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                <title>एक देश एक भाषा विचार - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>सत्ता की चाह में हिंदी का विरोध कब तक सहेगा भारत देश ?</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे देश भारत में जब पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक एक देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक विधान और एक निशान लागू है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर देश में एक भाषा क्यों नहीं लागू हो सकती है </span>?<span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाषा के नाम पर आखिर कब तक देश के कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेता देश के आम जन को बाँटकर सत्ता स्वार्थ की रोटियाँ सेंकते रहेंगे </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी हाल ही में भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में विधानसभा के चुनावों के आते ही फिर से हिंदी भाषा के विरोध का अपना पुराना राग सत्ताधारी डीएमके के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175178/how-long-will-india-tolerate-opposition-to-hindi-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/bharat-mata-and-the-language-conflict.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारे देश भारत में जब पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक एक देश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक विधान और एक निशान लागू है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर देश में एक भाषा क्यों नहीं लागू हो सकती है </span>?<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाषा के नाम पर आखिर कब तक देश के कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के नेता देश के आम जन को बाँटकर सत्ता स्वार्थ की रोटियाँ सेंकते रहेंगे </span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">अभी हाल ही में भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में विधानसभा के चुनावों के आते ही फिर से हिंदी भाषा के विरोध का अपना पुराना राग सत्ताधारी डीएमके के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने छेड़ दिया है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले साल महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनावों के पूर्व भी हिंदी भाषा को लेकर ठाकरे बंधुओं ने धमकियाँ देकर विरोध किया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन महाराष्ट्र की जनता ने विधानसभा के चुनावों में ठाकरे बंधुओं को मत से ऐसा सबक सिखाया कि अब वे कभी अपने बूते राज्य की सियासत के सिरमौर कभी नहीं बन सकते हैं।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों द्वारा स्कूली पाठ्यक्रम में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी भाषा का विरोध करना औचित्यहीन है। महाराष्ट्र की तरह ही दक्षिण भारत की जनता को भी हिंदी भाषा से कोई परहेज नहीं है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्रीयता के आधार पर हिंदी भाषा और हिंदी भाषी लोगों का विरोध कर वोट हासिल कर सत्ता स्वार्थ भोगना कुछ क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का पुराना शगल जरूर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आज देश की जनता को भाषा से ज्यादा अपने विकास और सुरक्षा की जरूरत है। ऐसे में यदि कोई दल यह सोचे कि वह भाषा का वैमनस्य फैलाकर लंबे समय तक सत्ता का सुख भोग सकेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह वर्तमान भारत में अब संभव नहीं है।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिंदी हमारी राजभाषा है और यह हमारे राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान की भाषा है। इसका विरोध करने का अधिकार किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक दल को नहीं होना चाहिए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रभाषा का विरोध करने वाले लोगों और भाषा के आधार पर देश को बांटने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ केंद्र सरकार को कड़ा रुख अपनाना चाहिए। माननीय सर्वोच्च न्यायालय से भी निवेदन है कि भाषा और जाति के आधार पर देश को बाँटने वाले नेताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए उनकी राजनीतिक मान्यता समाप्त की जाए।</span></p><p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि देश में एक विधान और एक निशान लागू है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर देश में एक भाषा भी लागू होना ही  चाहिए। भारत सरकार को भी चाहिए कि वह राजभाषा हिंदी को राष्ट्रभाषा का कानूनी दर्जा देकर देश में एक विधान और एक निशान के साथ देश की एक भाषा के रूप में हिंदी भाषा  को देश की पहचान के रूप में लागू करे </span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्यथा सत्ता की चाह में क्षेत्रीय नेताओं का हिंदी भाषा का आंतरिक विरोध कब तक यह देश सहता रहेगा </span>?</p><p style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]>
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 19:22:23 +0530</pubDate>
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