<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/6343/yoga-in-india" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>yoga in india - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/6343/rss</link>
                <description>yoga in india RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>योग दिवस: सिर्फ इवेंट बनकर न रह जाए</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">  </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi">  को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi">  जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी</span>,</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"> </p>
<blockquote class="format2"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi">वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस देशभर में मनाया गया। राजधानी दिल्ली के साथ साथ देश के हर शहर और कस्बों में हजारों जगहों पर कार्यक्रम हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता में विशेष सत्र में शामिल हुए। तस्वीरें अच्छी आईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बयानबाजी हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अगले दिन सब सामान्य हो गया। अब सवाल ये है कि क्या योग दिवस सिर्फ एक दिन का इवेंट बनकर रह गया है या इसका जमीनी असर भी दिख रहा है</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद: जो दिखता है- हर साल </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को योग दिवस का मतलब हो जाता है: सरकारी अधिकारी मैट पर बैठे हुए फोटो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कूल-कॉलेज में अनिवार्य ड्रिल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोशल मीडिया पर सेलेब्स के वीडियो</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशों में भारतीय दूतावासों के कार्यक्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सब जरूरी है। इसने योग को ग्लोबल ब्रांड बनाया। </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> से पहले योग को "हिंदू प्रैक्टिस" कहकर खारिज किया जाता था। आज </span>190+ <span lang="hi" xml:lang="hi">देश इसे मनाते हैं। यूएन ने </span>2014<span lang="hi" xml:lang="hi"> में </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। लेकिन प्रतीकवाद की सीमा यही है कि वो एक दिन में ही खत्म हो जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जमीनी हकीकत: आंकड़े क्या कहते हैं</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">सकारात्मक पक्ष- आयुष मंत्रालय के मुताबिक </span>2024<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>1.2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा योग इंस्ट्रक्टर ट्रेंड हो चुके हैं। अब योग को भी स्कूलों में शामिल किया जाने लगा है। सीबीएसई ने </span>6-12<span lang="hi" xml:lang="hi"> क्लास में योग को पार्ट बनाया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">मेडिकल टूरिज्म-</span>,  <span lang="hi" xml:lang="hi">ऋषिकेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मैसूर में योग-आयुर्वेद के लिए विदेशी आ रहे हैं। ये </span>8000<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ का इंडस्ट्री बन गया है। इसका एक कमजोर पक्ष यह है कि ग्रामीण भारत में इसकी पहुंच बहुत कम या ना के बराबर है। एनसीआरबी का हेल्थ सर्वे कहता है कि </span>70%<span lang="hi" xml:lang="hi"> ग्रामीण लोग रोज योग नहीं करते। उनके लिए योग "शहरियों का शौक" है। क्वालिटी का सवाल- </span>15<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन के सर्टिफिकेट कोर्स से बने इंस्ट्रक्टर स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इससे गलत प्रैक्टिस का खतरा है। निरंतरता नहीं-  </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> जून के बाद ज्यादातर लोग मैट समेट देते हैं। रोजाना योग करने वालों की संख्या </span>15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से ज्यादा नहीं बढ़ी। असर कहां दिखना चाहिए था</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">योग को स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनना था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन हुआ नहीं। नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज पर रोक-  भारत में डायबिटीज</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हाई </span>BP, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। </span>ICMR <span lang="hi" xml:lang="hi">कहता है कि </span>2030<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक </span>13.4<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ लोग डायबिटिक होंगे। योग प्रिवेंटिव हेल्थ में काम करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आयुष बजट कुल हेल्थ बजट का सिर्फ </span>2.3%<span lang="hi" xml:lang="hi"> है। मानसिक स्वास्थ्य-</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">NIMHANS <span lang="hi" xml:lang="hi">के डेटा के मुताबिक भारत में </span>15% <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। योग और प्राणायाम का असर डिप्रेशन-एंग्जाइटी में साबित है। लेकिन मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योग को मेनस्ट्रीम नहीं किया गया। स्कूलों में योग पीरियड है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परीक्षा में नहीं पूछा जाता। बच्चे </span>45 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट करके भूल जाते हैं। अगर इसे फिजिकल एजुकेशन का ग्रेड हिस्सा बनाया जाए तो आदत बने। दूसरे देशों ने क्या किया</span>?- <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिका में </span>20,000 <span lang="hi" xml:lang="hi">से ज्यादा स्कूलों में "</span>Yoga in Schools" <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रोग्राम चलता है। इंश्योरेंस कंपनियां योग करने वालों को प्रीमियम में छूट देती हैं। चीन में ताई-ची को नेशनल फिटनेस प्रोग्राम बनाया। हर पार्क में सुबह ग्रुप प्रैक्टिस होती है। भारत में हम इवेंट कर रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पब्लिक हेल्थ सिस्टम में योग को इंटीग्रेट नहीं किया। सवाल यह उठता है कि अब क्या करना चाहिए</span>? <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतीकवाद से हटकर पॉलिसी बनाओ। योग दिवस को सिर्फ इवेंट न रखो। हर जिला अस्पताल में योग थेरेपी सेंटर हो। आयुष्मान भारत में योग कवर हो। क्वालिटी कंट्रोल ऐसा हो जो भी योग सिखाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसकी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन सख्त हो। गलत आसन से स्पाइन इंजरी के केस बढ़ रहे हैं। ग्रामीण फोकस-  हर पंचायत में एक योग मित्र हो। जैसे आशा वर्कर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वैसे ही योग वर्कर। उन्हें स्टाइपेंड मिले। डेटा पर काम करो- योग से कितने लोगों का शुगर कंट्रोल हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कितनों की दवा कम हुई - ये डेटा इकट्ठा करो। तभी पॉलिसी मेकर मानेंगे। योग दिवस का महत्व कम नहीं हुआ है। इसने भारत की सॉफ्ट पावर बढ़ाई है। लेकिन अगर अगले </span>10 <span lang="hi" xml:lang="hi">साल भी हम सिर्फ </span>21 <span lang="hi" xml:lang="hi">जून को मैट बिछाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो योग "इंस्टाग्रामेबल एक्टिविटी" बनकर रह जाएगा। योग का असली मकसद था - "योगः कर्मसु कौशलम्"। काम में कुशलता। वो कुशलता तब आएगी जब योग स्कूल की क्लास से निकलकर अस्पताल की </span>OPD, <span lang="hi" xml:lang="hi">फैक्ट्री के ब्रेक रूम और गांव के चौपाल तक पहुंचे। तस्वीरें अच्छी लगती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बदलाव तब दिखता है जब किसी गांव के डायबिटिक मरीज की दवा आधी हो जाए क्योंकि उसने रोज </span>30 <span lang="hi" xml:lang="hi">मिनट अनुलोम-विलोम किया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>अंतर्राष्ट्रीय</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                            <category>एशिया</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/181923/yoga-day-should-not-remain-just-an-event</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 16:27:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-06/images.jpeg"                         length="38080"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जाने योग आधुनिक जीवन में क्यों है महत्वपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong>अलका सिंह</strong><br /><strong>योग विशेषज्ञ</strong><br />  <br />  <br />मानवता के लिए योग का सहारा लिया जाना बेहद जरूरी है क्योंकि आधुनिक जीवन शैली ने मन-शरीर के संबंधों में सामजंस्य खो दिया है जिससे उच्च रक्तचाप, कोरोनरी हृदय रोग और कैंसर जैसी कई तनाव-आधारित बीमारियां हो गई हैं। इन बीमारियों को रोकने और उनका इलाज करने के प्रयास ने बेहतर जीवन शैली और बेहतर रणनीतियों की खोज को गति दी, जो कि योग जैसे प्राचीन विषयों की पनुर्खोज में परिवर्तित हो गए, जीवन शैली को स्थायी मानसिक शांति के लिए शक्तिशाली अचकू नुस्खे के साथ जोड़ना जैसा कि नैदानिक अध्ययनों द्वारा पुष्टि की गई है।</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130963/know-why-yoga-is-important-in-modern-life"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/जाने-योग-आधुनिक-जीवन-में-क्यों-है-महत्वपूर्ण.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अलका सिंह</strong><br /><strong>योग विशेषज्ञ</strong><br /> <br /> <br />मानवता के लिए योग का सहारा लिया जाना बेहद जरूरी है क्योंकि आधुनिक जीवन शैली ने मन-शरीर के संबंधों में सामजंस्य खो दिया है जिससे उच्च रक्तचाप, कोरोनरी हृदय रोग और कैंसर जैसी कई तनाव-आधारित बीमारियां हो गई हैं। इन बीमारियों को रोकने और उनका इलाज करने के प्रयास ने बेहतर जीवन शैली और बेहतर रणनीतियों की खोज को गति दी, जो कि योग जैसे प्राचीन विषयों की पनुर्खोज में परिवर्तित हो गए, जीवन शैली को स्थायी मानसिक शांति के लिए शक्तिशाली अचकू नुस्खे के साथ जोड़ना जैसा कि नैदानिक अध्ययनों द्वारा पुष्टि की गई है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88.jpg" alt="जाने योग आधुनिक जीवन में क्यों है"></img></p>
<p> योग आधुनिक जीवन जीने का, सही जीवन जीने का विज्ञान है और इसे हमारे दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह सप्ताह में एक बार सिर्फ दो घंटे की हॉबी क्लास नहीं है। योग में दिमाग को शांत करने, लचीलापन बनाए रखने, शारीरिक और मानसिक ऊर्जा का दोहन करने और एक एकीकृत व्यक्तित्व विकसित करने में मदद करने के लिए तकनीकी प्रणालियां हैं। यह भावनाओं को संतुलित करने और मन और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करने का एक तरीका है। एक व्यक्ति अपनी जीवन शैली के अनुसार योग के कई मार्गों– हठ, भक्ति,  राज, ज्ञान और कर्म योग में से एक या दो या अधिक के संयोजन को चुन सकता है। </p>
<p>व्यक्ति प्राणायाम, आसन, विश्राम, ध्यान और प्रत्याहार तकनीकों का अभ्यास कर सकता है, साथ ही जहां संभव हो व्यक्तिगत और सामाजिक विषयों का पालन कर सकता है। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह यह पता करे कि उसकी आवश्यकताओं, जीवन शैली और व्यक्तित्व के लिए कौन सा मार्ग सबसे उपयुक्त है। एक सामान्य जीवन शैली का नेतृत्व करते हुए योग का अभ्यास किया जा सकता है, लेकिन विभिन्न आकांक्षाओं, मानसिकता और स्वयं के प्रति दृष्टिकोण और जीवन में बातचीत के साथ। योग का अभ्यास करने की कला व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती है। यह एक शांतिपूर्ण शरीर और मन को प्राप्त करने के लिए शारीरिक और मानसिक विषयों को एक साथ लाता है, तनाव और चिंता को प्रबंधित करने में मदद करता है और आपको तनावमुक्त रखता है। यह लचीलेपन, मांसपेशियों की ताकत और बॉडी टोन को बढ़ाने में भी मदद करता है। यह श्वसन, ऊर्जा और जीवन शक्ति में सुधार करता है। योग का अभ्यास करना सिर्फ स्ट्रेचिंग जैसा लग सकता है, लेकिन यह आपके शरीर के लिए आपके महसूस करने, देखने और चलने के तरीके से बहुत कुछ कर सकता है।</p>
<p><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82.jpg" alt="जाने योग आधुनिक जीवन में"></img></p>
<p>.11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रत्येक वर्ष 21जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दी है। योग की परिभाषा हमारे ग्रंथों में अलग अलग है परंतु इसका सीधा संबंध मानव शरीर के स्वास्थ्य से ही जुडा है योग हमें प्रकृति से जोडता है। योग हर वर्ष अब मनाया जाता है क्योंकि योग मानव के लिए एक सहारे का कार्य करेगा, यह आधुनिक जीवन जहां अचानक से मौसम बदल रहे है वनस्पति कम हो रही है, पर्यावरण दूषित हो रहा है तो ऐसे में मानव शरीर का नुकसान होना समझ में आता है, मानव शरीर को सुरक्षित रखने के उपायों में से एक योग है। आधुनिक जीवन में लोगो के पास समय कम कार्य ज्यादा है और बीमारियां बढ़ रही है जिसका तुरन्त निवारण नही है लोग तनावों से घिर रहे है, इस आधुनिक युग में मस्तिष्क का कार्य बहुत बढ़ गया है </p>
<p>आबादी बढ़ने से दुर्घटना स्तर का बढ़ना और तनाव स्तर का बढ़ना मामूली बात है। ऐसे में मस्तिष्क संबंधी बीमारी भी बढ़ रही है, ज्यादातर बाहरी देशों में मस्तिष्क संबंधी बीमारी या डिसऑर्डर मिलते है जिनका जीवन बहुत तनावपूर्ण होता है इसीलिए योग को आज इतनी बडी महत्ता दी जा रही है क्योंकि स्नायु विज्ञान अभी बाल्यावस्था में है अर्थात स्नायु विज्ञान अभी भी शोध के अवस्था में हैं, इसलिए स्नायु संबंधी बीमारी वाले मानव को डॉक्टर हमेशा योग की सलाह जरूर देता है क्योंकि योग हमारी नाडियों (तंत्रिका) को सुधारता है और उन्हें जगाता है जिसकी फिलहाल अभी तक कोई दवा नहीं है जो नुकसान हुई न्यूरॉन्स को एकदम से सही कर सके। योग हमारे मन की स्थिति को स्थिर रखता है, जब हम मंत्र योग करते है </p>
<p>तो जो उच्चारण होता है वह ११० हर्ट्ज की ध्वनि उत्पन्न करता है जिससे एक कंपन का अनुभव होता है अर्थात हमारे न्यूरॉन को मसाज का अनुभव सा होता है, और हमारा मस्तिष्क इस समय शांत और एकाग्र हो जाता है इसीलिए सुबह सुबह ॐ उच्चारण ११० हर्ट्ज की ध्वनि में करने से मस्तिष्क रोग काबू में आता है, उदहारण के लिए हम माइग्रेन जैसी बीमारियों से मुक्त हो जाते है और इस समय में माइग्रेन जैसी बीमारी को कोई दवा पूर्ण रूप से सही नही कर सकती केवल योग के सिवा। भारत योगों का घर है यहााँ तंत्र मंत्र योग से कर्म योग, ज्ञान योग हठ योग आदि आदि प्रकार के योग मौजूद है जिनका हमारे जीवन में अलग अलग रूप से महत्व है। लोग इस आधुनिक जीवन में बहुत व्यस्त है, </p>
<p>जब मस्तिष्क को आराम नही मिलता तो यह योग ही हमारे मस्तिष्क को 8 घंटे की नींद जितना आराम देता है, योग द्वारा कई प्रकार की न्यूरो बीमारियों को ठीक होते देखा गया है, और आजकल के युग में न्यूरो बीमारियों से ग्रसित लोग योग को ज्यादा महत्व देते है क्योंकि योग उन्हें एक प्रकार से बीमारी से सुकून प्राप्त करवाता है। योग में बताए गए आसन हमारे शरीर की सभी नसों और तंत्रिकाओं को खींचती है जिनसे हमारी नसें सही रूप से कार्य कर सके योग में अलग अलग आसन मस्तिष्क के अलग अलग तंत्रिकाओं को सक्रिय करती है और उन्हें ठीक करती है। और यह एक बहुत सटीक कारण है की अन्य देशों में योग को क्यों एकदम से अपना लिया। क्योंकि वो यह जानते है की योग बहुत कारगर है मानव शरीर को स्वस्थ रखने हेतु। इसीलिए योग आधुनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं।</p>
<p>योग का हमारे शरीर पर चमत्कारी प्रभाव होता है इसीलिए स्वस्थ रहने के लिए योग रामबाण का काम करता है इसलिए आप अपनी दैनिक दिनचर्या में योग को जरूर शामिल करें और स्वस्थ रहें मस्त रहें खुश रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/130963/know-why-yoga-is-important-in-modern-life</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/130963/know-why-yoga-is-important-in-modern-life</guid>
                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 20:19:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2023-06/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3.jpg"                         length="46126"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        