरादाबाद के सीनियर पुलिस अधीक्षक से एक हलफनामा भी मांगा, जिसमें यह स्पष्टीकरण मांगा गया कि पुलिस ने यह FIR किस आधार पर दर्ज की। इस मामले को 15 अप्रैल को आदेश के लिए सूचीबद्ध किया गया।</p>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 20:03:59 +0530</pubDate>
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