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                <title>SIT investigation - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>SIT investigation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ठेकेदारों से नेताओं और अधिकारियों की कमाई के लालच से भ्रष्टाचार का पर्याय बना कानपुर नगर निगम </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> यहां का नगर निगम भ्रष्टाचार का पर्याय बना हुआ है। जिसकी वजह है ठेकेदारों के माध्यम से नेताओं और अधिकारियों की कमाई का लालचl यह खेल करोड़ों रुपये के टेंडरों के माध्यम से चल रहा था, लेकिन रंग में भंग तब हो गया जब इस खेल की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हो गई अधिकारियों के पेंच कस दिए। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद नगर निगम की ठेकेदारी व्यवस्था की परतें खुलने लगी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जहां तक अब तक की गई कार्रवाई का सवाल है शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/186698/kanpur-municipal-corporation-became-synonymous-with-corruption-due-to-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-08/1002254798.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> यहां का नगर निगम भ्रष्टाचार का पर्याय बना हुआ है। जिसकी वजह है ठेकेदारों के माध्यम से नेताओं और अधिकारियों की कमाई का लालचl यह खेल करोड़ों रुपये के टेंडरों के माध्यम से चल रहा था, लेकिन रंग में भंग तब हो गया जब इस खेल की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हो गई अधिकारियों के पेंच कस दिए। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद नगर निगम की ठेकेदारी व्यवस्था की परतें खुलने लगी हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जहां तक अब तक की गई कार्रवाई का सवाल है शुरुआती जांच में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के टेंडर निरस्त किए जा चुके हैं। सात फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और छह मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। दो ठेकेदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि पूरे सिंडिकेट का कथित सरगना गोविंद शर्मा फरार है। जांच में टेंडर हासिल करने के तरीके को लेकर भी चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के मुताबिक, ठेकेदारों का एक सिंडिकेट सक्रिय था । आरोप है कि इसी सिंडिकेट के जरिए तय किया जाता था कि किस काम का टेंडर कौन डालेगा और किस फर्म को काम मिलेगा. कई मामलों में करीब 15 फीसदी कम रेट पर टेंडर डलवाने और फिर तय फर्म को काम दिलाने का खेल होने की बात सामने आई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पुलिस के अनुसार, कुछ ठेकेदारों पर दबाव बनाया जाता था और दूसरे लोगों को टेंडर प्रक्रिया से दूर रखने की कोशिश होती थी. जांच में लकी ड्रॉ के नाम पर टेंडर मैनेज किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों की पूरी सच्चाई एसआईटी की जांच के बाद ही साफ होगी।मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने करीब 100 करोड़ रुपये के टेंडर निरस्त कर दिए हैं. विकास कार्यों से जुड़े भुगतान पर भी रोक लगाई गई है। नई फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी गई है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस दौरान पुलिस ने दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज समेत फर्मों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं. जगदंबा इंटरप्राइजेज के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हुए हैं।एसआईटी अब सिर्फ ठेकेदारों तक सीमित नहीं है. नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांची जा रही है। टीम ने टेंडर, भुगतान, फर्म पंजीकरण और विकास कार्यों से जुड़ी फाइलें मांगी हैं। नगर निगम में अधिकारियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अगर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हो रही थी तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। इस सवाल के जवाब में अधिकारियों की भी मिली भगत मानी जा रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Aug 2026 21:13:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा चोरी - आस्था पर लगा दाग और सवालों के घेरे में सिस्टम</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gs">
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<div class="m_6862890073122296727WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने सिर्फ पैसे की हेराफेरी का मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधा हमला है। </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi">  लोगों के खिलाफ पहली </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज कराई है। सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। बहुत बड़ी विडंबना है कि जो मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है इन चोरों ने उसे भी नहीं छोड़ा। राम मंदिर आंदोलन के बाद से अब तक पूरे देश के हिंदुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। लेकिन </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद भी सवाल</span></p></div></div></div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182466/ram-temple-offering-stolen-faith-tainted-and-system-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/hindi-divas1.jpg" alt=""></a><br /><div class="gs">
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<div class="m_6862890073122296727WordSection1">
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने सिर्फ पैसे की हेराफेरी का मामला नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधा हमला है। </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों के खिलाफ पहली </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज कराई है। सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। बहुत बड़ी विडंबना है कि जो मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है इन चोरों ने उसे भी नहीं छोड़ा। राम मंदिर आंदोलन के बाद से अब तक पूरे देश के हिंदुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। लेकिन </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">के बाद भी सवाल खत्म नहीं हुए। बल्कि नए सवाल खड़े हो गए हैं। क्या हुआ था</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सीसीटीवी में साफ दिखा कि मंदिर के दानपात्रों से निकली नकदी की गिनती करने वाले कर्मचारी ही चोरी कर रहे थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आरोपियों में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लवकुश मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुकल्प मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अविनाश शुक्ला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मनीष यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रमाशंकर मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे शामिल हैं। इनमें से छह कैशियर हैं। सुभाष श्रीवास्तव काउंटिंग इंचार्ज था। टिन्नू यादव का काम कैश की गिनती सुपरवाइज़ करके बैंक तक ले जाना था। यानी जिन पर भरोसा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही बेईमान निकले। एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपए महीने की नौकरी करने वाले कर्मचारियों ने </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल में करोड़ों की संपत्ति बना ली। एक ने डेढ़ करोड़ की जमीन खरीदी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरे ने </span>40<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख का प्लॉट लिया। शुरुआती अनुमान </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ के घोटाले का है। एफआईआर दर्ज हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर देर से क्यों</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रस्ट ने चोरी की जांच के लिए </span>13<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को एसआईटी बनवाई। </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को एफआईआर हुई। यानी </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन लग गए। जागरण की रिपोर्ट बताती है कि इससे पहले भी दो कर्मचारियों को गुपचुप तरीके से पकड़ा गया था। बिना एफआईआर के ही रिकवरी की जा रही थी। पुलिस ट्रस्ट के साथ मिलकर पूछताछ कर रही थी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सवाल ये है: जब चोरी का शक था तो तुरंत पुलिस को क्यों नहीं बताया गया</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या ट्रस्ट पहले अपने स्तर पर मामला दबाना चाहता था</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">बड़े नाम गायब क्यों हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है। लेकिन उनका ड्राइवर टिन्नू यादव आरोपी है। विपक्ष का आरोप है कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। बीएनएस की धारा </span>306, 316(5), 317(4), 317(5) <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>61<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत केस दर्ज हुआ है। इनमें उम्रकैद तक की सजा है। अगर टिन्नू यादव चोरी कर रहा था तो क्या चंपत राय को पता नहीं चला</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">या उन्होंने आंखें बंद कर लीं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">एसआईटी की दूसरी रिपोर्ट आने तक ये सवाल बना रहेगा। सिस्टम में खामी कहां थी</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">मंदिर के चढ़ावे की गिनती तीन स्तर पर होती है: </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्राइवेट कर्मचारी नोट गिनते हैं। </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> ट्रस्ट कर्मचारी निगरानी करते हैं। </span>14 SBI <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>TCS <span lang="hi" xml:lang="hi">के ऑडिटर होते हैं। इतनी लेयर के बावजूद चोरी हो गई। जांच में सामने आया कि एक पदाधिकारी ने कैमरे लगाने का विरोध किया था। यानी सिस्टम में पारदर्शिता की कमी थी। </span>CCTV <span lang="hi" xml:lang="hi">थे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर निगरानी नहीं थी। ऑडिट था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर भरोसा अंधा था। आगे क्या होना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">पहला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एसआईटी की जांच सिर्फ </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> आरोपियों तक सीमित न रहे। पूरी चेन की जांच हो। किसके इशारे पर चोरी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैसा कहां गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये साफ होना चाहिए। </span>CM <span lang="hi" xml:lang="hi">योगी ने कहा है कि "दूध का दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी का पानी" होगा। जनता यही उम्मीद कर रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रस्ट को अपनी वित्तीय व्यवस्था सार्वजनिक करनी होगी। हर महीने कितना चढ़ावा आया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहां खर्च हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका डिजिटल डिस्प्ले मंदिर परिसर में लगे। तिरुपति बालाजी मंदिर की तरह रियल टाइम अपडेट सिस्टम बने। तीसरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कैश हैंडलिंग खत्म हो। </span>QR <span lang="hi" xml:lang="hi">कोड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दिया जाए। जितना कैश कम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चोरी की गुंजाइश उतनी कम होगी। चौथा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ट्रस्ट में सरकारी प्रतिनिधि बढ़ाए जाएं। अभी सिर्फ एक आईएएस अधिकारी है। </span>CAG <span lang="hi" xml:lang="hi">से सालाना ऑडिट अनिवार्य हो। राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है। ये </span>500<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल के संघर्ष के बाद मिली आस्था की जीत है। </span>22<span lang="hi" xml:lang="hi"> जनवरी </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> को प्राण प्रतिष्ठा के दिन जो भाव देश ने देखा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो अनमोल है। अगर चंद लोग उस आस्था को कैश कराने लगेंगे तो मंदिर का मतलब खत्म हो जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">पहली कार्रवाई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आखिरी नहीं। असली इम्तहान अब शुरू हुआ है - क्या ट्रस्ट दोषियों को सजा दिला पाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चाहे वो कितना भी बड़ा हो</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">क्या व्यवस्था बदलेगी ताकि फिर कोई टिन्नू यादव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लवकुश मिश्रा आस्था का सौदा न कर सके</span>?</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जनता देख रही है। राम देख रहे हैं। लोग तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं और लोगों के सवाल तब ही शांत होंगे जब इस पूरे मामले पय ठीक ढंग से पर्दा उठेगा। फिलहाल उम्मीद है कि जांच सही दिशा में हो रही है।</span></p>
</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
<div class="WhmR8e"></div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 20:04:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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                <title>अयोध्या: राम मंदिर का दान और संपत्ति की खरीदारी - 'श्रद्धा के पैसे' का हिसाब</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस इनकी जांच करेगी और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा करेगी। इन सात अभियुक्तों के घरों से पुलिस को सोने चांदी के गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्के व नकदी भी मिली है जो यह साबित कर रही है कि कहीं न कहीं मंदिर की दान चोरी में इनका हांथ है। रामलला के दर्शन के लिए रोज लाखों श्रद्धालु आते हैं। दानपात्रों में नकद</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182331/ayodhya-ram-temple-donation-and-purchase-of-property-accounting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/hindi-divas25.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस को बहुत बड़ी सफलता मिली है। रविवार को सात ठिकानों पर छापेमारी के दौरान आरोपियों की संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर उन्हें जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस इनकी जांच करेगी और वित्तीय लेनदेन की समीक्षा करेगी। इन सात अभियुक्तों के घरों से पुलिस को सोने चांदी के गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्के व नकदी भी मिली है जो यह साबित कर रही है कि कहीं न कहीं मंदिर की दान चोरी में इनका हांथ है। रामलला के दर्शन के लिए रोज लाखों श्रद्धालु आते हैं। दानपात्रों में नकद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चेक सब गिरता है। लेकिन अब वही </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">श्रद्धा का पैसा</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">विवाद में है। एक तरफ ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन खरीदारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूसरी तरफ चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की करोड़ों की संपत्ति। दान कितना आता है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेश से लेकर घर तक- विदेशी दान- महाकुंभ के दौरान अकेले जनवरी-फरवरी </span>2025<span lang="hi" xml:lang="hi"> में अमेरिका समेत </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> देशों से </span>57<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये का विदेशी दान मिला।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समर्पण निधि से अब तक देश-विदेश के करोड़ों भक्तों ने आस्था से दान दिया है। भाजपा नेता रजनीश सिंह के मुताबिक ये पैसा "किसी व्यक्ति का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है"। शुरुआत </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये से ट्रस्ट को पहला दान मोदी सरकार ने </span>1<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये नकद देकर किया था। ट्रस्ट ने क्या खरीदा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">चार महीने में </span>36.61<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की जमीन। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तेजी से जमीन खरीद रहा है। पिछले </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने अयोध्या के हैबतपुर में </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> जगहों पर </span>4.29<span lang="hi" xml:lang="hi"> एकड़ जमीन खरीदी गई। जिसकी कुल कीमत: </span>36.61<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये है। सबसे बड़ी डील-  </span>11,194<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्क्वायर फीट की एक जमीन अकेले।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रानोपाली में भी </span>5,490<span lang="hi" xml:lang="hi"> स्क्वायर फीट की जमीन अलग से ली गई है। ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर विस्तार और सुविधाओं के लिए जमीन ली जा रही है। विवाद का केंद्र: चढ़ावे की </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">चोरी</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">और करोड़ों की संपत्ति यही सबसे बड़ा मुद्दा है। आरोप है कि दानपात्रों से करोड़ों रुपये गायब हुए। </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> की नौकरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों की संपत्ति- नोट गिनने वाले </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्राइवेट कर्मचारियों की सैलरी सिर्फ </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये महीना है। लेकिन उनमें से कुछ ने </span>1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ की जमीन</span>, 40<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख का प्लॉट खरीद लिया। कैसे पकड़े गए- </span>18-20<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार सैलरी वाले दो कर्मचारियों की डेढ़ करोड़ की जमीन खरीद से पूरा मामला खुला।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कौन शामिल-  लवकुश मिश्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनुकल्प मिश्रा समेत </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी दान गिनती प्रक्रिया में थे। सीसीटीवी फुटेज में पैसे चुराते पकड़े गए। कितना घोटाला</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">आशंका </span>200<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये से अधिक की है। अब तक </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> कर्मचारियों से </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ नकद</span>, 1<span lang="hi" xml:lang="hi"> कार</span>, 3<span lang="hi" xml:lang="hi"> आईफोन बरामद हुए हैं।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> जांच कहां तक पहुंची</span>? SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">और राजनीति क्या कहती है - एसआईटी का गठन - योगी सरकार ने मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> सदस्यीय एसआईटी बनाई। </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। एसआईटी ने अपना काम शुरू कर दिया है और आठ में से सात लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है जिनके पास से काफी संपत्ति के सबूत मिले हैं। ट्रस्ट की शिकायत पर </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> लोगों के खिलाफ </span>BNS <span lang="hi" xml:lang="hi">की धारा </span>306, 316, 317, 61<span lang="hi" xml:lang="hi"> के तहत केस दर्ज हुआ है। सपा का आरोप- अखिलेश यादव ने कहा कि चंदे के पैसों से मकान खरीदे गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट के रिटायर जज से जांच कराने की मांग की है। ट्रस्ट का बयान-  नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि ये विवाद </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">जमीन खरीद विवाद</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">से भी ज्यादा गंभीर है। उन्होंने एक अनुभवी </span>CEO <span lang="hi" xml:lang="hi">की नियुक्ति की जरूरत बताई।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">पारदर्शिता की मांग: हिसाब कौन देगा</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा नेता रजनीश सिंह ने </span>PM <span lang="hi" xml:lang="hi">को पत्र लिखकर ट्रस्ट के बनने से अब तक का पूरा वित्तीय लेन-देन वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका तर्क है कि "हर भक्त को यह जानने का नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार है कि दान में मिले पैसे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गहनों का इस्तेमाल कैसे हुआ"। आस्था बनाम जवाबदेही- राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ों लोगों की आस्था है। ट्रस्ट जमीन खरीदकर विस्तार कर रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ठीक है। लेकिन अगर </span>14,500<span lang="hi" xml:lang="hi"> सैलरी वाला कर्मचारी करोड़पति बन रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो सवाल उठना लाजमी है।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">SIT <span lang="hi" xml:lang="hi">की रिपोर्ट तय करेगी कि ये </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">व्यक्तिगत गबन</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">है या सिस्टम की चूक। फिलहाल </span>8 <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग सलाखों के पीछे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और करोड़ों श्रद्धालु हिसाब मांग रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:28:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'हरियाणा पुलिस ने 4 साल की बच्ची के रेप केस में आरोपी को बचाने की कोशिश की': सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के रेप के मामले में जांच को भटकाने के लिए हरियाणा पुलिस को कड़ी फटकार लगाई, और जांच अपने हाथ में लेने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा (पाक्सो) एक्ट की धारा 6 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के अपराध का संकेत देने वाले शुरुआती सबूत मौजूद थे, फिर भी पुलिस ने FIR सिर्फ धारा 10 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के लिए दर्ज</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174304/haryana-police-tried-to-save-the-accused-in-the-rape"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/supream-court5.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आज गुरुग्राम में 4 साल की बच्ची के रेप के मामले में जांच को भटकाने के लिए हरियाणा पुलिस को कड़ी फटकार लगाई, और जांच अपने हाथ में लेने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने अपराध की गंभीरता को कम करने की कोशिश की।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा (पाक्सो) एक्ट की धारा 6 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के अपराध का संकेत देने वाले शुरुआती सबूत मौजूद थे, फिर भी पुलिस ने FIR सिर्फ धारा 10 के तहत 'गंभीर यौन हमला' के लिए दर्ज की, जो कि एक कम गंभीर अपराध है।कोर्ट ने कहा, "यह एक ऐसा साफ मामला है, जिसमें पुलिस ने आरोपी को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की है।"</p>
<p style="text-align:justify;">"कमिश्नर से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक, पूरी पुलिस फोर्स ने यह साबित करने की हर कोशिश की कि बच्ची के पास कोई सबूत नहीं है या उसके माता-पिता की बातों में कोई दम नहीं है। रिकॉर्ड में इस बात की कोई गुंजाइश नहीं है कि पाक्सो की धारा 6 के तहत कोई अपराध नहीं हुआ था। हालांकि, पुलिस ने FIR दर्ज की, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से अपराध को धारा 10 के तहत कम गंभीर बना दिया।"</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक एसआईटी का गठन किया है, जिसमें हरियाणा कैडर की आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द एसआईटी को नोटिफाई किया जाए और गुरुग्राम पुलिस को गुरुवार तक जांच से जुड़े दस्तावेज एसआईटी को सौंपने का निर्देश दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 20:49:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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