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                <title>नई शिक्षा नीति - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>नई शिक्षा नीति RSS Feed</description>
                
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                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
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                <title>परिषदीय विद्यालयों में नवारंभ उत्सव का हुआ आयोजन</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर -</strong> विकास  खण्ड  उस्का बाजार के परिषदीय विद्यालयों में बुधवार को भव्य 'नवारंभ उत्सव' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नव-प्रवेशित बच्चों, विशेषकर 'बालवाटिका' और कक्षा-1 के छात्रों का विद्यालय में आत्मीय स्वागत करना और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना रहा।पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय परसा खुर्द मेंकार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश मिश्र ने छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क स्टेशनरी और पाठ्य सामग्री वितरित की।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए बीईओ ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप स्कूलों में बच्चों को आनंदमय और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने अभिभावकों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174189/navarambha-utsav-organized-in-council-schools"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1774450078692.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर -</strong> विकास  खण्ड  उस्का बाजार के परिषदीय विद्यालयों में बुधवार को भव्य 'नवारंभ उत्सव' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नव-प्रवेशित बच्चों, विशेषकर 'बालवाटिका' और कक्षा-1 के छात्रों का विद्यालय में आत्मीय स्वागत करना और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना रहा।पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय परसा खुर्द मेंकार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश मिश्र ने छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क स्टेशनरी और पाठ्य सामग्री वितरित की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए बीईओ ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप स्कूलों में बच्चों को आनंदमय और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में कराएं और उन्हें नियमित विद्यालय भेजें। विद्यालय परिसर को रंग-बिरंगे चार्ट, गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था ताकि बच्चे पहले ही दिन स्कूल के प्रति आकर्षित हों।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्राथमिक विद्यालय मरवटियामाफ़ी में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पवन रस्तोगी की मौजूदगी में 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों का 'बालवाटिका' के तहत नामांकन कर उनका तिलक लगाकर स्वागत किया गया।शिक्षकों ने अभिभावकों को नई शिक्षा नीति और विद्यालय में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि वे इस सत्र में बच्चों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निरंतर प्रयास करेंगे। इस दौरान विद्यालयों के स्टाफ व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 20:27:06 +0530</pubDate>
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