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                <title>Assam Election News - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Assam Election News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असम-बंगाल में जनादेश की ‘चोरी’ </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के "मिशन" के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बात कांग्रेस के "कुछ लोगों" और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">BJP पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसने असम में जीत की हैट्रिक लगाई है। राहुल गांधी ने 'एक्स'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178299/%E2%80%98theft%E2%80%99-of-mandate-in-assam-bengal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/pti04-18-2026-000263b-0_1776846837575_1776846860705_1776848940508.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि असम और पश्चिम बंगाल में "जनादेश की चोरी" देश के लोकतंत्र को नष्ट करने के भारतीय जनता पार्टी के "मिशन" के तहत उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बात कांग्रेस के "कुछ लोगों" और उन दूसरे लोगों को अच्छी तरह समझने की जरूरत है जो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार से खुश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">BJP पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 206 सीटें जीतकर पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसने असम में जीत की हैट्रिक लगाई है। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, "कांग्रेस में कुछ लोग और अन्य लोग टीएमसी की हार पर खुश हो रहे हैं। उन्हें यह स्पष्ट रूप से समझने की जरूरत है कि असम और बंगाल के जनादेश की चोरी भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने के अपने मिशन में भाजपा का एक बड़ा कदम है।"</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, "क्षुद्र राजनीति को किनारे रखें, यह किसी एक पार्टी या दूसरी पार्टी के बारे में नहीं है, यह भारत के बारे में है।"पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया था कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 100 सीटों की "लूट की है।"राहुल गांधी ने उनके दावे का समर्थन किया था और आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग की मदद से BJP ने असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव की चोरी की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 23:01:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'हिमंत सबसे भ्रष्ट सीएम, मोदी-शाह के साथ मिलकर राज्य में चला रहे लैंड एटीएम '- राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को भारत का ‘‘सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री’’ बताते हुए गुरुवार को आरोप लगाया कि शर्मा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर राज्य में ‘‘लैंड एटीएम’’ चला रहे हैं और आम लोगों से जमीन छीनकर बड़े उद्योगपतियों को दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बोकाजान विधानसभा क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार रतन इंगती के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग असम और उसके लोगों के लिए खड़े थे और कांग्रेस पार्टी राज्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175041/himanta-is-running-land-atm-in-the-state-in-collaboration"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/rahul-himanta.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को भारत का ‘‘सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री’’ बताते हुए गुरुवार को आरोप लगाया कि शर्मा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर राज्य में ‘‘लैंड एटीएम’’ चला रहे हैं और आम लोगों से जमीन छीनकर बड़े उद्योगपतियों को दे रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बोकाजान विधानसभा क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार रतन इंगती के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग असम और उसके लोगों के लिए खड़े थे और कांग्रेस पार्टी राज्य में सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर उनकी मौत के मामले में न्याय दिलाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने कहा, ‘‘भारत के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा हैं और उनका परिवार भी भ्रष्टाचार के मामले में पहले नंबर पर है। कांग्रेस सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। अभी वह चाहे जितनी डींगें मार लें, उसके बाद वह पूरी तरह चुप हो जाएंगे।’’</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने ने दावा किया कि असम में तीन बड़े कॉरपोरेट घरानों को कुल 98,400 बीघा जमीन सौंप दी गई है।उन्होंने कहा, ‘‘यह जमीनें जनता से छीनी गई हैं। नरेंद्र मोदी, अमित शाह और हिमंत विश्व शर्मा ने असम में एक ‘लैंड एटीएम’ बना दिया है। वे लोगों से जमीन छीनते हैं और बड़े उद्योगपतियों को दे देते हैं।’’</p>
<p style="text-align:justify;">प्रसिद्ध संगीतकार जुबिन गर्ग का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह पूरे राज्य और उसके लोगों का प्रतिनिधित्व करते थे। गर्ग की पिछले साल सितंबर में सिंगापुर में डूबने से मौत हो गई थी।वह किसी एक व्यक्ति, एक समुदाय, एक भाषा या एक इतिहास के लिए नहीं खड़े थे। वह असम की बहुसांस्कृतिक और बहुधार्मिक परंपरा की भावना को दर्शाते थे। हम सत्ता में आएंगे तो 100 दिनों के भीतर न्याय दिलाएंगे और यह 100 प्रतिशत तय है।</p>
<p style="text-align:justify;">राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कांग्रेस विकेंद्रीकरण में विश्वास करती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असम को दिल्ली से चलाने की कोशिश कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 20:47:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जिले के पाथारकांदी क्षेत्र के राताबाड़ी में चुनाव संबंधी हिंसा: तनाव चरम पर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong> श्रीभूमि : </strong> श्रीभूमि जिले के पाथारकांदी क्षेत्र के काजीबाजार‑पलडहर जीपी के बाजारघाट में असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव संबंधी तनाव बढ़ गया। यहाँ आयोजित भाजपा की चुनावी जनसभा के दौरान और उसके बाद हुई हिंसा में भाजपा के पाथारकांदी मंडल के युवा मोर्चा अध्यक्ष शंकर देवनाथ गंभीर रूप से घायल हो गए। हिंसा का सिलसिला में </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह से ही कांग्रेस के कुछ नेता एवं कार्यकर्ता सभा स्थल के आसपास पार्टी के झंडे फहराने लगे, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा। उस जनसभा में भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु पाल, युवा मोर्चा अध्यक्ष शंकर देवनाथ,</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174853/election-related-violence-and-tension-at-its-peak-in-ratabari"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001403719.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong> श्रीभूमि : </strong> श्रीभूमि जिले के पाथारकांदी क्षेत्र के काजीबाजार‑पलडहर जीपी के बाजारघाट में असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव संबंधी तनाव बढ़ गया। यहाँ आयोजित भाजपा की चुनावी जनसभा के दौरान और उसके बाद हुई हिंसा में भाजपा के पाथारकांदी मंडल के युवा मोर्चा अध्यक्ष शंकर देवनाथ गंभीर रूप से घायल हो गए। हिंसा का सिलसिला में </div>
<div style="text-align:justify;">प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह से ही कांग्रेस के कुछ नेता एवं कार्यकर्ता सभा स्थल के आसपास पार्टी के झंडे फहराने लगे, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा। उस जनसभा में भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु पाल, युवा मोर्चा अध्यक्ष शंकर देवनाथ, एससी मोर्चा राज्याध्यक्ष मुन स्वर्णकार सहित कई भाजपा नेता मौजूद थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सभा के दौरान मंच की ओर कई बार पथराव हुआ, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। सभा समाप्त होने के बाद जब शंकर देवनाथ, रुबेल पाल सहित अन्य नेता प्रचार वाहन से जा रहे थे, तो आरोप है कि कांग्रेस के कुछ बदमाश दंडा, लाठी और शस्त्र लेकर उन पर हमला करने में शामिल हुए। घटना में शंकर देवनाथ, रुबेल पाल सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र और फिर उन्नत चिकित्सा के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल भेजा गया। प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कदम घायल पक्ष ने राताबाड़ी थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">घटना को लोकतांत्रिक माहौल के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया जा रहा है। जिले के काजीबाजार‑पलडहरा जीपी के प्रतिनिधि और अल्पसंख्यक नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस हिंसा की निंदा की। भाजपा प्रतिनिधि का दावा है कि भाजपा के द्वारा किए गए विकास कार्यों से कांग्रेस नेता चकित हुए, और इसी जलन के कारण यह हिंसा हुई। उन्होंने घटना में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी निंदा और पुलिस से कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और इलाके में कानून‑व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। निर्धारित है कि असम विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होंगे, और इसके पूर्व बढ़ते तनाव और ऐसे घटनाक्रमों को चुनावी माहौल के लिए चिंताजनक माना जा रहा है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 20:52:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रामकृष्णनगर में बीजेपी में बड़ा विभाजन, सैकड़ों पुरुष और महिलाएं कांग्रेस में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर क्षेत्र में चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। एक साथ सैकड़ों पुरुष और महिला बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया। इस घटनाक्रम से राजनीतिक हलकों में तेज हलचल मच गई है। गत सोमवार को कांग्रेस उम्मीदवार सुरुचि राय की उपस्थिति में औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हुए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक विजय मालाकार के करीबी कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के तानाशाही तथा अधिनायकवादी रवैये के कारण वे लंबे समय से उपेक्षित महसूस</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174781/big-split-in-bjp-in-ramakrishnanagar-hundreds-of-men-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001403046.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>श्रीभूमि :</strong> श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर क्षेत्र में चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। एक साथ सैकड़ों पुरुष और महिला बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़कर इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया। इस घटनाक्रम से राजनीतिक हलकों में तेज हलचल मच गई है। गत सोमवार को कांग्रेस उम्मीदवार सुरुचि राय की उपस्थिति में औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हुए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक विजय मालाकार के करीबी कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के तानाशाही तथा अधिनायकवादी रवैये के कारण वे लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका कहना है कि कई बार इस मुद्दे को विधायक के संज्ञान में लाया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दलबदल करने वालों के अनुसार, “सत्तारूढ़ दल की इस तानाशाही और अधिनायकवादी कार्यशैली को हम अब और सहन नहीं कर सकते। इसलिए मजबूर होकर हमने यह निर्णय लिया। जहां सामान्य कार्यकर्ताओं और मतदाताओं की कोई अहमियत नहीं है, वहां बने रहने का कोई अर्थ नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में शामिल होने के बाद वे आगामी दिनों में पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में काम करेंगे और आम जनता के हित में संघर्ष जारी रखेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि यह सामूहिक दलबदल रामकृष्णनगर क्षेत्र के दुल्लभछड़ा जीपी के वार्ड नंबर 7, मोकामछड़ा इलाके में हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से हिंदू वोट बैंक में संभावित विभाजन के संकेत मिल रहे हैं, जो चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। दलबदल करने वालों का नेतृत्व राहुल चौहान, रंजीत पाल, मनोज कानू, शिव शंकर ग्वाला, संतोष कानू (गुड्डू), प्रदीप राय, प्रणय नाथ, अनुप नाथ सहित अन्य स्थानीय पुरुष और महिला ने योगदान क्या।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>असम हिमाचल प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पांच राज्यों के चुनाव में कानून व्यवस्था सबसे बड़ी कसौटी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174550/law-and-order-is-the-biggest-criterion-in-the-elections"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img_20260325_1748291.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। पश्चिम बंगाल असम तमिलनाडु केरल और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हैं, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा कानून व्यवस्था को लेकर हो रही है। राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो पाएंगे या नहीं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">सबसे अधिक विवाद और तनाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि राज्य में प्रशासनिक तंत्र निष्पक्ष नहीं है और मतदाताओं को डराने-धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। इन आरोपों के बाद मामला भारत निर्वाचन आयोग तक पहुंच चुका है। यह स्थिति कानून व्यवस्था की दृष्टि से चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि जब सत्तारूढ़ दल पर ही इस प्रकार के आरोप लगते हैं तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दूसरी ओर ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया है। राज्य में पहले भी चुनावों के दौरान हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस बार भी पूरक मतदाता सूची को लेकर असमंजस और लाखों नामों पर विचाराधीन स्थिति ने प्रशासनिक चुनौती को और बढ़ा दिया है। स्पष्ट है कि बंगाल में कानून व्यवस्था चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है और इसे संभालना प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर के राज्य असम में भी स्थिति पूरी तरह शांत नहीं कही जा सकती। यहां कांग्रेस और एआईयूडीएफ कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की घटना सामने आई है, जिसने चुनावी माहौल में तनाव का संकेत दिया है। यह घटना दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कभी-कभी टकराव का रूप ले लेती है। हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ पक्ष लगातार यह दावा कर रहा है कि कानून व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाएं चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">तमिलनाडु में स्थिति अपेक्षाकृत शांत दिखती है, लेकिन यहां भी राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हैं। नामांकन, रैलियां और जनसंपर्क कार्यक्रमों के बीच प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कहीं भी अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बने। विभिन्न दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी जरूर तेज है, परंतु अभी तक बड़े स्तर पर हिंसक घटनाओं की खबर नहीं है। यह राज्य परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण चुनावों के लिए जाना जाता है, लेकिन सतर्कता यहां भी जरूरी है क्योंकि चुनावी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">दक्षिण भारत के ही केरल में चुनावी प्रक्रिया एक अलग ही स्वरूप में नजर आती है। यहां राजनीतिक चेतना उच्च स्तर की मानी जाती है और मतदाता सक्रिय रूप से भागीदारी करते हैं। इस बार भी बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा शुरू की गई है, जो लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि यहां प्रत्यक्ष हिंसा की घटनाएं कम देखने को मिलती हैं, फिर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और वैचारिक टकराव लगातार जारी रहता है। कानून व्यवस्था की दृष्टि से राज्य अपेक्षाकृत संतुलित नजर आता है, लेकिन प्रशासन को पूरी सतर्कता बनाए रखनी होती है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां सीमित दायरे में होती हैं, लेकिन यहां भी राजनीतिक समीकरण काफी जटिल होते हैं। छोटे क्षेत्रफल के बावजूद यहां गठबंधन राजनीति का प्रभाव अधिक है। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है, क्योंकि छोटी घटनाएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। हालांकि अब तक यहां से किसी बड़ी हिंसक घटना की सूचना नहीं है, लेकिन चुनावी माहौल को देखते हुए सावधानी आवश्यक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इन पांचों राज्यों की स्थिति का समग्र विश्लेषण यह बताता है कि जहां एक ओर लोकतंत्र का उत्सव मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है। चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं होते, बल्कि यह जनता के विश्वास और प्रशासन की निष्पक्षता की भी परीक्षा होते हैं। यदि मतदाता भयमुक्त होकर मतदान नहीं कर पाएंगे तो चुनाव का मूल उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">राजनीतिक दलों को भी यह समझना होगा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से अधिक महत्वपूर्ण शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। प्रशासन और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका इस समय सबसे अहम हो जाती है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि इन चुनावों में जीत-हार से अधिक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा है। कानून व्यवस्था की स्थिति ही तय करेगी कि यह चुनाव लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बनेंगे या फिर अव्यवस्था की मिसाल। देश की नजरें इन पांच राज्यों पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होंगे, जिससे लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:43:39 +0530</pubDate>
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