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                <title>वैश्विक आर्थिक संकट - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>वैश्विक आर्थिक संकट RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच बुलियन और सोने की अनावश्यक खरीद से बचने की अपील, डीएम ने सर्राफा व्यापारियों संग की बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारत सरकार द्वारा नागरिकों से बुलियन और सोने की अनावश्यक खरीदारी से बचने की अपील के क्रम में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना ने की, जिसमें संबंधित अधिकारियों, व्यापार मंडल और सर्राफा व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</div>
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<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था और बाजार व्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने आमजन से संयमित व्यवहार अपनाने और अनावश्यक रूप</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179519/dm-appeals-to-avoid-unnecessary-purchase-of-bullion-and-gold"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260518-wa0062.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले में वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए भारत सरकार द्वारा नागरिकों से बुलियन और सोने की अनावश्यक खरीदारी से बचने की अपील के क्रम में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना ने की, जिसमें संबंधित अधिकारियों, व्यापार मंडल और सर्राफा व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्था और बाजार व्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने आमजन से संयमित व्यवहार अपनाने और अनावश्यक रूप से सोना एवं बुलियन खरीदने से बचने की अपील की है, ताकि बाजार पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और आर्थिक संतुलन बना रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी ने सर्राफा व्यापारियों की समस्याओं को विस्तार से सुना और भरोसा दिलाया कि उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कोविड काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में समाज के हर वर्ग के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। उस दौरान व्यापार जगत भी प्रभावित हुआ था, लेकिन सर्राफा कारोबार से जुड़े लोगों ने प्रशासन का पूरा सहयोग किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार ने वैक्सीनेशन, ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभाला था।टैरिफ नीति 2025 का जिक्र करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि कठिन समय स्थायी नहीं होता और परिस्थितियां बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से जारी गाइडलाइन और अपील का जिम्मेदार नागरिक के रूप में पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार में हो रहे उतार-चढ़ाव पर भी विस्तार से चर्चा की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में जिलाधिकारी ने स्वर्ण कारोबारियों को मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी किसी अन्य व्यवसाय में भी हाथ आजमाना चाहते हैं तो इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने कहा कि व्यापारियों की समस्याओं को नोट कर लिया गया है और शासन की अपील का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बस्ती जिले का सहयोग हमेशा सकारात्मक रहा है। आर्थिक मंदी जैसे हालात में सभी को संयम और तैयारी के साथ आगे बढ़ना होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक के दौरान सर्राफा व्यापारियों ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी प्रशासन के सामने रखीं। इस पर पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया कि पुलिस विभाग सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है और संबंधित चौकी प्रभारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रतिपाल सिंह चौहान, उपायुक्त वाणिज्यकर प्रभाकर सरोज, उपायुक्त प्रशासन राज्यकर उपेन्द्र यादव, जिलाध्यक्ष सर्राफा कुन्दन वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष व्यापार संगठन जगदीश अग्रहरि, विश्वनाथ वर्मा सहित अन्य व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</div>
</div>
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<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 21:11:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तीन देशों की सनक से पैदा वैश्विक आर्थिक,सामरिक संकट</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">जैसी की आशंका दिखाई दे रही है ईरान की भयभीत आम जनता एवं वर्तमान में बचे हुए ईरानी टॉप लीडर्स कि यह पुरजोर मांग है कि ईरान के पास जितना परमाणु ईंधन अमेरिका के आक्रमण से जमीन में धंसा हुआ बचा है, उससे कम से कम 10 बड़े परमाणु बम बनाए जा सकते हैं और इस परमाणु बम को बनाने के लिए ईरान प्रशासन पर पूरा दबाव डाला जा रहा है। यह हालत इसलिए पैदा हुए हैं की इस त्रिकोणीय युद्ध में ईरान को बहुत बड़ी संख्या में जनहानि और बड़ी मात्रा में आर्थिक क्षति पहुंची है, ईरानके हजारों लोग</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174387/global-economic-and-strategic-crisis-created-by-the-craze-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/download2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जैसी की आशंका दिखाई दे रही है ईरान की भयभीत आम जनता एवं वर्तमान में बचे हुए ईरानी टॉप लीडर्स कि यह पुरजोर मांग है कि ईरान के पास जितना परमाणु ईंधन अमेरिका के आक्रमण से जमीन में धंसा हुआ बचा है, उससे कम से कम 10 बड़े परमाणु बम बनाए जा सकते हैं और इस परमाणु बम को बनाने के लिए ईरान प्रशासन पर पूरा दबाव डाला जा रहा है। यह हालत इसलिए पैदा हुए हैं की इस त्रिकोणीय युद्ध में ईरान को बहुत बड़ी संख्या में जनहानि और बड़ी मात्रा में आर्थिक क्षति पहुंची है, ईरानके हजारों लोग मारें गए और 25000 से ज्यादा बड़ी-बड़ी बिल्डिंग,स्कूल और हॉस्पिटल ध्वस्त हुए हैं, ईरान में शिया सुन्नी झगड़ा भी अपने चरम पर है। सुन्नी लोग अब शासन का तख्ता पलटने के प्रयास में लगे हुए हैं।</p><p style="text-align:justify;"> अमेरिका तथा इजरायल युद्ध से ईरान में हुए इस नुकसान को पूरा करने में ईरान को 15 से 20 साल लग सकते हैं। ईरान की सरकार और उनकी जनता के बीच जिस तरह से करो या मरो की स्थिति बनी है, जिसके परिणाम स्वरुप वहां की जनता और नेता यह चाहते हैं कि परमाणु बम बनाना तथा ईरान इजरायल और उसके सहयोगी देशों पर परमाणु हमला करना ही उनके अस्तित्व को बचाने के लिए अंतिम और सम्यक विकल्प हो सकता है। यदि ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर अमेरिका इजरायल और ईरान यदि परमाणु संघर्ष में बदल सकता है। </p><p style="text-align:justify;">इसके परिणाम में यह परमाणु युद्ध मानव इतिहास के उन भयावह क्षणों से भी अधिक विनाशकारी होगा, जिनकी शुरुआत द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर अमेरिका द्वारा किए गए परमाणु हमलों से हुई थी। हिरोशिमा पर परमाणु बम विस्फोट की घटना 6 अगस्त 1945 को हुई थी, जब अमेरिका ने जापान के शहर हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था। इसके तीन दिन बाद, नागासाकी पर परमाणु बम विस्फोट 9 अगस्त 1945 को हुआ, जब अमेरिका ने ही नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया। यह घटनाएँ द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में अमेरिका और जापान के बीच हुए युद्ध का हिस्सा थीं।</p><p style="text-align:justify;"> गौर तलब है कि उसे समय के परमाणु बम सीमित शक्ति के थे और उनका प्रभाव मुख्यतः स्थानीय स्तर पर केंद्रित रहा था, जबकि आज के परमाणु हथियार अत्यधिक उन्नत, बहु-मेगाटन क्षमता वाले और दूरगामी प्रभाव वाले विकसित हो चुके हैं। आधुनिक परमाणु युद्ध केवल एक शहर या देश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका प्रभाव विश्व के हर देश के स्तर पर फैलेगा, यदि ईरान परमाणु हथियार का उपयोग करता है या उस पर परमाणु हमला होता है तो सबसे पहले प्रत्यक्ष प्रभाव मध्य पूर्व क्षेत्र में दिखाई देगा, जिसमें इज़रायल की स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो सकती है वह पूरी तरह विनाशकारी स्थिति में पहुंच सकता है।</p><p style="text-align:justify;"> वहां जनसंख्या का बड़ा हिस्सा तुरंत प्रभावित होगा और बुनियादी ढांचा समाप्त हो सकता है। इसके साथ ही सऊदी अरब में रेडियोधर्मी कण  पहुंचने की आशंका होगी जिससे वहां के तेल भंडार, जल स्रोत और जनजीवन गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। इराक और सीरिया जैसे पड़ोसी देश जो पहले से अस्थिर हैं, यहां परमाणु विकिरण के कारण मानवीय संकट और भी गहरा जाएगा, तुर्की जो यूरोप और एशिया के बीच स्थित है, वह रेडियोधर्मी बादलों के प्रभाव से कृषि और स्वास्थ्य संकट का सामना कर सकता है। इसके आगे यह विकिरण वायुमंडलीय धाराओं के माध्यम से यूरोप के देशों जैसे ग्रीस, इटली और जर्मनी तक फैल सकता है, जहां कैंसर, श्वसन रोग और पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ने की संभावना होगी। </p><p style="text-align:justify;">यदि संघर्ष बृहद रूप लेता  है और अमेरिका तथा रूस जैसे परमाणु शक्तिशाली देश इसमें शामिल होते हैं तो स्थिति और भयावह हो जाएगी क्योंकि तब यह सीमित युद्ध नहीं बल्कि वैश्विक परमाणु टकराव का रूप ले सकता है। भारत और पाकिस्तान भी इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे, यहां पर मानसूनी चक्र में बदलाव, तापमान में गिरावट और कृषि उत्पादन में भारी कमी देखने को मिल सकती है जिसे “न्यूक्लियर विंटर” कहा जाता है। इस स्थिति में सूर्य का प्रकाश धूल और धुएं के कारण धरती तक नहीं पहुंच पाएगा जिससे वैश्विक खाद्य संकट उत्पन्न होगा, चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को भी आपूर्ति श्रृंखला टूटने, व्यापार बाधित होने और जनस्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ेगा।</p><p style="text-align:justify;"> अफ्रीका के देश जैसे मिस्र और नाइजीरिया खाद्य आयात पर निर्भर हैं, वहां अकाल और भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं दक्षिण अमेरिका के देश जैसे ब्राज़ील में भी जलवायु परिवर्तन और कृषि हानि देखने को मिल सकती है, इस पूरे परिदृश्य में एक बड़ा अंतर यह है कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय केवल दो बम गिराए गए थे और उनका प्रभाव सीमित समय और स्थान में रहा, जबकि आज के परमाणु हथियारों की संख्या हजारों में है और उनकी मारक क्षमता कई गुना अधिक है, आधुनिक मिसाइल तकनीक जैसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, कुछ ही मिनटों में एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक परमाणु हथियार पहुंचा सकती है, इसके अलावा आज की दुनिया अधिक परस्पर जुड़ी हुई है, वैश्विक अर्थव्यवस्था, संचार प्रणाली, इंटरनेट और आपूर्ति श्रृंखलाएं एक-दूसरे पर निर्भर हैं। </p><p style="text-align:justify;">इसलिए किसी एक क्षेत्र में परमाणु विस्फोट का प्रभाव पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी, तकनीकी ठहराव और सामाजिक अराजकता के रूप में दिखाई दे सकती है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से रेडियोधर्मी विकिरण केवल तत्काल मृत्यु ही नहीं बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली बीमारियां जैसे कैंसर, जन्म दोष और मानसिक विकार पैदा करेगा, पर्यावरणीय दृष्टि से नदियां, महासागर और मिट्टी प्रदूषित हो जाएंगे जिससे जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। </p><p style="text-align:justify;">यदि हम तुलना करें तो हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बमों ने लाखों लोगों की जान ली थी, लेकिन आज का परमाणु युद्ध अरबों लोगों के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है। यह अनुमानित और विशेष रूप से संभावित अमेरिका-इज़रायल-ईरान परमाणु संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक विनाशक आपदा होगा, जिसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग हर देश प्रभावित होगा, और मानव सभ्यता को सदियों पीछे धकेल सकता है। इसलिए यह केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि मानवता के अस्तित्व का प्रश्न है।जिसे कूटनीति, संयम और वैश्विक सहयोग के माध्यम से युद्ध विराम करके ही टाला जा सकता है।<br /><br />संजीव ठाकुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 18:39:43 +0530</pubDate>
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