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                <title>पर्यावरण - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>पर्यावरण RSS Feed</description>
                
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                <title>स्मार्ट शहर में गौमाता...!</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;">
<div style="text-align:justify;">स्मार्ट शहर की चकाचौंध में, खो गई गौमाता,</div>
<div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;">सीमेंट की सड़कों पर, किसे याद है वो नाता।</div>
</div>
</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">पहले आँगन में बंधकर, घर की शान कहाती,</div>
<div style="text-align:justify;">ट्रैफिक में भटकती छाया, बाधा बन है जाती।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पहली रोटी उसके नाम की, परंपरा थी प्यारी,</div>
<div style="text-align:justify;">पिज़्ज़ा-बर्गर युग में, वह बातें लगती हैं भारी।</div>
<div style="text-align:justify;">गोबर से लिपते जो घर, अब डर्टी कहलाते हैं,</div>
<div style="text-align:justify;">एसी कमरों में बैठे हम, संस्कार भूल जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">गौ-रक्षक की बातें गूंजें, भाषणो-अखबारों में,</div>
<div style="text-align:justify;">भूखी गायें ढूंढती हैं रोटी, कूड़े ढेर-किनारों में।</div>
<div style="text-align:justify;">नारे ऊँचे व भावनाएँ भी, सच थोड़ा कड़वा है,</div>
<div style="text-align:justify;">सेल्फी में जो दिखता प्यार, धरा पे कम सा है।</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178867/cow-mother-in-smart-city"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img_20260510_151606.jpg" alt=""></a><br /><div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;">
<div style="text-align:justify;">स्मार्ट शहर की चकाचौंध में, खो गई गौमाता,</div>
<div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;">सीमेंट की सड़कों पर, किसे याद है वो नाता।</div>
</div>
</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">पहले आँगन में बंधकर, घर की शान कहाती,</div>
<div style="text-align:justify;">ट्रैफिक में भटकती छाया, बाधा बन है जाती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहली रोटी उसके नाम की, परंपरा थी प्यारी,</div>
<div style="text-align:justify;">पिज़्ज़ा-बर्गर युग में, वह बातें लगती हैं भारी।</div>
<div style="text-align:justify;">गोबर से लिपते जो घर, अब डर्टी कहलाते हैं,</div>
<div style="text-align:justify;">एसी कमरों में बैठे हम, संस्कार भूल जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौ-रक्षक की बातें गूंजें, भाषणो-अखबारों में,</div>
<div style="text-align:justify;">भूखी गायें ढूंढती हैं रोटी, कूड़े ढेर-किनारों में।</div>
<div style="text-align:justify;">नारे ऊँचे व भावनाएँ भी, सच थोड़ा कड़वा है,</div>
<div style="text-align:justify;">सेल्फी में जो दिखता प्यार, धरा पे कम सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कृष्ण की वो बंसी रोती है, गोकुल भी है हैरान,</div>
<div style="text-align:justify;">जहाँ चरती थीं गायें, वहाँ पे मॉल और दुकान।</div>
<div style="text-align:justify;">स्मार्ट बनने की होड़ में, इतने आगे हैं बढ़ आए,</div>
<div style="text-align:justify;">गौमाता को भूलें, खुद को आधुनिक बतलाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सोचो, विकास की दौड़ में, क्या-2 'पीछे' छूटा,</div>
<div style="text-align:justify;">जिसने हमें जीवन दिया, वही रास्ते में है छूटा।</div>
<div style="text-align:justify;">स्मार्ट शहर की माया में, सवाल खड़ा है होता,</div>
<div style="text-align:justify;">क्या सच आगे बढ़े, इंसानियत का दम घुटता?</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 16:05:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन माफिया का कहर: प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई पर भी नहीं जागा प्रशासन</title>
                                    <description><![CDATA[<h3><strong>सरकारी जमीन पर प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की कटाई, अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप</strong></h3>
<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा।-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p>विकास खंड पंडरी कृपाल की ग्राम पंचायत सोनापार के सिरहना स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास सरकारी भूमि पर खड़े प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की खुलेआम कटान से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि वन माफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से दिनदहाड़े हरियाली का सौदा किया जा रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार, सरकारी जमीन पर वर्षों से खड़े हरे-भरे गूलर के पेड़ों को बिना किसी वैधानिक अनुमति के काटा जा रहा है। कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/172008/saw-banned-on-government-land-sycamore-trees-are-being-cut"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/whatsapp-image-2026-03-01-at-16.25.45.jpeg" alt=""></a><br /><h3><strong>सरकारी जमीन पर प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की कटाई, अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप</strong></h3>
<blockquote class="format1"><strong>गोण्डा।-आनंद पांडेय </strong></blockquote>
<p>विकास खंड पंडरी कृपाल की ग्राम पंचायत सोनापार के सिरहना स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास सरकारी भूमि पर खड़े प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की खुलेआम कटान से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि वन माफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से दिनदहाड़े हरियाली का सौदा किया जा रहा है।</p>
<p>ग्रामीणों के अनुसार, सरकारी जमीन पर वर्षों से खड़े हरे-भरे गूलर के पेड़ों को बिना किसी वैधानिक अनुमति के काटा जा रहा है। कटे हुए पेड़ों की लकड़ी को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर ले जाया जा रहा है, लेकिन वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/whatsapp-image-2026-03-01-at-16.25.45-(1).jpeg" alt="सरकारी जमीन पर प्रतिबंधित गूलर के पेड़ों की कटाई, अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप" width="1280" height="800"></img></p>
<p>स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों की कटाई की सूचना संबंधित अधिकारियों को दी गई, इसके बावजूद कोई भी अधिकारी मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है और वे इसे प्रशासनिक संरक्षण में हो रही अवैध कटाई बता रहे हैं।</p>
<p>क्षेत्र में चर्चा है कि लकड़ी माफिया सरकारी संपत्ति को ठिकाने लगाकर पर्यावरण और राजस्व दोनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।</p>
<p>ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों और शासन स्तर तक की जाएगी।</p>
<p>इस संबंध में क्षेत्रीय रेंजर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 17:54:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>योगी राज मे अपर मुख्य सचिव का आदेश फेल ,प्रदूषण नियंत्रण विभाग कर रहा खुलेआम खेल </title>
                                    <description><![CDATA[.......क्षेत्रीय अधिकारी उमेश शुक्ला ने मुख्य पर्यावरण अधिकारी को सौंपी जांच रिपोर्ट.


**********
अपर मुख्य सचिव के सख्त निर्देशों का भी कार्यवाही में नहीं दिखा कोई असर
********
ग्रामीणों ने लगाया प्रदूषण विभाग के अधिकारियों व फैक्ट्री मालिक के बीच मिलीभगत का आरोप
*********
प्रदूषण विभाग की जांच के लगभग एक महीने बाद भी बाद भी कार्रवाई रही शून्य 
*********]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/134045/in-yogi-raj-the-order-of-the-additional-chief-secretary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-08/img-20230724-wa0022.jpg" alt=""></a><br /><div>लखनऊ</div>
<div> </div>
<div>राजधानी लखनऊ के बक्शी का तालाब तहसील क्षेत्र के फल पट्टी क्षेत्र के ग्राम पंचायत कठवारा में चंद्रिका देवी रोड के किनारे प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से मानकों को ताक पर रखकर नूडल्स फैक्ट्री को एनजीटी के मानकों के विपरीत सुरक्षित प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए थे।</div>
<div>नूडल्स फैक्ट्री के पीछे गोमती नदी शिव मंदिर और बगल में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक विद्यालय खुला हुआ है जिस तरह से कठवारा ग्राम पंचायत के बीचो-बीच इस फैक्ट्री को पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी डॉ रामकरण ने नूडल्स फैक्ट्री को एनओसी जारी कर दिया था ,कई वर्षों से इस लापरवाह अधिकारी की वजह से गांव में चल रही नूडल्स फैक्ट्री की चिमनी से निकलने वाले प्रदूषित होने से लोगों को बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे सांस रोग अस्थमा आंखों में जलन त्वचा रोग टीवी कैंसर हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का वहां के स्थानीय ग्रामीण व प्राथमिक विद्यालय के बच्चे शिकार हो रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>उधर नूडल्स फैक्ट्री के केमिकल युक्त जहरीले पानी को 35 से 40 दिनों में रात्रि में फैक्ट्री के पीछे ग्राम सभा की सरकारी भूमि पर छोड़ा जाता है जो  गोमती नदी में गिरता है और जलीय जीवों पर संकट खड़ा हो गया है ।</div>
<div> </div>
<div>इन गंभीर समस्याओं को लेकर ग्राम प्रधान अशोक कुमार ने क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चेयरमैन व अपर मुख्य सचिव वन पर्यावरण मनोज कुमार सिंह से भी शिकायत की गई और अपर मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव अजय शर्मा को जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे 2 अगस्त को क्षेत्रीय अधिकारी उमेश शुक्ला व अपने सहयोगी के साथ नूडल्स फैक्ट्री की जांच करने पहुंचे जहां पर शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान से मुलाकात की प्रधान ने नूडल्स फैक्ट्री से फैल रही बीमारियों के बारे में अवगत कराया और ग्रामीणों से भी मिलवाया सभी ने एक-एक कर नूडल्स फैक्ट्री से फैल रही बीमारियों के बारे में जानकारी दी वही क्षेत्रीय अधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय का भी निरीक्षण किया और वहां के प्रधानाध्यापक से नूडल्स फैक्ट्री से किस प्रकार की समस्या हो रही है उस पर जानकारी ली।</div>
<div> </div>
<div>वहीं क्षेत्रीय अधिकारी उमेश शुक्ला स्कूल के बच्चों के लिए झूला बच्चों के लिए बैग पेंसिल कलम कॉपी जैसी सुविधाएं पहुंचाने की बात कही तो फैक्ट्री के प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों ने फैक्ट्री की जांच करने आए अधिकारियों पर संदेश जाहिर करते हुए अधिकारी और फैक्ट्री मालिक के बीच मिली भगत का आरोप लगाया उधर ग्राम प्रधान ने अधिकारियों पर संदेश तब जाहिर किया जब फैक्ट्री की जांच कर गए अधिकारियों को कुछ दिन बाद कार्रवाई की जानकारी मांगी तब क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी उमेश शुक्ला ने कहा कि आप जांच कराना चाहते हैं या नहीं आपने तो लिखकर दे दिया है कि किसी प्रकार की फैक्ट्री से कोई समस्या नहीं हो रही तब शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान भड़क गया और दूसरे दिन ही उमेश शुक्ला से कार्यालय जाकर लिखित में पत्र सौंपा और कहा अगर मेरे हस्ताक्षर किसी भी कागज पर किसी ने किए हैं तो उसका जिम्मेदार वह व्यक्ति खुद होगा और आप होंगे क्योंकि मैं गांव में फैल रही फैक्ट्री से बीमारी की शिकायत कर रहा हूं मैंने किसी कागज पर नहीं लिखा है कि फैक्ट्री से कोई समस्या नहीं है ।</div>
<div>वही उमेश शुक्ला ने नूडल्स फैक्ट्री की हुई जांच की रिपोर्ट मुख्य<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-08/img-20230730-wa0027.jpg" alt="IMG-20230730-WA0027"></img>अधिकारी रामकरण को सौंप दी हैं यह वही मुख्य पर्यावरण अधिकारी हैं जो पूर्व में इसी नूडल्स फैक्ट्री को मानको के विपरीत एनओसी जारी कर दी थी। जब शिकायतकर्ता प्रधान ने मुख्य पर्यावरण अधिकारी से फोन पर क्या कार्रवाई हो रही है इसकी जानकारी जानना चाहे तो उन्होंने कहा जांच में कोई मछली गोमती के किनारे मरी नहीं पाई गई है और फोन काट दिया। जबकि नूडल्स फैक्ट्री की चिमनी से लगातार वायु प्रदूषित होने की वजह से लोगों को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।</div>
<div>जांच में हो रही हीला हवाली से शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान व ग्रामीण परेशान दिख रहे हैं क्या अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह इन लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगे और नियमों को ताक पर रखकर जारी किए गए नूडल्स फैक्ट्री को सुरक्षित प्रमाण पत्र को निरस्त कर पूर्व में सुरक्षित इकाई वाले प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों पर भी क्या कार्यवाही करेंगे या फिर ग्रामीणों को ऐसे ही नूडल्स फैक्ट्री से फैल रही बीमारियों का सामना करना पड़ेगा ।</div>
<div> </div>
<div>वर्जन</div>
<div> </div>
<div>  1    शिकायतकर्ता ग्राम प्रधान कठवारा अशोक कुमार ने बताया कि पूर्व क्षेत्रीय अधिकारी डॉ, रामकरण ने बीच गांव में धुवाँ होने से स्कूली बच्चों के जीवन पर संकट है एवं गोमती के किनारे शिव मंदिर स्कूल अस्पताल होते हुए भी सुरक्षित प्रमाण पत्र क्यों जारी कर दिए इस भ्रष्ट अधिकारी पर कब होगी कार्रवाई, अब हम कोर्ट की शरण लेकर फैक्ट्री के ऊपर मुकदमा दायर करेंगे ।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div> 2      राजकुमार रावत निवासी मल्लाहन खेड़ा ने बताया कि कई सालों से फैक्ट्री की चिमनी से निकलने वाले धुएं से महामारी फैल रही, प्रदूषण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी मिले हुए हैं जांच से पहले ही फैक्ट्री को बंद कर दिया जाता है साफ सफाई कर दी जाती है ।</div>
<div>
<div> </div>
<div>3  गोविंद निषाद निवासी ग्राम मल्लाहन खेड़ा ने बताया कि फल पट्टी क्षेत्र की कठवारा ग्राम पंचायत के बीच में मानक के विपरीत फैक्ट्री लगाने का परमिशन कैसे मिल गया , जबकि बगल में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक विद्यालय भी है ।</div>
<div> </div>
<div>4     प्रकाश निषाद निवासी ग्राम मल्लाहनन खेड़ा ने बताया कि फैक्ट्री के 200 मीटर पर गांव है चिमनी से निकलने वाले वायु प्रदूषण धुएँ से ग्रामीणों मे बीमारी का कारण बन रहा है आंखों में जलन सांस रोक अस्थमा हृदय रोग जैसी बीमारी फैल रही है ।</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div>
<div>5     सुरेंद्र गौतम निवासी कठवारा ने बताया कि नूडल्स फैक्ट्री के पीछे सरकारी जमीन पर फैक्ट्री की राख डाली जाती है जो कि हवा चलने पर आंखों में लगती है इससे लोग दृष्टिहीन हो सकते हैं ।</div>
</div>
</div>
<div> </div>
<div>6     महेश निवासी ग्राम कठवारा ने बताया कि</div>
<div>जांच करने आए क्षेत्रीय अधिकारी भी फैक्ट्री के बगल मे चल रहे प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिका से बोल रहे कि आपके स्कूल में झूला लगवा देते हैं बैग कॉपी बटवा देते, करवाई ना करके फैक्ट्री मालिक को बचाने का काम कर रहे है तो कैसे होगी कार्रवाई ।</div>
<div class="yj6qo"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Aug 2023 17:32:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कटका क्लब सामाजिक संस्था के द्वारा कटका मयांग रोड पर स्थित 30नंबर रेलवे गेट पर पौध रोपण कार्य किया गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>शेष राम प्रजापति के नेतृत्व में किया गया पौधारोपण</strong></p>
<p><strong><br /></strong><strong>सुल्तानपुर</strong> । इस मौके पर उपस्थित संस्था के अध्यक्ष सौरभ मिश्र विनम्र ने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए हमे अधिक से अधिक पौधे का रोपण करना चाहिए। पेड़ से हमे शुद्ध ऑक्सीजन मिलता है इसके साथ ही वातावरण संतुलित होता है। पेड़ वर्षा को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पौधे लगाना ही काफी नहीं है, इसका संरक्षण भी जरूरी है। हमें जिम्मेदारियों के साथ इसका संरक्षण करना चाहिए। जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने पौधे लगाएं है और उनका फल हमे आज मिल रहा है। इसी प्रकार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/132991/sapling-plantation-work-was-done-by-katka-club-social-organization"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/img-20230730-wa0010.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>शेष राम प्रजापति के नेतृत्व में किया गया पौधारोपण</strong></p>
<p><strong><br /></strong><strong>सुल्तानपुर</strong> । इस मौके पर उपस्थित संस्था के अध्यक्ष सौरभ मिश्र विनम्र ने कहा कि पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए हमे अधिक से अधिक पौधे का रोपण करना चाहिए। पेड़ से हमे शुद्ध ऑक्सीजन मिलता है इसके साथ ही वातावरण संतुलित होता है। पेड़ वर्षा को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पौधे लगाना ही काफी नहीं है, इसका संरक्षण भी जरूरी है। हमें जिम्मेदारियों के साथ इसका संरक्षण करना चाहिए। जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने पौधे लगाएं है और उनका फल हमे आज मिल रहा है। इसी प्रकार हम पौधे लगाएंगे और इसका फल हमारे आने वाली पीढ़ी को मिलेगा। पर्यावरण की रक्षा के लिये सामाज के प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए, तथा इसके साथ ही उसकी देखभाल भी अत्यन्त आवश्यक है। पौधों के लगातार कटान से जल वायु में परिवर्तन होता जा रहा है, जिसके कारण दिन प्रतिदिन वर्षा में कमी आ रही है। पौध रोपण में चंदन कुमार गेट मैन, अभय यादव, राजकुमार, राम नाथ प्रजापति उपस्थिति रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2023 16:59:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण जरूरी: विश्वविद्यालय  कुलपति</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p>मिल्कीपर, अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में वन महोत्वस सप्ताह के तहत 500 पौधों को लगाया गया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित मत्सियकी प्रक्षेत्र पर कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में सभी शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं एनसीसी कैडेटों ने पौधे लगाए। वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने मत्सियकी प्रक्षेत्र पर तालाब के किनारे सहजन का पौधा लगाकर किया। इस दौरान कुलपति ने कहा कि पेड़-पौधों का मानव जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। पौधरोपण से गर्मी, भूक्षरण, धूल आदि की समस्या से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में प्रत्येक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/132040/plantation-necessary-for-environment-protection-university-vice-chancellor"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-07/img-20230709-wa0002.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात</strong></p>
<p>मिल्कीपर, अयोध्या। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में वन महोत्वस सप्ताह के तहत 500 पौधों को लगाया गया। विश्वविद्यालय परिसर स्थित मत्सियकी प्रक्षेत्र पर कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह के नेतृत्व में सभी शिक्षकों, वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं एनसीसी कैडेटों ने पौधे लगाए। वृक्षारोपण कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने मत्सियकी प्रक्षेत्र पर तालाब के किनारे सहजन का पौधा लगाकर किया। इस दौरान कुलपति ने कहा कि पेड़-पौधों का मानव जीवन में बहुत बड़ा महत्व है। पौधरोपण से गर्मी, भूक्षरण, धूल आदि की समस्या से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए साथ ही उसकी देखभाल भी जरूरी है।</p>
<p>मत्सियकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा. ए.के गंगवार ने कहा कि समय-समय पर पौधरोपण करने से पर्यावरण संरक्षित रहता है। डा. गंगवार ने कहा कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं इसको बचाकर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि इस मौके पर प्रक्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में सहजन के पौधे लगाए गए हैं। इस दौरान एनसीसी के भी छात्र-छात्राओं ने भी पौधे रोपे। इस मौके पर समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक, वैज्ञानिक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2023 07:04:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सारस गणना 2023 में बालाघाट जिला रहा अग्रणी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात।</p>
<p style="text-align:justify;">हेमेन्द्र क्षीरसागर। जिला ब्यूरो। मध्यप्रदेश। </p>
<p style="text-align:justify;">बालाघाट। जिला पुरातत्व एवं संस्कृती परिषद बालाघाट के नोडल अधिकारी द्वारा बताया गया कि बालाघाट कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा एवं सीईओ जिला पंचायत श्री डी एस रणदा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सेवा संस्था वन विभाग के साथ सारस गणना का कार्य किया जा रहा है। सारस गणना में पूर्व वर्षो की तरह बालाघाट जिला अग्रणी रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">यहां तीन जिलों की अपेक्षा बालाघाट में सर्वाधिक 49 सारस पाये गये है। दूसरे स्थान पर गोंदिया जिला है जहां 31 सारस तथा भण्डारा जिले में महज 4 सारस की गणना की गई है</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131456/balaghat-district-was-leading-in-stork-count-2023"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/img-20230627-wa0487.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">स्वतंत्र प्रभात।</p>
<p style="text-align:justify;">हेमेन्द्र क्षीरसागर। जिला ब्यूरो। मध्यप्रदेश। </p>
<p style="text-align:justify;">बालाघाट। जिला पुरातत्व एवं संस्कृती परिषद बालाघाट के नोडल अधिकारी द्वारा बताया गया कि बालाघाट कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा एवं सीईओ जिला पंचायत श्री डी एस रणदा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से सेवा संस्था वन विभाग के साथ सारस गणना का कार्य किया जा रहा है। सारस गणना में पूर्व वर्षो की तरह बालाघाट जिला अग्रणी रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">यहां तीन जिलों की अपेक्षा बालाघाट में सर्वाधिक 49 सारस पाये गये है। दूसरे स्थान पर गोंदिया जिला है जहां 31 सारस तथा भण्डारा जिले में महज 4 सारस की गणना की गई है । जिला प्रशासन द्वारा सेवा संस्था के सारस संरक्षण कार्य की सराहना की एवं आगे भी सारस संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करते रहने की बात कही।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण तथा संवर्धन के लिए कार्यरत“सेवा” संस्था अध्यक्ष श्री सावन बहेकार तथा सारस संरक्षण प्रकल्प प्रभारी सेवा संस्था सदस्य के नेतृत्व में तथा बालाघाट उत्तर-दक्षिण वनमंडल एवं जिला पुरातत्व एवं संस्कृती परिषद बालाघाट स्थानीय किसान मित्र के सहयोग से सारस गणना का कार्य पारंपारिक तथा शास्त्रीय पध्दती से किया गया 6 दिनों तक चली सारस गणना में गोंदिया तथा बालाघाट जिले में कुल 70 एवं 80 जगहों पर सेवा संस्था के सदस्य स्थानिय किसान, सारस मित्र तथा वन विभाग बालाघाट एवं गोंदिया के अधिकारी तथा कर्मचारियों द्वारा सारस गणना को अंजाम दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">बालाघाट जिले के लिए 25 तथा गोंदिया भंडारा जिले में 39 टीमे बनाकर सारस के रहवास स्थल पर सुबह 5 बजे से 9 बजे तक विभिन्न स्थानों पर प्रत्यक्ष जाकर गणना की गयी प्रत्येक टिम में 2-4 सेवा संस्था के सदस्य तथा डीएटीसीसी सदस्य वन विभाग कर्मचारियों का समावेश किया गया था । </p>
<p style="text-align:justify;">संस्था के सदस्यों द्वारा पुरे वर्षभर सारस के विश्राम स्थल, प्रजनन अधिवास तथा भोजन के लिए प्रयुक्त भ्रमण पद पर नजर रखी जाती है साथ ही सारस के अधिवास एवं उनके आसपास रहनेवाले किसानों को सारस का महत्व बताकर उसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित किया जाता है। परिसर के स्कुल तथा महाविद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को पर्यावरण, सारस संवर्धन से संबंधित कार्यक्रमों के माध्यम से सारस संरक्षण अभियान से जोड़ा जाता है ।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">ज्ञात हो कि पूर्व में सारस संरक्षण करने वाले किसान आमजन को सारस मित्र सम्मेलन के माध्यम से सेवा संस्था द्वारा कलेक्टर कार्यालय के सभागृह में सारस मित्र सम्मेलन आयोजित कर किसानों सारस मित्रो को कलेक्टर बालाघाट के हस्ते सम्मानित किया गया था बाघ एवं वैनगंगा नदी महाराष्ट्र तथा मध्यप्रदेश के बालाघाट तथा गोंदिया जिलों को विभाजित करती है भौगोलिक दृष्टिकोण से नदी के दोनों ओर के प्रदेश की जैवविविधता मे काफी समानता पायी जी है। </p>
<p style="text-align:justify;">अतः कुछ सारस के जोडें अधिवास तथा भोजन के लिए दोनों ओर के प्रदेशों में समान रूप से विचरण करते पाये जाते है। सीमाओं का बंधन उनके लिए मायने नही रखता जो मनुष्य के लिए एक अच्छा सबक है आकडों की विश्वसनियता एवं सारस की उपस्थिती पर संदेह की गुंजाईश ना रहे इसके लिए दिनांक 19 से 23 तक प्रतिदिन सुबह एवं शाम सभी सारस अधिवास पर जाकर सारस की स्थिती का जायजा लिया गया। जिसमे खेत, तालाब, नदियों पर जाकर स्थानिय लोगों से भी बातचित की गयी।</p>
<p style="text-align:justify;"> 17 जून को बालाघाट जिले में २५ टीमो द्वारा 60 से 70 स्थानों पर प्रकल्प प्रभारी श्री अविजित परिहार के मार्गदर्शन में गणना कार्य किया गया गोंदिया जिले में दिनांक 18 जून को कुल 39 टीमों में कुल 70 से 80 स्थानों पर जाकर जिसमें हर स्थान पर वनविभाग के कर्मचारियों के साथ गणना की गयी थी</p>
<p style="text-align:justify;">सारस गणना के संपूर्ण अभियान में उत्तर-दक्षिण वनमंडल बालाघाट के वनमंडल अधिकारी अभिनव पल्लव, एस.डी.ओ. प्रशांत साखरे, हट्टा वनपरीक्षेत्र अधिकारी आकाश राजपूत, वनपरीक्षेत्र अधिकारी बालाघाट धर्मेंद्र बिसेन, वनपरीक्षेत्र अधिकारी किरणापूर नेहा घोडेश्वर, वनपरीक्षेत्र अधिकारी वारासिवनी छत्रपाल सिंग इनका अमुल्य मार्गदर्शन एवं सहयोग मिला साथ ही जिला पुरातत्व एवं संस्कृती परिषद बालाघाट के सहायक नोडल रवि पालेवार डीएटीसीसी सदस्य अभय कोचर व समस्त वनकर्मचारियों का सहयोग प्राप्त हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">सेवा संस्था के सभी सदस्यों ने गणना कार्य में अथक प्रयास किये सिंकदर मिश्रा निशांत देशमुख शशांक लाडेकर, कन्हैया उदापुरे, दुस्यंत आकरे, विशाल कटरे, गौरव मटाले, सुशिल बहेकार, प्रशांत मेंढे, प्रविण मेंढे, विकास फरकुंडे, बबलू चुटे, मधु डोये, निलू डोये, कैलाश हेमने, प्रशांत लाडेकर, डिलेश कुसराम, लोकेश भोयर, पप्पु बिसेन, बसंत बोपचे, राहुल भावे, रतिराम क्षीरसागर, नखाते जी, प्रवीण देशमुख, अमित बेलेकर, शिवोना भोजवानी, पवन सोयम, अक्षय विधाते, निलेश राणे, रिशील डाहाके, संदीप राणा, मोहित पटले, संदीप तुरकर आदि का भरपूर सहयोग से सारस गणना का कार्य सफलता पूर्वक संम्पन हुआ।<img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/img-20230627-wa0487.jpg" alt="सारस"></img></p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 11:28:42 +0530</pubDate>
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