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                <title>एलएनजी आपूर्ति खतरा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>एलएनजी आपूर्ति खतरा RSS Feed</description>
                
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                <title>हॉर्मुज की आँच में जल सकती है भारत की पूरी विकास यात्रा</title>
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                        <![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की अर्थव्यवस्था आज एक पतली समुद्री रेखा पर टिकी है—हॉर्मुज। केवल चालीस किलोमीटर चौड़ा यह जलडमरूमध्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से दुनिया का हर पाँचवाँ तेल टैंकर गुजरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब युद्ध का सबसे खतरनाक मोर्चा बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे की चेतावनी दी है—हॉर्मुज खोलो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझौता करो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरना “नरक टूट पड़ेगा।” तेहरान ने जवाब दिया—“फॉरएवर वॉर”। यह केवल दो देशों की बयानबाजी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था पर सीधा प्रहार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके सहारे भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएँ चलती हैं। भारत के लिए यह संकट कोई दूर की घटना नहीं</span></p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175167/indias-entire-development-journey-may-burn-in-the-heat-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas3.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया की अर्थव्यवस्था आज एक पतली समुद्री रेखा पर टिकी है—हॉर्मुज। केवल चालीस किलोमीटर चौड़ा यह जलडमरूमध्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से दुनिया का हर पाँचवाँ तेल टैंकर गुजरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब युद्ध का सबसे खतरनाक मोर्चा बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे की चेतावनी दी है—हॉर्मुज खोलो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझौता करो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरना “नरक टूट पड़ेगा।” तेहरान ने जवाब दिया—“फॉरएवर वॉर”। यह केवल दो देशों की बयानबाजी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उस वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था पर सीधा प्रहार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके सहारे भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएँ चलती हैं। भारत के लिए यह संकट कोई दूर की घटना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पेट्रोल पंप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रसोई गैस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खेत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्टरी और बाजार तक पहुँचने वाला आर्थिक भूचाल है। ट्रंप की धमकी और ईरान की चुनौती ने साफ कर दिया है कि हॉर्मुज अब केवल जलडमरूमध्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे कमजोर नस बन चुका है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">48 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे की चेतावनी के पीछे कई हफ्तों से सुलगता तनाव था। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा था। अमेरिकी लड़ाकू विमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्रोन हमले</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु कार्यक्रम और खाड़ी में बढ़ती सैन्य हलचल ने माहौल को विस्फोटक बना दिया। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे में हॉर्मुज नहीं खुला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ईरान के ऊर्जा ढाँचे पर हमला होगा। लेकिन ईरान जानता है कि उसकी सबसे बड़ी ताकत हथियार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हॉर्मुज की वही संकरी समुद्री पट्टी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ से दुनिया की ऊर्जा गुजरती है। तेहरान के पास मिसाइलें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री सुरंगें और ऐसे प्रॉक्सी नेटवर्क हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कुछ ही घंटों में जहाजरानी रोक सकते हैं। </span>1980 <span lang="hi" xml:lang="hi">के दशक का “टैंकर वॉर” फिर लौटता दिख रहा है। फर्क बस इतना है कि तब दांव पर तेल था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था है। इसलिए ईरान का “फॉरएवर वॉर” केवल सैन्य चुनौती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि तेल के सहारे दुनिया को झुकाने की रणनीति है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हॉर्मुज में उठी एक रुकावट भारत की अर्थव्यवस्था को भीतर तक हिला सकती है। भारत इस युद्ध में नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर भी सबसे बड़ी मार उसी पर पड़ सकती है। देश अपनी तेल जरूरत का </span>85 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>90 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत आयात करता है और उसका करीब </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत हॉर्मुज के रास्ते आता है। यदि यह मार्ग कुछ हफ्तों के लिए भी बंद हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भारत सीधे ऊर्जा संकट में फँस जाएगा। तेल की कीमतें सबसे पहले बढ़ेंगी। भारतीय क्रूड बास्केट पहले ही </span>110 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">हॉर्मुज बंदी लंबी खिंची तो यह </span>130-150 <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर तक जा सकती है। फिर पेट्रोल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विमान ईंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उर्वरक और परिवहन सब महँगे हो जाएंगे। महँगाई </span>7 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>9 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत तक पहुँच सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपया और कमजोर होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ेगा और करंट अकाउंट डेफिसिट फैल जाएगा। सबसे बड़ा असर किसान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रक ऑपरेटर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">छोटे उद्योग और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि ईंधन महँगा होते ही अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हॉर्मुज का संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है। दुनिया की लगभग </span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत पेट्रोलियम और </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। भारत के लिए इसका मतलब है कि रसोई गैस और औद्योगिक गैस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दोनों पर दबाव बढ़ेगा। यदि एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति रुकी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो गैस सिलेंडर महँगे होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिजली उत्पादन की लागत बढ़ेगी और गैस आधारित उद्योगों की रफ्तार टूट जाएगी। भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वह केवल </span>5-10 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन की राहत देता है। कुल मिलाकर (रिफाइनरी स्टॉक सहित) यह </span>60-74 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन का बफर उपलब्ध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि विकसित देशों के पास </span>180 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन तक का सुरक्षा कवच है। यही अंतर बताता है कि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को अब तक आर्थिक मुद्दा माना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय सुरक्षा का नहीं। </span>1973 <span lang="hi" xml:lang="hi">का तेल संकट चेतावनी था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आज भारत पहले से अधिक ऊर्जा पर निर्भर है। इसलिए यदि हॉर्मुज लंबे समय तक बंद रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो असर सिर्फ तेल बिल पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विकास दर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और सामाजिक स्थिरता पर भी पड़ेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत के पास रास्ते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कोई भी आसान नहीं। रूस से तेल आयात पिछले वर्षों में तेजी से बढ़ा है और अब कुल आयात का बड़ा हिस्सा वहीं से आता है। इससे कुछ राहत मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि रूसी तेल हॉर्मुज से नहीं गुजरता। लेकिन इसकी अपनी मुश्किलें हैं—लंबी दूरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महँगा बीमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कठिन परिवहन और कीमतों में उतार-चढ़ाव। अफ्रीका</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका और लैटिन अमेरिका से तेल लाया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये रास्ते अधिक महँगे और धीमे हैं। समुद्री भाड़ा </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उधर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान से जुड़ा चाबहार बंदरगाह भी संकट की चपेट में आ सकता है। भारत जिस अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और पश्चिम एशिया कॉरिडोर पर भरोसा कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं। इसलिए सच यही है कि भारत के पास विकल्प तो हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे तुरंत राहत देने की स्थिति में नहीं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस संकट का समाधान केवल तात्कालिक फैसलों में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूरगामी तैयारी में छिपा है। भारत को अपनी ऊर्जा नीति की दिशा बदलनी होगी। सबसे पहले रणनीतिक भंडार को तेजी से भरकर और कुल भंडारण क्षमता को बढ़ाकर</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>180 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन तक ले जाना होगा। फिर तेल आयात के स्रोत इतने फैलाने होंगे कि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता न रहे। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडमान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूर्वी तट और राजस्थान के नए ब्लॉकों में तेल और गैस खोज को युद्ध स्तर पर बढ़ाना होगा। लेकिन असली बदलाव जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलने में है। सौर ऊर्जा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरित हाइड्रोजन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैव ईंधन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रिक वाहन और छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर अब केवल पर्यावरण की जरूरत नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रीय सुरक्षा की ढाल हैं। जिस दिन भारत की बसें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रैक्टर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और बिजली विदेशी तेल पर कम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू स्वच्छ ऊर्जा पर अधिक चलेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी दिन हॉर्मुज का खतरा भी छोटा पड़ जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह संकट भारत के सामने एक सीधा सवाल खड़ा करता है—क्या हम अब भी बीसवीं सदी की ऊर्जा सोच में अटके हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि दुनिया इक्कीसवीं सदी का युद्ध लड़ रही है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रंप की </span>48 <span lang="hi" xml:lang="hi">घंटे की चेतावनी और ईरान के “फॉरएवर वॉर” ने साफ कर दिया है कि आने वाली लड़ाइयाँ सीमाओं पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सप्लाई चेन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्री रास्तों और ऊर्जा स्रोतों पर लड़ी जाएँगी। यदि भारत आयातित तेल के सहारे विकास का सपना देखता रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हर नया हॉर्मुज संकट उसे और कमजोर करेगा। इसलिए यह समय केवल चिंता का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैसले का है। सरकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उद्योग और समाज को मिलकर नई ऊर्जा क्रांति शुरू करनी होगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ सूरज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परमाणु और जैव ईंधन भारत की नई ताकत बनें। तभी भारत किसी भी “फॉरएवर वॉर” के बीच अडिग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षित और आत्मनिर्भर रह सकेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>]]>
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                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 18:58:13 +0530</pubDate>
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