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                <title>UP Assembly Election 2027 - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं के बाद अब आस्था के मुद्दे पर सियासी घमासान</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुद्दों का रंग बदलता दिखाई देने लगा है। लंबे समय से पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेर रहा विपक्ष अब राम मंदिर से जुड़े सवालों को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से राम मंदिर के चढ़ावे, प्रबंधन और कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों ने प्रदेश की सियासत को नई दिशा दे दी है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष की इस रणनीति को केवल एक नए राजनीतिक मुद्दे</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/185690/after-paper-leak-and-recruitment-examinations-now-political-conflict-on"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002171158.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुद्दों का रंग बदलता दिखाई देने लगा है। लंबे समय से पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेर रहा विपक्ष अब राम मंदिर से जुड़े सवालों को भी राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से राम मंदिर के चढ़ावे, प्रबंधन और कथित अनियमितताओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों ने प्रदेश की सियासत को नई दिशा दे दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष की इस रणनीति को केवल एक नए राजनीतिक मुद्दे के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी और भाजपा के सबसे मजबूत राजनीतिक आधार को चुनौती देने की कोशिश भी दिखाई देती है। विपक्ष को यह एहसास है कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण होने के बावजूद उसका सीधा प्रभाव मुख्य रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और नौकरी की तलाश में जुटे वर्ग पर पड़ता है। इसके विपरीत राम मंदिर से जुड़ा कोई भी सवाल प्रदेश के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता और शिक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने लगातार सरकार पर निशाना साधा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भी विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। छात्रों और अभ्यर्थियों से जुड़े आंदोलनों को विपक्ष ने राजनीतिक मुद्दा बनाया और सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन मुद्दों ने सरकार को घेरने का अवसर जरूर दिया, लेकिन विपक्ष के सामने यह चुनौती बनी रही कि युवाओं से जुड़े इन सवालों को व्यापक चुनावी मुद्दे में कैसे बदला जाए। चुनावी राजनीति में ऐसा मुद्दा अधिक प्रभावी माना जाता है जो समाज के अलग-अलग वर्गों को एक साथ प्रभावित करे। राम मंदिर इसी लिहाज से विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक क्षेत्र बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भाजपा की राजनीति और वैचारिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मंदिर निर्माण को भाजपा अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने रखती रही है। ऐसे में उसी मंदिर से जुड़े प्रबंधन, चढ़ावे और पारदर्शिता के सवाल उठाकर विपक्ष सीधे भाजपा के मजबूत राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास कर रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक आंदोलन और वैचारिक पहचान का भी हिस्सा रहा है। यही कारण है कि विपक्ष का राम मंदिर से जुड़े सवालों को उठाना अपने आप में महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष के लिए यह रास्ता आसान नहीं है। राम मंदिर के मुद्दे पर भाजपा को घेरते समय थोड़ी सी भी राजनीतिक चूक उसके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। भाजपा इस तरह के प्रयासों को धार्मिक आस्था के खिलाफ बताकर विपक्ष पर पलटवार कर सकती है। यही कारण है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सीधे मंदिर निर्माण पर सवाल उठाने के बजाय मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं, चढ़ावे की पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों को सामने रख रही हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष का तर्क है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिर की व्यवस्था में पारदर्शिता होनी चाहिए। उसका कहना है कि भगवान राम की आस्था किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सवाल उठाना आस्था का विरोध नहीं, बल्कि जवाबदेही की मांग है। विपक्ष की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि वह राम मंदिर निर्माण को सीधे निशाना बनाने से बच रहा है। इसके बजाय मंदिर में आने वाले चढ़ावे, उसके प्रबंधन और कथित अनियमितताओं को मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह रणनीति विपक्ष को एक राजनीतिक सुरक्षा कवच भी देती है। यदि वह सीधे मंदिर या भगवान राम की आस्था पर सवाल उठाता है तो भाजपा के लिए उसे राम विरोधी बताना आसान हो सकता है। लेकिन यदि बहस चढ़ावे की पारदर्शिता, व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर केंद्रित रहती है तो विपक्ष इसे शासन और सार्वजनिक उत्तरदायित्व का मुद्दा बता सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यही वह राजनीतिक रास्ता है जिसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी तलाशती दिखाई दे रही हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि भाजपा ने राम मंदिर और दूसरे धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक पूंजी के रूप में इस्तेमाल किया है। उनका सवाल है कि जो लोग भगवान राम की भक्ति को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बताते हैं, उन्हें मंदिर से जुड़े आर्थिक और प्रशासनिक मामलों में भी पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। चुनाव में केवल सरकार की उपलब्धियां या विपक्ष के आरोप ही निर्णायक नहीं होंगे, बल्कि जनता के बीच कौन सा राजनीतिक नैरेटिव मजबूत होता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। भाजपा के पास राम मंदिर का नैरेटिव पहले से मौजूद है। अयोध्या में मंदिर निर्माण को वह अपनी वैचारिक और राजनीतिक सफलता के रूप में जनता के सामने रख सकती है। विपक्ष के सामने चुनौती यह है कि वह इस नैरेटिव का जवाब किस तरह देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की मौजूदा कोशिशों को इसी व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा सकता है। विपक्ष यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि राम मंदिर की आस्था केवल भाजपा की नहीं है। साथ ही वह यह भी बताना चाहता है कि धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या अपारदर्शिता को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यदि विपक्ष इस संदेश को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सफल रहता है तो 2027 के चुनाव में राम मंदिर का मुद्दा भाजपा के लिए एकतरफा राजनीतिक लाभ का विषय रहने के बजाय बहस का मैदान बन सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि विपक्ष के लिए राम मंदिर पर राजनीति करना जितना आकर्षक दिखाई देता है, उतना ही जोखिम भरा भी है। भाजपा के पास अयोध्या और राम मंदिर को लेकर वर्षों की राजनीतिक पृष्ठभूमि है। उसके कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए यह भावनात्मक मुद्दा है। विपक्ष को इस भावना की ताकत का अंदाजा है, इसलिए उसे अपनी रणनीति बेहद सावधानी से आगे बढ़ानी होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अगर विपक्ष के आरोप ठोस तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित रहते हैं तो वह इन्हें पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल बना सकता है। लेकिन यदि बयानबाजी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रही तो भाजपा को पलटवार का अवसर मिल सकता है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए यह भी जरूरी होगा कि वे अपने पुराने राजनीतिक रुख और वर्तमान रणनीति के बीच संतुलन कायम करें। राम मंदिर की चौखट पर जिन दलों और नेताओं की राजनीतिक मौजूदगी को लेकर भाजपा पहले सवाल उठाती रही है, अब वही दल मंदिर की व्यवस्था और चढ़ावे को लेकर सवाल कर रहे हैं। भाजपा इस विरोधाभास को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह बदलाव बताता है कि विपक्ष अब केवल पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं के मुद्दों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। वह ऐसे मुद्दों की तलाश में है जिनका प्रभाव समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचे। राम मंदिर निश्चित रूप से ऐसा ही मुद्दा है। पेपर लीक का सवाल युवाओं की नाराजगी को आवाज देता है, जबकि राम मंदिर का सवाल भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर कहीं व्यापक बहस खड़ी कर सकता है। इसलिए विपक्ष दोनों मुद्दों को अलग-अलग राजनीतिक वर्गों तक पहुंचने वाले माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक पिच तैयार होने लगी है। भाजपा राम मंदिर को अपनी मजबूत राजनीतिक पिच के रूप में सामने रखेगी और विपक्ष उसी पिच पर अपनी बैटिंग करने की कोशिश कर रहा है। सवाल यह नहीं है कि राम मंदिर का मुद्दा राजनीति में रहेगा या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि आने वाले समय में इसकी व्याख्या कौन और किस तरीके से जनता के सामने करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">विपक्ष के लिए यह रणनीति अवसर भी है और चुनौती भी। अगर वह मंदिर की आस्था का सम्मान करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों को मजबूती से उठा पाया तो भाजपा के सबसे मजबूत राजनीतिक मुद्दे पर नई बहस खड़ी कर सकता है। लेकिन यदि यह रणनीति धार्मिक भावनाओं से सीधे टकराती दिखाई दी तो उसका राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में आने वाले महीनों में यही मुकाबला महत्वपूर्ण रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक ओर भाजपा राम मंदिर को अपनी उपलब्धि और आस्था के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करेगी, वहीं विपक्ष मंदिर से जुड़े प्रबंधन और पारदर्शिता के सवालों के जरिए नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश करेगा। पेपर लीक से शुरू हुई विपक्ष की सरकार विरोधी राजनीति अब राम मंदिर की चौखट तक पहुंच गई है। 2027 के चुनाव में यह राजनीतिक बैटिंग कितनी सफल होगी, इसका फैसला अंततः जनता ही करेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 21:18:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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                <title>उ.प्र. में भाजपा का नया संगठन: 'मिशन 2027' की तैयारी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला (संपादक )</strong></blockquote>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश में </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi">  के विधानसभा चुनाव से करीब </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi">  महीने पहले उत्तर प्रदेश भाजपा में सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव दस्तक दे रहा है। दिसंबर </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi">  में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब पार्टी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">टीम यूपी </span>2.0' <span lang="hi" xml:lang="hi">को अंतिम रूप देने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव सिर्फ फेरबदल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi">  की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वार रूम टीम</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span></p>
<p class="MsoNormal">50%<span lang="hi" xml:lang="hi">  तक नए चेहरे को तबज्जों दी गई हैं और यह</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एंटी-इंकबेंसी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">काटने की तैयारी है। बीजेपी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि नई टीम में</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182140/bjps-new-organization-in-uttar-pradesh-intensifies-preparations-for-mission"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(5).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ला (संपादक )</strong></blockquote>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश में </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> के विधानसभा चुनाव से करीब </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने पहले उत्तर प्रदेश भाजपा में सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव दस्तक दे रहा है। दिसंबर </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब पार्टी </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">टीम यूपी </span>2.0' <span lang="hi" xml:lang="hi">को अंतिम रूप देने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव सिर्फ फेरबदल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">वार रूम टीम</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है।</span></p>
<p class="MsoNormal">50%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक नए चेहरे को तबज्जों दी गई हैं और यह</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एंटी-इंकबेंसी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">काटने की तैयारी है। बीजेपी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि नई टीम में करीब </span>50%<span lang="hi" xml:lang="hi"> बदलाव होंगे। इसका मकसद है- नए चेहरे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नया जोश: लंबे समय से एक ही पद पर जमे लोगों को हटाकर युवा और बूथ लेवल तक पकड़ रखने वालों को मौका। दोहरी जिम्मेदारी खत्म: कई पदाधिकारियों के पास संगठन + सरकार दोनों का चार्ज है। अब इसे खत्म किया जाएगा। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> का सबक: लोकसभा चुनाव में यूपी में सीटें घटने के बाद पार्टी अब </span>PDA <span lang="hi" xml:lang="hi">के जवाब में </span>OBC-<span lang="hi" xml:lang="hi">युवा आउटरीच पर फोकस कर रही है। सभी </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी को भाजपा ने </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्षेत्रों में बांटा है: काशी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोरखपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कानपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुंदेलखंड। भाजपा ने सभी </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल दिया है । नए अध्यक्ष अपनी टीम खुद बनाएंगे। जाति-क्षेत्र का फॉर्मूला:</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">पश्चिम: गुर्जर-वैश्य को तवज्जो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवध: ब्राह्मण नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति। ब्रज में शाक्य या लोध समाज से बड़ा चेहरा। काशी में </span>OBC, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर पटेल/कुर्मी प्रतिनिधित्व। प्रदेश कार्यकारिणी में बड़ा कट- वर्तमान में प्रदेश टीम में </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> महामंत्री</span>, 18<span lang="hi" xml:lang="hi"> उपाध्यक्ष</span>, 16<span lang="hi" xml:lang="hi"> सचिव हैं। क्या बदलेगा: महामंत्री </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> होंगे। यूपी की विशालता को देखते हुए ढांचा तो वही रहेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पद कम होंगे। युवा + महिला: टीम में एक तिहाई महिलाओं को प्रतिनिधित्व। उम्र पर खास ध्यान। </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> मोर्चों के नए अध्यक्ष: युवा मोर्चा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महिला मोर्चा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ओबीसी</span>, SC, ST, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष भी जल्द घोषित होंगे। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">मंत्रिमंडल के बाद संगठन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में कैबिनेट विस्तार किया। अब उसी तर्ज पर संगठन में बदलाव हो रहा है। संतुलन का खेल: जिन क्षेत्रों से मंत्री ज्यादा हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहां संगठन में पद कम होंगे ताकि असंतुलन न रहे। ब्रज: </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> मंत्री हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए संगठन में भागीदारी कम हो सकती है</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">गोरखपुर: कैबिनेट में विस्तार नहीं मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो प्रदेश इकाई में ज्यादा चेहरे मिल सकते हैं।  </span>PDA vs <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा का नया फॉर्मूला। </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> पिलर पर है। </span>PDA <span lang="hi" xml:lang="hi">का मुकाबला*: गैर-यादव </span>OBC <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे कुर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मौर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सैनी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निषाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">राजभर को अहम जिम्मेदारी। पंकज चौधरी का कुर्मी बैकग्राउंड पूर्वांचल में </span>OBC <span lang="hi" xml:lang="hi">वोट साधेगा। बूथ मजबूती: सोशल मीडिया + जमीनी अभियान में सक्रिय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बूथ तक पकड़ वाले चेहरे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्षेत्रीय संतुलन: पूर्वांचल के बाद अब पश्चिम यूपी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बुंदेलखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रज को ज्यादा प्रतिनिधित्व।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये सिर्फ संगठन नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भाजपा का </span>'2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> मॉडल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है। लक्ष्य साफ है - नए चेहरों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामाजिक समीकरण और बूथ मैनेजमेंट के जरिए सपा के </span>PDA <span lang="hi" xml:lang="hi">को काटकर फिर से </span>2/3<span lang="hi" xml:lang="hi"> बहुमत लाना।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अब देखना ये है कि </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">परफॉर्मेंस</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">जीतता है या </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पैरवी</span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">।</span></strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 19:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>सनातन संवाद; शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का एलान - 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में उतारेंगे अपना प्रत्याशी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong>: राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से 'सनातन संवाद' कार्यक्रम का आयोजन रविवार को बस्ती जीआईसी मैदान में किया गया. ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के लिए पूर्वांचल के ब्राह्मण नेता एकजुट होकर मंच पर पहुंचे और योगी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी. अविमुक्तेश्वनंद ने कहा, अगर आने वाले 2027 के चुनाव में कोई भी राजनैतिक दल गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की बात नहीं करेगा, तो वे खुद अपना कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार देंगे. उन्होंने सनातनियों को एक होकर आने वाले चुनाव में वोट करने की अपील की.</p>
<p style="text-align:justify;">शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, उत्तर प्रदेश में</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174646/sanatan-samvad-shankaracharya-avimukteshwaranands-announcement-will-field-his-candidate"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1200-675-26355390-thumbnail-16x9-sanc-aspera.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज </strong>: राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से 'सनातन संवाद' कार्यक्रम का आयोजन रविवार को बस्ती जीआईसी मैदान में किया गया. ब्राह्मण समाज को एकजुट करने के लिए पूर्वांचल के ब्राह्मण नेता एकजुट होकर मंच पर पहुंचे और योगी सरकार के खिलाफ हुंकार भरी. अविमुक्तेश्वनंद ने कहा, अगर आने वाले 2027 के चुनाव में कोई भी राजनैतिक दल गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की बात नहीं करेगा, तो वे खुद अपना कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतार देंगे. उन्होंने सनातनियों को एक होकर आने वाले चुनाव में वोट करने की अपील की.</p>
<p style="text-align:justify;">शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, उत्तर प्रदेश में 16 करोड़ पशुओं को मारकर खा लिया गया. यूपी सरकार इस पर रोक नहीं लगा सकी. पहले के मुख्यमंत्री अगर गायों के मांस की बिक्री पर रोक नहीं लगाए, तो योगी सरकार ने भी उस पर क्यों रोक नहीं लगाया. इसका मतलब इनकी इच्छा ही नहीं है कि गाय को कटने से रोका जाए.</p>
<p style="text-align:justify;">अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, एक व्यक्ति दो पद कैसे संभाल सकता है. जब योगी आदित्यनाथ महंत हैं. उत्तर प्रदेश सरकार से वेतन लेकर इस पद का गलत तरीके से निर्वहन कर रहे हैं. उन्हें चाहिए दोनों में से एक पद को छोड़ दें, मगर वे ऐसा नहीं कर रहे और खुद को संन्यासी कहकर दोनों पद लेकर चल रहे जो मर्यादा के अनुकूल नहीं है. संत सरकारी नहीं असरकारी होना चाहिए.</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, भगवा पहनकर जो लोग इस तरह का काम करते हैं, उन्हें भगवा छोड़कर कुर्ता-पायजामा पहन लेना चाहिए. अगर वर्तमान बीजेपी सरकार गाय और सनातन की बात करती, तो विपक्ष को मौका नहीं मिलता. मगर वे ऐसा नहीं कर रहे जिसका फायदा विपक्ष उठा रहा है. सपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर कुछ भी बयान दिया, मगर जब तक वे गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की पार्टी स्तर पर घोषणा नहीं कर देते वे उनके साथ भी नहीं हैं.</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि धर्म के बिना किसी भी स्तर पर कल्याण संभव नहीं है. व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों का उत्थान तभी संभव है, जब जीवन में धर्म का समावेश हो. यदि मनुष्य को ऊंचा उठना है तो उसे अपने जीवन में धर्म को अपनाना ही होगा, क्योंकि धर्मविहीन जीवन कभी उन्नति नहीं कर सकता.</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने खुलेमंच से आह्वान किया कि ब्राह्मण अब एकजुट हो जाएं और अहंकारी व अधर्मी सनातन विरोधी सरकार के खिलाफ फरसा उठा कर सत्ता से इस बार उखाड़ फेंके. पूर्व पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने भी कहा कि ब्राह्मण जरूरत पड़ने पर फरसा भी उठा सकता है और अब ब्राह्मण सुदामा नहीं परशुराम है, अलंकार ने 'हर घर फरसा, घर-घर फरसा' का नारा देकर ब्राह्मण समाज में जोश भरने का काम किया.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 22:18:42 +0530</pubDate>
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