<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/66021/vasudhaiva-kutumbakam" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>Vasudhaiva Kutumbakam - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/66021/rss</link>
                <description>Vasudhaiva Kutumbakam RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>आतंकी संगठन से गलबहियां करने वाले मेयर ममदानी को संघ प्रमुख मोहन भागवत का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं: हिन्दू विचार मंच पाकुड़िया इकाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने तीन देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा के क्रम में भागवत जी अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन जाएंगे। परंतु न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी एवं धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी एडवाइजरी संस्था यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी सरकार से वीजा नहीं देने की अपील की है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस यात्रा का विरोध करते हुए यह कहा गया है कि संघ से जुड़े हिन्दू संगठनों पर धार्मिक भेदभाव करते हुए अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा का आरोप है। यद्यपि भारत सरकार ने ऐसे निराधार आरोपों को खारिज करते हुए यूएससीआईआरएफ की विश्वसनीयता व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186724/mayor-mamdani-who-has-misbehaved-with-the-terrorist-organization-has"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/news-5.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने तीन देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा के क्रम में भागवत जी अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन जाएंगे। परंतु न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी एवं धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी एडवाइजरी संस्था यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी सरकार से वीजा नहीं देने की अपील की है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस यात्रा का विरोध करते हुए यह कहा गया है कि संघ से जुड़े हिन्दू संगठनों पर धार्मिक भेदभाव करते हुए अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा का आरोप है। यद्यपि भारत सरकार ने ऐसे निराधार आरोपों को खारिज करते हुए यूएससीआईआरएफ की विश्वसनीयता व आकलन पर भी सवाल उठाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वहीं दूसरी ओर ममदानी के विरोध के बीच यूनिवर्सल अवेयरनेस सेलिब्रेशन कार्यक्रम के आयोजक अमेरिकन हिन्दूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (एहेड) का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मौजूद खाता निलंबित किए जाने की सूचना है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम न्यूयॉर्क के मैडिसन गार्डन स्थित इंफोसिस थिएटर में 29 अगस्त को आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में सभी धर्मों के पांच हजार लोगों व 250 संगठनों के शामिल होने की संभावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जोहरान ममदानी भारत विरोधी होने के अलावा आतंकी गुटों के समर्थक रहे हैं। हिन्दू विचार मंच ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि आरएसएस सनातन सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षक रहा है और सनातन संस्कृति के मूल घोष वाक्य ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा पर मानवता का पक्षधर है। भारतीय राष्ट्रीय भावना को सर्वोपरि मानते हुए देश के समस्त नागरिकों को प्रेरित करता रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">क्या भारतवर्ष में अपनी कालजयी सनातन सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर राष्ट्रीय भाव का प्रचार-प्रसार करना अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा कहना उचित है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हिन्दू विचार मंच ने पूरे जोर देकर दावे के साथ कहा है कि भारत विश्व का सर्वाधिक प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य आधारित राष्ट्र है और पंथनिरपेक्ष व प्रजातांत्रिक राष्ट्र है। इस राष्ट्र में बहुसंख्यक सनातनियों ने कभी भी धार्मिक अल्पसंख्यकों को पीड़ित नहीं किया है बल्कि उन्हें धार्मिक अधिकारों के साथ प्रगति की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन राष्ट्रविरोधी तत्वों को दंड देना राष्ट्रीय धर्म है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मंच का मानना है कि यदि जोहरान ममदानी में साहस है तो वे भारतवर्ष के जम्मू-कश्मीर सहित देश के अन्य नगरों में इस्लाम के नाम पर होती रही आतंकी गतिविधियों की निंदा करने का साहस दिखाएं।</div>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/186724/mayor-mamdani-who-has-misbehaved-with-the-terrorist-organization-has</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/186724/mayor-mamdani-who-has-misbehaved-with-the-terrorist-organization-has</guid>
                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 23:06:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-08/news-5.jpg"                         length="99761"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परंपरा और आधुनिकता के बीच त्रिशंकु बना समाज</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">वर्तमान समय का मनुष्य एक विचित्र द्वंद्व में जी रहा है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में वह इतनी तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है कि उसकी अपनी सनातनी परंपराएँ धीरे-धीरे धुंधलाने लगी हैं। परिणामस्वरूप वह न पूर्णतः आधुनिक बन पाया है, न ही अपने संस्कारों से पूर्णतः जुड़ा रह सका है—वह त्रिशंकु की भाँति दो ध्रुवों के बीच झूलता हुआ एक असंतुलित अस्तित्व बन गया है।भारतीय वैदिक और सनातनी संस्कृति हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है, हमें हमारे ‘भारतीय’ होने का गहन बोध कराती है। यह संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि मनुष्यता, करुणा, सह-अस्तित्व और जीवन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174763/society-becomes-hung-between-tradition-and-modernity"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान समय का मनुष्य एक विचित्र द्वंद्व में जी रहा है। आधुनिकता की अंधी दौड़ में वह इतनी तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है कि उसकी अपनी सनातनी परंपराएँ धीरे-धीरे धुंधलाने लगी हैं। परिणामस्वरूप वह न पूर्णतः आधुनिक बन पाया है, न ही अपने संस्कारों से पूर्णतः जुड़ा रह सका है—वह त्रिशंकु की भाँति दो ध्रुवों के बीच झूलता हुआ एक असंतुलित अस्तित्व बन गया है।भारतीय वैदिक और सनातनी संस्कृति हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है, हमें हमारे ‘भारतीय’ होने का गहन बोध कराती है। यह संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि मनुष्यता, करुणा, सह-अस्तित्व और जीवन के उच्च आदर्शों की वाहक है। </p><p style="text-align:justify;">‘अतिथि देवो भव’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जैसे सूत्र केवल वाक्य नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन हैं, जो समस्त विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की दृष्टि प्रदान करते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति को अध्यात्म प्रधान कहा गया है—यह भौतिकता से परे आत्मा के उत्कर्ष की बात करती है किन्तु दूसरी ओर, पाश्चात्य संस्कृति ने मानव जीवन को तार्किकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यावहारिकता का नया आयाम दिया है।</p><p style="text-align:justify;"> उसने मनुष्य को प्रश्न करना सिखाया, प्रमाण और तर्क के आधार पर सत्य को परखने की प्रवृत्ति विकसित की। विज्ञान और तकनीक के अद्भुत विकास ने जीवन को सुविधाजनक, सुगम और व्यापक बना दिया है। आज मानव चंद्रमा से आगे बढ़कर सूर्य के रहस्यों को जानने की चेष्टा कर रहा है, और सृजन के नए आयाम खोजते हुए प्रकृति को चुनौती देने का साहस भी दिखा रहा है।<br /></p><p style="text-align:justify;">यहीं से द्वंद्व उत्पन्न होता है। एक ओर अध्यात्म की गहराई है, तो दूसरी ओर भौतिकता की व्यापकता। एक ओर परंपरा की स्थिरता है, तो दूसरी ओर आधुनिकता की गतिशीलता। यदि मनुष्य केवल परंपरा से चिपका रहे, तो वह जड़ता का शिकार हो सकता है; और यदि केवल आधुनिकता को अपनाए, तो वह अपनी पहचान और संवेदनाओं से दूर हो सकता है।आज की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि हमने पाश्चात्य संस्कृति के सार को नहीं, बल्कि उसके बाह्य आवरण को अपनाया है। </p><p style="text-align:justify;">परिणामस्वरूप संयुक्त परिवारों का विघटन हो रहा है, संबंधों में ऊष्मा कम होती जा रही है, बुजुर्गों के प्रति सम्मान घट रहा है और जीवन एक यांत्रिक प्रक्रिया बनता जा रहा है। भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी चाह ने मनुष्य को भीतर से रिक्त कर दिया है। परिवारों में अलगाव, अकेलापन और तनाव की स्थितियाँ बढ़ रही हैं।<br /></p><p style="text-align:justify;">फिर भी यह एकांगी दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए। पाश्चात्य प्रभाव ने समाज में अनेक सकारात्मक परिवर्तन भी किए हैं। स्त्री सशक्तिकरण इसका प्रमुख उदाहरण है। जो महिलाएँ कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज वे शिक्षा, व्यवसाय और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं। सामाजिक खुलापन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अवसरों की समानता ने समाज को अधिक गतिशील और प्रगतिशील बनाया है।<br /></p><p style="text-align:justify;">अतः आवश्यकता इस बात की है कि हम किसी एक ध्रुव के प्रति अंध-आसक्ति न रखें। न तो अतीत की रूढ़ियों में जकड़े रहें, और न ही आधुनिकता के अंधानुकरण में अपनी पहचान खो दें। विवेक का मार्ग ही यहाँ संतुलन प्रदान कर सकता है। जैसा कि एक संतुलित वीणा के तार ही मधुर संगीत उत्पन्न करते हैं।न अत्यधिक कसाव, न अत्यधिक ढील वैसे ही जीवन में भी परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समन्वय आवश्यक है।<br /></p><p style="text-align:justify;">हमें अपनी संस्कृति के उन मूल्यों को संजोकर रखना होगा, जो मानवता को ऊँचा उठाते हैं, और साथ ही पाश्चात्य विचारधारा की उन विशेषताओं को अपनाना होगा, जो जीवन को तार्किक, वैज्ञानिक और प्रगतिशील बनाती हैं। यही समन्वय हमें त्रिशंकु की स्थिति से निकालकर एक संतुलित, समृद्ध और सार्थक जीवन की ओर ले जा सकता है।<br /></p><p style="text-align:justify;">अंततः यही कहा जा सकता है कि जीवन की सफलता न अतीत में पूरी तरह छिपी है, न भविष्य में पूरी तरह निहित है।वह वर्तमान में संतुलन स्थापित करने की कला में निहित है। जो इस संतुलन को साध लेता है, वही सच्चे अर्थों में विकसित और जागरूक मानव बन पाता।<br /></p><p style="text-align:justify;"><strong>संजीव ठाकुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174763/society-becomes-hung-between-tradition-and-modernity</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/174763/society-becomes-hung-between-tradition-and-modernity</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:12:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/hindi-divas.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        