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                <title>india economic growth - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>युद्ध और टैरिफ के तूफान में भी भारत की अर्थव्यवस्था का बजा डंका</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">दुनिया इस समय आर्थिक और सामरिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पैदा हुई वैश्विक परिस्थितियों ने पहले ही ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रखा था। इसके बाद अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी। होर्मुज क्षेत्र में पैदा हुए संकट का असर तेल और समुद्री व्यापार पर पड़ा। भारत के आयात-निर्यात पर भी इसका दबाव महसूस किया गया। दूसरी ओर अमेरिका की ओर से भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी और व्यापारिक दबाव ने परिस्थितियों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस मजबूती</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186989/indias-economy-continues-to-thrive-even-in-the-storm-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-09/1002217491.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">दुनिया इस समय आर्थिक और सामरिक अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पैदा हुई वैश्विक परिस्थितियों ने पहले ही ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रखा था। इसके बाद अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध ने वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा दी। होर्मुज क्षेत्र में पैदा हुए संकट का असर तेल और समुद्री व्यापार पर पड़ा। भारत के आयात-निर्यात पर भी इसका दबाव महसूस किया गया। दूसरी ओर अमेरिका की ओर से भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी और व्यापारिक दबाव ने परिस्थितियों को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस मजबूती का प्रदर्शन किया है, वह केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं बल्कि देश की आर्थिक क्षमता और नीतिगत स्थिरता का बड़ा संकेत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के लगभग 7 प्रतिशत के अनुमान से भी बेहतर रहा। वैश्विक स्तर पर जब अनेक अर्थव्यवस्थाएं युद्ध, महंगाई, ऊर्जा संकट और व्यापारिक तनाव से जूझ रही हैं, तब भारत की अर्थव्यवस्था का इस गति से आगे बढ़ना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की इस आर्थिक तस्वीर को केवल बाजार की स्वाभाविक ताकत के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे सरकार की लगातार बनाई गई आर्थिक रणनीति और उस रणनीति को जमीन पर लागू करने की कार्यप्रणाली भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने विकास का आधार केवल तत्काल राहत या उपभोग को नहीं बनाया, बल्कि बुनियादी ढांचे, सड़क, रेल, बंदरगाह, ऊर्जा, रक्षा, विनिर्माण और डिजिटल अर्थव्यवस्था में लगातार निवेश बढ़ाने पर जोर दिया है। यही पूंजीगत खर्च आज आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहली तिमाही में सरकार के पूंजीगत खर्च में 18.6 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकार आर्थिक दबाव के समय भी विकास खर्च को रोकने के बजाय उसे आगे बढ़ाने की नीति पर कायम है। सरकार का यह दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था के लिए दोहरा लाभ पैदा करता है। एक ओर बड़े स्तर पर निर्माण और आधारभूत ढांचे की परियोजनाओं से रोजगार और कारोबार को बढ़ावा मिलता है, वहीं दूसरी ओर सड़क, रेलवे, बिजली, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक ढांचे में सुधार से आने वाले वर्षों की आर्थिक क्षमता मजबूत होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में सरकारी निवेश का असर निजी क्षेत्र की गतिविधियों पर भी दिखाई देता है। जब सरकार बुनियादी ढांचे में निवेश करती है तो उससे सीमेंट, स्टील, मशीनरी, परिवहन, निर्माण और अनेक दूसरे क्षेत्रों में मांग पैदा होती है। इससे अर्थव्यवस्था में पैसा घूमता है और निजी क्षेत्र को भी विस्तार का अवसर मिलता है। यही कारण है कि वर्तमान आर्थिक वृद्धि को केवल सरकारी खर्च से जोड़ना उचित नहीं होगा। सरकार द्वारा तैयार किया गया वातावरण निजी निवेश और उपभोग दोनों के लिए आधार तैयार कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आम लोगों की खपत भी आर्थिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है। पिछले वर्ष जीएसटी और आयकर से संबंधित राहतों के कारण लोगों के हाथ में खर्च करने योग्य आय बढ़ी। महंगाई की चुनौतियों के बावजूद उपभोक्ता मांग में अपेक्षित कमजोरी नहीं आई। इसका असर यात्री वाहनों की बिक्री में दिखाई दिया, जहां पहली तिमाही में 25.6 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा बताता है कि घरेलू बाजार में उपभोक्ता विश्वास अभी भी मजबूत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बिजली की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बिजली की मांग की वृद्धि दर 1.9 प्रतिशत से बढ़कर 8.4 प्रतिशत तक पहुंचना औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत माना जा सकता है। जब उद्योग, सेवा क्षेत्र, निर्माण और घरेलू खपत में गतिविधियां बढ़ती हैं तो ऊर्जा की मांग भी बढ़ती है। इसलिए बिजली की मांग का यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था की व्यापक गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।</div>
<div style="text-align:justify;">सकल मूल्य वर्धित यानी जीवीए के आंकड़े भी भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित करते हैं। पहली तिमाही में वास्तविक जीवीए वृद्धि 8.2 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 7.1 प्रतिशत थी। वहीं नॉमिनल जीवीए वृद्धि 11.5 प्रतिशत दर्ज की गई। नॉमिनल जीडीपी वृद्धि भी 8.1 प्रतिशत से बढ़कर 10.3 प्रतिशत हुई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि आर्थिक गतिविधियों का विस्तार केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सेवा क्षेत्र की मजबूती भी भारत की आर्थिक कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई 58.6 तक पहुंचना बताता है कि सेवा क्षेत्र में कारोबारी गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। भारत लंबे समय से सेवा क्षेत्र की अपनी क्षमता के लिए दुनिया में पहचान रखता है। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, डिजिटल सेवाओं, संचार, व्यापार और अन्य सेवा क्षेत्रों का विस्तार भारतीय अर्थव्यवस्था को लगातार नया आधार दे रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की कार्यप्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसने वैश्विक संकटों के बीच आर्थिक गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने पर लगातार जोर दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऊर्जा और खाद्य बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आया। बाद में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और समुद्री व्यापार तथा तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं पैदा हुईं। ऐसे समय में किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए आयात लागत और महंगाई को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती होती है। भारत ने ऐसी परिस्थितियों में आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए नीतिगत स्तर पर संतुलन साधने की कोशिश की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव भी भारत के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में आया। भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकियों ने यह आशंका पैदा की कि इसका भारतीय निर्यात और औद्योगिक उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। लेकिन भारत ने अपनी आर्थिक रणनीति को केवल किसी एक बाजार पर निर्भर नहीं रखा। निर्यात बाजारों के विविधीकरण, घरेलू मांग को मजबूत करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की दिशा में सरकार की नीतियां इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की आर्थिक नीति में आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत करना है। सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ विदेशी निवेश आकर्षित करने, विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और रणनीतिक क्षेत्रों में देश की निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, मोबाइल निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में लगातार क्षमता निर्माण इसी सोच का हिस्सा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भारत के सामने सबसे बड़ा अवसर यह है कि वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता चाहती हैं। यदि भारत इस अवसर को पूरी तरह भुना पाता है तो आने वाले वर्षों में विनिर्माण और निर्यात के क्षेत्र में उसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है। इसके लिए सरकार की नीतिगत स्थिरता, तेज निर्णय लेने की क्षमता और परियोजनाओं को समय पर पूरा कराने की कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी समझना जरूरी है कि 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि उत्सव का विषय जरूर है, लेकिन इसे अंतिम उपलब्धि नहीं माना जा सकता। भारत के सामने रोजगार सृजन, ग्रामीण मांग, महंगाई, निर्यात प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। इसलिए सरकार के सामने आगे भी यही चुनौती रहेगी कि आर्थिक वृद्धि को अधिक व्यापक बनाया जाए और उसका लाभ समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">फिर भी वर्तमान आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था ने बाहरी दबावों के सामने उल्लेखनीय लचीलापन दिखाया है। युद्ध हो, तेल संकट हो, वैश्विक व्यापार में तनाव हो या टैरिफ का दबाव—भारत की आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह पटरी से नहीं उतरीं। इसके पीछे मजबूत घरेलू बाजार, बढ़ता सरकारी पूंजीगत खर्च, सेवा क्षेत्र की क्षमता, सुधारों की निरंतरता और आर्थिक प्रबंधन का महत्वपूर्ण योगदान है।</div>
<div style="text-align:justify;">भारत आज विश्व शक्ति बनने की दिशा में केवल सामरिक या राजनीतिक आधार पर नहीं बढ़ रहा है। आर्थिक शक्ति किसी भी राष्ट्र की वैश्विक स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि इसी आर्थिक क्षमता का संकेत देती है। सरकार ने जिस तरह बुनियादी ढांचे, सउत्पादन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और घरेलू मांग को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की है, उसका परिणाम आर्थिक आंकड़ों में दिखाई देने लगा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सबसे बड़ी बात यह है कि भारत ने संकटों के बीच अपनी गति बनाए रखने की क्षमता दिखाई है। दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है और आगे भी अनेक चुनौतियां सामने आ सकती हैं। लेकिन यदि सरकार इसी तरह वित्तीय अनुशासन, पूंजीगत निवेश, नीतिगत स्थिरता और आर्थिक सुधारों के बीच संतुलन बनाए रखती है तो भारत की विकास यात्रा और तेज हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि भारत के लिए केवल एक आंकड़ा नहीं है। यह उस आर्थिक आत्मविश्वास का संकेत है जिसके आधार पर भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका और मजबूत कर रहा है। युद्ध और टैरिफ के दबाव के बावजूद अर्थव्यवस्था की यह रफ्तार बताती है कि भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का संकल्प नहीं छोड़ा है। सरकार की कार्यप्रणाली और आर्थिक नीतियों की असली परीक्षा भी यही है कि संकट चाहे कितना बड़ा हो, विकास की गति को थमने न दिया जाए। फिलहाल जीडीपी के आंकड़े यही संदेश दे रहे हैं कि भारत की आर्थिक गाड़ी न केवल चल रही है, बल्कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी अपनी रफ्तार बनाए हुए है।</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>         *कांतिलाल मांडोत*</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:00:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>राष्ट्रहित और जनहित के कार्य करने वालों को ही जनादेश</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में हाल ही में पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों की यदि ईमानदारी से व्याख्या की जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि जनता ने उन्हीं दलों और नेताओं को जनादेश दिया है जिनकी छवि साफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ और ईमानदार रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी को बिहार के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो व्यापक जनसमर्थन मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पीछे केंद्र की</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा  की नरेंद्र मोदी  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की राष्ट्रहित और जनहित में कार्य करने वाली नीतियों की बड़ी भूमिका रही है। इन नीतियों के कारण देश न केवल आंतरिक रूप से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178740/mandate-only-for-those-working-in-national-interest-and-public"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">देश में हाल ही में पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों की यदि ईमानदारी से व्याख्या की जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह स्पष्ट दिखाई देता है कि जनता ने उन्हीं दलों और नेताओं को जनादेश दिया है जिनकी छवि साफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्वच्छ और ईमानदार रही है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनता पार्टी को बिहार के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जो व्यापक जनसमर्थन मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके पीछे केंद्र की</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा  की नरेंद्र मोदी  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की राष्ट्रहित और जनहित में कार्य करने वाली नीतियों की बड़ी भूमिका रही है। इन नीतियों के कारण देश न केवल आंतरिक रूप से</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अधिक मजबूत और सशक्त हुआ है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विधानसभा चुनावों के परिणाम देश के राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि इक्कीसवीं सदी के आधुनिक और जागरूक भारत में जात-पात और धर्म के नाम पर राजनीति कर सत्ता प्राप्त करना अब आसान नहीं रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का मतदाता पंच से लेकर प्रधानमंत्री तक के चुनाव में विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और सुशासन की गारंटी चाहता है। वह उसी व्यक्ति और दल को अपना समर्थन देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उसकी अपेक्षाओं पर खरा उतरता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत में डेढ़-दो दशक पहले तक कई राज्यों में जातिवाद और धर्म आधारित राजनीति के सहारे सरकारें बनती रही हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि प्राकृतिक संसाधनों और व्यापारिक संभावनाओं से सम्पन्न कई राज्य भी भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख और भ्रष्टाचार के प्रतीक बनकर रह गए।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र में प्रधानमंत्री</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नरेंद्र मोदी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद देश की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। जाति और धर्म की राजनीति करने वाले दलों का जनाधार लगातार कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और उनकी व्यक्तिगत ईमानदार छवि के कारण भारत आज विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर अधिक सुरक्षित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सक्षम और आत्मनिर्भर बनता जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज यदि देश के दो दर्जन के आसपास राज्यों में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अथवा उसके सहयोगी दलों की सरकारें है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके पीछे केंद्र सरकार की विश्वसनीय और जनहितकारी छवि का महत्वपूर्ण योगदान है। इस नेतृत्व ने देशवासियों के मन में व्याप्त भय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भूख और भ्रष्टाचार के वातावरण को कम करने का प्रयास किया है तथा विकसित और सुरक्षित भारत का विश्वास जगाया है। लगातार आ रहे विधानसभा चुनावों के परिणाम विपक्षी दलों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश हैं। यदि उन्हें राजनीति में प्रासंगिक बने रहना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जात-पात और धर्म की संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर विकास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुरक्षा और जनकल्याण जैसे मुद्दों पर जनता का विश्वास जीतना होगा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">दरअसल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज देश का मतदाता स्वार्थ और तुष्टिकरण की राजनीति से अधिक राष्ट्रहित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और सुशासन को महत्व देने लगा है। यही कारण है कि केवल सत्ता प्राप्ति के उद्देश्य से की जाने वाली राजनीति को जनता लगातार नकारती जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत के पुनर्जागरण की तथा-कथा,देश की सर्वांगीण प्रगति का मूल राष्ट्रीय जागरण</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">1947 में भारत एवं पाकिस्तान ने एक साथ स्वतंत्रता की प्राप्ति की थी किंतु पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र की अवधारणा धारण कर अलग दिशा में आगे बढ़ता गया जिसके फलस्वरुप आज पाकिस्तान विपन्न और गरीब देश बन गया है।  दूसरी तरफ भारत एक लोकतांत्रिक, जनतांत्रिक अवधारणा की दिशा में  नई-नई विकास के सोपनो को प्रतिपादित कर आगे बढ़ता गया। भारत वैश्विक स्तर पर सामरिक आर्थिक एवं अन्य विषयों पर काफी हद तक प्रगति प्राप्त कर चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने आश्चर्यजनक रूप से देश को विकसित मजबूत एवं सशक्त बना दिया है ।भारतीय परिदृश्य और संदर्भ में भारत में  विगत एक</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174985/the-story-of-indias-renaissance-and-national-awakening-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1947 में भारत एवं पाकिस्तान ने एक साथ स्वतंत्रता की प्राप्ति की थी किंतु पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र की अवधारणा धारण कर अलग दिशा में आगे बढ़ता गया जिसके फलस्वरुप आज पाकिस्तान विपन्न और गरीब देश बन गया है।  दूसरी तरफ भारत एक लोकतांत्रिक, जनतांत्रिक अवधारणा की दिशा में  नई-नई विकास के सोपनो को प्रतिपादित कर आगे बढ़ता गया। भारत वैश्विक स्तर पर सामरिक आर्थिक एवं अन्य विषयों पर काफी हद तक प्रगति प्राप्त कर चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने आश्चर्यजनक रूप से देश को विकसित मजबूत एवं सशक्त बना दिया है ।भारतीय परिदृश्य और संदर्भ में भारत में  विगत एक दशक में व्यापक तथा आमूल चूल परिवर्तन देखे गये हैं। राजनीतिक परिदृश्य में उत्तरदायित्व आधारित शासन प्रशासन-प्रणाली, सांस्कृतिक विमर्श में सनातनी सांस्कृतिक सभ्यता-गौरव की पुनर्प्राप्ति और आर्थिक नीतियों के संरचनात्मक  सुधारों ने देश की दिशा और दशा तय की है। इन नई विचारधारा एवं रणनीति ने भारत को न केवल आंतरिक रूप से सशक्त किया बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय राजनीति में पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा परिवर्तन रिपोर्ट कार्ड राजनीति का उदय रहा, जिसमें आम जनता और राजनीतिक नेताओं और दलों का मूल्यांकन उनके किए गए कार्यों और परिणामों के आधार पर कसौटी पर कसा जाने लगा है ।संवैधानिक और नीतिगत स्तर पर कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए। 2019 में <strong>अनुच्छेद 370</strong> का निरसन और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन केंद्र की सख्त और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति तथा विचारधारा का प्रतीक बना।</p>
<p style="text-align:justify;"> <strong>तीन तलाक कानून</strong> ने मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रखा। वहीं <strong>नागरिकता संशोधन अधिनियम</strong> ने राष्ट्रीयता और शरणार्थी नीति पर नई विचारों की श्रृंखला को जन्म दिया। भारत की परंपरागत लोकतांत्रिक विरासत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए नया संसद भवन, ई-संसद और डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य को शामिल किया गया है। दूसरी तरफ विपक्ष की भूमिका, मीडिया की स्वतंत्रता और चुनावी राजनीति में सोशल मीडिया तथा धनबल के प्रभाव ने लोकतांत्रिक विमर्श को चुनौतीपूर्ण और प्रभावशाली भी  बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">नये भारत की संकल्पना और अवधारणा को केवल राजनीति या अर्थव्यवस्था तक सीमित परिसीमित नहीं रखा गया है बल्कि सांस्कृतिक क्षेत्र के व्यापक फलक पर भी इसका गहरा असर और परिणाम परिलक्षित हुए हैं । भारत की महान अर्वाचीन योग और आयुर्वेद जैसी परंपरा को वैश्विक स्तर प्रचारित प्रसारित कर नई अवधारणा तथा पहचान प्रदान की गई है। अयोध्या में राममंदिर निर्माण ने भारतीय परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक आकांक्षाओं की विशाल अवधारणा को मूर्त रूप दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">शिक्षा और पाठ्यपुस्तकों में भारतीय आख्यानों और इतिहास को नवीन स्वरूप देने के प्रयास किए गए हैं। हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को पुष्पित पल्लवित करने के प्रयासों  को संपूर्ण प्रोत्साहन दिया गया। साथ ही, सांस्कृतिक कूटनीति नवीन अवधारणा के माध्यम से भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान और अधिक सुदृढ़ रूप से विस्तारित की है। हालाँकि, इस सांस्कृतिक पुनर्जागरण के साथ अनेक कठिन एवं दुष्कर चुनौतियाँ भी रहीं हैं। बहुलतावाद और अल्पसंख्यक अधिकारों पर उठते सवाल तथा परंपरा बनाम आधुनिकता की खींचतान समाज में गूढ विचार विमर्श का विषय बनी रही।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक पुनर्जागरण के संदर्भ में यही कहा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने इस दशक में उल्लेखनीय और अभूतपूर्व प्रगति प्राप्त की है । <strong>मेक इन इंडिया</strong> ने विनिर्माण और रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया। <strong>जीएसटी (2017)</strong> ने कर संरचना को एकीकृत और पारदर्शी बनाया। जीएसटी को 2025 में 22 सितंबर से नवीन संशोधन कर एकदम सरल एवं स्पष्ट कर काफी हद तक सस्ता करके आम जन को बड़ी राहत पहुंचाई है। <strong>डिजिटल इंडिया, जनधन योजना और UPI</strong> ने वित्तीय समावेशन और नकदी रहित लेन-देन की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव लाए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>स्टार्टअप इंडिया</strong> ने उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित किया। इसके परिणामस्वरूप भारत आज विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी सशक्त अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। विदेशी निवेश वृद्धि, रेलवे और सड़क निर्माण में गति तथा बिजली और डिजिटल नेटवर्क का विस्तार इस आर्थिक पुनर्जागरण के प्रमुख संकेतक रहे।इसके बावजूद बेरोजगारी की समस्या, ग्रामीण–शहरी असमानता और आय-विभाजन जैसी बड़ी और गंभीर चुनौतियाँ भारत देश के आर्थिक परिदृश्य को संतुलित होने से रोकती रही हैं। कृषि सुधार अभी तक आधे अधूरे रह गए और हरियाणा पंजाब तथा अन्य प्रदेशों में किसान आंदोलनों ने यह यह साफ तथा स्पष्ट संकेत दिया कि विकास की अवधारणा सबके लिए समान रूप से सुलभ नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत ने पिछले दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बनाई ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में भारत की भूमिका स्पष्ट हुई। 2023 में आयोजित <strong>g20 सम्मेलनों </strong>में भारत ने वैश्विक मुद्दों पर संतुलित और निर्णायक नेतृत्व प्रस्तुत किया। चीन में हुए शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में 10 महत्वपूर्ण देशों के साथ 27 देशों ने भारत चीन और रूस पर अपना विश्वास जाहिर कर यूरोपीय शक्तियों एवं मनमानी का खुला विरोध किया है, जिसमें भारत पर अमेरिका द्वारा 50% लगाए गए टैरिफ का भी खुला विरोध हुआ है।   रूस, चीन और पड़ोसी देशों के साथ संतुलित कूटनीतिक संबंधों ने भारत की स्थिति को और सशक्त मजबूत किया।पिछले दस वर्षों का भारत राजनीतिक दृढ़ता, सांस्कृतिक आत्मगौरव और आर्थिक नवाचारों से परिपूर्ण रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह अवधि भारतीय लोकतंत्र को नई परिभाषा देने, सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने और आर्थिक संरचना को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण रही। हालाँकि असमानता, बेरोजगारी और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसी विकराल चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं, फिर भी यह कहना उचित होगा कि यह दशक भारत के लिए <strong>राजनीतिक-सांस्कृतिक-आर्थिक पुनर्जागरण</strong> का समय रहा है, जिसने भारत को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में निर्णायक शक्ति बना दिया है। भारत की सनातनी सांस्कृतिक विरासत, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भारत की सामरिक शक्ति में इजाफा होकर पिछले एtक दशक में भारतीय जनमानस की एकजुटता एवं देश के नेतृत्व की कार्य कुशलता के परिणाम स्वरूप भारत का सम्मान और कद वैश्विक परिदृश्य में काफी हद तक ऊंचा हुआ है।<br /><br /><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:50:26 +0530</pubDate>
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