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                <title>Agriculture innovation India - Swatantra Prabhat</title>
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                <title>‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ से बदली किसान की किस्मत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश सरकार की ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना का असर अब गांवों में साफ दिखने लगा है। सरसौल ब्लॉक के पाली भोगीपुर गांव के प्रगतिशील किसान राम जीवन ने आधुनिक स्प्रिंकलर तकनीक अपनाकर न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि पानी और बिजली की बचत का भी उदाहरण पेश किया है। राम जीवन ने बताया कि पहले पारंपरिक सिंचाई पद्धति में काफी पानी बर्बाद हो जाता था, लेकिन अब स्प्रिंकलर प्रणाली से फसलों को जरूरत के अनुसार पानी मिल रहा है। इससे पानी की खपत में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आई है और फसल की गुणवत्ता भी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176242/farmers-fortunes-changed-with-per-drop-more-crop-up-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/1001831608.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर। </strong>उत्तर प्रदेश सरकार की ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना का असर अब गांवों में साफ दिखने लगा है। सरसौल ब्लॉक के पाली भोगीपुर गांव के प्रगतिशील किसान राम जीवन ने आधुनिक स्प्रिंकलर तकनीक अपनाकर न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि पानी और बिजली की बचत का भी उदाहरण पेश किया है। राम जीवन ने बताया कि पहले पारंपरिक सिंचाई पद्धति में काफी पानी बर्बाद हो जाता था, लेकिन अब स्प्रिंकलर प्रणाली से फसलों को जरूरत के अनुसार पानी मिल रहा है। इससे पानी की खपत में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आई है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पहले जहां 8.5 बीघा खेत की सिंचाई के लिए 10 एचपी की मोटर घंटों चलानी पड़ती थी, अब वही काम 5 एचपी की मोटर से कम समय में पूरा हो रहा है। इससे बिजली खर्च में भी बड़ी बचत हुई है। स्प्रिंकलर के जरिए पानी सीधे पौधों तक पहुंचता है, जिससे कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो पा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राम जीवन ने बताया कि इस सिस्टम को लगाने में सरकार की ओर से 90 प्रतिशत अनुदान मिला, जिससे लाखों रुपये की लागत वाला यह सिस्टम उन्हें मात्र 27 हजार रुपये में उपलब्ध हो गया। किसान की इस सफलता से क्षेत्र के अन्य किसानों में भी आधुनिक तकनीक अपनाने की रुचि बढ़ी है। यह पहल न केवल खेती को लाभकारी बना रही है, बल्कि गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ख़बरें</category>
                                            <category>किसान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 19:14:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया।  संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/10017075881.jpg" alt="इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत" width="1200" height="800" /></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की सबसे बड़ी उर्वरक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175845/iffco-launches-nationwide-nano-fertilizer-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/10017075891.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong> इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत। इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर  शुभारंभ किया।  संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/10017075881.jpg" alt="इफको द्वारा देशव्यापी नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान की शुरुआत" width="1200" height="800"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था, ने आधिकारिक रूप से इफको नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक व्यापकऔर एकीकृत राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य भारतीय किसानों में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना है। यह अभियान  प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अ मित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘सहकार से समृद्धि’ जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत के राजपत्र के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में नैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को शामिल किया जाना भारतीय कृषि नवाचार यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया गया, जो भारतीय सहकारिता के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे बताया कि कोयंबटूर स्थित इफको-नैनोवेंशन्स में इफको का इनोवेशन हब तथा ब्राज़ील में स्थापित होने वाला नैनो उर्वरक उत्पादन संयंत्र — जो जून 2026 तक शुरू होने की संभावना है — कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता का प्रतीक है। संघाणी ने कहा कि भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा</div>
<div style="text-align:justify;">है, जहां परंपरा और तकनीक का संगम हो रहा है, और यही संयोजन भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहा है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित सहकारिता मंत्रालय का संचालन देश के प्रथम सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। ‘सहकार से समृद्धि’ का मंत्र इस अभियान की भावना को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत, आत्मनिर्भर कृषि’ के लक्ष्य को साकार करता है। संघाणी ने नैनो उर्वरक क्रांति को भारतीय कृषि के लिएपरिवर्तनकारी क्षण बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस नैनो महा अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता और परिवर्तन अभियान के रूप में तैयार किया गया है, जिसके चार मुख्य उद्देश्य हैं—</div>
<div style="text-align:justify;"> नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK, नैनो जिंक और नैनो कॉपर</div>
<div style="text-align:justify;">का व्यापक प्रचार</div>
<div style="text-align:justify;"> किसानों को मुख्य रूप से फोलियर स्प्रे के माध्यम से सही उपयोग का</div>
<div style="text-align:justify;">प्रशिक्षण देना</div>
<div style="text-align:justify;"> पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करनासहकारी नेटवर्क के माध्यम से अंतिम स्तर तक पहुंच सुनिश्चित करना।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रत्येक PACS को मजबूत बनाकर और क्षेत्रीय प्रदर्शन के माध्यम से आगे बढ़ाना होगा। जब किसान स्वयं परिणाम देखेंगे, तब विश्वास स्वतः बढ़ेगा।” अपने संबोधन के अंत में श्री दिलीप संघाणी ने इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा तथा किसानों की आय</div>
<div style="text-align:justify;">बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा, “आइए हम सब मिलकर संकल्प लें — कम लागत, अधिक उत्पादन और स्वस्थ पर्यावरण — हर खेत में नैनो उर्वरक, यही नया भारत है, यही आत्मनिर्भर भारत है।” इफको ने 218 लाख से अधिक बोतल नैनो यूरिया प्लस लिक्विड और</div>
<div style="text-align:justify;">64.26 लाख से अधिक बोतल नैनो DAP लिक्विड की बिक्री हासिल की है। नैनो जिंक और नैनो कॉपर उत्पादों को भी पहले वर्ष में क्रमशः 57 लाख और 2 लाख बोतलों की प्रभावशाली बिक्री प्राप्त हुई है। यह उल्लेखनीय है कि नैनो यूरिया प्लस की 208.26 लाख बोतलें पारंपरिक यूरिया के 9.37 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जबकि नैनो DAP की 57.89 लाख बोतलें DAP के 2.89 लाख मीट्रिक टन के बराबर हैं, जिससे देश को लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत मेंs भारी बचत हो रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इफको की नैनो उर्वरक श्रृंखला में नैनो यूरिया प्लस, नैनो DAP, नैनो NPK (लिक्विड और ग्रेन्युलर), नैनो जिंक, नैनो कॉपर और जैव-उत्तेजक ‘धरा अमृत’ शामिल हैं। ‘धरा अमृत’ — जो अमीनो एसिड, एल्जिनिक एसिड, ह्यूमिक एसिड, आवश्यक खनिज और केले के रस से समृद्ध है — लॉन्च के बाद से किसानों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इफको का कर-पूर्व लाभ ₹4,200 करोड़ के ऐतिहासिक स्तर से अधिक रहने का अनुमान है। नैनो तकनीक, ड्रोन तकनीक, AI और डेटा विश्लेषण में निरंतर नवाचार के माध्यम से इफको भारत के कृषि-खाद्य क्षेत्र को रूपांतरित कर रहा है और ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<div>
<div>संघाणी ने पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में व्यापक रूप से संचालित किया जाएगा । उन्होंने बताया किनैनो NPK लिक्विड (8-8-10) और नैनो NPK ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में औपचारिक रूप से शामिल किया गया इस अवसर पर इफको के प्रबंध निदेशक श्री के. जे. पटेल सहित निदेशक मंडल के सदस्य उपस्थित थे।</div>
</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 19:25:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जहां खेतों में उग रही है तरक्की की नई कहानी, भीटी हवेली के किसान बदल रहे खेती की तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> बिल्हौर तहसील का छोटा सा गांव भीटी हवेली अब खेती के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और बढ़ती आय की एक सशक्त कहानी आकार ले रही है। परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान वैज्ञानिक विधियों से मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती</div>
<div style="text-align:justify;">सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर यहां की उन्नत खेती पद्धतियों को करीब से देखा।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">खेतों में विकसित मल्टी लेयर फार्मिंग की संरचनाएं और उनमें एक साथ उगती विविध फसलें</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174040/where-a-new-story-of-progress-is-growing-in-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/1001766561.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>कानपुर।</strong> बिल्हौर तहसील का छोटा सा गांव भीटी हवेली अब खेती के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और बढ़ती आय की एक सशक्त कहानी आकार ले रही है। परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान वैज्ञानिक विधियों से मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती</div>
<div style="text-align:justify;">सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर यहां की उन्नत खेती पद्धतियों को करीब से देखा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">खेतों में विकसित मल्टी लेयर फार्मिंग की संरचनाएं और उनमें एक साथ उगती विविध फसलें इस बात का प्रमाण थीं कि यदि सोच बदली जाए तो खेती भी पूरी तरह बदल सकती है। निरीक्षण के दौरान उपनिदेशक कृषि आर.एस. वर्मा एवं जिला कृषि अधिकारी प्राची पांडेय भी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भीटी हवेली जैसे गांव पूरे जनपद के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव में कुल 453 कृषक हैं और 225 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर खेती होती है। इनमें से 375 किसान करीब 175 हेक्टेयर क्षेत्र में जायद मक्का की खेती कर रहे हैं। यहां गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों का दायरा सीमित हो गया है और उनकी जगह मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती ने ले ली है, जिससे किसानों की आय में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव की पहचान बन चुकी मल्टी लेयर फार्मिंग अब किसानों के लिए आय का मजबूत आधार बन रही है। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 50 किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं, जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग स्तरों पर कई फसलें उगाई जाती हैं। जिलाधिकारी ने प्रगतिशील किसान सुनील सिंह कटियार के खेत का अवलोकन किया, जहां एक ही संरचना में परवल, कुंदरू, बैंगन और फूलों की खेती एक साथ की जा रही है। यह मॉडल न केवल भूमि का बेहतर उपयोग करता है, बल्कि जोखिम को कम कर आय के कई स्रोत भी सुनिश्चित करता है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:21:56 +0530</pubDate>
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