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                <title>National Security India - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>National Security India RSS Feed</description>
                
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                <title>कश्मीर पर भारत का अडिग संकल्प और चीन पाकिस्तान को करारा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत की नीति हमेशा से स्पष्ट, दृढ़ और अटल रही है। भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और रहेंगे। चीन और पाकिस्तान द्वारा जारी संयुक्त बयान के बाद भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से दिया गया कड़ा जवाब केवल एक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि यह भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वाभिमान और क्षेत्रीय अखंडता की स्पष्ट घोषणा थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी देश</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180141/indias-firm-resolve-on-kashmir-and-strong-message-to-china"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/randheer-jaiswal.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत की नीति हमेशा से स्पष्ट, दृढ़ और अटल रही है। भारत ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और रहेंगे। चीन और पाकिस्तान द्वारा जारी संयुक्त बयान के बाद भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से दिया गया कड़ा जवाब केवल एक कूटनीतिक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि यह भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय स्वाभिमान और क्षेत्रीय अखंडता की स्पष्ट घोषणा थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी देश को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन और पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को जीवित रखने की कोशिश कर रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दरअसल पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की असफल कोशिश करता रहा है। उसे यह भय सताता है कि यदि दुनिया ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को पूरी तरह भारत का हिस्सा मान लिया तो उसका दशकों पुराना प्रचार तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। दूसरी ओर चीन भी अपनी सामरिक और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के कारण पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखाई देता है। चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी सीपेक का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है। भारत शुरू से इस परियोजना का विरोध करता आया है क्योंकि यह भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है। भारत का स्पष्ट मत है कि जिस क्षेत्र पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है वहां किसी तीसरे देश की परियोजना स्वीकार नहीं की जा सकती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चीन और पाकिस्तान यह भलीभांति जानते हैं कि यदि उन्होंने कश्मीर और लद्दाख का नाम लेना बंद कर दिया तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाएगा कि ये क्षेत्र पूरी तरह भारत के ही अंग हैं। यही कारण है कि दोनों देश समय समय पर संयुक्त बयान जारी कर इस मुद्दे को हवा देने का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि दुनिया अब पाकिस्तान के पुराने दुष्प्रचार को गंभीरता से नहीं लेती। अधिकांश देशों ने यह समझ लिया है कि जम्मू कश्मीर भारत का आंतरिक विषय है और इसका समाधान भारत अपने संवैधानिक ढांचे के भीतर ही करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू कश्मीर को पूर्ण रूप से भारतीय संविधान के दायरे में लाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इसके बाद से पाकिस्तान लगातार बौखलाहट में दिखाई देता है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि दुनिया भारत के खिलाफ खड़ी होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। संयुक्त राष्ट्र सहित अधिकांश वैश्विक शक्तियों ने इसे भारत का आंतरिक मामला माना। यही कारण है कि पाकिस्तान बार बार चीन का सहारा लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">चीन का रवैया भी पूरी तरह निष्पक्ष नहीं माना जा सकता। वह एक ओर भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को सामरिक सहयोग देकर दक्षिण एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की रणनीति पर काम करता है। लेकिन भारत अब पहले वाला भारत नहीं है। आज भारत आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक दृष्टि से दुनिया की बड़ी शक्तियों में शामिल हो चुका है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की बढ़ती ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज दुनिया की बड़ी शक्तियां भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने में रुचि दिखा रही हैं। चाहे अमेरिका हो, फ्रांस हो, रूस हो या पश्चिम एशिया के देश, सभी भारत को एक विश्वसनीय और जिम्मेदार शक्ति के रूप में देखते हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद की समस्या से जूझ रहा है। उसकी स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और दूसरे देशों की आर्थिक मदद पर निर्भर है। ऐसे में भारत को चुनौती देना उसके लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी भर रह गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी हमेशा सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में खुफिया एजेंसियों द्वारा अल बद्र और हिजबुल मुजाहिदीन के संभावित गठजोड़ को लेकर जारी अलर्ट इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान अभी भी आतंकवाद को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाए हुए है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई लंबे समय से जम्मू कश्मीर में आतंक फैलाने वाले संगठनों को समर्थन देती रही है। लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर इन संगठनों की कमर तोड़ दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज घाटी में विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। सड़कें बन रही हैं, पर्यटन बढ़ रहा है, निवेश आ रहा है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। यही बदलाव पाकिस्तान और उसके समर्थकों को सबसे अधिक परेशान करता है। वे नहीं चाहते कि जम्मू कश्मीर शांति और विकास के रास्ते पर आगे बढ़े, क्योंकि इससे उनका झूठा प्रचार कमजोर पड़ता है। इसलिए समय समय पर आतंकवादी गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत ने हमेशा स्पष्ट किया है कि बातचीत और शांति तभी संभव है जब आतंकवाद पूरी तरह बंद हो। एक तरफ पाकिस्तान शांति की बात करता है और दूसरी तरफ आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देता है। यह दोहरा चरित्र अब दुनिया से छिपा नहीं है। भारत की नीति साफ है कि आतंक और वार्ता साथ साथ नहीं चल सकते।चीन और पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि नया भारत हर चुनौती का जवाब देने में सक्षम है। भारत केवल सैन्य शक्ति के आधार पर ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और वैश्विक कूटनीति के दम पर भी मजबूत हुआ है। भारतीय सेना सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और देश की जनता भी राष्ट्रीय एकता के मुद्दे पर पूरी मजबूती से सरकार के साथ खड़ी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत की पहचान, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता का हिस्सा हैं। इन्हें भारत से अलग देखने की कल्पना भी असंभव है। चीन और पाकिस्तान चाहे जितने संयुक्त बयान जारी कर लें, चाहे जितने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शोर मचा लें, इससे जमीन पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सर्वोपरि है और इस पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि दुनिया आतंकवाद को समर्थन देने वाली ताकतों को पहचानें और दक्षिण एशिया में स्थायी शांति के लिए भारत के प्रयासों का समर्थन करे। भारत शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की कीमत पर नहीं। यही संदेश भारत ने चीन और पाकिस्तान को दिया है और यही संदेश आने वाले समय में भी पूरी दृढ़ता के साथ दोहराया जाता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 18:37:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और हाइपरसोनिक युग की ओर निर्णायक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटा है। पारंपरिक युद्ध रणनीतियों का स्थान अब अत्याधुनिक तकनीक ले रही है। इसी दिशा में भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर तेज गति से काम शुरू कर दिया है। यह तकनीक भविष्य के युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल सकती है। डीआरडीओ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत को विश्व की अग्रणी सैन्य शक्तियों की श्रेणी में खड़ा करने का प्रयास कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">हाइपरसोनिक मिसाइलें वे हथियार हैं जो ध्वनि की गति से पांच गुना</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177895/indias-growing-military-power-and-decisive-step-towards-hypersonic-era"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/indian-army-2025-12-30-23-46-54.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत तेजी से बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच अपनी सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में जुटा है। पारंपरिक युद्ध रणनीतियों का स्थान अब अत्याधुनिक तकनीक ले रही है। इसी दिशा में भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर तेज गति से काम शुरू कर दिया है। यह तकनीक भविष्य के युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल सकती है। डीआरडीओ इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और भारत को विश्व की अग्रणी सैन्य शक्तियों की श्रेणी में खड़ा करने का प्रयास कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाइपरसोनिक मिसाइलें वे हथियार हैं जो ध्वनि की गति से पांच गुना या उससे अधिक गति से उड़ान भरती हैं। यदि तुलना करें तो ब्रह्मास्त्र मिसाइल जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती हैं जबकि हाइपरसोनिक मिसाइलें सात हजार से बारह हजार किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति प्राप्त कर सकती हैं। यह अंतर केवल गति का नहीं बल्कि रणनीतिक बढ़त का प्रतीक है। इतनी तेज गति के कारण दुश्मन के पास प्रतिक्रिया देने का समय लगभग समाप्त हो जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हाइपरसोनिक तकनीक दो प्रमुख रूपों में विकसित हो रही है। पहला है हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और दूसरा है हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल। ग्लाइड मिसाइल को रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष की सीमा तक पहुंचाया जाता है और फिर यह बिना इंजन के लक्ष्य की ओर ग्लाइड करती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है जिससे इसे ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। दूसरी ओर हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग करती है जो हवा की ऑक्सीजन का उपयोग करके ईंधन जलाती है। इससे मिसाइल हल्की रहती है और लगातार उच्च गति बनाए रखती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डीआरडीओ के अनुसार भारत ने स्क्रैमजेट तकनीक में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। लंबे समय तक परीक्षण सफल रहने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत इस जटिल तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है तो अगले पांच वर्षों में यह तकनीक भारतीय सेना का हिस्सा बन सकती है। इसके अलावा भारत लंबी दूरी की एंटी शिप मिसाइल पर भी काम कर रहा है जो मौजूदा प्रणालियों से अधिक तेज और प्रभावी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो रशिया और चाइना इस क्षेत्र में काफी आगे हैं। रूस के पास किंजल और जिरकॉन जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं जबकि चीन ने डीएफ जेडएफ प्रणाली को तैनात भी कर दिया है। युनाइटेड स्टेट इस क्षेत्र में अपेक्षाकृत पीछे रहा है हालांकि वह भी तेजी से विकास कर रहा है। इस प्रतिस्पर्धा में भारत का प्रवेश न केवल सामरिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह उसकी वैश्विक भूमिका को भी मजबूत करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के मिसाइल कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण नाम अग्नि श्रृंखला है। प्रस्तावित अग्नि छह मिसाइल को इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में देखा जा रहा है जिसकी मारक क्षमता दस हजार से बारह हजार किलोमीटर तक हो सकती है। यह एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी और अलग अलग लक्ष्यों को भेद सकती है। यह क्षमता भारत की प्रतिरोधक शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि हम अतीत और वर्तमान की तुलना करें तो स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है। पहले भारत मुख्य रूप से आयात पर निर्भर था। हथियार प्रणालियों के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता अधिक थी। अनुसंधान और विकास की गति अपेक्षाकृत धीमी थी। लेकिन पिछले एक दशक में स्थिति तेजी से बदली है।नरेंद्र मोदी  के नेतृत्व में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने रक्षा क्षेत्र में नई ऊर्जा भर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब भारत केवल अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा बल्कि रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात इसका प्रमुख उदाहरण है। इससे न केवल भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी रणनीतिक साझेदारी भी बढ़ रही है। रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से नवाचार को भी प्रोत्साहन मिला है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सैन्य आधुनिकीकरण के साथ साथ भारत ने अपनी रणनीतिक सोच में भी बदलाव किया है। अब केवल रक्षा नहीं बल्कि आक्रामक क्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइलें इसी सोच का हिस्सा हैं। इनकी मदद से भारत संभावित खतरों का पहले ही जवाब देने में सक्षम होगा। यह तकनीक न केवल युद्ध के समय बल्कि शांति बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मजबूत सैन्य क्षमता ही किसी भी देश के लिए सबसे बड़ा निवारक होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि इस प्रगति के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। हाइपरसोनिक तकनीक अत्यंत जटिल और महंगी है। इसके विकास में उच्च स्तर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की होड़ भी बढ़ सकती है जिससे वैश्विक स्थिरता पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए भारत को संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए विकास और कूटनीति दोनों पर ध्यान देना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह अब तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डीआरडीओ और अन्य संस्थानों की मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि भारत जटिल से जटिल तकनीक को भी विकसित कर सकता है। युवाओं और वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है।आने वाले वर्षों में हाइपरसोनिक मिसाइलें वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत का इस क्षेत्र में प्रवेश यह दर्शाता है कि वह केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि एक वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। मजबूत नेतृत्व स्पष्ट नीति और तकनीकी नवाचार के मेल से भारत ने रक्षा क्षेत्र में जो प्रगति की है वह आने वाले समय में और भी तेज होगी।अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत की सैन्य ताकत अब केवल संख्या पर नहीं बल्कि गुणवत्ता और तकनीक पर आधारित हो रही है। हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम इस बदलाव का प्रतीक है। यदि यही गति बनी रही तो भारत न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि वैश्विक मंच पर एक निर्णायक भूमिका भी निभाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 17:28:46 +0530</pubDate>
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                <title>नशे का साम्राज्य ध्वस्त करने की निर्णायक जंग: ड्रग कार्टेल्स पर केंद्र का बड़ा प्रहार</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस तरह देश ने बीते वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ एक समन्वित और रणनीतिक अभियान चलाकर कई इलाकों को हिंसा के दायरे से बाहर निकाला, उसी तर्ज पर अब ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की व्यापक तैयारी की जा रही है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य,उसके युवाओं को बचाने का सवाल बन चुका है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य न केवल</div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177494/decisive-battle-to-destroy-the-drug-empire-centres-big-attack"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/696e5a86beb48-delhi-police-operation-new-year-100-crore-drugs-drug-mafia-192418438-16x9.webp" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div style="text-align:justify;">भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अब एक नए और अधिक आक्रामक चरण में प्रवेश कर चुकी है। जिस तरह देश ने बीते वर्षों में नक्सलवाद के खिलाफ एक समन्वित और रणनीतिक अभियान चलाकर कई इलाकों को हिंसा के दायरे से बाहर निकाला, उसी तर्ज पर अब ड्रग्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की व्यापक तैयारी की जा रही है। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के भविष्य,उसके युवाओं को बचाने का सवाल बन चुका है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों ने मिलकर एक ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य न केवल ड्रग्स की सप्लाई रोकना है, बल्कि उन पूरे नेटवर्क्स को ध्वस्त करना है जो इस अवैध कारोबार को संचालित करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस लड़ाई का नेतृत्व (एनसीबी) कर रही है, जो अन्य केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर देशभर में समन्वित कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत अब सिर्फ छोटे तस्करों या स्थानीय सप्लायर्स को पकड़ना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्टेल्स और सिंडिकेट्स को निशाना बनाया जा रहा है जो इस पूरे नेटवर्क के असली संचालक हैं। यह रणनीति स्पष्ट करती है कि सरकार अब ‘सप्लाई चेन’ के हर स्तर को तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूत्रों के अनुसार, राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय शीर्ष दस ड्रग कार्टेल्स की पहचान करें और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ड्रग्स का नेटवर्क अब अत्यधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत हो चुका है। तस्कर अब डार्कनेट, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, एजेंसियां भी अब अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर इन डिजिटल नेटवर्क्स पर पैनी नजर रख रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत में ड्रग्स की तस्करी के प्रमुख मार्गों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि यह समस्या कितनी व्यापक और जटिल है। अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र से आने वाला ‘डेथ क्रिसेंट’ नेटवर्क हेरोइन की बड़ी मात्रा भारत तक पहुंचाता है। यह सप्लाई समुद्री मार्गों, रेगिस्तानी इलाकों, नदियों और अब ड्रोन के माध्यम से भी की जा रही है। विशेष रूप से पंजाब, जम्मू-कश्मीर, गुजरात और राजस्थान जैसे सीमावर्ती राज्य इस तस्करी के प्रमुख मार्ग बन चुके हैं। ड्रोन के जरिए सीमा पार से ड्रग्स गिराने की घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर राज्यों में म्यांमार के रास्ते आने वाले ड्रग्स का प्रवाह भी एक बड़ी समस्या है। वहीं गुजरात का समुद्री तट अंतरराष्ट्रीय तस्करी के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन गया है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य बड़े उपभोक्ता और वितरण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। इस पूरे परिदृश्य से यह स्पष्ट है कि ड्रग्स का नेटवर्क देश के कई हिस्सों में गहराई तक फैल चुका है, जिसे खत्म करने के लिए बहुस्तरीय रणनीति की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सरकार की इस नई रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब ध्यान केवल तस्करी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के भीतर चल रही अवैध ड्रग लैब्स और सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन को भी खत्म करना है। सिंथेटिक ड्रग्स का खतरा इसलिए अधिक है क्योंकि इन्हें आसानी से छिपाकर तैयार किया जा सकता है और इनकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है, खासकर शहरी युवाओं के बीच।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई के आंकड़े इस अभियान की गंभीरता और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। वर्ष 2025 में एनसीबी ने 1.33 लाख किलो से अधिक नशीले पदार्थ जब्त किए, जिनकी कीमत 1980 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई। इसके अलावा, 3889 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 77 हजार किलो से ज्यादा ड्रग्स को नष्ट किया गया। वर्ष 2024 में भी बड़ी मात्रा में ड्रग्स जब्त किए गए थे, जो यह दिखाता है कि एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं और बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यदि पिछले पांच वर्षों के रुझानों को देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि ड्रग्स की जब्ती में लगातार वृद्धि हुई है। इसका एक अर्थ यह भी है कि तस्करी के प्रयास बढ़े हैं, लेकिन इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि एजेंसियों की पकड़ और क्षमता भी मजबूत हुई है। बड़ी-बड़ी खेपों का पकड़ा जाना यह दर्शाता है कि अब नेटवर्क के ऊपरी स्तर तक पहुंच बनाई जा रही है, जिससे इस अवैध व्यापार को आर्थिक रूप से भारी नुकसान हो रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह आर्थिक नुकसान ही इस लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब करोड़ों और अरबों रुपये की ड्रग्स खेप पकड़ी जाती है, तो इससे न केवल तस्करों की कमर टूटती है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क की वित्तीय संरचना भी कमजोर हो जाती है। यही कारण है कि सरकार अब ‘फॉलो द मनी’ यानी धन के प्रवाह को ट्रैक करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि इस कारोबार से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ड्रग्स के खिलाफ यह अभियान केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी जाती है, तो यह सीधे तौर पर उन लाखों युवाओं तक नशे की पहुंच को रोकता है, जिन्हें इस जाल में फंसाने की कोशिश की जा रही होती है। इस प्रकार, हर जब्ती केवल एक कानूनी सफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक विजय भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत जैसे युवा देश में, जहां बड़ी आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, ड्रग्स का खतरा और भी गंभीर हो जाता है। नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र की प्रगति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए, ड्रग्स के खिलाफ यह लड़ाई केवल सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की भागीदारी की मांग करती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्र सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्रालय द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें राज्यों को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि वे इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों में निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, ताकि तस्करी के हर प्रयास को समय रहते रोका जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस पूरे अभियान का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि अब यह एक ‘मिशन मोड’ में चलाया जा रहा है। जिस प्रकार नक्सलमुक्त भारत अभियान ने एक स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति के साथ काम किया, उसी प्रकार नशामुक्त भारत का लक्ष्य भी अब स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है। यह एक लंबी और चुनौतीपूर्ण लड़ाई जरूर है, लेकिन जिस प्रकार से एजेंसियां समन्वित और तकनीकी रूप से उन्नत तरीके से काम कर रही हैं, उससे यह उम्मीद मजबूत होती है कि आने वाले वर्षों में इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह कहना गलत नहीं होगा कि ड्रग्स के खिलाफ यह जंग केवल अपराध के खिलाफ नहीं, बल्कि भविष्य को बचाने की जंग है। हर जब्त की गई खेप, हर ध्वस्त किया गया नेटवर्क, और हर पकड़ा गया तस्कर इस बात का प्रमाण है कि देश अपने युवाओं को नशे के अंधकार से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि इसी दृढ़ता और समन्वय के साथ यह अभियान जारी रहता है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल नक्सलमुक्त, बल्कि नशामुक्त राष्ट्र के रूप में भी दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>
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</div>
</div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:54:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>समृद्ध और सुरक्षित राष्ट्र के लिए घुसपैठियों से मुक्ति आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत एक प्राचीन सभ्यता और मजबूत लोकतंत्र है, जिसकी सीमाएं केवल भौगोलिक रेखाएं नहीं बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और संप्रभुता की सुरक्षा दीवार हैं। इन सीमाओं को पार कर होने वाली अवैध घुसपैठ का सीधा असर देश के सामाजिक संतुलन, आर्थिक संसाधनों और आंतरिक सुरक्षा पर पड़ता है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में कोई भी राष्ट्र अवैध प्रवासन को स्वीकार नहीं करता, जिसका उदाहरण हाल के वर्षों में अमेरिका जैसे देशों द्वारा उठाए गए सख्त कदमों में देखा जा सकता है। भारत के लिए 'घुसपैठ मुक्त राष्ट्र' का संकल्प केवल सुरक्षात्मक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक विकसित और खुशहाल समाज</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175693/freedom-from-infiltrators-is-necessary-for-a-prosperous-and-secure"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas7.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>(डा.) मनमोहन प्रकाश </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">भारत एक प्राचीन सभ्यता और मजबूत लोकतंत्र है, जिसकी सीमाएं केवल भौगोलिक रेखाएं नहीं बल्कि राष्ट्रीय अस्मिता और संप्रभुता की सुरक्षा दीवार हैं। इन सीमाओं को पार कर होने वाली अवैध घुसपैठ का सीधा असर देश के सामाजिक संतुलन, आर्थिक संसाधनों और आंतरिक सुरक्षा पर पड़ता है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में कोई भी राष्ट्र अवैध प्रवासन को स्वीकार नहीं करता, जिसका उदाहरण हाल के वर्षों में अमेरिका जैसे देशों द्वारा उठाए गए सख्त कदमों में देखा जा सकता है। भारत के लिए 'घुसपैठ मुक्त राष्ट्र' का संकल्प केवल सुरक्षात्मक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक विकसित और खुशहाल समाज की अनिवार्य शर्त है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">​भौगोलिक दृष्टि से भारत की सीमाएं अत्यंत संवेदनशील हैं, क्योंकि पड़ोस में स्थित कुछ देशों का रुख सदैव मित्रवत नहीं रहा है। घुसपैठ के साथ जुड़ा तस्करी, जाली मुद्रा और आतंकवादी गतिविधियों का नेटवर्क यह स्पष्ट करता है कि सीमा प्रबंधन केवल सैन्य चुनौती नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति का अभिन्न हिस्सा है। जब अवैध रूप से आए लोग बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के भारत में बस जाते हैं, तो वे न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हैं बल्कि देश के सीमित संसाधनों पर भी बोझ बढ़ाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ, जो वैध नागरिकों के लिए है, उन तक पहुँचने लगता है, जो अंततः भारतीय नागरिकों के अधिकारों का हनन है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">​राष्ट्र के प्रति समर्पण का अर्थ केवल भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा और भविष्य के प्रति जिम्मेदारी है। एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत की केन्द्र सरकार देश की सीमाओं पर आधुनिक तकनीक, जैसे ड्रोन निगरानी, स्मार्ट सर्विलांस और सख्त पहचान प्रणाली को अंतिम रूप देने के लिए संकल्पित और प्रयासरत है।किंतु सीमाओं की लंबाई और जटिल भौगोलिक स्थितियां अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। अवैध प्रवासन न केवल सुरक्षा बल्कि सामाजिक असंतोष का कारण भी बनता है, जिससे स्थानीय डेमोग्राफी में बदलाव आता है तथा वहां की आबादी की सांस्कृतिक पहचान और आजीविका पर संकट खड़ा हो जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">​यद्यपि भारत 'वसुधैव कुटुंबकम्' की भावना के साथ शरणार्थियों को आश्रय देने का पक्षधर रहा है, परंतु 'मानवीय आधार पर दी गई शरण' और 'अवैध घुसपैठ' के बीच स्पष्ट अंतर करना आवश्यक है। शरणार्थियों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत संरक्षण दिया जा सकता है, लेकिन अवैध घुसपैठ को किसी भी स्थिति में वैधता नहीं दी जा सकती। इस समस्या के समाधान के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जागरूक नागरिक और स्थानीय प्रशासन का सहयोग भी अनिवार्य है। राष्ट्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल सैनिकों की नहीं, बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">​आज जब भारत वैश्विक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, तब आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना समय की मांग है। सुरक्षित सीमाएं और स्पष्ट राष्ट्रीय नीति ही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित कर सकती हैं। यह संकल्प किसी समुदाय विशेष के विरुद्ध नहीं बल्कि कानून के शासन को सुदृढ़ करने के लिए है। सीमावर्ती राज्यों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस समस्या पर ध्यान देना होगा तथा केन्द्र के साथ सहयोग करना होगा। क्योंकि जब राष्ट्र सुरक्षित होगा तभी विकास स्थायी होगा और भारत विश्व में एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित हो सकेगा। सुरक्षित सीमाएं ही विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करेंगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:19:53 +0530</pubDate>
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                <title>देश को दहलाने की फिराक में आतंकी</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल ही में देश को दहलाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकियों को भारी मात्रा में हथियारों और विस्फोटक सामग्री के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई न केवल सराहनीय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और दक्षता का भी प्रमाण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धारा </span>370 <span lang="hi" xml:lang="hi">हटने के बाद कश्मीर में शांति का वातावरण अवश्य मजबूत हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह मान लेना कि आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविकता से दूर होगा। आज भी घाटी में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आतंकियों को पनाह देकर सीमा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175607/terrorists-trying-to-terrorize-the-country"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)4.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हाल ही में देश को दहलाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकियों को भारी मात्रा में हथियारों और विस्फोटक सामग्री के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई न केवल सराहनीय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और दक्षता का भी प्रमाण है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धारा </span>370 <span lang="hi" xml:lang="hi">हटने के बाद कश्मीर में शांति का वातावरण अवश्य मजबूत हुआ है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यह मान लेना कि आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वास्तविकता से दूर होगा। आज भी घाटी में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आतंकियों को पनाह देकर सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को आसान बना रहे हैं। यह स्थिति राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय सेना और कश्मीर पुलिस की मुस्तैदी के कारण घाटी में आतंकी अपने मंसूबों को पूरी तरह अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। बावजूद इसके</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दस-दस और बारह-बारह लाख रुपये के इनामी आतंकियों का वर्षों तक देश के भीतर छिपकर रहना और अपना नेटवर्क खड़ा कर लेना इस बात की ओर भी संकेत करता है कि उन्हें कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर सहयोग मिल रहा है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कश्मीर पुलिस द्वारा बारह लाख के इनामी दुर्दांत आतंकी अबू हुरैरा की सोलह वर्षों बाद की गई गिरफ्तारी ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया है कि देश के भीतर कुछ लोग आतंकियों को अपना बनाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी पहचान छिपाने में मदद कर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्र की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक और नैतिक पतन का भी संकेत है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज भारत को जितना खतरा बाहरी दुश्मनों से नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उससे कहीं अधिक खतरा देश के भीतर छिपे ऐसे गद्दारों से है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो स्वार्थवश दुश्मनों के हाथों बिक जाते हैं। यदि देश के भीतर ही लोग दुश्मनों को शरण देने लगें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सेना और पुलिस कब तक अपनी जान जोखिम में डालकर हमारी सुरक्षा करती रहेंगी </span>?<span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी एक गंभीर प्रश्न है कि सीमा पर कड़ी निगरानी के बावजूद पाकिस्तानी आतंकी देश में प्रवेश कर भारतीय नागरिकों की तरह पहचान कैसे बना लेते हैं। इस संदर्भ में भारत सरकार को न केवल पाकिस्तान सीमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि नेपाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बांग्लादेश और चीन से लगती सीमाओं पर भी और अधिक सतर्कता एवं तकनीकी निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और आर्थिक प्रगति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि कुछ शक्तियाँ देश को अस्थिर करने के प्रयासों में लगी हुई हैं। आतंकवाद के माध्यम से भय और असुरक्षा का माहौल बनाकर भारत की प्रगति को रोकने की साजिश रची जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दुर्भाग्यवश देश के भीतर के कुछ तत्व भी सहयोगी बन जाते हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अब समय आ गया है कि देश का प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और अपने आसपास हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखे। राष्ट्र की सुरक्षा केवल सेना और पुलिस की जिम्मेदारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। जब तक हम भीतर के दुश्मनों को पहचानकर उनके खिलाफ खड़े नहीं होंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब तक बाहरी खतरे भी पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाएंगे।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>अरविंद रावल</strong></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 19:18:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता भारत सुरक्षा विकास और विश्वास की नई विजयगाथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत ने लंबे समय तक जिस आंतरिक चुनौती का सामना किया वह नक्सलवाद के रूप में देश के अनेक हिस्सों में फैली रही। यह समस्या केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं थी बल्कि इसने सामाजिक आर्थिक और मानवीय जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया। दशकों तक आदिवासी क्षेत्रों में भय असुरक्षा और पिछड़ापन बना रहा। गांवों में विकास की रफ्तार थम गई और लोगों का भरोसा व्यवस्था से डगमगाने लगा। आज जब देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस परिवर्तन के पीछे की नीति संकल्प और</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174668/india-moving-towards-the-end-of-naxalism-a-new-victory"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1926804-10.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत ने लंबे समय तक जिस आंतरिक चुनौती का सामना किया वह नक्सलवाद के रूप में देश के अनेक हिस्सों में फैली रही। यह समस्या केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं थी बल्कि इसने सामाजिक आर्थिक और मानवीय जीवन को भी गहराई से प्रभावित किया। दशकों तक आदिवासी क्षेत्रों में भय असुरक्षा और पिछड़ापन बना रहा। गांवों में विकास की रफ्तार थम गई और लोगों का भरोसा व्यवस्था से डगमगाने लगा। आज जब देश नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है तब यह आवश्यक हो जाता है कि इस परिवर्तन के पीछे की नीति संकल्प और प्रयासों को समझा जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय के नेतृत्व में बीते वर्षों में जो रणनीति अपनाई गई वह बहुआयामी रही। केवल सुरक्षा बलों की तैनाती तक सीमित न रहकर सरकार ने विकास और विश्वास दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया। यही कारण है कि जिन क्षेत्रों में कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी वहां आज स्कूल खुल रहे हैं सड़कें बन रही हैं और जीवन सामान्य हो रहा है। यह बदलाव अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे वर्षों की योजनाबद्ध मेहनत और स्पष्ट नीति रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नक्सलवाद की जड़ें अक्सर गरीबी और पिछड़ेपन से जोड़कर देखी जाती रही हैं। लेकिन वास्तविकता इससे अधिक जटिल रही है। कई ऐसे क्षेत्र भी थे जहां आर्थिक स्थिति कमजोर थी फिर भी वहां नक्सलवाद नहीं पनपा। इसका अर्थ यह है कि नक्सलवाद केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि एक वैचारिक और रणनीतिक चुनौती भी था। वामपंथी उग्रवाद ने आदिवासी समाज को अपने प्रभाव में लेकर उन्हें मुख्यधारा से दूर करने का प्रयास किया। स्कूलों को जलाना विकास कार्यों को रोकना और भय का वातावरण बनाना इस रणनीति का हिस्सा रहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गृह मंत्रालय ने इस सच्चाई को समझते हुए अपनी नीति तैयार की। सुरक्षा बलों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया। खुफिया तंत्र को मजबूत बनाया गया और स्थानीय पुलिस को सशक्त किया गया। इसके साथ ही आत्मसमर्पण की नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया जिससे बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौटे। यह केवल सैन्य सफलता नहीं बल्कि सामाजिक पुनर्वास का भी उदाहरण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्तर जैसे क्षेत्रों में जो परिवर्तन देखने को मिला वह इस नीति की सफलता का प्रमाण है। जहां कभी प्रशासन की पहुंच सीमित थी वहां आज सरकारी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हो रही हैं। राशन की दुकानों से लेकर स्वास्थ्य केंद्र तक लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं। आधार और राशन कार्ड के माध्यम से लाभ सीधे लोगों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों का विश्वास बढ़ा है और वे हिंसा से दूर होकर विकास की राह पर चलने लगे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके विपरीत यदि पिछले दशकों की स्थिति पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि लंबे समय तक इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना रहा। सड़कें नहीं बनीं स्कूल नहीं खुले और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचीं। इस शून्य का लाभ उठाकर उग्रवादी संगठनों ने अपनी पकड़ मजबूत की। लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि व्यवस्था उनके खिलाफ है और हथियार उठाना ही एकमात्र रास्ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी देखा गया कि उस समय नक्सलवाद के खिलाफ स्पष्ट और कठोर नीति का अभाव था। कई बार राजनीतिक इच्छाशक्ति कमजोर दिखाई दी और समस्या को टालने का प्रयास किया गया। इससे नक्सलवाद का विस्तार हुआ और वह कई राज्यों तक फैल गया। देश के एक बड़े भूभाग में इसका प्रभाव देखा गया जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में स्थिति बदल चुकी है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि जो लोग भटक गए हैं उन्हें वापस लाने का अवसर मिले। इस संतुलित दृष्टिकोण ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और हिंसा की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।</div>
<div style="text-align:justify;">सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब आदिवासी समाज स्वयं इस बदलाव का भागीदार बन रहा है। वे समझ चुके हैं कि विकास और शांति ही उनके भविष्य का आधार है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के कार्यक्रमों ने उन्हें नई दिशा दी है। युवा पीढ़ी अब हथियार नहीं बल्कि शिक्षा और रोजगार को अपना लक्ष्य बना रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नक्सलवाद के अंत की यह यात्रा केवल सरकार की उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे समाज की जीत है। इसमें सुरक्षा बलों का साहस प्रशासन की प्रतिबद्धता और आम नागरिकों का सहयोग सभी शामिल हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि यदि सही नीति और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य किया जाए तो सबसे जटिल समस्याओं का समाधान भी संभव है।आज जब देश इस चुनौती से लगभग मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है तब यह आवश्यक है कि इस उपलब्धि को बनाए रखा जाए। विकास की गति को निरंतर बनाए रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी क्षेत्र फिर से पिछड़ापन और असुरक्षा का शिकार न बने। यही सच्चे अर्थों में नक्सलवाद के अंत की स्थायी गारंटी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि भारत ने एक लंबी और कठिन लड़ाई में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। गृह मंत्रालय के नेतृत्व में अपनाई गई रणनीति ने यह सिद्ध कर दिया है कि सुरक्षा और विकास साथ साथ चल सकते हैं। यह केवल एक समस्या का समाधान नहीं बल्कि नए भारत की दिशा का संकेत है जहां हर नागरिक को समान अवसर और सुरक्षित जीवन का अधिकार प्राप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 18:30:05 +0530</pubDate>
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