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                <title>Crop Production - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Crop Production RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बरेली उप कृषि निदेशक (शोध) संभागीय कृषि परीक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र, बिलवा में हुआ आयोजित </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>यह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक(शोध) पवन कुमार प्रजापति  एवं विशिष्ट अथिति डॉ नरेन्द्र प्रताप (वानस्पतिविद) तथा  कार्यक्रम का शुभारंभ  कार्तिक सिंह क्षेत्र अधिकारी इफको बरेली द्वारा  उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में इफको के नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी) की प्रयोग विधि, कार्यप्रणाली एवं कृषि में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने *संभागीय कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र, बिलवा फार्म पर किए जा रहे नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी के प्रदर्शन के संदर्भ में जानकारी देते हुए।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182875/bareilly-deputy-agriculture-director-research-divisional-agricultural-testing-and-demonstration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1.---------------------अ.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>यह कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक(शोध) पवन कुमार प्रजापति  एवं विशिष्ट अथिति डॉ नरेन्द्र प्रताप (वानस्पतिविद) तथा  कार्यक्रम का शुभारंभ  कार्तिक सिंह क्षेत्र अधिकारी इफको बरेली द्वारा  उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्वागत एवं अभिनंदन के साथ किया गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में इफको के नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी) की प्रयोग विधि, कार्यप्रणाली एवं कृषि में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने *संभागीय कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र, बिलवा फार्म पर किए जा रहे नैनो यूरिया प्लस एवं नैनो डीएपी के प्रदर्शन के संदर्भ में जानकारी देते हुए। उनके उद्देश्यों से कर्मचारियों को अवगत कराया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि पवन कुमार प्रजापति  ने अपने संबोधन में सभी कर्मचारियों से इफको द्वारा संचालित नैनो उर्वरक प्रयोगों को सफल बनाने का आह्वान किया ।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग एवं उनके कृषि उत्पादन में योगदान पर विस्तृत चर्चा की।इस कार्यक्रम में बीज परीक्षण प्रभारी  कृतज्ञ गंगवार , परीक्षण प्रभारी संजीव कुमार , फार्म अधीक्षक' हेमंत गंगवार जैव उर्वरक प्रभारी विकास कुमार  कुमार सहित सभी कर्मचारी उपस्थित रहें ।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 21:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सहकार से समृद्धि सहकारिता सप्ताह अभियान के तहत किसान जागरूकता गोष्ठी का आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>विकास खंड बिथरी चैनपुर में सहकारिता सप्ताह के उपलक्ष्य में "धरती माता बचाओ अभियान" एवं "नैनो उर्वरक : महत्व एवं उपयोग" विषय पर आधारित किसान सभा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बरेली  बृजेश सिंह परिहार रहे। क्षेत्र अधिकारी इफको,  कार्तिक सिंह,  हरीश गंगवार,प्रबंधक इफ्को एमसी,  कृष्ण मोहन, अपर जिला सहकारी अधिकारी  सुधीश गौतम अपर जिला सहकारी अधिकारी तथा समिति के सचिव संकल्प उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के शुभारंभ उपरान्त क्षेत्र अधिकारी इफको श्री कार्तिक सिंह द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि, लागत</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182739/farmer-awareness-seminar-organized-under-sahakar-se-samriddhi-cooperative-week"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260704-wa0007-(2).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बरेली/ </strong>विकास खंड बिथरी चैनपुर में सहकारिता सप्ताह के उपलक्ष्य में "धरती माता बचाओ अभियान" एवं "नैनो उर्वरक : महत्व एवं उपयोग" विषय पर आधारित किसान सभा एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, बरेली  बृजेश सिंह परिहार रहे। क्षेत्र अधिकारी इफको,  कार्तिक सिंह,  हरीश गंगवार,प्रबंधक इफ्को एमसी,  कृष्ण मोहन, अपर जिला सहकारी अधिकारी  सुधीश गौतम अपर जिला सहकारी अधिकारी तथा समिति के सचिव संकल्प उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के शुभारंभ उपरान्त क्षेत्र अधिकारी इफको श्री कार्तिक सिंह द्वारा किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग से फसल उत्पादन में वृद्धि, लागत में कमी तथा बेहतर गुणवत्ता आदि साथ ही परंपरागत उर्वरकों के अधिक उपयोग से मृदा , जल एवं वायु पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव साथ ही क्षीण हो रहे मिट्टी की उर्वरता के बारे में जानकारी दी गई एवं मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या को बढ़ाने हेतु कॉन्सर्टिया के उपयोग हेतु प्रेरित किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">साथ ही किसानों को नैनों उर्वरकों की विशेषता, विभिन्न फसलों में उपयोग विधि, उपयोग हेतु उचित समय, सही मात्रा आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। हरीश गंगवार  ने फसल सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी और किसान सुरक्षा बीमा योजना के बारे में किसानों को अवगत करवाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मुख्य अतिथि  बृजेश सिंह परिहार ने अपने संबोधन में सहकारिता सप्ताह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सहकारी समितियां किसान हितों के लिए समर्पित संस्थाएं हैं और विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को निरंतर लाभान्वित कर रही हैं। साथ ही संतुलित उर्वरकों का प्रयोग कर नैनो उर्वरकों के प्रयोग हेतु किसानों से आग्रह किया गया एवं समितियों के द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में बताया गया। किसने की समस्याओं को सुना गया और सभी किसानों से फार्मर आईडी बनवाने के लिए अनुरोध किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/182739/farmer-awareness-seminar-organized-under-sahakar-se-samriddhi-cooperative-week</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 23:04:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नहर में पानी न छोड़ें जाने से किसान परेशान-जजलाल राय </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> कांग्रेस कमेटी भदोही के जिला महासचिव जजलाल राय ने कहा कि जनपद भदोही के ज्ञानपुर नहर प्रखंड में समय से पानी न छोड़ें जाने से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नहर व शाखा तथा माइनरों में पानी न होने के कारण धान की नर्सरी तैयार करने कि सिंचाई का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। </div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि जून माह में धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से किसान नर्सरी तैयार करने में परेशानी झेल रहे हैं। जिन किसानों के</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181006/farmers-upset-due-to-not-releasing-water-in-the-canal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0052.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs"><div><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>भदोही।</strong> कांग्रेस कमेटी भदोही के जिला महासचिव जजलाल राय ने कहा कि जनपद भदोही के ज्ञानपुर नहर प्रखंड में समय से पानी न छोड़ें जाने से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। नहर व शाखा तथा माइनरों में पानी न होने के कारण धान की नर्सरी तैयार करने कि सिंचाई का कार्य काफी प्रभावित हो रहा है। </div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि जून माह में धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से किसान नर्सरी तैयार करने में परेशानी झेल रहे हैं। जिन किसानों के पास निजी सिंचाई के साधन नहीं हैं, उनकी चिंता और बढ़ गई है, जिससे परेशान होकर किसान कई बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत पत्र दे चुके है। किसानों का कहना है कि समय पर पानी न मिलने से</div><div style="text-align:justify;">धान की नर्सरी प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। </div><div style="text-align:justify;">उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से जल्द से जल्द नहरों में पानी छोड़ने की मांग की पुरजोर मांग की है, ताकि धान की नर्सरी का कार्य समय पर पूरा किया जा सके।</div><div style="text-align:justify;">श्री राय ने कहा कि एक तरफ विकट गर्मी पड़ रही है जनपद में कुआं, हैंडपंप सूखे पड़े हुए हैं और गांव के तालाब भी भरने के बजाय खाली पड़े हैं </div><div style="text-align:justify;">नहर में पानी न आने के कारण किसान विवस बैठे हैं और पानी आने का राह देख रहे है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div></div></div></div><div class="WhmR8e"></div></div></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:46:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढ़  रहा है, कृषि वैज्ञानिक - प्रोफेसर प्यारेलाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180800/climate-change-water-shortage-soil-erosion-the-crisis-on-our"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260605-wa0071.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दया शंकर त्रिपाठी।</p><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> हिमाचल प्रदेश में राजकीय कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे डॉक्टर अशोक कुमार प्यारेलाल ने कहा है कि मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव परिवेश में हमारे किसान और किसी  पर संकट बढ़ रहा है। लगातार जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के मध्य नजर कृषि पर इसका क्या असर पड़ेगा इस संबंध में उन्होंने इलाहाबाद ब्यूरो के प्रमुख दयाशंकर त्रिपाठी से विस्तार से बातचीत की जिस पर उन्होंने कृषि पर पड़ने वाले दुष्परिणाम के कई कारण बताएं।उन्होंने कहा की जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण वनों की कटाई और जैव विविधता का ह्रास जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां अब दूर की समस्या नहीं रही यह सब सीधे हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैंजैसे अत्यधिक मौसम परिवर्तन जल की कमी मिट्टी का कटाव और घटती वायु गुणवत्ता।ऐसे परिवेश में हमारे किसान और कृषि पर संकट बढता जा रहा है।</p><p style="text-align:justify;">मौसम के बदलते तेवर से  किसानों बागवानो को  जहां बहुत अधिक लाभ  नहीं होने वाला है। वहीं दूसरी तरफ इस साल का मानसून आम जनता को  भी  परेशान करेगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल सामान्य से कम वर्षा होगी और साथ में अल नीनो का प्रभाव  बहुत  ख़तरनाक होगा सूखा और गर्मी   बढ़ेगी जिसके कारण खरीफ की फसलों का उत्पादन काम होगा विशेष तौर पर उन क्षेत्रों में जहां फसलों की सिंचाई की सुविधा नही है वहां पर बिजाई देर से होगी।और उत्पादन भी कम होगा।और देश में महंगाई बढ़ेगी । आमदनी पिछले साल की अपेक्षा इस साल कम हहोगी।<br /></p><p style="text-align:justify;">आज विश्व का हर देश ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से भयंकर महंगाई के मोहाने पर खड़ा हो गया है। परन्तु युद्ध लड़ने वालों को मौसम मानसून  महंगाई और जनता से सरोकार नहीं है।  बस अपने को शक्तिशाली दिखाने की होड़ विश्व पटल पर लगी है कि मैं महान विजेता हूं ।इस युद्ध से भारत भी बहुत बड़े संकट के दौर से गुजर रहा है।देश में महंगाई बढ़ रही है ऊर्जा का दाम बढ़ रहा है।तो वहीं यह मानसून भारत पर अलग तरह से कहर बरपाने का संकेत देकर भारत की गरीब जनता को और गरीबी में जीने के लिए मजबूर कर रहा है</p><p style="text-align:justify;">भारत को तीन  तरफ से मार पड़ेगा ।खराब मानूसन  खाद  की कमी और ऊर्जा ।भले टी वी डिवेट  पर सरकार के समर्थक  लोग आंकड़ों के जाल में जनता को फंसाते रहे परन्तु सच्चाई इन  आंकड़ों से इतर है। युद्ध कब तक चलेगा यह अगस्त या आगे तक भी चल सकता है फिर देश में नोट बन्दी की तरह हर चीज पर प्रतिबंध जैसे बैंकों से कम रुपया निकालना तेल गैस पर प्रतिबंध हर चीज का सीमित उपयोग।आदि  क ई तरह के उपाय करने पड़ सकते हैं। खाद के संकट को देखते हुए कृषि मंत्रालय ने एक जुन से तीस जुन तक खेत बचाओ अभियान शुरू करने जा रहा है जिसमे कृषि वैज्ञानिक किसानों को रासायनिक खाद का उपयोग कम करने हरी खाद को बढ़ावा देने याद गोबर की खाद का अधिक उपयोग करने के फायदे बतायेंगे ।</p><p style="text-align:justify;">किसानों को अपने खेत की कम होती उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कौन-सा सही तरीका लाभ कारी होगा साथ में खेती में लागत कम लगे और उत्पादन बढे यह एक सही कदम है।अब किसानों को आधुनिक खेती के साथ पुरानी खेती को अपनाने की जरुरत है जिसमें हरी खाद कमृपोष्ट खाद का बहुत महत्व है परन्तु बहुत से छोटे मझोले किसानों के पास पशुधन यानि बैल गाय भैंस नहीं के बराबर है जिससे गोबर की खाद बनेऔर खेत बचे साथ में उत्पादन भी बढ़े।सत्तर के दशक में कम्पोस्ट खाद बनाने की सरकार द्वारा योजना चला ई ग ई किसानों ने  गोबर गैस  प्लांट लगवाया खाद का उपयोग किया खेती से मजदुरो का पलायन होना शुरू हुआ पशुधन कम हुए तो गोबर गैस प्लांट बंद होते गये।अब खेती ट्रैक्टर रासायनिक खाद पर निर्भर है।</p><p style="text-align:justify;">हिमाचल के साथ देश भर में पिछले दो महीने से रुक रुक कर बे मौसमी बारिश ओला तेज हवा के कारण किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है । जनहानि भी हुई है।मौसम की यह बेरूखी  ऊपरी हिमाचल में सेव  के किसानों और अन्य फल के किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है  । यह भी  एक अनुमान है कि हिमाचल प्रदेश वर्ष में 5000 से 6000 करोड़ का सेव  का कारोबार  हर साल होता है। जो इस साल  बे मौसम बरसात ओलावृष्टि से सेव का उत्पादन कम होने का अनुमान है। जिसके कारण  किसानों को 1500 से 2000 करोड़ का नुकसान होगा।  कम पैदावार का नुकसान आम जनता को भी उठाना पड़ता है कि फल सब्जियां अनाज दूध तेल सब महगे दामो  पर बिकेंगे गरीब और गरीब होता जाएगा व्यापारी अमीर होता जाएगा।<br /></p><p style="text-align:justify;">आईएमडी के अनुसार बरसात  कम हो सकती है प्रशांत महासागर  में अल नीनो का प्रभाव बढ़ रहा   है। मानसून इस साल जल्दी आयेगा ।उत्तर और मध्य भारत में कम बारिश हो सकती है खेती में फसलों के साथ फल  जैसे सेव  नाशपाती  का उत्पादन के साथ  बिजली उत्पादन कम हो सकता है।  मानसून कमजोर होने पर सीधा असर  फसलो  किसानों की आय और खाद्यान्न की कीमतों पर पड़ता है।   कमजोर मानसून से कम पैदावार होगी खरीफ की फसलों के साथ सब्जी फल  महंगें होगे। सिंचाई की लागत भी बढेगी सरकार का प्रयास रहा है कि जल संचयन को बढ़ावा  जाए।  यह प्रयास बहुत अच्छा नहीं हो पाया गांव-गांव अमृत सरोवर बन रहा है।  परंतु लाभ उतना नहीं मिलता है जितनी उम्मीद सरकार कर रही है अमृतसरोवर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है यदि किसानों को यह जानकारी पहले से हो कि मानसून कमजोर है और कम वर्षा होगी तो  अधिक पानी की फसलों की जगह कम पानी की फसलो जैसे बाजार ज्वार मक्का उड़द मूंग  तिल अन्य मिलट की फसलों की बिजाई करने से बहुत लाभ हो सकता है ।  </p><p style="text-align:justify;">सरकार को इन फसलों की खरीद  को भी सुनिश्चित करना होगा।  अरहर  मूग उड़द बाजरा के साथ मिश्रित खेती अधिक लाभकारी होगी ।जब मानसून कमजोर होता है तब इस तरह की खेती किसानों के लिए लाभदायक होती  है। इस वर्ष   ओलावृष्टि वारिस जो  हिमाचल और भारत के अन्य प्रदेशों में हो रही है।  जिसके परिणामस्वरूप  सबसे ज्यादा सेवव फल   उत्पादक किसान प्रभावित हो रहे हैं ।इस बदले मानसून से हिमाचल  मे सेव  का उत्पादन 50 से 70% कम होगा। बे मौसमी  बारिश से सेव  के पौधों में फूल काम हो गए हैं । मधुमक्खियां  से परगण भी काम हुआ है ।  हिमाचल में ढाई लाख परिवार बागवानी विशेष तौर पर सेव के ऊपर  निर्भर है।<br /></p><p style="text-align:justify;">भारत कृषि प्रधान देश है खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर  है तो दूध उत्पादन में पहले पायदान पर दुनिया में टिका हुआ है । सब्जी फल उत्पादन में भी दुनिया में अपना स्थान बनाया हुआ है।  परंतु अभी तक हमारे वैज्ञानिकों ने मौसम के अनुकूल या कम बारिश होने पर उस तरह के बीजों का ईजाद नहीं कर पाए हैं जो कम पानी में अधिक पैदावार दे सके। कुछ किस्में हैं  परन्तु उतना लाभदायक नहीं है। कमजोर मानसुन होने पर खाघानो के साथ फल सब्जियों का उत्पादन कम न हो । और देश में कम उत्पादन के कारण महंगाई न बढ़े परन्तु ऐसा नहीं हो पा रहा है।</p><p style="text-align:justify;"> किसानों को भी खेती से घाटा न हो वह भी  राहत महसुस करें कि कमजोर मानसून होने पर आय कम नहीं होंगी बस फसल बदल दे तो निश्चित ही आय होगी। यह देखा गया है कि धान लगाने वाला किसान जल्दी फसल नहीं बदलते है । वह धान पर ही टिका रहता है धान में अधिक सिंचाई के कारण लागत बढ़ जाता है।बाजार में सही मूल्य नहीं मिलता  है।तब किसानो  को नुकसान उठाना ही होता है ।अगर मानुसन के अनुरूप किसान सही फसल का चयन कर लेता है तो कभी भी किसान नुकसान में नहीं होगा बस उसके उत्पाद का सही बाजार मूल्य सरकार दे।<br /></p><p style="text-align:justify;">खरीफ के मौसम में  अधिकांश तौर पर पंजाब हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजस्थान के किसान धान की खेती करते हैं कम बारिश के कारण धान की खेती में अधिक सिंचाई की जरूरत होगी जो महंगे डीजल के कारण पैदावार में लागत  मूल्य को बढ़ाता है।बाजार में मूल्य कम मिलता है। कमजोर मानसून से होने वाले नुकसान से बचने के लिए बस मोटे अनाजों की खेती है  एक मात्र सही उपाय है।जिसमें पानी की बहुत कम जरुरत होती है। मिश्रित खेती जैसे बाजरा उड़द अरहर बाजरा अहरह उड़द की खेती लाभ कारी होगी।। </p><p style="text-align:justify;">इस तरह की खेती से डीजल और  बिजली की बचत भी हो सकती है।  साथ में रसायनिक खाद की जरुरत भी कम पड़ती है।इस वर्ष किसानों पर तीन तरह से   मार पड़ेगी पहली मार कि मानसुन कमजोर है। बारिश कम होंगी। दुसरी मार खाद भी कम मात्रा में मिलेगा।  तीसरा ऊर्जा की कमी ।कारण ईरान अमेरिका इजरायल युद्ध से देश में यूरिया के साथ साथ पोटाश फास्फोरस जैसे खादों का जो आयात होता वह भी कम होगा जिससे किसानों को खरीफ के फसलों के लिए भरपूर रसायनिक खाद नहीं मिलेगा।</p><p style="text-align:justify;">पिछले साल देश ने बड़े शोर के साथ मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग पर बहुत गोष्ठी और सेमीनार करके किसानों को जागरूक किया और इन मोटे अनाजों के उपयोग से लाभ के बारे में भी खुब चर्चा हुई परन्तु उत्पादन बढ़ा कितना इस पर बात उसके बाद नही हुआ। नहीं यह बताया गया कि देश में क्या यह भोजन की थाली में आया या बस पशुचारा में गया मुफ्त अनाज योजना में मोटे अनाज को वितरित किया गया परन्तु अधिकांश परिवारो  को जो मुफ्त में दिया गया उसे बाजार में बेच दिये।अब देश को मुफ्त अनाज वितरण को बन्द करें।<br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>विचारधारा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 23:16:19 +0530</pubDate>
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                <title>पाली में गेहूं की क्रॉप कटिंग, औसत उत्पादन 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div><strong>भदोही। </strong>रबी फसलों के उत्पादन के आकलन के तहत जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने ज्ञानपुर तहसील के ग्राम पाली में गेहूं की फसल की क्रॉप कटिंग कराई।</div>
<div>  </div>
<div>किसान श्रीमती पान देवी व शीतला प्रसाद के खेत में 43.3 वर्ग मीटर क्षेत्र में कटाई व थ्रेसिंग कराई गई, जिसमें क्रमशः 18.02 किग्रा व 14.71 किग्रा उत्पादन प्राप्त हुआ। इसके आधार पर औसत उत्पादन लगभग 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर आंका गया।</div>
<div>  </div>
<div>यह प्रयोग भारत सरकार के सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से ऑनलाइन व पारदर्शी तरीके से संपन्न हुआ। इस दौरान जिलाधिकारी ने किसानों को कृषि व जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174994/crop-cutting-of-wheat-in-pali-average-production-38-quintals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260403-wa0008.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div><strong>भदोही। </strong>रबी फसलों के उत्पादन के आकलन के तहत जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने ज्ञानपुर तहसील के ग्राम पाली में गेहूं की फसल की क्रॉप कटिंग कराई।</div>
<div> </div>
<div>किसान श्रीमती पान देवी व शीतला प्रसाद के खेत में 43.3 वर्ग मीटर क्षेत्र में कटाई व थ्रेसिंग कराई गई, जिसमें क्रमशः 18.02 किग्रा व 14.71 किग्रा उत्पादन प्राप्त हुआ। इसके आधार पर औसत उत्पादन लगभग 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर आंका गया।</div>
<div> </div>
<div>यह प्रयोग भारत सरकार के सीसीई एग्री ऐप के माध्यम से ऑनलाइन व पारदर्शी तरीके से संपन्न हुआ। इस दौरान जिलाधिकारी ने किसानों को कृषि व जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।</div>
<div> </div>
<div>निरीक्षण के दौरान पाली-सुरियावां मार्ग की साइड पटरी के कार्य को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। इस मौके पर उपजिलाधिकारी भान सिंह, तहसीलदार अजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी इरम कुमारी सहित अन्य अधिकारी व किसान मौजूद रहे।</div>
</div>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174994/crop-cutting-of-wheat-in-pali-average-production-38-quintals</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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