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                <title>Old Pension Scheme - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Old Pension Scheme RSS Feed</description>
                
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                <title>यूपी का चुनावी मैदान: मुकाबला फिर से भाजपा बनाम सपा</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की सियासत का गणित पिछले </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi">  साल से लगभग तय है। यहाँ सत्ता की चाबी हमेशा दो बड़े खेमों के पास रही है। </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi">  का विधानसभा चुनाव भी इसी स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ता दिख रहा है। मैदान में कई दल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर असली सीधी टक्कर भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा के बीच ही होगी। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi">  के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया था। प्रदेश में भाजपा को </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi">  जबकि सपा को </span>37<span lang="hi" xml:lang="hi">  सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। लेकिन यह संभव है कि विधानसभा का चुनावी गणित अलग हो।</span>'</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182451/up-electoral-battle-again-between-bjp-vs-sp"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>राजीव शुक्ल </strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर प्रदेश की सियासत का गणित पिछले </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल से लगभग तय है। यहाँ सत्ता की चाबी हमेशा दो बड़े खेमों के पास रही है। </span>2027<span lang="hi" xml:lang="hi"> का विधानसभा चुनाव भी इसी स्क्रिप्ट पर आगे बढ़ता दिख रहा है। मैदान में कई दल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर असली सीधी टक्कर भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा के बीच ही होगी। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया था। प्रदेश में भाजपा को </span>33<span lang="hi" xml:lang="hi"> जबकि सपा को </span>37<span lang="hi" xml:lang="hi"> सीटों पर विजय प्राप्त हुई थी। लेकिन यह संभव है कि विधानसभा का चुनावी गणित अलग हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में काफी लोकप्रिय हो चुके हैं खासकर अपने कड़े फैसले को लेकर। इसलिए विधानसभा चुनाव के गणित को अलग तरीकों से देखना होगा। भाजपा: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डबल इंजन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रिपल अटैक</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">की तैयारी- भाजपा यूपी में </span>2017<span lang="hi" xml:lang="hi"> और </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। उसका कोर नैरेटिव </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> चीजों पर टिका है: हिंदुत्व + विकास: अयोध्या में राम मंदिर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">काशी विश्वनाथ कॉरिडोर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रयागराज कुंभ को भाजपा अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। साथ में एक्सप्रेसवे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेट्रो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नोएडा फिल्म सिटी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे विकास प्रोजेक्ट फ्रंट पर हैं। लॉ एंड ऑर्डर: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">माफिया राज खत्म</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बुलडोजर मॉडल</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी हथियार बना है। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक इसे कानून-व्यवस्था की गारंटी के रूप में बेचा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र + राज्य का तालमेल: मोदी का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर और योगी का चेहरा राज्य स्तर पर। यह </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">डबल इंजन</span>' 2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में कुछ सीटों पर झटका खाने के बाद भी संगठन के लिए सबसे बड़ा भरोसा है। भाजपा की चुनौती: किसानों की नाराजगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महंगाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और आरक्षण जैसे मुद्दे। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में पिछड़ा-दलित वोट में हुई सेंध को वापस लाना संगठन की प्राथमिकता है। सपा: </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पीडीए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">फॉर्मूले से वापसी की कोशिश- अखिलेश यादव ने </span>2022<span lang="hi" xml:lang="hi"> के बाद अपनी राजनीति को पूरी तरह रीसेट किया। सपा अब </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">एम-वाई समीकरण</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से आगे बढ़कर </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">पीडीए</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी पिछड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दलित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अल्पसंख्यक के फॉर्मूले पर खेल रही है। सोशल इंजीनियरिंग: भाजपा के </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">नॉन-यादव </span>OBC + <span lang="hi" xml:lang="hi">नॉन-जाटव दलित</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">मॉडल को काटने के लिए सपा ने कुर्मी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निषाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जाटव के अलावा मुस्लिम वोट को एकजुट करने की कोशिश की। </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोकसभा में इसका असर दिखा भी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और महंगाई: पेपर लीक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अग्निवीर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी और महंगाई को सपा मुख्य मुद्दा बना रही है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">बेरोजगारी भत्ता</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और पुरानी पेंशन बहाली जैसे वादे इसी दिशा में हैं। अखिलेश का सॉफ्ट हिंदुत्व: मंदिर जाने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कावड़ यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और समाजवादी पीडीए पंचायत से सपा उस </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">तुष्टीकरण</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">के टैग को तोड़ने की कोशिश कर रही है जो उसे पहले घेरता था। सपा की चुनौती: संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवारवाद के आरोप से बचाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मुस्लिम+यादव के बाहर दूसरे पिछड़ों को स्थायी तौर पर जोड़ना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बाकी दल कहाँ हैं</span>? - <span lang="hi" xml:lang="hi">बसपा: मायावती अभी भी दलित वोट की सबसे बड़ी ध्रुव हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर </span>2022 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">में उनका वोट बैंक खिसका। अगर वो अकेले लड़ती हैं तो वो भाजपा या सपा में से एक का नुकसान करेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर खुद सत्ता की रेस से बाहर दिख रही हैं। कांग्रेस: राहुल-प्रियंका के यूपी फोकस के बाद भी संगठन जमीन पर कमजोर है। वो कुछ सीटों पर सपा को फायदा या नुकसान दे सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर मुख्य मुकाबला नहीं। </span>RLD + <span lang="hi" xml:lang="hi">अन्य: जयंत चौधरी </span>NDA <span lang="hi" xml:lang="hi">में हैं। निषाद पार्टी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपना दल भाजपा के साथ। ओम प्रकाश राजभर भी भाजपा के साथ। ये सब वोट कटवा या वोट ट्रांसफर का काम करेंगे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर फ्रेम भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा ही रहेगा। तो फैसला क्या होगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी में चुनाव हमेशा जाति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धर्म</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विकास और कानून-व्यवस्था के मिश्रण से तय होता है। </span>2027 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भी फ्रेम यही रहेगा। भाजपा का दांव: हिंदुत्व + विकास + लॉ एंड ऑर्डर + मोदी-योगी का डबल चेहरा। सपा का दांव : पीडीए एकता + बेरोजगारी-महंगाई + </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">की मोमेंटम। बसपा का वोट जिस तरफ शिफ्ट हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और ब्राह्मण-ठाकुर-बनिया </span>vs OBC-<span lang="hi" xml:lang="hi">दलित-मुस्लिम का ध्रुवीकरण जिस हद तक हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी पर सीटों का गणित बनेगा। जमीन पर चाहे जितने दल पोस्टर लगाएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वोटर के दिमाग में लड़ाई दो ही खेमों के बीच है। एक तरफ योगी-मोदी की भाजपा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ अखिलेश की सपा। यूपी </span>2027 = <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा </span>vs <span lang="hi" xml:lang="hi">सपा। बाकी सब असर डालने वाले खिलाड़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मुख्य खिलाड़ी ये दो ही हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 19:40:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रेल कर्मचारी एक अप्रैल को काला दिवस मनाएंगे - मनोज पांडे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> न्यू पेन्शन स्कीम (एन पी एस ) के विरोध में इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन(IREF) ने एक अप्रैल को भारतीय रेलवे के सभी जोनो एवं उत्पादन इकाइयों में काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है | उक्त जानकारी देते हुए इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन के महामंत्री मनोज पाण्डेय ने बताया की फेडरेशन की कोर कमेटी ने इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नर सिंह कुमार की अध्यक्षता सपन्न हुई वर्चुअल मीटिंग में नेशनल मूवमेंट फार ओल्ड पेन्शन स्कीम (NMOPS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु से विचार-विमर्श करने के बाद एक अप्रैल को काला दिवस मनाने का निर्णय</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174493/railway-employees-will-celebrate-black-day-on-april-1"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260328-wa0105.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज-</strong> न्यू पेन्शन स्कीम (एन पी एस ) के विरोध में इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन(IREF) ने एक अप्रैल को भारतीय रेलवे के सभी जोनो एवं उत्पादन इकाइयों में काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है | उक्त जानकारी देते हुए इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन के महामंत्री मनोज पाण्डेय ने बताया की फेडरेशन की कोर कमेटी ने इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नर सिंह कुमार की अध्यक्षता सपन्न हुई वर्चुअल मीटिंग में नेशनल मूवमेंट फार ओल्ड पेन्शन स्कीम (NMOPS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु से विचार-विमर्श करने के बाद एक अप्रैल को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है |     </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेल कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थल पर ही काला फीता बांध कर  NPS/UPS गो बैक पुरानी पेन्शन बहाल करो, निजीकरण भारत छोडो का नारा लगा कर अपना विरोध दर्ज कराते हुए काला दिवस मनाएंगे | रेल कर्मचारियों की पत्निया एवं बच्चे  भी एन पी एस/यू पी एस वापस जाओ पुरानी पेन्शन बहाल करो के नारे को बुलन्द कर अपना विरोध दर्ज कराएँगे | इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन एवं नार्थ सेन्ट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के महामंत्री कामरेड मनोज पाण्डेय ने कहा कि पुरानी पेन्शन कर्मचारियों के बुढ़ापे की लाठी है कर्मचारियों के उज्जवल भविष्य का आधार है हक़ है हमारा हम इसे लेके रहेंगे चाहे इसके लिए किसी भी हद तक जाना पड़े|</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कामरेड ने कहा कि नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेन्शन स्कीम (NMOPS ), इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन (IREF )एवं फ्रन्ट अगेंस्ट एन पी एस इन रेलवे (FANPSR )के नेतृत्व में देश के सभी कर्मचारी एक साथ मिलकर पुरानी पेन्शन की माँग कर रहे है और अब एकजूट होकर राष्ट्र व्यापी आन्दोलन करने को तैयार है | फेडरेशन की कोर कमेटी के वर्चअल मीटिंग में कामरेड नर सिंह कुमार, कामरेड मनोज पाण्डेय , कामरेड राजेन्द्र प्रसाद पाल , कामरेड कमल उसरी, कामरेड पुष्पेंद्र त्रिपाठी, कामरेड संदीप तिवारी , कामरेड रमेश सिंह , कामरेड संजय तिवारी ,कामरेड नीलमपाण्डेय , कामरेड सुधा देवी आदि ने अपने विचार व्यक्त किया |.    </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 21:23:50 +0530</pubDate>
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