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                <title>Assam Politics - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Assam Politics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असम के बराक घाटी में गुवाहाटी हाईकोर्ट की स्थायी पीठ की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> असम की बराक घाटी में गुवाहाटी उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग को लेकर राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल को पत्र लिखकर इस दिशा में आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह बराक घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग है और इसे न्याय तक समान एवं सुगम पहुंच के व्यापक हित में गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद सुष्मिता देव ने अपने पत्र में कहा कि बराक घाटी में उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185089/demand-for-permanent-bench-of-gauhati-high-court-intensifies-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1001694779.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> असम की बराक घाटी में गुवाहाटी उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग को लेकर राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल को पत्र लिखकर इस दिशा में आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि यह बराक घाटी के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग है और इसे न्याय तक समान एवं सुगम पहुंच के व्यापक हित में गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद सुष्मिता देव ने अपने पत्र में कहा कि बराक घाटी में उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ की मांग किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय तक समान पहुंच, प्रशासनिक सुविधा और संतुलित क्षेत्रीय विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने कहा कि दशकों से इस क्षेत्र के वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को उच्च न्यायालय की कार्यवाही के लिए गुवाहाटी की लंबी यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने केंद्रीय मंत्री का ध्यान बराक घाटी की भौगोलिक दूरी और कमजोर संपर्क व्यवस्था की ओर भी दिलाया। उनके अनुसार, काछार, हैलाकांडी, श्रीभूमि और दीमा हसाओ के लोगों को गुवाहाटी स्थित उच्च न्यायालय तक पहुंचने में कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सड़क एवं रेल संपर्क में व्यवधान, विशेषकर मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन जैसी परिस्थितियां, इस समस्या को और गंभीर बना देती हैं। सुष्मिता देव ने कहा कि इन परिस्थितियों का सीधा प्रभाव उन लोगों पर पड़ता है जिन्हें अपने मामलों की सुनवाई के लिए बार-बार गुवाहाटी जाना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लंबी दूरी की यात्रा और संपर्क संबंधी बाधाओं के कारण वादकारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है तथा न्यायिक कार्यवाही में भी व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं। सांसद ने अपने पत्र में बराक घाटी में पिछले वर्षों के दौरान हुए जनसांख्यिकीय, आर्थिक और संस्थागत विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए मिनी सचिवालय की स्थापना तथा बराक वैली डेवलपमेंट डिपार्टमेंट का गठन किया गया है। ऐसे में न्यायिक संस्थाओं तक पहुंच को भी क्षेत्र की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत किया जाना आवश्यक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि बराक घाटी में उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ की स्थापना पर वर्तमान परिस्थितियों और क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से वस्तुनिष्ठ विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। यह कदम न केवल न्याय तक पहुंच को आसान बनाएगा, बल्कि क्षेत्र में संवैधानिक शासन और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को भी मजबूत करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सांसद सुष्मिता देव ने केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री से आग्रह किया कि बराक घाटी में उपयुक्त स्थान पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय की स्थायी पीठ स्थापित करने के प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई और संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि स्थायी पीठ की स्थापना से बराक घाटी के लोगों को न्याय प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी कम होगी और वादकारियों, अधिवक्ताओं तथा आम नागरिकों के लिए न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुलभ एवं सुविधाजनक बन सकेगी। सांसद ने अपने पत्र की प्रति असम के मुख्यमंत्री को भी सूचना एवं आवश्यक सहयोग के लिए भेजी है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 22:03:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम में सियासी रण और पहचान की राजनीति घुसपैठ यूसीसी और विकास के बीच चुनावी जंग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>असम</strong> की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय मुद्दों और स्थानीय समीकरणों के संगम पर खड़ी दिखाई दे रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया बयान—जिसमें उन्होंने घुसपैठियों पर सख्ती और चुनाव के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही और चुनावी बहस को और तीखा बना दिया है। इस बयान के साथ ही यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव को केवल विकास या स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे पहचान, सुरक्षा और सांस्कृतिक अस्मिता के बड़े नैरेटिव से जोड़कर देख रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">असम की राजनीति हमेशा से बहुस्तरीय रही</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175112/political-battle-and-identity-politics-infiltration-in-assam-electoral-battle"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-09/rajneeti.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>असम</strong> की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय मुद्दों और स्थानीय समीकरणों के संगम पर खड़ी दिखाई दे रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया बयान—जिसमें उन्होंने घुसपैठियों पर सख्ती और चुनाव के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही और चुनावी बहस को और तीखा बना दिया है। इस बयान के साथ ही यह साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव को केवल विकास या स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे पहचान, सुरक्षा और सांस्कृतिक अस्मिता के बड़े नैरेटिव से जोड़कर देख रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम की राजनीति हमेशा से बहुस्तरीय रही है। यहां जातीय पहचान, भाषाई विविधता, धार्मिक संतुलन और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दे गहराई से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि चुनावी समीकरण भी सरल नहीं होते। राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 34 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है, जो कई जिलों में निर्णायक भूमिका निभाती है। खासकर निचले असम और बराक वैली के क्षेत्रों में यह वोट बैंक चुनाव के नतीजों को प्रभावित करता है। दूसरी ओर, ऊपरी असम में असमिया हिंदू, आदिवासी और चाय बागान समुदायों का प्रभाव अधिक है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भाजपा का चुनावी गणित इन विविध समूहों के बीच संतुलन साधने पर आधारित है। पार्टी की रणनीति साफ तौर पर तीन स्तंभों पर टिकती नजर आती है—घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख, विकास की राजनीति, और आदिवासी व स्थानीय समुदायों को सशक्त करने के वादे। नरेन्द्र मोदीऔर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की जोड़ी को भाजपा एक मजबूत नेतृत्व के रूप में पेश कर रही है। यह नेतृत्व कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घुसपैठ का मुद्दा असम में नया नहीं है, लेकिन इसे हर चुनाव में नए सिरे से उभारा जाता है। भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय पहचान से जोड़कर पेश करती है। पार्टी का तर्क है कि अवैध प्रवासन ने राज्य की जनसंख्या संरचना को प्रभावित किया है और इससे संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। इसी के साथ समान नागरिक संहिता का मुद्दा जोड़कर भाजपा एक व्यापक वैचारिक एजेंडा सामने रख रही है, जो उसके समर्थक वर्ग को एकजुट करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भाजपा ने आदिवासी समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की बात कहकर एक संतुलन बनाने की कोशिश की है। असम में बोडो, मिसिंग, कार्बी, राभा जैसी कई जनजातियां हैं, जिनकी अपनी अलग सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है। इन समुदायों को आश्वस्त करना भाजपा के लिए जरूरी है, क्योंकि ये कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। एक-एक गाय या भैंस देने जैसे वादे प्रतीकात्मक रूप से आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका से जुड़े हैं, जो सीधे तौर पर आदिवासी और ग्रामीण मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जातिवाद का फैक्टर भी असम की राजनीति में कम महत्वपूर्ण नहीं है। हालांकि यहां उत्तर भारत की तरह परंपरागत जाति समीकरण उतने स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन समुदाय आधारित राजनीति बहुत मजबूत है। चाय बागान मजदूर समुदाय, जिसे अक्सर ‘टी ट्राइब्स’ कहा जाता है, लंबे समय से राजनीतिक दलों के लिए अहम वोट बैंक रहा है। भाजपा ने पिछले कुछ चुनावों में इस समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि कांग्रेस पारंपरिक रूप से यहां प्रभाव रखती रही है। इसी तरह बोडो और अन्य जनजातीय समूहों के बीच क्षेत्रीय दलों का भी प्रभाव है, जिससे चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विकास का मुद्दा इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। भाजपा यह दावा कर रही है कि पिछले वर्षों में असम में सड़क, पुल, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने की कोशिशें भी दिखाई देती हैं। यदि मतदाता इन दावों को स्वीकार करते हैं, तो भाजपा को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। खासकर युवा मतदाता, जो रोजगार और बेहतर जीवन स्तर की अपेक्षा रखते हैं, विकास के एजेंडे से प्रभावित हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर, कांग्रेस भी अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असंतोष जैसे मुद्दों को उठाकर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा की नीतियां समाज में विभाजन पैदा करती हैं और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाती हैं। अगर कोई मतदाता कांग्रेस को वोट देने का विचार करता है, तो उसके पीछे मुख्य कारण सामाजिक सद्भाव, धर्मनिरपेक्षता और आर्थिक असमानता के मुद्दे हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस का एक और मजबूत पक्ष उसका पारंपरिक समर्थन आधार है, जिसमें मुस्लिम मतदाता, कुछ आदिवासी समूह और ग्रामीण वर्ग शामिल हैं। यदि यह समर्थन एकजुट रहता है और क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल बनता है, तो कांग्रेस भाजपा को कड़ी चुनौती दे सकती है। हालांकि, पिछले चुनावों में कांग्रेस को संगठनात्मक कमजोरी और नेतृत्व के अभाव का सामना करना पड़ा है, जिसे दूर करना उसके लिए जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">असम का चुनाव केवल दो दलों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर लड़ी जाने वाली लड़ाई है। यहां स्थानीय बनाम बाहरी, विकास बनाम पहचान, और परंपरा बनाम आधुनिकता जैसे कई विमर्श एक साथ चलते हैं। यही वजह है कि हर चुनाव में परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहना गलत नहीं होगा कि असम का मतदाता बेहद जागरूक और व्यावहारिक है। वह केवल भावनात्मक मुद्दों पर नहीं, बल्कि अपने हितों और भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। भाजपा के लिए चुनौती है कि वह अपने वादों को विश्वसनीय बनाए और सभी वर्गों का विश्वास जीत सके। वहीं कांग्रेस के लिए जरूरी है कि वह एक मजबूत वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता सुरक्षा और पहचान के मुद्दों को प्राथमिकता देता है या विकास और सामाजिक संतुलन को। असम की जनता का फैसला न केवल राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।</div>
<div>       *कांतिलाल मांडोत*</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 20:42:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>धेमाजी में दो चुनावी क्षेत्रो में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का चुनाव प्रचार सभा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी।</strong> धेमाजी जिले में चुनावी प्रचार जोरशोर में चल रही है। गत कल असम के मुख्यमंत्री हिमांता विश्व शर्मा ने चुनावी प्रचार सभा के बाद आज भाजपा के स्टार कैंपेनर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने जिले की 79वीं सीसीबर गांव विधानसभा क्षेत्र मुख्तियार पंचायत के सिलाबालीगांव स्कूल खेल मैदान एक जनसभा में भाग लेकर लोगों को संबोधित करते हुए विकसित असम का नारे लगाते हुए असम के मुख्यमंत्री ने  पिछली बार असम में 1 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था लेकिन सरकार ने 165,000 बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरियां दीं और 2026 में भाजपा सरकार</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174683/election-campaign-meeting-of-former-union-minister-smriti-irani-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1000529236.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>असम धेमाजी।</strong> धेमाजी जिले में चुनावी प्रचार जोरशोर में चल रही है। गत कल असम के मुख्यमंत्री हिमांता विश्व शर्मा ने चुनावी प्रचार सभा के बाद आज भाजपा के स्टार कैंपेनर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने जिले की 79वीं सीसीबर गांव विधानसभा क्षेत्र मुख्तियार पंचायत के सिलाबालीगांव स्कूल खेल मैदान एक जनसभा में भाग लेकर लोगों को संबोधित करते हुए विकसित असम का नारे लगाते हुए असम के मुख्यमंत्री ने  पिछली बार असम में 1 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था लेकिन सरकार ने 165,000 बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरियां दीं और 2026 में भाजपा सरकार आने पर 2 लाख और नौकरियां देने का वादा किया। असम अभी रोशन दुकानों से सरकार द्वारा चावल, चीनी, सोआ, नमक दे रहा है और आने वाले दिनों में मीठा तेल भी दिया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/1000529211.jpg" alt="धेमाजी में दो चुनावी क्षेत्रो में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का चुनाव प्रचार सभा" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">महिलाओं एवं किसानों को भी प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि के तरफ के किए जा रही 6000 रूपए का सहयोग राशि को बढ़ा कर वार्षिक 11 हज़ार करने की भी बात को उल्लेख किया। कांग्रेस दल को आलोचना करते हुए कहा कांग्रेस के सरकार के समय 2015 में धेमाजी में उल्फा ने बॉम्ब ब्लास्ट कराकर मासूम बच्चों की जान ले ली थी। सारों तरफ़ अशांति थी। भाजपा के सरकार में अब अमन और शांति हे असम विकास के तरफ गति की है। शांति उन्नति एवं मोदी जी के सपने साकार करने के लिए </div>
<div style="text-align:justify;">लोगों को सीसी बरगांव चुनाव क्षेत्र में भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार जीवन गोगोई को वोट देने की अपील की। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी ओर जिले की 80वीं जोनाई चुनावी क्षेत्रो के माजरबारी सर्वोदय काशीनाथ हाइ स्कूल खेल मैदान में भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व विधायक भुवन पेगू के लिए ओर एक चुनावी प्रचार सभा में शामिल होकर भाजपा दल द्वारा आज असम में प्रचार किया घोषणा पत्रों के बारे में लोगों को अवगत किया और 80वीं जोनाई चुनावी क्षेत्रो में भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार भुवन पेगू को कमल के प्रतीक पर वोट देने के लिए आह्वान किया। सभा में  भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार जीवन गोगोई, भुवन पेगू,स्टार कैंपेनर पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास और केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी, ​​पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दर्शना जरदोश, छत्तीसगढ़ के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अरुण चाउ ,जिला  भाजपा के अध्यक्ष रूपा कमान,  बिभूति भुइयां गंगा पेगु, लावण्या दले पाईट सहित भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:53:16 +0530</pubDate>
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