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                <title>देश में चल रहा नीट घोटाला वास्तविक में एनटीए घोटाला है।</title>
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                        <![CDATA[<div class="adn ads">
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<div><strong>जे.पी.सिंह।</strong></div>
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<div>नीट घोटाला दरअसल नीट घोटाला नहीं बल्कि एनटीए घोटाला है जिसे परीक्षाएं आयोजित करने का दायित्व मोदी सरकार ने सौंपा है।यह मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले से सौ गुना बड़ा घोटाला है। मौजूदा घोटाले के केंद्र में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) है जो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत एक एनजीओ है- बिल्कुल पीएम केयर्स फंड की तरह। दोनों को राष्ट्रीय प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति दी गई है जिससे ऐसा लगता है कि ये ‘सरकारी निकाय’ हैं,।</div>
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<div>लेकिन न तो उनका नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा ऑडिट किया जाता है और न ही वे संसद के</div></div></div></div></div></div></div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/142645/the-neet-scam-going-on-in-the-country-is-actually"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-06/देश-में-चल-रहा-नीट-घोटाला-वास्तविक-में-एनटीए-घोटाला-है।.jpg" alt=""></a><br /><div class="adn ads">
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<div><strong>जे.पी.सिंह।</strong></div>
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<div>नीट घोटाला दरअसल नीट घोटाला नहीं बल्कि एनटीए घोटाला है जिसे परीक्षाएं आयोजित करने का दायित्व मोदी सरकार ने सौंपा है।यह मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले से सौ गुना बड़ा घोटाला है। मौजूदा घोटाले के केंद्र में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) है जो सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत एक एनजीओ है- बिल्कुल पीएम केयर्स फंड की तरह। दोनों को राष्ट्रीय प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति दी गई है जिससे ऐसा लगता है कि ये ‘सरकारी निकाय’ हैं,।</div>
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<div>लेकिन न तो उनका नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा ऑडिट किया जाता है और न ही वे संसद के प्रति जवाबदेह हैं। एनटीए एक वैधानिक निकाय भी नहीं है, हालांकि शिक्षा मंत्रालय इसे नियंत्रित करता है, इसकी नीतियों और कर्मचारियों से जुड़े फैसले करता है, अपने नौकरशाहों को इसमें नियुक्त करता है और करदाताओं के पैसे से इसे और अधिक परीक्षाएं आयोजित करने के लिए फंड देता है।सोसायटी के ऑडिट किए गए खाते सार्वजनिक डोमेन में नहीं हैं।</div>
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<div>नीट से निष्पक्ष, योग्यता-आधारित प्रवेश सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार के साथ ही कैपिटेशन फीस को खत्म करने की उम्मीद थी। इसका एक बड़े सुधार के रूप में स्वागत भी हुआ था, लेकिन आठ साल बाद यह नीति इनमें से किसी भी लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है।नीट घोटाला केवल लीक हुए प्रश्नपत्रों, दलालों और प्रवेश परीक्षाओं को स्थगित या रद्द करने का मामला नहीं है। न ही यह पहली बार है जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को मेडिकल प्रवेश में रैकेट की जांच का काम सौंपा गया है।अब सरकार का तोंता निष्पक्ष जांच करेगा या मामले की लीपापोती यह शोध का विषय है।</div>
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<div>समाचारपत्र ‘दैनिक भास्कर’ के जयपुर संस्करण की रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 2019 और 2021 के बीच एनटीए ने आवेदन शुल्क के रूप में ही परीक्षार्थियों से 565 करोड़ रुपये वसूले; साथ ही ओएमआर (ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन) शीट के आधार पर अपने अंकों को चुनौती देने वाले परीक्षार्थियों से निर्धारित फीस के रूप में 200 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि वसूली।</div>
<div>बहरहाल, 2021 के बाद से परीक्षार्थियों की संख्या बढ़कर लगभग दोगुनी हो चुकी है और इस हिसाब से 2024 में एनटीए की कमाई भी कहीं अधिक हो चुकी होगी। किसी भी पैमाने पर परीक्षा आयोजित करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं रखने वाले संगठन के लिए यह कितना आकर्षक व्यवसाय मॉडल है! </div>
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<div><strong>एनटीए के अध्यक्ष आरएसएस के पुराने पोस्टर बॉय ।</strong></div>
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<div>एनटीए के अध्यक्ष आरएसएस के पुराने पोस्टर बॉय पीके जोशी हैं जो इसके छात्र निकाय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रमुख थे। अपने शानदार कॅरियर में वह मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे हैं।</div>
<div>2018 में स्थापित एनटीए 2020 से देश में स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा), सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एनईटी (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा), विश्वविद्यालयों के लिए पीएचडी प्रवेश और यहां तक कि सीएसआईआर छात्रवृत्ति के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित कर रहा है।</div>
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<div>2018 तक इनका संचालन सीबीएसई द्वारा किया जाता था जो सार्वजनिक और निजी स्कूलों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड है जिसे भारत सरकार द्वारा नियंत्रित और प्रबंधित किया जाता है। 1929-30 में स्थापित सीबीएसई के पास देश भर में परीक्षा आयोजित करने, उनका मूल्यांकन करने और हर तरह की गोपनीयता बनाए रखने का सिद्ध अनुभव है। अब सवाल यह उठता है कि एक निजी एनजीओ को उन कार्यों को करने के लिए किसने अधिकृत किया जो अब तक मौजूदा संगठनों द्वारा विश्वसनीय रूप से कराए जाते रहे, और इससे भी बड़ा सवाल है कि ऐसा क्यों हुआ? इसलिए, जांच शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी से शुरू होनी चाहिए।</div>
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<div>एनटीए की अक्षमता और भ्रष्टाचार में मिलीभगत की भी जांच की जानी चाहिए। इस साल नीट-यूजीसी की अधूसिचना 9 फरवरी को हुई और परीक्षार्थियों के लिए 9 मार्च तक पंजीकरण करना जरूरी था। मार्च के अंत में इस अवधि को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया और कोई नहीं जानता कि ऐसा क्यों किया गया? 9 अप्रैल को हितधारकों के अनुरोध पर, एक दिन के लिए एक और विंडो खोली गई। ये हितधारक कौन थे?</div>
<div>पंजीकरण के लिए एक और ‘सुधार विंडो’ 11 से 15 अप्रैल के बीच खोली गई थी। जैसे इतना ही काफी नहीं था, एनटीए ने 5 मई को परीक्षा आयोजित की और घोषणा की गई थी कि इसके नतीजे 14 जून को आएंगे लेकिन इसकी जगह परिणाम 4 जून को ही घोषित कर दिए गए जब आम चुनाव में डाले गए वोटों की गिनती की जा रही थी। एक और संदिग्ध फैसला है जिसका जवाब मिलना चाहिए। </div>
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<div>एनटीए ने पहले तो 24 लाख परीक्षार्थियों में से 1,563 को मनमाने ढंग से अनुग्रह अंक (ग्रेस मार्क्स) देकर खुद को कोने से बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन जब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, तो इसने तुरंत अनुग्रह अंक (ग्रेस मार्क्स) वापस ले लिए। आखिर क्या चल रहा था? हरियाणा के झज्जर के छह छात्रों को ये ग्रेस मार्क्स क्यों दिए गए? अगर वास्तव में समय की बर्बादी ही कारण थी तो उसी सेंटर के बाकी छात्रों को नजरअंदाज क्यों कर दिया गया? समय की बर्बादी एक आम शिकायत है जिसकी भरपाई आम तौर पर अधिक समय देकर की जाती है, न कि अधिक अंक देकर।</div>
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<div>एनटीए वास्तव में एक कहीं बड़े घोटाले का दोषी है। साल दर साल, इसके बेतुके रूप से कम कट-ऑफ अंक (720 के उच्चतम संभावित स्कोर में से 20 प्रतिशत या उससे भी कम) ने बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को उत्तीर्ण होने का मौका दे दिया। इस साल 24 लाख परीक्षार्थियों- जिनमें से 57 प्रतिशत लड़कियां थीं- ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 1.09 लाख स्नातक सीटों के लिए परीक्षा दी। कट-ऑफ अंकों (जो 2022 में 16.36 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 22.78 प्रतिशत हो गया) से अधिक अंक प्राप्त करके 13 लाख छात्र उत्तीर्ण हुए। दूसरे शब्दों में, 2022 में न्यूनतम 117 अंक और 2024 में 164 अंक प्राप्त करने वाले परीक्षार्थी देश के 704 मेडिकल कॉलेजों में से एक में प्रवेश के लिए पात्र थे। </div>
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<div>एक केन्द्रीकृत राष्ट्रव्यापी परीक्षा नीट  से निष्पक्ष, योग्यता-आधारित प्रवेश सुनिश्चित करने और दलालों और कैपिटेशन फीस को खत्म करने की उम्मीद थी। ‘एक देश एक परीक्षा’ शुरू होने और इसका एक बड़े सुधार के रूप में स्वागत किए जाने के आठ साल बाद यह नीति इनमें से किसी भी लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है। पिछले कई वर्षों से नीट पर नजर रखने वाले शिक्षाविद् महेश्वर पेरी बताते हैं कि दाखिला प्रक्रिया अब ऐसी हो गई है जिसमें संपन्न या एनआरआई परिवारों के कम मेधावी छात्रों का प्रवेश बढ़ रहा है जबकि कम संपन्न परिवारों के अधिक योग्य छात्रों को बाहर किया जा रहा है।</div>
<div>देश में निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या में लगातार हुई वृद्धि के कारण स्नातक मेडिकल सीटों की संख्या 2021 में 83,000 से बढ़कर 2024 में 1.09 लाख हो गई है।</div>
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<div>नीट पास करने वाले सफल परीक्षार्थियों की संख्या भी 2021 में 8.70 लाख से बढ़कर 2024 में 13.16 लाख हो गई है। जबकि कट-ऑफ अंक हासिल करने वाले कई परीक्षार्थियों को अधिक शुल्क का भुगतान करके निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिल जाएगा, वहीं बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की होगी जिन्हें बहुत अधिक अंक (450+) पाने के बाद भी दाखिला नहीं मिलेगा क्योंकि वे भारत में निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा वसूली जाने वाली भारी-भरकम फीस नहीं दे सकते। </div>
<div>अमीरों के लिए मेडिकल सीटों का एक तरह से आरक्षण सुनिश्चित करने वाली प्रणाली की व्याख्या करते हुए, पेरी भारत को ‘2 प्रतिशत वाला देश’ कहते हैं। वह कहते हैं, ‘केवल तभी जब आप मेरिट में शीर्ष दो प्रतिशत में हों या धन के मामले में शीर्ष दो प्रतिशत में हों, आप मेडिकल सीट की आकांक्षा कर सकते हैं।’</div>
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<div>विभिन्न राज्यों में केवल सात केंद्रीय मेडिकल कॉलेज और 382 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। इन सभी को मिलाकर कुल 56,405 स्नातक सीटें हैं जबकि 264 निजी मेडिकल कॉलेज और 51 निजी डीम्ड विश्वविद्यालय मिलकर 52,765 सीटों उपलब्ध कराते हैं। एम्स जैसे केंद्रीय मेडिकल कॉलेजों में पांच वर्षीय एमबीबीएस कोर्स की लागत लगभग 3-4 लाख रुपये है। ट्रस्टों, नगर पालिकाओं और राज्य सरकारों द्वारा खोले गए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पांच साल के कोर्स की लागत आम तौर पर 6 से 7 लाख रुपये के बीच आती है जबकि, निजी मेडिकल कॉलेजों में यह राशि एक करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये के बीच होती है।</div>
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<div>जो लोग निजी मेडिकल कॉलेजों का खर्च नहीं उठा सकते, वे जॉर्जिया, यूक्रेन, रूस और चीन जैसे देशों से पढ़ाई करना पसंद करते हैं या फिर कोई और रास्ता नहीं पाकर चिकित्सा शिक्षा को ही छोड़ देते हैं जो कहीं अधिक गंभीर बात है। साफ है कि नीट मेडिकल कॉलेजों के लिए योग्यता-आधारित प्रवेश या एकसमान गुणवत्ता और शुल्क संरचना सुनिश्चित करने में सफल नहीं हुआ है। न ही इससे भ्रष्टाचार खत्म हुआ है। पेरी का दावा है कि कम-से-कम 200 परीक्षार्थियों ने ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला प्राप्त किया है।</div>
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<div>ईडब्ल्यूएस के लिए निर्धारित अधिकतम वार्षिक आय आठ लाख रुपये या उससे कम है, लिहाजा पेरी इस बात पर हैरानी जताते हैं कि आखिर ये छात्र अपनी मेडिकल शिक्षा के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कैसे करेंगे। ‘पेपर लीक’ संकट ने केंद्रीकृत परीक्षा को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। यही कारण है कि कुछ राज्यों ने मांग की है कि नीट व्यवस्था को ही खत्म किया जाए और उन्हें अपनी प्रवेश परीक्षा खुद आयोजित करने का अधिकार बहाल किया जाए।</div>
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<div><strong>व्यापम भारत का सबसे बड़ा परिछा घोटाला था।</strong></div>
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<div>गौरतलब है कि शिवराज सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013 में भारत के मध्य प्रदेश में भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला यानी व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) सामने आया. परीक्षा में किसी की जगह दूसरे को बैठाना, नकल कराना और अन्य तरह की धांधलियों की वजह से इस मामले में हज़ारों लोगों को गिरफ़्तार किया गया।हालांकि इन घटनाओं में एक चौंकाने वाला मोड़ तब सामने आया जब 2013 में घोटाला के सार्वजनिक होने से कई साल पहले, घोटाले से जुड़े संदिग्धों की एक के बाद एक मौत होने लगी। इन लोगों की मौत की वजहों में दिल का दौरा और सीने में दर्द से लेकर सड़क दुर्घटनाएं और आत्महत्याएं शामिल थीं. इतना ही नहीं, ये सभी मौतें असामयिक और रहस्यमयी थीं।</div>
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<div><strong>पेपर लीक मामले में नाम आने के बावजूद ब्लैक लिस्टेड गुजरात की कंपनी ठेके देना जारी रहा।</strong></div>
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<div>इस बीच एक रिपोर्ट संमे आई है कि पेपर लीक के मामले मेंनाम आने के बावजूद  भाजपा सरकार ने ब्लैक लिस्टेड गुजरात कंपनी को ठेके देना जारी रखा है । पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक होने के मद्देनजर अहमदाबाद स्थित परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी एडुटेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट कर दिया था ।इस कंपनी पर देश भर के कई राज्यों में पेपर लीक और भर्ती घोटाले के आरोप लगे हैं। इसके संस्थापक-निदेशक सुरेशचंद्र आर्य, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा नामक एक प्रमुख हिंदू संगठन के अध्यक्ष हैं। सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रमों और कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई प्रमुख नेता शामिल होते हैं।</div>
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<div><strong>संस्थापक सुरेश चंद आर्य 2017 में जेल भी जा चुके है।</strong></div>
<div> यहां तक कि सुरेशचंद्र के बेटे और एडुटेस्ट के प्रबंध निदेशक विनीत आर्य को 2017 में जेल भी जाना पड़ा था। लेकिन प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्र सरकार की संस्था और कई राज्यों की भाजपा सरकारें इस कंपनी को परीक्षा आयोजित करने के लिए ठेके देती रहती हैं।</div>
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<div><strong>राहुल गांधी का माइक ऑफ किया गया।कांग्रेस का आरोप।</strong></div>
<div>इस बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नीट पर बहस नहीं होने देने के लिए नेता विपक्ष राहुल गांधी का माइक शुक्रवार को लोकसभा में बंद कर दिया गया। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने दावा किया कि विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी का माइक्रोफोन बंद होने के बाद सदन में हंगामा हुआ। बाद में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अलग से युवकों के नाम वीडियो बयान जारी कर आरोप लगाया कि पीएम मोदी के इशारे पर उन्हें और विपक्ष को संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है। </div>
<div>कांग्रेस ने एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें राहुल गांधी स्पीकर ओम बिड़ला से माइक्रोफोन तक पहुंच का अनुरोध कर रहे हैं। राहुल गांधी ने NEET विवाद पर बहस की मांग की और सरकार से बयान की मांग की। इसी तरह राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का माइक भी बंद कर दिया गया। कांग्रेस ने इस वीडियो को भी जारी किया है।</div>
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<div>लोकसभा और राज्यसभा में जब विपक्ष को नीट पर नहीं बोलने दिया गया तो इस पर कांग्रेस सांसदों ने विरोध जताया। लोकसभा में स्पीकर ओम बिड़ला ने और राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया। लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दोपहर में अपना एक वीडियो बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने नीट पर अपनी बात रखते हुए सीधे पीएम मोदी पर हमला किया।</div>
<div>राहुल गांधी ने वीडियो बयान में कहा कि जहां तक नीट का सवाल है, हर कोई जानता है कि पेपर लीक हो गया था और कुछ लोगों ने हजारों-करोड़ों पैसे कमाए। उन सभी छात्रों के सपनों और आकांक्षाओं को नष्ट कर दिया गया और उनका मजाक उड़ाया गया। इसलिए, कल विपक्ष की बैठक में मैंने छात्रों का मुद्दा उठाया था और कहा कि हमें इस पर पूरा एक दिन चर्चा करना चाहिए क्योंकि हम अपने छात्रों की परवाह करते हैं, हम अपने छात्रों पर विश्वास करते हैं जो हमारे देश का भविष्य हैं। सभी विपक्षी दलों का सर्वसम्मत निर्णय था कि हमें सौहार्दपूर्ण तरीके से शांतिपूर्ण चर्चा करनी चाहिए। </div>
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<div>राहुल गांधी ने वीडियो बयान में कहा- जब मैंने इस मुद्दे को संसद में उठाया, तो मुझे बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि इससे 2 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, 7 वर्षों में 70 बार पेपर लीक हुए। यह स्पष्ट है कि एक व्यवस्थित समस्या है, इसमें भारी भ्रष्टाचार है। हम इसे जारी नहीं रख सकते। हमें इस मुद्दे का समाधान अवश्य खोजना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री, जिन्हें चर्चा का नेतृत्व करना चाहिए, वे बहस ही नहीं चाहते। हम बहस के लिए तैयार हैं और हम सरकार से लड़ना नहीं चाहते हैं और सिर्फ अपने विचार मेज पर रखना चाहते हैं। लेकिन मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री के इशारे पर हमें बोलने नहीं दिया जा रहा है।</div>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 30 Jun 2024 17:04:02 +0530</pubDate>
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                <title>विभागीय अधिकारियों की उदासीनता महात्मा गाँधी रोजगार गारंटी अंतर्गत नहीं मिल रहा मजदूरों को काम </title>
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                        <![CDATA[<div><strong>गोंडा। </strong>महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में  काम बंद  होने से मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है जिससे महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर है।  मामला विकासखंड रूपईडीह के अधिकारियों की उदासीनता के कारण ग्राम पंचायत बलुवा ककरा, बलवंत नगर,भैरमपुर,असिधा, भटपुरवा,भोलाजोत, भोपाल पुर,भुलईडीह,भुडकुडा, छितौनी,देवरहना,हरखापुर, जेट पुरवा,कल्यानपुर,कोचवा,मंगलनगर, नरहरिया, निधि नगर,परसदा,पिपरा बाजार,पूरे पाठक,पिपरा चौबे,रज्जनपुर,सहजनवा,सरहरा,सुसगवा,टडवागुलाम सहित ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मनरेगा के अंतर्गत कार्य नहीं शुरू हुआ। मनरेगा के कार्य प्रारंभ न होने से ग्रामीण मजदूर महानगरों की तरफ पलायन</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/140904/indifference-of-departmental-officers-workers-are-not-getting-work-under"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-05/1003146411.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>गोंडा। </strong>महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों में  काम बंद  होने से मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है जिससे महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर है।  मामला विकासखंड रूपईडीह के अधिकारियों की उदासीनता के कारण ग्राम पंचायत बलुवा ककरा, बलवंत नगर,भैरमपुर,असिधा, भटपुरवा,भोलाजोत, भोपाल पुर,भुलईडीह,भुडकुडा, छितौनी,देवरहना,हरखापुर, जेट पुरवा,कल्यानपुर,कोचवा,मंगलनगर, नरहरिया, निधि नगर,परसदा,पिपरा बाजार,पूरे पाठक,पिपरा चौबे,रज्जनपुर,सहजनवा,सरहरा,सुसगवा,टडवागुलाम सहित ग्राम पंचायतों में वित्तीय वर्ष के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मनरेगा के अंतर्गत कार्य नहीं शुरू हुआ। मनरेगा के कार्य प्रारंभ न होने से ग्रामीण मजदूर महानगरों की तरफ पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>मजदूरों को उनके ही गांव में रोजगार मिले जिसके लिए  मनरेगा कानून बनाया गया था। जिसके तहत वर्ष में कम से कम 100 दिन गांव के मजदूरों को रोजगार दिया जाना अनिवार्य किया गया था। ग्रामीण अंचलों से प्रतिदिन सैकड़ों श्रमिकों को अपने घरों में निकल कर रोजी रोटी के लिए महानगरों की ओर पलायन करने को विवश  हैं। वर्ष 2005 में मनरेगा योजना लागू की गई थी ताकि गांव के लोगों को गांव में मनरेगा के  तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा सके और लोगों को रोजी रोटी के अभाव में महानगरों की ओर पलायन न करना पड़े, लेकिन हालात इतने खराब है कि एक तो ग्राम पंचायतों में मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है, निर्माण कार्य बंद पड़े हैं तो वहीं जिन ग्राम पंचायतों में रोजगार मूलक कार्य चल रहे हैं उनमें स्थानीय मजदूरों की जगह ठेका पट्टी यह फिर दूसरे गांव के मजदूरों को रोजगार दिया जा रहा है।</div>
<div> </div>
<div>ग्राम पंचायत भुलईडीह के प्रधान व रूपईडीह प्रधान संघ के महामंत्री बृजेन्द्र नाथ शुक्ला ने बताया कि अधिकारियों के द्वारा उदासीनता व पत्रावली पर स्वीकृत प्रदान न करने के कारण मनरेगा के अंतर्गत कार्य बंद पड़े हुए हैं और मजदूर वर्ग  पलायन करने के लिए विवश हो रहें हैं तथा उनके बच्चे स्कूल शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।  इस संबंध में डीसी मनरेगा  अधिकारी  जेपी यादव ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के कारण ग्राम पंचायतों में  कार्यों की स्वीकृत नहीं  हो सका पिछले वित्तीय में जिन गांवों की स्वीकृति मिली होगी वहां काम चल रहा है।इस सम्बन्ध में खंड विकास अधिकारी मृत्युंजय यादव ने बताया कि इस रोजगार सेवक व सचिव के द्वारा रूचि नहीं लिया जा रहा है जिसके सम्बन्ध में पत्र लिखकर नोटिस जारी किया गया है।</div>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 17:02:50 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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            <item>
                <title>परसिया रानी गाँव में पीले ईट से हो रहा है इंण्टर लांकिग निर्माण कार्य</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>गोण्डा :</strong> विकास खण्ड कटरा की ग्राम पंचायत परसिया रानी में लाखों की लागत से बनाई जा रही इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है। इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण में बॉक्सिंग की जुड़ाई में पीले ईंटो के साथ बालू का प्रयोग किया जा रहा है।तो वहीं मानको की दुहाई देने वाले ब्लॉक के जिम्मेदार जेई से लेकर अधिकारी जानबूझकर मूक दर्शक बने हुए हैं।एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास कार्यों में पूरी पारदर्शित के साथ मानको को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य कराए जाने के साफ निर्देश आए दिन</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139775/inter-linking-construction-work-is-being-done-with-yellow-bricks-in"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/1002840944.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>गोण्डा :</strong> विकास खण्ड कटरा की ग्राम पंचायत परसिया रानी में लाखों की लागत से बनाई जा रही इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है। इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण में बॉक्सिंग की जुड़ाई में पीले ईंटो के साथ बालू का प्रयोग किया जा रहा है।तो वहीं मानको की दुहाई देने वाले ब्लॉक के जिम्मेदार जेई से लेकर अधिकारी जानबूझकर मूक दर्शक बने हुए हैं।एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विकास कार्यों में पूरी पारदर्शित के साथ मानको को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य कराए जाने के साफ निर्देश आए दिन दिए जा रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>तो वही मिलीभगत से विकास क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में धांधली आम बात हो गई है।सांठगांठ से विकास कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते जा रहे हैं।जिसका जीता जागता उदाहरण यदि देखना हो तो विकासखंड कटरा ग्राम पंचायत परासिया रानी गांव में आकर कभी भी देखा जा सकता है।वही सूत्रों के मुताबिक लाखों की लागत से बनाए जा रहे इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण में मानको को दरकिनार करते हुए बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है।</div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-03/1002840946-(1).jpg" alt="1002840946 (1)"></img></div>
<div>इंटरलॉकिंग सड़क के निर्माण में बॉक्सिंग की जुड़ाई में दोयम दर्जे की ईंटों के साथ घटिया की किस्म की साम्रग्री का प्रयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है।जो भ्रष्टाचार को उजागर करती है।वही इस प्रकरण मुख्य विकास अधिकारी गोंडा से मिलकर  अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि हमें जानकारी नहीं है वीडियो में पीले ईट दिखाई दे रहे हैं इसकी जांच कर कर कार्रवाई की जाएगी।</div>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Mar 2024 21:30:44 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>सीयूजी नंबर के काल को रिसीव करना बीडीओं वर्षा बंग नही समझती मुनासिब</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>बस्तीl</strong> बस्ती जिले के खंड विकास अधिकारी रामनगर सुश्री वर्षा बंग को सीयूजी नंबर पर कॉल आने-जाने से कोई मतलब नहीं है । सीयूजी नंबर किस कार्य के लिए अधिकारियों को जारी किया गया है और सीयूजी नंबर के काल को रिसीव करना चाहिए कि नही यह खंड विकास अधिकारी सुश्री वर्षा बंग मुनासिब नहीं समझती हैं।</div>
<div>  </div>
<div>ब्लॉक मुख्यालय पर कब आती है कब जाती हैं इसकी जानकारी स्वयं खंड विकास अधिकारी अपने पास रखती है यदि किसी स्त्री - पुरुष या अन्य  को विकासखंड रामनगर पर खंड विकास अधिकारी से मिलना हो तो एक सप्ताह विकासखंड रामनगर</div>...]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139676/bdo-varsha-bang-does-not-consider-it-appropriate-to-receive"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240318-wa0196.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>बस्तीl</strong> बस्ती जिले के खंड विकास अधिकारी रामनगर सुश्री वर्षा बंग को सीयूजी नंबर पर कॉल आने-जाने से कोई मतलब नहीं है । सीयूजी नंबर किस कार्य के लिए अधिकारियों को जारी किया गया है और सीयूजी नंबर के काल को रिसीव करना चाहिए कि नही यह खंड विकास अधिकारी सुश्री वर्षा बंग मुनासिब नहीं समझती हैं।</div>
<div> </div>
<div>ब्लॉक मुख्यालय पर कब आती है कब जाती हैं इसकी जानकारी स्वयं खंड विकास अधिकारी अपने पास रखती है यदि किसी स्त्री - पुरुष या अन्य  को विकासखंड रामनगर पर खंड विकास अधिकारी से मिलना हो तो एक सप्ताह विकासखंड रामनगर का चक्कर लगाना पड़ेगा क्योंकि खंड विकास अधिकारी के मनचाहा डियूटी क्षेत्रवासियों में नाराजगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आदेश दिया था कि समस्त अधिकारी अपने-अपने कार्यालय में सुबह 10:00 बजे पहुंच कर आमजन मानस की समस्याओं को सुने और गुणवत्ता पूर्वक उनका निस्तारण करें।</div>
<div> </div>
<div>सुश्री वर्षा बंग ऐसी खंड विकास अधिकारी हैं जो मुख्यमंत्री के आदेश को नही मानती है चाहे आमजन मानस की समस्या हो / अन्य कोई समस्या । खंड विकास अधिकारी अपने अनुसार ड्यूटी करती हैं एवं अपने अनुसार मनचाहा फोन रिसीव करती हैं । खंड विकास अधिकारी के मनमानी / मनचाहा कार्यों से प्रदेश सरकार की मनसा पर पानी फेर रहा है।</div>
<div> </div>
<div>पीड़ित एक बार खंड विकास अधिकारी के पास फोन करें या सौ बार फोन करे लेकिन खंड विकास अधिकारी किसी का फोन रिसीव नहीं करेंगी या पुनः न तो कॉल बैक करेंगी । यदि ऐसे ही अधिकारियों का रवैया रहा तो पीड़ितों को न्याय के लिए विकासखंड से लेकर जिले तक चक्कर लगाना पड़ेगा । इसकी सत्यता की जांच के लिए किसी भी कार्य दिवस में फोन के माध्यम से जांच की जा सकती हैं ।</div>]]>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2024 17:39:35 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>बिना फिटनेस और मेंटिनेंस के दौड़ रही मध्यान भोजन योजना मे लगी ओमनी, जिम्मेदार बेखबर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बिना फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रहे वाहन, गाड़ी की सुरक्षा प्रणाली से अंजान]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139256/omni-responsible-for-midday-meal-scheme-running-without-fitness-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/01....,,.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div>
<div><strong>लखीमपुर-खीरी।</strong> मोटर व्हीकल एक्ट में वाहनों की फिटनेस जांच को लेकर कड़े नियम हैं। ज्यादतार वाहन चालक सुरक्षा प्रणाली से अनभिज्ञ हैं। सड़क पर होने वाले अधिकांश दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं। भारत में स्कूल भोजन कार्यक्रम 2001 में शुरू हुआ।इस कार्यक्रम को मध्याह्न भोजन योजना के रूप में पहचाना जाता है।</div>
<div> </div>
<div>यह सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों पर लागू है और पका हुआ मध्याह्न भोजन प्रदान करता है। इसका इरादा इन स्कूलों में छात्रों की पोषण स्थिति ,नामांकन, भागीदारी और ठहराव में सुधार जैसे सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को संबोधित करना है विश्व खाद्य कार्यक्रम ने भारत में इस कार्यक्रम को दुनिया के सबसे बड़े स्कूल भोजन कार्यक्रम में से एक के रूप में मान्यता दी।</div>
<div> </div>
<div>यह कार्यक्रम विभिन्न मध्याह्न भोजन प्रदाताओं (एमडीएमपी) की मदद से पूरे देश में चलाया जाता है। ये एमडीएमपी आमतौर पर रसोई सुविधा से संचालित होते हैं और सीमित संख्या में स्कूलों में पका हुआ भोजन पहुंचाने के लिए डिलीवरी वैन के एक सेट का उपयोग करते हैं। भोजन दोपहर के भोजन के समय (सभी स्कूलों में सामान्य) से पहले वितरित किया जाना आवश्यक है। इसी क्रम में लखीमपुर खीरी जनपद में बिना कागजों के दौड़ रहे वाहनों पर कार्रवाई नहीं हो रहीं हैं।</div>
<div> </div>
<div>UP13AS-5270 की गाड़ी सिंगाही कस्बा से धौरहरा तक विधालयो पर बांटती है खाना एनजीओ की गाड़ी UP13AS-5270 जिसकी 06 सितंबर 2020 तक थी फिटनेस गाड़ी का बीमा 15 जनवरी 24 तक था और प्रदूषण 06 मार्च 2022 तक था।</div>
<div>(बिना फिटनेस बिना प्रदूषण और बिना बीमा के गाड़ियों का संचालन बड़ी लापरवाही उजागर करती है।</div>
<div>सूत्रों की माने तो जनपद में ऐसे कई मामले में पुलिस और परिवहन विभाग लापरवाह बना हुआ है।</div>
</div>
</div>
<div> </div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139256/omni-responsible-for-midday-meal-scheme-running-without-fitness-and</link>
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                <pubDate>Tue, 12 Mar 2024 16:09:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसडीएम ने निजी अस्पतालों, पैथालॉजी सेंटरों में मारा छापा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>महमूदाबाद/सीतापुर</strong> महमूदाबाद नगर में सोमवार को एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बिना पंजीकरण व अवैध तरीकों से संचालित निजी अस्पताल, पैथालॉजी सेंटरों के खिलाफ अभियान चलाया। बताते चलें कि इन दिनों निजी अस्पताल नियमों को दरकिनार कर धड़ल्ले से संचालित हो रहे थे। और पैथालॉजी सेंटरों में मानकों की अनदेखी की जा रही थी। यह गरीब व असहाय मरीजों और तीमारदारों का खून चूसने का काम कर रहे थे। जिसको लेकर उपजिलाधिकारी शिखा शुक्ला एक्शन मोड दिखाई दीं।</div>
<div>  </div>
<div>बता दें कि सुबह से ही एसडीएम व सीएचसी अधीक्षक आशीष वर्मा की संयुक्त टीम के द्वारा</div></div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139145/sdm-raids-private-hospitals-and-pathology-centers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/img-20240304-wa0066.jpg" alt=""></a><br /><div>
<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>महमूदाबाद/सीतापुर</strong> महमूदाबाद नगर में सोमवार को एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने बिना पंजीकरण व अवैध तरीकों से संचालित निजी अस्पताल, पैथालॉजी सेंटरों के खिलाफ अभियान चलाया। बताते चलें कि इन दिनों निजी अस्पताल नियमों को दरकिनार कर धड़ल्ले से संचालित हो रहे थे। और पैथालॉजी सेंटरों में मानकों की अनदेखी की जा रही थी। यह गरीब व असहाय मरीजों और तीमारदारों का खून चूसने का काम कर रहे थे। जिसको लेकर उपजिलाधिकारी शिखा शुक्ला एक्शन मोड दिखाई दीं।</div>
<div> </div>
<div>बता दें कि सुबह से ही एसडीएम व सीएचसी अधीक्षक आशीष वर्मा की संयुक्त टीम के द्वारा प्राइवेट अस्पतालों की आकस्मिक जांच व बड़े स्तर पर कार्यवाही की गई। सबसे पहले उप जिलाधिकारी व स्वास्थ्य विभाग की टीम सिधौली रोड स्थित लखनऊ हॉस्पिटल पहुंची जहां पर जांच टीम ने पाया कि अस्पताल तो रजिस्टर्ड था मगर संस्था में डॉक्टर अनुपस्थित थे। हालांकि एक आयुष नाम के डॉक्टर वहां उपस्थित मिले। जांच में पाया गया कि अस्पताल में गर्भाशय का ऑपरेशन, बच्चों की डिलीवरी, व अबॉर्शन का काम किया जा रहा था।</div>
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<div>नियमों की अनदेखी के चलते पहले तो स्वास्थ्य विभाग टीम द्वारा मरीज को सीएचसी में शिफ्ट करने के साथ साथ अस्पताल को सीज कर दिया गया। इसके तुरंत बाद एसडीएम व स्वास्थ्य विभाग की टीम जीवक नर्सिंगहोम पहुंची। अस्पताल में कोई भी डॉक्टर उपस्थित नहीं मिले साथ ही वहां बीए, एमए की  डिग्री प्राप्त स्टाफ मरीजों का इलाज करता मिला। उप जिलाधिकारी व सीएचसी अधीक्षक की संयुक्त टीम द्वारा जीवक नर्सिंगहोम को भी सीज कर दिया गया। कार्यवाही के तुरंत बाद टीम एवन पैथोलॉजी पहुंची।</div>
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<div>पैथोलॉजी में ना तो डॉक्टर मिले, ना टेक्नीशियन और ना ही रेडियोलॉजिस्ट। जांच में टीम ने पाया की वहां कुछ अल्ट्रासाउंड भी हो चुके थे। जिसके बाद एसडीएम शिखा शुक्ला द्वारा मौके पर ही पैथोलॉजी को सीज कर दिया गया। इसके बाद टीम न्यू नेशनल हॉस्पिटल पहुंची जहां पर टीम ने पाया कि ओटी,आईसीयू व एनआईसीयू नियमों की अनदेखी में चल रहा था। जिसके चलते अस्पताल के आईसीयू व एनआईसीयू को बंद करवा दिया गया। फिर टीम इंडियन हॉस्पिटल पहुंची जहां पर कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। साथ ही डिलीवरी का एक केस भी टीम की पकड़ में आया।</div>
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<div>जिसको देखते हुए अस्पताल को सीज करने की कार्यवाही क्रियान्वन में है। इसी क्रम में टीम समाधान पैथालॉजी व डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंची जहां सब कुछ नियमों के अनुसार पाया गया। हालांकि अधिकारियों द्वारा साफ सफाई व उचित पार्किंग के लिए संस्था को तल्ख़ लहजे में निर्देशित किया गया। अंत में टीम न्यू इंडियन हॉस्पिटल पहुंची जहां अस्पताल बिना चिकित्सक व बिना रजिस्ट्रेशन के चलता मिला।इसके बावजूद भी अस्पताल में डिलीवरी का केस मिला और मरीज मौजूद मिले।</div>
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<div>संयुक्त टीम द्वारा अस्पताल के मरीजों को सीएचसी में शिफ्ट किया गया और फिर अस्पताल को सीज कर दिया गया। सोचने वाली बात तो ये है कि लगभग अस्पतालों के भीतर फार्मेसी बिना रजिस्ट्रेशन के पाई गईं। मीडिया से बात करते हुए एसडीएम शिखा शुक्ला ने बताया कि आगे भी गैर मानकों के साथ संचालित अस्पतालों पर कार्यवाही अनवरत जारी रहेगी।</div>
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                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 15:36:40 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Office Desk Lucknow]]>
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                <title>बरियारी खदान में मजदूरों कि मजदूरी डकार गए माफिया के कर्मचारी </title>
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                        <![CDATA[<div dir="ltr">  </div>
<div dir="ltr"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div dir="ltr"><strong>बाँदा</strong> जनपद के गिरवा में बरियारी मोरंग खदान मे पिछले कई महीनो से गुण्डों का राज चल रहा है। क्या मजाल! कोई उफ कर दे? कहने को तो इस खदान का पट्टेदार कानपुर का  है! परन्तु बैक डोर से खदान की कमान संभालने वाले ऐसे टुच्चे लोग हैं जो रामनामी चादर ओढकर जीवन दायिनी केन नदी की कोख उजाड रहे हैं। </div>
<div dir="ltr">  </div>
<div dir="ltr">जेसीबी और पोकलैण्ड मशीनों से दिन-रात नदी की छाती रहे छनन्नी शनिवार को बांदा डीएम और एसपी की चौखट मे अपना दुखडा सुनाने आये बरियारी गांव के रामबाबू, पवन कुमार, महेश, घनश्याम यादव, रामकिशोर साहू, जगदीश, अशोक,</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139119/mafia-employees-stole-the-wages-of-workers-in-bariyari-mine"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/0.0048.jpg" alt=""></a><br /><div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div dir="ltr"><strong>बाँदा</strong> जनपद के गिरवा में बरियारी मोरंग खदान मे पिछले कई महीनो से गुण्डों का राज चल रहा है। क्या मजाल! कोई उफ कर दे? कहने को तो इस खदान का पट्टेदार कानपुर का  है! परन्तु बैक डोर से खदान की कमान संभालने वाले ऐसे टुच्चे लोग हैं जो रामनामी चादर ओढकर जीवन दायिनी केन नदी की कोख उजाड रहे हैं। </div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">जेसीबी और पोकलैण्ड मशीनों से दिन-रात नदी की छाती रहे छनन्नी शनिवार को बांदा डीएम और एसपी की चौखट मे अपना दुखडा सुनाने आये बरियारी गांव के रामबाबू, पवन कुमार, महेश, घनश्याम यादव, रामकिशोर साहू, जगदीश, अशोक, रामपाल, रामजीवन, गुल्लू, राजकरन, नीरज, बलराम, राजकुमार, बृजेश आदि लोगांे ने बताया कि हम लोग बरियारी बालू खदान में अड्डी के रख-रखाव का कार्य करते रहे हैं।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">खदान संचालक के कर्मचारी ने हमें 250 प्रति ट्रक देने को कहा था लेकिन अब 50 रूपये प्रति ट्रक देने की बात कह रहे हैं जबकि ट्रक वालांे से 500 रूपये प्रति ट्रक लिया जाता है। एक महीने से ज्यादा हो गये, मजदूरी नहीं दे रहे। कहते हैं-50 रुपये प्रति ट्रक लेना हो तो ले लो, वरना कुछ भी नहीं देंगे। ज्यादा चिल्लपों मचाया तो यहीं मारकर नदी की रेत मे दफना देंगे। कोई कुछ नहीं कर पायेगा। विरोध करने पर खदान वालों ने पुलिस बुलाई और हमें धमकाकर शांत करा दिया गया। </div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">डीएम और एसपी से शिकायत करने आये ग्रामीणों ने बताया कि जेसीबी और पोकलैण्ड मशीनों से खदान वालों ने नदी मे जगह-जगह गहरे गड्ढे कर दिये है। नदी की मध्यधारा से लेकर अगल-बगल 25 से लेकर 30 फिट की गहराई तक खनन किया जा रहा है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिये। रोकने, मना करने पर राईफल-बंदूके लेकर चढ दौडते हैं।</div>
<div dir="ltr"> </div>
<div dir="ltr">गांव वालों के विरोध करने पर खदान के कर्मचारी कहते हैं कि हम ऐसी धारा लगवायेंगे कि तुम जेल में ही सडते रहोगे, तुम्हारी औकात कीडे मकौडे से ज्यादा नहीं है।  ग्रामीणों का कहना है कि हमारी मजदूरी दिलाई जाये और खदान वाले गुण्डांे से हमें निजात दिलाई जाये। इनकी गुण्डागर्दी से गांव की महिलायें नदी की तरफ जाने से डरती हैं। हम गांव वाले अपनी ही नदी का कोई इस्तेमाल सदुपयोग नहीं कर पा रहे हैं। नदी और आसपास खदान के गुण्डांे की राइफलें लहराती रहती हैं।</div>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Mar 2024 17:11:26 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Office Desk Lucknow]]>
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                <title>घटिया ईट और मसाले से बाउंड्रीवाल का हो रहा निर्माण</title>
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                        <![CDATA[<p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>कमासिन/बांदा। </strong>विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मऊ के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय कुरेहा पुरवा में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों की बाउंड्री वॉल निर्माण हेतु शिक्षक अभिभावक समिति के संयुक्त खाते में भेजी गई धनराशि 4 लाख 42 हजार रुपए से घटिया ईट सहित मानक के विपरीत बालू सीमेंट के मिश्रण से गुणवत्ता विहीन दीवाल का निर्माण कराया जा रहा है ।उक्त जानकारी कुरेहा के ग्रामीण कमतू, जगतपाल, सनेइहा, कमलेश, राजाराम ने देते हुए शीघ्र जांच कराए जाने की मांग की है।</p>
<p>ज्ञात हो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा स्तर के सुधार एवं विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्कूल</p>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139118/boundary-wall-is-being-constructed-with-poor-quality-bricks-and"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/0.0047.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></p>
<p><strong>कमासिन/बांदा। </strong>विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मऊ के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय कुरेहा पुरवा में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों की बाउंड्री वॉल निर्माण हेतु शिक्षक अभिभावक समिति के संयुक्त खाते में भेजी गई धनराशि 4 लाख 42 हजार रुपए से घटिया ईट सहित मानक के विपरीत बालू सीमेंट के मिश्रण से गुणवत्ता विहीन दीवाल का निर्माण कराया जा रहा है ।उक्त जानकारी कुरेहा के ग्रामीण कमतू, जगतपाल, सनेइहा, कमलेश, राजाराम ने देते हुए शीघ्र जांच कराए जाने की मांग की है।</p>
<p>ज्ञात हो उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा स्तर के सुधार एवं विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्कूल बैग, जूता मोजा, निशुल्क पाठ्य पुस्तक, मिड डे मिल बच्चों को उपलब्ध करा कर उत्तम व्यवस्था हेतु प्रयासरत हैं। वही विद्यालयों में शिक्षक अभिभावक समिति का गठन विद्यालय में शैक्षिक वातावरण बनाने, सुरक्षा व्यवस्था हेतु ,विभाग द्वारा बाउंड्री वाल का निर्माण कराए जाने हेतु धन उपलब्ध कराया गया है।</p>
<p>जिसका समुचित उपयोग नहीं किए जाने पर ग्रामीणों ने शिकायत करते हुए बताया कि पुरानी बाउंड्री वाल की नींव के ऊपर डीपीसी डालकर तृतीय श्रेणी का ईट एवं आठ बोरी बालू एक बोरी सीमेंट का घटिया मिश्रण तैयार कर दीवाल बनाई जा रही, जो मानक के विपरीत और गुणवत्ता विहीन है ।प्रधानाध्यापक प्रदीप मिश्रा के अनुसार विद्यालय की सुरक्षा हेतु 120 मी बाउंड्री वाल का निर्माण 3500 रुपए प्रति मीटर की दर से स्वीकृत एस्टीमेट से 48 मीटर दीवाल का निर्माण कराया जा रहा है। शेष 72 मीटर दीवाल बनाने में विवाद होने के कारण स्वीकृत धनराशि चार लाख 42 हजार में से शेष धन विभाग को वापस कर दिया जाएगा।</p>
<p>कार्यदाई संस्था शिक्षक अभिभावक समिति है। उक्त संदर्भ में खंड शिक्षा अधिकारी से दूरभाष पर मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीणों की शिकायत गुणवत्ता विहीन निर्माण की दी गई तो उन्होंने बताया की अनुमानित धनराशि 4 लाख42 हजार में से जितनी मीटर दीवाल बनेगी उतना खर्च कर शेष धन राशि विभाग को वापस कराई जाएगी और अनियमितता की जांच मौके पर जाकर जिला समन्वय समिति के द्वारा कराई जाएगी ।मेरे द्वारा भी निर्माण कार्यों और विद्यालय का स्वयं निरीक्षण किया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>जन समस्याएं</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139118/boundary-wall-is-being-constructed-with-poor-quality-bricks-and</link>
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                <pubDate>Sun, 03 Mar 2024 17:08:06 +0530</pubDate>
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                <title>शासनादेश का मखौल उड़ाते हुए अपनी ही फर्म से सामग्री खरीद रहे प्रधान </title>
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                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>लखीमपुर खीरी</strong> विकासखंड फूलबेहड के अंतर्गत ग्राम पंचायत सफियापुर के ग्राम प्रधान सुनील कुमार वर्मा पर शासनादेश का अतिक्रमण करने तथा अपनी ही फर्म पारुल इंटरप्राइजेज महेवागंज से ईटा क्रय किए जाने का मामला जन चर्चा का विषय बना है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पारुल इंटरप्राइजेज या ईट भट्टा का स्वामी सुनील कुमार वर्मा है। और उनके घर के ही रिश्तेदार ग्राम पंचायत सचिव व सफाई कर्मी भी है ।जो उनकी ग्राम पंचायत में तैनात हैं।</div>
<div>  </div>
<div>उक्त लोग अन्य प्रधानों पर दबाव बनाकर पारुल इंटरप्राइजेज से ईटा खरीदने का  दबाव बनाते देखे जा सकते हैंऔर पारुल</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/139112/pradhan-is-buying-material-from-his-own-firm-while-making"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-03/0.0046.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>लखीमपुर खीरी</strong> विकासखंड फूलबेहड के अंतर्गत ग्राम पंचायत सफियापुर के ग्राम प्रधान सुनील कुमार वर्मा पर शासनादेश का अतिक्रमण करने तथा अपनी ही फर्म पारुल इंटरप्राइजेज महेवागंज से ईटा क्रय किए जाने का मामला जन चर्चा का विषय बना है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पारुल इंटरप्राइजेज या ईट भट्टा का स्वामी सुनील कुमार वर्मा है। और उनके घर के ही रिश्तेदार ग्राम पंचायत सचिव व सफाई कर्मी भी है ।जो उनकी ग्राम पंचायत में तैनात हैं।</div>
<div> </div>
<div>उक्त लोग अन्य प्रधानों पर दबाव बनाकर पारुल इंटरप्राइजेज से ईटा खरीदने का  दबाव बनाते देखे जा सकते हैंऔर पारुल इंटरप्राइजेज फर्म से मानक विहीन ईटों की सप्लाई करवाते हैं। जिससे भारी भरकम कमीशन पाकर दोनों बाटकर अपनी अपनी जेबें भरने में लगे दिखाई पड़ रहे हैं ।सफियापुर के प्रधान सुनील कुमार वर्मा के इस भ्रष्टाचारी खेल में पंचायत सचिव से लेकर सफाई कर्मी तक के हिस्सेदारी रहने का मामला प्रकाश में आया है। प्रधानों व ग्रामीणों ने बताया कि उक्त ईट भट्टा में मानक बिहीन ईट बनाई जाती है।</div>
<div> </div>
<div>तथा जीएसटी चोरी किए जाने के भी आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाये जा रहे हैं। मामला यहां तक चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब कोई प्रधान दो ट्राली ईट खरीदता है तो उसे तीन ट्राली का बिल बना कर दिया जाता है।और इससे भारी भरकम कमीशन की कमाई किए जाने का खेल खेले जाने  की चर्चा का बाजार गर्म है। उक्त ग्राम प्रधान द्वारा धनबल के दम पर अफसर के कलम खरीद लिए जाने की बात सामने आई है ।लोगों के बताए अनुसार उक्त प्रधान प्रतिमाह लेबर इंस्पेक्टर को बंधी रकम पहुंचाते हैं।</div>
<div> </div>
<div>जिससे उनके भट्टे पर बाल मजदूर भी काम करते दिखाई दिए। भट्टा स्वामी के द्वारा बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किए जाने का मामला भी चर्चा का विषय बना है। उक्त ग्राम प्रधान व इनके फर्म पारुल इंटरप्राइजेज सहित ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों में खरीदी की गई सामग्री की निष्पक्ष कराई जाए जांच तो भारी अनियमिततार्ओं का होगा पर्दाफाश। और सचिव साहब भी होंगे बेनकाब तथा शासन के शासनादेश का मखौल उड़ाए जाने का मामला भी आएगा खुलकर सामने ।देखना अब यह है कि प्रशासन मामले की जांच करता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डालकर दफन कर देता है।</div>
<div> </div>]]>
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                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/139112/pradhan-is-buying-material-from-his-own-firm-while-making</link>
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                <pubDate>Sun, 03 Mar 2024 16:42:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डीएम के आदेश के बावजूद नहीं हटा बंजर भूमि से कब्जाः लेखपाल पर मनमानी का आरोप</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के हरैया तहसील के लेखपाल डीएम का आदेश नहीं मानते हैं डीएम के आदेश के बावजूद बंजर भूमि पर अवैध निर्माण करवा रहे हैं लेखपाल  राम सुमेर जन सुनवाई में जिलाधिकारी  के निर्देश के बावजूद बंजर भूमि से कब्जा नहीं हटाया जा रहा है। इस सम्बन्ध में कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मानपुर निवासी वरूणतिवारीनउच्चाधिकारियोें को पत्र भेजकर बंजर जमीन से अवैध निर्माण हटवाने की मांग किया हैै।</div>
<div>  </div>
<div>जन सुनवाई और उच्चाधिकारियों को भेजे रजिटर्ड पत्र में वरूण तिवारी ने कहा है कि कप्तानगंज विकास खण्ड क्षेत्र के बनहा ग्राम पंचायत के तहत मानपुर निवासी बुद्धिराम,</div>...]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138925/encroachment-from-barren-land-not-removed-despite-dms-order-lekhpal"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/0.00415.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>बस्ती।</strong> बस्ती जिले के हरैया तहसील के लेखपाल डीएम का आदेश नहीं मानते हैं डीएम के आदेश के बावजूद बंजर भूमि पर अवैध निर्माण करवा रहे हैं लेखपाल  राम सुमेर जन सुनवाई में जिलाधिकारी  के निर्देश के बावजूद बंजर भूमि से कब्जा नहीं हटाया जा रहा है। इस सम्बन्ध में कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मानपुर निवासी वरूणतिवारीनउच्चाधिकारियोें को पत्र भेजकर बंजर जमीन से अवैध निर्माण हटवाने की मांग किया हैै।</div>
<div> </div>
<div>जन सुनवाई और उच्चाधिकारियों को भेजे रजिटर्ड पत्र में वरूण तिवारी ने कहा है कि कप्तानगंज विकास खण्ड क्षेत्र के बनहा ग्राम पंचायत के तहत मानपुर निवासी बुद्धिराम, मुन्नीलाल, पुत्रगण लुटावन ने खाता संख्या 149 एवं 150 जो अभिलेखोें में बंजर एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि है उस पर बिना पट्टे के हल्का लेखपाल राम सुमेर की मिलीभगत से कब्जा कर लिया है और मकान बनवाने जा रहा है। उसने रास्ते में गड्ढा खनवा दिया है जिससे आवागमन में असुविधा हो रही है।</div>
<div> </div>
<div>वरूण तिवारी इसकी शिकायत जन सुनवाई में भी किया। जिलाधिकारी ने हर्रैया उप जिलाधिकारी को निर्देश दिया कि बजंर भूमि खाली कराकर आख्या दें। वरूण के अनुसार डीएम के आदेश पर अभी तक उप जिलाधिकारी चुप्पी साधे हुये हैं और लेखपाल राम सुमेर  धमकी दे रहे हैं कि वे लेखपाल संघ का अध्यक्ष हैं, जैसा वे चाहेंगे वैसा ही होगा। जितनी शिकायत करनी हो कर लो, दरख्वास्त देने से मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा, मैं चाहंू तो तुम्हारे खिलाफ एस.सी.एस.टी. एक्ट में दलित उत्पीड़न का मुकदमा लिखवाकर जिन्दगी बरबाद कर दूंगा।</div>
<div> </div>
<div>कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मानपुर निवासी वरूण तिवारी ने उच्चाधिकारियोें से मांग किया है कि बंजर भूमि से अवैध कब्जा हटवाने के साथ ही अवैध निर्माण को ध्वस्त कराते हुये संरक्षण देने वाले हल्का लेखपाल रामसुमेर के विरूद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित कराया जाय। यदि उनके विरूद्व कोई षड़यंत्र होता है तो इसके लिये बुद्धिराम, मुन्नीलाल, पुत्रगण लुटावन के साथ ही लेखपाल को भी जिम्मेदार माना जाय।  लेखपाल द्वारा बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं लेखपाल ऐसी दशा में ग्रहण ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है यूपी जिला अधिकारी मामले को संज्ञान लेने की बात कही है और तत्काल मौके पर जांच कर कार्रवाई की जाएगीl</div>]]>
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                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>ब्रेकिंग न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Feb 2024 17:19:42 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गौ संचालको की उदासीनता बना हुआ गौ वँशो के मौत का सबब</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>बलरामपुर<br /></strong></div>
<div>  </div>
<div>जहां गौ संरक्षण पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करके उनके व्यवस्थाओं को चुस्त दुरुस्त रखने का लगातार दावे योगी आदित्य नाथ सरकार के द्वारा किया जा रहा है तो वही जमीनी स्तर पर गौ वँशो  की हालत काफी दयनीय है। जहां भूख व इलाज के अभाव में लगातार गौवंश दम तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। वही देखा जा रहा है कि गौशाला के आहार और पौष्टिक पदार्थ व इलाज में मिलने वाले धन को कागज में भले ही गौवंश के इलाज और भोजन के लिए व्यव दिखाया जाता हो</div>
<div>  </div>
<div>लेकिन अक्सर गौ आश्रय केंद्र का</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138810/indifference-of-cow-handlers-has-become-the-reason-for-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/img-20240217-wa0004.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>बलरामपुर<br /></strong></div>
<div> </div>
<div>जहां गौ संरक्षण पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करके उनके व्यवस्थाओं को चुस्त दुरुस्त रखने का लगातार दावे योगी आदित्य नाथ सरकार के द्वारा किया जा रहा है तो वही जमीनी स्तर पर गौ वँशो  की हालत काफी दयनीय है। जहां भूख व इलाज के अभाव में लगातार गौवंश दम तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। वही देखा जा रहा है कि गौशाला के आहार और पौष्टिक पदार्थ व इलाज में मिलने वाले धन को कागज में भले ही गौवंश के इलाज और भोजन के लिए व्यव दिखाया जाता हो</div>
<div> </div>
<div>लेकिन अक्सर गौ आश्रय केंद्र का हालत यह है कि वहां गौ आश्रय संचालक और विभागीय जिम्मेदारों के मिलीभगत का बोल बाला है और सरकारी धन के बंदरबाट का खेल लगातार खेला जा रहा है।जिसकी तस्वीर अक्सर  गौ आश्रय केंद्रों की दुर्दशा देखने के लिए पर्याप्त है।तस्वीर बताती है व्यवस्थाएं क्या है और किस प्रकार गौवंश को मरने के लिये छोड़ दिया जाता है।</div>
<div> </div>
<div><strong><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-02/img-20240217-wa0005.jpg" alt="IMG-20240217-WA0005"></img></strong></div>
<div> </div>
<div>जबकि योगी सरकार में गौ आश्रय केंद्र में गौवँशो को संरक्षण को लेकर पर्याप्त मात्रा में धन खर्च किये जा रहे के दावे होते है  फिर भी गौ संरक्षण के दावे फेल के लिए पर्याप्त है। जबकि लगातार गौशाला में भ्रष्टाचार का खेल खेलने की बात सामने आ रही है जहां पर गौ संरक्षण व सेवा के नाम पर गौ संचालक और स्थानीय जिम्मेदारों की मिली भगत का खेल लगातार जारी है जिसका दंश कहीं ना कहीं गौशाला  में रहने वाले गौ वँशो को झेलना पड़ रहा है और उनकी लगातार मौत हो रही है और उनके शव को चील कौवो और कुत्तों का निवाला बनने के लिये बाहर फेंक दिया जाता है।</div>
<div> </div>
<div>ताजा मामला जनपद बलरामपुर के विकासखंड तुलसीपुर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिकटिहवा में बने गौशाला का है जहां पर भूख और इलाज के अभाव में लगभग आधा दर्जन से अधिक गौवँशो के मरने के बाद लाश गौशाला के बगल में बह रही सीरिया नाल पर पड़ा देखा जा रहा है और उनके लाश को चील कौवे तथा कुत्ते नोच कर अपना निवाला बना रहे हैं जिसकी तस्वीर देखने को मिल रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2024-02/img-20240217-wa0006.jpg" alt="IMG-20240217-WA0006"></img></div>
<div> </div>
<div>ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार गौ आश्रय केंद्रों के द्वारा गौवंश संरक्षण की बात कह रही है वह कितना सच है और कितना सटीक है जिसको लेकर सम्बन्धित अधिकारियों को इसका जवाब देना पड़ेगा कि इतनी व्यवस्था के बाद भी गौवंश की हालत इस प्रकार कैसे है। जबकि इससे पहले भी पचपेड़वा विकास खण्ड के इम्लियाकोडर में ऐसा मामला प्रकाश में आया था</div>
<div> </div>
<div>जिसमे आधे दर्जन से अधिक मौत के बाद उनके लाशों को जंगली जानवर और चील कौवो का निवाला बनने के लिये खलिहान में फेंक दिया गया था जिसको लेकर काफी हलचल भी हुई थी। जबकिं योगी सरकार का यह भी कहना है कि गौ आश्रय केंद्रों में भ्रष्टाचार होने पर किसी को भी बक्शा नहीं जाएगा । इस सम्बंध में जब विकास खण्ड अधिकारी तुलसीपुर से बात की जाती है तो उनका कहना कि पंचायत सेक्रेटरी से बात कर के पता करता हूं जो एक बड़ा जांच का विषय है।</div>
<div> </div>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Feb 2024 16:10:13 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Swatantra Prabhat Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>पशुओं का आहार बनकर रह गया पोषाहार </title>
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                        <![CDATA[<div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>लखीमपुर खीरी</strong> बाल विकास परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह गई है। पोषाहार खुले बाजार में पशुओं का आहार बनकर रह गया है। वहीं दूसरी तरफ से शिशु, गर्भवती तथा धात्री महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं।बताते चलें गांव में आंगनबाड़ी केदो पर सरकार बाल विकास परियोजना के मध्य लाखों रुपए खर्च कर रही है। केंद्रों पर बच्चों को पढ़ने लिखने टीकाकरण खेल का सामान पौष्टिक पदार्थ पोषाहार आदि की व्यवस्था की जा रही है।</div>
<div>  </div>
<div>आंगनवाड़ी कार्यकर्ती व सहायिका को वेतन के अलावा भवनो के कायाकल्प का आदेश दिया गया है। और गौरतलब हो कि शिशु एवं</div>...]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/138793/nutrition-remained-as-food-for-animals"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2024-02/21_07_2022-fake_certificate_22910755.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div><strong>लखीमपुर खीरी</strong> बाल विकास परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह गई है। पोषाहार खुले बाजार में पशुओं का आहार बनकर रह गया है। वहीं दूसरी तरफ से शिशु, गर्भवती तथा धात्री महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं।बताते चलें गांव में आंगनबाड़ी केदो पर सरकार बाल विकास परियोजना के मध्य लाखों रुपए खर्च कर रही है। केंद्रों पर बच्चों को पढ़ने लिखने टीकाकरण खेल का सामान पौष्टिक पदार्थ पोषाहार आदि की व्यवस्था की जा रही है।</div>
<div> </div>
<div>आंगनवाड़ी कार्यकर्ती व सहायिका को वेतन के अलावा भवनो के कायाकल्प का आदेश दिया गया है। और गौरतलब हो कि शिशु एवं गर्भवती माता तथा धात्रियों की मृत्यु दर कम करने के लिए सरकार अति महत्वाकांक्षी योजना बाल विकास परियोजना मानी जाती है। लेकिन भ्रष्टाचारियों व कार्यकृतियों के भ्रष्टाचार के चलते योजना को पलीता लग रहा है। खेलकूद वा पोषाहार आदि वितरण न हो पाने के कारण बच्चे कमजोर हो रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>वहीं दूसरी तरफ आंगनवाड़ी में अनियमितता  के चलते भवन दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं। खुलेआम पोषाहार बाजार में बेचा जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक कार्यकर्ती  से सुपरवाइजर सीडीपीओ व डीपीओ तक पैसों का बंदर वाट किए जाने का मामला जन चर्चा का विषय बना है।बाल विकास परियोजना पैसा कमाने की मशीन बनकर रह गई है। पर इस योजना की जांच एवं निगरानी तथा कोई कार्यवाही ही नहीं होती है। कार्यवाही न होने से अधिकांश लोग शिकायत करने से भी घबराते और कतराते नजर आ रहे हैं।</div>
<div> </div>
<div>कुछ आंगनबाड़ी केंद्र कार्य कत्री ऐसी भी हैं जिन्हें तैनाती वाले गांव में उत्तर दक्षिण दिशा तक का ज्ञान नहीं है ।और कई कार्यकत्री एवं सहायिका फर्जी अंक पत्रों पर नौकरी कर रही हैं। वह वर्षों से लेनदेन करके अपने पदों पर फर्जी अंक पत्रों के सहारे तैनात देखी जा सकती हैं। आलम तो यहां तक है कि कुछ कार्य कत्री की एवज में दूसरे लोग फर्जी तौर पर कार्यरत हैं। तो कुछ फर्जी डिग्रियों की दम पर नौकरी कर रही है। इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत परसेहरी में तैनात मीना कुमारी के अंक पत्रों की जांच कराकर देखी जा सकती है लोगो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया मीना कुमारी फर्जी अंक पत्रों पर बतौर आंगनवाड़ी कार्यकर्ती नौकरी कर रहीं हैं।</div>
<div> </div>
<div>इसके लिए सीडीपीओ द्वारा कार्य कत्री से ₹1200 प्रति माह तो सहायिका से ₹700 प्रतिमाह वसूल किए जाने का मामला सूत्रों द्वारा प्रकाश में लाया गया है ।कुल मिलाकर बाल विकास परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह गई है ।जब कभी सीडीपीओ फूल बेहड लखीमपुर व निघासन से उनके मोबाइल नंबर 8787 070806 पर 20-20 कॉल करके जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है तो काल जाती रहती है ।घंटी बजती रहती है। लेकिन फोन रिसीव करना उचित नहीं समझा जाता है ।जिससे उनके पक्ष की जानकारी भी नहीं मिल पाती है।</div>]]>
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                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/138793/nutrition-remained-as-food-for-animals</link>
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                <pubDate>Thu, 15 Feb 2024 18:31:51 +0530</pubDate>
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