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                <title>मानवता की मिसाल - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>मानवता की मिसाल RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181002/operation-milap-a-humanitarian-campaign-to-reunite-separated-people-with"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/delhi-police.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का घर से दूर हो जाना नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों, उम्मीदों और मानसिक शांति के खो जाने जैसा होता है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जाती है। हर दरवाजे की आहट उन्हें उम्मीद देती है कि शायद उनका अपना लौट आया हो। हर फोन कॉल उन्हें चौंका देती है। ऐसे में जब वर्षों या महीनों से बिछड़ा कोई व्यक्ति अचानक परिवार से मिल जाता है तो वह क्षण किसी चमत्कार से कम नहीं होता।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस द्वारा चलाया गया “ऑपरेशन मिलाप” इसी मानवीय संवेदना का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। इस विशेष अभियान के अंतर्गत मात्र एक महीने में 1470 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया गया। यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हजारों टूटते हुए परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और खुशियों की वापसी का अभियान है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस अभियान में 852 महिलाओं, 342 पुरुषों तथा 276 नाबालिग बच्चों और किशोरियों को खोजकर उनके परिजनों तक पहुंचाया गया। विशेष रूप से यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि बड़ी संख्या में किशोरियां और महिलाएं अपने परिवारों से बिछड़ गई थीं। ऐसे मामलों में समय के साथ परिवारों की चिंता कई गुना बढ़ जाती है। उन्हें हर पल किसी अनहोनी की आशंका सताती रहती है। ऐसे में पुलिस द्वारा इन लोगों को सुरक्षित ढूंढ़ निकालना निश्चित रूप से सराहनीय कार्य है।</div><div style="text-align:justify;">गुजरात पुलिस ने केवल औपचारिक जांच तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुराने और लंबित मामलों को दोबारा खोलकर नए सिरे से जांच की। आधुनिक तकनीक, मोबाइल फोन विश्लेषण, सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय, सार्वजनिक परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच जैसे अनेक माध्यमों का उपयोग किया गया। शिकायतकर्ताओं और गवाहों से दोबारा संपर्क कर नए सुराग जुटाए गए। यह दर्शाता है कि यदि इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता हो तो वर्षों पुराने मामलों में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।</div><div style="text-align:justify;">सूरत पुलिस द्वारा सर्वाधिक 341 गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना भी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर समर्पित प्रयास किस प्रकार बड़े परिणाम दे सकते हैं। पुलिस और प्रशासन की यह सक्रियता उन परिवारों के लिए राहत का कारण बनी है जो वर्षों से अपने प्रियजनों की प्रतीक्षा में दिन गिन रहे थे।</div><div style="text-align:justify;">इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे समाज के सामने गुमशुदगी के वास्तविक कारण भी उजागर हुए हैं। पुलिस के विश्लेषण में सामने आया कि 14 से 17 वर्ष की आयु वर्ग की अनेक किशोरियां प्रेम संबंधों, पारिवारिक विवादों, अभिभावकों की डांट-फटकार अथवा पढ़ाई में असफलता जैसी परिस्थितियों के कारण घर छोड़कर चली गई थीं। कुछ मामले रोजगार की तलाश में पलायन करने वाले परिवारों से भी जुड़े पाए गए।</div><div style="text-align:justify;">यहां एक गंभीर सामाजिक संदेश छिपा हुआ है। जीवन में कठिनाइयां, असफलताएं, पारिवारिक मतभेद या भावनात्मक उलझनें आना स्वाभाविक है। किशोरावस्था में भावनाएं अधिक संवेदनशील होती हैं और कई बार छोटी घटनाएं भी बहुत बड़ी लगने लगती हैं। लेकिन घर छोड़ देना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यह निर्णय क्षणिक आवेश में लिया जा सकता है, पर उसके परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।</div><div style="text-align:justify;">कई बार बच्चों और किशोरों को लगता है कि उनके जाने से परिवार को कोई फर्क नहीं पड़ेगा या कुछ दिनों बाद सब सामान्य हो जाएगा। वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत होती है। जिस दिन कोई बच्चा या किशोर घर से लापता होता है, उसी दिन से उसके माता-पिता का चैन और नींद समाप्त हो जाती है। मां की आंखें दरवाजे पर लगी रहती हैं। पिता बाहर से मजबूत दिखने का प्रयास करता है, लेकिन भीतर से टूट चुका होता है। भाई-बहन चिंता और असुरक्षा के बीच जीते हैं। पूरा परिवार हर संभावित स्थान पर तलाश करता है, पुलिस थानों के चक्कर लगाता है और अनिश्चितता के अंधेरे में जीवन बिताता है।</div><div style="text-align:justify;">गुमशुदगी का दर्द केवल भावनात्मक नहीं होता, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी परिवारों को प्रभावित करता है। अनेक परिवार अपनी बचत तक खर्च कर देते हैं। कई लोग कामकाज छोड़कर अपने प्रियजन की तलाश में जुट जाते हैं। मानसिक तनाव के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में घर छोड़कर चले जाना न तो समझदारी है और न ही समस्याओं का समाधान।</div><div style="text-align:justify;">आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवारों और बच्चों के बीच संवाद को मजबूत बनाया जाए। अभिभावक बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने माता-पिता पर विश्वास करें। यदि पढ़ाई में असफलता मिली है, किसी बात पर डांट पड़ी है या जीवन में कोई परेशानी आई है, तो उसका समाधान बातचीत से निकाला जा सकता है। परिवार ही वह स्थान है जहां व्यक्ति को सबसे अधिक सुरक्षा, प्रेम और सहयोग मिलता है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप की सफलता केवल आंकड़ों में नहीं मापी जा सकती। इसकी वास्तविक सफलता उन हजारों मुस्कानों में दिखाई देती है जो बिछड़ने के बाद फिर से लौट आईं। उन माताओं की आंखों में दिखाई देती है जिन्होंने वर्षों बाद अपने बच्चों को गले लगाया। उन परिवारों की खुशी में दिखाई देती है जिनकी उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।</div><div style="text-align:justify;">यह अभियान यह भी सिद्ध करता है कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं है, बल्कि समाज के दुख-दर्द में सहभागी बनने वाली संवेदनशील व्यवस्था भी है। जब पुलिस किसी गुमशुदा व्यक्ति को उसके परिवार तक पहुंचाती है, तब वह केवल एक केस बंद नहीं करती बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से जोड़ती है।</div><div style="text-align:justify;">ऑपरेशन मिलाप ने हजारों परिवारों को नई जिंदगी दी है। यह अभियान मानवता, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह हम सभी को यह संदेश भी देता है कि जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में घर और परिवार से दूर जाना समाधान नहीं है। संवाद, धैर्य और विश्वास ही हर समस्या का सबसे मजबूत उत्तर हैं। यदि यह संदेश समाज के प्रत्येक बच्चे और किशोर तक पहुंच जाए तो शायद भविष्य में अनेक परिवार गुमशुदगी की उस पीड़ा से बच सकेंगे, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना संभव नहीं है।</div><div style="text-align:justify;">       </div><div style="text-align:justify;"><strong><br /></strong></div><div style="text-align:justify;"><strong>                                                                           *कांतिलाल मांडोत*</strong></div><div class="yj6qo" style="text-align:justify;"><br /></div><div class="adL" style="text-align:justify;"><br /></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:35:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, अमृतसर ने सेंट्रल जेल, अमृतसर के ट्रांजिट कैंप में बंद 9 बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>अमृतसर,</strong> इंसानियत और लोगों की भलाई के लिए एक पहल के तहत, सेंट्रल जेल, अमृतसर के ट्रांजिट कैंप में बंद 2 महिलाओं समेत 9 बांग्लादेशी नागरिकों को कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद 11.06.2026 को उनके अपने-अपने देशों में सफलतापूर्वक वापस भेज दिया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वापस भेजे गए लोगों ने 11.06.2026 को सुबह करीब 4:00 बजे सेंट्रल जेल, अमृतसर से अपनी यात्रा शुरू की। तय प्रक्रिया के मुताबिक, उनकी सुरक्षित आगे की यात्रा के लिए उन्हें ज़रूरी सुविधाएँ और मदद दी गई। करीब 30 घंटे की ट्रेन यात्रा के बाद, वे बांग्लादेश बॉर्डर पहुँचेंगे, जहाँ उन्हें आगे की ज़रूरी कार्रवाई के</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180994/district-legal-services-authority-amritsar-repatriates-9-bangladeshi-nationals-lodged"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1000900924.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>अमृतसर,</strong> इंसानियत और लोगों की भलाई के लिए एक पहल के तहत, सेंट्रल जेल, अमृतसर के ट्रांजिट कैंप में बंद 2 महिलाओं समेत 9 बांग्लादेशी नागरिकों को कानूनी कार्रवाई पूरी होने के बाद 11.06.2026 को उनके अपने-अपने देशों में सफलतापूर्वक वापस भेज दिया गया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वापस भेजे गए लोगों ने 11.06.2026 को सुबह करीब 4:00 बजे सेंट्रल जेल, अमृतसर से अपनी यात्रा शुरू की। तय प्रक्रिया के मुताबिक, उनकी सुरक्षित आगे की यात्रा के लिए उन्हें ज़रूरी सुविधाएँ और मदद दी गई। करीब 30 घंटे की ट्रेन यात्रा के बाद, वे बांग्लादेश बॉर्डर पहुँचेंगे, जहाँ उन्हें आगे की ज़रूरी कार्रवाई के लिए उनके अपने-अपने देशों के संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह ज़रूरी ऑपरेशन श्रीमती जतिंदर कौर, माननीय डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज-कम-चेयरपर्सन, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, अमृतसर के अच्छे गाइडेंस और सुपरविज़न में पूरा किया गया। इस वापसी प्रोसेस को सफल बनाने के लिए, श्री अमरदीप सिंह बैंस, सेक्रेटरी, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, अमृतसर ने संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार कोऑर्डिनेट किया और कोशिश की ताकि ये लोग जल्द से जल्द अपने वतन लौट सकें और अपने परिवारों से मिल सकें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, अमृतसर ने लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी एक्ट, 1987 के मकसद के मुताबिक, विदेशी नागरिकों समेत सभी लोगों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने में एक्टिव भूमिका निभाई। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, अमृतसर ने इन लोगों के मामलों पर नज़र रखी, ज़रूरत पड़ने पर कानूनी मदद दी और अलग-अलग डिपार्टमेंट के साथ कोऑर्डिनेट करके वापसी प्रोसेस को तेज़ करने की कोशिश की। यह पक्का किया गया कि उनके साथ पूरी इज्ज़त और इंसानी सेंसिटिविटी के साथ पेश आया जाए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इस सफल वापसी प्रोसेस में जेल एडमिनिस्ट्रेशन ने भी अहम भूमिका निभाई। श्री राजीव कुमार अरोड़ा, सुपरिंटेंडेंट, सेंट्रल जेल, अमृतसर और श्री नविंदर सिंह, एडिशनल सुपरिंटेंडेंट, सेंट्रल जेल, अमृतसर ने सभी ज़रूरी एडमिनिस्ट्रेटिव फॉर्मैलिटीज़ को पूरा करने और इन लोगों के आसानी से जाने में पूरी मदद की। जेल डिपार्टमेंट ने डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, अमृतसर और दूसरी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर इस काम को आसानी से और इंसानी तरीके से पूरा किया।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">इनमें से कई लोगों के लिए, यह वापसी अनिश्चितता और अपने परिवारों से लंबे समय तक अलग रहने के समय के खत्म होने का संकेत है। यह पहल न केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का मामला है, बल्कि इंसानी दया, संवेदनशीलता और व्यक्तिगत सम्मान को महत्व देने का भी एक उदाहरण है। डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, जेल डिपार्टमेंट और अन्य संबंधित अधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से, ये लोग अपने परिवारों के साथ फिर से मिल पाए हैं और नई उम्मीद के साथ जीवन शुरू कर पाए हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, अमृतसर जरूरतमंद लोगों को न्याय, इंसानी सम्मान की सुरक्षा और कानूनी मदद देने के अपने वादे को जारी रखे हुए है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:06:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिव्यांग छात्र की पीड़ा सुन भावुक हुए जिलाधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong>जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के समक्ष मानवता और संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। जनसुनवाई में प्राथमिक विद्यालय बंजरिया के छात्र रवि पटेल पुत्र कमलेश पटेल ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है तथा कक्षा-5 की छात्रवृत्ति की धनराशि अभी तक उसे प्राप्त नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">दिव्यांग छात्र की स्थिति को देखकर जिलाधिकारी श्री गौड़ ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों को छात्र को तुरंत ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में जिलाधिकारी ने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180980/district-magistrate-became-emotional-after-hearing-the-pain-of-disabled"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1001717275.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - </strong>जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के समक्ष मानवता और संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला। जनसुनवाई में प्राथमिक विद्यालय बंजरिया के छात्र रवि पटेल पुत्र कमलेश पटेल ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है तथा कक्षा-5 की छात्रवृत्ति की धनराशि अभी तक उसे प्राप्त नहीं हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दिव्यांग छात्र की स्थिति को देखकर जिलाधिकारी श्री गौड़ ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों को छात्र को तुरंत ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिसके क्रम में जिलाधिकारी ने स्वयं अपने हाथों से रवि पटेल को ट्राइसाइकिल प्रदान की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसके साथ ही जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि छात्र की लंबित छात्रवृत्ति की धनराशि का तत्काल सत्यापन कर उसे उसके बैंक खाते में प्रेषित कराना सुनिश्चित करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी की इस संवेदनशील एवं मानवीय पहल से छात्र रवि तथा उसके परिजनों के चेहरे पर खुशी झलक उठी। ट्राइसाइकिल प्राप्त होने पर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और उन्होंने जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। जनसुनवाई में की गई यह पहल प्रशासन की जनकल्याणकारी एवं संवेदनशील कार्यशैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:33:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बलिया में मां को बचाने उतरे बीटेक छात्र की मौत </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बलिया | </strong>बलिया जनपद के गड़वार थाना क्षेत्र के बड़सरी गांव में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां मां को बचाने के प्रयास में एक होनहार बीटेक छात्र की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, बड़सरी गांव निवासी छोटेलाल राम की पत्नी सुभावती देवी, जिनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है, बुधवार को घर से निकलकर गड़वार-रतसर मार्ग स्थित आरडी विद्यालय के पास पहुंच गईं। इसी दौरान वह अचानक पास के एक कुएं में गिर गईं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जब परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174257/btech-student-dies-after-coming-to-save-mother-in-ballia"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1000954369.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बलिया | </strong>बलिया जनपद के गड़वार थाना क्षेत्र के बड़सरी गांव में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां मां को बचाने के प्रयास में एक होनहार बीटेक छात्र की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार, बड़सरी गांव निवासी छोटेलाल राम की पत्नी सुभावती देवी, जिनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है, बुधवार को घर से निकलकर गड़वार-रतसर मार्ग स्थित आरडी विद्यालय के पास पहुंच गईं। इसी दौरान वह अचानक पास के एक कुएं में गिर गईं।</div>
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<div style="text-align:justify;">जब परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने खोजबीन शुरू की। मौके पर मौजूद बच्चों ने कुएं से आवाज आने की बात बताई। परिजनों ने झांककर देखा तो सुभावती देवी कुएं में गिरी हुई थीं।मां को बचाने के लिए उनके 23 वर्षीय बेटे मुन्ना ने बिना देर किए कुएं में छलांग लगा दी। उसने साहस दिखाते हुए रस्सी के सहारे मां को बांधकर ऊपर खींचवा दिया, जिससे उनकी जान बच गई।</div>
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<div style="text-align:justify;">हालांकि, जब मुन्ना को बाहर निकाला जा रहा था, तभी अचानक रस्सी टूट गई और उसका सिर कुएं की दीवार से जोर से टकरा गया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।स्थानीय युवकों की मदद से मुन्ना को बाहर निकाला गया और तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।</div>
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<div style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि मुन्ना ने वर्ष 2024 में लखनऊ से बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। वह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। बड़ा भाई मन्नू राम दिल्ली में सीपीडब्ल्यूडी विभाग में जूनियर इंजीनियर है, जबकि छोटा भाई विवेक इलाहाबाद में सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है। परिवार में चार बहनें भी हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है।इस घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बुधवार देर शाम मुन्ना का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मां बच गई, लेकिन बेटे की कुर्बानी ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 19:41:03 +0530</pubDate>
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