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                <title>डिजिटल इंडिया - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>डिजिटल इंडिया RSS Feed</description>
                
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                <title>महाकुंभ-2025 को नवाचार  हेतु मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार।</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छता के बाद ई-गवर्नेंस में भी महाकुंभ ने रचा इतिहास:नगर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182663/mahakumbh-2025-received-national-e-governance-award-for-innovation"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/1001857032.jpg" alt=""></a><br /><div>
<blockquote class="format1">
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>ब्यूरो प्रयागराज।</strong></div>
</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री  ए.के. शर्मा ने महाकुंभ-2025 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उत्तर प्रदेश की उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता, आधुनिक तकनीक आधारित प्रबंधन और सुशासन की राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतिष्ठा का प्रमाण है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि महाकुंभ-2025 अनेक मायनों में दिव्य, भव्य, अद्भुत और विलक्षण आयोजन रहा। इस आयोजन ने न केवल भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को विश्व के सामने गौरवपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, बल्कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार और कुशल प्रशासन के माध्यम से विकसित भारत की नई तस्वीर भी दुनिया को दिखाई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">श्री शर्मा ने कहा कि महाकुंभ 2025 को इससे पूर्व भारत सरकार द्वारा स्वच्छता-उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और अब केंद्र सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश ने आयोजन, प्रबंधन, स्वच्छता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नए राष्ट्रीय मानक स्थापित किए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब महाकुंभ की तैयारियां प्रारंभ हुई थीं, तभी यह स्पष्ट किया गया था कि यह महाकुंभ डिजिटल होगा, आधुनिक तकनीक से संचालित होगा। आज राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान ने उस संकल्प पर भारत सरकार की भी मुहर लगा दी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन तथा  मुख्यमंत्री </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">योगी आदित्यनाथ जी के दूरदर्शी नेतृत्व, प्रेरणा और सतत दिशा-निर्देश को देते हुए उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।उन्होंने महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षा बलों, स्वच्छता कर्मियों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुड़े प्रत्येक कर्मयोगी को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि उनके समर्पण, अनुशासन और अथक परिश्रम ने इस आयोजन को वैश्विक स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल बनाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश आगे भी सुशासन, डिजिटल नवाचार और जनसेवा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 21:37:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने 20वें सांख्यिकी दिवस समारोह को किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, संवाददाता।</strong></p><p style="text-align:justify;"> प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने सोमवार को आयोजित 20वें सांख्यिकी दिवस-2026 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए कहा कि भारत का भविष्य डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने के लिए विश्वसनीय, पारदर्शी और वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित शासन व्यवस्था आवश्यक है।</p><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182319/principal-secretary-to-the-prime-minister-dr-pk-mishra-addressed"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/whatsapp-image-2026-06-29-at-21.04.24.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली, संवाददाता।</strong></p><p style="text-align:justify;"> प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने सोमवार को आयोजित 20वें सांख्यिकी दिवस-2026 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए कहा कि भारत का भविष्य डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के विजन को साकार करने के लिए विश्वसनीय, पारदर्शी और वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित शासन व्यवस्था आवश्यक है।</p><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी विजन दस्तावेज 2026-31, सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति रिपोर्ट तथा श्रम बाजार और अनौपचारिक उद्यमों से जुड़े प्रथम शहर स्तरीय अनुमानों के प्रकाशन की सराहना की। साथ ही प्रोफेसर अरूप बोस को सुखात्मे राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर बधाई भी दी।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के नए आधार वर्ष पर कार्य</strong></h3><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत की बदलती अर्थव्यवस्था को अधिक सटीक रूप से दर्शाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) तथा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) सहित प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों को नए आधार वर्ष के साथ अद्यतन किया जा रहा है। इससे नीति निर्माण और आर्थिक विश्लेषण अधिक प्रभावी होगा।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>प्रशासनिक आंकड़े बनेंगे राष्ट्रीय संपदा</strong></h3><p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि देश में तेजी से हुए डिजिटल परिवर्तन के कारण प्रशासनिक आंकड़ों का विशाल भंडार तैयार हुआ है, जिसे रणनीतिक राष्ट्रीय संपदा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इन आंकड़ों का उपयोग बेहतर योजनाएं बनाने, लक्षित सेवा वितरण सुनिश्चित करने तथा समयबद्ध निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित एवं परस्पर संगत डेटा इकोसिस्टम विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि डेटा साझाकरण के दौरान गोपनीयता, सुरक्षा और निजता के उच्चतम मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>सांख्यिकीय प्रणाली में व्यापक सुधार</strong></h3><p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने व्यापक सुधार अभियान चलाया है। विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर 216 सुधारों को स्वीकार कर समयबद्ध ढंग से लागू किया जा रहा है। इसके तहत नए सर्वेक्षण, कंप्यूटर आधारित व्यक्तिगत साक्षात्कार (CAPI), जिला स्तरीय अनुमान, उच्च आवृत्ति वाले सर्वेक्षण और आंकड़ों के शीघ्र प्रकाशन जैसी कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं।</p><p style="text-align:justify;">साथ ही राष्ट्रीय मेटाडेटा संरचना 2.0, ओपन एपीआई, ई-सांख्यिकी, जीओआईस्टेट्स, पैमाना तथा ई-साक्षी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए जा रहे हैं, जो डेटा की उपलब्धता, पारस्परिक संगतता और रियल टाइम गवर्नेंस को मजबूत करेंगे।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>एआई के उपयोग में जिम्मेदार शासन जरूरी</strong></h3><p style="text-align:justify;">डॉ. मिश्रा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सांख्यिकीय विश्लेषण और नीति निर्माण में नई संभावनाएं लेकर आई है, लेकिन इसके उपयोग के लिए मजबूत संस्थागत ढांचा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा की स्वतंत्रता बनाए रखते हुए ही एआई का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।</p><h3 style="text-align:justify;"><strong>विश्वसनीय आंकड़ों पर आधारित होगा विकसित भारत</strong></h3><p style="text-align:justify;">अपने संबोधन के समापन में डॉ. पी.के. मिश्रा ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर ही संभव है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक की सही गणना और किसी को भी पीछे न छोड़ने का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब सांख्यिकीय प्रणाली गुणवत्ता, गोपनीयता, पारदर्शिता और स्वतंत्रता के उच्च मानकों पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन का भविष्य साक्ष्य आधारित निर्णय प्रक्रिया में निहित है और भारत इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 22:02:06 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोदी की 12 वर्षों की सत्ता और आम आदमी: वादे, बदलाव और ज़मीनी हकीकत</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(3).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1">राजीव शुक्ल-संपादक </blockquote>
<p>2014 में “अच्छे दिन आएंगे” के नारे के साथ केंद्र की सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 तक लगातार 12 साल प्रधानमंत्री रह चुके हैं। यह भारत के स्वतंत्र इतिहास में सबसे लंबी अखंड सत्ता वाले प्रधानमंत्रियों में से एक कार्यकाल है। इस दौरान सरकार की नीतियों, योजनाओं और राजनीतिक शैली का सीधा असर आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ा है। अलग हम कल्याणकारी योजनाओं और उनके विस्तार के विषय में बात करें तो उनकी फेरहिस्त काफी लंबी है।</p>
<p><br />पिछले 12 साल में सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आधार बनाकर योजनाओं का दायरा बढ़ाया। उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। स्वच्छ भारत मिशन ने ग्रामीण शौचालय कवरेज को तेज़ी से बढ़ाया। आयुष्मान भारत योजना ने 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा गरीब परिवारों तक पहुंचाया। जनधन खातों ने वित्तीय समावेशन को बढ़ाया और कोविड काल में डीबीटी से करोड़ों लोगों को सीधी मदद मिली। </p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका मतलब यह हुआ कि सरकारी लाभ के लिए बिचौलियों पर निर्भरता घटी। बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ा, जिससे UPI आज छोटे दुकानदार से लेकर ठेले वाले तक इस्तेमाल कर रहे हैं।</p>
<p><br />                हम बात करें इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भारत की तो इसमें भी प्रगति हुई है और कई सुधार अभी भी बाकी हैं। सड़क, रेल, हवाई अड्डे और एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेज़ी आई। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, अटल टनल, और नए वंदे भारत ट्रेनें आम यात्रियों के सफर को तेज़ और सुरक्षित बनाने की कोशिश हैं। डिजिटल इंडिया के तहत इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच गांवों तक बढ़ी। इससे शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं मोबाइल पर आ गईं।</p>
<p><br />आम आदमी के लिए इसका फायदा समय की बचत और लागत में कमी के रूप में दिखा। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी इंटरनेट की गुणवत्ता और बिजली की आपूर्ति असमान बनी हुई है। हालांकि कर और अर्थव्यवस्था में बदलाव तो हुआ है लेकिन महंगाई के कारण अभी उतनी राहत महसूस नहीं हुई है । GST लागू होने से अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एकजुट हुई। छोटे व्यापारियों के लिए शुरू में जटिलता बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे फाइलिंग आसान हुई। नोटबंदी 2016 का मकसद काला धन और नकली नोट पर चोट था, लेकिन इसका तत्काल असर छोटे कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश की रफ्तार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता बनी रही। कोरोना के बाद रिकवरी तेज़ रही, लेकिन असंगठित क्षेत्र में रोज़गार और आय अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आई है।</p>
<p><br /> राजनीतिक संवाद और छवि की बात की जाये तो इसमें मोदी सरकार का कोई जोड़ नहीं है। मोदी की सरकार ने सीधे संवाद पर ज़ोर दिया। मन की बात, सोशल मीडिया और रैलियों के ज़रिए प्रधानमंत्री खुद जनता से जुड़े रहे। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा केंद्र में रहा। विरोधियों का आरोप रहा कि आलोचना को जगह कम मिली और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ा। आम आदमी के लिए इसका असर यह हुआ कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तेज़ी से पहुंची, लेकिन विपरीत राय और स्थानीय समस्याएं कई बार राष्ट्रीय बहस में जगह नहीं बना पाईं।</p>
<p><br /> अलग हम इसकी ज़मीनी हकीकत जानें और यह पता करें कि क्या बदला? तो 12 साल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि सरकार सीधे नागरिक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पहले जहां फाइलों और दफ्तरों में काम अटकता था, अब ऑनलाइन पोर्टल और ऐप्स से काम होता है। गरीबों के लिए रसोई गैस, शौचालय, बिजली और बैंक खाता पहले से ज्यादा सुलभ हुए हैं। दूसरी तरफ, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की आय और शिक्षा-स्वास्थ्य की गुणवत्ता जैसे मुद्दे अभी भी चुनौती हैं। मध्यम वर्ग टैक्स और जीवनयापन की लागत को लेकर दबाव महसूस करता है। ग्रामीण भारत में कृषि पर निर्भरता और मौसम की मार अब भी जीवन को अनिश्चित रखती है।</p>
<p>मोदी की 12 साल की सत्ता ने आम आदमी की ज़िंदगी में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल पहुंच के मामले में ठोस बदलाव लाए हैं। योजनाओं का लाभ पहले से ज्यादा पारदर्शी हुआ है। लेकिन रोज़गार, महंगाई और असमानता जैसे संरचनात्मक मुद्दे बने हुए हैं। आम आदमी के लिए यह कार्यकाल सुविधाओं में बढ़ोतरी और आर्थिक दबाव दोनों का मिश्रण रहा है। 2026 की सियासत इस बात पर टिकी होगी कि क्या सरकार इन बदलावों को स्थायी रोज़गार और आय में बदल पाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/181933/modis-12-years-in-power-and-common-mans-promises-change</link>
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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:41:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी सरकार में वो समस्याएं जो अभी तक नहीं सुधरीं</title>
                                    <description><![CDATA[<blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/181929/those-problems-which-have-not-been-improved-yet-in-modi"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/images-(2).jpeg" alt=""></a><br /><blockquote class="format1"><strong>राजीव शुक्ल-संपादक </strong></blockquote>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं है कि 2014 के बाद से अब तक भारत ने काफी तरक्की की है लेकिन इसमें यह भी है कि अभी तक बहुत सी ऐसी समस्याएं हैं जिनमें सुधार होना बाकी है। 2014 से 2026 तक 12 साल की सत्ता में मोदी सरकार ने योजनाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और वैश्विक छवि पर काम किया। लेकिन कुछ संरचनात्मक समस्याएं ऐसी हैं जो चुनावी नारों और सरकारी रिपोर्टों के बावजूद ज़मीन पर बनी हुई हैं। ये समस्याएं आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से सीधे जुड़ती हैं। इसमें सबसे पहले आती है बेरोज़गारी और अनौपचारिक क्षेत्र की अस्थिरता।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि बेरोजगारी को कम करने के लिए सरकार ने बहुत प्रयास किए हैं लेकिन अभी कई प्रयास करने वाकी हैं। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि बेरोज़गारी दर 2017 के मुकाबले घटी है। लेकिन हकीकत में समस्या की प्रकृति बदली है। गुणवत्तापूर्ण रोज़गार की कमी भारतीयों को खल रही है। हर साल 1.2 करोड़ युवा श्रम बाजार में आते हैं, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में वेतन बढ़ोतरी धीमी है। आईटी और स्टार्टअप में छंटनी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ाई है। अनौपचारिक क्षेत्र पर असर: नोटबंदी, GST और कोविड के बाद छोटे दुकानदार, ठेले वाले और दिहाड़ी मजदूर पूरी तरह उभर नहीं पाए। CMIE और NSSO के सर्वे बताते हैं कि स्वरोज़गार बढ़ा है, लेकिन ये ज़्यादातर मजबूरी का स्वरोज़गार है। कृषि संकट और किसान की आय के लिए बहुत समय से बात चल रही है लेकिन अभी तक इस पर कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />2016 में सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। 2026 तक वो लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। MSP की सीमित पहुंच : सिर्फ गेहूं-धान के किसान ही MSP का फायदा ले पाते हैं। दाल, तिलहन, फल-सब्जी वाले किसान मंडी के भाव पर निर्भर हैं। कर्ज और जलवायु जोखिम: को लेकर किसान हमेशा से परेशान रहा है। फसल बीमा योजना ने कुछ राहत दी, लेकिन अतिवृष्टि, सूखा और आवारा पशु की समस्या बनी हुई है। तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और बड़े कृषि सुधार रुके हुए हैं।<br />              शिक्षा और स्वास्थ्य में गुणवत्ता का अंतर</p>
<p style="text-align:justify;"><br />शिक्षा: NEP 2020 ने ढांचा बदला, लेकिन सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, ड्रॉपआउट रेट और लर्निंग आउटकम अब भी कमजोर हैं। ASER रिपोर्ट लगातार बताती है कि कक्षा 5 का बच्चा कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाता। इसी तरह स्वास्थ्य: आयुष्मान भारत ने कवरेज बढ़ाया, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर, नर्स और दवाओं की कमी है। निजी अस्पताल महंगे हैं, और आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च भारत में अब भी GDP का 50% से ज्यादा है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />महंगाई का मध्यम वर्ग पर दबाव बहुत बढ़ता जा रहा है। तेल, सब्जी, दाल और किराये की कीमतों में उछाल ने मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। सरकार ने टैक्स स्लैब बदले, लेकिन प्रत्यक्ष कर का बोझ अब भी वेतनभोगी वर्ग पर ज्यादा है।  <br />कोर महंगाई भले नियंत्रण में रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई 2022-2024 में दो बार 10% पार कर गई। RBI के बार-बार रेपो रेट बढ़ाने से EMI बढ़ी और घर खरीदना मुश्किल हुआ। नौकरशाही और भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो रहीं हैं। DBT और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बिचौलियों को कम किया, लेकिन ज़मीन-रजिस्ट्री, पुलिस, म्यूनिसिपल सर्विस में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ। विपक्ष का आरोप है कि ED, CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं सरकार कहती है कि भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई हो रही है। नतीजा ये है कि आम आदमी का भरोसा सिस्टम पर आंशिक ही बहाल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><br />सामाजिक ध्रुवीकरण और संवाद की कमी पिछले 12 साल में धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय बहस में हावी रहे। इससे विकास और रोज़गार जैसे मुद्दे कई बार बैकसीट पर चले गए। मीडिया और सिविल सोसाइटी का स्पेस सिकुड़ने की शिकायत विपक्ष और पत्रकार संगठनों से आती रही है। सरकार का पक्ष है कि फेक न्यूज़ और अस्थिरता रोकने के लिए नियम जरूरी हैं। राज्य-केंद्र संबंध और संघीय ढांचा<br />GST लागू होने के बाद राज्यों को मुआवज़ा देने का वादा 2022 में खत्म हो गया। अब कई राज्य कहते हैं कि उनका फिस्कल स्पेस सिकुड़ गया है।  केंद्रीय योजनाओं के नाम पर राज्यों की भूमिका सीमित हो गई है, जिससे संघीय संतुलन पर सवाल उठते हैं।  सुधार हुआ, पर असमान गति से मोदी सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, डिजिटल ट्रांजैक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर में ठोस काम किया है। उज्ज्वला, जनधन, सड़क, रेल और UPI इसका उदाहरण हैं। लेकिन रोज़गार की गुणवत्ता, कृषि आय, शिक्षा-स्वास्थ्य की ग्राउंड लेवल क्वालिटी, और महंगाई जैसी समस्याएं अभी भी सिस्टम की कमज़ोरी दिखाती हैं। 2026 तक सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि वो कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रोडक्टिविटी और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को भी तेज़ करे, ताकि ये समस्याएं चुनावी मुद्दे बनकर न रह जाएं बल्कि हल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोटन पुलिस द्वारा साइबर  जागरुकता अभियान के तहत लोगों को किया गया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/180969/lotan-police-made-people-aware-under-cyber-awareness-campaign"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-06/1781100453472-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>लोटन (सिद्धार्थनगर)।</strong> साइबर जागरूकता अभियान  के तहत कस्बा लोटन सहित गांवों के लोगों को वर्तमान मे हो रहे पैसों  की धोखाधडी/साइबर फ्राड/ व सोशल मीडिया (व्हाट्स एप्प फेसबुक,ट्वीटर जैसे सोशल प्लोटफार्म) पर अनावश्यक रूप से अवैध कमेंट/आपत्तिजनक वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियों के दुरूपयोग जैसे अपराधों और साइबर अपराध के प्रति लोटन कोतवाली पुलिस द्वारा जागरूक किया गया। बुधवार को थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा  के नेतृत्व में साइबर सेल टीम के द्वारा  कस्बा लोटन सहित गांव के लोगों को साईबर जागरूकता अभियान के अन्तर्गत  साइबर अपराधों से बचने के सम्बन्ध मे जानकारी दी गयी। अपराधों के रोकथाम हेतु शासन द्वारा जारी  हेल्पलाइन नंबर 1930 और एनसीआरपी  पोर्टल पर रिपोर्टिंग निर्देशों से अवगत कराया गया ।सभी ऑनलाइन खातों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से बचें। व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी कभी भी किसी अज्ञात फोन कॉल या ईमेल पर साझा न करें।अज्ञात स्रोतों से आए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचें।अपने सभी उपकरणों पर एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें।सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।ऑनलाइन खरीददारी के लिए केवल सुरक्षित वेबसाइट्स का ही उपयोग करें। इस दौरान महिला कास्टेबल  पूजा वर्मा आदि उपस्थित रहे।</div>
<div class="yj6qo"> </div>
<div class="adL"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 20:00:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हनुमानगढ़िया में कागजों में बह रहा मजदूरों का पसीना, धरातल से श्रमिक गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज। </strong>नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हनुमानगढ़िया में महात्मा मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन की लूट का किया जा रहा है। यहां डिजिटल इंडिया की पारदर्शी व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखाते हुए कागजों पर तो मजदूरों का फौज खड़ा कर दिया गया है लेकिन धरातल पर सिर्फ सन्नाटा पसरा हुआ है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार गांव में नरायन के घर से लेकर रामप्रसाद के खेत तक चकबंध पर मिट्टी भराई का कार्य प्रगति पर है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">जिसके लिए मास्टर रोल संख्या 548 से 554 तथा 578 जारी कर रोजाना 50 से 60 श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/179460/in-hanumangarhia-sweat-of-workers-is-flowing-on-paper-workers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/2_177763515069f48f4edc7f4_11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>रतनपुर/महराजगंज। </strong>नौतनवा ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत हनुमानगढ़िया में महात्मा मनरेगा योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन की लूट का किया जा रहा है। यहां डिजिटल इंडिया की पारदर्शी व्यवस्थाओं को ठेंगा दिखाते हुए कागजों पर तो मजदूरों का फौज खड़ा कर दिया गया है लेकिन धरातल पर सिर्फ सन्नाटा पसरा हुआ है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार गांव में नरायन के घर से लेकर रामप्रसाद के खेत तक चकबंध पर मिट्टी भराई का कार्य प्रगति पर है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिसके लिए मास्टर रोल संख्या 548 से 554 तथा 578 जारी कर रोजाना 50 से 60 श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए दर्ज की जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बीते गुरुवार से कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं है और पिछले दो दिनों से पूरा क्षेत्र पूरी तरह सुनसान पड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जिम्मेदारों द्वारा मोबाइल मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग जैसी सख्त नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। इस मिलीभगत के तहत फर्जी तरीके से अपने चहेतों के बैंक खातों में सरकारी धनराशि ट्रांसफर की जाती है और बाद में उसे आपस में बांट लिया जाता है, जिसके कारण गांव के वास्तविक और जरूरतमंद मजदूर रोजगार के अधिकार से महरुम हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि कार्यस्थल के डिजिटल डेटा, मस्टरोल और जियो-टैग तस्वीरों की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए ताकि इस घोटाले में शामिल दोषियों पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:24:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अपने-अपने क्षेत्रों में परिवारजनों एवं आमजन को अधिक से अधिक स्व-गणना के लिए प्रेरित करें।</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
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<div style="text-align:justify;">  शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना एवं रोवर-रेंजर्स के संयुक्त तत्वावधान में हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जनगणना–2027 एवं स्व-गणना जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को डिजिटल जनगणना एवं स्व-गणना की प्रक्रिया, उद्देश्य तथा शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता शासन द्वारा नियुक्त जनपद नोडल अधिकारी (उच्च शिक्षा) एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश ने की। उन्होंने शासन द्वारा संचालित जनगणना–2027 कार्यक्रम हेतु छात्र-छात्राओं को जागरूक किया तथा कहा कि जनगणना राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक नागरिक</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178650/motivate-family-members-and-general-public-to-do-maximum-self-counting"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260508-wa0116.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात ।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नैनी, प्रयागराज।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना एवं रोवर-रेंजर्स के संयुक्त तत्वावधान में हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जनगणना–2027 एवं स्व-गणना जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को डिजिटल जनगणना एवं स्व-गणना की प्रक्रिया, उद्देश्य तथा शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता शासन द्वारा नियुक्त जनपद नोडल अधिकारी (उच्च शिक्षा) एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश ने की। उन्होंने शासन द्वारा संचालित जनगणना–2027 कार्यक्रम हेतु छात्र-छात्राओं को जागरूक किया तथा कहा कि जनगणना राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।आयोजित कार्यशाला में डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई। जनगणना कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए छात्राओं से कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में परिवारजनों एवं आमजन को अधिक से अधिक स्व-गणना के लिए प्रेरित करें। वक्ताओं ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिक आसानी से अपनी जानकारी दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान में सहभागी बन सकते हैं।कार्यक्रम का मंच संचालन महाविद्यालय की रोवर रेंजर्स प्रभारी डॉ. मीनाक्षी राठौर ने किया। राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी डॉ. आर. के. सिंह तथा  सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने छात्र-छात्राओं को स्व-गणना की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि डिजिटल जनगणना से पारदर्शिता बढ़ेगी तथा आंकड़ों का संकलन अधिक सटीक एवं प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन रोवर प्रभारी डॉ. राजेश कुमार यादव  ने प्रस्तुत किया।कार्यकर्म आयोजन में डॉ अवधेश आर्य का रहा।कार्यक्रम में प्रो नीतू सिंह,प्रो सुवर्णा सरकार,प्रो सविता कुमारी, प्रो महेंद्र प्रसाद, डॉ भावना सिंह, डॉ प्रिया तिवारी, डॉ रफ़त अनीस, डॉ हेमलता, डॉ ऋषि सिंह, डॉ मंजरी मिश्रा, डॉ इफ़्तिकार अंसारी, डॉ असित जायसवाल, डॉ अमित मिश्रा आदि उपस्थित रहे।इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, राष्ट्रीय सेवा योजना एवं रोवर रेंजर्स के स्वयंसेवकों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी विद्यार्थियों को तथा प्राध्यापकों को अपने परिवार एवं समाज में जनगणना एवं स्व-गणना के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु प्रेरित किया गया।</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/178650/motivate-family-members-and-general-public-to-do-maximum-self-counting</link>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 20:57:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मा. सांसद, जिला पंचायत अध्यक्ष, मा. विधायकगण ने स्वयं मोबाइल से किया स्व-गणना कार्य, जनपदवासियों से की जनगणना 2027 में सक्रिय सहभागिता की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही, 08 मई 2026:– </strong>भारत की जनगणना 2027 को डिजिटल, पारदर्शी एवं सरल बनाने की दिशा में जनपद प्रशासन द्वारा व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मा. सांसद डॉ विनोद बिंद, मा. जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, मा. विधायक औराई दीनानाथ भास्कर, मा. विधायक ज्ञानपुर विपुल दुबे, जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी शैलेष कुमार ने कलेक्ट्रेट सभागार में स्वयं अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया पूर्ण कर जनपदवासियों को जागरूक करने का संदेश दिया। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मा. सांसद डॉ विनोद बिंद ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मोबाइल के माध्यम से जनगणना</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178608/ma-mp-district-panchayat-president-and-mlas-themselves-did-the"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260508-wa0030.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
<div>
<div style="text-align:justify;"><strong>भदोही, 08 मई 2026:– </strong>भारत की जनगणना 2027 को डिजिटल, पारदर्शी एवं सरल बनाने की दिशा में जनपद प्रशासन द्वारा व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मा. सांसद डॉ विनोद बिंद, मा. जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, मा. विधायक औराई दीनानाथ भास्कर, मा. विधायक ज्ञानपुर विपुल दुबे, जिलाधिकारी एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी शैलेष कुमार ने कलेक्ट्रेट सभागार में स्वयं अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया पूर्ण कर जनपदवासियों को जागरूक करने का संदेश दिया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मा. सांसद डॉ विनोद बिंद ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मोबाइल के माध्यम से जनगणना पोर्टल पर पंजीकरण एवं स्व-गणना की पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उनका भी स्व-गणना कार्य कराया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा पहली बार आम नागरिकों को स्वयं अपने मोबाइल के माध्यम से जनगणना करने की सुविधा प्रदान की गई है, जिससे प्रक्रिया अधिक आसान, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनेगी।</div>
<div style="text-align:justify;">प्रमुख जनगणना अधिकारी शैलेष कुमार ने बताया कि स्व-गणना का कार्य 21 मई 2026 तक किया जा सकेगा। इसके लिए नागरिकों को जनगणना पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण करना होगा। इसके उपरांत 22 मई से 20 जून 2026 तक प्रगणक दल घर-घर पहुंचकर मकान सूचीकरण एवं गणना कार्य संपन्न करेंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"><br />मा. सांसद डॉ विनोद बिंद ने जनपदवासियों, युवाओं, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे स्वयं स्व-गणना करें तथा अपने परिवार, पड़ोस एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि देश की विकास योजनाओं की आधारशिला है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के निर्माण में जनगणना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से ही जनगणना 2027 को सफल बनाया जा सकता है। प्रशासन द्वारा जनपद में व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाकर लोगों को डिजिटल जनगणना से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"><br />इस अवसर पर मा. विधायक औराई दीनानाथ भास्कर, मा. विधायक ज्ञानपुर विपुल दुबे, मा. जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी बाल गोविन्द शुक्ल, अपर जिलाधिकारी वि0 रा0 कुंवर वीरेन्द्र मौर्य, एवं संबंधित जनप्रतिनिधिगण एवं सम्बंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे। </div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 20:03:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Abhinav Shukla]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नए भारत का स्वर्णिम अध्याय: नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में विकास, शक्ति और वैश्विक प्रतिष्ठा की गाथा</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178327/the-golden-chapter-of-new-india-the-story-of-development"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20250331-wa01634.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">वर्ष 2014 भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जाता है, जब नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली। उस समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था और उसकी जीडीपी लगभग 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। आज, एक दशक के भीतर भारत न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी प्रतिष्ठा भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। प्रति व्यक्ति आय का लगभग दोगुना हो जाना इस बात का प्रमाण है कि विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की अर्थव्यवस्था में आई यह तेजी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक परिवर्तन का संकेत है। 2026 तक भारत की जीडीपी 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान है और 7.4 से 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए हुए है। यह उपलब्धि सरकार की नीतियों, आर्थिक सुधारों और मजबूत नेतृत्व का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस परिवर्तन में अमित शाह की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने संगठन को मजबूत करते हुए भाजपा को देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया। मोदी और शाह की जोड़ी ने राजनीति को केवल सत्ता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में जो बदलाव आया है, वह अभूतपूर्व है। सड़कों का विस्तार, हाईवे का निर्माण, रेलवे का आधुनिकीकरण और हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि—इन सभी ने भारत को एक नए युग में प्रवेश कराया है। आधुनिक ट्रेनों, विद्युतीकरण और सुरक्षा तकनीकों ने यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया है। गांवों तक सड़क और बिजली पहुंचाना विकास को समावेशी बनाने का प्रयास है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है। यूपीआई जैसी व्यवस्था ने देश को डिजिटल भुगतान में अग्रणी बना दिया है। आज सरकारी सेवाएं मोबाइल पर उपलब्ध हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में वृद्धि हुई है। यह परिवर्तन आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सामाजिक कल्याण की योजनाओं ने भी करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलों ने गरीब और वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ा है। यह केवल योजनाएं नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का प्रयास हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रेलवे क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ट्रैक का तेजी से विद्युतीकरण, आधुनिक ट्रेनों का संचालन, और सुरक्षा प्रणाली का विकास—इन सभी ने भारतीय रेलवे को नई पहचान दी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भी रेलवे ने सौर ऊर्जा, एलईडी लाइटिंग और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे कदम उठाए हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्विकास भी इस दौर की एक विशेष पहचान रहा है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और महाकाल लोक जैसे प्रोजेक्ट्स ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को नया जीवन दिया है। यह केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कानूनी और नीतिगत सुधारों ने भी देश की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तीन तलाक कानून, अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और नागरिकता संशोधन कानून जैसे फैसलों ने सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। इन निर्णयों को समर्थक जहां साहसिक कदम मानते हैं, वहीं आलोचक इनके प्रभावों पर चर्चा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">विदेश नीति के क्षेत्र में भारत ने एक नई पहचान बनाई है। “भारत प्रथम” के सिद्धांत पर आधारित नीति ने भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। अमेरिका, रूस और अन्य प्रमुख देशों के साथ संबंधों में संतुलन बनाए रखते हुए भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राजनीतिक दृष्टि से भी भाजपा का विस्तार अभूतपूर्व रहा है। देश के अधिकांश राज्यों में पार्टी की मजबूत उपस्थिति यह दर्शाती है कि संगठन और नेतृत्व दोनों स्तरों पर पार्टी ने प्रभावी कार्य किया है। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना इसकी सफलता का आधार रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हालांकि, इस विकास यात्रा में चुनौतियां भी मौजूद हैं। रोजगार सृजन, आय असमानता और कृषि क्षेत्र की समस्याएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। लेकिन यह भी सच है कि सरकार इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए सुधार की दिशा में प्रयासरत है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी का नेतृत्व केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक दृष्टिकोण है—एक ऐसा दृष्टिकोण जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखता है। “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य इसी सोच का परिणाम है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक संकल्प है, जिसे साकार करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अमित शाह की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल ने इस दृष्टिकोण को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पार्टी को मजबूत करते हुए उसे हर स्तर पर सशक्त बनाया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आज भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां वह न केवल अपने अतीत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य को लेकर भी आश्वस्त है। यह आत्मविश्वास पिछले कुछ वर्षों में हुए विकास का परिणाम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भारत ने जिस गति से प्रगति की है, वह न केवल देशवासियों के लिए गर्व का विषय है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक उदाहरण है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यदि यही दिशा और प्रयास जारी रहे, तो भारत जल्द ही एक विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अंततः, यह दौर केवल राजनीतिक सफलता का नहीं, बल्कि एक युग निर्माण का दौर है, जिसमें भारत अपनी नई पहचान गढ़ रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ रहा है।</div>
<div style="text-align:justify;">        <strong>*कांतिलाल मांडोत वरिष्ठ पत्रकार*</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:22:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार में मजदूरों का लिंक्डइन?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या मजदूरों का भी लिंक्डइन हो सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये सवाल सुनकर कई लोग आश्चर्य से भौहें चढ़ा लेंगे। लेकिन बिहार के दरभंगा जिले के चंद्रशेखर मंडल ने न सिर्फ ये सवाल उठाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसे हकीकत में बदल दिया। हर सुबह शहरों के चौकों पर खड़े उन मजदूरों की तस्वीर देखिए हाथों में हथौड़ा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुदाल या सिर्फ इंतजार। घंटों धूप में पसीना बहाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन काम किसी और को मिल जाता है। बिचौलिए बीच में आ जाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कमीशन काट लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और मजदूर को मिलता है बस थोड़ा-सा पैसा और बहुत सारा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173931/linkedin-of-workers-in-bihar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/153040280.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या मजदूरों का भी लिंक्डइन हो सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये सवाल सुनकर कई लोग आश्चर्य से भौहें चढ़ा लेंगे। लेकिन बिहार के दरभंगा जिले के चंद्रशेखर मंडल ने न सिर्फ ये सवाल उठाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसे हकीकत में बदल दिया। हर सुबह शहरों के चौकों पर खड़े उन मजदूरों की तस्वीर देखिए हाथों में हथौड़ा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुदाल या सिर्फ इंतजार। घंटों धूप में पसीना बहाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन काम किसी और को मिल जाता है। बिचौलिए बीच में आ जाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कमीशन काट लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और मजदूर को मिलता है बस थोड़ा-सा पैसा और बहुत सारा अपमान।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> चंद्रशेखर ने ये दर्दनाक हकीकत अपनी आंखों से देखी। उन्होंने तय किया अब ये बदलेगा। कोविड महामारी के उस काले दौर में</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब लाखों मजदूर शहरों से गांव लौट आए और भूखे पेट सोने को मजबूर हो गए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर ने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लेबर चौक</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नामक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। ये कोई साधारण ऐप नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन अनगिनत हाथों की डिजिटल पहचान है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो मेहनत तो करते हैं लेकिन सम्मान नहीं पाते। आज इस पहल से एक लाख से ज्यादा मजदूरों को काम मिल चुका है। ये सिर्फ नंबर्स नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हजारों परिवारों की जिंदगी बदलने वाली कहानी है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर मंडल का सफर खुद एक संघर्षपूर्ण गाथा है। दरभंगा के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले चंद्रशेखर ने कभी मजदूरों की पीड़ा को किताबों से नहीं सीखा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस किया। बचपन से ही उन्होंने देखा कि कैसे उनके मोहल्ले के मजदूर सुबह चार बजे उठते</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">साइकिल पर लदकर शहर के चौक पहुंचते</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन शाम को खाली हाथ लौट आते। </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">काम मिलेगा या नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये भाग्य पर निर्भर था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">,' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर बताते हैं। खुद आईटी बैकग्राउंड से आने वाले चंद्रशेखर ने कभी सोचा नहीं था कि उनका ज्ञान मजदूरों की भलाई के लिए काम आएगा। 2020 में लॉकडाउन लगा तो हालात और बिगड़ गए। प्रवासी मजदूर पैदल सैकड़ों किलोमीटर चलकर बिहार लौटे। नौकरियां छूट गईं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ठेकेदार गायब हो गए। चंद्रशेखर ने सोचा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों न एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए जो मजदूरों को ठेकेदारों से सीधे जोड़े</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिचौलिए खत्म हो जाएं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रेट्स पारदर्शी हों और काम घर बैठे मिले। इस विचार से </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लेबर चौक</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का जन्म हुआ। शुरू में ये एक साधारण व्हाट्सएप ग्रुप था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जल्दी ही इसे ऐप और वेबसाइट में बदल दिया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लेबर चौक कैसे काम करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये समझना आसान है। मजदूर मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो हिंदी और स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध है। वे अपनी प्रोफाइल बनाते हैं — नाम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उम्र</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्किल्स जैसे मिस्त्री</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्लंबर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रीशियन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लोडर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पेंटर या निर्माण मजदूर। फोटो अपलोड करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुभव बताते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकेशन चुनते हैं और उपलब्धता मार्क करते हैं। अब मजदूरों का अपना </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">लिंक्डइन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तैयार! दूसरी तरफ ठेकेदार या मकान मालिक ऐप पर लॉगिन करते हैं। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें काम की डिटेल्स भरनी पड़ती हैं कितने मजदूर चाहिए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कौन-सी स्किल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कितने दिन का काम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कितना रेट। ऐप एल्गोरिदम मैच करता है और सही मजदूरों की लिस्ट भेजता है। ठेकेदार सीधे कॉल या चैट कर सकता है। कोई कमीशन नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई बिचौलिया नहीं। काम पूरा होने पर दोनों पक्ष रिव्यू देते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अगले काम के लिए प्रोफाइल को मजबूत बनाता है। पेमेंट डिजिटल होता है </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">UPI </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से सीधे मजदूर के अकाउंट में। ये सिस्टम न सिर्फ समय बचाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्वास भी बनाता है। दरभंगा के एक मजदूर रामविलास सिंह कहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहले चौक पर लाइन लगानी पड़ती थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लड़ाई-झगड़े होते थे। अब फोन पर काम आ जाता है। मेरी मासिक कमाई दोगुनी हो गई।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्लेटफॉर्म की सफलता के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। लॉन्च के दो सालों में ही एक लाख से ज्यादा मजदूर रजिस्टर हो चुके हैं। बिहार के दरभंगा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मधुबनी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समस्तीपुर से शुरू होकर ये पटना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मुजफ्फरपुर और यहां तक कि दिल्ली</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई जैसे शहरों तक फैल चुका है। रोजाना हजारों जॉब पोस्ट होते हैं छोटे मरम्मत के काम से लेकर बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स तक। कोविड के बाद जब कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री पटरी पर लौटी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल लेबर चौक ने मजदूरों की कमी को पूरा किया। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक रिपोर्ट के मुताबिक</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">70 प्रतिशत यूजर्स ग्रामीण इलाकों से हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो स्मार्टफोन क्रांति का फायदा उठा रहे हैं। चंद्रशेखर ने ट्रेनिंग कैंप भी लगाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां बुजुर्ग मजदूरों को ऐप चलाना सिखाया गया। महिलाओं के लिए अलग सेक्शन है घरेलू कामगारों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धोबी या कढ़ाई करने वालों के लिए। ये प्लेटफॉर्म सिर्फ रोजगार नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्किल डेवलपमेंट भी। ऐप पर फ्री ट्यूटोरियल वीडियो हैं सेफ्टी टिप्स</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीकें सीखने के लिए। एक मजदूर ने बताया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने ऐप से वेल्डिंग सीखी और अब दोगुना रेट लेता हूं।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं रहीं। शुरू में इंटरनेट की कमी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्टफोन न होने की समस्या थी। चंद्रशेखर ने लोकल </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">NGO </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ मिलकर फ्री स्मार्टफोन डिस्ट्रीब्यूट किए। बिचौलिए खुश नहीं हुए उन्होंने विरोध किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अफवाहें फैलाईं। लेकिन मजदूरों का समर्थन मिला। सरकार ने भी सराहना की। बिहार सरकार की </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल बिहार</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहल से इसे बढ़ावा मिला। अब ये स्टार्टअप फंडिंग की तलाश में है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">AI </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फीचर्स जोड़े जा सकें जैसे वॉयस सर्च हिंदी में या लोकेशन बेस्ड मैचिंग। चंद्रशेखर कहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा सपना पूरे भारत को कवर करना है। हर मजदूर का डिजिटल चौक हो।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये कहानी सिर्फ चंद्रशेखर की नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन अनाम नायकों की है जो देश की रीढ़ हैं। भारत में 50 करोड़ से ज्यादा अनौपचारिक मजदूर हैं। उनकी 90 प्रतिशत कमाई बिचौलियों के कारण कम हो जाती है। डिजिटल लेबर चौक जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल इंडिया को ग्रामीण स्तर पर साकार कर रहे हैं। ये साबित करता है कि तकनीक अमीरों तक सीमित नहीं। एक साधारण स्मार्टफोन हाथ में आ जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिंदगी बदल सकती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> महात्मा गांधी ने कहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की आत्मा गांवों में बसती है।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर गांवों को डिजिटल बना रहे हैं। आज जब हम लिंक्डइन पर प्रोफेशनल्स देखते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो सोचिए मजदूरों का भी लिंक्डइन क्यों न हो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर ने दिखा दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये मुमकिन है। उनकी ये पहल न सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण ला रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक सम्मान भी बहाल कर रही है। वो हाथ जो कभी अनदेखे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज ऐप पर चमक रहे हैं। अगर आप भी कोई ठेकेदार हैं या मजदूर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us"><a href="http://digitallabourchowk.com/">digitallabourchowk.com</a> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर विजिट करें। ये बदलाव की शुरुआत है एक ऐसे भारत की</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां मेहनत का पूरा हक मिले। चंद्रशेखर मंडल जैसे योद्धा हमें सिखाते हैं कि समस्या जितनी बड़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान उतना ही सरल हो सकता है। बस हिम्मत चाहिए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और थोड़ा सा डिजिटल जादू।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:51:58 +0530</pubDate>
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