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                <title>संपत्ति विवाद - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>संपत्ति विवाद RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नौबस्ता थाना क्षेत्र के हंसपुरम आवास विकास इलाके में पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित प्रदीप तिवारी ने चौकी इंचार्ज आवास विकास हंसपुरम को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">पुरानी बस्ती नौबस्ता निवासी प्रदीप तिवारी पुत्र स्वर्गीय प्रेम नारायण तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी भूमि ग्राम नौबस्ता की आराजी संख्या 1102, रकबा 14 बिसुआ, राजीव विहार के निकट स्थित है। भूमि पर साफ-सफाई और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा था, जिसका जिम्मा उन्होंने अपने परिचित मनोज कुमार को दिया था।</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178930/alleged-possession-of-ancestral-land-appealed-to-the-administration-for"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/158d2ea1-f122-4e31-94f3-ee455313b598_1770890232515.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> नौबस्ता थाना क्षेत्र के हंसपुरम आवास विकास इलाके में पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जे और जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित प्रदीप तिवारी ने चौकी इंचार्ज आवास विकास हंसपुरम को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुरानी बस्ती नौबस्ता निवासी प्रदीप तिवारी पुत्र स्वर्गीय प्रेम नारायण तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी भूमि ग्राम नौबस्ता की आराजी संख्या 1102, रकबा 14 बिसुआ, राजीव विहार के निकट स्थित है। भूमि पर साफ-सफाई और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा था, जिसका जिम्मा उन्होंने अपने परिचित मनोज कुमार को दिया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित के अनुसार, इसी दौरान अरुण कुमार साहू और उनके भाई करीब 15-18 युवकों व एक महिला के साथ मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद मनोज कुमार तथा उनके सहयोगी पिंटू पासी के साथ गाली-गलौज व हाथापाई करने लगे। विरोध करने पर आरोपितों ने खुद को प्रभावशाली बताते हुए धमकी दी कि “मैं वकील हूं, मेरा कुछ बिगाड़ नहीं पाओगे।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपितों ने कहा कि उन्होंने हाल ही में पास की दो करोड़ रुपये की जमीन बेची है और किसी प्रकार की पैमाइश नहीं कराई गई है। साथ ही दोबारा जमीन पर आने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीड़ित प्रदीप तिवारी ने पुलिस से भूमि की पैमाइश कराने, दस्तावेजों की जांच करवाने तथा आरोपितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर भय बना हुआ है।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 17:30:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्षों से फरार 25 हजार के इनामिया दंपत्ति गिरफ्तार, हत्या के मामले में थी पुलिस को तलाश</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बृजमनगंज / महराजगंज। </strong>पुलिस अधीक्षक के द्वारा  वांछित अभियुक्तो की गिरफ्तारी अभियान के अंतर्गत  क्षेत्राधिकारी फरेंदा दीपशिखा वर्मा के पर्यवेक्षण में विगत 8 वर्षों से वांछित चल रहे अभियुक्तगण विमला गिरी पत्नी दिनेश गिरी व दिनेश गिरि पुत्र सुन्दर उर्फ रमेश गिरि निवासीगण यशोधरा गांव पालिका वार्ड नं 3 बसंतपुर थाना तौलिहवा जनपद कपिलवस्तु राष्ट्र नेपाल की गिरफ्तारी हुई हैं । थानाध्यक्ष सत्य प्रकाश सिंह के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा विगत 8 वर्षों से फरार चल रहे 25-25 हजार रुपये के इनामिया अभियुक्तगण विमला गिरी पत्नी दिनेश गिरी तथा दिनेश गिरी पुत्र सुन्दर उर्फ रमेश गिरी निवासी यशोधरा गांव</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178750/couple-absconding-with-25-thousand-rupees-worth-arrested-police-was"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/184478.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बृजमनगंज / महराजगंज। </strong>पुलिस अधीक्षक के द्वारा  वांछित अभियुक्तो की गिरफ्तारी अभियान के अंतर्गत  क्षेत्राधिकारी फरेंदा दीपशिखा वर्मा के पर्यवेक्षण में विगत 8 वर्षों से वांछित चल रहे अभियुक्तगण विमला गिरी पत्नी दिनेश गिरी व दिनेश गिरि पुत्र सुन्दर उर्फ रमेश गिरि निवासीगण यशोधरा गांव पालिका वार्ड नं 3 बसंतपुर थाना तौलिहवा जनपद कपिलवस्तु राष्ट्र नेपाल की गिरफ्तारी हुई हैं । थानाध्यक्ष सत्य प्रकाश सिंह के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा विगत 8 वर्षों से फरार चल रहे 25-25 हजार रुपये के इनामिया अभियुक्तगण विमला गिरी पत्नी दिनेश गिरी तथा दिनेश गिरी पुत्र सुन्दर उर्फ रमेश गिरी निवासी यशोधरा गांव पालिका वार्ड नं 3 बसंतपुर थाना तौलिहवा जनपद कपिलवस्तु, नेपाल को गिरफ्तार किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुखबिर की सूचना पर अभियुक्ता विमला गिरी को ग्राम सूर्यमानपुर कांछा चौराहा थाना बृजमनगंज क्षेत्र से तथा अभियुक्त दिनेश गिरी को लेदवा चौराहा थाना बृजमनगंज क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक उल्लेखनीय है कि दिनांक 10.05.2019 को अभियुक्तगण द्वारा संपत्ति के लालच में अपने ही भाई घनश्याम गिरी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। घटना के संबंध में थाना बृजमनगंज पर मुअसं 90/2019 धारा 302/201 भादवि पंजीकृत है। घटना के बाद से दोनों अभियुक्त नेपाल में छिपकर रह रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम रही मौजूद</div>
<div style="text-align:justify;"> बृजमनगंज थानाध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह , वरिष्ठ उपनिरीक्षक तारकेश्वर वर्मा , उपनिरीक्षक आलोक यादव ,कांस्टेबल ह्रदय नरायन यादव , हेड कांस्टेबल आलोक कुमार , कांस्टेबल संदीप गौतम , महिला कांस्टेबल छाया गौतम मौजूद रहें।</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 18:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कपड़ा व्यापारी से मारपीट करने वाला एक आरोपी गिरफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong> कोतवाली क्षेत्र के तौधकपुर उर्फ मिर्जापुर गांव निवासी कपड़ा व्यापारी वेद प्रकाश त्रिवेदी से मारपीट करने वाले एक आरोपी को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दर्शन गत 30 अप्रैल की देर रात को गांव निवासी वेद प्रकाश त्रिवेदी अपनी दुकान बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे तभी गांव के ही निकट गांव निवासी अनुज त्रिवेदी उर्फ बच्चा अन्य साथियों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट की थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इससे उन्हें गंभीर चोटे आ गई थी। उन्हें इलाज के लिए सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था।</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><div class="gs">
<div>
<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>लालगंज (रायबरेली)।</strong> कोतवाली क्षेत्र के तौधकपुर उर्फ मिर्जापुर गांव निवासी कपड़ा व्यापारी वेद प्रकाश त्रिवेदी से मारपीट करने वाले एक आरोपी को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दर्शन गत 30 अप्रैल की देर रात को गांव निवासी वेद प्रकाश त्रिवेदी अपनी दुकान बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे तभी गांव के ही निकट गांव निवासी अनुज त्रिवेदी उर्फ बच्चा अन्य साथियों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट की थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इससे उन्हें गंभीर चोटे आ गई थी। उन्हें इलाज के लिए सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। घायल व्यापारी के बेटे प्रशांत ने छह लोगो के विरुद्ध मारपीट और लूट की तहरीर दी। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध केस दर्ज किया था। प्रभारी निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मारपीट के एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि पीड़ित और आरोपी के बीच पुराने मकान की खरीद फरोख्त लेकर विवाद था। इसी को लेकर पीड़ित के साथ मारपीट की गई। जांच में लूट की घटना असत्य पाई गई।</div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
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</div>
</div>
</div>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178027/an-accused-who-assaulted-a-cloth-merchant-arrested</link>
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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:26:44 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>न्याय या साजिश ? एसडीएम हर्रैया का आदेश सवालों कघेरेमें - ऐसे आदेश ही बनते हैं खूनी संघर्ष का कारण।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के तहसील हर्रैया के एसडीएम (न्यायिक) शशिबिंदु कुमार द्विवेदी इन दिनों अपने एक ऐसे कारनामे को लेकर चर्चा में हैं, जिसने न्याय व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक औद्योगिक भूमि का है, जिससे संबंधित भागीदार वर्ष 1992 में ही अपनी लायबिलिटी और एसेट से मुक्त हो चुके थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 34 साल बाद, 2026 में, उन्हीं को दोबारा नाजायज कब्जा दिलाने की कवायद शुरू कर दी  कि इस कार्रवाई में दो जालसाजों को उक्त औद्योगिक भूमि पर कब्जा दिलाने की मंशा से पहले से लागू स्टे को खत्म</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174998/justice-or-conspiracy-sdm-harraiyas-order-is-in-question"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260403-wa0028.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के तहसील हर्रैया के एसडीएम (न्यायिक) शशिबिंदु कुमार द्विवेदी इन दिनों अपने एक ऐसे कारनामे को लेकर चर्चा में हैं, जिसने न्याय व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला एक औद्योगिक भूमि का है, जिससे संबंधित भागीदार वर्ष 1992 में ही अपनी लायबिलिटी और एसेट से मुक्त हो चुके थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 34 साल बाद, 2026 में, उन्हीं को दोबारा नाजायज कब्जा दिलाने की कवायद शुरू कर दी  कि इस कार्रवाई में दो जालसाजों को उक्त औद्योगिक भूमि पर कब्जा दिलाने की मंशा से पहले से लागू स्टे को खत्म करने की योजना बनाई गई। और इसके लिए 2016 के एक मुकदमे को ही खारिज करने का रास्ता चुना गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब जब नीयत पहले से तय हो, तो तर्क जुटाने में भला कितना समय लगता है! साहब ने एक नहीं, कई आधार गढ़े और आनन फानन में मुकदमा खारिज भी कमुकदमे की खारिजी के साथ ही स्टे भी समाप्त हो गया, जो इन कथित जालसाजों के लिए सबसे बड़ी बाधा था। अब आगे क्या होगा ? यह तो किसी घटना के घटित होने के बाद कानून-व्यवस्था ही तय करेगी !</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और साहब भी इसके लिए याद जरूर किए जाएंगे। लेकिन मुंसिफ बस्ती के आदेश के आधार पर दाखिल इस मुकदमे को खारिज करने के जो आधार दिए गए, वे खुद अपने आप में गम्भीर सवाल खड़े करते हैंअपने आदेश में साहब लिखते हैं, "खतौनी में पक्षकारों में किसी भी पक्षकार का नाम फर्म के पार्टनर के रूप में अंकित नहीं है। इस प्रकार इस वाद बिन्दु का निस्तारण वादी के पक्ष में नकारात्मक रूप में किया जाता है।अब सवाल यह उठता है कि, क्या किसी भी खतौनी में भूमिधर के नाम के साथ “किसान” या “मकान मालिक” आदि लिखा रहता है? जमीन का स्वरूप और उपयोग तो स्वतः स्पष्ट होता है, यह एक सामान्य समझ की बात है। लेकिन जब नीयत ही कुछ और हो, तो सामान्य समझ भी बेअसर हो जाती आगे आदेश में उल्लेख है, "प्रतिवादी श्री प्रवीश चन्द्र धर द्विवेदी द्वारा शपथ पत्र के साथ अवगत कराया है कि, प्रकीर्ण वाद संख्या 76/11/2024 श्रीश चंद्र धर द्विवेदी बनाम प्रवीश चन्द्र धर द्विवेदी को निरस्त किया जा चुका है।"हकीकत यह है कि ऐसा कोई मुकदमा अस्तित्व में ही नहीं है। और न ही इस कथित मुकदमे का इस आदेश से कोई सीधा संबंध ही हो सकता है। लेकिन "निरस्त" शब्द का जादू ऐसा चला कि उसे भी आधार बना लिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साहब आगे लिखते हैं, "वास्तव में एक ऐसे आदेश के आधार पर अनुतोष की मांग की गई है जो वर्तमान में माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।" जबकि विधि का सामान्य सिद्धांत है कि किसी न्यायालय का आदेश तब तक प्रभावी रहता है, जब तक उस पर कोई नया आदेश पारित न हो जाए। केवल मुकदमे का विचाराधीन होना, आदेश को निष्प्रभावी नहीं करता। यहां जिस मुकदमे को आधार बताया गया, पात्रता के मुताबिक वह 2017 से अब तक केवल एडमिट अवस्था में ही पड़ा हुआ है। लेकिन आदेश लिखने के लिए आधार तो चाहिए थे, सो गढ़ लिएसाहब ने अपने आदेश में तर्क दिया कि, "वास्तव में प्रश्नगत वाद उभय पक्षों के मध्य भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के तहत साझेदारी विवाद से संबंधित है और वादी ने अभिलेखीय राजस्व दस्तावेजों से अपना कब्जा सिद्ध नहीं किया है।" साहब का यह तर्क स्पष्ट करता है कि, वे भी विपक्षियों की राह पर चलते हुए 'मुंसिफ बस्ती' के उस मूल आदेश को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं जो इस पूरे मुकदमे की बुनियाद है। ऐसे में साहब यह साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि, सच चाहे जो भी हो वे उसे हरगिज नहीं देखेंगे। और विपक्षियों के हित में इस मुकदमे का गला घोंटकर ही मानेंसाहब ने आधार गढ़ते समय प्रतिवादी का हवाला देते हुए राजस्व संहिता की सीमाओं से बाहर निकलकर इंडियन पार्टनरशिप एक्ट 1932 आदि पर भी लंबा व्याख्यान दे डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक्ट की धारा 63 का बाकायदा उल्लेख किया गया और प्रतिवादी की भाषा में यह स्थापित करने की कोशिश की गई कि रिटायरमेंट की सूचना सार्वजनिक नहीं की गई।  आदेश पढ़ते समय कई जगह ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रतिवादी बोल रहा हो और साहब केवल उसे लिख रहे हों। हैरत की बात यह है कि न तो यह जांचने की जरूरत समझी गई कि मूल मुकदमा क्या है? ना ही 27 अगस्त 2025 को फर्म आदि से संबंधित नामांतरण के लिए जारी "परिषदादेश" का अनुपालन करने की जरूरत समझी गई। और ना ही वाद के आधार, मुंसिफ के आदेश/ डिग्री को तरजीह दी गई। और न ही यह देखा गया कि, जिन आधारों पर साहब का आदेश टिका है, वे प्रासंगिक भी हैं या नहीं। सबसे अहम सवाल यह कि, प्रतिवादी सच बोल रहा है या झूठ ? इस पर तो मानो विचार करना भी जरूरी नहीं समझा गया। विडंबना यह भी है कि जिस प्रतिवादी के नाम के आगे साहब “श्री” लगाते नहीं थक रहे, उन्हीं पर आरोप है कि, उन्होंने मुकदमे के दौरान ही खतौनी में दर्ज अपने नामों का जमकर दुरुपयोग किया। फर्म की विवादित जमीन का नामांतरण कराया, खारिज-दाखिल कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और यहां तक कि समानांतर न्यायालय में बंटवारे का मुकदमा दाखिल कर एकपक्षीय प्राइमरी डिग्री तक हासिल कर ली। लेकिन इन सब तथ्यों का जिक्र आदेश में कहीं नहीं मिलता। कार्रवाई तो दूर की बात है।स्पष्ट है कि, आदेश की शुरुआत ही मुकदमे को खारिज करने की मंशा से हुई थी। और अंत तक प्रतिवादी के पक्ष को साधते हुए वही परिणाम हासिल भी कर लिया गया। अदालत अपनी थी, अधिकार अपने थे, तो परिणाम भी मनमाफिक ही आया। कुल मिलाकर साहब ने वही कहा और किया, जिसकी उम्मीद जालसाज विपक्षी करते रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वादी के पक्ष में तो सिर्फ कृत्रिम कमियां ही गिनाई गईं। और उसके द्वारा प्रस्तुत तमाम साक्ष्यों को भी दबाकर साक्ष्यों का अभाव बता दिया जिला अदालत के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इस आदेश को देखकर मुंह बिचकाते हुए इसे “पूर्व नियोजित ऑर्डर” तक कह डाला।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और अंत में वही पुरानी बात याद आती है, "जब पैसे से वास्ता हो जाए, तो फिर इज्जत आबरू, न्याय अन्याय की चिंता भला कौन करता खैर, जीवन और जीविका की लड़ाई हर व्यक्ति पूरी ताकत से लड़ता है, और वादी भी लड़ेगा ही। यह जरूरी नहीं कि हर जगह ऐसे ही चेहरे बैठे हों। लेकिन असली चिंता इस बात की है कि, आखिर ये साहब कब तक न्यायिक चोला ओढ़कर न्याय का यूँ ही चीरहरण करते रहेंगे, और व्यवस्था देखती रहेगी ?</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:46 +0530</pubDate>
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