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                <title>नशा मुक्ति अभियान - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>नशा मुक्ति अभियान RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>देश की भावी पीढ़ी को नशे से बचाना है तो - सरकार और समाज साथ आएँ</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में कोई भी व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वह किसी भी जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजहब या धर्म का हो अथवा कितना भी दुर्दांत और कुख्यात अपराधी क्यों न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी यह नहीं चाहेगा कि उसके बच्चे नशीले पदार्थों का सेवन करें या अपराध की दुनिया में कदम रखें। हर माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर संस्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तम शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देने का सपना देखते हैं। विडंबना यह है कि मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त लोग भी अपने बच्चों को नशे से कोसों दूर रखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दूसरों के बच्चों को नशे की गिरफ्त में धकेल कर अपने परिवार</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183687/if-we-want-to-save-the-future-generation-of-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/nasha.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दुनिया में कोई भी व्यक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वह किसी भी जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मजहब या धर्म का हो अथवा कितना भी दुर्दांत और कुख्यात अपराधी क्यों न हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी यह नहीं चाहेगा कि उसके बच्चे नशीले पदार्थों का सेवन करें या अपराध की दुनिया में कदम रखें। हर माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर संस्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तम शिक्षा और सुरक्षित भविष्य देने का सपना देखते हैं। विडंबना यह है कि मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त लोग भी अपने बच्चों को नशे से कोसों दूर रखते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन दूसरों के बच्चों को नशे की गिरफ्त में धकेल कर अपने परिवार का भविष्य संवारने का प्रयास करते हैं। यह सामाजिक और नैतिक पतन का सबसे भयावह स्वरूप है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इतिहास गवाह है कि कोई भी युद्ध हो या सामाजिक अभियान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनभागीदारी के बिना उसकी सफलता अधूरी रहती है। सरकारें चाहे कितने ही प्रयास कर लें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि समाज स्वयं जिम्मेदारी नहीं निभाता तो ऐसे अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। यही स्थिति देश में नशा मुक्ति अभियान की भी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र और राज्य सरकारें वर्षों से युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही हैं। समय समय पर कानूनों को सख्त किया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई होती है और जनजागरण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसके बावजूद भारत में मादक पदार्थों का अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। यह हमारे सुरक्षा तंत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक चेतना और सामूहिक जिम्मेदारी तीनों के लिए गंभीर चुनौती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्वीकार करने का समय आ गया है कि नशे की समस्या अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही। यह छोटे शहरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कस्बों और दूरदराज के ग्रामीण अंचलों तक अपने पैर पसार चुकी है। नशे का यह मकड़जाल देश की युवा पीढ़ी को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अत्यंत चिंताजनक है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसके दूरगामी दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतने पड़ेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकारें हर वर्ष अपनी क्षमता के अनुसार नशा मुक्ति के लिए अभियान चलाती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सामाजिक भागीदारी और राजनीतिक एकजुटता के अभाव में इन प्रयासों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता। नशे का कारोबार किसी भी देश के लिए आतंकवाद से कम खतरनाक नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि आतंकवाद सीमित समय और क्षेत्र में नुकसान पहुंचाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि नशा धीरे धीरे पूरी पीढ़ी को भीतर से खोखला कर देता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यदि वास्तव में भारत को नशामुक्त बनाना है तो केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ सभी धर्मों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक संगठनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शैक्षणिक संस्थानों और जागरूक नागरिकों को भी आगे आना होगा। प्रत्येक समाज को अपने बीच छिपे उन लोगों की पहचान करनी होगी जो मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में संलिप्त हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चोरी छिपे नशा बेचते हैं या ऐसे अपराधियों को संरक्षण प्रदान करते हैं। जब तक समाज स्वयं ऐसे तत्वों को बेनकाब कर उनका सामाजिक बहिष्कार नहीं करेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक कोई भी सरकार इस अवैध कारोबार को स्थायी रूप से समाप्त नहीं कर सकती।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज आवश्यकता केवल सरकारी कार्रवाई की नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक जागरण की है। अभिभावकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक नेताओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक संस्थाओं और युवाओं को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ नशे के प्रति घृणा और स्वस्थ जीवन के प्रति सम्मान की भावना विकसित हो। यही वह सामूहिक शक्ति है जो नशे के नेटवर्क को कमजोर कर सकती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश की भावी पीढ़ी को नशे से बचाना केवल सरकार का दायित्व नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पूरे समाज का नैतिक कर्तव्य है। यदि सरकार और समाज कंधे से कंधा मिलाकर इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तभी हम अपनी युवा पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य दे सकेंगे और एक स्वस्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सशक्त तथा नशा मुक्त भारत का निर्माण कर पाएँगे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अरविंद रावल</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 22:52:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हेल्पिंग इंडिया ट्रस्ट ने नशे के खिलाफ डीजीपी से मिलकर सौंपा गया आवेदन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हज़ारीबाग, झारखंड:- </strong>हज़ारीबाग जिले में फैल रहे नशे के कारोबार को लेकर हेल्पिंग इंडिया ट्रस्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इसी क्रम में ट्रस्ट के संस्थापक सह अध्यक्ष शाहिद हुसैन ने झारखंड पुलिस के महानिदेशक से औपचारिक मुलाकात कर विस्तृत आवेदन सौंपा। मुलाकात के दौरान शाहिद हुसैन ने बताया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार तेजी से अपने पांव पसार रहा है। इसका सीधा असर विशेषकर युवा वर्ग पर पड़ रहा है, जिससे न केवल उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि आपराधिक गतिविधियों में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रस्ट</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178251/helping-india-trust-meets-dgp-and-submits-application-against-drugs"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/news-6.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हज़ारीबाग, झारखंड:- </strong>हज़ारीबाग जिले में फैल रहे नशे के कारोबार को लेकर हेल्पिंग इंडिया ट्रस्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इसी क्रम में ट्रस्ट के संस्थापक सह अध्यक्ष शाहिद हुसैन ने झारखंड पुलिस के महानिदेशक से औपचारिक मुलाकात कर विस्तृत आवेदन सौंपा। मुलाकात के दौरान शाहिद हुसैन ने बताया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार तेजी से अपने पांव पसार रहा है। इसका सीधा असर विशेषकर युवा वर्ग पर पड़ रहा है, जिससे न केवल उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है, बल्कि आपराधिक गतिविधियों में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ट्रस्ट के अध्यक्ष शाहिद हुसैन ने कहा कि हेल्पिंग इंडिया ट्रस्ट विगत 4 वर्षों से लगातार नशा के विरुद्ध जागरूकता अभियान चला रहा है तथा नशा कारोबारियों के खिलाफ कड़ी एवं निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित कराने हेतु प्रशासन से लगातार समन्वय स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। ट्रस्ट की ओर से हज़ारीबाग में निःशुल्क सेवा आधारित नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने की प्रस्तावित पहल की भी जानकारी दी गई। शाहिद हुसैन ने बताया कि यह केंद्र विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित होगा, जिससे वे नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर मुख्यधारा में लौट सकेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्तमान में संचालित कई नशा मुक्ति केंद्र व्यावसायिक स्वरूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे गरीब वर्ग के लिए उपचार कठिन हो जाता है। शाहिद हुसैन ने डीजीपी से आग्रह किया कि प्रस्तावित नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना एवं संचालन हेतु आवश्यक प्रशासनिक सहयोग, सुरक्षा एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि इस सामाजिक मुहिम को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाया जा सके। साथ ही, ट्रस्ट ने हज़ारीबाग जिले में नशा तस्करी के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर सख्त, निष्पक्ष एवं निरंतर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 21:06:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समझाइश और सख्ती से बदली तस्वीर अमरावती के नशामुक्त गांवों ने दिखाया नया रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र </strong>के अमरावती जिले के गांवों से निकली यह कहानी केवल एक बदलाव की नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण की कहानी है। कभी शराबखोरी के लिए बदनाम रहे ये गांव आज अनुशासन, आत्मसम्मान और जागरूकता के प्रतीक बन गए हैं। मेलबाट क्षेत्र से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे 19 गांवों को नशामुक्त बना चुका है और अब यही गांव आसपास के 20 गांवों को भी इस दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इन गांवों का अतीत बेहद कठिन था। शराब यहां केवल</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178068/the-picture-changed-through-persuasion-and-strictness-drug-free-villages"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र </strong>के अमरावती जिले के गांवों से निकली यह कहानी केवल एक बदलाव की नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्जागरण की कहानी है। कभी शराबखोरी के लिए बदनाम रहे ये गांव आज अनुशासन, आत्मसम्मान और जागरूकता के प्रतीक बन गए हैं। मेलबाट क्षेत्र से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे 19 गांवों को नशामुक्त बना चुका है और अब यही गांव आसपास के 20 गांवों को भी इस दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। यह परिवर्तन अचानक नहीं आया बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और सामूहिक संकल्प का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन गांवों का अतीत बेहद कठिन था। शराब यहां केवल एक आदत नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुकी थी। पुरुष अपनी मेहनत की कमाई शराब में खर्च कर देते थे, जिससे परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते थे। घरों में झगड़े होते थे, महिलाओं को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया था। सामाजिक स्तर पर भी इन गांवों की छवि खराब हो चुकी थी। रिश्तेदार तक शादी-ब्याह जैसे कार्यक्रमों में इन्हें बुलाने से कतराते थे। यह सामाजिक बहिष्कार धीरे-धीरे लोगों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थिति को बदलने के लिए आदिवासी पंचायत, समाजसेवकों, ग्रामीणों और पुलिस ने मिलकर प्रयास शुरू किए। गांवों में लगातार बैठकें आयोजित की गईं। लोगों को समझाया गया कि नशा उनके शरीर, परिवार और भविष्य के लिए कितना घातक है। शुरुआत में इन प्रयासों का विरोध हुआ। कई लोग अपनी आदत छोड़ने को तैयार नहीं थे, लेकिन समझाइश का सिलसिला रुका नहीं। धीरे-धीरे लोगों की सोच में बदलाव आने लगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब केवल समझाने से बात नहीं बनी तो पंचायत ने सख्ती का रास्ता अपनाया। गांव में शराब पीने वाले और शराब परोसने वाले दोनों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया। यह नियम सभी पर समान रूप से लागू किया गया और इसका कड़ाई से पालन किया गया। इस निर्णय ने लोगों को झकझोर दिया। शुरुआत में लोग डर के कारण शराब से दूर रहने लगे, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने इसके सकारात्मक परिणाम देखे, यह बदलाव उनकी आदत बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगातार सात वर्षों तक चले इस अभियान ने आखिरकार सफलता दिलाई। 19 गांव पूरी तरह नशामुक्त हो गए। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन गई। गांवों में नियमित बैठकों का आयोजन जारी रहा जिससे लोगों को लगातार जागरूक किया जाता रहा। यह निरंतर प्रयास ही इस सफलता की असली ताकत बना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नशा छोड़ने के बाद इन गांवों में सबसे बड़ा बदलाव सामाजिक सम्मान के रूप में देखने को मिला। जिन लोगों को पहले समाज में तिरस्कार झेलना पड़ता था, उन्हें अब सम्मान के साथ स्वीकार किया जाने लगा। शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में उन्हें बुलाया जाने लगा। यह बदलाव उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आर्थिक स्तर पर भी बड़ा परिवर्तन आया। पहले जो पैसा शराब में बर्बाद होता था, अब वही पैसा घर के सुधार, बच्चों की पढ़ाई और बचत में खर्च होने लगा। टूटे-फूटे घरों की जगह पक्के मकान बनने लगे। कई लोगों ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए। कोई किराना दुकान चलाने लगा तो कोई दूध बेचने लगा। इससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस बदलाव का सबसे सकारात्मक असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ा। पहले महिलाएं आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान रहती थीं, लेकिन अब उनके जीवन में स्थिरता आई है। उनके हाथ में पैसे बचने लगे हैं और वे परिवार के निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने लगी हैं। बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलने लगी है। जो बच्चे पहले स्कूल नहीं जा पाते थे, अब वे शहरों में पढ़ाई कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरी कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि जो लोग कभी शराब के आदी थे, वही अब नशामुक्ति के सबसे बड़े प्रचारक बन गए हैं। उन्होंने अपनी गलतियों से सीख ली और अब वे दूसरों को उसी रास्ते पर चलने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने टीम बनाकर आसपास के 20 गांवों में जागरूकता अभियान शुरू किया है। वे गांव-गांव जाकर लोगों को बताते हैं कि शराब किस तरह शरीर और परिवार को नुकसान पहुंचाती है और कैसे इससे बाहर निकलकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनकी बातों का असर इसलिए ज्यादा होता है क्योंकि वे खुद इस अनुभव से गुजर चुके हैं। वे लोगों को केवल सलाह नहीं देते बल्कि अपनी जीवन कहानी साझा करते हैं। यह सच्चाई लोगों को गहराई से प्रभावित करती है और उन्हें सोचने पर मजबूर करती है। आज यह पहल एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। लोग एक-दूसरे को प्रेरित कर रहे हैं और नशामुक्ति को अपनी जिम्मेदारी मान रहे हैं। यह सामूहिक जागरूकता ही इस सफलता की सबसे बड़ी वजह है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में नशे की समस्या एक गंभीर चुनौती है। हर साल हजारों लोग शराब और तंबाकू के कारण अपनी जान गंवाते हैं। इसके बावजूद लोग इस खतरे को नजरअंदाज करते रहते हैं। ऐसे में अमरावती के गांवों की यह पहल एक नई दिशा दिखाती है। यह साबित करती है कि अगर समाज जागरूक हो जाए और मिलकर प्रयास करे तो किसी भी बुराई को खत्म किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">समझाइश और सख्ती का संतुलित मेल इस सफलता की कुंजी रहा है। केवल कानून से बदलाव संभव नहीं होता और केवल समझाने से भी हर बार परिणाम नहीं मिलता। जब दोनों का सही संतुलन बनाया जाता है तब स्थायी परिवर्तन संभव होता है। अमरावती के गांवों ने यही कर दिखाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">आज जब ये गांव दूसरे गांवों को नशामुक्त करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं तो यह स्पष्ट है कि यह पहल केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। यह धीरे-धीरे एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है। अगर देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के प्रयास किए जाएं तो नशामुक्त भारत का सपना साकार हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">अमरावती की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि बदलाव बाहर से नहीं बल्कि भीतर से आता है। जब समाज खुद अपने दोषों को पहचानकर उन्हें सुधारने का प्रयास करता है तो कोई भी समस्या बड़ी नहीं रहती। यह केवल नशामुक्ति की कहानी नहीं बल्कि आत्मसम्मान, एकता और बेहतर भविष्य की दिशा में उठाए गए मजबूत कदम की कहानी है।</div>
<div style="text-align:justify;">        <strong>*कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178068/the-picture-changed-through-persuasion-and-strictness-drug-free-villages</link>
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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:19:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशा न  केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके  विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है : कुलपति</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) में कुलपति प्रो. कविता शाह की अध्यक्षता में छात्र-छात्राओं के लिए नशा मुक्ति शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का आयोजन अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं उनके परिवारों को नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना तथा समाज में जागरूकता फैलाना है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को यह शपथ दिलाई</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176505/addiction-not-only-affects-a-persons-health-but-also-hinders"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर /</strong> सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर) में कुलपति प्रो. कविता शाह की अध्यक्षता में छात्र-छात्राओं के लिए नशा मुक्ति शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम का आयोजन अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. नीता यादव द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों एवं उनके परिवारों को नशीले पदार्थों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना तथा समाज में जागरूकता फैलाना है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को यह शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं नशे से दूर रहेंगे और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि युवा शक्ति यदि संकल्पित हो जाए तो समाज से नशे जैसी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुलपति प्रो. कविता शाह ने अपने उद्बोधन में कहा कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में सकारात्मक सोच अपनाएं, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दें और अपने साथियों को भी नशामुक्त रहने के लिए प्रेरित करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से नशा मुक्ति की शपथ ली और समाज को नशामुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम  युवाओं में जागरूकता फैलाने और सकारात्मक संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 20:04:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाविद्यालय में नशा मुक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत  व्याख्यानमाला का  आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नैनी प्रयागराज में  दिनांक 28 मार्च 2026 को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश की अध्यक्षता में नशा मुक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत 'नशा मुक्ति में युवाओं की भूमिका' विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के  छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर के भागीदारी की ,इसमें छात्र-छात्राओं को नशे से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्राचार्य ने कहा  कि नशा हमारे जीवन और समाज दोनों के लिए घातक है, युवा होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम न केवल स्वयं नशे से दूर रहें बल्कि दूसरों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174472/organization-of-lecture-series-under-drug-de-addiction-program-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas18.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong> हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नैनी प्रयागराज में  दिनांक 28 मार्च 2026 को महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश की अध्यक्षता में नशा मुक्ति कार्यक्रम के अंतर्गत 'नशा मुक्ति में युवाओं की भूमिका' विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के  छात्र-छात्राओं ने बढ़ चढ़कर के भागीदारी की ,इसमें छात्र-छात्राओं को नशे से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राचार्य ने कहा  कि नशा हमारे जीवन और समाज दोनों के लिए घातक है, युवा होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम न केवल स्वयं नशे से दूर रहें बल्कि दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। समाजशास्त्र विभाग के विभाग प्रभारी डॉ. धीरेंद्र सिंह ने कहा कि नशा अक्सर अपराध को बढ़ाता है युवा इसके खिलाफ आवाज उठाकर समाज को सुरक्षित बना सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ.इंदु प्रकाश सिंह ने बताया यदि युवा स्वयं नशे से दूर रहें तभी दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं अंत में डॉ.जयराम त्रिपाठी ने नशा उन्मूलन में एक स्वस्थ और समृद्ध समाज के निर्माण के लिए युवाओं की भागीदारी की अनिवार्यता पर जोर दिया ।इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में राजनीति शास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो.हेमलता डॉ राजेश,ऋषि प्रताप सिंह एवं संदीप सामंत सिंह की सक्रिय भूमिका रही इसमें छात्र छात्राओं समेत समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 20:54:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नशा मुक्त हो मेरा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>दिल पे </strong>नशा ये भारी है, सबसे बडी बीमारी है। कुछ पल का नशा सारी उम्र की सजा। फिक्रमंदी बैगर अच्छे-अच्छों को नशे का नशा हो जाता है। नशा चीज ही ऐसी है भाई! फिर क्यों नशे का नशा ना हो। गुमानी में जिधर देखो ऊधर नशा ही है। रसास्वादन के चस्के से चिपके रहना हर कोई चाहता है। आगोश में दिल का दस्तुर, दौलत का गुरूर, शिरत का शुरूर, ताकत का मगरूर और सुरत का फित्तुर सिर चढकर बोलता। है। बरबस नशाखोरी की मदहोशी में अंगूर की बेटी हल्क में उतर जाए तो समझो सारी दुुनिया टल्लियों की मुठ्ठी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131422/may-my-india-be-drug-free"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/img_20230624_105721.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिल पे </strong>नशा ये भारी है, सबसे बडी बीमारी है। कुछ पल का नशा सारी उम्र की सजा। फिक्रमंदी बैगर अच्छे-अच्छों को नशे का नशा हो जाता है। नशा चीज ही ऐसी है भाई! फिर क्यों नशे का नशा ना हो। गुमानी में जिधर देखो ऊधर नशा ही है। रसास्वादन के चस्के से चिपके रहना हर कोई चाहता है। आगोश में दिल का दस्तुर, दौलत का गुरूर, शिरत का शुरूर, ताकत का मगरूर और सुरत का फित्तुर सिर चढकर बोलता। है। बरबस नशाखोरी की मदहोशी में अंगूर की बेटी हल्क में उतर जाए तो समझो सारी दुुनिया टल्लियों की मुठ्ठी में। </p>
<p style="text-align:justify;">मिला मौका हाथ से क्यों जाने दे, क्योंकि ये कोई दबाने की नहीं बल्कि रौब-रूदबे दिखाने की धधक का प्रदर्शन जो है। साथ बहाना भी बखुब है जनाब! मुझे पीने का शौक नहीं, पीता हूँ गम भुलाने को या मजे लेने को जो कुछ भी कहलिजिए मर्जी अपनी-अपनी। किन्तु खुदगर्जी में यह याद अवश्य रखे कि नशा, शान नहीं वरन् नाश का सबब है।</p>
<p style="text-align:justify;">     बदसतुर, देश में नाबालिगों का नशे के प्रति बढता आकर्षण अंत्यत दुखदायी, चिंताजनक व विनाशकारी है। जिसकी कल्पना मात्र से ही रूहूं काप जाती है। मामला बहुत पेचीदा है। समस्या देखने में छोटी व सोचने में बडी और निपटारे में तगडी है। वजह साफ है लाखों जिंदगियों के साथ घरों के घर बर्बाद होते जा रहे है। इसके कार्य-कारक और जिम्मेदार हम अपने आपको मानते है या नहीं यह यक्ष प्रश्न आज भी निरूत्तर बना हुआ है। </p>
<p style="text-align:justify;">आह्लादित फैशन व व्यसन से तरबतर आधुनिक युग में शादी-बरात का शराबी फुहड नाच हमारी सामाजिक मान-मर्यादा को जार-जार कर रहा है। बावजूद हम शान से नशे के नशा का बेशर्मी से लुत्फ उठा रहे है। जानते हुए कि नशा स्वंय के साथ परिवार, समाज और पूरे देश को निगल कर तबाह करते जा रहा है बाबजूद नशाखोरी की रनबेरी जोरों पर जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">       गौरतलब हो कि नशे का आगाज आमतौर पर दोस्ती-यारी के कस्में वादों की मजबूरियोंं की बैशाखी पर कमसिन उम्र अच्छे-बुरे की सोच से बेखबर महफिल की खुशी और मर्दानगी के वास्ते होता है। जो आगे चलकर नासुर लत बनकर आदतन अपराधी बनाने की कब्रगाह बन जाती है। निकला नशीला बारूद नशे की गुलामी में जकडकर सामाजिक-आर्थिक-मानसिक और शारीरिक तौर पर नशेडी को अपना निवाला बना लेता है। </p>
<p style="text-align:justify;">जो अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में फसकर आजादी की तमना लिए जमींजोद होकर रह जाता है। बजाए नशा का चलन घटने के अफरातीन शानो-शौकत से बढते ही जा रहा है। अफरातफरी में कारगुजारी वाले नशे के कारोबार ने दिनदुनी रात चौगनी तरक्की कर सारी दुनिया में अपना डंका बजा दिया । तभी तो जिसे देखो वह एम्पोर्ट और एक्सपोर्ट की दुहाई देते नहीं थकता। तरफदारी में एक का दो करने की जुगत में नशीले घातक पदार्थो के अंदर बाहर का खेल चरम पर है।</p>
<p style="text-align:justify;">        जहां तक बात है, नशे के रूप की तो सौदागरों ने यहां भी बाजी मारी है। इनके तरकश के तीरों में पुरातन शराब, तम्बाखू, बीडी, सिगरेट, हुक्का, गांजा, अफीम, चरस के साथ ताजातरीन कोकिन, ब्राउन शुगर, हेरोइन, गुटका पाऊच, फेवीक्विक, सेलुसन, पेट्रोल, नींद-खांसी की दवायें और सर्प विष इत्यादि बेशुमार मादक असला है। उन्माद में नशे की लत जो जारी है ये बहुत ही अत्याचारी है, मेलें लगते है शमशानों में आज इसकी तो कल उसकी बारी है। </p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में चारों तरफ है, हाहाकार बंद नशे का हो बाजार। उम्मीदें हो रही तार-तार और नशा बनते जा रहा है विकराल व्याभिचार, चंगुल में फस गए बेगुनाह बीमार हजार। अलबत्ता परहेज करने के सरकारों ने तिजोरी भरने खुलेयाम बनाऐ रखे है ठेकेदार।</p>
<p style="text-align:justify;">     सरोकार, अब अभिशाप बन चुके नशे को नाश करने जिदंगी को हां और नशे का ना हर हाल में कहना ही पडेगा। वरना घर बिखरते, बच्चे बिछडते, मांग उजडते, जहर फैलते, रोगी बनते, सम्मान घटते और भविष्य पिछडते देर नहीं लगेगी। बेहतर नशे को छोडो, रिश्ते जोडो और बीमारी को लताडो। तभी हर दिल की अब ये चाहत नशा मुक्त हो मेरा भारत सार्थक होगी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>हेमेन्द्र क्षीरसागर, लेखक व स्तंभकार</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2023 20:08:41 +0530</pubDate>
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