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                <title>Hindi Cinema - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Hindi Cinema RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>खुशाली कुमार ने 'दुल्हनिया ले आएगी' के नए गाने 'जलवा' से बढ़ाया शादी का रंग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>दुल्हनिया ले आएगी के शानदार म्यूजिक एल्बम को मिल रहे प्यार के बीच अब फिल्म का नया गाना 'जलवा' रिलीज कर दिया गया है। यह एक हाई-एनर्जी, रंगारंग और डांस से भरपूर वेडिंग ट्रैक है, जो इस शादी सीजन का नया फेवरेट बनने के लिए तैयार है। खुशाली कुमार पर फिल्माया गया यह गाना अपने दमदार बीट्स, रंगीन विजुअल्स और सेलिब्रेशन से भरपूर माहौल के चलते हर संगीत और शादी की प्लेलिस्ट में जगह बनाने का दम रखता है।</div>
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<div style="text-align:justify;">'जलवा' में खुशाली कुमार का आत्मविश्वास से भरा और चुलबुला अंदाज देखने को मिलता है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, शानदार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183133/khushali-kumar-adds-color-to-the-wedding-with-the-new"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260710-wa0104.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>दुल्हनिया ले आएगी के शानदार म्यूजिक एल्बम को मिल रहे प्यार के बीच अब फिल्म का नया गाना 'जलवा' रिलीज कर दिया गया है। यह एक हाई-एनर्जी, रंगारंग और डांस से भरपूर वेडिंग ट्रैक है, जो इस शादी सीजन का नया फेवरेट बनने के लिए तैयार है। खुशाली कुमार पर फिल्माया गया यह गाना अपने दमदार बीट्स, रंगीन विजुअल्स और सेलिब्रेशन से भरपूर माहौल के चलते हर संगीत और शादी की प्लेलिस्ट में जगह बनाने का दम रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">'जलवा' में खुशाली कुमार का आत्मविश्वास से भरा और चुलबुला अंदाज देखने को मिलता है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, शानदार डांस मूव्स और उत्साह से भरपूर परफॉर्मेंस इस गाने को और भी आकर्षक बनाती है। शादी के जश्न, मस्ती और उत्सव का माहौल इस गीत में बेहद खूबसूरती से उभरकर सामने आता है। इस गाने को जाज़िम शर्मा और सुवर्णा तिवारी ने अपनी आवाज़ दी है। संगीत जाज़िम शर्मा ने तैयार किया है, जबकि इसके बोल जे.पी. गंगवार ने लिखे हैं। गाने का कैची पंजाबी हुक एकम मानुके ने लिखा है। म्यूजिक प्रोग्रामिंग अंशुमान शर्मा ने की है। वहीं, बैंजो पर नासिर, ढोलक पर राहुल कथक का संगीत गाने को और भी जीवंत बनाता है। वोकल्स की रिकॉर्डिंग यूफनी स्टूडियो में पार्था और निशांत द्वारा की गई है, जबकि मिक्सिंग और मास्टरिंग भास्कर शर्मा ने की है। सॉन्ग एडिट संतोष आर्य ने किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गाने को लेकर खुशाली कुमार ने कहा, "जलवा सुनते ही मुझे महसूस हो गया था कि इसमें एक शानदार वेडिंग सॉन्ग बनने के सभी तत्व मौजूद हैं। यह जोश, खुशी और हर दुल्हन के आत्मविश्वास का जश्न मनाता है। इस गाने की शूटिंग करना बेहद मजेदार अनुभव रहा और मुझे उम्मीद है कि दर्शक भी इस पर उतना ही थिरकेंगे, जितना हमने इसे बनाते वक्त आनंद लिया।" वहीं, निर्देशक आकाशादित्य लामा ने कहा, "जलवा पूरी तरह से 'दुल्हनिया ले आएगी' की भावना को दर्शाता है, जो कि रंगों, उत्साह, संगीत और जश्न से भरपूर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमारी कोशिश थी कि ऐसा गाना बनाया जाए, जिसे सुनते ही लोगों का मन डांस करने का हो जाए। संगीत, कोरियोग्राफी और खुशाली की शानदार ऊर्जा ने इस गाने को खास बना दिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह इस साल का सबसे पसंदीदा ब्राइडल एंथम बन सकता है।" सिद्धार्थ बनर्जी, आकाशादित्य लामा और विकास अग्रवाल द्वारा निर्मित दुल्हनिया ले आएगी में खुशाली कुमार, पियूष मिश्रा और महेश मांजरेकर मुख्य भूमिकाओं में नजर आएँगे। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:51:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इस जिद्दी डायरेक्टर की वजह से भारतीय सिनेमा को कुछ महान फिल्में मिली</title>
                                    <description><![CDATA[इस आदमी को पगला डायरेक्टर भी कहते है। जिसकी जिद की वजह से कुछ फिल्मों ने नायाब रिकार्ड बनाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131277/indian-cinema-got-some-great-movies-because-of-this-headstrong"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/17.jpg" alt=""></a><br /><p>स्वतंत्र प्रभात-सिनेमा</p>
<p>बॉलीवुड के इतिहास में ये ऐसा डायरेक्टर था जो अपनी सिर्फ एक फिल्म के लिए जाना जाता है. इस आदमी को फिल्म बनाने की कोई खास ट्रेनिंग नहीं थी. पर अपने वक्त के सबसे बड़े लोगों को अपने हाथ में ले के घूमता था ये शख्स. नाम था के आसिफ. पूरा नाम करीमुद्दीन आसिफ. फिल्म बनाई थी ‘मुग़ल-ए-आज़म’. उत्तर प्रदेश के इटावा में से निकले आसिफ बंबई में अपने नाम का डंका बजा आये.</p>
<p> </p>
<p>जिद्दी आदमी थे. मंटो इनके बारे में लिखते हैं कि कुछ खास किया तो नहीं था, पर खुद पर भरोसा इतना था कि सामने वाला इंसान घबरा जाता था. बड़े गुलाम अली खान से अपने बतरस से लेकर अपनी फिल्म में बड़े-बड़े गीतकारों से ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के लिए 72 गाने लिखवाने की कहानियां हैं आसिफ की.</p>
<p><br />9 मार्च 1971 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से आसिफ की मौत हो गई थी. उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में केवल दो फ़िल्में बनाईं ‘फूल'(1945) और ‘मुग़ल-ए-आज़म’ (1960). उनकी पहली फिल्म तो कुछ खास कमाल नहीं कर सकी लेकिन दूसरी फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ ने इतिहास बना दिया. ‘मुग़ल-ए-आज़म’ को बनाने में 14 साल लगे थे. ये फिल्म उस वक़्त बननी शुरू हुई जब हमारे यहां अंग्रेजों का राज था. शायद ये एक कारण भी हो सकता है।</p>
<p> </p>
<p>जिसके चलते इसको बनाने में इतना वक़्त लगा. ये उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी, इस फिल्म की लागत तक़रीबन 1.5 करोड़ रुपये बताई जाती है. जब फिल्में 5-10 लाख रुपयों में बन जाती थीं. भारतीय सिनेमा के इतिहास में ये फिल्म कई मायनों में मील का पत्थर साबित हुई.</p>
<p>1. सोहराब मोदी की ‘झांसी की रानी'(1953) भारतीय सिनेमा की पहली रंगीन फिल्म थी. पर 1955 आते-आते रंगीन फ़िल्में बनने लगी थीं. इसी को देखते हुए आसिफ ने भी ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’ सहित कुछ हिस्सों की शूटिंग टेक्निकलर में की जो उन्हें काफी पसंद आई. इसके बाद उन्होंने पूरी फिल्म को टेक्निकलर में दोबारा शूट करने काफैसला लिया ।</p>
<p> </p>
<p><br />2. इस फिल्म में अकबर के रोल के लिए आसिफ उस वक्त के मशहूर अभिनेता चंद्रमोहन को लेना चाहते थे. पर चंद्रमोहन आसिफ के साथ काम करने के लिए तैयार नहीं थे. आसिफ को उनकी आंखें पसंद थीं. कह दिया था कि मैं दस साल इंतजार करूंगा पर फिल्म तो आपके साथ ही बनाऊंगा. पर कुछ समय बाद एक सड़क हादसे में चंद्रमोहन की आंखें ही चली गईं.</p>
<p><br />3. फिल्म के एक सीन में पृथ्वीराज कपूर को रेत पर नंगे पांव चलना था. उस सीन की शूटिंग राजस्थान में हो रही थी जहां की रेत तप रही थी. उस सीन को करने में पृथ्वीराज कपूर के पांव पर छाले पड़ गए थे. जब ये बात आसिफ को पता चली तो उन्होंने भी अपने जूते उतार दिए और नंगे पांव गर्म रेत पर कैमरे के पीछे चलने लगे. अब कोई कुछ नहीं कह पाया था.</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p>4. नौशाद फिल्म के लिए बड़े गुलाम अली साहब की आवाज़ चाहते थे, लेकिन गुलाम अली साहब ने ये कहकर मना कर दिया कि वो फिल्मों के लिए नहीं गाते. लेकिन आसिफ ज़िद पर अड़ गए कि गाना तो उनकी ही आवाज में रिकॉर्ड होगा. उनको मना करने के लिए गुलाम साहब ने कह दिया कि वो एक गाने के 25000 रुपये लेंगे. उस दौर में लता मंगेशकर और रफ़ी जैसे गायकों को एक गाने के लिए 300 से 400 रुपये मिलते थे. आसिफ साहब ने उन्हें कहा कि गुलाम साहब आप बेशकीमती हैं ,ये लीजिये 10000 रुपये एडवांस. अब गुलाम अली साहब के पास कोई बहाना नहीं था. उनका गाना फिल्म में सलीम और अनारकली के बीच हो रहे प्रणय सीन के बैकग्राउंड में बजता है.</p>
<p><br />5.इस फिल्म का आइडिया आसिफ को आर्देशिर ईरानी की फिल्म ‘अनारकली’ को देखकर आया था. इस फिल्म को देखने के बाद उन्होंने अपने अपने दोस्त शिराज़ अली हाकिम के साथ एक फिल्म बनाने का फैसला किया. शिराज़ उनकी फिल्म प्रोड्यूस कर रहे थे. फिल्म में चंद्रबाबू, डी.के सप्रू और नरगिस को साइन किया गया. 1946 में फिल्म की शूटिंग बॉम्बे टाकीज स्टूडियो में शुरू हुई. अभी शूटिंग शुरू ही हुई थी कि पार्टीशन की प्रक्रिया शुरू हो गयी जिसके कारण फिल्म के प्रोड्यूसर शिराज़ को हिंदुस्तान छोड़कर जाना पड़ा. 1952 में फिल्म को दोबारा नए सिरे से नए प्रोड्यूसर और कास्टिंग के साथ शुरू किया गया. </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><br />6.फिल्म के म्यूजिक को लेकर आसिफ बड़े ही गंभीर थे. उन्हें इस फिल्म के लिए बेहद ही उम्दा संगीत की दरकार थी. नोट से भरे ब्रीफ़केस को लेकर आसिफ मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद के पास पहुंचे और ब्रीफ़केस थमाते हुए कहा कि उन्हें अपनी फिल्म के लिए यादगार संगीत चाहिए, ये बात नौशाद साहब को बिलकुल नहीं भाई. उन्होंने नोटों से भरा ब्रीफ़केस खिड़की से बाहर फ़ेंक दिया और कहा कि म्यूजिक की क्वालिटी पैसे से नहीं आती. बाद में आसिफ ने नौशाद से माफी मांग ली. वो अंदाज भी ऐसा था कि नौशाद हंस के मान गए.</p>
<p><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 18:47:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चार में से ये तीन भाई सिनेमा में आए : चमन पुरी, मदन पुरी और अमरीश पुरी।</title>
                                    <description><![CDATA[चमन पुरी , अमरीश से सबसे ज़्यादा मिलते हैं देखने में। हिन्दी फिल्मों में कुछ नामालूम सी चरित्र भूमिकाएँ उनके हिस्से में आईं। याद में टिकने जैसी भूमिकाएँ उनके हिस्से में नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131274/out-of-four-these-three-brothers-came-to-the-cinema"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/15.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात-</strong></p>
<p>चमन पुरी , अमरीश से सबसे ज़्यादा मिलते हैं देखने में। हिन्दी फिल्मों में कुछ नामालूम सी चरित्र भूमिकाएँ उनके हिस्से में आईं। याद में टिकने जैसी भूमिकाएँ उनके हिस्से में नहीं हैं।</p>
<p> </p>
<p>मदन पुरी जबर्दस्त खलनायक और बाद में चरित्र अभिनेता रहे। न जाने कितने निर्देशकों की टीम में वे स्थायी अभिनेता थे। बहुत लम्बी और क़ामयाब पारी रही उनकी।</p>
<p> </p>
<p>अमरीश रंगमंच से कला फ़िल्मों और वहां से कमर्शियल सिनेमा में आए। शुरुआत में दुबले पतले अजीब से दिखाई देते थे। 'प्रेम पुजारी' में वे लगभग एक्स्ट्रा जैसे हैं। एक उनकी तब की फ़िल्म याद है : 'खिलौने वाला'। पहली बार उन्हें कायदे से नोटिस किया 'भूमिका' में।</p>
<p> </p>
<p>अमरीश के बॉडी बिल्डिंग के शौक ने उनका व्यक्तित्व बदला और उसे प्रभावशाली बनाया। उनके पास एक असरदार और दमदार क़िस्म की आवाज़ तो थी ही। 'हम पांच' वह पहली व्यावसायिक फ़िल्म थी जिसमें वे अपने इस नए व्यक्तित्व के साथ मौजूद हुए और पसन्द किए गए। </p>
<p> </p>
<p>उसके बाद तो अमरीश पुरी का सफ़र सफलता की ओर लगातार आगे ही आगे बढ़ने का सफ़र है। वे नए नए गेटअप और मेकअप में कमर्शियल सिनेमा के व्याकरण में छा गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 18:34:04 +0530</pubDate>
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