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                <title>भक्ति - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>भक्ति RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भागवत कथा सुनने से होती है पुण्य फल की प्राप्ति : आचार्य उमेश पचौरी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>टूण्डला-   </strong>   नगर के सारस्वत इंक्लेव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिकता के रस का आनंद लिया। कथा व्यास आचार्य उमेश पचौरी ने अपने श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया,जिसे सुनकर उपस्थित भक्तगण भावविभोर हो गए।कथा के दौरान आचार्य उमेश पचौरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को पुण्य फल की प्राप्ति होती है तथा उसके पाप कर्मों का नाश होता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा व्यक्ति को धर्म भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं</div>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181916/by-listening-to-bhagwat-katha-one-gets-virtuous-results-acharya"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1004145179.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>टूण्डला-   </strong>  नगर के सारस्वत इंक्लेव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिकता के रस का आनंद लिया। कथा व्यास आचार्य उमेश पचौरी ने अपने श्रीमुख से भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया,जिसे सुनकर उपस्थित भक्तगण भावविभोर हो गए।कथा के दौरान आचार्य उमेश पचौरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मनुष्य को पुण्य फल की प्राप्ति होती है तथा उसके पाप कर्मों का नाश होता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा व्यक्ति को धर्म भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। इस दौरान कथा आयोजकों ने कथा सुनने आने वाले भक्तजनों का माला व पट्टिका पहनाकर स्वागत किया। वही भक्तजनों ने फूल मालाओं से आचार्य श्री उमेश पचौरी जी शास्त्री का फूल मालाओं से सम्मान किया।इस अवसर पर परीक्षित अशोक पचौरी एवं रेनू पचौरी यज्ञपति राजू उपाध्याय एवं शकुंतला उपाध्याय,आर एल गौतम, आर पी शर्मा, पत्रकार सोमेंद्र पोनिया, विवेक शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालु भगवान के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 15:30:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सनातनी सत्य और आध्यात्मिक विचारधारा। </title>
                                    <description><![CDATA[<div class="nH">
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<h2 class="hP"><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">भारतवर्ष सदैव आध्यात्मिक और वैदिक भारत के रूप में संपूर्ण विश्व में जाना जाता है और अध्यात्म से जुड़े हुए हमारे ऐतिहासिक महापुरुषों के कारण भारत सदैव आदर की दृष्टि से देखा जाता रहा है। अध्यात्म और नैतिक शिक्षा भारत के लिए एक बहुत बड़ी पूंजी तथा संपत्ति है, जो हमें विरासत में प्राप्त हुई है। आध्यात्मिकता के दम पर ही भारत ने विश्व में वैदिक शास्त्र, अध्यात्म का परचम लहराया है। वैदिक दर्शन और अध्यात्म दर्शन भारतीयता का ऐतिहासिक परिचायक है। आध्यात्मिक शक्ति एवं वैदिक ऊर्जा के कारण भारत के महापुरुष सदैव सच्चरित्र और ब्रह्मचर्य का पालन करते आए</span></h2></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138286/sanatani-truth-and-spiritual-ideology"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-01/भक्ति-की-लहर-का-प्रादुर्भाव।.jpeg" alt=""></a><br /><div class="nH">
<div class="V8djrc byY">
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<div class="ha">
<h2 class="hP"><span style="font-family:'-apple-system', BlinkMacSystemFont, 'Segoe UI', Roboto, 'Helvetica Neue', Arial, 'Noto Sans', sans-serif, 'Apple Color Emoji', 'Segoe UI Emoji', 'Segoe UI Symbol', 'Noto Color Emoji';font-size:14px;">भारतवर्ष सदैव आध्यात्मिक और वैदिक भारत के रूप में संपूर्ण विश्व में जाना जाता है और अध्यात्म से जुड़े हुए हमारे ऐतिहासिक महापुरुषों के कारण भारत सदैव आदर की दृष्टि से देखा जाता रहा है। अध्यात्म और नैतिक शिक्षा भारत के लिए एक बहुत बड़ी पूंजी तथा संपत्ति है, जो हमें विरासत में प्राप्त हुई है। आध्यात्मिकता के दम पर ही भारत ने विश्व में वैदिक शास्त्र, अध्यात्म का परचम लहराया है। वैदिक दर्शन और अध्यात्म दर्शन भारतीयता का ऐतिहासिक परिचायक है। आध्यात्मिक शक्ति एवं वैदिक ऊर्जा के कारण भारत के महापुरुष सदैव सच्चरित्र और ब्रह्मचर्य का पालन करते आए हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने भी सत चरित्र को अपने जीवन का अंग बना कर अनेक वैदिक ग्रंथों की रचना भी की है जो प्रत्येक भारतीय जनमानस के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ बन गए हैं। रामकृष्ण परमहंस, मां शारदा, विवेकानंद, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं अनेक ऐसे विद्वान हैं जिन्होंने सत्चरित्र और अध्यात्म के दम पर भारत को विश्व में सर्वोच्च मुकाम भी दिलाया है। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने कहा है की सच्चरित्र केवल एक व्यक्ति का ना होकर संपूर्ण राष्ट्र का होना चाहिए। अनेक यूरोपीय विद्वानों ने और भारतीय अध्यात्म के मनीषियों ने सत और चरित्र को अपने जीवन में आत्मसात करने के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए और दोनों को मिलाकर सत्चरित्र शब्द को बड़े विस्तार से समझाया है। अध्यात्म और योग शक्ति ही मनुष्य को सच्चरित्र बनाने में हमेशा मददगार रही है क्योंकि अध्यात्म से व्यक्ति की एकाग्रता तथा ज्ञान में वृद्धि होकर मन ईश्वर के प्रति श्रद्धानवत होता है और ईश्वर के प्रति जो व्यक्ति अगाध श्रद्धा रखता है वह सदैव अपने चरित्र के प्रति विशेष सावधान रहकर सच्चरित्र व्यक्तित्व ही बनाता है।</span></h2>
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<div>यह कहावत एकदम सत्य प्रतीत होती है की "सद्गुण है सच्ची संपत्ति दुर्गुण बड़ी विपत्ति" यह तो निश्चित है की सदाचारी परोपकारी संयमशील, इमानदार ,निष्ठावान नागरिक सच्चरित्र होकर एक महान राष्ट्र को जन्म देता है । वहीं दुष्ट चरित्र व्यक्ति काम, क्रोध, कामना और लालच में पड़कर अपनी जिंदगी को नर्क बना कर दिया सदैव अशांत रहता है, अशांत नागरिक किसी भी कार्य में स्थिरता अथवा प्रगति प्रदान नहीं कर सकता है, वह अपने समाज तथा देश को कमजोर करने का ही कार्य करता है। धन और संपत्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण चरित्र को बलवान बनाने वाली आध्यात्मिक शिक्षा ही है।</div>
<div> </div>
<div>धन-संपत्ति नष्ट होने पर किसी भी व्यक्ति का बड़ा नुकसान नहीं होता पर यदि चरित्र चला जाए तो उसका सम्मान यश तथा सामाजिक स्थिति एकदम निकृष्ट बन जाती है उसका समाज में अपमान होने लगता है, ऐसे में कोई भी व्यक्ति या नागरिक समाज में सिर उठाकर नहीं चल सकता ।ऐसा व्यक्ति समाज के उत्थान में कोई योगदान देने के काबिल नहीं रह जाता। इसलिए मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी एवं महत्वपूर्ण आवश्यकता आध्यात्मिक शिक्षा एवं चरित्रवान जीवन है। सुभाष चंद्र बोस,महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, सरोजनी नायडू और अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में सच्चरित्र जीवन और मानसिक आध्यात्मिक शक्ति एवं ऊर्जा के कारण ही स्वतंत्रता संग्राम में पराधीन भारत को स्वतंत्रता दिलवाई थी। किसी भी देश के नागरिक को एक दिन में सच्चरित्र नहीं बनाया जा सकता बल्कि बालकों को बाल्यकाल से ही नैतिक शिक्षा से शिक्षित किया जाकर सदाचार का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। यह सर्वविदित है कि मनुष्य के चरित्र और व्यक्तित्व पर देश परिस्थितियां शिक्षा और समाजिक व्यवहार का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है और नैतिकता सदाचार का पाठ किसी भी व्यक्ति को एक दिन में नहीं पढ़ाया जा सकता है।</div>
<div> </div>
<div>दुष्ट चरित्र पुरुष समाज में कभी भी प्रसिद्धि प्राप्त नहीं कर सकता सदैव अपनी बदनामी के कारण सिर झुका कर छुप कर घूमता है, इसीलिए भारतीय चिंतकों, मनीषियों ने लिखा और कहा है की चरित्र सदाचार की रक्षा मनुष्य को संपूर्ण प्रयास कर निरंतर करते रहना चाहिए। क्योंकि नागरिकों का नैतिक और सदाचारी स्वभाव और व्यवहार राष्ट्रीय संपत्ति होता है और यही संपत्ति राष्ट्र को एक सशक्त राष्ट्र और उत्कृष्ट देश बनाने में सदैव सहायक होता है। आध्यात्मिक शिक्षा सदाचार सद्गुण और चरित्र यह मनुष्य के बहुत ही महत्वपूर्ण आंतरिक तत्व हैं और इसी से मनुष्य का सकारात्मक व्यक्तित्व निर्मित होकर महान राष्ट्र की पृष्ठभूमि को अवलंबित करता है। देश का सद्गुणी सदाचारी सच्चरित्र व्यक्ति है देश को विकास की ओर सदैव ले जा सकता है एवं एक सशक्त राष्ट्र भी बनाने में मदद करता है। इसलिए अध्यात्म चरित्र तथा नैतिक शिक्षा को किसी भी राष्ट्र में प्राथमिकता देकर पुष्पित और पल्लवित किया जाना चाहिए।</div>
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                                                            <category>विचारधारा</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jan 2024 15:23:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हल्की फुल्की बारिश के साथ निकली भगवान की भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा झूमे भक्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अरविंद त्रिपाठी।</strong></p>
<p><strong>शाहजहांपुर</strong></p>
<p>उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ यात्रा कल शाहजहांपुर में भी संपन्न हुई। शहर के विभिन्न मार्गो से भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई । इस यात्रा से पूर्व बाबा बनखंडी नाथ मंदिर में हरी नाम संकीर्तन भी संपन्न हुआ जिसमें तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा समिति की ओर से हरिनाम संकीर्तन एवं रथ यात्रा का आयोजन किया गया ।</p>
<p>रथ यात्रा का शुभारंभ बाबा बनखंडी नाथ मंदिर पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलवंत भैया की पूजा अर्चना के साथ प्रारंभ हुआ। यात्रा में वृंदावन से पधारी श्री</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/131069/lord-jagannaths-grand-jagannath-rath-yatra-started-with-light-rain"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/img-20230622-wa0075.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अरविंद त्रिपाठी।</strong></p>
<p><strong>शाहजहांपुर</strong></p>
<p>उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ यात्रा कल शाहजहांपुर में भी संपन्न हुई। शहर के विभिन्न मार्गो से भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई । इस यात्रा से पूर्व बाबा बनखंडी नाथ मंदिर में हरी नाम संकीर्तन भी संपन्न हुआ जिसमें तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे। भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा समिति की ओर से हरिनाम संकीर्तन एवं रथ यात्रा का आयोजन किया गया ।</p>
<p>रथ यात्रा का शुभारंभ बाबा बनखंडी नाथ मंदिर पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलवंत भैया की पूजा अर्चना के साथ प्रारंभ हुआ। यात्रा में वृंदावन से पधारी श्री कृष्ण रातिदासी के नेतृत्व में भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली गई जोकि बनखंडी नाथ मंदिर से शुरू होकर शहर के कच्चा कटरा,मालखाना मोड, चौक चौराहा होते हुए रंगमहला से केरूगंज होकर हनुमत धाम रोड स्थित द्वारकाधीश मठिया मंदिर में पहुंची । </p>
<p>रथ यात्रा में भक्तों पर जगह-जगह चौराहों पर पुष्प वर्षा की गई साथ ही साथ रंगमहला में स्थित हिंदू सत्संग भवन के पुजारी जी ने भगवान जगन्नाथ रथ के पास जाकर भगवान का तिलक वंदन किया व आरती उतारी।</p>
<p>यात्रा में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ का रथ मिलकर खींचा एवं रथ को खींचने के लिए भक्तों की होड़ सी लगी रही। जिस मार्ग से रथयात्रा निकली उस पर आगे गाड़ी से पानी का छिड़काव किया जा रहा था और कुछ श्रद्धालु सड़क पर झाड़ू लगाते हुए भी चल रहे थे । यात्रा का उद्देश्य था कि भक्त अधिक से अधिक जगन्नाथ रथ यात्रा में जुड़े व आंनद लें।</p>
<p>इसके साथ ही रथ यात्रा के दौरान भजन कीर्तन भी किया जा रहा था। श्री द्वारिकाधीश मठिया पर रथ यात्रा समापन के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया । रथ यात्रा में प्रमुख रूप से समिति के संरक्षक रामगोपाल ,,सुरेश सिंघल ,रामचंद्र सिंघल,राकेश अग्रवाल ,मुकुल अग्रवाल ,मीनू गुप्ता, सौम्या, सुरूचि, कंचन,अंकुर आदि अनेक उपस्थित रहे।।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 19:06:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Reporters]]></dc:creator>
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