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                <title>Hindi political news - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Hindi political news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वोट काउंटिंग के दौरान राज्य का नॉमिनी मौजूद रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/177974/west-bengal-election-commission-told-supreme-court-that-the-states"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/ah2nk1so_supreme-court_625x300_26_january_25.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong> ब्यूरो प्रयागराज। </strong>भारत के इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र की नियुक्ति से जुड़े सर्कुलर का पालन करेगा।भारत के इलेक्शन कमीशन की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि 4 मई को वोट काउंटिंग राज्य सरकार के नॉमिनी की मौजूदगी में होगी। चुनाव आयोग के वकील नायडू ने कहा, "हम कह रहे हैं कि राज्य सरकार का नॉमिनी वहां होगा। इन सबसे पहले भी इसका पालन किया जाएगा।"</p>
<p style="text-align:justify;">बार एंड बेंच के अनुसार जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जॉयमाल्या बागची की बेंच पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए वोट काउंटिंग सुपरवाइज़र के तौर पर सिर्फ़ केंद्र सरकार के कर्मचारियों को तैनात करने के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने नायडू की यह बात रिकॉर्ड की। कि ECI उसके सर्कुलर का पूरी तरह पालन करेगा। इसलिए, उसने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ TMC की अपील पर कोई भी आदेश देने से मना कर दिया।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, "SLP में आगे किसी आदेश की ज़रूरत नहीं है। हम मिस्टर नायडू की बात रिकॉर्ड करते हैं कि ECI के सर्कुलर का पूरी तरह से पालन किया जाए।मामले की आज अर्जेंट सुनवाई हुई क्योंकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह याचिका कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने गुरुवार को याचिका खारिज कर दी थी।हाई कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट को राज्य सरकार या केंद्र सरकार से नियुक्त करना इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया (ECI) का अधिकार है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाई कोर्ट ने कहा, "इस कोर्ट को राज्य सरकार के कर्मचारी के बजाय केंद्र सरकार/केंद्रीय PSU कर्मचारी से काउंटिंग सुपरवाइज़र और काउंटिंग असिस्टेंट नियुक्त करने में कोई गैर-कानूनी बात नहीं लगती।"इसने आगे कहा कि अगर TMC को लगता है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी BJP उम्मीदवारों का पक्ष ले रहे हैं, तो वह बाद में नतीजों को चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दायर कर सकती है।इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 22:41:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सीपीआई सांसद ने पीएम  के राष्ट्र के नाम संबोधन पर EC से शिकायत की</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने हालिया संबोधन के ज़रिए आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है, और चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आगे कहा कि दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सार्वजनिक मंचों पर इस संबोधन का प्रसारण सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग था।</p>
<p style="text-align:justify;">19 अप्रैल को लिखे एक पत्र में, कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन—जो ऐसे समय में दिया गया जब पांच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू है—"प्रकृति में राजनीतिक"</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/176651/cpi-mp-complains-to-ec-over-pms-address-to-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images-(1)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने हालिया संबोधन के ज़रिए आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है, और चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आगे कहा कि दूरदर्शन और संसद टीवी जैसे सार्वजनिक मंचों पर इस संबोधन का प्रसारण सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग था।</p>
<p style="text-align:justify;">19 अप्रैल को लिखे एक पत्र में, कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री का संबोधन—जो ऐसे समय में दिया गया जब पांच राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू है—"प्रकृति में राजनीतिक" था और इसमें "पक्षपातपूर्ण दावे" तथा "चुनिंदा बातें" शामिल थीं, जिनका उद्देश्य एक ऐसे मुद्दे पर जनमत को प्रभावित करना था जिस पर सक्रिय राजनीतिक मुकाबला चल रहा है। कुमार ने कहा, "जो मूल रूप से एक राजनीतिक भाषण है, उसके लिए सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित मंचों का उपयोग चुनावी मानदंडों का गंभीर उल्लंघन है।"</p>
<p style="text-align:justify;">CPI नेता ने तर्क दिया कि ऐसे कार्य उस 'समान अवसर' को कमज़ोर करते हैं, जिसे चुनावों के दौरान सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का दायित्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई करने में विफलता आयोग की निष्पक्षता में जनता के विश्वास को खत्म कर सकती है और "संस्थागत मिलीभगत" का संकेत दे सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कुमार ने आयोग से "तत्काल और ईमानदारी से कार्रवाई" करने, इस मामले की जांच शुरू करने और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को बनाए रखने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह किया। शनिवार को अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों को "भ्रूण हत्या के पाप" के लिए महिलाओं से कड़ी सज़ा मिलने की चेतावनी दी। मोदी ने महिलाओं से माफ़ी मांगी और कहा कि हो सकता है सरकार वोट हार गई हो, लेकिन वह महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को कभी नहीं छोड़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 20:44:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हरिवंश नारायण सिंह की वापसी, राष्ट्रपति मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को उच्च सदन का सदस्य नामित किया है। हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया था।उन्हें राज्यसभा का सदस्य उस रिक्ति को भरने के लिए नामित किया गया है, जो भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद उत्पन्न हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा उसी अनुच्छेद के खंड (3)</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175795/harivansh-narayan-singh-returns-as-president-murmu-nominates-him-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/s73sdhpw.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज- </strong>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के निवर्तमान उपसभापति हरिवंश को उच्च सदन का सदस्य नामित किया है। हरिवंश का उच्च सदन के सदस्य के रूप में कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हो गया था।उन्हें राज्यसभा का सदस्य उस रिक्ति को भरने के लिए नामित किया गया है, जो भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद उत्पन्न हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की एक आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के खंड (1) के उपखंड (अ) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा उसी अनुच्छेद के खंड (3) के अनुसार राष्ट्रपति मनोनीत सदस्यों में से एक सदस्य के सेवानिवृत्त होने से उत्पन्न रिक्ति को भरने के लिए हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य नामित करके प्रसन्न हैं।”</p>
<p style="text-align:justify;">हरिवंश (69) बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने दो कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। उन्होंने उच्च सदन के उपसभापति के पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 22:51:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रफुल्ल पटेल ने एनसीपी पर कब्जे की कोशिश की थी? रोहित पवार का बड़ा दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अजित पवार की मौत के बाद क्या पार्टी पर कब्जे की कोशिश हुई? कम से कम अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने तो यही दावा किया है। उन्होंने कहा कि एनसीपी पर प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कब्जा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि इसको सुनेत्रा पवार ने विफल कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) के नेता और विधायक रोहित पवार ने अपने दावे के समर्थन में प्रफुल्ल पटेल और तटकरे द्वारा चुनाव आयोग को भेजे गए एक ख़त को पेश किया। हालाँकि उनके इस दावे को सुनील तटकरे ने सिरे से</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174497/praful-patel-had-tried-to-capture-ncp-rohit-pawars-big"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/8e4c339aaf573ebad43719d128a9d0e490ad1805eb11ddfa51d22f29cfd89368.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज। </strong>अजित पवार की मौत के बाद क्या पार्टी पर कब्जे की कोशिश हुई? कम से कम अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने तो यही दावा किया है। उन्होंने कहा कि एनसीपी पर प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कब्जा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि इसको सुनेत्रा पवार ने विफल कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) के नेता और विधायक रोहित पवार ने अपने दावे के समर्थन में प्रफुल्ल पटेल और तटकरे द्वारा चुनाव आयोग को भेजे गए एक ख़त को पेश किया। हालाँकि उनके इस दावे को सुनील तटकरे ने सिरे से खारिज कर दिया और दावा किया कि शरद पवार गुट ही पार्टी का विलय कराकर पार्टी पर कब्जा करना चाहता था।</p>
<p style="text-align:justify;">इन आरोपों पर तटकरे ने क्या-क्या जवाब दिया है, यह जानने से पहले यह जान लें कि रोहित पवार ने क्या दावा किया है। रोहित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">रोहित पवार ने कहा कि अजित पवार की मौत 28 जनवरी को हुई थी और सिर्फ 18 दिन बाद 16 फ़रवरी को प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और एनसीपी के राष्ट्रीय सचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि इसमें उन्होंने झूठा दावा किया कि पार्टी के संविधान में बदलाव कर दिया गया है और कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को सारी शक्तियां सौंप दी जाएँ।</p>
<p style="text-align:justify;">रोहित पवार ने कहा, 'यह पहले से प्लान किया गया षड्यंत्र था। उन्होंने सुनेत्रा पवार और परिवार के अन्य सदस्यों को अंधेरे में रखा। न तो सुनेत्रा पवार को बताया गया और न ही उनके बेटे पार्थ पवार को। पार्टी के विधायकों को भी कुछ पता नहीं था।' बाद में जब सुनेत्रा को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर पहले भेजे गये पत्र को अमान्य मानने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">रोहित पवार ने मीडिया के सामने दोनों पत्र दिखाए। एक प्रफुल्ल पटेल का 16 फरवरी का पत्र और दूसरा सुनेत्रा पवार का 10 मार्च का पत्र। रोहित ने कहा है कि सुनेत्रा पवार जब पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं तब उन्हें इस पत्र की जानकारी मिली। उन्होंने 10 मार्च को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि 2 जनवरी से लेकर उनके अध्यक्ष बनने तक का कोई भी पत्र मान्य नहीं होना चाहिए। इससे प्रफुल्ल पटेल की कोशिश नाकाम हो गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजनीति</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>राजनीति</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 21:47:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनुपम अद्वितीय विलक्षण नेतृत्व क्षमता के धनी हैं नरेंद्र मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तपस्थली से तप कर निकले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति में सबसे कुशल अपराजेय नेतृत्वकर्ता हैं वह अपने विरोधियों यहां तक की अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के प्रतिस्पर्धियों की तमाम चालों की काट कर अपनी नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपरिमित दक्षता भी रखते हैं इस मामले में उनका कोई सानी नहीं है यह हम नही रिकार्ड बयान कर रहे हैं। </div>
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<div style="text-align:justify;">तमाम आलोचनाओं और विरोधियों के जबरदस्त साजिशी प्रहार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत बन कर उभरे है जो धरातल पर अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के बूते पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173939/narendra-modi-is-blessed-with-unique-leadership-abilities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/pm-narendra-modi-2.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तपस्थली से तप कर निकले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति में सबसे कुशल अपराजेय नेतृत्वकर्ता हैं वह अपने विरोधियों यहां तक की अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के प्रतिस्पर्धियों की तमाम चालों की काट कर अपनी नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपरिमित दक्षता भी रखते हैं इस मामले में उनका कोई सानी नहीं है यह हम नही रिकार्ड बयान कर रहे हैं। </div>
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<div style="text-align:justify;">तमाम आलोचनाओं और विरोधियों के जबरदस्त साजिशी प्रहार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत बन कर उभरे है जो धरातल पर अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपना अलग अनूठा व्यक्तित्व रखते हैं उन्होंने किसी भी राजनीतिक नेता के सरकार के लम्बे समय तक नेतृत्व करने के रिकार्ड को तोड़ दिया है। भारत की राजनीति में एक नया इतिहास रचते हुए पीएम नरेंद्र मोदी अब देश के सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को पीछे छोड़ दिया है।</div>
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<div style="text-align:justify;">गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक उनका सफर लगातार जीत, मजबूत नेतृत्व और राजनीतिक स्थिरता की मिसाल बनकर उभरा है। भारतीय राजनीति में बीता रविवार 22 मार्च विशेष दिन बन गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  एक ऐसा रिकॉर्ड तोड़ा जो दशकों से किसी और के नाम था. सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने लगातार 8,930 दिनों तक किसी सरकार का नेतृत्व किया था. यह भारत में किसी भी सरकार के मुखिया का अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल था. </div>
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<div style="text-align:justify;">बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वह लंबे समय तक इस पद पर बने रहे और अपने कार्यकाल में कभी चुनाव नहीं हारे। साल 2014 में प्रधानमंत्री पद के लिए नाम सामने आने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके बाद 2019 और 2024 में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की। खास बात यह है कि अपने पूरे राजनीतिक करियर में उन्होंने अब तक कोई बड़ा चुनाव नहीं हारा है।</div>
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<div style="text-align:justify;">गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर. 2001 से 2014 तक करीब 13 साल तक वो गुजरात की सत्ता संभालते रहे. इस दौरान गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा पूरे देश में होती थी। 2014 में जब वो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने. तब से इस रिपोर्ट को लिखने तक लगातार. इन दोनों कार्यकालों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 8,931 दिन बनता है.सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग अब पद पर 8930 दिनों के साथ दूसरे स्थान पर है. चामलिंग ने सिक्किम की लगातार 24 साल और 165 दिनों तक सेवा की. इससे वे ना सिर्फ भारत में बल्कि विश्व स्तर पर सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक बन गए. </div>
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<div style="text-align:justify;">इसी कड़ी में तीसरा स्थान ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास है. उन्होंने 2000 से 2024 तक राज्य पर शासन किया. उन्होंने लगभग 24 साल और 99 दिनों का कार्यकाल पूरा किया. पटनायक के लंबे शासन की पहचान राजनीतिक स्थिरता और लगातार चुनावी जीत रही है. इसने उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक टिके रहने वाले नेताओं में से एक बनाए रखा.आपको बता दें इस रैंकिंग को जो बात खास रूप से दिलचस्प बनाती है वह यह है कि इसमें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों के रूप में बिताए गए समय को जोड़ा गया है. जिन नेताओं ने सिर्फ प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दीं जैसे कि जवाहरलाल नेहरू, वे इस खास गणना के तहत शीर्ष तीन में शामिल नहीं हैं. भले ही उनका कार्यकाल लंबा रहा हो.</div>
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<div style="text-align:justify;">यह भी बता दें कि वरिष्ठ नेता ज्योति बसु ने 23 सालों से ज्यादा समय तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया है. वे इस लिस्ट से बाहर हैं. लेकिन उनका कार्यकाल भारतीय इतिहास में किसी एक पद पर सबसे लंबे समय तक नेतृत्व करने वाले कार्यकालों में से एक हैप्रधानमंत्री मोदी का यह रिकॉर्ड अकेला नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी के नाम और भी कई उपलब्धियां हैं. गुजरात के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री किसी और मुख्यमंत्री ने गुजरात में इतना लंबा कार्यकाल नहीं किया.</div>
<div style="text-align:justify;">आपको पता है कि किसी भी प्रधानमंत्री की तुलना में मोदी सबसे ज्यादा अनुभव लेकर दिल्ली पहुंचे थे. </div>
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<div style="text-align:justify;">आजादी के बाद पैदा हुए पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 1950 में हुआ. वो पहले प्रधानमंत्री हैं जो आजाद भारत में पैदा हुए. तीन बार लगातार जीत - 2014, 2019 और 2024 तीनों लोकसभा चुनावों में जनता ने उन्हें चुना.2019 में भाजपा ने 303 सीटें जीतकर अपनी स्थिति और मजबूत की। 2024 में 240 सीटों के साथ एनडीए गठबंधन ने सत्ता बरकरार रखी। जवाहरलाल नेहरू के बाद प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीन कार्यकाल के लिए नियुक्त होने वाले एकमात्र प्रधानमंत्री हैं। लगातार भारत का प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का दिवंगत इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड मोदी ने तोड़ उन्होंने पिछले साल इंदिरा गांधी (4,077 दिन) को लगातार प्रधानमंत्री रहने के मामले में पीछे छोड़ दिया है।</div>
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<div style="text-align:justify;">सितंबर 2025 में अपने तीसरे कार्यालय के दौरान वे लगातार सबसे लंबे समय तक पीएम रहने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए। साथ ही वे पहले गैर-कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए हैं।इसी सिलसिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है. उन्होंने लिखा, "नरेंद्र मोदी का पूरा जीवन देश और देशवासियों की सेवा को समर्पित रहा है. गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक यह यात्रा सेवा, ईमानदारी और देश को सबसे पहले रखने की यात्रा है.</div>
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<div style="text-align:justify;">एक रिपोर्ट के के मुताबिक पीएम मोदी ने अपने सफर को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में काम शुरू किया, तब राज्य कई बड़ी मुश्किलों से गुजर रहा था। गुजरात भूकंप, चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों ने उन्हें और मजबूत बनाया और उन्होंने राज्य को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने अपनी मां की एक सीख का भी जिक्र किया, गरीबों के लिए काम करना और कभी रिश्वत न लेना, जैसी सीख को उन्होंने अपने जीवन का मार्गदर्शन बताया।</div>
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<div style="text-align:justify;">पीएम मोदी के अनुसार, उनके कार्यकाल में गुजरात ने कृषि, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी तरक्की की और एक मजबूत राज्य के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जब उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया, तब देश में भरोसे का संकट था, लेकिन जनता ने उन्हें मजबूत समर्थन दिया।पीएम मोदी ने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक मजबूत देश बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने महिलाओं (नारी शक्ति), युवाओं और किसानों के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि देश की सेवा करना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</div>
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<div style="text-align:justify;">केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और लंबे सार्वजनिक जीवन की जमकर सराहना की है। अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी की दशकों की सेवा ने भारत में एक नया दौर शुरू किया है। उन्होंने गरीबों को अधिकार दिलाने, विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और दुनिया में भारत की छवि मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।उन्होंने यह भी कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए पीएम मोदी ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है और पिछले 24 साल से अधिक समय से बिना छुट्टी लिए देश की सेवा कर रहे हैं। अमित शाह ने बताया कि पीएम मोदी को जनता का अपार प्यार और समर्थन मिला है। वास्तव में नरेन्द्र मोदी एक बिरले व्यक्तित्व है यह बात उनके विरोधी भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:13:27 +0530</pubDate>
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