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                <title>Hindi Cinema - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Hindi Cinema RSS Feed</description>
                
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                <title>एक कलाकार से कहीं बड़ा बन गया एक नाम — किशोर कुमार</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय बहुत कुछ छीन लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ स्वर उसकी पकड़ से बाहर रह जाते हैं। वे उम्र नहीं गिनते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीढ़ियाँ जोड़ते हैं। जब भी वे सुनाई देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन के बंद दरवाज़े बिना आहट खुलने लगते हैं। किशोर कुमार उसी विरल परंपरा के कलाकार हैं। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">अगस्त </span>1929 <span lang="hi" xml:lang="hi">को खंडवा में जन्मे आभास कुमार गांगुली ने संगीत को केवल मनोरंजन नहीं रहने दिया</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे मनुष्य की निजी स्मृतियों का सबसे विश्वसनीय साथी बना दिया। उनकी जयंती इसलिए याद रहती है क्योंकि यह उस आवाज़ का दिन है जिसने हँसी को भी सुर</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184615/a-name-became-bigger-than-an-artist-%E2%80%93-kishore-kumar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/images.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय बहुत कुछ छीन लेता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ स्वर उसकी पकड़ से बाहर रह जाते हैं। वे उम्र नहीं गिनते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीढ़ियाँ जोड़ते हैं। जब भी वे सुनाई देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन के बंद दरवाज़े बिना आहट खुलने लगते हैं। किशोर कुमार उसी विरल परंपरा के कलाकार हैं। </span>4 <span lang="hi" xml:lang="hi">अगस्त </span>1929 <span lang="hi" xml:lang="hi">को खंडवा में जन्मे आभास कुमार गांगुली ने संगीत को केवल मनोरंजन नहीं रहने दिया</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">उसे मनुष्य की निजी स्मृतियों का सबसे विश्वसनीय साथी बना दिया। उनकी जयंती इसलिए याद रहती है क्योंकि यह उस आवाज़ का दिन है जिसने हँसी को भी सुर दिया और पीड़ा को भी गरिमा।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके स्वर में जीवन के लगभग सभी रंग बसते थे। इसलिए उनका हर गीत सुनते ही बीता हुआ समय अनायास वर्तमान में लौट आता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े कलाकार जन्म से नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साधना से पहचान पाते हैं। खंडवा के आभास कुमार गांगुली की यात्रा भी ऐसी ही थी। पिता कुंजीलाल गांगुली वकील थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े भाई अशोक कुमार सिनेमा में स्थापित। उनके बुलावे पर वे मुंबई पहुँचे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">शिकारी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से अभिनय शुरू हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मन गायकी में रमा। संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">सुनना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसात करना और स्वर देना ही उनकी साधना थी। आरंभ में के.एल. सहगल का प्रभाव रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ज़िद्दी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">का</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मरने की दुआएँ क्यों माँगूँ</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">पहली बड़ी पहचान बना। फिर </span>1969 <span lang="hi" xml:lang="hi">में</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">आराधना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने इतिहास रच दिया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेरे सपनों की रानी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">रूप तेरा मस्ताना</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने सिद्ध किया कि कई बार नायक से पहले उसकी आवाज़ लोगों के दिलों पर राज करती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई कलाकार भावनाओं की भाषा बन जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब उसके गीत समय की सीमा नहीं मानते। किशोर कुमार के लिए सत्तर का दशक ऐसा ही स्वर्णकाल था।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चिंगारी कोई भड़के</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में विरह की आँच है</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">ये शाम मस्तानी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में जीवन की खुली मुस्कान</span>, '<span lang="hi" xml:lang="hi">ये जो चिलमन है</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में चंचल शरारत और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ज़िंदगी के सफर में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">में समय का निर्विकार सत्य।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मेरे सामने वाली खिड़की में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">यह साबित करता है कि हँसी भी उतनी ही गहरी कलात्मक अभिव्यक्ति हो सकती है जितनी करुणा। लगभग सत्ताईस सौ गीतों का उनका संसार केवल उपलब्धि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय संवेदनाओं का जीवित अभिलेख है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पीड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मस्ती</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आशा और निराशा—मानवीय अनुभव का शायद ही कोई रंग हो जिसे उनकी आवाज़ ने स्पर्श न किया हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बहुत कम आवाज़ें चेहरों नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तित्वों की पहचान बनती हैं। किशोर कुमार का स्वर किसी एक नायक तक सीमित नहीं रहा। राजेश खन्ना की रोमानी आभा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमिताभ बच्चन का तेज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">देव आनंद की चपलता और धर्मेंद्र की देसी सहजता—हर रूप में सहज ढल गया। आर.डी. बर्मन के साथ उनकी जुगलबंदी ने हिंदी फिल्म संगीत को नई ऊँचाइयाँ दीं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">दम मारो दम</span>', '<span lang="hi" xml:lang="hi">जाने जाँ ढूँढ़ता फिर रहा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चुरा लिया है तुमने</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">ने युवाओं की धड़कनों को नई लय दी। एस.डी. बर्मन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और कल्याणजी-आनंदजी के साथ उन्होंने अनगिनत कालजयी गीत रचे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">हमें तुमसे प्यार कितना</span>', '<span lang="hi" xml:lang="hi">हाय रे वो दिन क्यों न आए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">खाइके पान बनारस वाला</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">बताते हैं कि उनकी आवाज़ हर भाव की स्वाभाविक अभिव्यक्ति थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ लोग अपनी कला से पहचाने जाते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अपनी कला की सीमाएँ तोड़कर। किशोर कुमार दूसरी श्रेणी के कलाकार थे। गायकी उनकी पहचान अवश्य बनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर अभिनेता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संगीतकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गीतकार और फिल्मकार के रूप में भी उन्होंने</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">झुमरू</span>', '<span lang="hi" xml:lang="hi">दूर गगन की छाँव में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">दूर का राही</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी फिल्मों से गहरी मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">दूर गगन की छाँव में</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी एक सैनिक के मन की सबसे मार्मिक सिनेमाई अभिव्यक्तियों में गिनी जाती है। कला के सम्मान पर समझौता उन्हें स्वीकार नहीं था। पारिश्रमिक न मिलने पर आधा मेकअप लगाकर सेट पर पहुँचना या आधा गीत छोड़ देना इसी स्वाभिमान की मिसाल था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हर मधुर स्वर अपने हिस्से की खामोशी भी ढोता है। किशोर कुमार का जीवन भी इससे अछूता नहीं रहा। रुमा गुहा ठाकुरता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मधुबाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">योगिता बाली और लीना चंदावरकर के साथ उनके चार विवाह हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मधुबाला का साथ हिंदी सिनेमा की सबसे मार्मिक प्रेमकथाओं में गिना जाता है। उनकी बीमारी और असमय निधन ने किशोर कुमार को भीतर तक बदल दिया। उस दर्द की प्रतिध्वनि उनके अनेक दर्दभरे गीतों में महसूस होती है। </span>13 <span lang="hi" xml:lang="hi">अक्टूबर </span>1987 <span lang="hi" xml:lang="hi">को मात्र अट्ठावन वर्ष की आयु में हृदयाघात ने उनकी जीवन-यात्रा थाम दी। अंतिम इच्छा के अनुसार उनका पार्थिव शरीर खंडवा लाया गया। वे लौट तो अपनी जन्मभूमि आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भारतीय संगीत में जो सन्नाटा छोड़ गए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वह आज भी वैसा ही गूँजता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकप्रियता समय के साथ धुंधली पड़ सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सच्ची कला हर दौर की कसौटी पर और अधिक उजली होकर लौटती है। किशोर कुमार की आवाज़ इसका जीवंत प्रमाण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन के सफर में राही</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">आज भी आगे बढ़ने का विश्वास जगाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ तो लोग कहेंगे</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">समाज की रूढ़ मानसिकता पर आज भी उतनी ही पैनी चोट करता है। यही उनकी कला की सबसे बड़ी विजय है कि उनके गीत मनोरंजन की सीमाएँ लाँघकर जीवन-दृष्टि का हिस्सा बन गए। इसलिए उनकी आवाज़ हर पीढ़ी में नए अर्थ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई आत्मीयता और नई प्रासंगिकता के साथ सुनाई देती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समय अंततः उसी कला के आगे ठहरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें मनुष्य अपने जीवन का अक्स पहचान ले। किशोर कुमार की विरासत इसी सत्य की साक्षी है। खंडवा से निकला उनका स्वर अमरता तक इसलिए पहुँचा क्योंकि उसमें बनावट नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सच्चाई थी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रदर्शन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संवेदना थी। उन्होंने सिद्ध किया कि सच्ची कला हर दौर में नए अर्थों के साथ जीवित रहती है। जब तक किसी उत्सव में उनके गीत मुस्कान बनकर गूँजेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी अकेले मन को उनका स्वर संबल देगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी प्रेम में उनकी धुन धड़केगी और जीवन की राह पर कोई मुसाफिर उन्हें गुनगुनाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक किशोर दा स्मृति नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय जनमानस की जीवित धड़कन बने रहेंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Aug 2026 22:03:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अजय देवगन और रितेश देशमुख स्टारर ‘रेड 2’अनमोल सिनेमा पर पहली बार</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कुछ लोग सोचते हैं कि ताकतवर कभी हारते नहीं, भ्रष्टाचारियों को क़ानून कभी छू नहीं पाता; पर इन हालात को बदलने आते हैं अमय पटनायक - एक ऐसे अधिकारी जो कभी भ्रष्ट और शक्तिशाली लोगों के आगे सिर नहीं झुकाते । इस जुलाई, अनमोल सिनेमा आपको ताकत, धोखे और जबर्दस्त ड्रामा से भरपूर ‘रेड 2’ की दुनिया में ले जाने के लिए तैयार है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राज कुमार गुप्ता के निर्देशन में बनी यह फिल्म आपको सच और झूठ की जंग में ले जाती है। अजय देवगन अपनी खास स्टाइल, टाइमिंग और जबर्दस्त इंटेंसिटी के साथ अमय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184383/ajay-devgan-and-riteish-deshmukh-starrer-raid-2-for-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260729-wa0109.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कुछ लोग सोचते हैं कि ताकतवर कभी हारते नहीं, भ्रष्टाचारियों को क़ानून कभी छू नहीं पाता; पर इन हालात को बदलने आते हैं अमय पटनायक - एक ऐसे अधिकारी जो कभी भ्रष्ट और शक्तिशाली लोगों के आगे सिर नहीं झुकाते । इस जुलाई, अनमोल सिनेमा आपको ताकत, धोखे और जबर्दस्त ड्रामा से भरपूर ‘रेड 2’ की दुनिया में ले जाने के लिए तैयार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राज कुमार गुप्ता के निर्देशन में बनी यह फिल्म आपको सच और झूठ की जंग में ले जाती है। अजय देवगन अपनी खास स्टाइल, टाइमिंग और जबर्दस्त इंटेंसिटी के साथ अमय पटनायक बनकर लौटे हैं। अजय और रितेश का टकराव फिल्म की जान है – देवगन की शांत ताकत और रितेश के चालाक और दबंग किरदार का कॉम्बिनेशन दर्शकों को बांधे रखता है। कहानी में और भी जान डाल देते हैं सौरभ शुक्ला, रजत कपूर और अमित सियाल जैसे अनुभवी कलाकार।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘रेड 2’ के निर्माता हैं भूषण कुमार, कुमार मंगत पाठक, अभिषेक पाठक और कृष्ण कुमार। फिल्म को गुलशन कुमार और टी-सीरीज़ के द्वारा प्रस्तुत किया गया है और यह एक पैनोरमा स्टूडियोज़ प्रोडक्शन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">‘रेड 2’ में एक बार फिर लौट रहे हैं ईमानदारी और निडरता के प्रतीक, आईआरएस अधिकारी अमय पटनायक (अजय देवगन), जो एक और ताकतवर दुश्मन – दादाभाई (रितेश देशमुख) का सामना करते हैं, जो संत के वेश में छिपा हुआ एक साँप है। क्या अमय पटनायक सच सामने ला पाएंगे, या सिस्टम उनका मिशन को कुचल देगा? जानने के लिए देखिए ‘रेड 2’ अनमोल सिनेमा पर पहली बार।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 21:44:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर ज़ी क्लासिक का खास प्रोग्राम।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ कलाकार सिर्फ मनोरंजन करते हैं, कुछ फिल्में बनाकर यादें छोड़ जाते हैं, लेकिन मनोज कुमार जैसे दिग्गज कलाकार पीढ़ियों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार ने देशभक्ति को सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे हर भारतीय के दिल का जज़्बा बना दिया। उनकी फिल्मों में सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि यहाँ के लोग, उनके संघर्ष, उनके सपने, उनका त्याग और उनका अटूट हौंसला भी नजर आता था।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस जुलाई,में जब महान अभिनेता, लेखक और निर्देशक</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183657/special-program-of-zee-classic-on-the-89th-birth-anniversary"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260718-wa0040.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ कलाकार सिर्फ मनोरंजन करते हैं, कुछ फिल्में बनाकर यादें छोड़ जाते हैं, लेकिन मनोज कुमार जैसे दिग्गज कलाकार पीढ़ियों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार ने देशभक्ति को सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे हर भारतीय के दिल का जज़्बा बना दिया। उनकी फिल्मों में सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि यहाँ के लोग, उनके संघर्ष, उनके सपने, उनका त्याग और उनका अटूट हौंसला भी नजर आता था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस जुलाई,में जब महान अभिनेता, लेखक और निर्देशक मनोज कुमार की 89वीं जयंती है, तब ज़ी क्लासिक उनके शानदार सफर को याद करते हुए एक खास फिल्म फेस्टिवल लेकर आ रहा है। 19 जुलाई से 24 जुलाई तक दर्शकों को उनकी कुछ सबसे यादगार और सुपरहिट फिल्में देखने का मौका मिलेगा। ये वही फिल्में हैं, जिन्होंने मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा का अमर सितारा बनाया और जो आज भी दर्शकों को उतनी ही पसंद आती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चार दशक से भी ज्यादा लंबे करियर में मनोज कुमार ने हिंदी सिनेमा को एक नई सोच दी। उस दौर में जब ज्यादातर फिल्में सिर्फ रोमांस और मनोरंजन पर आधारित होती थीं, तब उन्होंने आम आदमी, समाज और देश से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा। एक अभिनेता के साथ साथ उन्होंने लेखक और निर्देशक के रूप में भी ऐसी फिल्में बनाईं, जो अपनी दमदार कहानी, शानदार संगीत और हमेशा याद रहने वाले संदेश की वजह से आज भी मिसाल मानी जाती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस खास फिल्म फेस्टिवल में मनोज कुमार के सफर की छह शानदार फिल्में दिखाई जाएँगी। शुरुआत होगी ‘रोटी कपड़ा और मकान’ से, जिसमें आम आदमी के संघर्ष और उसके सपनों को बेहद असरदार तरीके से दिखाया गया है। इसके बाद आएगी ‘उपकार’, जिसने उन्हें हमेशा के लिए ‘भारत कुमार’ की पहचान दिलाई। देश के किसान और जवान को समर्पित यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रेरणादायक मानी जाती है। इसके बाद ‘पूरब और पश्चिम’ भारतीय संस्कृति और संस्कारों की खूबसूरती को दिखाएगी। ‘शोर’ प्यार, बिछड़ने के दर्द और पिता के जज़्बात की ऐसी कहानी है, जो आज भी दिल को छू जाती है। ‘शहीद’ में मनोज कुमार ने भगत सिंह के किरदार को जिस दमदार अंदाज में निभाया, वो भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार परफॉर्मेंस में गिना जाता है। इस खास सफर का समापन 24 जुलाई को उनकी भव्य फिल्म ‘क्रांति’ के साथ होगा। शानदार कलाकारों से सजी इस फिल्म ने एक बार फिर साबित किया कि मनोज कुमार बड़े कैनवास पर देशभक्ति, त्याग और इंसानियत की कहानियाँ कहने में बेमिसाल थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस खास मौके पर उनके साथ काम कर चुके कई कलाकारों और करीबी दोस्तों ने भी उन्हें याद किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “जब भी मैं मनोज कुमार जी को याद करता हूँ, तो सिर्फ एक शानदार अभिनेता या निर्देशक याद नहीं आता, बल्कि एक ऐसा इंसान याद आता है, जो अपनी हर फिल्म को पूरी तरह जीता था। उनके लिए सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं था। हर कहानी का एक मकसद होता था और हर किरदार कुछ बड़ा कहता था।   साथ काम करके मैंने सीखा कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी सच्चाई होती है। पूरी इंडस्ट्री उन्हें 'भारत कुमार' कहती थी, लेकिन हमारे लिए वो हमेशा मनोज जी ही रहे, एक बेहद सादगी पसंद, गरिमामय और अपने देश से बेइंतहा प्यार करने वाले इंसान।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हेमा मालिनी ने कहा, “मनोज जी के साथ काम करने की मेरी कई खूबसूरत यादें हैं। उनके सेट पर हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता था। वो अपने कलाकारों को बहुत प्यार और धैर्य से समझाते थे और हमेशा कहते थे कि अभिनय में सच्चाई दिखनी चाहिए, सिर्फ ड्रामा नहीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्यारेलाल ने कहा, “मनोज कुमार जी के लिए संगीत बहुत मायने रखता था। जब भी हम साथ काम करते थे, वे घंटों हमारे साथ बैठकर सिर्फ धुन ही नहीं, बल्कि हर गीत के जज़्बात पर भी बात करते थे। संगीत की उनकी समझ कमाल की थी। उन्हें पता था कि एक गीत सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं होता, बल्कि पूरी कहानी की धड़कन होता है। शायद यही वजह है कि उनकी फिल्मों के गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके साथ काम करना हमेशा एक यादगार अनुभव रहा, क्योंकि वे हर बार हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा देते थे।”</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेम चोपड़ा ने कहा, “मनोज और मैंने सिर्फ फिल्मों में साथ काम नहीं किया, बल्कि ज़िंदगी के भी कई खूबसूरत पल साथ बिताए। कैमरे के सामने और पीछे वो बेहद अनुशासित, मेहनती और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते थे। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">। मुझे उनकी सबसे बड़ी बात यह लगती थी कि उन्होंने कभी अपने विचारों से समझौता नहीं किया। देश, रिश्तों और इंसानियत पर फिल्में बनाना उनका विश्वास था और उन्होंने इसे हमेशा निभाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ज़ी क्लासिक का यह खास फिल्म फेस्टिवल सिर्फ मनोज कुमार को श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के उस सुनहरे दौर का जश्न भी है, जिसने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। जिन्होंने उनकी फिल्में देखी हैं, वे एक बार फिर पुरानी यादों को ताजा कर सकेंगे और जिन्होंने नहीं देखीं, उन्हें भारतीय सिनेमा की कुछ बेहतरीन फिल्मों से रूबरू होने का मौका मिलेगा। क्योंकि वक्त बदल सकता है, लेकिन बेहतरीन फिल्में और उन्हें बनाने वाले कलाकार हमेशा अमर रहते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनोज कुमार की 89वीं जयंती पर 19 जुलाई से 24 जुलाई तक हर शाम 7 बजे से क्लासिक का खास फिल्म फेस्टिवल। 24 जुलाई को उनकी जयंती के मौके पर होगी भव्य फिल्म ‘क्रांति’ की खास प्रस्तुति, </div>
</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 20:10:50 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>खुशाली कुमार ने 'दुल्हनिया ले आएगी' के नए गाने 'जलवा' से बढ़ाया शादी का रंग</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>दुल्हनिया ले आएगी के शानदार म्यूजिक एल्बम को मिल रहे प्यार के बीच अब फिल्म का नया गाना 'जलवा' रिलीज कर दिया गया है। यह एक हाई-एनर्जी, रंगारंग और डांस से भरपूर वेडिंग ट्रैक है, जो इस शादी सीजन का नया फेवरेट बनने के लिए तैयार है। खुशाली कुमार पर फिल्माया गया यह गाना अपने दमदार बीट्स, रंगीन विजुअल्स और सेलिब्रेशन से भरपूर माहौल के चलते हर संगीत और शादी की प्लेलिस्ट में जगह बनाने का दम रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">'जलवा' में खुशाली कुमार का आत्मविश्वास से भरा और चुलबुला अंदाज देखने को मिलता है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, शानदार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183133/khushali-kumar-adds-color-to-the-wedding-with-the-new"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260710-wa0104.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>दुल्हनिया ले आएगी के शानदार म्यूजिक एल्बम को मिल रहे प्यार के बीच अब फिल्म का नया गाना 'जलवा' रिलीज कर दिया गया है। यह एक हाई-एनर्जी, रंगारंग और डांस से भरपूर वेडिंग ट्रैक है, जो इस शादी सीजन का नया फेवरेट बनने के लिए तैयार है। खुशाली कुमार पर फिल्माया गया यह गाना अपने दमदार बीट्स, रंगीन विजुअल्स और सेलिब्रेशन से भरपूर माहौल के चलते हर संगीत और शादी की प्लेलिस्ट में जगह बनाने का दम रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">'जलवा' में खुशाली कुमार का आत्मविश्वास से भरा और चुलबुला अंदाज देखने को मिलता है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, शानदार डांस मूव्स और उत्साह से भरपूर परफॉर्मेंस इस गाने को और भी आकर्षक बनाती है। शादी के जश्न, मस्ती और उत्सव का माहौल इस गीत में बेहद खूबसूरती से उभरकर सामने आता है। इस गाने को जाज़िम शर्मा और सुवर्णा तिवारी ने अपनी आवाज़ दी है। संगीत जाज़िम शर्मा ने तैयार किया है, जबकि इसके बोल जे.पी. गंगवार ने लिखे हैं। गाने का कैची पंजाबी हुक एकम मानुके ने लिखा है। म्यूजिक प्रोग्रामिंग अंशुमान शर्मा ने की है। वहीं, बैंजो पर नासिर, ढोलक पर राहुल कथक का संगीत गाने को और भी जीवंत बनाता है। वोकल्स की रिकॉर्डिंग यूफनी स्टूडियो में पार्था और निशांत द्वारा की गई है, जबकि मिक्सिंग और मास्टरिंग भास्कर शर्मा ने की है। सॉन्ग एडिट संतोष आर्य ने किया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गाने को लेकर खुशाली कुमार ने कहा, "जलवा सुनते ही मुझे महसूस हो गया था कि इसमें एक शानदार वेडिंग सॉन्ग बनने के सभी तत्व मौजूद हैं। यह जोश, खुशी और हर दुल्हन के आत्मविश्वास का जश्न मनाता है। इस गाने की शूटिंग करना बेहद मजेदार अनुभव रहा और मुझे उम्मीद है कि दर्शक भी इस पर उतना ही थिरकेंगे, जितना हमने इसे बनाते वक्त आनंद लिया।" वहीं, निर्देशक आकाशादित्य लामा ने कहा, "जलवा पूरी तरह से 'दुल्हनिया ले आएगी' की भावना को दर्शाता है, जो कि रंगों, उत्साह, संगीत और जश्न से भरपूर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमारी कोशिश थी कि ऐसा गाना बनाया जाए, जिसे सुनते ही लोगों का मन डांस करने का हो जाए। संगीत, कोरियोग्राफी और खुशाली की शानदार ऊर्जा ने इस गाने को खास बना दिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह इस साल का सबसे पसंदीदा ब्राइडल एंथम बन सकता है।" सिद्धार्थ बनर्जी, आकाशादित्य लामा और विकास अग्रवाल द्वारा निर्मित दुल्हनिया ले आएगी में खुशाली कुमार, पियूष मिश्रा और महेश मांजरेकर मुख्य भूमिकाओं में नजर आएँगे। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Featured</category>
                                            <category>खेल मनोरंजन</category>
                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 21:51:22 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इस जिद्दी डायरेक्टर की वजह से भारतीय सिनेमा को कुछ महान फिल्में मिली</title>
                                    <description><![CDATA[इस आदमी को पगला डायरेक्टर भी कहते है। जिसकी जिद की वजह से कुछ फिल्मों ने नायाब रिकार्ड बनाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131277/indian-cinema-got-some-great-movies-because-of-this-headstrong"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/17.jpg" alt=""></a><br /><p>स्वतंत्र प्रभात-सिनेमा</p>
<p>बॉलीवुड के इतिहास में ये ऐसा डायरेक्टर था जो अपनी सिर्फ एक फिल्म के लिए जाना जाता है. इस आदमी को फिल्म बनाने की कोई खास ट्रेनिंग नहीं थी. पर अपने वक्त के सबसे बड़े लोगों को अपने हाथ में ले के घूमता था ये शख्स. नाम था के आसिफ. पूरा नाम करीमुद्दीन आसिफ. फिल्म बनाई थी ‘मुग़ल-ए-आज़म’. उत्तर प्रदेश के इटावा में से निकले आसिफ बंबई में अपने नाम का डंका बजा आये.</p>
<p> </p>
<p>जिद्दी आदमी थे. मंटो इनके बारे में लिखते हैं कि कुछ खास किया तो नहीं था, पर खुद पर भरोसा इतना था कि सामने वाला इंसान घबरा जाता था. बड़े गुलाम अली खान से अपने बतरस से लेकर अपनी फिल्म में बड़े-बड़े गीतकारों से ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के लिए 72 गाने लिखवाने की कहानियां हैं आसिफ की.</p>
<p><br />9 मार्च 1971 को दिल का दौरा पड़ने की वजह से आसिफ की मौत हो गई थी. उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में केवल दो फ़िल्में बनाईं ‘फूल'(1945) और ‘मुग़ल-ए-आज़म’ (1960). उनकी पहली फिल्म तो कुछ खास कमाल नहीं कर सकी लेकिन दूसरी फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ ने इतिहास बना दिया. ‘मुग़ल-ए-आज़म’ को बनाने में 14 साल लगे थे. ये फिल्म उस वक़्त बननी शुरू हुई जब हमारे यहां अंग्रेजों का राज था. शायद ये एक कारण भी हो सकता है।</p>
<p> </p>
<p>जिसके चलते इसको बनाने में इतना वक़्त लगा. ये उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी, इस फिल्म की लागत तक़रीबन 1.5 करोड़ रुपये बताई जाती है. जब फिल्में 5-10 लाख रुपयों में बन जाती थीं. भारतीय सिनेमा के इतिहास में ये फिल्म कई मायनों में मील का पत्थर साबित हुई.</p>
<p>1. सोहराब मोदी की ‘झांसी की रानी'(1953) भारतीय सिनेमा की पहली रंगीन फिल्म थी. पर 1955 आते-आते रंगीन फ़िल्में बनने लगी थीं. इसी को देखते हुए आसिफ ने भी ‘मुग़ल-ए-आज़म’ के गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’ सहित कुछ हिस्सों की शूटिंग टेक्निकलर में की जो उन्हें काफी पसंद आई. इसके बाद उन्होंने पूरी फिल्म को टेक्निकलर में दोबारा शूट करने काफैसला लिया ।</p>
<p> </p>
<p><br />2. इस फिल्म में अकबर के रोल के लिए आसिफ उस वक्त के मशहूर अभिनेता चंद्रमोहन को लेना चाहते थे. पर चंद्रमोहन आसिफ के साथ काम करने के लिए तैयार नहीं थे. आसिफ को उनकी आंखें पसंद थीं. कह दिया था कि मैं दस साल इंतजार करूंगा पर फिल्म तो आपके साथ ही बनाऊंगा. पर कुछ समय बाद एक सड़क हादसे में चंद्रमोहन की आंखें ही चली गईं.</p>
<p><br />3. फिल्म के एक सीन में पृथ्वीराज कपूर को रेत पर नंगे पांव चलना था. उस सीन की शूटिंग राजस्थान में हो रही थी जहां की रेत तप रही थी. उस सीन को करने में पृथ्वीराज कपूर के पांव पर छाले पड़ गए थे. जब ये बात आसिफ को पता चली तो उन्होंने भी अपने जूते उतार दिए और नंगे पांव गर्म रेत पर कैमरे के पीछे चलने लगे. अब कोई कुछ नहीं कह पाया था.</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p>4. नौशाद फिल्म के लिए बड़े गुलाम अली साहब की आवाज़ चाहते थे, लेकिन गुलाम अली साहब ने ये कहकर मना कर दिया कि वो फिल्मों के लिए नहीं गाते. लेकिन आसिफ ज़िद पर अड़ गए कि गाना तो उनकी ही आवाज में रिकॉर्ड होगा. उनको मना करने के लिए गुलाम साहब ने कह दिया कि वो एक गाने के 25000 रुपये लेंगे. उस दौर में लता मंगेशकर और रफ़ी जैसे गायकों को एक गाने के लिए 300 से 400 रुपये मिलते थे. आसिफ साहब ने उन्हें कहा कि गुलाम साहब आप बेशकीमती हैं ,ये लीजिये 10000 रुपये एडवांस. अब गुलाम अली साहब के पास कोई बहाना नहीं था. उनका गाना फिल्म में सलीम और अनारकली के बीच हो रहे प्रणय सीन के बैकग्राउंड में बजता है.</p>
<p><br />5.इस फिल्म का आइडिया आसिफ को आर्देशिर ईरानी की फिल्म ‘अनारकली’ को देखकर आया था. इस फिल्म को देखने के बाद उन्होंने अपने अपने दोस्त शिराज़ अली हाकिम के साथ एक फिल्म बनाने का फैसला किया. शिराज़ उनकी फिल्म प्रोड्यूस कर रहे थे. फिल्म में चंद्रबाबू, डी.के सप्रू और नरगिस को साइन किया गया. 1946 में फिल्म की शूटिंग बॉम्बे टाकीज स्टूडियो में शुरू हुई. अभी शूटिंग शुरू ही हुई थी कि पार्टीशन की प्रक्रिया शुरू हो गयी जिसके कारण फिल्म के प्रोड्यूसर शिराज़ को हिंदुस्तान छोड़कर जाना पड़ा. 1952 में फिल्म को दोबारा नए सिरे से नए प्रोड्यूसर और कास्टिंग के साथ शुरू किया गया. </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><br />6.फिल्म के म्यूजिक को लेकर आसिफ बड़े ही गंभीर थे. उन्हें इस फिल्म के लिए बेहद ही उम्दा संगीत की दरकार थी. नोट से भरे ब्रीफ़केस को लेकर आसिफ मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद के पास पहुंचे और ब्रीफ़केस थमाते हुए कहा कि उन्हें अपनी फिल्म के लिए यादगार संगीत चाहिए, ये बात नौशाद साहब को बिलकुल नहीं भाई. उन्होंने नोटों से भरा ब्रीफ़केस खिड़की से बाहर फ़ेंक दिया और कहा कि म्यूजिक की क्वालिटी पैसे से नहीं आती. बाद में आसिफ ने नौशाद से माफी मांग ली. वो अंदाज भी ऐसा था कि नौशाद हंस के मान गए.</p>
<p><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 18:47:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चार में से ये तीन भाई सिनेमा में आए : चमन पुरी, मदन पुरी और अमरीश पुरी।</title>
                                    <description><![CDATA[चमन पुरी , अमरीश से सबसे ज़्यादा मिलते हैं देखने में। हिन्दी फिल्मों में कुछ नामालूम सी चरित्र भूमिकाएँ उनके हिस्से में आईं। याद में टिकने जैसी भूमिकाएँ उनके हिस्से में नहीं हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131274/out-of-four-these-three-brothers-came-to-the-cinema"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/15.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात-</strong></p>
<p>चमन पुरी , अमरीश से सबसे ज़्यादा मिलते हैं देखने में। हिन्दी फिल्मों में कुछ नामालूम सी चरित्र भूमिकाएँ उनके हिस्से में आईं। याद में टिकने जैसी भूमिकाएँ उनके हिस्से में नहीं हैं।</p>
<p> </p>
<p>मदन पुरी जबर्दस्त खलनायक और बाद में चरित्र अभिनेता रहे। न जाने कितने निर्देशकों की टीम में वे स्थायी अभिनेता थे। बहुत लम्बी और क़ामयाब पारी रही उनकी।</p>
<p> </p>
<p>अमरीश रंगमंच से कला फ़िल्मों और वहां से कमर्शियल सिनेमा में आए। शुरुआत में दुबले पतले अजीब से दिखाई देते थे। 'प्रेम पुजारी' में वे लगभग एक्स्ट्रा जैसे हैं। एक उनकी तब की फ़िल्म याद है : 'खिलौने वाला'। पहली बार उन्हें कायदे से नोटिस किया 'भूमिका' में।</p>
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<p>अमरीश के बॉडी बिल्डिंग के शौक ने उनका व्यक्तित्व बदला और उसे प्रभावशाली बनाया। उनके पास एक असरदार और दमदार क़िस्म की आवाज़ तो थी ही। 'हम पांच' वह पहली व्यावसायिक फ़िल्म थी जिसमें वे अपने इस नए व्यक्तित्व के साथ मौजूद हुए और पसन्द किए गए। </p>
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<p>उसके बाद तो अमरीश पुरी का सफ़र सफलता की ओर लगातार आगे ही आगे बढ़ने का सफ़र है। वे नए नए गेटअप और मेकअप में कमर्शियल सिनेमा के व्याकरण में छा गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 25 Jun 2023 18:34:04 +0530</pubDate>
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