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                <title>Farmer success story - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Farmer success story RSS Feed</description>
                
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                <title>अब कानपुर के खेतों, तालाबों में खिल रहे हैं मोती </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
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<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/183735/now-pearls-are-blooming-in-the-fields-and-ponds-of"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1002109825.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>खेत तालाब अब केवल सिंचाई और वर्षा जल संचयन तक सीमित नहीं रह गए हैं। कानपुर नगर के बिधनू विकासखंड स्थित ग्राम सम्भुआ में एक खेत तालाब में मोती उत्पादन और मत्स्य पालन का अभिनव प्रयोग किया जा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 30 हजार सीपियों पर आधारित इस परियोजना में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं। इनमें चयनित सीपियों में विशेष मोल्ड तकनीक के माध्यम से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल विकसित किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">लगभग 18 से 20 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना से तैयार होने वाले मोती करीब 50 लाख रुपये में बिकने का अनुमान है, जबकि मत्स्य पालन से प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने इस परियोजना का निरीक्षण कर अधिकारियों को इसे जनपद के अन्य खेत तालाब लाभार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत भूमि संरक्षण अनुभाग द्वारा ग्राम सम्भुआ निवासी श्रीमती रश्मि वर्मा के खेत में 22 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा एवं तीन मीटर गहरा खेत तालाब निर्मित कराया गया है। योजना के तहत उन्हें खेत तालाब निर्माण पर 50 प्रतिशत (अधिकतम ₹52,500) का अनुदान डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग एवं मणि एग्रो हब के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्होंने तालाब में मोती की खेती शुरू की। वर्तमान में इस परियोजना को लगभग नौ माह पूरे हो चुके हैं तथा करीब 18 माह में मोती तैयार हो जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परियोजना की विशेषता यह है कि चयनित सीपियों में विशेष साँचे (मोल्ड) प्रत्यारोपित किए गए हैं, जिन पर सीपी प्राकृतिक रूप से मोती की परतें चढ़ाती है। इसी प्रक्रिया से स्वस्तिक, भगवान गणेश, पुष्प, पत्तियों तथा अन्य कलात्मक आकृतियों वाले डिजाइनर पर्ल तैयार किए जा रहे हैं। सामान्य गोल मोतियों की तुलना में ऐसे डिजाइनर पर्ल आभूषण एवं सजावटी बाजार में अधिक मांग वाले उत्पाद माने जाते हैं, जिससे बेहतर मूल्य मिलने की संभावना रहती है। वहीं सामान्य सीपियों में प्रति सीपी दो मोती तैयार किए जा रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता भी बढ़ रही है।</div>
<div style="text-align:justify;">परियोजना के साथ मत्स्य पालन को भी जोड़ा गया है। रश्मि वर्मा ने बताया कि उनके दूसरे खेत तालाब में मत्स्य पालन किया जा रहा है और अब तक तीन बार मत्स्य उत्पादन किया जा चुका है। इससे प्रतिवर्ष लगभग चार लाख रुपये की अतिरिक्त आय होने की संभावना है। उन्होंने अन्य किसानों से भी खेत तालाबों का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित न रखकर मत्स्य पालन, मोती की खेती तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ने की अपील की।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 17:37:47 +0530</pubDate>
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                <title>जहां खेतों में उग रही है तरक्की की नई कहानी, भीटी हवेली के किसान बदल रहे खेती की तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> बिल्हौर तहसील का छोटा सा गांव भीटी हवेली अब खेती के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और बढ़ती आय की एक सशक्त कहानी आकार ले रही है। परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान वैज्ञानिक विधियों से मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती</div>
<div style="text-align:justify;">सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर यहां की उन्नत खेती पद्धतियों को करीब से देखा।</div>
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<div style="text-align:justify;">खेतों में विकसित मल्टी लेयर फार्मिंग की संरचनाएं और उनमें एक साथ उगती विविध फसलें</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174040/where-a-new-story-of-progress-is-growing-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001766561.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> बिल्हौर तहसील का छोटा सा गांव भीटी हवेली अब खेती के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और बढ़ती आय की एक सशक्त कहानी आकार ले रही है। परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान वैज्ञानिक विधियों से मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती</div>
<div style="text-align:justify;">सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर यहां की उन्नत खेती पद्धतियों को करीब से देखा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खेतों में विकसित मल्टी लेयर फार्मिंग की संरचनाएं और उनमें एक साथ उगती विविध फसलें इस बात का प्रमाण थीं कि यदि सोच बदली जाए तो खेती भी पूरी तरह बदल सकती है। निरीक्षण के दौरान उपनिदेशक कृषि आर.एस. वर्मा एवं जिला कृषि अधिकारी प्राची पांडेय भी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भीटी हवेली जैसे गांव पूरे जनपद के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव में कुल 453 कृषक हैं और 225 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर खेती होती है। इनमें से 375 किसान करीब 175 हेक्टेयर क्षेत्र में जायद मक्का की खेती कर रहे हैं। यहां गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों का दायरा सीमित हो गया है और उनकी जगह मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती ने ले ली है, जिससे किसानों की आय में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव की पहचान बन चुकी मल्टी लेयर फार्मिंग अब किसानों के लिए आय का मजबूत आधार बन रही है। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 50 किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं, जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग स्तरों पर कई फसलें उगाई जाती हैं। जिलाधिकारी ने प्रगतिशील किसान सुनील सिंह कटियार के खेत का अवलोकन किया, जहां एक ही संरचना में परवल, कुंदरू, बैंगन और फूलों की खेती एक साथ की जा रही है। यह मॉडल न केवल भूमि का बेहतर उपयोग करता है, बल्कि जोखिम को कम कर आय के कई स्रोत भी सुनिश्चित करता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>आपका शहर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:21:56 +0530</pubDate>
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