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                <title>कृषि तकनीक - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>कृषि तकनीक RSS Feed</description>
                
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                <title>भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177724/indian-agriculture-is-at-a-critical-juncture-now-is-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज भारतीय खेती एक ऐसे दौर में खड़ी है, जहाँ बदलाव जरूरी हो गया है। मौसम अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी बारिश समय पर नहीं होती, कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। इन सबका सीधा असर खेती और किसानों की कमाई पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सिर्फ मौसम ही नहीं, हमारी कुछ खेती की आदतें भी परेशानी बढ़ा रही हैं। जैसे जरूरत से ज्यादा पानी इस्तेमाल करना, रासायनिक खादों पर ज्यादा निर्भर रहना और पराली जलाना। इससे मिट्टी कमजोर हो रही है और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। धीरे-धीरे इससे फसल की पैदावार भी कम हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/whatsapp-image-2026-04-30-at-8.20.18-pm.jpeg" alt="भारतीय कृषि एक अहम मोड़ पर: अब बदलने का समय" width="527" height="351"></img></p>
<p style="text-align:justify;">भारत में बहुत बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन यही क्षेत्र मौसम के बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। अगर मानसून कमजोर पड़ जाए या अचानक गर्मी बढ़ जाए, तो इसका असर सिर्फ खेत तक नहीं रहता—किसानों की आय, बाजार के दाम और पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में अब “जलवायु के हिसाब से खेती” अपनाना जरूरी हो गया है। इसका मतलब है पानी का सही इस्तेमाल, मौसम के अनुसार फसल चुनना, मिट्टी की सेहत बनाए रखना और पराली जलाने से बचना। ये छोटे-छोटे कदम आगे चलकर बड़ा फर्क ला सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अच्छी बात ये है कि इस दिशा में काम शुरू हो चुका है। कई संस्थाएं किसानों को नई तकनीकें सिखा रही हैं। सरकार भी कई योजनाओं के जरिए मदद कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पानी बचाने पर जोर दिया जा रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को पता चलता है कि खेत में किस तरह की खाद कितनी मात्रा में डालनी है। परंपरागत कृषि विकास योजना से जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन मौसम के असर को कम करने पर काम करता है, और फसल बीमा योजना मुश्किल समय में किसानों को आर्थिक सहारा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिशा सही है, लेकिन काम को और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। क्योंकि मौसम तेजी से बदल रहा है, तो हमें भी उतनी ही जल्दी कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सीधी बात है—आज जो फैसले हम लेंगे, वही कल की खेती तय करेंगे। अगर अभी सही कदम उठाए गए, तो हम किसानों को मजबूत बना सकते हैं, खाने की सुरक्षा बनाए रख सकते हैं और गांव की अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं। अब समय है—किसानों का साथ देने का, पर्यावरण को बचाने का और सही दिशा में आगे बढ़ने का।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. नवाज़ अहमद खान<br />प्रोफेसर<br />आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 20:52:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की</strong></div></blockquote></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175827/nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign-launched-by-iffco"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001707588.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया। श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा ।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>भारत की सबसे बड़ी उर्वरक </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सहकारी संस्था, ने आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता</div>
<div style="text-align:justify;">महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष श्री</div>
<div style="text-align:justify;">दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापक</div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">और एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है।  यह अभियान  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अ मित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप</div>
<div style="text-align:justify;">है। भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया,</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1001707589.jpg" alt="इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर अभियान का शुभारंभ किया।" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राज़ील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र — जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है — कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। श्री संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। श्री संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिएपरिवर्तनकारी क्षण बताया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और परिवर्तन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं—</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर</div>
<div style="text-align:justify;">का व्यापक प्रचार</div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का</div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण देना</div>
<div style="text-align:justify;"> पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनासहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रत्येक PACS को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढ़ेगा।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन के अंत में श्री दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें — कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया  भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।”   इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और 64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत मेंs भारी बचत हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ — जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है — लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के  ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन  तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">
<div>
<div> </div>
</div>
<div>श्री संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"> इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक श्री के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 15:05:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर”</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175820/innovation-and-technological-empowerment-towards-developed-agriculture-developed-india-2047"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/dsc_0515.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ, उत्तर प्रदेश</strong></blockquote><p style="text-align:justify;">लखनऊ, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित छठवीं उ.प्र. कृषि विज्ञान कांग्रेस के तृतीय दिवस पर “विकसित कृषि विकसित भारत @2047 के लिये कृषि में परिवर्तन” विषय के अंतर्गत विभिन्न तकनीकी एवं विचार-विमर्श सत्रों का सफल आयोजन किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम परिषद परिसर, आलमबाग, लखनऊ में संपन्न हुआ, जिसमें प्रदेश भर के कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।</p><p style="text-align:justify;">तृतीय दिवस के दौरान दो तकनीकी सत्रों के साथ-साथ दो ओरल प्रस्तुतीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में “लाइवलीहुड सिक्योरिटी थ्रू डेयरी, लाइवस्टॉक, पोल्ट्री एंड फिश फार्मिंग: फ्यूचर फार्मिंग @2047” तथा “डिजिटल एग्रीकल्चर” जैसे समकालीन और अत्यंत प्रासंगिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण करना और भविष्य के लिए टिकाऊ एवं तकनीकी समाधान प्रस्तुत करना था।</p><p style="text-align:justify;">प्रथम तकनीकी सत्र में कृषि एवं पशुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा करते हुए पशुधन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पशुधन की उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है, जिसका एक प्रमुख कारण देशी नस्लों पर अत्यधिक निर्भरता है। इसके अतिरिक्त चारे की कमी, पशु-चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा बाजार तंत्र में बिचौलियों की भूमिका भी किसानों की आय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए उन्नत नस्लों के विकास, चारा प्रबंधन और सुदृढ़ पशु स्वास्थ्य सेवाओं पर बल दिया।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/img_0564.jpg.jpeg" alt="विकसित कृषि विकसित भारत @2047 की दिशा में नवाचार और तकनीकी सशक्तिकरण" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">पोल्ट्री एवं पशुधन क्षेत्र में एंटीबायोटिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने इसे एक उभरते खतरे के रूप में चिन्हित करते हुए कहा कि एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस भविष्य में मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इस दिशा में वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित दवा उपयोग तथा किसानों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।</p><p style="text-align:justify;">बकरी पालन, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर केंद्रित सत्र में उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि उचित प्रबंधन, बेहतर नस्लों के चयन और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से इस क्षेत्र में आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती को भी विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके समाधान के रूप में गोबर, गोमूत्र और अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सहायक होती है।</p><p style="text-align:justify;">मृदा स्वास्थ्य पर हुई चर्चा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश में मृदा जैविक कार्बन का स्तर लगातार गिर रहा है, जो कृषि के लिए गंभीर खतरा है। विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक खाद, हरी खाद और फसल चक्र अपनाने की सलाह दी। इन उपायों से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, बल्कि जल धारण क्षमता में भी सुधार होगा, जिससे जल संकट की समस्या को कम किया जा सकेगा।</p><p style="text-align:justify;">“डिजिटल एग्रीकल्चर” पर केंद्रित सत्र में आधुनिक तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग) और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किसानों को मौसम, फसल स्वास्थ्य और बाजार मूल्य की सटीक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि संभव है। यह तकनीकी हस्तक्षेप कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</p><p style="text-align:justify;">समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिनेश प्रताप सिंह (राज्यमंत्री, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि निर्यात) उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और संस्थानों को सम्मानित किया। इस अवसर पर 14 एकेडमी अवार्ड, 9 फेलो अवार्ड और 7 ऑनरेरी फेलोशिप प्रदान की गईं, जो कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही। सभी विशेषज्ञों ने एक स्वर में यह बात कही कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल तकनीक और टिकाऊ पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।</p><p style="text-align:justify;">इस प्रकार, कृषि विज्ञान कांग्रेस का यह आयोजन न केवल वर्तमान चुनौतियों पर विचार करने का मंच बना, बल्कि भविष्य की कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 20:18:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>पाली में गेहूं की क्रॉप कटिंग, औसत उत्पादन 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div><strong>भदोही। </strong>रबी फसलों के उत्पादन के आकलन के तहत जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने ज्ञानपुर तहसील के ग्राम पाली में गेहूं की फसल की क्रॉप कटिंग कराई।</div>
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<div>किसान श्रीमती पान देवी व शीतला प्रसाद के खेत में 43.3 वर्ग मीटर क्षेत्र में कटाई व थ्रेसिंग कराई गई, जिसमें क्रमशः 18.02 किग्रा व 14.71 किग्रा उत्पादन प्राप्त हुआ। इसके आधार पर औसत उत्पादन लगभग 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर आंका गया।</div>
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<div>यह प्रयोग भारत सरकार के सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से ऑनलाइन व पारदर्शी तरीके से संपन्न हुआ। इस दौरान जिलाधिकारी ने किसानों को कृषि व जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174994/crop-cutting-of-wheat-in-pali-average-production-38-quintals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260403-wa0008.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>भदोही। </strong>रबी फसलों के उत्पादन के आकलन के तहत जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने ज्ञानपुर तहसील के ग्राम पाली में गेहूं की फसल की क्रॉप कटिंग कराई।</div>
<div> </div>
<div>किसान श्रीमती पान देवी व शीतला प्रसाद के खेत में 43.3 वर्ग मीटर क्षेत्र में कटाई व थ्रेसिंग कराई गई, जिसमें क्रमशः 18.02 किग्रा व 14.71 किग्रा उत्पादन प्राप्त हुआ। इसके आधार पर औसत उत्पादन लगभग 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर आंका गया।</div>
<div> </div>
<div>यह प्रयोग भारत सरकार के सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से ऑनलाइन व पारदर्शी तरीके से संपन्न हुआ। इस दौरान जिलाधिकारी ने किसानों को कृषि व जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।</div>
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<div>निरीक्षण के दौरान पाली-सुरियावां मार्ग की साइड पटरी के कार्य को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। इस मौके पर उपजिलाधिकारी भान सिंह, तहसीलदार अजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी इरम कुमारी सहित अन्य अधिकारी व किसान मौजूद रहे।</div>
</div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174994/crop-cutting-of-wheat-in-pali-average-production-38-quintals</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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