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                <description>Self Employment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कौशल विकास मिशन की समीक्षा बैठक सम्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा । </strong>कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में कौशल विकास मिशन के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति एवं रोजगार सृजन से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद के अधिक से अधिक युवक एवं युवतियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर एवं स्वरोजगार के साथ-साथ निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष बल।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जिला समन्वयक कौशल विकास मिशन को निर्देशित किया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे अधिक से अधिक युवा इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182617/review-meeting-of-skill-development-mission-concluded-under-the-chairmanship"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1007835135.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा । </strong>कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन की अध्यक्षता में कौशल विकास मिशन के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति एवं रोजगार सृजन से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद के अधिक से अधिक युवक एवं युवतियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर एवं स्वरोजगार के साथ-साथ निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर विशेष बल।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने जिला समन्वयक कौशल विकास मिशन को निर्देशित किया कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, जिससे अधिक से अधिक युवा इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को उनकी रुचि एवं स्थानीय रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें रोजगार प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रोजगारपरक ट्रेडों में प्रशिक्षण पर विशेष जोर देने के निर्देश</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद में रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए एग्रीकल्चर, ऑटोमेटिव, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग, मीडिया एंड इंटरटेनमेंट, प्लम्बिंग, हैंडीक्राफ्ट एंड कार्पेट, ब्यूटी एंड वेलनेस, टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी, आईटी एवं आईटीईएस, रिटेल सहित अन्य रोजगारपरक ट्रेडों में अधिक से अधिक युवक-युवतियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योगों एवं बाजार की मांग के अनुरूप संचालित किए जाएं, जिससे प्रशिक्षित युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">समन्वित प्रयासों से बढ़ेगा रोजगार और आत्मनिर्भरता</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए कौशल विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे जनपद में रोजगार के अवसरों का विस्तार हो तथा अधिक से अधिक युवा आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने नियमित समीक्षा एवं सतत मॉनिटरिंग पर भी विशेष बल दिया।बैठक में कौशल विकास कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, युवाओं की अधिकाधिक भागीदारी तथा रोजगार उपलब्ध कराने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जिला विकास अधिकारी आदित्य तिवारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए सुशील कुमार पांडेय, डीसी एनआरएलएम जे.एन. राव, जिला सेवायोजन अधिकारी, राम सिंह जिला समन्वयक कौशल विकास, अविनाश प्रताप सिंह कौशल विकास मैनेजर, दीपक  खरे कौशल विकास मैनेजर सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों ने सहभागिता की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 20:01:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विकसित गाँव ही विकसित भारत की सबसे सशक्त नींव : विधायक विनय वर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मनुहार गांव में गुरुवार को एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया। विधायक विनय वर्मा ने विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत घरुआर में आयोजित "विकसित भारत–जी-राम जी" प्रचार-प्रसार एवं जन सम्मेलन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने "विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAMG)" की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार एवं 252 से बढ़ाकर 300 रूपए मजदूरी कर दी गई है। साथ ही</div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182609/developed-villages-are-the-most-powerful-foundation-of-developed-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1783001299627-(1).jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर।</strong> शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मनुहार गांव में गुरुवार को एक पेड़ मां के नाम कार्यक्रम के तहत पौधरोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया। विधायक विनय वर्मा ने विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत घरुआर में आयोजित "विकसित भारत–जी-राम जी" प्रचार-प्रसार एवं जन सम्मेलन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने "विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAMG)" की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार एवं 252 से बढ़ाकर 300 रूपए मजदूरी कर दी गई है। साथ ही कृषि एवं भूमि सुधार, जल संरक्षण एवं अमृत सरोवर, ग्रामीण संपर्क मार्ग, कौशल विकास एवं स्वरोजगार, आवास एवं आधारभूत संरचना, वृक्षारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों को नई गति मिलेगी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विधायक ने कहा कि गांव का विकास जरूरी है। विकसित गाँव ही विकसित भारत की सबसे सशक्त नींव हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">इस योजना से ग्रामीणों को स्थायी आजीविका, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण, पलायन में कमी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उपस्थित क्षेत्रवासियों से इस जनहितकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर बीडीओ बढ़नी अनीषि मणि त्रिपाठी, प्रदीप कमलापुरी, राधेश्याम आदि लोग उपस्थित रहे।
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 19:49:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बकरी पालन व्यवसाय  ग्रामीणोंके आय का सबसे अच्छा साधन साबित हो रहा है।-डॉ. मणि शंकर द्विवेदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधनों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती बेरोजगारी और कृषि पर बढ़ते दबाव के बीच बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  हाल ही में हुडसा (हयूमन अपलिफ्टमेंट, डेवलपमेंट ऐंड सोशल अवेयरनेस) द्वारा प्रयागराज के गंगापार ग्रामीण क्षेत्र में किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि बकरी पालन आज भी हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार है।सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न गांवों में पशुपालकों, किसानों और</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गंगापार</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182009/goat-rearing-business-is-proving-to-be-the-best-source"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260623-wa0115.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt"><div class="a3s aiL"><div><div><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के पारंपरिक साधनों का महत्व आज भी कम नहीं हुआ है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, बढ़ती बेरोजगारी और कृषि पर बढ़ते दबाव के बीच बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> हाल ही में हुडसा (हयूमन अपलिफ्टमेंट, डेवलपमेंट ऐंड सोशल अवेयरनेस) द्वारा प्रयागराज के गंगापार ग्रामीण क्षेत्र में किए गए एक सर्वेक्षण में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि बकरी पालन आज भी हजारों परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार है।सर्वेक्षण के दौरान विभिन्न गांवों में पशुपालकों, किसानों और युवाओं से बातचीत की गई। अध्ययन में पाया गया कि सीमित भूमि और संसाधनों वाले परिवारों के लिए बकरी पालन एक कम लागत वाला और लाभकारी व्यवसाय है। अनेक परिवारों ने बताया कि बकरियां उनके लिए संकट के समय आर्थिक सुरक्षा कवच का कार्य करती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह या अन्य आवश्यकताओं के लिए जरूरत पड़ने पर बकरियों की बिक्री से तत्काल नकदी उपलब्ध हो जाती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गंगापार क्षेत्र के ग्रामीण परिवेश में बकरियां स्थानीय वनस्पतियों और प्राकृतिक चरागाहों पर आसानी से पल जाती हैं, जिससे पालन-पोषण की लागत कम रहती है। यही कारण है कि छोटे किसान और भूमिहीन परिवार भी इस व्यवसाय को आसानी से अपना सकते हैं। सर्वेक्षण में यह भी देखा गया कि ग्रामीण किशोर और युवा पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ बकरी पालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।हुडसा के अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ कि महिलाओं की भागीदारी बकरी पालन में लगातार बढ़ रही है। अनेक ग्रामीण परिवारों में महिलाएं बकरियों की देखभाल कर परिवार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सेवाएं और बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराया जाए तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।बकरी के मांस और दूध की बढ़ती मांग ने भी इस व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना दिया है। स्थानीय बाजारों में बकरियों की अच्छी कीमत मिलने से पशुपालकों को नियमित आय प्राप्त होती है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन को आजीविका के प्रभावी साधन के रूप में देखा जा रहा है।</div><div style="text-align:justify;">हालांकि सर्वेक्षण में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें पशुओं में रोगों का प्रकोप, गुणवत्तापूर्ण नस्लों की कमी, चारे की समस्या तथा पशु चिकित्सा सुविधाओं का अभाव प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, गैर-सरकारी संस्थाएं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के अंतर्गत कार्यरत संस्थान मिलकर इस क्षेत्र में निवेश करें तो बकरी पालन ग्रामीण विकास का एक मजबूत माध्यम बन सकता है।आज जब ग्रामीण भारत रोजगार और आय के नए अवसरों की तलाश में है, तब बकरी पालन एक ऐसा क्षेत्र है जो कम निवेश में अधिक लाभ और आत्मनिर्भरता की संभावना प्रदान करता है। प्रयागराज के गंगापार क्षेत्र में सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ है कि बकरी पालन केवल एक परंपरागत व्यवसाय नहीं, बल्कि वर्तमान समय में भी ग्रामीण आजीविका, आर्थिक सशक्तिकरण और सतत विकास का एक प्रभावी साधन है।निष्कर्षतः, यदि बकरी पालन को वैज्ञानिक तकनीकों, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार व्यवस्था से जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण भारत के लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बकरी पालन आज भी प्रासंगिक है और आने वाले समय में ग्रामीण समृद्धि का एक मजबूत आधार बन सकता है।</div></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div></div></div></div><div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 19:53:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दम तोड़ती कुम्हारों की परंपरा: मिट्टी से जुड़ी संस्कृति और आजीविका पर गहराता संकट डॉ. मणि शंकर द्विवेदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">  भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पारंपरिक व्यवसायों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इन्हीं परंपराओं में कुम्हारों द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सदियों से यह कला भारतीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रही है। कभी गांवों की सुबह मिट्टी के घड़ों के शीतल जल से और शाम दीयों की मधुर रोशनी से आबाद होती थी। मटके, सुराही, कुल्हड़, दीये तथा अन्य मिट्टी के बर्तन प्रत्येक घर की आवश्यकता हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के कारण यह परंपरा आज अस्तित्व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181019/the-potters-tradition-is-dying-the-clay-related-culture-and-livelihood"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/img-20260611-wa0139.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"> भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पारंपरिक व्यवसायों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इन्हीं परंपराओं में कुम्हारों द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। </div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सदियों से यह कला भारतीय जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रही है। कभी गांवों की सुबह मिट्टी के घड़ों के शीतल जल से और शाम दीयों की मधुर रोशनी से आबाद होती थी। मटके, सुराही, कुल्हड़, दीये तथा अन्य मिट्टी के बर्तन प्रत्येक घर की आवश्यकता हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के कारण यह परंपरा आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।</div><div style="text-align:justify;">कुम्हार समुदाय की पीढ़ियों से चली आ रही आजीविका अब गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। आर्थिक दृष्टि से यह व्यवसाय पहले की अपेक्षा कम लाभकारी रह गया है। मिट्टी के बर्तन तैयार करने में अत्यधिक श्रम, समय और कौशल की आवश्यकता होती है, लेकिन उसके अनुरूप आय नहीं मिल पाती। अच्छी गुणवत्ता की मिट्टी जुटाने, उसे तैयार करने, बर्तन बनाने, सुखाने और भट्ठी में पकाने की पूरी प्रक्रिया कठिन और खर्चीली है।</div><div style="text-align:justify;">करछना क्षेत्र के चाका गांव निवासी 76 वर्षीय रामलाल प्रजापति, जो 1970 के दशक से इस व्यवसाय से जुड़े हैं, बताते हैं कि मिट्टी के बर्तनों का बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसके कारण कुम्हार परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव नई पीढ़ी पर पड़ा है, जो अब इस पारंपरिक कला में कोई विशेष रुचि नहीं दिखा रही है।</div><div style="text-align:justify;">वहीं डांडी गांव के नंद किशोर के अनुसार मिट्टी की उपलब्धता और उसका प्रबंधन आज कुम्हारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। उनका कहना है कि उपयुक्त मिट्टी की व्यवस्था करने में काफी समय और पूंजी खर्च होती है, जबकि सरकार और समाज दोनों इस समस्या के प्रति अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">कुम्हार समुदाय से जुड़े गेमराज का कहना है कि आज भी अधिकांश कुम्हार स्थानीय हाट-बाजारों तक ही सीमित हैं, जबकि देश में आधुनिक व्यापारिक नेटवर्क और बड़े बाजार विकसित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक और अन्य कृत्रिम सामग्रियों से बने सस्ते उत्पादों के बढ़ते प्रचलन ने मिट्टी के बर्तनों की मांग को काफी हद तक प्रभावित किया है।</div><div style="text-align:justify;">कौंधियारा के राम भरोसे का मानना है कि यदि कुम्हारों को विद्युत चालित चाक, गुणवत्तापूर्ण मिट्टी, आधुनिक भट्ठियां और संगठित बाजार व्यवस्था में भागीदारी का अवसर मिले, तो उनके जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकता है। साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से मिट्टी के उत्पाद पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। जब पूरी दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है, तब मिट्टी के बर्तन प्राकृतिक, जैविक और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में उभरते हैं। इसलिए कुम्हारों की समस्या केवल एक समुदाय की आजीविका का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण का भी विषय है।</div><div style="text-align:justify;">समय की मांग है कि सरकार, कॉर्पोरेट क्षेत्र, स्वयंसेवी संस्थाएं और समाज मिलकर इस दिशा में ठोस प्रयास करें। कुम्हारों को आधुनिक डिजाइन, तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, आसान ऋण, डिजिटल विपणन और स्थायी बाजार उपलब्ध कराए जाएं, ताकि यह परंपरा नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ सके।</div><div style="text-align:justify;">कुम्हारों के चाक की गति केवल मिट्टी को आकार नहीं देती, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और आत्मनिर्भरता को भी आकार देती है। आवश्यकता इस बात की है कि समय रहते इस अमूल्य विरासत को संरक्षित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी मिट्टी की सोंधी खुशबू और उससे जुड़ी भारतीयता को महसूस कर सकें।</div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL"><br /></div><div class="adL"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:32:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम युवा मिशन,स्वरोजगार की दौड़ में जौनपुर जनपद बना प्रदेश में नंबर-1</title>
                                    <description><![CDATA[<div><strong>जौनपुर।</strong></div>
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<div>उत्तर प्रदेश सरकार का सीएम युवा योजना प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन गयी है।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में पौने चार लाख से अधिक आवेदन आए, जबकि योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 लाख ऋण वितरण का लक्ष्य रखा था।</div>
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<div>आंकड़ों से साफ है कि सीएम युवा योजना युवाओं को आकर्षित कर रही है और वह इससे जुड़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में प्रदेश के सभी जिलों को पछाड़ते हुए जौनपुर ने पूरे उत्तर प्रदेश में</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174993/cm-youth-mission-jaunpur-district-becomes-number-1-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001795146.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>जौनपुर।</strong></div>
<div> </div>
<div>उत्तर प्रदेश सरकार का सीएम युवा योजना प्रदेश के युवाओं की पहली पसंद बन गयी है।इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश भर में पौने चार लाख से अधिक आवेदन आए, जबकि योगी सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 1.5 लाख ऋण वितरण का लक्ष्य रखा था।</div>
<div> </div>
<div>आंकड़ों से साफ है कि सीएम युवा योजना युवाओं को आकर्षित कर रही है और वह इससे जुड़कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में प्रदेश के सभी जिलों को पछाड़ते हुए जौनपुर ने पूरे उत्तर प्रदेश में बेहतर मुकाम हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी कार्यकुशलता का परचम लहरा दिया है।इस उपलब्धि के पीछे जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह का नेतृत्व और उनकी संवेदनशील कार्यशैली को अहम माना जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>          इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.5 लाख लक्ष्य के सापेक्ष पूरे प्रदेश से तीन लाख 86 हजार 092 युवाओं ने ऋण के लिए आवेदन किया। इनमें तीन लाख 30 हजार 441 आवेदनों को बैंक को अग्रसारित किया गया। एक लाख 45 हजार 454 आवेदनों को बैंक ने लोन देने पर स्वीकृति दी। अब तक एक लाख 38 हजार 304 युवाओं को स्वरोजगार के लिए लोन वितरित किया जा चुका है।</div>
<div> </div>
<div>          सीएम युवा योजना का शत प्रतिशत लाभ देने में पूरे प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।  जौनपुर जनपद को विकास मुख्यधारा से जोड़ने वाले,जनलोकप्रिय,कृत्यवनिष्ठ व न्यायप्रिय जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप जिले में विशेष अभियान चलाकर युवाओं को स्वरोजगार के लिए बैंकों से संपर्क कर लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले को अभियान के तहत दो हजार 700 युवाओं को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य दिया गया था।</div>
<div> </div>
<div>इसके सापेक्ष नौ हजार 785 आवेदन प्राप्त हुए। उनमें आठ हजार 406 आवेदन बैंकों को भेजे गए। इनमें चार हजार 092 आवेदकों को ऋण वितरित किया जा चुका है। ऐसे में लक्ष्य के सापेक्ष 151.56 प्रतिशत ऋण वितरण किया गया। जिलाधिकारी श्री सिंह ने बताया कि लक्ष्य से अधिक ऋण वितरित कर जौनपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है।</div>
<div> </div>
<div>पूरे वित्तीय वर्ष जौनपुर की स्थिति पहले स्थान पर बनी रही।इसी क्रम में बताते चले कि जिलाधिकारी की सख्ती और कुशल निर्देशन का ही असर रहा जो सीएम युवा मिशन स्वरोजगार की दौड़ में बेहतर स्थिति हासिल की है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:53:41 +0530</pubDate>
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