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                <title>भारतीय राजनीति समाचार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भारतीय राजनीति समाचार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राहुल गांधी को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">याची सिमरन गुप्ता ने ट्रायल कोर्ट संभल के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। भारतीय राज्य के संबंध में राहुल गांधी के बयान के आधार पर संभल ट्रायल कोर्ट में उन पर एफआईआर दर्ज करने के लिए सिमरन गुप्ता ने वाद दायर किया था। ट्रायल कोर्ट के वाद खारिज किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने संभल ट्रायल कोर्ट के फैसले</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177869/rahul-gandhi-got-big-relief-from-the-high-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/untitled-2026-05-01t142156-1777625580.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">याची सिमरन गुप्ता ने ट्रायल कोर्ट संभल के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। भारतीय राज्य के संबंध में राहुल गांधी के बयान के आधार पर संभल ट्रायल कोर्ट में उन पर एफआईआर दर्ज करने के लिए सिमरन गुप्ता ने वाद दायर किया था। ट्रायल कोर्ट के वाद खारिज किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने संभल ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">संभल की चंदौसी कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका को कमजोर होने के कारण खारिज कर दिया था। सिमरन गुप्ता ने अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश चंदौसी कोर्ट की तरफ से दिए गए फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">15 जनवरी 2025 को राहुल गांधी ने कांग्रेस के नए मुख्यालय 'इंदिरा भवन' के उद्धाटन के दौरान कहा था, "हमारी लड़ाई आरएसएस, बीजेपी और खुद इंडियन स्टेट से है।"उन्होंने कहा था, "हमारी विचारधारा, आरएसएस की विचारधारा की तरह हजारों साल पुरानी है और हम हजारों वर्षों से आरएसएस की विचारधारा से लड़ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मत सोचिए कि हम निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है। अगर आपको लगता है कि हम भाजपा या आरएसएस नामक किसी राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं  तो आपने स्थिति सही से समझा नहीं है। भाजपा और आरएसएस ने हमारे देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम भाजपा, आरएसएस और खुद इंडियन स्टेट से लड़ रहे हैं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:46:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पवन खेड़ा की सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मंजूर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, उसे आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि अपराध शाखा थाना प्रकरण संख्या 04/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">30 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177867/pawan-khedas-anticipatory-bail-approved-by-supreme-court"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/pawan-khera-3.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है, उसे आसानी से खतरे में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि अपराध शाखा थाना प्रकरण संख्या 04/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">30 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने यह भी माना कि दोनों पक्षों, पवन खेड़ा और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं, लेकिन इससे किसी की आजादी से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पवन खेड़ा के खिलाफ यह मामला रिंकी भुइयां सरमा से जुड़े बयान को लेकर दर्ज किया गया था। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि उनके पास एक से अधिक पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां हैं। इसी बयान के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत देते हुए कई शर्तें भी तय की हैं। पवन खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित होना पड़ेगा। उन्हें साक्ष्यों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं होगी और बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकेंगे। अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत जरूरत के अनुसार अतिरिक्त शर्तें लागू कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर विचार करते समय जिन दस्तावेजों और तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उनका मामले के अंतिम निर्णय से कोई संबंध नहीं होगा और निचली अदालत इन टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार, आगे की कार्रवाई करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले पवन खेड़ा ने असम की निचली अदालत और गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन उन्हें वहां से राहत नहीं मिली थी। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उन्हें एक हफ्ते की अंतरिम जमानत दी थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाते हुए उन्हें अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 22:44:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कांग्रेस की दिग्गज नेता मोहिसाना किदवई के निधन पर शोक सभा आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मोहसिना किदवई के निधन पर जिला कांग्रेस कमेटी प्रतापगढ़ में शोक सभा आयोजित की गई। जिला कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित इस शोक सभा की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी जी ने की।इस दौरान उपस्थित कांग्रेसजनों ने स्व. मोहसिना किदवई जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा कि मोहसिना किदवई एक अनुभवी, सरल एवं जनप्रिय नेता थी।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176010/condolence-meeting-organized-on-the-demise-of-veteran-congress-leader"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/img-20260413-wa0149.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रतापगढ़।</strong> पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मोहसिना किदवई के निधन पर जिला कांग्रेस कमेटी प्रतापगढ़ में शोक सभा आयोजित की गई। जिला कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित इस शोक सभा की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी जी ने की।इस दौरान उपस्थित कांग्रेसजनों ने स्व. मोहसिना किदवई जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी ने अपने बयान में कहा कि मोहसिना किदवई एक अनुभवी, सरल एवं जनप्रिय नेता थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में समाज के सभी वर्गों के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। उनके निधन से कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरे देश को अपूरणीय क्षति हुई है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।कार्यक्रम में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर कोषाध्यक्ष वेदांत तिवारी, मनरेगा कोऑर्डिनेटर रवि भूषण सिन्हा, अनुसूचित जाति विभाग के जिला अध्यक्ष सुरेश कुमार सरोज, कांग्रेस से बदल के जिला महासचिव भवानी शंकर दुबे, जिला सचिव केके शुक्ला,जिला प्रवक्ता सुरेश कुमार मिश्रा,जिला प्रवक्ता फतेह बहादुर सिंह,अनिल मौर्य, सदर ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद वसीम, कार्यालय सचिव रियाज सुल्तान, नगर सचिव अरबाज आलम, जिला सचिव पृथ्वीराज गौतम, अंजनी पांडे, मांधाता ब्लॉक अध्यक्ष मोहम्मद असलम, जिला सचिव आसिफ अली, मो.फरीद,आलम उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 20:23:13 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पांच राज्यों के चुनाव में कानून व्यवस्था सबसे बड़ी कसौटी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174550/law-and-order-is-the-biggest-criterion-in-the-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_20260325_1748291.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि राज्य में प्रशासनिक तंत्र निष्पक्ष नहीं है और मतदाताओं को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। इन आरोपों के बाद मामला भारत निर्वाचन आयोग तक पहुंच चुका है। यह स्थिति कानून व्यवस्था की दृष्टि से चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि जब सत्तारूढ़ दल पर ही इस प्रकार के आरोप लगते हैं तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया है। राज्य में पहले भी चुनावों के दौरान हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बार भी पूरक मतदाता सूची को लेकर असमंजस और लाखों नामों पर विचाराधीन स्थिति ने प्रशासनिक चुनौती को और बढ़ा दिया है। स्पष्ट है कि बंगाल में कानून व्यवस्था चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और इसे संभालना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर के राज्य असम में भी स्थिति पूरी तरह शांत नहीं कही जा सकती। यहां कांग्रेस और एआईयूडीएफ कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की घटना सामने आई है, जिसने चुनावी माहौल में तनाव का संकेत दिया है। यह घटना दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कभी-कभी टकराव का रूप ले लेती है। हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ पक्ष लगातार यह दावा कर रहा है कि कानून व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाएं चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में स्थिति अपेक्षाकृत शांत दिखती है, लेकिन यहां भी राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हैं। नामांकन, रैलियां और जनसंपर्क कार्यक्रमों के बीच प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कहीं भी अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बने। विभिन्न दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी जरूर तेज है, परंतु अभी तक बड़े स्तर पर हिंसक घटनाओं की खबर नहीं है। यह राज्य परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण चुनावों के लिए जाना जाता है, लेकिन सतर्कता यहां भी जरूरी है क्योंकि चुनावी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दक्षिण भारत के ही केरल में चुनावी प्रक्रिया एक अलग ही स्वरूप में नजर आती है। यहां राजनीतिक चेतना उच्च स्तर की मानी जाती है और मतदाता सक्रिय रूप से भागीदारी करते हैं। इस बार भी बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा शुरू की गई है, जो लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि यहां प्रत्यक्ष हिंसा की घटनाएं कम देखने को मिलती हैं, फिर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और वैचारिक टकराव लगातार जारी रहता है। कानून व्यवस्था की दृष्टि से राज्य अपेक्षाकृत संतुलित नजर आता है, लेकिन प्रशासन को पूरी सतर्कता बनाए रखनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां सीमित दायरे में होती हैं, लेकिन यहां भी राजनीतिक समीकरण काफी जटिल होते हैं। छोटे क्षेत्रफल के बावजूद यहां गठबंधन राजनीति का प्रभाव अधिक है। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है, क्योंकि छोटी घटनाएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। हालांकि अब तक यहां से किसी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं है, लेकिन चुनावी माहौल को देखते हुए सावधानी आवश्यक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन पांचों राज्यों की स्थिति का समग्र विश्लेषण यह बताता है कि जहां एक ओर लोकतंत्र का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है। चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं होते, बल्कि यह जनता के विश्वास और प्रशासन की निष्पक्षता की भी परीक्षा होते हैं। यदि मतदाता भयमुक्त होकर मतदान नहीं कर पाएंगे तो चुनाव का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीतिक दलों को भी यह समझना होगा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। प्रशासन और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका इस समय सबसे अहम हो जाती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि इन चुनावों में जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा है। कानून व्यवस्था की स्थिति ही तय करेगी कि यह चुनाव लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनेंगे या फिर अव्यवस्था की मिसाल। देश की नजरें इन पांच राज्यों पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:43:39 +0530</pubDate>
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