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                <title>बच्चों की सुरक्षा - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>बच्चों की सुरक्षा RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक माह बीतने के बाद भी बीईओ ने सन राइज स्कूल के खिलाफ नहीं की कोई कार्यवाही</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।बस्ती सदर / </strong>नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने एक माह से अधिक का समय बीतने के बाद भी सन राइज स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की है बल्कि कारण बताओ नोटिस जारी करके कार्यवाही न करने का आश्वासन देकर सन राइज स्कूल से मोटी रकम की वसूली की है और जांच पड़ताल के नाम पर पूर्ण रूप से लीपापोती कर दिया है ।</div>
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<div style="text-align:justify;">खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी द्वारा लगातार मीडिया टीम को आश्वासन दिया जा रहा था कि सन राइज स्कूल के लापरवाही की निष्पक्ष जांच होगी और कार्यवाही भी निश्चित रूप से</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178976/even-after-a-month-beo-did-not-take-any-action"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260511-wa0025-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती।बस्ती सदर / </strong>नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने एक माह से अधिक का समय बीतने के बाद भी सन राइज स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की है बल्कि कारण बताओ नोटिस जारी करके कार्यवाही न करने का आश्वासन देकर सन राइज स्कूल से मोटी रकम की वसूली की है और जांच पड़ताल के नाम पर पूर्ण रूप से लीपापोती कर दिया है ।</div>
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<div style="text-align:justify;">खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी द्वारा लगातार मीडिया टीम को आश्वासन दिया जा रहा था कि सन राइज स्कूल के लापरवाही की निष्पक्ष जांच होगी और कार्यवाही भी निश्चित रूप से होगी लेकिन ऐसा क्या एक महीने के अन्दर बीईओ विनोद कुमार त्रिपाठी और सन राइज स्कूल के बीच सेटिंग हो गई कि सन राइज स्कूल के खिलाफ शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्यवाही के नाम पर पूर्ण रूप से लीपापोती की गई । अब आप सोच सकते हैं कि सन राइज स्कूल की लापरवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था और वायरल वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि सन राइज स्कूल के द्वारा *मौत के साये में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम* कराया गया था फिर भी बीईओ ने जांच के नाम पर खेला कर दिया यदि ऐसे ही शिक्षा विभाग द्वारा लापरवाह खण्ड शिक्षा अधिकारियों को जांच सौंपी जायेगी तो शिक्षा विभाग की साख पूरी तरह कमजोर हो जायेगी और आमजन मानस का शिक्षा विभाग के अधिकारियों से विश्वास खत्म हो जायेगा ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">        आपको बता दें कि नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी के द्वारा सन राइज स्कूल को वार्षिकोत्सव के एक सप्ताह पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और नोटिस का जबाव निर्धारित समय सीमा में सन राइज स्कूल द्वारा खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी को नही दिया गया था । निर्धारित समय के अन्दर जारी नोटिस का जबाव न देने पर खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने नाराज़गी जताई थी और पुनः सन राइज स्कूल को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">           सन राइज स्कूल रेलवे स्टेशन रोड पर सुशील हीरो एजेन्सी के निकट स्थित है सन राइज स्कूल पर बीते 02 अप्रैल 2026 को वार्षिकोत्सव कार्यक्रम आयोजित हुआ था सन राइज स्कूल पर अव्यवस्थाओं के बीच वार्षिकोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न हुआ था वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बच्चों और अभिभावकों ने जान जोखिम में डालकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे थे । निर्माणाधीन मकान के बीच में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम हुआ था प्रधानाचार्य डा० फैजल अख्तर ने लोहे की पाइप व बांस की बल्ली के बीच वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में जाने के लिए रास्ता बनाया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> सन राइज स्कूल में फैली हुई गन्दगी और अव्यवस्थाओं को लेकर अभिभावकों ने नाराज़गी जताई थी । सन राइज स्कूल का निर्माण कार्य चल रहा है वार्षिकोत्सव समारोह के दौरान तीन मंजिला मकान कार्य में नीचे से लेकर ऊपर तक लोहे की पाइप और बांस की बल्ली बंधी हुई थी और नीचे चारों तरफ भी ईंट , गिट्टी , मोरंग , बालू बिखरा हुआ था। नीचे से लेकर ऊपर 03 मंजिला मकान तक लोहे के पाइप व बांस की बल्ली बंधी हुई थी । अभिभावकों ने सन राइज स्कूल में फैले अव्यवस्था को लेकर प्रशासन से जांच कर कार्यवाही की मांग की थी । </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     नाम न छापने की शर्त पर कुछ अभिभावकों ने कहा था कि छोटे - छोटे बच्चें लोहे की पाइप व बांस की बल्ली के बीच से दौड़ते हुए आ जा रहे थे यदि कहीं किसी लोहे की पाइप व बांस से टकरा गये तो 03 मंजिला मकान में लगा लोहे की पाइप व बांस की बल्ली कभी भी गिर सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था लेकिन भगवान की दया से कोई वार्षिकोत्सव समारोह में कोई अप्रिय घटना घटित नही हुई थी । बच्चों और अभिभावकों के जिन्दगी से खिलवाड़ करने वाले सन राइज स्कूल पर कार्रवाई की मांग की गई थी ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     सन राइज स्कूल के प्रबंधक व प्रधानाचार्य ने भीड़ बढ़ाने के लिए व बस्ती वासियों को गुमराह करने के लिए अनुराग मिश्रा लखनऊ जादूगर को वार्षिकोत्सव समारोह में बुलाया था । सन राइज स्कूल में वार्षिकोत्सव कार्यक्रम कम हुआ था लेकिन जादूगरी ज्यादा हुआ था जिसको लेकर जिले में चर्चा में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही थी कि सन राइज स्कूल में वार्षिकोत्सव समारोह में बच्चों का कार्यक्रम कम क्यों हुआ अर्थात् या तो स्कूल बच्चें स्कूल में कम है या सन राइज स्कूल में पढ़ने वाले छात्र - छात्राएं योग्य नहीं थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया पड़ताल में सन राइज स्कूल के कारनामों की पोल खुल गई थी और अपने कारनामों को छुपाने के लिए सन राइज स्कूल ने उच्च अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया था लेकिन नगर क्षेत्र खण्ड शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार त्रिपाठी ने सन राइज स्कूल के लापरवाही मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए तत्काल नोटिस जारी कर दिया था । निर्धारित समय सीमा में नोटिस का जबाव सन्तोष जनक न मिलने पर सन राइज स्कूल के कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उक्त प्रकरण में खण्ड शिक्षा अधिकारी ने फोन के माध्यम से बताया कि सन राइज स्कूल द्वारा अभी तक पूर्व में जारी नोटिस का जबाव नहीं दिया गया है पुनः नोटिस जारी की जा रही है । सन राइज स्कूल के द्वारा जारी नोटिस का जबाव देने के बाद ही अग्रिम कार्यवाही की जायेगी लेकिन एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद सन राइज स्कूल के खिलाफ कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है ।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 19:54:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चिकित्सकों ने कहा - हीट स्ट्रोक के लिए बचाव ही सुरक्षा है, बेवजह धूप में निकलने से बचें </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा द्वारा आज “हीट स्ट्रोक (लू) से बचाव” के विषय पर एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता का आयोजन आईएमए भवन कानपुर में किया गया। इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आमजन को बढ़ती गर्मी के खतरों और उससे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता में चिकित्सकों ने बताया कि भीषण गर्मी में सतर्क रहें, हीट स्ट्रोक से बचाव ही जीवन रक्षक। विशेषज्ञों ने बताया कि हीट स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक हो जाता है और शरीर की ताप नियंत्रित</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177393/doctors-said-prevention-is-the-only-safety-for-heat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001864693.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा द्वारा आज “हीट स्ट्रोक (लू) से बचाव” के विषय पर एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता का आयोजन आईएमए भवन कानपुर में किया गया। इस अवसर पर शहर के वरिष्ठ एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आमजन को बढ़ती गर्मी के खतरों और उससे बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रेस वार्ता में चिकित्सकों ने बताया कि भीषण गर्मी में सतर्क रहें, हीट स्ट्रोक से बचाव ही जीवन रक्षक। विशेषज्ञों ने बताया कि हीट स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सीय आपात स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक हो जाता है और शरीर की ताप नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है। तेज बुखार एवं शरीर का अत्यधिक गर्म होना, सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, उल्टी या मतली, पसीना कम आना या बंद हो जाना, त्वचा का लाल, सूखा और गर्म होना, भ्रम, बेहोशी या दौरे हीट स्ट्रोक के लक्षण हैं, विशेषज्ञों ने बताया कि बुजुर्ग एवं छोटे बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाहर काम करने वाले लोग (मजदूर, ट्रैफिक पुलिस आदि) हृदय, किडनी या अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज डिहाइड्रेशन से पीड़ित व्यक्ति के लिए “लापरवाही जानलेवा हो सकती है” चिकित्सकों ने चेताया कि हीट स्ट्रोक को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। समय पर पहचान और तत्काल उपचार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, ORS, नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन करेंधूप में निकलते समय सिर को ढकें (टोपी/गमछा/छाता) लेकर चलें, हल्के, ढीले एवं सूती कपड़े पहनें, दोपहर 12 से 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।</div>
<div style="text-align:justify;">   </div>
<div style="text-align:justify;"> इस पत्रकार वार्ता को आईएमए कानपुर अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, डॉ. शालिनी मोहन सचिव आईएमए कानपुर, डॉ. डी.पी. अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन, डॉ. ए. सी. अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन, डॉ. पुनीत दीक्षित बरिष्ठ न्यूरोलोगिस्ट, डॉ आलोक वर्मा, न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ आशुतोष त्रिवेदी, फिजिशियन, डॉ राहुल कपूर, फिजिशियन, डॉ विशाल सिंह, वित्त सचिव, डॉ. दीपक श्रीवास्तव वैज्ञानिक सचिव तथा अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>स्वास्थ्य-आरोग्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:35:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाल तस्करी पर कठोरतम कानून की आवश्यकता: मासूम बचपन की सुरक्षा के लिए आजीवन कारावास तक का प्रावधान अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार सामने आ रही बाल तस्करी की घटनाएँ समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चेतावनी बन चुकी हैं। हाल ही में पटना-पुणे एक्सप्रेस से बिहार के अररिया जिले के 163 बच्चों को महाराष्ट्र के लातूर ले जाए जाने के दौरान कटनी रेलवे स्टेशन पर उतारा जाना इसी चिंता का एक बड़ा उदाहरण है। इन बच्चों को लेकर जा रहे आठ लोगों के विरुद्ध मानव तस्करी का मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">आरोपितों का दावा था कि वे बच्चों को उनके अभिभावकों की सहमति से मदरसों में शिक्षा के लिए ले जा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175981/there-is-a-need-for-strictest-law-on-child-trafficking"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/child-trafficking.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">देश के विभिन्न हिस्सों से लगातार सामने आ रही बाल तस्करी की घटनाएँ समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चेतावनी बन चुकी हैं। हाल ही में पटना-पुणे एक्सप्रेस से बिहार के अररिया जिले के 163 बच्चों को महाराष्ट्र के लातूर ले जाए जाने के दौरान कटनी रेलवे स्टेशन पर उतारा जाना इसी चिंता का एक बड़ा उदाहरण है। इन बच्चों को लेकर जा रहे आठ लोगों के विरुद्ध मानव तस्करी का मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आरोपितों का दावा था कि वे बच्चों को उनके अभिभावकों की सहमति से मदरसों में शिक्षा के लिए ले जा रहे थे, किंतु जिस प्रकार इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को एक साथ दूरस्थ स्थानों पर ले जाया जा रहा था, उसने प्रशासन को संदेह करने के लिए विवश कर दिया। यह घटना केवल एक मामला नहीं है, बल्कि उस गहरी समस्या का संकेत है, जो देश के कई हिस्सों में वर्षों से पनप रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाल तस्करी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता के विरुद्ध घोर अन्याय है। इसमें मासूम बच्चों को उनके परिवारों से दूर ले जाकर उन्हें शिक्षा, रोजगार या बेहतर जीवन के नाम पर धोखे से फंसाया जाता है और फिर उन्हें शोषण, बंधुआ मजदूरी, यौन उत्पीड़न या अवैध गतिविधियों में धकेल दिया जाता है। यह समस्या विशेष रूप से गरीब और पिछड़े क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलती है, जहाँ आर्थिक तंगी और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से अपने जाल में बच्चों को फंसा लेते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक दिखाई देती है। वर्ष 2021 में देशभर में बाल तस्करी के लगभग 2200 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर करीब 2500 के आसपास पहुँच गई। वर्ष 2023 में भी यह आंकड़ा लगभग 2400 मामलों के आसपास रहा, जबकि वर्ष 2024 में इसमें फिर वृद्धि दर्ज की गई और लगभग 2600 मामले सामने आए। वर्ष 2025 में यह संख्या 2800 के करीब पहुँच गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तमाम प्रयासों के बावजूद बाल तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन वर्षों में कई बड़े मामले भी सामने आए हैं, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में बच्चों को पड़ोसी देशों में तस्करी कर ले जाने के कई मामले सामने आए। बिहार और झारखंड से बच्चों को दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में घरेलू काम या फैक्टरियों में काम दिलाने के नाम पर ले जाकर शोषण किया गया। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में बच्चों को भीख मंगवाने और अवैध कार्यों में लगाने के मामले उजागर हुए। तमिलनाडु और कर्नाटक में ईंट भट्टों और उद्योगों में बाल मजदूरी के लिए बच्चों को दूर-दराज के राज्यों से लाए जाने की घटनाएँ सामने आईं। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी कई बार ऐसे गिरोह पकड़े गए, जो बच्चों को अपहरण कर उन्हें अवैध गतिविधियों में धकेलते थे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि बाल तस्करी का नेटवर्क बहुत व्यापक और संगठित है। यह केवल एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में फैला हुआ है। इसमें कई स्तरों पर लोग शामिल होते हैं, जो बच्चों को ढूंढने, उन्हें बहलाने, परिवहन करने और फिर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर बेचने का काम करते हैं। इस पूरे नेटवर्क को तोड़ना तभी संभव है, जब कानून अत्यंत कठोर हो और उसका सख्ती से पालन किया जाए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वर्तमान में बाल तस्करी के विरुद्ध कानून मौजूद हैं, किंतु उनकी सजा और कार्यान्वयन की प्रक्रिया इतनी प्रभावी नहीं है कि अपराधियों में भय उत्पन्न हो सके। कई मामलों में दोषियों को लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया का लाभ मिल जाता है और सजा भी अपेक्षाकृत कम होती है। यही कारण है कि ऐसे अपराधी बार-बार इस तरह के अपराध करने का साहस जुटा लेते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस स्थिति को देखते हुए अब समय आ गया है कि बाल तस्करी के विरुद्ध अत्यंत कठोर और स्पष्ट कानून बनाया जाए। ऐसे कानून में यह प्रावधान होना चाहिए कि यदि कोई व्यक्ति बाल तस्करी में दोषी पाया जाता है, तो उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाए। साथ ही, ऐसे अपराधों को गैर-जमानती और गंभीर श्रेणी में रखा जाए, ताकि आरोपितों को आसानी से जमानत न मिल सके। इसके अतिरिक्त, ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों का गठन किया जाना चाहिए, ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके और पीड़ित बच्चों को शीघ्र न्याय मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक तंत्र को भी मजबूत करना होगा। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए। पुलिस और बाल संरक्षण एजेंसियों को आपस में बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करना भी अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे ऐसे संदिग्ध मामलों की जानकारी तुरंत प्रशासन को दे सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा और सामाजिक जागरूकता भी इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि अभिभावकों को यह समझाया जाए कि वे अपने बच्चों को अजनबियों के साथ न भेजें और किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले उसकी पूरी जांच करें, तो कई मामलों को रोका जा सकता है। स्कूलों और पंचायत स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, जिससे लोग इस अपराध की गंभीरता को समझ सकें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कटनी रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए 163 बच्चों का मामला यह दर्शाता है कि यदि प्रशासन सतर्क हो, तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है। इन बच्चों को समय रहते बचा लिया गया, जो एक सकारात्मक पहलू है, किंतु यह भी जरूरी है कि इस घटना से सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह समझना होगा कि बच्चे किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं। उनका बचपन सुरक्षित और संरक्षित रहना ही एक विकसित और संवेदनशील समाज की पहचान है। यदि हम अपने बच्चों को तस्करों के हाथों में जाने से नहीं रोक पाए, तो यह केवल कानून और व्यवस्था की विफलता नहीं होगी, बल्कि समाज के रूप में हमारी असफलता भी मानी जाएगी। इसलिए अब समय आ गया है कि बाल तस्करी के विरुद्ध जीरो सहनशीलता की नीति अपनाई जाए और ऐसे अपराधियों के लिए आजीवन कारावास जैसी कठोर सजा का प्रावधान कर उन्हें समाज से हमेशा के लिए अलग कर दिया जाए। तभी हम अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की कल्पना कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 19:31:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बाल तस्करी पर सख्ती जरूरी न्याय और जिम्मेदारी का समय</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में बच्चों की सुरक्षा केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य भी है। हाल ही में सुप्रीम करतबने बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यों को सख्त और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह निगरानी कर सकती है लेकिन वास्तविक कार्रवाई का दायित्व राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र पर ही है। यह टिप्पणी केवल एक कानूनी बयान नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175699/strictness-on-child-trafficking-is-necessary-time-for-justice-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/child-trafficking.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में बच्चों की सुरक्षा केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य भी है। हाल ही में सुप्रीम करतबने बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यों को सख्त और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि वह निगरानी कर सकती है लेकिन वास्तविक कार्रवाई का दायित्व राज्य सरकारों और प्रशासनिक तंत्र पर ही है। यह टिप्पणी केवल एक कानूनी बयान नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाल तस्करी एक जटिल और बहुआयामी अपराध है जो केवल बच्चों के अपहरण तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसमें जबरन मजदूरी यौन शोषण भीख मंगवाना और अवैध गतिविधियों में धकेलना जैसे गंभीर अपराध शामिल होते हैं। यह समस्या केवल शहरों तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी तेजी से फैल रही है जहां जागरूकता की कमी और गरीबी के कारण बच्चे अधिक संवेदनशील होते हैं। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि देशभर में संगठित गिरोह सक्रिय हैं जो बच्चों को निशाना बनाते हैं और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर शोषण करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस मुद्दे की गंभीरता को समझने के लिए यह आवश्यक है कि हम इसके मूल कारणों पर भी ध्यान दें। गरीबी बेरोजगारी अशिक्षा और सामाजिक असमानता जैसे कारक बाल तस्करी को बढ़ावा देते हैं। कई बार माता पिता आर्थिक मजबूरी के चलते बच्चों को काम पर भेजने के लिए मजबूर हो जाते हैं और यही स्थिति तस्करों के लिए अवसर बन जाती है। इसके अलावा शहरीकरण और पलायन भी एक बड़ा कारण है जहां परिवारों का सामाजिक ढांचा कमजोर पड़ जाता है और बच्चों की सुरक्षा खतरे में आ जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि कई मामलों में राज्य सरकारों की प्रतिक्रिया धीमी और असंगठित होती है जिससे अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं। पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी भी एक बड़ी समस्या है। कई बार मामलों की सही जांच नहीं हो पाती और पीड़ित बच्चों को न्याय मिलने में देरी होती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि कानून का प्रभावी क्रियान्वयन ही इस समस्या का समाधान है और इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बाल तस्करी के मामलों में त्वरित कार्रवाई इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसमें हर पल महत्वपूर्ण होता है। जितनी देर कार्रवाई में होती है उतनी ही संभावना बढ़ जाती है कि बच्चा किसी अन्य स्थान पर ले जाया जाए या उसका शोषण किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संदर्भ में समाज की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल सरकार और अदालत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। आम नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए। स्कूलों और समुदायों में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों और अभिभावकों को इस खतरे के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। इससे न केवल अपराधों की रोकथाम होगी बल्कि पीड़ितों को समय पर सहायता भी मिल सकेगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तकनीक का उपयोग भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और डाटाबेस के माध्यम से लापता बच्चों की जानकारी को तेजी से साझा किया जा सकता है जिससे उन्हें खोजने में सहायता मिलती है। हालांकि इसके लिए डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा का भी ध्यान रखना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार का दुरुपयोग न हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करती हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। यह केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि मानवाधिकार का प्रश्न है। हर बच्चे को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः यह कहा जा सकता है कि बाल तस्करी के खिलाफ लड़ाई केवल कानूनी या प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक संघर्ष भी है। इसके लिए सरकार अदालत और समाज सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। जब तक हम इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए सामूहिक रूप से आगे नहीं बढ़ेंगे तब तक इसका समाधान संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी को एक अवसर के रूप में देखते हुए हमें ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य मिल सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:34:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खतरनाक रास्तों से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती)।</strong> बस्ती जिले के महादेव क्षेत्र के भरवलिया गांव में प्राथमिक विद्यालय के मर्जर के बाद स्कूली बच्चों को खतरनाक रास्तों से होकर दूसरे गांव में पढ़ने जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने मर्जर को नियम विरुद्ध बताते हुए विद्यालय को पुनः संचालित करने की मांग उठाई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि जगदम्बिका पाल के पैतृक गांव भरवलिया स्थित प्राथमिक विद्यालय को करीब एक वर्ष पूर्व पास के चित्राखोर गांव में मर्ज कर दिया गया था। इस निर्णय के विरोध में बनकटी ब्लॉक के पूर्व प्रधान संघ अध्यक्ष व</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174398/children-forced-to-go-to-school-through-dangerous-routes-questions"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260328-wa0058.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती)।</strong> बस्ती जिले के महादेव क्षेत्र के भरवलिया गांव में प्राथमिक विद्यालय के मर्जर के बाद स्कूली बच्चों को खतरनाक रास्तों से होकर दूसरे गांव में पढ़ने जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने मर्जर को नियम विरुद्ध बताते हुए विद्यालय को पुनः संचालित करने की मांग उठाई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बताया जाता है कि जगदम्बिका पाल के पैतृक गांव भरवलिया स्थित प्राथमिक विद्यालय को करीब एक वर्ष पूर्व पास के चित्राखोर गांव में मर्ज कर दिया गया था। इस निर्णय के विरोध में बनकटी ब्लॉक के पूर्व प्रधान संघ अध्यक्ष व पूर्व सभासद वीरेंद्र बहादुर पाल ने जिलाधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मर्जर में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित नवारंभ उत्सव के दौरान एक बार फिर वीरेंद्र बहादुर पाल के नेतृत्व में सूर्यनगर वार्ड के सभासद ऋषिराज मुनि एवं ग्रामीणों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अनूप कुमार त्रिपाठी को संबोधित ज्ञापन एआरपी मनोज कुमार उपाध्याय को सौंपा।</div>
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<div style="text-align:justify;">ग्रामीणों का कहना है कि शासनादेश के अनुसार बच्चों को राष्ट्रीय राजमार्ग, नदी या नाले को पार कर विद्यालय जाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन इन नियमों की अनदेखी करते हुए भरवलिया के विद्यालय को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर चित्राखोर में मर्ज कर दिया गया है। इससे छोटे-छोटे बच्चों को जोखिम भरे रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">वीरेंद्र बहादुर पाल उर्फ बब्बू पाल ने मांग की है कि मर्जर को निरस्त कर भरवलिया के विद्यालय को पुनः चालू किया जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा सुरक्षित वातावरण में हो सके। इस दौरान शिव कुमार पाल, प्रेरित पाल, चंद्रभान पाल, घनश्याम पाल, रणविजय पाल, अवधेश पाल, राहुल पाल, अनिकेत पाल, गीता पाल, इंद्रावती पाल सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 19:06:07 +0530</pubDate>
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