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                <title>स्थानीय लोगों का आक्रोश - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>स्थानीय लोगों का आक्रोश RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बभनान में विकास या घोटाला? जनता की लोहे की बेंच झाड़ियों में दबी, जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
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<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के नगर पंचायत बभनान में विकास कार्यों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पंचायत कार्यालय के पीछे झाड़ियों में लोहे की बेंच पड़ी मिली, जिसे देखकर लोगों में आक्रोश व्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, यह बेंच आम जनता की सुविधा के लिए खरीदी गई थी, ताकि इसे किसी सार्वजनिक स्थान—जैसे चौराहा, बाजार या सड़क किनारे—स्थापित किया जा सके। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही या मिलीभगत के चलते इसे झाड़ियों में डालकर छोड़ दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मौके पर बेंच के आसपास उगी घनी झाड़ियां</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179190/development-or-scam-in-babhanan-iron-bench-of-public-role"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260512-wa00602.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बस्ती। </strong>बस्ती जिले के नगर पंचायत बभनान में विकास कार्यों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पंचायत कार्यालय के पीछे झाड़ियों में लोहे की बेंच पड़ी मिली, जिसे देखकर लोगों में आक्रोश व्याप्त है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, यह बेंच आम जनता की सुविधा के लिए खरीदी गई थी, ताकि इसे किसी सार्वजनिक स्थान—जैसे चौराहा, बाजार या सड़क किनारे—स्थापित किया जा सके। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही या मिलीभगत के चलते इसे झाड़ियों में डालकर छोड़ दिया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मौके पर बेंच के आसपास उगी घनी झाड़ियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि यह लंबे समय से उपयोग में नहीं लाई गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस कार्य को कागजों में पूरा दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ कागजी खेल किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि संभवतः बेंच की खरीद और स्थापना दिखाकर बजट का उपयोग दिखा दिया गया, जबकि हकीकत में इसे जनता तक पहुंचाने की कोई कोशिश नहीं की गई। ऐसे में पूरे मामले में घोटाले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मामले ने नगर पंचायत अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी (ईओ) की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के इस तरह की लापरवाही संभव नहीं है। यदि कार्य आवंटित हुआ था, तो उसकी निगरानी क्यों नहीं की गई?</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बेंच अगर सार्वजनिक स्थल पर लगाई जाती, तो राहगीरों, बुजुर्गों और गरीब लोगों को इसका लाभ मिलता। लेकिन इसे झाड़ियों में डालकर उनकी सुविधा को नजरअंदाज कर दिया गया, जो सीधे तौर पर जनता के अधिकारों का हनन है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस संबंध में जब नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद जांच कर कार्रवाई की बात कही जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह के मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो विकास योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 May 2026 20:39:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>झूंसी में जलनिकासी संकट: नैका सहित कई इलाकों में नालियों का अभाव बना बड़ी समस्या।</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज । सरस सिंह की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। विशेष रूप से नैका, नई बस्ती, कटका, और आसपास के कई मोहल्लों में नालियों के अभाव और जर्जर जलनिकासी व्यवस्था ने स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर कर दिया है। हर साल बारिश के मौसम में यह समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बरसात में बनता है ‘तालाब’।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी के नैका इलाके में हल्की बारिश भी सड़कों को तालाब में बदल देती है।</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174374/drainage-crisis-in-jhunsi-lack-of-drains-has-become-a"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/img-20260327-wa0053.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज । सरस सिंह की रिपोर्ट।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी क्षेत्र में जलनिकासी की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। विशेष रूप से नैका, नई बस्ती, कटका, और आसपास के कई मोहल्लों में नालियों के अभाव और जर्जर जलनिकासी व्यवस्था ने स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर कर दिया है। हर साल बारिश के मौसम में यह समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>बरसात में बनता है ‘तालाब’।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">झूंसी के नैका इलाके में हल्की बारिश भी सड़कों को तालाब में बदल देती है। पानी निकासी का उचित प्रबंध न होने के कारण गंदा पानी कई दिनों तक सड़कों और गलियों में जमा रहता है। इससे न केवल आवागमन बाधित होता है बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि कई बार घरों में भी पानी घुस जाता है, जिससे घरेलू सामान को नुकसान उठाना पड़ता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नालियों का अधूरा निर्माण और खराब रखरखाव</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कई जगहों पर नालियों का निर्माण कार्य शुरू तो किया गया, लेकिन अधूरा छोड़ दिया गया। जहां नालियां बनी भी हैं, वहां नियमित सफाई नहीं होने के कारण वे कचरे से भरी रहती हैं। परिणामस्वरूप पानी का बहाव रुक जाता है और जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्थानीय लोगों में आक्रोश।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नैका और आसपास के इलाकों के निवासियों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों से शिकायत की, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। चुनाव के समय जनप्रतिनिधि वादे तो करते हैं, लेकिन बाद में समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गंदे पानी के जमाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">जिम्मेदार कौन?</div>
<div style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी भी इस समस्या का एक बड़ा कारण मानी जा रही है। योजनाएं बनती हैं, बजट भी पास होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम अधूरा रह जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या कहते हैं अधिकारी?।</strong></h4>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में जलनिकासी सुधार के लिए योजनाएं बनाई गई हैं और जल्द ही काम शुरू होगा। हालांकि, स्थानीय लोगों का विश्वास अब इन दावों पर कम ही रह गया है।</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 22:15:13 +0530</pubDate>
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