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                <title>आर डी प्रॉपर्टीज के तत्वावधान में लगा श्रद्धालुओं के लिए छठा वार्षिक भंडारा, हजारों भक्तों ने ग्रहण किया प्रसाद</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>गोवर्धन (मथुरा)-दीपक शर्मा </strong></blockquote><p style="text-align:justify;"><br /></p><p style="text-align:justify;"> गुरु पूर्णिमा मेले के पावन अवसर पर गिरिराज धाम गोवर्धन में श्रद्धा, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। लाखों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी गिरिराज महाराज के दर्शन और सप्तकोसीय परिक्रमा के लिए गोवर्धन पहुंच रहे हैं। पूरे परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और वातावरण "गिरिराज महाराज की जय", "राधे-राधे" तथा भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि से भक्तिमय बना हुआ है।</p><p style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया जा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184178/the-sixth-annual-bhandara-for-the-devotees-was-organized-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-27-at-20.58.51.jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>गोवर्धन (मथुरा)-दीपक शर्मा </strong></blockquote><p style="text-align:justify;"><br /></p><p style="text-align:justify;"> गुरु पूर्णिमा मेले के पावन अवसर पर गिरिराज धाम गोवर्धन में श्रद्धा, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। लाखों श्रद्धालु देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी गिरिराज महाराज के दर्शन और सप्तकोसीय परिक्रमा के लिए गोवर्धन पहुंच रहे हैं। पूरे परिक्रमा मार्ग पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है और वातावरण "गिरिराज महाराज की जय", "राधे-राधे" तथा भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि से भक्तिमय बना हुआ है।</p><p style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया जा रहा है। इन्हीं सेवा कार्यों की श्रृंखला में आर डी प्रॉपर्टीज के तत्वावधान में श्रद्धालुओं के लिए छठे वार्षिक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में हजारों की संख्या में परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और आयोजकों की सेवा भावना की सराहना की।</p><p style="text-align:justify;">भंडारे में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध एवं सात्विक भोजन की विशेष व्यवस्था की गई। इसके साथ ही भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए ठंडा पेयजल, छाछ, शरबत एवं अन्य आवश्यक सामग्री भी निःशुल्क वितरित की गई। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं ने इस सेवा को अत्यंत सराहनीय बताते हुए आयोजकों को धन्यवाद दिया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि लंबी परिक्रमा के दौरान ऐसे भंडारे उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और सेवा की यह परंपरा ब्रज की पहचान है।</p><p style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-07/whatsapp-image-2026-07-27-at-20.58.50.jpeg" alt="गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संस्थाओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया जा रहा है।" width="1200" height="800"></img></p><p style="text-align:justify;">आर डी प्रॉपर्टीज के संस्थापक गुड्डा ठाकुर उर्फ सौदान सिंह ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों से लगातार यह विशाल भंडारा आयोजित किया जा रहा है और भविष्य में भी यह सेवा कार्य निरंतर जारी रहेगा। उनका कहना था कि ब्रज की सेवा और गिरिराज महाराज के भक्तों की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है।</p><p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य केवल भोजन वितरण करना ही नहीं, बल्कि परिक्रमा करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक सेवा प्रदान करना है। इसी भावना के साथ सभी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा और समर्पण से दिन-रात सेवा में जुटे हुए हैं। भंडारे में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का स्वागत प्रेम और आदर के साथ किया गया।</p><p style="text-align:justify;">इस सेवा कार्य को सफल बनाने में जयवीर चौधरी, नीतू ठाकुर, अजय कौशिक, ठाकुर मुकेश, हेम सिंह ठाकुर, राजेश ठाकुर, छोटू ठाकुर, माधव शर्मा, बीके ठाकुर, गोविंद ठाकुर सहित समस्त ब्रजवासियों का विशेष सहयोग रहा। सभी कार्यकर्ता भोजन वितरण, पेयजल व्यवस्था, छाछ एवं शरबत वितरण तथा श्रद्धालुओं की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरे उत्साह के साथ लगे रहे।</p><p style="text-align:justify;">भंडारे में सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना लगा रहा। परिक्रमा करने वाले भक्तों ने भोजन प्रसाद ग्रहण करने के बाद आयोजकों को आशीर्वाद दिया और उनकी सेवा भावना की प्रशंसा की। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि ब्रज में आने पर उन्हें हर कदम पर सेवा और अपनापन देखने को मिलता है, जो इस भूमि की सबसे बड़ी विशेषता है।</p><p style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा मेले के दौरान प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा एवं साफ-सफाई की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी लगातार परिक्रमा मार्ग पर निगरानी बनाए हुए हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। स्वयंसेवी संस्थाएं भी प्रशासन के साथ मिलकर सेवा कार्यों में सहयोग कर रही हैं।</p><p style="text-align:justify;">ब्रजभूमि में गुरु पूर्णिमा का पर्व केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का भी प्रतीक माना जाता है। यहां आयोजित होने वाले भंडारे समाज में परोपकार और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। आर डी प्रॉपर्टीज द्वारा आयोजित छठा वार्षिक भंडारा भी इसी सेवा परंपरा का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।</p><p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने गिरिराज महाराज से सभी श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की तथा भविष्य में भी इसी प्रकार सेवा कार्यों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने भी आयोजकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ऐसे सेवा कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और इन्हें आगे भी निरंतर जारी रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>सांस्कृतिक और धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 21:16:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अब व्यापार के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण : शर्बत भी बंटा हिन्दू और मुस्लिम में!</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="gmail_default" style="text-align:justify;"><strong>(आलेख : संजय पराते)</strong></div>
<div class="gmail_quote">
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<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">रामदेव के संघी झुकाव के बारे में सब जानते हैं। सब जानते है कि उसके भगवा चोले के अंदर एक कॉर्पोरेट बैठा हुआ है। रामदेव संघ-भाजपा की हिंदुत्व और कॉर्पोरेट गठजोड़ की राजनीति का नमूना भी है और उसका उत्पाद भी। इस रामदेव को लोगों ने सलवार-कुर्ता में डरकर भागते भी देखा है। इस पहनावे को आम तौर पर मुस्लिमों का पहनावा माना जाता है। कहा जा सकता है कि रामदेव के कायर हिंदुत्व को बचाया मुस्लिम पहनावे ने ही था। लेकिन यही रामदेव आज इस्लाम और मुस्लिमों के बारे में नफरत और डर फैलाने के</div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/150993/now-communal-polarization-sorbet-for-business-is-also-divided-into"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-04/screenshot_2025-04-13-02-50-19-08_a23b203fd3aafc6dcb84e438dda678b6.jpg" alt=""></a><br /><div class="gmail_default" style="text-align:justify;"><strong>(आलेख : संजय पराते)</strong></div>
<div class="gmail_quote">
<div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रामदेव के संघी झुकाव के बारे में सब जानते हैं। सब जानते है कि उसके भगवा चोले के अंदर एक कॉर्पोरेट बैठा हुआ है। रामदेव संघ-भाजपा की हिंदुत्व और कॉर्पोरेट गठजोड़ की राजनीति का नमूना भी है और उसका उत्पाद भी। इस रामदेव को लोगों ने सलवार-कुर्ता में डरकर भागते भी देखा है। इस पहनावे को आम तौर पर मुस्लिमों का पहनावा माना जाता है। कहा जा सकता है कि रामदेव के कायर हिंदुत्व को बचाया मुस्लिम पहनावे ने ही था। लेकिन यही रामदेव आज इस्लाम और मुस्लिमों के बारे में नफरत और डर फैलाने के उस्ताद बन गए हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनका ताजा बयान है : ''शरबत के नाम पर एक कंपनी है, जो शरबत तो देती है, लेकिन शरबत से जो पैसा मिलता है, उससे मदरसे और मस्जिदें बनवाती है। अगर आप वो शरबत पिएंगे, तो मस्जिद और मदरसे बनेंगे और पतंजलि का शरबत पिएंगे, तो गुरुकुल बनेंगे, आचार्य कुलम बनेगा, पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय शिक्षा बोर्ड आगे बढ़ेगा। इसलिए मैं कहता हूं ये शरबत जिहाद है. जैसे लव जिहाद, वोट जिहाद चल रहा है, वैसे ही शरबत जिहाद भी चल रहा है।" </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2025-04/screenshot_2025-03-16-17-17-12-03_965bbf4d18d205f782c6b8409c5773a4.jpg" alt="अब व्यापार के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण : शर्बत भी बंटा हिन्दू और मुस्लिम में!" width="351" height="373"></img></div>
<div style="text-align:justify;">रामदेव का यह बयान सोशल मीडिया में एक वीडियो के रूप में तैर रहा है। इस बयान में उनका इशारा रूह आफ़ज़ा की ओर है, लेकिन इसकी गुणवत्ता को वे कोई चुनौती नहीं दे रहे हैं। यह एक गैर-एल्कोहोलिक पेय है, जिसे ब्रिटिश भारत के अंतर्गत 1906 में गाजियाबाद में हकीम हाफिज अब्दुल मजीद द्वारा तैयार किया गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">वे यूनानी दवाओं के विशेषज्ञ थे और उन्होंने कुछ यूनानी जड़ी-बूटियों और सिरप की मदद से एक घोल (शरबत) तैयार किया, जो लोगों को गर्मियों में लू से काफी राहत देता था। लेकिन इस शरबत का मुख्य अवयव गुलाब था। अब इसका निर्माण हमदर्द फार्मास्युटिकल द्वारा किया जा रहा है, जो आज एक नामी-गिरामी कंपनी है। इसके बोतल से जानकारी मिलती है कि आज इसे 8 प्रकार की जड़ी-बूटियों और 8 प्रकार के फलों और सब्जियों के अर्क से बनाया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने 115 वर्षों की यात्रा के दौरान इसकी गुणवत्ता पर अभी तक कोई आंच नहीं आई है। रूह आफ़ज़ा के समानांतर दिल आफ़्ज़ा नाम का एक भ्रामक उत्पाद भी बाजार में उतारा गया था, जिसकी बिक्री पर दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी, जिसकी पुष्टि बाद ने सुप्रीम कोर्ट ने भी की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">दूसरी बात, रूह आफ़ज़ा के बारे में अभी तक ऐसी कोई अधिकृत रिपोर्ट नहीं है कि इसकी बिक्री से होने वाली आय से इसके निर्माताओं ने मस्जिद या मदरसे का निर्माण किया है, जिसका आरोप रामदेव लगा रहे हैं। उन्हें अपने आरोप का सबूत भी पेश करना चाहिए था। सार्वजनिक रूप से जो जानकारी उपलब्ध है, उसके अनुसार, इस पेय की निर्माता कंपनी हमदर्द एक गैर लाभकारी ट्रस्ट द्वारा संचालित है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह धर्मनिरपेक्ष रुख अपनाती है, क्योंकि यह होली और ईद दोनों पर उत्सव का आयोजन करती है। वर्ष 2008 में इस कम्पनी ने जूही चावला को अपना ब्रांड एम्बेस्डर बनाया था। यदि इसका रुख इस्लाम-आधारित होता, तो वह जूही चावला को कभी भी अपना ब्रांड एंबेसडर नहीं बनाती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तीसरी बात, रामदेव यह स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि उनके शर्बत से होने वाली आय का उपयोग उस शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए होगा, जिसे संघी गिरोह प्रमोट करना चाहता है, और निश्चित ही, यह शिक्षा वैज्ञानिक मानसिकता पैदा करने से कोसों दूर होगी और वर्णाश्रम आधारित होगी। ऐसी शिक्षा संविधान के बुनियादी मूल्यों के खिलाफ जाती है और रामदेव अपने मुनाफे का उपयोग इस देश की धर्मनिरपेक्षता और संवैधानिक मूल्यों की जड़ों को खोदने के लिए करने के लिए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अब आईए, कुछ बातें रामदेव के पतंजलि के बारे में कर लें। यह कंपनी वर्ष 2006 में रामदेव और उनके चेले बालकृष्ण ने शुरू की थी और आज यह कंपनी टूथपेस्ट से लेकर स्किन केयर तक और बुखार से लेकर टायफाइड तक लगभग सारे उत्पाद बनाती-बेचती है और आज यह कंपनी 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की हो गयी है। पतंजलि की विकास गाथा टीवी पर योग के प्रचार से एक कॉर्पोरेट में रामदेव के बदलने की कहानी है। इस बदलाव में लुटेरे और परजीवी पूंजीवाद के छल-कपट-धोखाधड़ी के सारे तत्व मौजूद है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने उत्पादों, जिसकी गुणवत्ता हमेशा संदेह के घेरे में और विवादित रही है, को प्रोजेक्ट करने के लिए रामदेव आधुनिक चिकित्सा पद्धति और एलोपैथी को हमेशा गरियाते रहे हैं। कोरोना संकट के समय उनका दावा था कि लाखों मरीजों की मौत एलोपैथी से ट्रीटमेंट के कारण हुई और इसकी जगह उन्होंने वर्ष 2020 में अपनी कोरोनिल को प्रोजेक्ट किया, जो निष्प्रभावी पाई गई और मोदी सरकार के आयुष मंत्रालय को भी इस दवा के 'घटिया होने' के तथ्य को स्वीकार करते हुए इसे प्रतिबंधित करना पड़ा है। इसके पहले, वर्ष 2016 में उनकी पतंजलि कंपनी का आंवला रस जांच में गुणवत्ताहीन पाया गया था और सेना की कैंटीनों से उसे वापस किया गया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके गाय के घी की गुणवत्ता पर भी सवालिया निशान लगा है और वर्ष 2006 में तो माकपा नेता वृंदा करात ने रामदेव पर अपनी दवाओं में इंसानों और जानवरों की हड्डियों को मिलाने का आरोप ही लगा दिया था। यह जानकारी रामदेव के कारखाने में काम करने वाले मजदूरों ने ही उन्हें दी थी। इन मजदूरों का आरोप था कि न तो उन्हें न्यूनतम मजदूरी दी जाती है और न ही श्रम कानूनों का पालन ही किया जाता है। श्रम विभाग की जांच के बाद मजदूरों के ये आरोप सही पाए गए थे। इस प्रकार, रामदेव की संपत्ति मजदूरों की आह और उनके खून-पसीने में लिथड़ी संपत्ति है और पतंजलि का मुनाफा नकली और भ्रामक उत्पादों को बेचकर अर्जित किया गया अनैतिक मुनाफा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रूह आफ़ज़ा के बरक्स रामदेव जिस गुलाब शर्बत को पेश कर रहे हैं, उसमें भी पतंजलि की कोई खोज या अनुसंधान नहीं है, क्योंकि इसका असली तत्व गुलाब ही है, जिसकी खोज हकीम हाफिज अब्दुल मजीद ने 115 साल पहले ही कर ली थी। इसलिए यह रूह आफ़ज़ा की नकल भर है और पुरानी शर्बत से यह उन्नीस ही बैठेगी, बीस नहीं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लेकिन विवाद नकली और असली या उन्नीस और बीस पेय का नहीं है। विवाद है, पतंजलि के गुलाब शर्बत को प्रोजेक्ट करने के तरीके पर। हमारे संविधान का कोई भी प्रावधान और कानून इसकी इजाजत किसी को नहीं देता कि आप अपने उत्पाद को प्रोजेक्ट करते हुए और अपने व्यवसाय के मुनाफे को बढ़ाने के लिए धर्म के आधार पर नफरत फैलाने, गलतबयानी करने की बात करें और किसी भी पेय को हिंदू पेय और मुस्लिम पेय में बांटने की हिमाकत करें और अपने शर्बत को बेचने के लिए मुस्लिमों पर शर्बत जेहाद फैलाने का आरोप लगाएं। यह वह चालबाजी है, जिसे अंग्रेजों ने अपनाया था और आज रामदेव अपना रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक स्वतंत्र पत्रकार संजीव शुक्ल ने अपने एक आलेख 'हिंदू शर्बत और मुस्लिम शर्बत' में एक अद्भुत घटना का जिक्र किया है। उनके शब्दों में :</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">"बात तब की है, जब लाल किले पर आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर मुकदमा चल रहा था। सभी सैनिकों को यहीं कैद किया गया था। कर्नल सहगल, ढिल्लन और शाहनवाज पर मुकदमा चलाया गया। ये सैनिक भारत के स्वाभिमान के प्रतीक बन चुके थे। पूरा देश इनके साथ खड़ा था। कांग्रेस आजाद हिंद फौज डिफेंस कमेटी बनाकर इन सैनिकों के बचाव में खड़ी हो गई। भिन्न राह होने के बावजूद पूरी कांग्रेस सुभाष बाबू के फौज के सेनानायकों के साथ थी। नेताजी की अनुपस्थिति में नेहरू अपनी जिम्मेदारी से वाकिफ थे। अरसे बाद उन्होंने वकील का चोगा पहना। इन सैनिकों की गिरफ्तारी और उन पर मुकदमा चलाए जाने से पूरा देश आंदोलित था। धर्म और जाति की दीवारें टूट चुकी थीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पर सरकार इस एकता को तोड़ना चाहती थी। सरकार हमेशा की तरह “बांटो और राज करो” की नीति के तहत राष्ट्रीय एकता को सांप्रदायिक रंग देकर खंडित करना चाहती थी। सैनिकों के लिए सुबह जो चाय आती, उसे हिंदू चाय और मुस्लिम चाय का नाम दिया गया, जबकि सभी सैनिक इस तरह के बंटवारे के सख्त खिलाफ थे। पर सरकार का हुक्म था कि हर हाल में हिंदू चाय अलग बनेगी, मुस्लिम चाय अलग बनेगी और इसी नाम से बांटी जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सुबह-सुबह हांक लगती थी – “हिंदू चाय… मुस्लिम चाय...!” क्रांतिकारी भी इस नफरती व्यवहार को न मानने के लिए कटिबद्ध थे। सो, सुबह चाय आती और क्रांतिकारी उसे एक बड़े बर्तन में मिला देते। फिर बांटकर पी लेते। यह एकता की अद्भुत मिसाल थी।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हमारे देश के स्वाधीनता आंदोलन ने धर्म और जाति की जिन दीवारों को तोड़ दिया था, संघ-भाजपा और उसका समर्थक कॉर्पोरेट आज उन्हीं दीवारों को फिर से खड़ा करने में जुटा है, ताकि अपने मुनाफे को अधिकतम और सुरक्षित कर सकें। आज की राजनैतिक चुनौती यही है कि हिंदुत्व की राजनीति के साथ कॉरपोरेटों के इस अपवित्र गठबंधन को मात दी जाएं और इसके लिए जन पक्षधर नीतियों के आधार पर शोषित-उत्पीड़ितों का, आदिवासी-दलितों का, मजदूर-किसानों का एक व्यापक संयुक्त गठबंधन खड़ा किया जाएं। इसमें जितना देर लगेगा, देश की एकता और अखंडता का, शांति और सांप्रदायिक सौहार्द्र का, सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे का उतना ही नुकसान होगा, क्योंकि संघी गिरोह और उनका रामदेव ठीक इन्हीं मूल्यों के खिलाफ खड़ा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 16:21:13 +0530</pubDate>
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                <title>चांदा कस्बे में व्यापारियों ने राहगीरों को वितरित किए शरबत</title>
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<div><strong>चांदा सुल्तानपुर।</strong></div>
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<div>  स्थानीय कस्बे में सुल्तानपुर रोड पर आज व्यापारियों ने शरबत वितरण का कार्यक्रम रखा । 21 सौ लीटर शरबत राहगीरों को पिलाया गया। आसपास के व्यापारियों ने बड़े ही भक्ति भाव से आने जाने वाले राहगीरों, बस के यात्रियों को रोक रोक कर शरबत पिलाया। भीषण गर्मी में राहगीर शरबत को बड़े ही भाव से ग्रहण किया।</div>
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<div>        मंगलवार की सुबह 10:00 बजे से ही कस्बा के सुल्तानपुर रोड पर स्थानीय व्यापारियों ने शरबत वितरण शुरू किया। इस कार्यक्रम में करीब 21 सौ लीटर शरबत बनाया गया । भीषण गर्मी में शरबत को आने जाने वाले राहगीरों, बस,</div>
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<div>
<div><strong>चांदा सुल्तानपुर।</strong></div>
<div>     </div>
<div> स्थानीय कस्बे में सुल्तानपुर रोड पर आज व्यापारियों ने शरबत वितरण का कार्यक्रम रखा । 21 सौ लीटर शरबत राहगीरों को पिलाया गया। आसपास के व्यापारियों ने बड़े ही भक्ति भाव से आने जाने वाले राहगीरों, बस के यात्रियों को रोक रोक कर शरबत पिलाया। भीषण गर्मी में राहगीर शरबत को बड़े ही भाव से ग्रहण किया।</div>
<div>   </div>
<div>    मंगलवार की सुबह 10:00 बजे से ही कस्बा के सुल्तानपुर रोड पर स्थानीय व्यापारियों ने शरबत वितरण शुरू किया। इस कार्यक्रम में करीब 21 सौ लीटर शरबत बनाया गया । भीषण गर्मी में शरबत को आने जाने वाले राहगीरों, बस, ट्रक यात्रियों को रोककर व्यापारियों ने बड़े ही भाव से आग्रह पूर्वक आमंत्रित करते हुए पिलाया। राहीगीर शरबत पीकर बहुत ही प्रफुल्लित नजर आए । कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जीत लाल साहू शशांक तिवारी, विकास पाल, शिवम यादव, मनोराज यादव, अमन यादव, रोहन यादव, ऋषभ यादव, अनिल , सुनील का योगदान उल्लेखनीय रहा।</div>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 18:49:03 +0530</pubDate>
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