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                <title>ALLAHABAD HIGH COURT - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>ALLAHABAD HIGH COURT RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुख्य न्यायमूर्ति उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अन्य न्यायमूर्तिगणों के साथ उच्च न्यायालय परिसर में पौधे का किया रोपण।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">
<div>  </div>
<div>वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ के अन्तर्गत रविवार को माननीय मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय श्री अरूण भंसाली जी ने अन्य माननीय न्यायमूर्तिगणों के साथ माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद परिसर में पौधरोपण किया।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;">  </div>
<div class="adL">  </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183315/chief-justice-high-court-allahabad-along-with-other-justices-planted"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260712-wa0191.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong></div>
<div style="text-align:justify;">
<div> </div>
<div>वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ के अन्तर्गत रविवार को माननीय मुख्य न्यायमूर्ति इलाहाबाद उच्च न्यायालय श्री अरूण भंसाली जी ने अन्य माननीय न्यायमूर्तिगणों के साथ माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद परिसर में पौधरोपण किया।</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
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</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 20:10:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> उच्च न्यायालय का बड़ा आदेश: पुलिस एसआई भर्ती में विवादित ऊंचाई मापी जाएगी, वीडियोग्राफी अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>सचिन बाजपेई </strong><br /><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर सिविल पुलिस भर्ती 2025 में ऊंचाई मापने को लेकर उठे विवाद में याचिकाकर्ता   शुभम शर्मा को महत्वपूर्ण राहत देते हुए उनकी ऊंचाई दोबारा मापने का आदेश दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकलपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता शुभम शर्मा की ऊंचाई 6 जुलाई 2026 को सुबह 11:30 बजे लखनऊ स्थित रिजर्व पुलिस लाइंस में विशेषज्ञों की पैनल द्वारा दोबारा मापी जाए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाएगी और रिपोर्ट अदालत में 16 जुलाई 2026 को पेश की</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182684/big-order-of-high-court-controversial-height-measurement-in-police"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/high-court-lucknow.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>सचिन बाजपेई </strong><br /><strong>लखनऊ।</strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस सब-इंस्पेक्टर सिविल पुलिस भर्ती 2025 में ऊंचाई मापने को लेकर उठे विवाद में याचिकाकर्ता   शुभम शर्मा को महत्वपूर्ण राहत देते हुए उनकी ऊंचाई दोबारा मापने का आदेश दिया है। </p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकलपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता शुभम शर्मा की ऊंचाई 6 जुलाई 2026 को सुबह 11:30 बजे लखनऊ स्थित रिजर्व पुलिस लाइंस में विशेषज्ञों की पैनल द्वारा दोबारा मापी जाए। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाएगी और रिपोर्ट अदालत में 16 जुलाई 2026 को पेश की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में शुभम शर्मा ने आरोप लगाया था कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण में उनकी ऊंचाई गलत तरीके से 167.0 सेमी और 167.1 सेमी मापी गई, जबकि आगरा जिला अस्पताल के मेडिकल अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र में उनकी ऊंचाई 168.2 सेमी बताई गई है। याचिकाकर्ता ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन दोबारा मापने पर भी वही ऊंचाई दर्ज की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने याचिकाकर्ता के आगरा जिला अस्पताल के प्रमाण-पत्र को गंभीरता से लिया और मामले में हस्तक्षेप किया। राज्य की ओर से अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील ने तर्क दिया कि ऊंचाई मापने की उचित प्रक्रिया है और आपत्ति पर दोबारा माप लिया गया था, इसलिए अदालती हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता सुभाष चन्द्र यादव  ने याची की तरफ से पूरा मामला कोर्ट को बताया जिसपर कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर विचार योग्य पाया और ऊंचाई मापने की नई प्रक्रिया शुरू करने का आदेश पारित किया। अधिवक्ता सुभाष चन्द्र यादव के पक्ष में यह आदेश  भर्ती प्रक्रिया के लिए प्रेरणा दायक बन सकता है l </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>यह आदेश उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो भर्ती परीक्षा में ऊंचाई मापने को लेकर विवाद में फंस जाते हैं। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:46:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मदरसों की ATS जांच पर रोक से इनकार, टीचर्स एसोसिएशन की याचिका खारिज।</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div>  </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div>  </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182665/big-decision-of-allahabad-high-court-refusal-to-ban-ats"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/ald.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात  </strong></div>
<div><strong>प्रयागराज। </strong></div>
</blockquote>
</div>
<div> </div>
<div>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ATS की जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी।</div>
<div> </div>
<div>याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश के विभिन्न मदरसों में ATS द्वारा की जा रही जांच से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी। हालांकि, डिवीजन बेंच ने मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए याचिका को ही खारिज कर दिया।</div>
<div> </div>
<div>अदालत के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि प्रदेश में मदरसों को लेकर ATS की ओर से चल रही जांच पर फिलहाल कोई न्यायिक रोक नहीं रहेगी और जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई जारी रख सकेगी।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:41:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भी ब्लॉक-8 पार्क पर कार्रवाई नहीं, शासन पहुंची शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181568/government-did-not-take-action-on-block-8-park-even-after"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1002015129.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> गोविन्द नगर के ब्लॉक-8 स्थित रामदेवी आर्य पार्क का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। पार्क पर हुए अतिक्रमण, कंक्रीट निर्माण, धार्मिक संरचनाओं के विस्तार तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में कथित शिथिलता को लेकर नगर विकास मंत्री कार्यालय ने मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को अग्रिम कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जनहित याचिका संख्या 1023/2026 के याचिकाकर्ता एवं गोविन्द नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य द्वारा भेजे गए विस्तृत प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि नगर निगम एवं केडीए के अभिलेखों में सार्वजनिक पार्क एवं ओपन स्पेस के रूप में दर्ज भूमि पर वर्षों से अवैध कब्जे और निर्माण कार्य होते रहे, लेकिन संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय प्रकरणों का निस्तारण कागजों तक सीमित रखते रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उल्लेखनीय है कि इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 22 अप्रैल 2026 को पारित आदेश में ब्लॉक-8 स्थित पार्क में हुए निर्माण कार्यों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि जिस भूमि को पार्क एवं खेल मैदान के रूप में सुरक्षित रखा गया हो, वहां निर्माण और अतिक्रमण किस प्रकार होने दिया गया। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्कों और खुले स्थानों को अतिक्रमण मुक्त रखा जाए तथा किए गए अतिक्रमणों को हटाकर उन्हें उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकाश वीर आर्य का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रति 29 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त कराए जाने के बावजूद अब तक पार्क को अतिक्रमण मुक्त कराने अथवा उसके मूल स्वरूप की बहाली के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत पार्क क्षेत्र में नई गतिविधियों और कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रकरण का एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब केस्को को लिखित शिकायत और न्यायालयीय आदेशों की जानकारी दिए जाने के बावजूद पार्क में स्थित विवादित धार्मिक संरचना पर नया विद्युत संयोजन स्थापित कर दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सार्वजनिक पार्क की विवादित भूमि पर स्थित संरचनाओं को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने से अवैध कब्जों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलता है तथा भविष्य में ऐसे कब्जों को स्थायित्व प्रदान करने का आधार तैयार होता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र में पार्क में अवैध रूप से निर्मित कंक्रीट ढांचों एवं इंटरलॉकिंग को हटाकर पूरे क्षेत्र को पुनः पार्क के रूप में विकसित करने, नए कब्जों एवं मूर्ति स्थापना पर तत्काल रोक लगाने, विद्युत संयोजन प्रकरण की जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों एवं अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। नगर विकास मंत्री कार्यालय द्वारा मामले को प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भेजे जाने के बाद अब क्षेत्रीय नागरिकों की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेशों और शासन स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बाद भी पार्क को उसका मूल स्वरूप नहीं मिल पाता, तो यह सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:45:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;CCTV बंद करके खोले जाते हैं गुल्लक...&quot;; फलाहारी महाराज ने CM योगी को खून से लिखा खत, मंदिर प्रबंधन कमेटी पर लगाये गंभीर आरोप।</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण में जांच के बाद मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के चढ़ावे को लेकर सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने बुधवार को खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की है. इस दौरान उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखा है. उन्होंने मंदिर प्रबंधन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181542/gullaks-are-opened-after-closing-cctv-falahari-maharaj-wrote-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas9.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।</span></strong></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा प्रकरण में जांच के बाद मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के चढ़ावे को लेकर सीबीआई जांच की मांग उठने लगी है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने बुधवार को खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की है. इस दौरान उन्होंने गंभीर आरोप लगाए हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास समिति अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखा है. उन्होंने मंदिर प्रबंधन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में दाने के रुपये</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चढ़ावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आभूषणों को सीसीटीवी कैमरे बंद करके प्रबंधन कमेटी वाले लोग बंदरबांट करके करोड़ों की गाड़ियों और कोठियों में प्रस्थान कर गये हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाया कि जो प्रबंधन कमेटी वाले पहले स्कूटर पर आते थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज करोड़ों की गाड़ियों में चलते हैं. करोड़ों के बंगला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोठी और फाॅर्म हाउस हैं. उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश ही नहीं उत्तराखंड में भी इन लोगों ने जमीनें खरीदी हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की जांच होनी चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर ऐसा नहीं किया गया तो वह प्रयागराज हाईकोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्होंने आरोप लगाया कि जिस समय गुल्लक खुलता है वहां के सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है. यह बहुत ही दुखद है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस प्रबंधन को अपने हाथ में ले लें.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जन्मभूमि सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने इस प्रकरण में कुछ भी बोलने से मना कर दिया और कहा मंदिर में जो चढ़ावा आता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसका लिखित में लेखा-जोखा दर्ज किया जाता है. इन लोगों की बातें निराधार हैं.</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:02:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">  कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180333/no-disturbance-of-public-peace-within-the-four-walls"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/allahabad-high-court1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1980 (एनएसए</span>) <span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-</span>II <span lang="hi" xml:lang="hi">की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें केवल एक गाय की हत्या शामिल थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके कारण न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई खलल पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा</span>, "<span lang="hi" xml:lang="hi">उपर्युक्त चर्चा के आलोक में यह अकाट्य निष्कर्ष निकलता है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एनएसए</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के तहत जारी हिरासत आदेश न तो कानून की दृष्टि से और न ही तथ्यों के आधार पर कायम रखा जा सकता है। अतः</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह आदेश इस न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने योग्य है।"</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत जारी करने वाले प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शामली) ने मूल रूप से एनएसए की धारा 3(2) के तहत विवादित हिरासत आदेश जारी किया। यह आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी गोहत्या निवारण अधिनियम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">1955</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा 3</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">5</span>A <span lang="hi" xml:lang="hi">और 8 के तहत दर्ज </span><span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के आधार पर जारी किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत के कारणों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पुलिस को 23 अप्रैल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को शिकायतकर्ता से सूचना मिली थी कि कुछ लोग गोहत्या कर रहे हैं। घर के भीतर तलाशी लेने पर पुलिस को एक कटा हुआ सिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाल और मांस बरामद हुआ। पशु चिकित्सक द्वारा किए गए वैज्ञानिक परीक्षण के बाद बरामद मांस की पहचान </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बीफ</span>' (<span lang="hi" xml:lang="hi">गोमांस) के रूप में हुई।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">शेष सामग्री की पहचान गाय की संतान (बछड़े/बछिया) के अवशेषों के रूप में की गई। जहां आरोपी हासिम को अगले ही दिन (24 अप्रैल) गिरफ्तार कर लिया गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं आरोपी समीर को 27 जून को ही गिरफ्तार किया जा सका।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आगे भेजी गई रिपोर्ट मिलने पर ज़िला मजिस्ट्रेट ने 7 जुलाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">2025 को हिरासत के आदेश जारी किए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ताओं को 12 महीने की अवधि के लिए हिरासत में रखा जाए। राज्य सरकार ने आखिरकार 19 अगस्त को इस आदेश की पुष्टि की। </span><span lang="hi" xml:lang="hi">   </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हिरासत को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं के वकील गौतम बघेल ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं का कथित कृत्य उनके घर की सीमाओं के बाहर नहीं हुआ। इसलिए यह निजी तौर पर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों की नज़र से दूर किया गया। यह भी कहा गया कि प्रतिवादियों द्वारा दायर जवाबी हलफनामे में ऐसा कोई दावा नहीं था कि याचिकाकर्ता के कृत्य के कारण कोई सांप्रदायिक हिंसा हुई हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक शांति भंग हुई हो या किसी व्यक्ति को चोट लगी हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उपरोक्त के परिणामस्वरूप</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न तो कोई हिंसा हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">न ही सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में कोई बाधा आई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और न ही सांप्रदायिक सौहार्द में कोई खलल पड़ा।" इसलिए इस निष्कर्ष पर पहुंचते हुए कि हिरासत का आदेश न तो कानून की नज़र में और न ही तथ्यों के आधार पर सही ठहराया जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेंच ने हिरासत के आदेश को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए पुष्टि आदेश को भी रद्द कर दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/180333/no-disturbance-of-public-peace-within-the-four-walls</link>
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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 22:21:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नोएडा हिंसा मामला: 'हाईकोर्ट जाइए, यहां पहले ही 93000 केस लंबित'</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार एक छात्रा को जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील से कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में जाएं। पीठ ने कहा, आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके यहां आता है। सुप्रीम कोर्ट में 93 हजार मामले पहले से ही  लंबित हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आकृति चौधरी के वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178831/noida-violence-case-go-to-high-court-already-93000-cases"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/noida-1778235469797.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नोएडा में 13 अप्रैल को हुए मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार एक छात्रा को जमानत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील से कहा कि वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में जाएं। पीठ ने कहा, आप हाईकोर्ट क्यों नहीं जाते? हर कोई अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके यहां आता है। सुप्रीम कोर्ट में 93 हजार मामले पहले से ही  लंबित हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आकृति चौधरी के वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस ने गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए और जमानत की मांग की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं। शीर्ष कोर्ट ने केशव आनंद नाम के व्यक्ति की याचिका पर पुलिस अधिकारियों को नोटिस भी जारी किया, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस पर प्रताड़ना का आरोप लगाया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा की एक कोर्ट ने पहले तीन महिलाओं आकृति चौधरी, मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता की शर्तों के साथ पुलिस रिमांड की अनुमति दी थी। इन पर 13 अप्रैल के औद्योगिक मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच के दौरान उनके वकीलों को मौजूद रहने की अनुमति होगी। आकृति चौधरी और सृष्टि गुप्ता दोनों दिल्ली की रहने वाली हैं और उनकी उम्र 20 के आसपास है।चौधरी ने दौलत राम कॉलेज से इतिहास में स्नातकोत्तर किया है, जबकि मनीषा नोएडा की एक औद्योगिक इकाई में काम करती हैं।पुलिस ने हिरासत के लिए दायर आवेदन में कहा था कि आरोपियों के घर से अहम साक्ष्य मिलने की पूरी संभावना है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नोएडा में पिछले महीने फैक्टरी मजदूरों का विरोध प्रदर्शन वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, कई औद्योगिक इकाइयों के मजदूर लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग को लेकर इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। हालांकि, यह प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया क्योंकि कुछ लोगों ने कथित तौर पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, पत्थर फेंके और एक वाहन में आग लगा दी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178831/noida-violence-case-go-to-high-court-already-93000-cases</link>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 22:22:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाबालिग स्टूडेंट को बुर्का पहनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव के आरोपी स्टूडेंट को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद।हाईकोर्ट ने स्कूली स्टूडेंट को अग्रिम जमानत दी, जिस पर आरोप है कि उसने नाबालिग स्टूडेंट का कथित रूप से ब्रेनवॉश कर उसे बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला। जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने आरोपी स्टूडेंट मालिश्का उर्फ मालिश्का फातमा को राहत देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया गया। FIR पीड़िता</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178545/student-accused-of-forcing-minor-student-to-wear-burqa-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/download2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद।हाईकोर्ट ने स्कूली स्टूडेंट को अग्रिम जमानत दी, जिस पर आरोप है कि उसने नाबालिग स्टूडेंट का कथित रूप से ब्रेनवॉश कर उसे बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला। जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने आरोपी स्टूडेंट मालिश्का उर्फ मालिश्का फातमा को राहत देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया गया। FIR पीड़िता के भाई ने दर्ज कराई। उसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी ने उसकी नाबालिग बहन का धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से उसका ब्रेनवॉश किया। यह भी कहा गया कि 20 दिसंबर 2025 को उसे जबरन बुर्का दिया गया और लगातार धर्म बदलने का दबाव बनाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि पीड़िता के बयान से स्पष्ट है कि उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जा रहा था। FIR दर्ज करने में देरी के संबंध में यह दलील दी गई कि पीड़िता आरोपी के प्रभाव में थी, इसलिए जानकारी मिलने में समय लगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं आरोपी की ओर से कहा गया कि वह पीड़िता से पहले से उसी विद्यालय में पढ़ रही थी और उसके खिलाफ किसी अन्य छात्रा को धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने की कोई शिकायत नहीं है। अदालत को यह भी बताया गया कि मामले के मुख्य आरोप सह-अभियुक्त अलीना के खिलाफ हैं, जिसे हाईकोर्ट की समन्वय पीठ पहले ही अग्रिम जमानत दे चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने पाया कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और पीड़िता के बयान के अलावा उसके खिलाफ अन्य स्वतंत्र साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही अदालत ने माना कि आरोपी के फरार होने की संभावना कम है तथा उसने जांच और ट्रायल में सहयोग का आश्वासन दिया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी स्टूडेंट को अग्रिम जमानत दी।।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:07:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तत्कालीन BJP MLA आरसी यादव के खिलाफ 2012 के दंगा मामले को वापस लेने की हाईकोर्ट ने दी अनुमति</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178543/high-court-gives-permission-to-withdraw-2012-riots-case-against"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज किया गया था, जिसमें 2012 की मूर्ति विसर्जन दंगा घटना के संबंध में BJP विधायक (रुदौली से) राम चंद्र यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा वापस लेने की मांग की गई थी। मुकदमा वापस लेने के राज्य का अनुरोध स्वीकार करते हुए जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का आवेदन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद सद्भावना में" दायर किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह आदेश विधायक यादव द्वारा दायर CrPC की धारा 482 के तहत याचिका और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया। संक्षेप में मामला अभियोजन पक्ष के मूल मामले के अनुसार, 24 अक्टूबर, 2012 को मूर्तियां विसर्जन के लिए ले जा रहे कुछ ट्रैक्टरों के कारण रुदौली पुलिस स्टेशन के सामने ट्रैफिक जाम हो गया। हालांकि, पुलिस ने ड्राइवरों को आगे बढ़ने का निर्देश दिया, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह दावा किया गया कि आवेदक उस समय स्थानीय विधायक थे। उन्होंने उन्हें निर्देश दिया था कि वे मूर्तियों को वहीं रोककर रखें, जब तक कि वह पुलिस स्टेशन के सामने न पहुंच जाएं। इसके कारण, घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद जब विधायक यादव घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने पुलिस को बताया कि जब श्रद्धालु एक मस्जिद के पास से गुजर रहे थे, तो दूसरे समुदाय का एक लड़का गलती से रंग से सराबोर हो गया। कथित तौर पर इसके कारण गाली-गलौज और झगड़ा हुआ, जिसके दौरान एक मूर्ति भी टूट गई।</p>
<p style="text-align:justify;">एफआईआर  में आरोप लगाया गया कि आवेदक ने भड़काऊ बयान दिए। यह मांग की कि जुलूस आगे बढ़ने से पहले दोषियों को दंडित किया जाए। हालांकि, बाद में उनकी सलाह पर ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो गई, लेकिन तब तक गाँव में लगभग 2,000 से 3,000 लोग जमा हो चुके थे। इसके बाद आवेदक की कथित उकसाहट पर 250-300 लोग उस गाँव की ओर बढ़ने लगे, जहां दूसरे समुदाय के लोगों के साथ विवाद हुआ था।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">शुरुआत में, बेंच ने CrPC की धारा 321 के प्रावधानों के साथ-साथ इस प्रावधान पर सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों की जांच करते हुए पाया कि मुकदमा वापस लेने की अनुमति देने के लिए अंतिम मार्गदर्शक विचार हमेशा न्याय प्रशासन का हित ही होना चाहिए। बंसी लाल बनाम चंदन लाल और शिवनंदन पासवान बनाम बिहार राज्य जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को स्वतंत्र रूप से अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी गलत मकसद से न्याय की सामान्य प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहिए। CrPC की धारा 482 के तहत अर्जी, मुकदमा वापस लेने की अर्जी, और साथ ही आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 22:04:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अवैध जब्ती और जल्दबाज़ी में नीलामी पर राज्य सरकार को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाRकोर्ट ने कथित गौ-तस्करी के अप्रमाणित आरोप में वाहन जब्त कर जल्दबाज़ी में नीलाम करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए वाहन स्वामी को कम-से-कम 2 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने जब्ती और ज़ब्ती से जुड़े आदेश रद्द करते हुए कहा कि राज्य की कार्रवाई मनमानी, अवैध और कानून के विपरीत थी। जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि यदि राज्य सरकार वाहन वापस नहीं कर सकती तो उसे वाहन स्वामी को अतिरिक्त 4 लाख रुपये वाहन मूल्य के रूप में देने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले के अनुसार 8 सितंबर 2024 को चंदौली जिले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178295/state-government-shocked-by-illegal-seizure-and-hasty-auction"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/images3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाRकोर्ट ने कथित गौ-तस्करी के अप्रमाणित आरोप में वाहन जब्त कर जल्दबाज़ी में नीलाम करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए वाहन स्वामी को कम-से-कम 2 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने जब्ती और ज़ब्ती से जुड़े आदेश रद्द करते हुए कहा कि राज्य की कार्रवाई मनमानी, अवैध और कानून के विपरीत थी। जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि यदि राज्य सरकार वाहन वापस नहीं कर सकती तो उसे वाहन स्वामी को अतिरिक्त 4 लाख रुपये वाहन मूल्य के रूप में देने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले के अनुसार 8 सितंबर 2024 को चंदौली जिले में पुलिस ने याचिकाकर्ता चंद्रभान कुमार के व्यावसायिक वाहन को कथित गौ-तस्करी की सूचना पर रोका था। वाहन से 10 जीवित गोवंश बरामद होने का दावा करते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम, 1955 तथा पशु क्रूरता निवारण कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने यह कहते हुए वाहन जब्त कर लिया कि गोवंश को वध के लिए बिहार ले जाया जा रहा था, जबकि वाहन बिहार सीमा के निकट पकड़ा गया। बाद में आयुक्त ने भी जब्ती आदेश बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान, अपील लंबित रहते हुए प्रशासन ने वाहन की नीलामी मात्र 85 हजार रुपये में कर दी जबकि याचिकाकर्ता के अनुसार वाहन का बाजार मूल्य 7 लाख रुपये से अधिक था।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के भीतर गोवंश के परिवहन के लिए किसी परमिट की आवश्यकता नहीं है और केवल बिहार सीमा के निकट वाहन पकड़े जाने से यह मान लेना कि पशुओं को वध हेतु बाहर ले जाया जा रहा था उचित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने टिप्पणी की, “संदेह चाहे कितना भी प्रबल हो, वह कानूनी प्रमाण का स्थान नहीं ले सकता।” अदालत ने यह भी कहा कि कार्यवाही लंबित रहते वाहन की नीलामी करना और वह भी इतनी कम कीमत पर प्रशासन की स्पष्ट मनमानी को दर्शाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने माना कि इससे याचिकाकर्ता को गंभीर आर्थिक नुकसान हुआ, क्योंकि वाहन उसकी आजीविका का मुख्य साधन है। पशुओं के प्रति क्रूरता के आरोपों पर भी अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने ऐसा कोई ठोस निष्कर्ष दर्ज नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि पशुओं को ऐसी शारीरिक चोट पहुंची थी, जिससे उनके जीवन को खतरा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार जब्ती की तारीख से वाहन वापसी तक 15 हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक क्षति के रूप में और 20 हजार रुपये मानसिक पीड़ा व उत्पीड़न के लिए अदा करे।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि वाहन वापस नहीं किया जाता है तो सरकार को 4 लाख रुपये वाहन मूल्य के अतिरिक्त अधिकतम 12 माह की अवधि तक मासिक क्षतिपूर्ति भी देनी होगी। अदालत ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता भी दी कि वह यह राशि उन अधिकारियों से वसूल सकती है, जिन्होंने मनमानी कार्रवाई को मंजूरी दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 22:56:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौजूद ही नहीं जो कानून, उसी के तहत दे दिया तलाक</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक डिक्री रद्द करते हुए कड़ी टिप्पणी की कि अदालत ने ऐसे कानून के तहत तलाक दिया, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारी के फैसले को अत्यंत लापरवाह और अनौपचारिक बताते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सारन की खंडपीठ ने यह आदेश पति की अपील पर पारित किया, जिसने जनवरी 2026 में फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक आदेश को चुनौती दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में पत्नी ने अपनी याचिका मुस्लिम स्त्री विवाह विच्छेद अधिनियम, 1986 के तहत</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178293/divorced-under-a-law-that-does-not-exist"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/allahabad_high_court_1733678481057_1777910120637.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक डिक्री रद्द करते हुए कड़ी टिप्पणी की कि अदालत ने ऐसे कानून के तहत तलाक दिया, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारी के फैसले को अत्यंत लापरवाह और अनौपचारिक बताते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सारन की खंडपीठ ने यह आदेश पति की अपील पर पारित किया, जिसने जनवरी 2026 में फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक आदेश को चुनौती दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले में पत्नी ने अपनी याचिका मुस्लिम स्त्री विवाह विच्छेद अधिनियम, 1986 के तहत दायर की थी जबकि ऐसा कोई कानून अस्तित्व में ही नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि संभवतः याचिका में मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 का उल्लेख होना चाहिए, जो मुस्लिम महिलाओं को तलाक मांगने का अधिकार देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि केवल याचिका में गलत कानून का उल्लेख होने से आदेश स्वतः अवैध नहीं हो जाता, यदि ट्रायल कोर्ट सही कानून के तहत अधिकार प्रयोग करे। हालांकि, इस मामले में फैमिली कोर्ट ने स्वयं अपने पूरे निर्णय में बार-बार उसी गैर-मौजूद कानून का उल्लेख किया और उसी के तहत राहत भी प्रदान की।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट ने कहा, “यह सुनिश्चित करना अदालत का दायित्व है कि जिस कानून का वह उल्लेख कर रही है, वह वास्तव में अस्तित्व में हो। केवल याचिका में हुई त्रुटि ट्रायल कोर्ट को वही गलती दोहराने का अधिकार नहीं देती।”</p>
<p style="text-align:justify;">खंडपीठ ने कहा कि अस्तित्वहीन कानून के आधार पर दिया गया निर्णय विधि और तथ्य दोनों की दृष्टि से दोषपूर्ण है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए मामला पुनः उसी अदालत को भेज दिया और निर्देश दिया कि वह सही कानूनी प्रावधानों के तहत नया निर्णय पारित करे।</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने स्पष्ट किया कि नए सिरे से पूरा ट्रायल नहीं होगा और फैमिली कोर्ट उपलब्ध साक्ष्यों व रिकॉर्ड के आधार पर ही निर्णय दे सकती है, जब तक उसे अतिरिक्त साक्ष्य की आवश्यकता न लगे। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को तीन माह के भीतर नया फैसला देने का निर्देश दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 22:54:31 +0530</pubDate>
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                <title>मस्जिद ध्वस्तीकरण नोटिस पर हाईकोर्ट सख्त</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट में मस्जिद ध्वस्तीकरण नोटिस को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने फिलहाल मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए प्रशासन को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से रोक दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह याचिका वक्फ मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और यह कार्रवाई मनमानी तथा अवैध है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178183/high-court-strict-on-mosque-demolition-notice"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260504-wa0086-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">इलाहाबाद हाईकोर्ट में मस्जिद ध्वस्तीकरण नोटिस को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने फिलहाल मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए प्रशासन को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने से रोक दिया है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह याचिका वक्फ मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और यह कार्रवाई मनमानी तथा अवैध है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को गंभीरता से सुना। अदालत ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा कि नोटिस जारी करने से पहले किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को भी अपने पक्ष में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिससे संबंधित स्थल पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ या प्रशासनिक कार्रवाई पर फिलहाल रोक लग गई है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई को निर्धारित की है। उस दिन दोनों पक्षों को विस्तृत रूप से अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। इस आदेश के बाद फिलहाल क्षेत्र में स्थिति शांत बनी हुई है, जबकि दोनों पक्ष अगली सुनवाई की तैयारी में जुट गए हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 22:06:10 +0530</pubDate>
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