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                <title>Social Service News - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Social Service News RSS Feed</description>
                
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                <title>इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती.. इस की मिसाल है पहल 'दाना-पानी'</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान छाँव ढूँढ लेता है, कहीं बाहर होने पर या न मिलने पर पानी खरीद कर पी लेता है, कुल मिलाकर प्यास बुझाने के हजार रास्ते तलाश लेता है.. लेकिन, उन बेज़ुबान परिंदों और जानवरों का क्या, जो न तो किसी के घर का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, न ही अपनी प्यास की वजह से हुए अपने बेहाल हुए हाल की दास्ताँ बयाँ कर सकते हैं? तेज धूप में झुलसती सड़कों पर, सूखी छतों और वीरान कोनों में जब कोई चिड़िया अपनी चोंच खोलकर बेबस निगाहों से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179283/humanity-is-not-limited-to-humans-only-pahal-dana-paani-is"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260513-wa0066-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> गर्मी जब अपने चरम पर होती है, तो इंसान छाँव ढूँढ लेता है, कहीं बाहर होने पर या न मिलने पर पानी खरीद कर पी लेता है, कुल मिलाकर प्यास बुझाने के हजार रास्ते तलाश लेता है.. लेकिन, उन बेज़ुबान परिंदों और जानवरों का क्या, जो न तो किसी के घर का दरवाज़ा खटखटा सकते हैं, न ही अपनी प्यास की वजह से हुए अपने बेहाल हुए हाल की दास्ताँ बयाँ कर सकते हैं? तेज धूप में झुलसती सड़कों पर, सूखी छतों और वीरान कोनों में जब कोई चिड़िया अपनी चोंच खोलकर बेबस निगाहों से आसमान की तरफ देखती है, यह मंज़र ही काफी है दिल को भीतर तक हिला देने के लिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> ये वही पल होते हैं, जब इंसानियत की असली परीक्षा होती है और कुछ लोग इस परीक्षा में खरे उतरते हैं। शहर की तेजी से उभरती संस्था बीइंग रेस्पॉन्सिबल इस भावना को लगभग चार वर्षों से सर्वोपरि रखे हुए है। संस्था इस भावना को अपने कार्यों में उतारते हुए हर साल गर्मियों में 'दाना-पानी' अभियान संचालित करती है।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वो बोल नहीं सकते.. इसलिए उनकी प्यास सुनाई नहीं देती। वो माँग नहीं सकते.. इसलिए उनकी तकलीफ दिखाई नहीं देती। लेकिन, उनका दर्द उतना ही सच्चा है, जितना कि हमारा। "बेजुबान हैं तो क्या हुआ, प्यास उन्हें भी लगती है.." थीम पर यही एहसास, पिछले कई वर्षों से एक खूबसूरत पहल को जिंदा रखे हुए है। यह पहल कोई एक बार का प्रयास नहीं, बल्कि लगातार कई वर्षों से हर गर्मी में दोहराई जा रही एक जिम्मेदारी है, जो बेज़ुबानों के लिए जीवन का सहारा बनती जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस वर्ष भी संस्था ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 200 से अधिक मिट्टी के सकोरे और दाने वितरित किए हैं, ताकि पक्षियों और जानवरों को इस भीषण गर्मी में थोड़ी राहत मिल सके। ये सकोरे सिर्फ मिट्टी के बर्तन नहीं हैं.. ये उम्मीद हैं, राहत हैं, और कई जिंदगियों के लिए जीवन की डोर हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्था बीइंग रेस्पॉन्सिबल का मानना है कि यदि हर व्यक्ति अपने घर के बाहर, छत पर या आसपास सिर्फ एक सकोरा रख दे और हर दिन उसमें पानी भरने की जिम्मेदारी ले ले, तो न जाने कितने ही मासूम जीवन बचाए जा सकते हैं। यह छोटा-सा प्रयास किसी के लिए पूरी दुनिया बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">संस्था इस पहल को सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि एक एक विचार के रूप में आगे बढ़ा रही है, एक ऐसा संवेदनशील विचार, जो हमें यह एहसास कराता है कि इस दुनिया में सिर्फ इंसानों का ही नहीं, बल्कि हर जीव का समान हक है। जब एक चिड़िया प्यास से तड़पती है, तो वह सिर्फ एक पक्षी नहीं होती, वह हमारे भीतर की इंसानियत का आईना होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीइंग रेस्पॉन्सिबल द्वारा की जा रही यह अद्भुत पहल सालों से बिना किसी शोर के चल रही है, जिसमें न तो कोई दिखावा और न ही किसी प्रकार की अपेक्षा.. यह सिर्फ और सिर्फ एक सच्चा प्रयास है, जो हर गर्मी में किसी बेज़ुबान पंछी की प्यास के लिए राहत बन जाता है। धीरे-धीरे यह भावना लोगों के दिलों तक पहुँच रही है। अब कई लोग खुद आगे आकर अपने घरों और आसपास पानी रखने लगे हैं, इस पहल को अपनाने लगे हैं। क्योंकि सच्चाई यही है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होती.. वह हर उस जीवन में होती है, जो इसे महसूस करता है, भले ही बोल नहीं पाता। और शायद, यही वह पल होता है, जब हम सिर्फ जीते नहीं, बल्कि किसी और को भी जीने देने का कारण बन जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मिट्टी के एक छोटे-से सकोरे में पानी भरकर रखना भले ही हमें साधारण लगे.. लेकिन हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि शहरों में ऊँची-ऊँची इमारतें खड़ी करने की होड़ में पेड़ों और जलस्त्रोतों को खत्म करके हम इन नन्हें जीवों से उनके हक के आशियाने और पीने के संसाधन धीरे-धीरे करके छीनते चले जा रहे हैं। ऐसे में ये सकोरे किसी डूबते को तिनके के सहारे के समान हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 22:38:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>अपने पिता  रामनरेश पांडेय की स्मृति में शव दाह के लिए  दान की छ विश्वा जमीन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी-प्रयागराज।</strong> देवरख क्षेत्र के समाजसेवी बबलू पांडेय ने समाजहित में एक सराहनीय पहल करते हुए शवदाह स्थल के निर्माण के लिए अपनी निजी 6 बिस्सा भूमि नगर निगम को स्वेच्छा से दान कर दी। यह भूमि उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय रामनरेश पांडेय की स्मृति में दान की है।इस विषय को लेकर पार्षद मयंक यादव ने कई बार नगर निगम सदन में प्रस्ताव रखा और महापौर से अनुरोध किया। इसके बाद बबलू पांडे से संपर्क कर उन्हें समाजहित में भूमि दान के लिए प्रेरित किया गया, जिस पर उन्होंने सहमति जताते हुए जमीन की रजिस्ट्री नगर निगम को सौंप दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महापौर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174835/donated-six-vishwa-land-for-cremation-in-memory-of-his"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260401-wa0125.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>नैनी-प्रयागराज।</strong> देवरख क्षेत्र के समाजसेवी बबलू पांडेय ने समाजहित में एक सराहनीय पहल करते हुए शवदाह स्थल के निर्माण के लिए अपनी निजी 6 बिस्सा भूमि नगर निगम को स्वेच्छा से दान कर दी। यह भूमि उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय रामनरेश पांडेय की स्मृति में दान की है।इस विषय को लेकर पार्षद मयंक यादव ने कई बार नगर निगम सदन में प्रस्ताव रखा और महापौर से अनुरोध किया। इसके बाद बबलू पांडे से संपर्क कर उन्हें समाजहित में भूमि दान के लिए प्रेरित किया गया, जिस पर उन्होंने सहमति जताते हुए जमीन की रजिस्ट्री नगर निगम को सौंप दी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महापौर ने इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए कहा कि जल्द ही शवदाह स्थल के निर्माण कार्य की शुरुआत की जाएगी, जिससे क्षेत्रवासियों को सुविधा मिलेगी।इस अवसर पर बबलू पांडेय का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं मोमेंटो देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पार्षद मयंक यादव, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सरदार पतविन्दर सिंह, कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय श्रीवास्तव, भाजपा नेता राजेश थापा, सेक्टर प्रभारी प्रदीप तिवारी, सुधीर प्रजापति, विवेक पुरी एवं कार्तिकेय पुरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संजय श्रीवास्तव द्वारा किया गया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 20:33:33 +0530</pubDate>
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