<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.swatantraprabhat.com/tag/61573/independent-morning-article" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Swatantra Prabhat RSS Feed Generator</generator>
                <title>स्वतंत्र प्रभात लेख - Swatantra Prabhat</title>
                <link>https://www.swatantraprabhat.com/tag/61573/rss</link>
                <description>स्वतंत्र प्रभात लेख RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कुसंगति त्यागें धर्मबुद्धि जागे जीवन बने उज्ज्वल और संस्कारित</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">मनुष्य का जीवन संगति से निर्मित होता है। जैसा वातावरण मिलता है वैसा ही मनुष्य का स्वभाव बनता जाता है। प्राचीन नीतिकारों ने स्पष्ट कहा है कि अच्छे और बुरे लोगों का प्रभाव मन पर अवश्य पड़ता है। आम और नीम के उदाहरण से यह बात समझाई गई है कि यदि दोनों के मूल एक साथ जुड़े हों तो मीठा आम भी कड़वाहट ग्रहण कर लेता है। यही स्थिति मनुष्य जीवन में भी देखी जाती है। कुसंगति का प्रभाव धीरे धीरे व्यक्ति के विचारों और आचरण को बदल देता है। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि मनुष्य अपनी संगति को</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174765/give-up-bad-company-awaken-your-religious-mind-let-your"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/hindi-divas.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">मनुष्य का जीवन संगति से निर्मित होता है। जैसा वातावरण मिलता है वैसा ही मनुष्य का स्वभाव बनता जाता है। प्राचीन नीतिकारों ने स्पष्ट कहा है कि अच्छे और बुरे लोगों का प्रभाव मन पर अवश्य पड़ता है। आम और नीम के उदाहरण से यह बात समझाई गई है कि यदि दोनों के मूल एक साथ जुड़े हों तो मीठा आम भी कड़वाहट ग्रहण कर लेता है। यही स्थिति मनुष्य जीवन में भी देखी जाती है। कुसंगति का प्रभाव धीरे धीरे व्यक्ति के विचारों और आचरण को बदल देता है। इसलिए यह अत्यंत आवश्यक है कि मनुष्य अपनी संगति को लेकर सजग रहे और सदैव उत्तम मार्ग का चयन करे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">यह प्रश्न स्वाभाविक है कि बुरे लोगों का प्रभाव जल्दी क्यों पड़ता है और अच्छे लोगों का प्रभाव उतनी तीव्रता से क्यों नहीं पड़ता। इसका कारण मनुष्य की प्रवृत्ति में छिपा हुआ है। बुराई आकर्षक प्रतीत होती है और वह सरल मार्ग का भ्रम देती है। जबकि अच्छाई में अनुशासन और संयम की आवश्यकता होती है। सज्जन का हृदय कोमल होता है इसलिए वह दूसरों के प्रभाव में जल्दी आ सकता है जबकि दुर्जन कठोर होता है और अपने स्वभाव को नहीं छोड़ता। यही कारण है कि सज्जन व्यक्ति को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु उसका अविवेक है। बाहरी शत्रु उतना नुकसान नहीं पहुंचाता जितना कि गलत निर्णय और गलत संगति पहुंचा देती है। परिवार में भी यदि माता पिता विवेकशील नहीं हैं तो वे अपनी संतान को सही दिशा नहीं दे पाते। आज के समय में यह देखा जा रहा है कि माता पिता अपने बच्चों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर तो ध्यान देते हैं लेकिन उनके नैतिक और आध्यात्मिक विकास की ओर उतना ध्यान नहीं देते। परिणामस्वरूप बच्चे भटक जाते हैं और जीवन के सही मार्ग से दूर हो जाते हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">संस्कारों का निर्माण बचपन से ही होता है। बालक का मन अत्यंत कोमल होता है। वह जैसा देखता है वैसा ही सीखता है। इसलिए यह आवश्यक है कि उसे अच्छा वातावरण दिया जाए। आज के युग में मनोरंजन के साधनों ने बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डाला है। यदि इन साधनों का उपयोग सावधानी से नहीं किया गया तो यह बच्चों को गलत दिशा में ले जा सकते हैं। इसलिए माता पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों के व्यवहार पर ध्यान दें और उन्हें सही मार्ग दिखाएं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एक प्रेरक प्रसंग इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक व्यक्ति जो स्वयं सुन नहीं सकता था वह प्रतिदिन अपने बच्चों को लेकर संतों के प्रवचन में जाता था। जब लोगों ने उससे पूछा कि उसे तो कुछ सुनाई नहीं देता फिर वह क्यों आता है तो उसने उत्तर दिया कि वह अपने बच्चों के संस्कारों के लिए आता है। उसका मानना था कि यदि बच्चे अच्छे संस्कारों से युक्त होंगे तो वे जीवन में सही निर्णय लेंगे और धन का सदुपयोग करेंगे। यह दृष्टिकोण हर माता पिता के लिए प्रेरणादायक है। परंपराओं का संरक्षण भी अत्यंत आवश्यक है। यदि हम अपनी अच्छी परंपराओं को नहीं बचाएंगे तो समाज में नैतिकता का पतन हो जाएगा। नई पीढ़ी को आधुनिकता के साथ साथ संस्कारों का भी ज्ञान होना चाहिए। केवल भौतिक उन्नति से जीवन सफल नहीं होता। नैतिक मूल्यों और धर्मबुद्धि के बिना जीवन अधूरा रह जाता है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">वर्तमान समय में बुराइयों का प्रभाव बढ़ता हुआ दिखाई देता है लेकिन यह सत्य है कि अंततः विजय सत्य की ही होती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि असत्य और अधर्म अधिक समय तक टिक नहीं सकते। इसलिए हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि सजग रहकर समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए। संगति का प्रभाव इतना गहरा होता है कि वह मनुष्य के जीवन की दिशा बदल सकता है। यदि व्यक्ति बुरे लोगों के संपर्क में रहता है तो वह धीरे धीरे उनके जैसा बनने लगता है। प्रारंभ में यह प्रभाव छोटा होता है लेकिन समय के साथ यह गहरा हो जाता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपने मित्रों और परिचितों का चयन सोच समझकर करें।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एक हास्य प्रसंग के माध्यम से भी यह समझाया गया है कि बुरी आदतें धीरे धीरे विकसित होती हैं। प्रारंभ में वे छोटी लगती हैं लेकिन बाद में वे गंभीर रूप ले लेती हैं। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को गलत आदत लग जाए तो उसे छोड़ना कठिन हो जाता है। इसलिए शुरुआत में ही सावधानी बरतनी चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">एक अन्य उदाहरण में बताया गया है कि एक व्यक्ति ने शेर का पालन किया। वह उसे शाकाहारी बनाना चाहता था लेकिन अंततः शेर ने अपने स्वभाव को नहीं छोड़ा। यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि स्वभाव और संगति का प्रभाव कितना गहरा होता है। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि बुरे तत्वों के साथ रहकर अच्छा बने रहना अत्यंत कठिन है।महापुरुषों ने हमेशा कुसंगति से दूर रहने की शिक्षा दी है। उन्होंने कहा है कि बुरे मित्र से अच्छा है कि व्यक्ति अकेला रहे। काजल की कोठरी में जाने से दाग लगना निश्चित है। इसलिए हमें अपने जीवन को पवित्र बनाए रखने के लिए बुरी संगति से बचना चाहिए।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">जीवन का प्रत्येक क्षण मूल्यवान है। यदि हम इसे अच्छे कार्यों में लगाते हैं तो हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। लेकिन यदि हम इसे व्यर्थ में गंवाते हैं तो यह हमें गलत दिशा में ले जा सकता है। खाली मन में नकारात्मक विचार जल्दी प्रवेश करते हैं इसलिए हमें सदैव व्यस्त और जागरूक रहना चाहिए।आत्मावलोकन भी अत्यंत आवश्यक है। यदि हम प्रतिदिन अपने कार्यों और विचारों का विश्लेषण करें तो हम अपनी गलतियों को पहचान सकते हैं और उन्हें सुधार सकते हैं। जो व्यक्ति स्वयं के प्रति सजग होता है वह कभी भी बुराई के प्रभाव में नहीं आता। अंततः यह कहा जा सकता है कि कुसंगति से बचना और सद्गुणों को अपनाना ही जीवन की सफलता का मूल मंत्र है। हमें स्वयं भी अच्छे मार्ग पर चलना चाहिए और आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनना चाहिए। जब हम अपने जीवन को प्रकाशमय बनाएंगे तभी समाज और राष्ट्र का कल्याण संभव होगा।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>कांतिलाल मांडोत</strong></div>]]></content:encoded>
                
                

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174765/give-up-bad-company-awaken-your-religious-mind-let-your</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/174765/give-up-bad-company-awaken-your-religious-mind-let-your</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:19:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/hindi-divas.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हनुमान जयंती: भक्ति, शक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान जयन्ती का पावन पर्व हिंदू धर्मानुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी उत्सव है। यह दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो शक्ति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भक्ति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्ठा और त्याग के प्रतीक हैं। यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और वर्ष 2026 में यह 2 अप्रैल को है। हनुमान जी का चरित्र अद्भुत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वे एक ओर असीम बल के स्वामी हैं तो दूसरी ओर विनम्रता की प्रतिमूर्ति। वे शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार माने जाते हैं</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174761/hanuman-jayanti-a-wonderful-confluence-of-devotional-power-and-dedication"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/images.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान जयन्ती का पावन पर्व हिंदू धर्मानुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी उत्सव है। यह दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो शक्ति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भक्ति</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्ठा और त्याग के प्रतीक हैं। यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और वर्ष 2026 में यह 2 अप्रैल को है। हनुमान जी का चरित्र अद्भुत है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि वे एक ओर असीम बल के स्वामी हैं तो दूसरी ओर विनम्रता की प्रतिमूर्ति। वे शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार माने जाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिनका जन्म पवन देव के आशीर्वाद से हुआ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए वे पवनपुत्र कहलाए। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उनके जन्म की कथा अत्यंत प्रेरणादायक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें माता अंजना की तपस्या और भगवान शिव का वह अंश समाहित है जो संसार को बुराइयों से मुक्ति दिलाने के लिए अवतरित हुआ। हनुमान जी के बचपन की वह कथा आज भी बच्चों से लेकर वृद्धों तक के मन में रोमांच भर देती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब उन्होंने सूर्य देव को एक लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया था। यह घटना उनके उस अदम्य साहस और अलौकिक क्षमता का प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो सीमाओं से परे है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इंद्र के वज्र प्रहार से उनकी ठुड्डी पर लगी चोट ने उन्हें </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नाम दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसी क्षण देवताओं द्वारा मिले वरदानों ने उन्हें अपराजेय बना दिया। ब्रह्मा जी ने उन्हें लंबी आयु का वरदान दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो अग्नि ने उन्हें आग से न जलने का और वरुण ने जल से सुरक्षित रहने का आशीष दिया। ये वरदान केवल व्यक्तिगत सिद्धियाँ नहीं थीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भविष्य में होने वाले धर्म और अधर्म के युद्ध की तैयारी थी। हनुमान जयंती पर जब हम उनके जीवन का स्मरण करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनकी शिक्षा-दीक्षा का प्रसंग भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने सूर्य देव से वेदों का ज्ञान प्राप्त किया और व्याकरण में इतनी निपुणता हासिल की कि वे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">महाव्याकरण</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कहलाए। उनका व्यक्तित्व बल और बुद्धि के विलक्षण समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">रामचरितमानस और रामायण में हनुमान जी की भूमिका एक ऐसे सेतु की तरह है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो विरक्त को अनुराग से और भक्त को भगवान से जोड़ती है। ऋष्यमूक पर्वत पर जब उनकी भेंट श्री राम से हुई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वह मिलन इतिहास का सबसे पवित्र मिलन बन गया। एक साधारण वानर के वेश में वे अपने प्रभु के पास गए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन राम की पारखी नजरों ने पहचान लिया कि यह कोई साधारण जीव नहीं है। इसके बाद हनुमान जी का पूरा जीवन राममय हो गया। हनुमान जयंती के इस अवसर पर उनके द्वारा किए गए अद्भुत कार्यों का विश्लेषण करना आवश्यक है। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">समुद्र लांघने की उनकी क्षमता हमें सिखाती है कि यदि आत्मविश्वास दृढ़ हो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो सौ योजन का विशाल सागर भी छोटा पड़ जाता है। लंका में अशोक वाटिका के भीतर माता सीता की खोज करना और उन्हें प्रभु राम की मुद्रिका देना उनके धैर्य और बुद्धिमानी की पराकाष्ठा थी। उन्होंने लंका दहन के माध्यम से रावण के अहंकार की लंका को भस्म किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो यह संदेश देता है कि अधर्म कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">सत्य की एक लौ उसे राख करने के लिए पर्याप्त है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> हनुमान जी का </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">सुंदरकांड</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">केवल एक अध्याय नहीं है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वह जीवन के हर मोड़ पर हार रहे मनुष्य के लिए विजय का मंत्र है। लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए जब वे द्रोणागिरि पर्वत उठाने गए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो वे केवल एक जड़ी-बूटी नहीं लाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन्होंने सिद्ध कर दिया कि श्रद्धा के मार्ग पर असंभव शब्द का कोई स्थान नहीं है। यदि औषधि की पहचान नहीं हो सकी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्होंने पूरे पर्वत को ही उठा लिया—यह उनके निर्णय लेने की क्षमता और कार्य के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान जयंती की पूजा विधि और इसमें निहित प्रतीकों का भी गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। भक्त मंदिरों में जाकर हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करते हैं। इसके पीछे वह प्रसिद्ध कथा है जिसमें उन्होंने माता सीता को अपनी मांग में सिंदूर लगाते देखा था और जब उन्हें पता चला कि यह श्री राम की लंबी आयु के लिए है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्होंने अपने पूरे शरीर पर ही सिंदूर मल लिया। यह निश्छल भक्ति का वह स्वरूप है जहाँ भक्त अपने आराध्य की प्रसन्नता के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर देता है। हनुमान चालीसा का पाठ</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज दुनिया के कोने-कोने में गूंजता है। इसकी हर पंक्ति में एक विशेष ऊर्जा है। </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भूत पिशाच निकट नहीं आवै</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जैसी पंक्तियाँ मनुष्य को अज्ञात भय से मुक्ति दिलाती हैं। हनुमान जयंती पर भंडारों का आयोजन और </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बूंदी के लड्डू</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का भोग सामाजिक समरसता का प्रतीक है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ समाज के हर वर्ग के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि शक्ति का उपयोग सदैव रक्षा और सेवा के लिए होना चाहिए। हनुमान जी चाहते तो स्वयं रावण का वध कर सकते थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उनमें इतनी सामर्थ्य थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन्होंने सदैव अपने प्रभु की आज्ञा का पालन किया और खुद को एक सेवक के रूप में ही प्रस्तुत किया। उनकी यह विनम्रता आज के आधुनिक युग के लिए एक बहुत बड़ी सीख है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ थोड़े से अधिकार मिलते ही मनुष्य अहंकार से भर जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आधुनिक संदर्भ में हनुमान जयंती की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। आज का मनुष्य मानसिक तनाव</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अवसाद और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रहा है। हनुमान जी का व्यक्तित्व हमें आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाता है। जामवंत जी द्वारा हनुमान जी की सोई हुई शक्ति को याद दिलाना इस बात का प्रतीक है कि हम सबके भीतर अनंत शक्तियाँ छिपी हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बस हमें एक सही दिशा और आत्मबोध की आवश्यकता है। हनुमान जयंती पर अखाड़ों में होने वाले आयोजन हमें शारीरिक स्वास्थ्य और अनुशासन के प्रति सचेत करते हैं। वे ब्रह्मचर्य के पालक हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो इंद्रिय निग्रह और मानसिक एकाग्रता का मार्ग है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> विद्यार्थी जीवन के लिए हनुमान जी का चरित्र आदर्श है क्योंकि वे एक कुशल वक्ता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चतुर कूटनीतिज्ञ और एकाग्रचित्त साधक हैं। उनकी पूजा करने से व्यक्ति को केवल धार्मिक लाभ नहीं मिलता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उसे अनुशासन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समयबद्धता और निष्ठा की भी प्रेरणा मिलती है। हनुमान जी </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">अष्टसिद्धि और नवनिधि</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के दाता हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे ये सिद्धियाँ केवल उसे प्रदान करते हैं जो धर्म के मार्ग पर अडिग रहता है। वे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">चिरंजीवी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका अर्थ है कि वे हर युग में विद्यमान हैं। ऐसी मान्यता है कि जहाँ भी रामकथा होती है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ हनुमान जी किसी न किसी रूप में अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं। यह अटूट विश्वास ही भक्तों को कठिन से कठिन समय में भी संबल प्रदान करता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान जयंती का उत्सव भारत के विभिन्न प्रांतों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। उत्तर भारत में जहाँ चैत्र पूर्णिमा का महत्व है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में इसे मार्गशीर्ष माह में मनाया जाता है। तमिलनाडु और केरल में इसे </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमत जयंती</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के रूप में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। तिथियों के भेद के बावजूद</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">भाव एक ही है उस महाशक्ति की वंदना करना जिसने मानवता को सेवा का नया अर्थ दिया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> इस दिन मंदिरों को भव्य रूप से सजाया जाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रभात फेरियाँ निकाली जाती हैं और केसरिया ध्वजों से आकाश पट जाता है। </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जय श्री राम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">जय हनुमान</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के नारों से वातावरण गुंजायमान हो उठता है। यह पर्व केवल हिंदुओं का नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन सभी का है जो वीरता और सदाचार का सम्मान करते हैं। हनुमान जी का चरित्र संकीर्णताओं से ऊपर उठकर है। वे सुग्रीव जैसे मित्र के प्रति वफादार हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विभीषण जैसे शरणागत के रक्षक हैं और श्री राम के अनन्य दास हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि रिश्ते कैसे निभाए जाते हैं और संकट के समय अपनों के साथ कैसे खड़ा रहा जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निष्कर्षतः</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान जयंती का यह पावन अवसर हमें आत्म-मंथन के लिए प्रेरित करता है। क्या हम अपने भीतर के डर को जीत पा रहे हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या हम समाज की सेवा के लिए तत्पर हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या हमारी शक्ति दूसरों की भलाई के लिए प्रयुक्त हो रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान जी का पूरा जीवन </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">परोपकाराय पुण्याय</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का जीवंत दस्तावेज है। उनकी भक्ति में कोई शर्त नहीं थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई मांग नहीं थी। उन्हें जब विदा करते समय कीमती मोतियों की माला दी गई</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो उन्होंने उन्हें दांतों से तोड़कर फेंक दिया क्योंकि उनमें </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">राम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नहीं दिख रहे थे। ऐसी अनन्य भक्ति ही मनुष्य को साधारण से असाधारण और जीव से शिव बनाती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> आज के दौर में जब विश्व अनेक चुनौतियों से घिरा है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हनुमान जी का </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">बजरंग</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूप हमें साहस देता है और उनका </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">शांत</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रूप हमें धैर्य। हनुमान जयंती हमें विश्वास दिलाती है कि यदि हम निष्ठापूर्वक अपने मार्ग पर चलते रहें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो बाधाएँ चाहे कितनी ही विकट क्यों न हों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">विजय अंततः हमारी ही होगी। इस दिन हमें केवल दीये नहीं जलाने चाहिए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपने भीतर के अंधकार को मिटाने का संकल्प लेना चाहिए। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">भगवान हनुमान की कृपा हम सब पर बनी रहे और हम उनके पदचिह्नों पर चलते हुए एक बेहतर समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकें</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">यही इस जयंती की सच्ची सार्थकता होगी। अंत में यही कहा जा सकता है कि हनुमान जी की महिमा अपार है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">वे बुद्धिमानों में अग्रगण्य हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बलवानों में श्रेष्ठ हैं और भक्तों के हृदय में सदैव निवास करने वाले प्राणस्वरूप हैं। उनकी जयन्ती हमें उस शाश्वत सत्य की याद दिलाती रहती है कि ईश्वर के प्रति समर्पण ही वह एकमात्र चाबी है जिससे मोक्ष और सांसारिक सफलता दोनों के द्वार खुलते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174761/hanuman-jayanti-a-wonderful-confluence-of-devotional-power-and-dedication</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/174761/hanuman-jayanti-a-wonderful-confluence-of-devotional-power-and-dedication</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:08:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/images.jpg"                         length="87405"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बातें बची हैं, पर बातचीत क्यों खत्म हो रही है?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज हमारे पास शब्दों की कोई कमी नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमी है उस सच्चाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस गहराई और उस आत्मीय स्पर्श की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शब्दों को साधारण ‘बात’ से उठाकर सच्ची</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में बदल देता है। हम दिन भर अनगिनत लोगों से बात करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिक्रियाएँ देते हैं—फिर भी जब रात की खामोशी उतरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भीतर एक अजीब-सा खालीपन रह जाता है। यह खालीपन यूँ ही नहीं जन्म लेता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह इस बात का साक्षी है कि ‘बातें’ तो बहुत हुईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर ‘बातचीत’ कहीं खो गई। क्योंकि</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/174000/there-are-still-things-left-but-why-are-the-conversations"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas15.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">कृति आरके जैन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज हमारे पास शब्दों की कोई कमी नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमी है उस सच्चाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस गहराई और उस आत्मीय स्पर्श की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शब्दों को साधारण ‘बात’ से उठाकर सच्ची</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">में बदल देता है। हम दिन भर अनगिनत लोगों से बात करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रतिक्रियाएँ देते हैं—फिर भी जब रात की खामोशी उतरती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो भीतर एक अजीब-सा खालीपन रह जाता है। यह खालीपन यूँ ही नहीं जन्म लेता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह इस बात का साक्षी है कि ‘बातें’ तो बहुत हुईं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पर ‘बातचीत’ कहीं खो गई। क्योंकि बातचीत केवल शब्दों का मेल नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि दो मनों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दो भावनाओं और दो आत्माओं का सच्चा जुड़ाव है—और जब यह जुड़ाव नहीं बनता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शब्द केवल शोर बनकर रह जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज बातचीत के खत्म होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि हमने उसे एक औपचारिकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">एक आदत और एक रूटीन बना दिया है। “क्या हाल है</span>?”, “<span lang="hi" xml:lang="hi">सब ठीक</span>?”, “<span lang="hi" xml:lang="hi">खाना खाया</span>?”—<span lang="hi" xml:lang="hi">ये सवाल जरूरी जरूर हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये रिश्तों में जीवन नहीं भरते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सिर्फ उनकी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। असली बातचीत तब जन्म लेती है जब हम सतह से नीचे उतरते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम सच में जानना चाहते हैं कि सामने वाला कैसा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके भीतर क्या चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कौन-सी बातें उसे चुप कर रही हैं। और सबसे जरूरी—जब हम इन सवालों के जवाब सुनने के लिए ठहरते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना जल्दबाजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना औपचारिकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पूरी संवेदनशीलता के साथ।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारी सबसे बड़ी कमी यही है कि हम सुनना भूल गए हैं—हम सिर्फ जवाब देने के लिए इंतज़ार करते हैं। जब कोई अपनी बात कह रहा होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब हमारा ध्यान उसकी भावनाओं पर नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अपने अगले शब्दों पर होता है। यही कारण है कि सामने वाला सुना हुआ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि अनदेखा और अनसुना महसूस करता है। यही अनदेखापन धीरे-धीरे एक गहरी दूरी में बदल जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो बिना शोर किए रिश्तों को कमजोर कर देता है और अंततः बातचीत को खत्म कर देता है। शायद अब समय आ गया है कि हम फिर से सीखें—कम बोलना नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सच में सुनना और दिल से जुड़ना।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डर और असुरक्षा भी बातचीत को गहराई तक पहुँचने से रोक देते हैं। हम अपनी सच्ची भावनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपने भीतर छिपे सच और अपनी नाज़ुक संवेदनाओं को व्यक्त करने से कतराते हैं—कहीं हमें गलत न समझ लिया जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं हमारी कमजोरी उजागर न हो जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं हमारी छवि टूट न जाए। इसलिए हम सुरक्षित शब्दों का सहारा लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सतही बातें करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अपने असली भावों को भीतर ही दबाए रखते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जहाँ जोखिम नहीं होता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहाँ सच्ची गहराई भी नहीं होती। बातचीत तब जीवंत और अर्थपूर्ण बनती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब हम अपने भीतर की सच्चाई को</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपनी अपूर्णताओं और असहजताओं के साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहसपूर्वक सामने रखने का हौसला करते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">तकनीक ने बातचीत को तेज़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुविधाजनक और हर पल उपलब्ध जरूर बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसे गहराई और संवेदनशीलता नहीं दे पाई। टेक्स्ट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इमोजी और छोटे-छोटे संदेशों ने भावनाओं को सीमित और संक्षिप्त कर दिया है। हम तुरंत जवाब तो दे देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उन शब्दों को महसूस करने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें समझने और उनके पीछे छिपे भावों को पकड़ने का समय नहीं लेते। जबकि सच्ची बातचीत को समय चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ठहराव चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और एक ऐसा धैर्य चाहिए जिसमें शब्दों के बीच की खामोशी भी सुनी जा सके। जब हर चीज़ जल्दबाज़ी में हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बातचीत भी उसी जल्दबाज़ी की शिकार हो जाती है—और यही कारण है कि आज हम एक-दूसरे से जुड़े तो हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वास्तव में समझे नहीं जाते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक और गहरी और अक्सर अनदेखी वजह है—अहंकार। छोटे-छोटे मुद्दों पर हम चुप्पी ओढ़ लेते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह सोचकर कि “पहले वह क्यों नहीं बोलता</span>?”, “<span lang="hi" xml:lang="hi">मैं ही क्यों पहल करूँ</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">यह ‘मैं’ और ‘मेरी’ की भावना ही बातचीत का सबसे बड़ा अवरोध बन जाती है। जबकि सच्ची बातचीत तब जीवित रहती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई एक झुकने का साहस करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब कोई एक अपने अहंकार से ऊपर उठकर पहला कदम बढ़ाता है। लेकिन जब दोनों ओर अहंकार की दीवार खड़ी हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब शब्द खत्म नहीं होते—बस उनके बीच का रास्ता बंद हो जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वहीं से बातचीत धीरे-धीरे दम तोड़ने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज का जीवन इतना तेज़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इतना व्यस्त और इतना उलझा हुआ हो गया है कि हमने बातचीत को अपनी प्राथमिकताओं की सूची से लगभग बाहर ही कर दिया है। काम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लक्ष्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महत्वाकांक्षाएँ और जिम्मेदारियों के बीच हम बातचीत को बार-बार “बाद में” टालते रहते हैं—जैसे वह कोई गैर-ज़रूरी चीज़ हो। लेकिन सच्चाई यह है कि रिश्ते ‘बाद में’ नहीं चलते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वे केवल ‘अभी’ में ही जीवित रहते हैं। उन्हें समय चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सच्चा ध्यान चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सबसे बढ़कर—हमारी पूरी उपस्थिति चाहिए। जब हम किसी के साथ होते हुए भी अपने विचारों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फोन या काम में उलझे रहते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो बातचीत धीरे-धीरे अपनी सांसें खोने लगती है और अनजाने में ही रिश्तों की गर्माहट कम होने लगती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">बातचीत को बचाने के लिए हमें अपने भीतर लौटना होगा—थोड़ा ठहरकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ा समझकर। हमें यह गहराई से समझना होगा कि बातचीत कोई साधारण तकनीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि एक बेहद संवेदनशील और जीवंत प्रक्रिया है—जिसमें समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईमानदारी और पारस्परिक समझ की सच्ची जरूरत होती है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमें फिर से सीखना होगा—पूरी एकाग्रता के साथ सुनना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सच्चाई और स्पष्टता से बोलना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और बिना किसी शर्त के एक-दूसरे को स्वीकार करना। क्योंकि जब बातचीत खत्म होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो रिश्ते अचानक नहीं टूटते—वे धीरे-धीरे भीतर से खोखले हो जाते हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और एक दिन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ शब्द रह जाते हैं… बातचीत नहीं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/174000/there-are-still-things-left-but-why-are-the-conversations</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/174000/there-are-still-things-left-but-why-are-the-conversations</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 20:43:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/hindi-divas15.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनुपम अद्वितीय विलक्षण नेतृत्व क्षमता के धनी हैं नरेंद्र मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तपस्थली से तप कर निकले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति में सबसे कुशल अपराजेय नेतृत्वकर्ता हैं वह अपने विरोधियों यहां तक की अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के प्रतिस्पर्धियों की तमाम चालों की काट कर अपनी नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपरिमित दक्षता भी रखते हैं इस मामले में उनका कोई सानी नहीं है यह हम नही रिकार्ड बयान कर रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">तमाम आलोचनाओं और विरोधियों के जबरदस्त साजिशी प्रहार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत बन कर उभरे है जो धरातल पर अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के बूते पर</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173939/narendra-modi-is-blessed-with-unique-leadership-abilities"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/pm-narendra-modi-2.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>मनोज कुमार अग्रवाल </strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तपस्थली से तप कर निकले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति में सबसे कुशल अपराजेय नेतृत्वकर्ता हैं वह अपने विरोधियों यहां तक की अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के प्रतिस्पर्धियों की तमाम चालों की काट कर अपनी नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपरिमित दक्षता भी रखते हैं इस मामले में उनका कोई सानी नहीं है यह हम नही रिकार्ड बयान कर रहे हैं। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">तमाम आलोचनाओं और विरोधियों के जबरदस्त साजिशी प्रहार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसी शख्सियत बन कर उभरे है जो धरातल पर अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता के बूते पर अपना अलग अनूठा व्यक्तित्व रखते हैं उन्होंने किसी भी राजनीतिक नेता के सरकार के लम्बे समय तक नेतृत्व करने के रिकार्ड को तोड़ दिया है। भारत की राजनीति में एक नया इतिहास रचते हुए पीएम नरेंद्र मोदी अब देश के सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को पीछे छोड़ दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुजरात के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक उनका सफर लगातार जीत, मजबूत नेतृत्व और राजनीतिक स्थिरता की मिसाल बनकर उभरा है। भारतीय राजनीति में बीता रविवार 22 मार्च विशेष दिन बन गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  एक ऐसा रिकॉर्ड तोड़ा जो दशकों से किसी और के नाम था. सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने लगातार 8,930 दिनों तक किसी सरकार का नेतृत्व किया था. यह भारत में किसी भी सरकार के मुखिया का अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल था. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वह लंबे समय तक इस पद पर बने रहे और अपने कार्यकाल में कभी चुनाव नहीं हारे। साल 2014 में प्रधानमंत्री पद के लिए नाम सामने आने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके बाद 2019 और 2024 में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज की। खास बात यह है कि अपने पूरे राजनीतिक करियर में उन्होंने अब तक कोई बड़ा चुनाव नहीं हारा है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर. 2001 से 2014 तक करीब 13 साल तक वो गुजरात की सत्ता संभालते रहे. इस दौरान गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा पूरे देश में होती थी। 2014 में जब वो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने. तब से इस रिपोर्ट को लिखने तक लगातार. इन दोनों कार्यकालों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 8,931 दिन बनता है.सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग अब पद पर 8930 दिनों के साथ दूसरे स्थान पर है. चामलिंग ने सिक्किम की लगातार 24 साल और 165 दिनों तक सेवा की. इससे वे ना सिर्फ भारत में बल्कि विश्व स्तर पर सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्रियों में से एक बन गए. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इसी कड़ी में तीसरा स्थान ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास है. उन्होंने 2000 से 2024 तक राज्य पर शासन किया. उन्होंने लगभग 24 साल और 99 दिनों का कार्यकाल पूरा किया. पटनायक के लंबे शासन की पहचान राजनीतिक स्थिरता और लगातार चुनावी जीत रही है. इसने उन्हें भारत के सबसे लंबे समय तक टिके रहने वाले नेताओं में से एक बनाए रखा.आपको बता दें इस रैंकिंग को जो बात खास रूप से दिलचस्प बनाती है वह यह है कि इसमें मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों के रूप में बिताए गए समय को जोड़ा गया है. जिन नेताओं ने सिर्फ प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दीं जैसे कि जवाहरलाल नेहरू, वे इस खास गणना के तहत शीर्ष तीन में शामिल नहीं हैं. भले ही उनका कार्यकाल लंबा रहा हो.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यह भी बता दें कि वरिष्ठ नेता ज्योति बसु ने 23 सालों से ज्यादा समय तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में काम किया है. वे इस लिस्ट से बाहर हैं. लेकिन उनका कार्यकाल भारतीय इतिहास में किसी एक पद पर सबसे लंबे समय तक नेतृत्व करने वाले कार्यकालों में से एक हैप्रधानमंत्री मोदी का यह रिकॉर्ड अकेला नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी के नाम और भी कई उपलब्धियां हैं. गुजरात के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री किसी और मुख्यमंत्री ने गुजरात में इतना लंबा कार्यकाल नहीं किया.</div>
<div style="text-align:justify;">आपको पता है कि किसी भी प्रधानमंत्री की तुलना में मोदी सबसे ज्यादा अनुभव लेकर दिल्ली पहुंचे थे. </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">आजादी के बाद पैदा हुए पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 1950 में हुआ. वो पहले प्रधानमंत्री हैं जो आजाद भारत में पैदा हुए. तीन बार लगातार जीत - 2014, 2019 और 2024 तीनों लोकसभा चुनावों में जनता ने उन्हें चुना.2019 में भाजपा ने 303 सीटें जीतकर अपनी स्थिति और मजबूत की। 2024 में 240 सीटों के साथ एनडीए गठबंधन ने सत्ता बरकरार रखी। जवाहरलाल नेहरू के बाद प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीन कार्यकाल के लिए नियुक्त होने वाले एकमात्र प्रधानमंत्री हैं। लगातार भारत का प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का दिवंगत इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड मोदी ने तोड़ उन्होंने पिछले साल इंदिरा गांधी (4,077 दिन) को लगातार प्रधानमंत्री रहने के मामले में पीछे छोड़ दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सितंबर 2025 में अपने तीसरे कार्यालय के दौरान वे लगातार सबसे लंबे समय तक पीएम रहने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बन गए। साथ ही वे पहले गैर-कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने लगातार दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए हैं।इसी सिलसिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है. उन्होंने लिखा, "नरेंद्र मोदी का पूरा जीवन देश और देशवासियों की सेवा को समर्पित रहा है. गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक यह यात्रा सेवा, ईमानदारी और देश को सबसे पहले रखने की यात्रा है.</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक रिपोर्ट के के मुताबिक पीएम मोदी ने अपने सफर को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में काम शुरू किया, तब राज्य कई बड़ी मुश्किलों से गुजर रहा था। गुजरात भूकंप, चक्रवात, सूखा और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों ने उन्हें और मजबूत बनाया और उन्होंने राज्य को आगे बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने अपनी मां की एक सीख का भी जिक्र किया, गरीबों के लिए काम करना और कभी रिश्वत न लेना, जैसी सीख को उन्होंने अपने जीवन का मार्गदर्शन बताया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पीएम मोदी के अनुसार, उनके कार्यकाल में गुजरात ने कृषि, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी तरक्की की और एक मजबूत राज्य के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जब उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया, तब देश में भरोसे का संकट था, लेकिन जनता ने उन्हें मजबूत समर्थन दिया।पीएम मोदी ने दावा किया कि पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में एक मजबूत देश बनकर उभरा है। पीएम मोदी ने महिलाओं (नारी शक्ति), युवाओं और किसानों के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि देश की सेवा करना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और लंबे सार्वजनिक जीवन की जमकर सराहना की है। अमित शाह ने कहा कि पीएम मोदी की दशकों की सेवा ने भारत में एक नया दौर शुरू किया है। उन्होंने गरीबों को अधिकार दिलाने, विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और दुनिया में भारत की छवि मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।उन्होंने यह भी कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए पीएम मोदी ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है और पिछले 24 साल से अधिक समय से बिना छुट्टी लिए देश की सेवा कर रहे हैं। अमित शाह ने बताया कि पीएम मोदी को जनता का अपार प्यार और समर्थन मिला है। वास्तव में नरेन्द्र मोदी एक बिरले व्यक्तित्व है यह बात उनके विरोधी भी दबी जुबान से स्वीकार करते हैं।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173939/narendra-modi-is-blessed-with-unique-leadership-abilities</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173939/narendra-modi-is-blessed-with-unique-leadership-abilities</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:13:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/pm-narendra-modi-2.jpeg"                         length="65398"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्त्री शिक्षा, सुरक्षा पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्रगति का आकलन उसकी आधी आबादी अर्थात स्त्रियों की स्थिति से किया जाता है। यह तथ्य आज केवल विचार नहीं बल्कि वैश्विक विकास सूचकांकों का आधार बन चुका है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्त्री की स्थिति एक ओर उल्लेखनीय प्रगति का संकेत देती है तो दूसरी ओर गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट करती है। स्त्री शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का आधार स्तंभ होती है, बीते कुछ दशकों में भारत में स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार देखने को मिला है, बालिका नामांकन दर में वृद्धि, माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक अंतर में कमी</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173937/need-for-serious-discussion-on-womens-education-security"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas14.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्रगति का आकलन उसकी आधी आबादी अर्थात स्त्रियों की स्थिति से किया जाता है। यह तथ्य आज केवल विचार नहीं बल्कि वैश्विक विकास सूचकांकों का आधार बन चुका है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्त्री की स्थिति एक ओर उल्लेखनीय प्रगति का संकेत देती है तो दूसरी ओर गंभीर चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट करती है। स्त्री शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का आधार स्तंभ होती है, बीते कुछ दशकों में भारत में स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सुधार देखने को मिला है, बालिका नामांकन दर में वृद्धि, माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक अंतर में कमी और उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी ने सामाजिक संरचना को नया स्वरूप दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि शिक्षा स्त्री सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है, किंतु यह भी यथार्थ है कि ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में बालिकाओं की शिक्षा अब भी सामाजिक दबाव, घरेलू श्रम और बाल विवाह जैसी समस्याओं से प्रभावित है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में स्त्री की स्थिति आधुनिक भारत की स्त्री आज शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में पहले की तुलना में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही है, पंचायत से लेकर संसद तक उसकी भागीदारी बढ़ी है और प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, इसके बावजूद घरेलू स्तर पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता, समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे अब भी पूर्ण समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, यह स्थिति इस तथ्य को रेखांकित करती है कि कानूनी अधिकार और सामाजिक स्वीकृति के बीच अभी भी एक स्पष्ट अंतर विद्यमान है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्त्रियों के विरुद्ध अपराध  चिंता का विषय है हाल के वर्षों में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के स्वरूप में भी बदलाव आया है, पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराध,ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग से जुड़ी घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, दहेज से संबंधित मामले और सार्वजनिक स्थलों पर असुरक्षा की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि शहरीकरण और तकनीकी प्रगति के बावजूद सामाजिक मानसिकता में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है, यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक चेतना के स्तर पर भी गंभीर आत्ममंथन की मांग करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कानूनी प्रावधान और प्रशासनिक दायित्व पर एक दृष्टि डालें तो भारत में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के लिए सुदृढ़ कानूनी ढांचा उपलब्ध है, जिसमें घरेलू हिंसा निषेध अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण कानून, दहेज निषेध अधिनियम तथा हाल के आपराधिक कानून संशोधन शामिल हैं, किंतु प्रशासनिक दृष्टि से चुनौती इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, त्वरित न्याय और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण की है, पुलिस, न्यायपालिका और स्थानीय प्रशासन के समन्वय के बिना केवल कानूनों का अस्तित्व पर्याप्त नहीं सिद्ध हो सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक सहभागिता और विकास की अनिवार्यता — स्त्रियों की आर्थिक भागीदारी को राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त के रूप में स्वीकार किया जा चुका है, स्वयं सहायता समूहों, सूक्ष्म वित्त योजनाओं, ग्रामीण उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान किए हैं, फिर भी श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है, जिसका कारण सामाजिक जिम्मेदारियों का असमान बोझ, कार्यस्थल पर सुरक्षा की कमी और अनौपचारिक क्षेत्र में रोजगार की अधिकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीडिया और सामाजिक दृष्टिकोण में मीडिया स्त्री की छवि निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, सकारात्मक उदाहरणों के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि स्त्री को संवेदनशीलता के साथ सम्मानजनक और संतुलित रूप में प्रस्तुत किया जाए, जिससे समाज में समानता और गरिमा का संदेश सुदृढ़ हो सके। भविष्य की दिशा और नीतिगत अपेक्षाएँ देखीं जाएं तो स्त्री की स्थिति में वास्तविक सुधार के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार को समग्र दृष्टिकोण से जोड़ना होगा, साथ ही सामाजिक व्यवहार में परिवर्तन के लिए पुरुषों और बालकों को भी लैंगिक समानता के मूल्यों से जोड़ना अनिवार्य होगा, यह केवल महिला केंद्रित योजनाओं से नहीं बल्कि सामाजिक सहभागिता और प्रशासनिक संवेदनशीलता से संभव है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्त्री की स्थिति किसी एक वर्ग या समुदाय का विषय नहीं बल्कि राष्ट्र की सामाजिक परिपक्वता और लोकतांत्रिक गुणवत्ता का दर्पण है, जब तक स्त्रियाँ भयमुक्त वातावरण में शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में समान अवसर प्राप्त नहीं करेंगी तब तक समावेशी विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा, इसलिए स्त्री सशक्तिकरण को नीतिगत प्राथमिकता के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में भी स्वीकार किया जाना समय की आवश्यकता है।<br /><br />संजीव ठाकुर</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173937/need-for-serious-discussion-on-womens-education-security</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173937/need-for-serious-discussion-on-womens-education-security</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:08:31 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/hindi-divas14.jpg"                         length="137237"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेवा का सूर्योदय, इतिहास का सूर्यास्त नहीं: मोदी ने रचा 'अमर महाकाव्य'</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सेवा केवल कर्तव्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब हर कदम इतिहास की सुनहरी धारा में अंकित हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह अद्वितीय और प्रेरक शिखर छू लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले केवल कल्पनाओं और स्वप्नों में ही संभव प्रतीत होता था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी दूरदर्शी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्षपूर्ण और प्रेरक यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज वे भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदरणीय और जनप्रिय सरकार प्रमुख बन चुके हैं। पूर्व सिक्किम मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के </span>8,930 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173935/sunrise-of-service-not-sunset-of-history-modi-created-an"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/modi-meditating.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">जब सेवा केवल कर्तव्य नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बन जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब हर कदम इतिहास की सुनहरी धारा में अंकित हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह अद्वितीय और प्रेरक शिखर छू लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहले केवल कल्पनाओं और स्वप्नों में ही संभव प्रतीत होता था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रारंभ हुई उनकी दूरदर्शी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संघर्षपूर्ण और प्रेरक यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आज वे भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आदरणीय और जनप्रिय सरकार प्रमुख बन चुके हैं। पूर्व सिक्किम मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के </span>8,930 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने यह जीवंत और अभूतपूर्व संदेश दिया कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास कितना अडिग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराजेय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अविचलनीय और प्रगाढ़ हो सकता है। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की अनवरत निष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अथक परिश्रम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निस्वार्थ समर्पण</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हृदयस्पर्शी जनसंपर्क और हर नागरिक के कल्याण की अपार प्रतिबद्धता का अनमोल प्रतीक है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लेकर आज तक मोदी जी की हर सुबह नई चुनौतियों और नए संकल्पों से शुरू हुई। </span>2001 <span lang="hi" xml:lang="hi">में जब उन्होंने राज्य की बागडोर संभाली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब गुजरात आपदा और अराजकता के बीच जूझ रहा था। मात्र </span>13 <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्षों में उन्होंने उसे विकास का प्रतीक बना दिया – ‘वाइब्रेंट गुजरात’ से लेकर द्वीपों के कोनों तक बुनियादी ढाँचा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रोजगार और समृद्धि का ऐसा जाल बुन दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो आज हर नागरिक के जीवन को छूता है। हर घर में बिजली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सड़क और स्वच्छता जैसी छोटी-छोटी बातें उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाकर ‘सबका साथ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सबका विकास’ का मंत्र साकार किया। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों में उन्होंने कभी व्यक्तिगत आराम नहीं लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी परिवार की चिंता नहीं की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर्फ राष्ट्र और जनता की भलाई की। यही कारण है कि आज हर गाँव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर शहर में उनका नाम ‘विकास पुरुष’ के रूप में गूँजता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;">26 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">को जब उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तब देश एक नए युग की दहलीज पर खड़ा था। </span>2019 <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>2024 <span lang="hi" xml:lang="hi">में लगातार जनता ने उन्हें चुनकर यह स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व में निरंतरता और दृढ़ता कितनी महत्वपूर्ण है। इन </span>4,319 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों के प्रधानमंत्रित्व में उन्होंने सिर्फ नीतियाँ नहीं बनाई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि करोड़ों जीवन संवार दिए। उज्ज्वला योजना से लेकर आयुष्मान भारत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जन धन योजना से लेकर डिजिटल इंडिया – हर योजना के पीछे छुपी है किसी गरीब परिवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसी किसान या किसी महिला की एक छोटी-सी उम्मीद और कहानी। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की इस सेवा में उन्होंने कभी राजनीतिक विरोध को बहाना नहीं बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर चुनौती को अवसर में बदलकर दिखाया। यही उनका अद्वितीय और प्रेरक अंदाज है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज जब हम </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की गिनती करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो हर दिन अपने आप में एक प्रेरक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साहसिक और उत्थानकारी कहानी बन जाता है। कभी आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक संघर्ष</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी वैश्विक महामारी में टीकाकरण का अद्भुत चमत्कार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी आर्थिक संकट के समय आत्मनिर्भर भारत के आदर्श का नारा – हर घटना में नेतृत्व की दृढ़ता और दूरदर्शिता झलकती है। मोदी जी ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुना हुआ नेता केवल सत्ता का प्रतीक नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि निस्वार्थ सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनता के प्रति जिम्मेदारी और देशभक्ति का प्रतीक भी हो सकता है। उन्होंने पद की गरिमा कभी नहीं खोई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सत्ता के लालच में कभी नहीं डूबे। उनकी हर यात्रा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हर भाषण और हर निर्णय पूर्णतया जनता के हित और राष्ट्र के कल्याण के लिए रहा। छोटी-छोटी बातें – ‘मैं हूँ ना’ का भरोसा</span>, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मन की बात’ में आम आदमी से सहज और सीधे संवाद – इन्हीं ने उन्हें हर नागरिक का अपना और पूरे देश का प्रेरक नेता बना दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस रिकॉर्ड के पीछे छिपा है अडिग संकल्प</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपराजेय इच्छाशक्ति और निस्वार्थ सेवा की प्रेरक भावना। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन मतलब </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">रातें जागना</span>, 8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">सुबहें नई उम्मीद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई चुनौतियाँ और नए संकल्प लेकर उठना। उन्होंने कभी छुट्टी नहीं ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी थकान को स्वीकार नहीं किया। गुजरात से दिल्ली तक की इस अद्वितीय और प्रेरक यात्रा में उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि लोकतंत्र में अगर इरादा मजबूत हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई भी रिकॉर्ड असंभव नहीं है। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जी-</span>20 <span lang="hi" xml:lang="hi">की अध्यक्षता कर चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और वैश्विक पटल पर ‘विश्वगुरु’ बनने की ओर अग्रसर है – यह सब </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिनों की अथक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निस्वार्थ और प्रेरक सेवा का परिणाम है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यह रिकॉर्ड केवल आंकड़ों का नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि भावनाओं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">विश्वास और जनता के प्रति सच्चे समर्पण का प्रतीक है। हर माँ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किसान और युवा आज महसूस करता है कि उनके लिए कोई है जो कभी नहीं रुकता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो उनके सुख-दुःख में हर पल खड़ा रहता है। मोदी जी ने सत्ता को सेवा में बदल दिया। उन्होंने दिखाया कि चुना हुआ नेता केवल पद का अधिकारी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जनता के लिए अडिग सहारा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्गदर्शक और प्रेरणा बन सकता है। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन की इस यात्रा में उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ नहीं लिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केवल राष्ट्र और जनता के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यही वजह है कि आज पूरा देश उन्हें श्रद्धा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सम्मान और गर्व के साथ सलाम करता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण पल पर हमें गर्व होना चाहिए। </span>8,931 <span lang="hi" xml:lang="hi">दिन का ‘मोदी युग’ केवल एक नेता की कहानी नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि </span>140 <span lang="hi" xml:lang="hi">करोड़ भारतीयों की सामूहिक आकांक्षा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनके विश्वास</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनकी मेहनत और उनके सपनों की प्रेरक कहानी है। यह स्पष्ट करता है कि जब जनता का भरोसा अडिग और गहरा हो</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो कोई भी रिकॉर्ड असंभव नहीं। आगे भी यही निष्ठा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यही समर्पण और यही दूरदर्शिता भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी। नरेंद्र मोदी ने इतिहास रच दिया है – अब आने वाली पीढ़ियाँ इस ‘मोदी युग’ को पढ़ेंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समझेंगी और सीखेंगी कि सच्ची सेवा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निस्वार्थ समर्पण और जनहित कभी थकते या रुकते नहीं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173935/sunrise-of-service-not-sunset-of-history-modi-created-an</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173935/sunrise-of-service-not-sunset-of-history-modi-created-an</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:01:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/modi-meditating.jpg"                         length="56855"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धार्मिक स्थलों को क्यों नही मिलती बंदरों से मुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक स्थलों को बंदरों से क्यों नही मिलती मुक्ति। सबसे बड़ा  यक्ष  प्रश्न  यह है कि इन स्थानों पर आने वाले श्रृद्धालु  कब तक इनके आंतक झेलते  रहेंगे? कब तक इनका  शिकार होते  रहेंगे?</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु अपने कार्यकाल में </span>19 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को वृंदावन आईं। वे दूसरी बार यहां आईं है। इससे पहले इसी पद पर रहते हुए प्रणब मुखर्जी व रामनाथ कोविंद भी अपने कार्यकाल में दो बार वृंदावन आए थे। लेकिन</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">  राष्ट्रपति मुर्मु  वृंदावन के तीन दिवसीय प्रवास पर आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्रप्रसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञानी जैल</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173933/why-are-religious-places-not-free-from-monkeys"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/ram-mandir-monkey.webp" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">अशोक मधुप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">धार्मिक स्थलों को बंदरों से क्यों नही मिलती मुक्ति। सबसे बड़ा  यक्ष  प्रश्न  यह है कि इन स्थानों पर आने वाले श्रृद्धालु  कब तक इनके आंतक झेलते  रहेंगे? कब तक इनका  शिकार होते  रहेंगे?</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हाल में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु अपने कार्यकाल में </span>19 <span lang="hi" xml:lang="hi">मार्च को वृंदावन आईं। वे दूसरी बार यहां आईं है। इससे पहले इसी पद पर रहते हुए प्रणब मुखर्जी व रामनाथ कोविंद भी अपने कार्यकाल में दो बार वृंदावन आए थे। लेकिन</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति मुर्मु  वृंदावन के तीन दिवसीय प्रवास पर आने वाली पहली राष्ट्रपति हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्रप्रसाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्ञानी जैल सिंह एक बार वृंदावन आए। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए डॉक्टर शंकरदयाल शर्मा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आर वेंकटरामन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन भी वृंदावन अपनी धार्मिक यात्रा पर आ चुके हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी दो बार वृंदावन आए। आश्रय सदन में वृद्ध विधवा माताओं से मुलाकात करने आए थे।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति पद पर रहते प्रणब मुखर्जी पहली बार </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">नवंबर </span>2014 <span lang="hi" xml:lang="hi">को अक्षयपात्र में चंद्रोदय मंदिर के भूमि पूजन में आए तो दूसरी बार </span>18 <span lang="hi" xml:lang="hi">नवंबर </span>2015 <span lang="hi" xml:lang="hi">को चैतन्य महाप्रभु के वृंदावन आगमनोत्सव के पांच सौ वे वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में आए थे। राष्ट्रपति पद पर रहते ज्ञानी जैल सिंह </span>1987 <span lang="hi" xml:lang="hi">में वृंदावन आए और रंगजी मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे </span>1957 <span lang="hi" xml:lang="hi">में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्रप्रसाद वृंदावन आए। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उप राष्ट्रपति पद पर रहते </span>1985 <span lang="hi" xml:lang="hi">में आर वेंकटरामन</span>, 1993 <span lang="hi" xml:lang="hi">में डॉ. शंकरदयाल शर्मा</span>, 1959 <span lang="hi" xml:lang="hi">में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन वृंदावन आ चुके हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति या  कोई  वीवीआईपी जब भी  वृंदावन आता है। प्रत्येक बार उनकी सुरक्षा तो  होती ही है। सबसे बड़ा काम होता है वीवीआईपी को यहां के झपटमार बदंर से बचाना। ये  बंदर झपटामार कर श्रद्धालु का चश्मा  उतारते  और किसी </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ऊ</span><span lang="hi" xml:lang="hi">ंची जगह पेड़ या दीवार पर जाकर बैठ जाते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> ये चश्मा तभी लौटाते हैं जब उन्हें खाने के लिए फ्रुटी, केला  या दूसरे खाने के सामान दिए जाएं। वीवीआईपी दौरे को  देखते हुए  प्रशासन लंगूरों के जगह− जगह कट आउट लगवाता है।  माना  जाता है कि लंगूर से बंदर डरतें हैं।उन्हें डराने के लिए ऐसा  किया जाता है। कुछ जगह लंगूर भी  लाकर बांध  दिए जाते  हैं।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु की सुरक्षा से लेकर रूट पर व्यवस्थाओं को दुरस्त करने के लिए जिला प्रशासन ने रात दिन एक कर दिया।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु के दौरे को देखते एक </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन ने लंगूरों के जगह− जगह कट आउट लगवाए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेखक को  चित्रकूट में हनुमान गढ़ी  जाने का अवसर मिला। वहां रास्ते में बंदर और लंगूर मिलते और आपके कपड़े और बैग पकड़कर रोक लेते हैं। वे आपके  बैग और जेब से खाने का सामान प्रसाद  आदि निकालकर ही आपको आगे जाने देते हैं। शुक्रताल में तो  हनुमान धाम में बंदरों को भगाने के  लिए लंगूर  बांधा हुआ था।   बंदर उसके अभयस्त हो गए थे। उन्हें पता था  कि रस्सी में बंधे लंगूर की पंहुच कहां तक हैं। बदंर आते   और लंगूर की पंहुच की दूरी से अगल रहकर लौट जाते।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रश्न है कि वीवीआइपी के आने पर ही  क्यों  बंदरों</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> को </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रोकने की व्यवस्था होती है। देश के आम आदमी को भी  वीवीआईपी क्यों नही समझा जाता। उसकी सुरक्षा की  जिम्मेदारी भी तो  सरकार की है। उसके लिए क्यों नही ऐसी व्यवस्थाएं होती।  बंदर हम हिंदुओं की श्रद्धा है। हम उसे पवित्र  मानते हैं। पूजनीय मानते  है।  इतना होने पर भी  उसके भोजन की व्यवस्था क्यों नही करते। अयोध्या में बड़ी तादाद में बंदर है। हनुमान गढ़ी पर मैंने बंदरों को फूलों  की माला  तोड़कर  उसमें  भोजन के अंश तलाशते  देखा है। इसी शहर में डस्टविन से भोजन खोजते बंदर मुझे मिलें हैं। हमारी समाज सेवी संस्थाए क्यों नही इनके भोजन की जरूरत पूरी करती। बंदरों की संख्या  लगातार बढ़ रही है। बढती बंदरों की जनसंख्या को भोजन चाहिए। भोजन ने मिलने वह निरीह प्राणी अपना  पेट भरने के लिए कुछ तो करेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> बंदरों के आतंक के कारण  कई शहरों  में तो महिलाओं और बच्चों का छतों पर जाना  कठिन हो गया है। शहरों की नही अब तो जंगल में भी इनकी बढ़ती आबादी किसानों के लिए संकट बन चुकी है। भोजन के अभाव में बंदर खेतों की फसल तोड़कर खा रहे हैं। गेंहू की बाली खा जाते है। बोए गए गन्ने के बीज जमीन से निकाल कर वे अपनी उदरपूर्ति  कर रहे हैं। किसान फसल की रक्षा को लेकर परेशान हैं।अब तो किसानों ने  खेतों की रक्षा के लिए नौकर रखने शुरू कर दिए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">आज बंदरों का  आंतक धार्मिक स्थलों के साथ अन्य स्थानों पर भी  बढ़ता जा रहा है।  शहरी आबादी के साथ  किसान भी परेशान है। आज जरूरी हो गया है कि  सरकार द्वारा बंदरों की आबादी कम करने के  लिए अभियान चलाया जाए। बंदरों के ग्रुप  लीडर की नसंबदी कराकर उनकी आबादी नियंत्रित की जाए।    जनता के शोर मचाने पर बंदरों  का पकड़कर  जंगलों में छोड़ा जाना कोई स्थायी निदान नही है। ये जंगल और वनों से लौटकर फिर आबादी की ओर आ जाते हैं। बढ़ती बंदरों की आबादी को भोजन चाहिए। भोजन न मिलने पर उन्हें भी  पेट भरना है। जैसे आदमी अपनी भोजन की जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे साधन ढ़ूंढ़ता है। वैसे ही आज बंदर कर रहे हैं। तीर्थ स्थलों पर चश्मा छीन रहे हैं तो कुछ जगह श्रद्धालुओं को  पकड़कर उनके बैग से भोजन ले रहे हैं। गांव और शहरों में भोजन के लिए कपड़े  उठाकर ले जाना आम बात है। ये उठाए गए कपड़े तब छोड़ते हैं, जब उन्हें खाने की सामग्री मिल जाए।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173933/why-are-religious-places-not-free-from-monkeys</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173933/why-are-religious-places-not-free-from-monkeys</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:57:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/ram-mandir-monkey.webp"                         length="74890"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार में मजदूरों का लिंक्डइन?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या मजदूरों का भी लिंक्डइन हो सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये सवाल सुनकर कई लोग आश्चर्य से भौहें चढ़ा लेंगे। लेकिन बिहार के दरभंगा जिले के चंद्रशेखर मंडल ने न सिर्फ ये सवाल उठाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसे हकीकत में बदल दिया। हर सुबह शहरों के चौकों पर खड़े उन मजदूरों की तस्वीर देखिए हाथों में हथौड़ा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुदाल या सिर्फ इंतजार। घंटों धूप में पसीना बहाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन काम किसी और को मिल जाता है। बिचौलिए बीच में आ जाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कमीशन काट लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और मजदूर को मिलता है बस थोड़ा-सा पैसा और बहुत सारा</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173931/linkedin-of-workers-in-bihar"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/153040280.webp" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">महेन्द्र तिवारी</span></strong></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">क्या मजदूरों का भी लिंक्डइन हो सकता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये सवाल सुनकर कई लोग आश्चर्य से भौहें चढ़ा लेंगे। लेकिन बिहार के दरभंगा जिले के चंद्रशेखर मंडल ने न सिर्फ ये सवाल उठाया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसे हकीकत में बदल दिया। हर सुबह शहरों के चौकों पर खड़े उन मजदूरों की तस्वीर देखिए हाथों में हथौड़ा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कुदाल या सिर्फ इंतजार। घंटों धूप में पसीना बहाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन काम किसी और को मिल जाता है। बिचौलिए बीच में आ जाते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कमीशन काट लेते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और मजदूर को मिलता है बस थोड़ा-सा पैसा और बहुत सारा अपमान।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> चंद्रशेखर ने ये दर्दनाक हकीकत अपनी आंखों से देखी। उन्होंने तय किया अब ये बदलेगा। कोविड महामारी के उस काले दौर में</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जब लाखों मजदूर शहरों से गांव लौट आए और भूखे पेट सोने को मजबूर हो गए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर ने </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लेबर चौक</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नामक प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। ये कोई साधारण ऐप नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन अनगिनत हाथों की डिजिटल पहचान है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो मेहनत तो करते हैं लेकिन सम्मान नहीं पाते। आज इस पहल से एक लाख से ज्यादा मजदूरों को काम मिल चुका है। ये सिर्फ नंबर्स नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">हजारों परिवारों की जिंदगी बदलने वाली कहानी है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर मंडल का सफर खुद एक संघर्षपूर्ण गाथा है। दरभंगा के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले चंद्रशेखर ने कभी मजदूरों की पीड़ा को किताबों से नहीं सीखा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस किया। बचपन से ही उन्होंने देखा कि कैसे उनके मोहल्ले के मजदूर सुबह चार बजे उठते</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">साइकिल पर लदकर शहर के चौक पहुंचते</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन शाम को खाली हाथ लौट आते। </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">काम मिलेगा या नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये भाग्य पर निर्भर था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">,' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर बताते हैं। खुद आईटी बैकग्राउंड से आने वाले चंद्रशेखर ने कभी सोचा नहीं था कि उनका ज्ञान मजदूरों की भलाई के लिए काम आएगा। 2020 में लॉकडाउन लगा तो हालात और बिगड़ गए। प्रवासी मजदूर पैदल सैकड़ों किलोमीटर चलकर बिहार लौटे। नौकरियां छूट गईं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ठेकेदार गायब हो गए। चंद्रशेखर ने सोचा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">क्यों न एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए जो मजदूरों को ठेकेदारों से सीधे जोड़े</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बिचौलिए खत्म हो जाएं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रेट्स पारदर्शी हों और काम घर बैठे मिले। इस विचार से </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लेबर चौक</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">का जन्म हुआ। शुरू में ये एक साधारण व्हाट्सएप ग्रुप था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन जल्दी ही इसे ऐप और वेबसाइट में बदल दिया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल लेबर चौक कैसे काम करता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये समझना आसान है। मजदूर मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो हिंदी और स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध है। वे अपनी प्रोफाइल बनाते हैं — नाम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">उम्र</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्किल्स जैसे मिस्त्री</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">प्लंबर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">इलेक्ट्रीशियन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लोडर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पेंटर या निर्माण मजदूर। फोटो अपलोड करते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अनुभव बताते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लोकेशन चुनते हैं और उपलब्धता मार्क करते हैं। अब मजदूरों का अपना </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">लिंक्डइन</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तैयार! दूसरी तरफ ठेकेदार या मकान मालिक ऐप पर लॉगिन करते हैं। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें काम की डिटेल्स भरनी पड़ती हैं कितने मजदूर चाहिए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कौन-सी स्किल</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कितने दिन का काम</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कितना रेट। ऐप एल्गोरिदम मैच करता है और सही मजदूरों की लिस्ट भेजता है। ठेकेदार सीधे कॉल या चैट कर सकता है। कोई कमीशन नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">कोई बिचौलिया नहीं। काम पूरा होने पर दोनों पक्ष रिव्यू देते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो अगले काम के लिए प्रोफाइल को मजबूत बनाता है। पेमेंट डिजिटल होता है </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">UPI </span><span lang="hi" xml:lang="hi">से सीधे मजदूर के अकाउंट में। ये सिस्टम न सिर्फ समय बचाता है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि विश्वास भी बनाता है। दरभंगा के एक मजदूर रामविलास सिंह कहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहले चौक पर लाइन लगानी पड़ती थी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">लड़ाई-झगड़े होते थे। अब फोन पर काम आ जाता है। मेरी मासिक कमाई दोगुनी हो गई।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">इस प्लेटफॉर्म की सफलता के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। लॉन्च के दो सालों में ही एक लाख से ज्यादा मजदूर रजिस्टर हो चुके हैं। बिहार के दरभंगा</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मधुबनी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समस्तीपुर से शुरू होकर ये पटना</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मुजफ्फरपुर और यहां तक कि दिल्ली</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">मुंबई जैसे शहरों तक फैल चुका है। रोजाना हजारों जॉब पोस्ट होते हैं छोटे मरम्मत के काम से लेकर बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स तक। कोविड के बाद जब कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री पटरी पर लौटी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो डिजिटल लेबर चौक ने मजदूरों की कमी को पूरा किया। </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">एक रिपोर्ट के मुताबिक</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">70 प्रतिशत यूजर्स ग्रामीण इलाकों से हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जो स्मार्टफोन क्रांति का फायदा उठा रहे हैं। चंद्रशेखर ने ट्रेनिंग कैंप भी लगाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां बुजुर्ग मजदूरों को ऐप चलाना सिखाया गया। महिलाओं के लिए अलग सेक्शन है घरेलू कामगारों</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">धोबी या कढ़ाई करने वालों के लिए। ये प्लेटफॉर्म सिर्फ रोजगार नहीं देता</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि स्किल डेवलपमेंट भी। ऐप पर फ्री ट्यूटोरियल वीडियो हैं सेफ्टी टिप्स</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">नई तकनीकें सीखने के लिए। एक मजदूर ने बताया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">मैंने ऐप से वेल्डिंग सीखी और अब दोगुना रेट लेता हूं।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं रहीं। शुरू में इंटरनेट की कमी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">स्मार्टफोन न होने की समस्या थी। चंद्रशेखर ने लोकल </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">NGO </span><span lang="hi" xml:lang="hi">के साथ मिलकर फ्री स्मार्टफोन डिस्ट्रीब्यूट किए। बिचौलिए खुश नहीं हुए उन्होंने विरोध किया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">अफवाहें फैलाईं। लेकिन मजदूरों का समर्थन मिला। सरकार ने भी सराहना की। बिहार सरकार की </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span><span lang="hi" xml:lang="hi">डिजिटल बिहार</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पहल से इसे बढ़ावा मिला। अब ये स्टार्टअप फंडिंग की तलाश में है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">AI </span><span lang="hi" xml:lang="hi">फीचर्स जोड़े जा सकें जैसे वॉयस सर्च हिंदी में या लोकेशन बेस्ड मैचिंग। चंद्रशेखर कहते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">हमारा सपना पूरे भारत को कवर करना है। हर मजदूर का डिजिटल चौक हो।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">'</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ये कहानी सिर्फ चंद्रशेखर की नहीं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि उन अनाम नायकों की है जो देश की रीढ़ हैं। भारत में 50 करोड़ से ज्यादा अनौपचारिक मजदूर हैं। उनकी 90 प्रतिशत कमाई बिचौलियों के कारण कम हो जाती है। डिजिटल लेबर चौक जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल इंडिया को ग्रामीण स्तर पर साकार कर रहे हैं। ये साबित करता है कि तकनीक अमीरों तक सीमित नहीं। एक साधारण स्मार्टफोन हाथ में आ जाए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो जिंदगी बदल सकती है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi"> महात्मा गांधी ने कहा था</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, '</span><span lang="hi" xml:lang="hi">भारत की आत्मा गांवों में बसती है।</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">' </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर गांवों को डिजिटल बना रहे हैं। आज जब हम लिंक्डइन पर प्रोफेशनल्स देखते हैं</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो सोचिए मजदूरों का भी लिंक्डइन क्यों न हो</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">? </span><span lang="hi" xml:lang="hi">चंद्रशेखर ने दिखा दिया</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">ये मुमकिन है। उनकी ये पहल न सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण ला रही है</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सामाजिक सम्मान भी बहाल कर रही है। वो हाथ जो कभी अनदेखे थे</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">आज ऐप पर चमक रहे हैं। अगर आप भी कोई ठेकेदार हैं या मजदूर</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">तो </span><span lang="en-us" xml:lang="en-us"><a href="http://digitallabourchowk.com/">digitallabourchowk.com</a> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पर विजिट करें। ये बदलाव की शुरुआत है एक ऐसे भारत की</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">जहां मेहनत का पूरा हक मिले। चंद्रशेखर मंडल जैसे योद्धा हमें सिखाते हैं कि समस्या जितनी बड़ी</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">समाधान उतना ही सरल हो सकता है। बस हिम्मत चाहिए</span><span lang="en-us" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" xml:lang="hi">और थोड़ा सा डिजिटल जादू।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173931/linkedin-of-workers-in-bihar</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173931/linkedin-of-workers-in-bihar</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:51:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/153040280.webp"                         length="52776"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईद का सच – खुशी बाँटने में मिलती है, रखने में नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong>  </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ईद-उल-फ़ित्र केवल एक सामान्य उत्सव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्मसंयम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति की सर्वोच्च विजय का अनुपम प्रतीक है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi">  </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रमज़ान की तपस्या ने शरीर को शुद्ध किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन को स्थिर और अडिग बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आत्मा में गहरी संतुलन और ताकत भर दी। परिवार और मित्रों के साथ गले मिलना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिठाइयाँ बाँटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जरूरतमंदों की मदद करना और नमाज़ पढ़ना केवल परंपरा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज में प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौहार्द और एकजुटता का सजीव संदेश है। ईद यह सिखाती है कि असली स्वतंत्रता केवल अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसंयम और सामाजिक जिम्मेदारी में निहित</span></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173929/truth-of-eid-%E2%80%93-happiness-is-found-in-sharing-not"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/eid-780x446.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;" align="right"><strong><span lang="hi" xml:lang="hi">प्रो. आरके जैन “अरिजीत”</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong> </strong><span lang="hi" xml:lang="hi">ईद-उल-फ़ित्र केवल एक सामान्य उत्सव नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्मसंयम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति की सर्वोच्च विजय का अनुपम प्रतीक है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">रमज़ान की तपस्या ने शरीर को शुद्ध किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मन को स्थिर और अडिग बनाया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और आत्मा में गहरी संतुलन और ताकत भर दी। परिवार और मित्रों के साथ गले मिलना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिठाइयाँ बाँटना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जरूरतमंदों की मदद करना और नमाज़ पढ़ना केवल परंपरा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि समाज में प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सौहार्द और एकजुटता का सजीव संदेश है। ईद यह सिखाती है कि असली स्वतंत्रता केवल अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मसंयम और सामाजिक जिम्मेदारी में निहित है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही मूल्य जीवन को सार्थक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थिर और पूर्ण बनाते हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि वास्तविक खुशी बाहरी भोग-भंडार में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आंतरिक शक्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">साझा संवेदनाओं और मानवता की गहन समझ में है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईद-उल-फ़ित्र वह क्षण है जब आत्मा और मन का पुनर्जागरण अपनी पूर्णता पर पहुँचता है।</span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi">पूरे महीने की अनुशासित दिनचर्या ने दिमाग और आत्मा को संयम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य और संतुलन का पाठ पढ़ाया है। यह दिन आज की डिजिटल और तुलना-प्रधान दुनिया में वास्तविक मानवीय संबंधों और गहरे संवाद की याद दिलाता है। परिवार और मित्रों के साथ बिताया गया समय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना किसी स्क्रीन के खुला संवाद</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दुआएँ जो केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे समाज और मानवता के कल्याण के लिए होती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भीतर से शांति और नई ऊर्जा भरती हैं। माफी और क्षमा का संदेश इस दिन और भी स्पष्ट रूप से प्रकट होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर व्यक्ति के भीतर नई शुरुआत</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आत्मविश्वास और जीवन की सच्ची शक्ति जगाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईद-उल-फ़ित्र केवल त्योहार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रमज़ान के अनुशासन के साथ-साथ आज के समय में पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवन के महत्व का भी प्रेरणादायक संदेश है। इस दिन तैयार होने वाले भोजन को आवश्यकता के अनुसार रखना और अनावश्यक बर्बादी से बचना इस्लामी शिक्षाओं (इसराफ़ न करने) के अनुरूप है। नए कपड़े पहनने की परंपरा न केवल उत्सव की खुशी बढ़ाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि पुराने कपड़ों को दान कर जरूरतमंदों तक पहुँचाने का संदेश भी देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो सस्टेनेबल फैशन को प्रोत्साहित करता है। फितरा और ज़कात गरीबों और अनाथों को शामिल करने का अवसर प्रदान करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि घर पर और प्राकृतिक तरीके से बनाई गई मिठाइयाँ प्रोसेस्ड फूड के प्रति सतर्कता की प्रेरणा देती हैं। ईद हमें यह सिखाती है कि लालच से दूर रहकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संसाधनों का सम्मान करके और सामूहिक संतोष अपनाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जीवन और समाज में संतुलन कायम किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईद-उल-फ़ित्र युवाओं के लिए केवल त्योहार नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि आत्मिक और मानसिक सशक्तिकरण का अवसर है। यह दिन उन्हें वर्चुअल दुनिया से बाहर निकलकर असली रिश्तों और संवाद में निवेश करने की प्रेरणा देता है। तनाव और चिंता से जूझ रहे युवाओं के लिए ईद अनुशासन और संयम की ताकत याद दिलाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है। खेल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिलन समारोह और सामाजिक गतिविधियाँ टीम भावना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग और सामूहिक समझ का संदेश देती हैं। असली खुशी सोशल मीडिया में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वास्तविक कनेक्शन और साझा अनुभव में निहित है। यह त्यौहार युवाओं को नई ऊर्जा और उत्साह देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि वे अपने सपनों और करियर की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईद-उल-फ़ित्र वैश्विक एकता और मानवता का प्रतीक भी है। यह दिन पूरी दुनिया में एकसाथ मनाया जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दर्शाता है कि मानवता की सीमाएँ किसी देश या धर्म से बड़ी हैं। युद्ध और विभाजन के समय में यह प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाईचारे और सहयोग का संदेश फैलाती है। गिफ्ट्स का आदान-प्रदान केवल वस्तुएँ नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि सांस्कृतिक और भावनात्मक पुल बनाता है। हर धर्म और समुदाय इसके संदेश से प्रेरित होकर बलिदान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्याग और एकजुटता का महत्व समझ सकता है। ईद की नमाज़ वैश्विक प्रार्थना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शांति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहिष्णुता और सहयोग की कामना करती है और सिद्ध करती है कि छोटी परंपराएँ भी बड़े बदलाव की नींव रख सकती हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">ईद-उल-फ़ित्र जीवन में सफलता</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतोष और खुशहाली की राह दिखाती है। यह बताती है कि अनुशासन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">धैर्य और सामूहिकता ही जीवन को सार्थक बनाते हैं। यह त्योहार हर अंधेरे के बाद रोशनी का प्रतीक है और मानव जीवन को नई दिशा देता है। सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हमारे भीतर छिपा है—ईद बार-बार इस सत्य को याद दिलाती है। इसकी आत्मा अपनाई जाए तो यह समाज और दुनिया दोनों को बदल सकती है। ईद नए सपनों और संभावनाओं की शुरुआत है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो हर साल नई ऊर्जा और उत्साह के साथ लौटती है और जीवन को सुंदर बनाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" xml:lang="hi">खुशी का असली सार केवल प्राप्त करने में नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि देने और बाँटने में छिपा है—और ईद इसी संदेश को जीवंत करती है। यह पर्व प्रेम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्षमा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोग और मानवता की शक्ति को उजागर करता है। हर दुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दान और साझा आनंद केवल परंपरा नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जीवन को सार्थक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">समृद्ध और संतुलित बनाने का अभ्यास है। आज की तेज़-तर्रार और क्षणिक सुखों में उलझी दुनिया में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईद हमें यह याद दिलाती है कि आत्मा की संतुष्टि और भीतर से महसूस की जाने वाली खुशी ही सबसे स्थायी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शुद्ध और सच्ची खुशी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.swatantraprabhat.com/article/173929/truth-of-eid-%E2%80%93-happiness-is-found-in-sharing-not</link>
                <guid>https://www.swatantraprabhat.com/article/173929/truth-of-eid-%E2%80%93-happiness-is-found-in-sharing-not</guid>
                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:47:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-03/eid-780x446.jpg"                         length="176195"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        