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                <title>केंद्र सरकार - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>केंद्र सरकार RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पेपर लीक पर सरकार को घेरा, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सदन में उठेगी आवाज : अखिलेश यादव</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">  </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/184005/akhilesh-yadav-will-raise-his-voice-in-the-house-till"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/akhilesh-yadav.jpg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>लखनऊ-अजय यादव </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;"> </p>
<p style="text-align:justify;">समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर पेपर लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है तथा जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तब तक समाजवादी पार्टी संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे को उठाती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि नीट परीक्षा दोबारा कराना इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को स्वीकार करना चाहिए तथा पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार और आरक्षण से वंचित करना चाहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अखिलेश यादव ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा लाठी चलाने की खबरें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाने वाले लोग कौन थे। यदि इसकी निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सरकार का दायित्व जनता की बात सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 21:46:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में मात्र 10रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान की नाराजगी।</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>बेतिया। </strong>केंद्र सरकार द्वारा 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में मात्र 10रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव, सचिव इंद्र देव कुशवाहा और गन्ना उत्पादक किसान महासभा के जिला अध्यक्ष संजय यादव ने इसे किसानों के साथ धोखाधड़ी और विश्वासघात बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />नेताओं के अनुसार नया एफआरपी 365 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे बिहार में गन्ना मूल्य करीब 400रूपए प्रति क्विंटल होगा, जबकि वर्तमान दर 390रूपए है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178442/farmers-displeasure-over-the-increase-of-just-rs-10-per"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/b12.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बेतिया। </strong>केंद्र सरकार द्वारा 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में मात्र 10रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव, सचिव इंद्र देव कुशवाहा और गन्ना उत्पादक किसान महासभा के जिला अध्यक्ष संजय यादव ने इसे किसानों के साथ धोखाधड़ी और विश्वासघात बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />नेताओं के अनुसार नया एफआरपी 365 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिससे बिहार में गन्ना मूल्य करीब 400रूपए प्रति क्विंटल होगा, जबकि वर्तमान दर 390रूपए है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गन्ना मूल्य इससे अधिक है, जिससे बिहार के किसानों के साथ अन्याय हो रहा है।<br />किसानों ने गन्ना मूल्य 600 रूपए प्रति क्विंटल करने की मांग दोहराते हुए चेतावनी दी कि 10 मई को स्थापना दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालयों में मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:54:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय युवा कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ किया प्रदर्शन, किया पुतला दहन </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग, झारखंड:-</strong> झारखंड प्रदेश युवा कांग्रेस की प्रभारी नवनीत कौर, प्रदेश अध्यक्ष कुमार गौरव, जिला प्रभारी सुंदरम कुमार जायसवाल, सह-प्रभारी मो. गुलाम मुन्तक़ा के निर्देशानुसार हज़ारीबाग़ जिला अध्यक्ष जावीर की अध्यक्षता में दारू प्रखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए उनका पुतला दहन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन दारू प्रखंड अध्यक्ष मनीष कुशवाहा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">युवा कांग्रेस नेताओं ने एआई समिट का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं के अधिकारों से समझौता कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि देश में बेरोजगारी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/170880/indian-youth-congress-protested-against-the-prime-minister-and-burnt"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-02/news-112.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>हजारीबाग, झारखंड:-</strong> झारखंड प्रदेश युवा कांग्रेस की प्रभारी नवनीत कौर, प्रदेश अध्यक्ष कुमार गौरव, जिला प्रभारी सुंदरम कुमार जायसवाल, सह-प्रभारी मो. गुलाम मुन्तक़ा के निर्देशानुसार हज़ारीबाग़ जिला अध्यक्ष जावीर की अध्यक्षता में दारू प्रखंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए उनका पुतला दहन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन दारू प्रखंड अध्यक्ष मनीष कुशवाहा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">युवा कांग्रेस नेताओं ने एआई समिट का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवाओं के अधिकारों से समझौता कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि देश में बेरोजगारी बढ़ रही है और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के बजाय सरकार अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनका हक नहीं मिल रहा है और रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रदर्शन के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष कोमल राज, प्रदेश महासचिव पूनम यादव, जिला उपाध्यक्ष रिंकू कुमार, जिला महासचिव दानिश अहमद, सदर विधानसभा अध्यक्ष माशूक रज़ा, बरकट्ठा विधानसभा अध्यक्ष संगीता कुमारी तथा सदर प्रखंड अध्यक्ष सह जिला मीडिया प्रभारी मो. शाबान रज़ा सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।युवा कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Feb 2026 19:59:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट में फांसी की जगह मौत की सजा के लिए अन्य विकल्प पर हुई सुनवाई, फैसला सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के लिए फांसी की जगह कम तकलीफदेह तरीके अपनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा ने दायर की है। उन्होंने फांसी को मौत देने का क्रूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमानवीय और पुराना तरीका बताया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दोषी को लंबे समय तक दर्द सहना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि फांसी की बजाय जहर का इंजेक्शन (लीथल इंजेक्शन) दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो तेजी से और कम पीड़ा के साथ मौत का कारण बनता है। याचिका में कहा गया</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/167076/hearing-on-other-options-for-death-penalty-instead-of-hanging"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-01/supream-court6.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा के लिए फांसी की जगह कम तकलीफदेह तरीके अपनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका वरिष्ठ वकील ऋषि मल्होत्रा ने दायर की है। उन्होंने फांसी को मौत देने का क्रूर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमानवीय और पुराना तरीका बताया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दोषी को लंबे समय तक दर्द सहना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि फांसी की बजाय जहर का इंजेक्शन (लीथल इंजेक्शन) दिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो तेजी से और कम पीड़ा के साथ मौत का कारण बनता है। याचिका में कहा गया है कि कम से कम दोषी को विकल्प दिया जाए कि वह फांसी चाहता है या इंजेक्शन।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो वैकल्पिक तरीकों पर अध्ययन कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल फांसी को सबसे तेज और सुरक्षित तरीका माना जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इसे बदलने के पक्ष में नहीं है।</span>.</p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">कोर्ट ने केंद्र के इस रुख पर नाराजगी जताई और कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सरकार इसमें तैयार नहीं दिख रही। कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान दयालु और जीवंत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें सम्मानजनक मौत का अधिकार भी शामिल होना चाहिए। याचिका </span>2017<span lang="hi" xml:lang="hi"> में दायर की गई थी और तब से कई बार सुनवाई हो चुकी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/167076/hearing-on-other-options-for-death-penalty-instead-of-hanging</link>
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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 20:49:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आई बड़ी खबर! ग्रेच्युटी से जुड़ा सरकार ने बदला ये नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर आई है। ग्रेच्युटी से जुड़ा सरकार ने ये नियम बदल दिया है। केंद्र सरकार ने ग्रेच्युटी भुगतान को लेकर एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ₹25 लाख तक की अधिकतम ग्रेच्युटी केवल उन्हीं केंद्रीय सरकारी सिविल कर्मचारियों को मिलेगी, जो केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2021 या केंद्रीय सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत ग्रेच्युटी का भुगतान) नियम, 2021 के तहत आते हैं। Gratuity Payment Rule 2025</p><p><strong>ये</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/158409/big-news-for-central-employees-government-changed-these-rules-related"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2025-10/latest-news---2025-10-28t093236.101.jpg" alt=""></a><br /><p>केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर आई है। ग्रेच्युटी से जुड़ा सरकार ने ये नियम बदल दिया है। केंद्र सरकार ने ग्रेच्युटी भुगतान को लेकर एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के तहत पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि ₹25 लाख तक की अधिकतम ग्रेच्युटी केवल उन्हीं केंद्रीय सरकारी सिविल कर्मचारियों को मिलेगी, जो केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2021 या केंद्रीय सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत ग्रेच्युटी का भुगतान) नियम, 2021 के तहत आते हैं। Gratuity Payment Rule 2025</p><p><strong>ये नियम</strong></p><p>जानकारी के मुताबिक, इसका मतलब यह है कि यह बढ़ी हुई ग्रेच्युटी सीमा सभी संस्थानों या कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी। यानी सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), बैंकों, पोर्ट ट्रस्ट्स, RBI, स्वायत्त संस्थानों, विश्वविद्यालयों, राज्य सरकारों या समाजों से जुड़े कर्मचारियों को इस बढ़ी हुई सीमा का लाभ नहीं मिलेगा। मिली जानकारी के अनुसार, पेंशन विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि उसे लगातार कई RTI आवेदन और संदर्भ प्राप्त हो रहे थे, जिनमें पूछा जा रहा था कि क्या ₹25 लाख तक की ग्रेच्युटी सीमा बैंकों, PSU, RBI, पोर्ट ट्रस्ट, विश्वविद्यालयों, स्वायत्त संस्थानों और राज्य सरकारों पर भी लागू होती है। Gratuity Payment Rule 2025</p><p><strong>विभाग ने...</strong></p><p>मिली जानकारी के अनुसार, विभाग ने साफ कहा है, “ये नियम केवल केंद्रीय सिविल सेवकों पर लागू होते हैं और अन्य संगठनों जैसे कि समाज, बैंक, पोर्ट ट्रस्ट, RBI, PSU, स्वायत्त निकाय, विश्वविद्यालय और राज्य सरकारों पर लागू नहीं होते। जानकारी के मुताबिक, ” साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसे संस्थानों से संबंधित किसी भी प्रश्न या नियम की जानकारी के लिए संबंधित मंत्रालय या विभाग से संपर्क किया जाना चाहिए। Gratuity Payment Rule 2025</p><p><strong>ग्रेच्युटी सीमा</strong></p><p>जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 30 मई 2024 को जारी अधिसूचना में केंद्रीय कर्मचारियों की ग्रेच्युटी सीमा ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख कर दी थी। यह निर्णय 1 जनवरी 2024 से प्रभावी हुआ। Gratuity Payment Rule 2025</p><p>मिली जानकारी के अनुसार, यह बढ़ोतरी उस समय की गई जब महंगाई भत्ता (DA) केंद्रीय कर्मचारियों के मूल वेतन का 50 प्रतिशत हो गया। नियमों के अनुसार, जब भी DA 50 प्रतिशत तक पहुंचता है, तो सभी भत्तों में 25 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है। उसी क्रम में सरकार ने सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी की सीमा में भी वृद्धि की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/158409/big-news-for-central-employees-government-changed-these-rules-related</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Oct 2025 09:33:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sandeep Kumar ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र सरकार के नौ साल की योजनाओं को पूर्व विधायक मनोज यादव ने जन जन तक पहुँचाया, चलाया घर घर महाजनसंपर्क अभियान</title>
                                    <description><![CDATA[<h3>केंद्र सरकार के नौ साल की योजनाओं को पूर्व विधायक मनोज यादव ने जन जन तक पहुँचाया, चलाया घर घर महाजनसंपर्क अभियान</h3>
<h4>पूर्व विधायक ने ग्रामीणों से मिसकॉल करवाकर मोदी जी का कराया समर्थन, अपने आवासीय बूथ से घर घर महाजनसंपर्क अभियान का किया शुरुआत</h4>
<p><strong>बरही/हज़ारीबाग/झारखण्ड - धनंजय कुमार </strong></p>
<p>हज़ारीबाग देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा ने केंद्र सरकार के नौ वर्ष पूरे होने पर अपनी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हर घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से संयुक्त बिहार के तत्कालीन मंत्री सह पूर्व विधायक मनोज कुमार यादव जन जन तक बरही विधानसभा में पहुंचा रहे है।</p>
<p>इसी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/130919/former-mla-manoj-yadav-carried-out-door-to-door-public-relations-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2023-06/untitled15.jpg" alt=""></a><br /><h3>केंद्र सरकार के नौ साल की योजनाओं को पूर्व विधायक मनोज यादव ने जन जन तक पहुँचाया, चलाया घर घर महाजनसंपर्क अभियान</h3>
<h4>पूर्व विधायक ने ग्रामीणों से मिसकॉल करवाकर मोदी जी का कराया समर्थन, अपने आवासीय बूथ से घर घर महाजनसंपर्क अभियान का किया शुरुआत</h4>
<p><strong>बरही/हज़ारीबाग/झारखण्ड - धनंजय कुमार </strong></p>
<p>हज़ारीबाग देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा ने केंद्र सरकार के नौ वर्ष पूरे होने पर अपनी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हर घर तक पहुँचाने के उद्देश्य से संयुक्त बिहार के तत्कालीन मंत्री सह पूर्व विधायक मनोज कुमार यादव जन जन तक बरही विधानसभा में पहुंचा रहे है।</p>
<p>इसी उद्देश्य से पूर्व विधायक ने बरही के बेन्दगी पंचायत के अपने आवासीय बूथ से घर घर महाजनसंपर्क अभियान चलाया। इस दौरान बेन्दगी के रामनगर मंदिर परिसर में सैकड़ो ग्रामीणों के बीच केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं को बताया।</p>
<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता व संचालन भाजपा जिला उपाध्यक्ष रमेश ठाकुर ने किया। ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए पूर्व विधायक श्री यादव ने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों के बल पर नौ साल में खासा सम्मान बटोरा है। कमजोर वर्ग चाहे किसी जाति धर्म पंथ और पूजा पद्धति के हो, उनकी चिंता करते हुए तमाम विकाश योजनाओं को मूर्त रूप नरेंद्र मोदी ने दिया है।</p>
<p>भाजपा जिला उपाध्यक्ष रमेश ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश का कायाकल्प किया है। देश में सत्तर साल के बाद धारा 370 को खत्म करके जम्मु कश्मीर को भारत माता की सीमा से जोड़ दिया है। 2014 के पहले भारत में विकास की पटरी ध्वस्त हो चुकी थी, लेकिन 2014 से नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद इन नौ वर्षों में देश बुलंदियों के शिखर को छू रहा है।</p>
<p>जीप प्रतिनिधि गुरुदेव गुप्ता ने कहा कि वैश्विक स्तर पर मोदी को मिल रही यह मान्यता उनकी नीतियों और व्यवहार की वजह से है। इससे पहले किसी भारतीय प्रधानमंत्री को वैश्विक नेताओं से इतनी भूरि-भूरि प्रशंसा नहीं मिली थी, इसका श्रेय मोदी की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके व्यवहार को जाता है। मौके पर जीप प्रतिनिधि गुरुदेव गुप्ता, राजकुमार केशरी, रितेश गुप्ता, उपमुखिया अशोक राणा, हरि गुप्ता, भूपेंद्र यादव, सचिन यादव, दिनेश साव, महावीर राणा, कृष्ण कुमार राणा, लालधारी राणा,</p>
<p>संजय राणा, योगेंद्र राणा, महावीर यादव, प्रकाश यादव, राजदेव यादव, भीखी महतो, मुरलीधर साव, गेंदों साव, रामचंद्र यादव, रामू महतो, दिनेश साहू, वासुदेव यादव, दुर्गा कुमार, संदीप कुमार राणा, महेंद्र पासवान, पवन साहू, रामेश्वर साह, दिनेश यादव, गोलू यादव, गुरुशरण राणा, अबोध राणा, मीना देवी, रेखा देवी, रीता देवी, वसुंधरा देवी, कौशल्या देवी, प्रतिमा देवी, सविता देवी, तेतरी देवी, सविता देवी, प्रिया देवी, सोनू राणा, मुकेश राणा, मालती देवी, हेमराज यादव सहित अन्य लोग मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>बिहार/झारखंड</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2023 18:29:10 +0530</pubDate>
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