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                <title>अभिभावक जागरूकता - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>अभिभावक जागरूकता RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कागजों में फेल स्कूल बसें, सड़क पर बच्चों की सुरक्षा का बड़ा सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong>  शासन के निर्देश पर विद्यालयों में संचालित वाहनों की सुरक्षा और वैध अभिलेखों की जांच को लेकर परिवहन विभाग का अभियान तेज हो गया है। सोमवार को एआरटीओ प्रशासन आर.सी. भारतीय के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने विभिन्न विद्यालय वाहनों की जांच की। जांच के दौरान श्री साईं एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स कॉलेज, कर्नलगंज की तीन स्कूल बसें निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरीं। तीनों वाहनों की फिटनेस, परमिट और इंश्योरेंस फेल पाए जाने पर परिवहन विभाग ने उन्हें जब्त कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से विद्यालय संचालकों और स्कूल वाहन स्वामियों में हड़कंप मच गया। विभाग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185047/school-buses-fail-in-papers-big-question-of-safety-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1008044466.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>गोण्डा।</strong> शासन के निर्देश पर विद्यालयों में संचालित वाहनों की सुरक्षा और वैध अभिलेखों की जांच को लेकर परिवहन विभाग का अभियान तेज हो गया है। सोमवार को एआरटीओ प्रशासन आर.सी. भारतीय के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम ने विभिन्न विद्यालय वाहनों की जांच की। जांच के दौरान श्री साईं एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स कॉलेज, कर्नलगंज की तीन स्कूल बसें निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरीं। तीनों वाहनों की फिटनेस, परमिट और इंश्योरेंस फेल पाए जाने पर परिवहन विभाग ने उन्हें जब्त कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से विद्यालय संचालकों और स्कूल वाहन स्वामियों में हड़कंप मच गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि बच्चों के आवागमन में प्रयुक्त किसी भी वाहन के दस्तावेजों में कमी अथवा सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एआरटीओ प्रशासन ने विद्यालय प्रबंधन और वाहन स्वामियों से अपील की है कि प्रत्येक स्कूल बस अथवा वैन का फिटनेस प्रमाण-पत्र, परमिट, बीमा समेत सभी आवश्यक अभिलेख अद्यतन रखें। साथ ही वाहनों की नियमित तकनीकी जांच कराकर बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करें।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में विद्यालय वाहनों की जांच लगातार जारी रहेगी। जांच के दौरान फिटनेस, परमिट, इंश्योरेंस अथवा अन्य अनिवार्य अभिलेखों में कमी मिलने पर संबंधित वाहन के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>लेकिन कार्रवाई के साथ उठे कई बड़े सवाल</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">तीन बसों की जब्ती के बाद अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या स्कूल वाहनों की जांच केवल फिटनेस, परमिट और इंश्योरेंस तक सीमित रहनी चाहिए? बच्चों की सुरक्षा के लिए वाहन की <strong>निर्धारित क्षमता और उसमें वास्तविक रूप से बैठाए जा रहे बच्चों की संख्या</strong> की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी बस में निर्धारित सीटों से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है अथवा छोटी स्कूल वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को ले जाया जाता है, तो यह बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर जोखिम है। ऐसे वाहनों की नियमित निगरानी और जांच की जिम्मेदारी किसकी है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>क्या सड़क पर निकलते समय होती है वास्तविक जांच?</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">स्कूल वाहन प्रतिदिन बच्चों को लेकर सड़कों पर चलते हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि परिवहन विभाग की टीम क्या केवल कार्यालय में दस्तावेजों की जांच करती है या सड़क पर चल रहे वाहनों में भी यह देखती है कि उनमें निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे तो नहीं बैठाए गए हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">यदि किसी वाहन में क्षमता से अधिक बच्चे पाए जाते हैं तो वाहन स्वामी के साथ विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। साथ ही यदि कोई वाहन लंबे समय तक नियमों का उल्लंघन करता हुआ चलता रहा है, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों की सुरक्षा कागजों से नहीं, जमीन पर नियमों के पालन से होगी</strong></h6>
<p style="text-align:justify;">स्कूल बस की फिटनेस और बीमा जरूरी है, लेकिन केवल वैध दस्तावेज होना ही बच्चों की पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। वाहन में निर्धारित संख्या में ही बच्चे बैठें, चालक प्रशिक्षित और पात्र हो, आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो तथा वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">परिवहन विभाग की मौजूदा कार्रवाई निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन अब अभिभावकों की नजर इस बात पर रहेगी कि अभियान केवल कुछ वाहनों की जब्ती तक सीमित रहता है या जिलेभर में स्कूल बसों और वैन की <strong>व्यापक और नियमित जांच</strong> भी की जाती है।</p>
<h6 style="text-align:justify;"><strong>सीधा सवाल</strong></h6>
<p style="text-align:justify;"><strong>जब बच्चों को लेकर चलने वाले वाहन रोज सड़क पर हैं, तो क्या परिवहन विभाग प्रत्येक स्कूल वाहन की वास्तविक क्षमता, बच्चों की संख्या और सुरक्षा मानकों की जांच सुनिश्चित करेगा? </strong>बच्चों की सुरक्षा में किसी भी स्तर की लापरवाही भविष्य में भारी पड़ सकती है। इसलिए जरूरत केवल कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जिसमें <strong>नियम टूटने से पहले ही उन्हें रोक दिया जाए।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 21:15:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मदरसा बेबीज़ स्टडी शिक्षा उन्नयन संगोष्ठी एवं वार्षिक उत्सव का किया गया आयोजन </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां(सीतापुर)</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>मदरसा बेबीज़ स्टडी बिसवां में बुधवार शिक्षा उन्नयन संगोष्ठी एवं वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मौलाना एख़लाक़ कासमी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् हाजी असलम उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन रविश अनवर ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिक्षा के महत्व पर रोशनी डालते हुए अभिभावकों से अपील की वह अपने बच्चों को बेहतर और उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करें।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मेधावी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया। इमाम मौलाना अख़लाक़ कासमी ने संगोष्ठी में मौजूद शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174849/madrasa-babies-study-education-upgradation-seminar-and-annual-festival-organized"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260401-wa0020.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बिसवां(सीतापुर)</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong>मदरसा बेबीज़ स्टडी बिसवां में बुधवार शिक्षा उन्नयन संगोष्ठी एवं वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मौलाना एख़लाक़ कासमी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् हाजी असलम उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन रविश अनवर ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिक्षा के महत्व पर रोशनी डालते हुए अभिभावकों से अपील की वह अपने बच्चों को बेहतर और उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में मेधावी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया। इमाम मौलाना अख़लाक़ कासमी ने संगोष्ठी में मौजूद शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज देश और समाज के सामने बहुत सारी चुनौतियां हैं । उनको हल करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षित और जागरूक होना जरूरी है। बिना शिक्षा के इंसान न तो धर्म को समझ सकता है और ना संसार को। शिक्षाविद् हाजी असलम ने अपने संबोधन में कहा की सभी अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक और संवेदनशील रहें। बच्चों की प्राथमिक शिक्षा पूरी तरह से माता-पिता की कोशिशों पर निर्भर है। जो मां-बाप अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान रखते हैं उनके बच्चे मेघावी और होनहार सिद्ध होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर पालिका परिषद बिसवां के पूर्व सभासद डाक्टर अहमद अली अंसारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि देश और समाज की आधी आबादी महिलाओं की है इसलिए उनका शिक्षित होना ही  काफी नहीं है,बल्कि उच्च शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक है। क्योंकि जब मां शिक्षित और योग्य होगी तो अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देकर अच्छा नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। संगोष्ठी में शायर डाक्टर कफ़ील बिसवानी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शिक्षा का महत्व बयान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मौके पर मो० रिजवान सिद्दीकी ,शिक्षिका अतिया परवीन,रजिया बेगम,सायमा परवीन और कहकशा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में दो दर्जन से भी अधिक मेघावी छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम के संयोजक अर्श अनवर ने अतिथियों और अभिभावकों को धन्यवाद ज्ञापित कर आभार व्यक्त किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 19:52:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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