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                <title>Tribute - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>Tribute RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>राजस्थान के बीकानेर आर्मी कैंप में आतंकी हमले में बस्ती का अग्निवीर जवान वीरगति को प्राप्त होने की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर</title>
                                    <description><![CDATA[<div class="ii gt">
<div class="a3s aiL">
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<div style="text-align:justify;">
<blockquote class="format1">बस्ती।</blockquote>
</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के मुंडेरवा नगर पंचायत अंतर्गत उमरी अहरा गांव निवासी 22 वर्षीय अग्निवीर नरेंद्र कुमार यादव के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।परिजनों के अनुसार शनिवार को ड्यूटी के दौरान हुई घटना के बाद रात करीब 8 बजे छोटे भाई के मोबाइल पर शहादत की सूचना मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र कुमार यादव गरीब किसान रामरक्षा यादव के पुत्र थे और परिवार के</div></div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182763/there-is-a-wave-of-mourning-in-the-area-due"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/img-20260705-wa0091.jpg" alt=""></a><br /><div class="ii gt">
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<blockquote class="format1">बस्ती।</blockquote>
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<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बस्ती जिले के मुंडेरवा नगर पंचायत अंतर्गत उमरी अहरा गांव निवासी 22 वर्षीय अग्निवीर नरेंद्र कुमार यादव के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।परिजनों के अनुसार शनिवार को ड्यूटी के दौरान हुई घटना के बाद रात करीब 8 बजे छोटे भाई के मोबाइल पर शहादत की सूचना मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र कुमार यादव गरीब किसान रामरक्षा यादव के पुत्र थे और परिवार के सबसे बड़े सहारा माने जाते थे। वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए नरेंद्र ने छह माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बीकानेर में अपनी पहली तैनाती संभाली थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव के लोगों ने नरेंद्र को मेहनती, अनुशासित, सरल स्वभाव और मिलनसार युवा बताते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र में ही देश सेवा का संकल्प लिया था। उनकी वीरगति की सूचना से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है और हर आंख नम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों को उम्मीद है किराजस्थान के बीकानेर स्थित एक आर्मी कैंप पर कथित आतंकी हमले की सूचना के बीच जनपद बस्ती के मुंडेरवा नगर पंचायत अंतर्गत उमरी अहरा गांव निवासी 22 वर्षीय अग्निवीर नरेंद्र कुमार यादव के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों के अनुसार शनिवार को ड्यूटी के दौरान हुई घटना के बाद रात करीब 8 बजे छोटे भाई के मोबाइल पर शहादत की सूचना मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीण बड़ी संख्या में शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">नरेंद्र कुमार यादव गरीब किसान रामरक्षा यादव के पुत्र थे और परिवार के सबसे बड़े सहारा माने जाते थे। वर्ष 2024 में अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती हुए नरेंद्र ने छह माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद बीकानेर में अपनी पहली तैनाती संभाली थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">गांव के लोगों ने नरेंद्र को मेहनती, अनुशासित, सरल स्वभाव और मिलनसार युवा बताते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र में ही देश सेवा का संकल्प लिया था। उनकी वीरगति की सूचना से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है और हर आंख नम है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">परिजनों को उम्मीद है कि शहीद जवान का पार्थिव शरीर सोमवार प्रातः लगभग 6 बजे उनके पैतृक गांव उमरी अहरा पहुंचेगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। क्षेत्रवासियों ने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी शहादत को राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान बताया।मां भारती के वीर सपूत नरेंद्र कुमार यादव की शहादत को शत-शत नमन। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।"</div>
</div>
<div class="yj6qo" style="text-align:justify;"> </div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>
</div>
</div>
</div>
<div class="hq gt" style="text-align:justify;"></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 21:00:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत की एकता और प्रगति के प्रति समर्पित एक जीवन-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/182749/a-life-dedicated-to-the-unity-and-progress-of-india"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-07/whatsapp-image-2026-07-05-at-17.40.45.jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज, 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व में विद्वता, जनसेवा और उच्च नैतिक मूल्यों का अद्भुत संगम था। आधुनिक भारत के कुछ ही नेताओं में इतने सारे गुण एक साथ देखने को मिलते हैं। </div>
<div style="text-align:justify;">श्यामा प्रसाद जी का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां उन्हें सुख-सुविधाओं से भरपूर जीवन आसानी से मिल सकता था। उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी की गिनती अपने समय के महान शिक्षाविदों में होती थी। लेकिन तमाम सुविधाओं के बावजूद श्यामा प्रसाद जी ने त्याग और राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। उनका दृढ़ विश्वास था कि चाहे अंग्रेजी शासन का विरोध हो, सांप्रदायिकता से लड़ाई हो या मानवीय संकटों का सामना, वे अपने समय की इन चुनौतियों के सामने मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। इस सफर में उन्हें कई गहरे व्यक्तिगत दुख भी झेलने पड़े। पहले उन्होंने अपने छोटे बच्चे को खोया और बाद में पत्नी का भी निधन हो गया। लेकिन इन दुखद परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनका संकल्प और सशक्त हुआ, राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और गहरा होता गया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना था। देश के विभाजन के समय उन्होंने पश्चिम बंगाल को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुछ वर्षों बाद इसी उद्देश्य से उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी संघर्ष किया। जेल और नजरबंदी भी उन्हें रास्ते से डिगा नहीं सकी। जब नजरबंदी के दौरान उनका निधन हुआ, तब वे उन अनगिनत लोगों से बहुत दूर थे, जिनके लिए वे जीवनभर संघर्ष करते रहे। इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर देश की स्मृति का हिस्सा बन जाता है। डॉ. मुखर्जी का बलिदान भी ऐसा ही था। आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि डॉ. मुखर्जी ने उस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दिया, जिस पर उन्हें पूरा विश्वास था। दशकों बाद, साल 2019 में आर्टिकल 370 और 35(A) को हटाया जाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि थी। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी ने हमेशा राष्ट्रहित और भारतीय मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने मजबूत संस्थानों का निर्माण किया और ऐसी व्यवस्थाएं बनाईं, जो उस समय की सोच से काफी आगे थीं। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ऐसे बदलाव किए, जो राष्ट्रहित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप थे। शिक्षाविदों के एक सम्मेलन में डॉ. मुखर्जी ने कहा था, ‘’शिक्षण संस्थानों को केवल बाबू या कम वेतन वाले कर्मचारी तैयार करने की फैक्ट्री समझना गलत है। हमें विद्यार्थियों को ऐसे तैयार करना होगा ताकि वे नेतृत्व की भूमिका निभा सकें। हमारी स्वशासी संस्थाओं जैसे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स, प्रांतीय और केंद्रीय विधायिकाओं में बड़ी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हो सकें। इसके साथ ही वे वित्त, व्यापार और उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें।’’</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कलकत्ता विश्वविद्यालय में अपने नेतृत्व में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्य किए। इनमें लाइब्रेरी की सुविधाओं में सुधार, विज्ञान में रिसर्च को बढ़ावा देना, ऐतिहासिक वस्तुओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करना और कृषि से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करना शामिल था। उन्होंने खेलकूद, टीचर्स ट्रेनिंग और स्टूडेंट वेलफेयर जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया। विद्यार्थियों में अपनी यूनिवर्सिटी के प्रति गर्व की भावना विकसित हो, इसके लिए उन्होंने 24 जनवरी को विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने गुरुदेव टैगोर से विश्वविद्यालय के लिए एक गीत लिखने का अनुरोध भी किया था।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उनके जीवन के बाद के वर्षों में इस भावना का एक और उदाहरण तब देखने को मिला, जब उन्होंने भारतीय जनसंघ बनाने का निर्णय लिया। उस समय देश में हर तरफ कांग्रेस पार्टी का ही बोलबाला था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि देश को एक ऐसे नए विकल्प की बहुत जरूरत है, जो भारत की प्रगति की बात भी करे और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ा रहे। शायद इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी का चुनाव चिह्न 'दीपक' यानि मिट्टी का दीया रखा गया। एक अकेला दीया देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन उसमें अपने आस-पास के गहरे से गहरे अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति होती है। जनसंघ ने अपने सक्रिय काल में और उसके बाद भी बिल्कुल यही किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्यकाल बेहद अहम रहा। उन्हें एक ऐसे राजनेता के रूप में याद किया जाता है, जिनका विजन बहुत विराट था। वे उद्योग को नए-नए आजाद हुए भारत के लोगों में सम्मान, अवसर और आत्मविश्वास का संचार करने का सशक्त माध्यम मानते थे। वे वेल्थ और वैल्यू क्रिएशन के महत्व को भली-भांति समझते थे। उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन, सिंदरी उर्वरक संयंत्र और मजबूत औद्योगिक नीति जैसी ऐतिहासिक पहल की। इसके माध्यम से आधुनिक औद्योगिक भारत की नींव रखी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के पारंपरिक सामर्थ्य की कभी उपेक्षा न हो। वे हथकरघा, कुटीर उद्योग, कारीगरों और कपड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिकों के हितों के भी प्रबल समर्थक थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">यहां मैं अपना एक निजी अनुभव भी साझा करना चाहता हूं। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट विजन के साथ जिस सिंदरी संयंत्र की स्थापना के लिए डॉ. मुखर्जी ने अथक प्रयास किए थे, उसकी कई दशकों तक सत्ता में रहने वाले लोगों ने घोर उपेक्षा की। मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार को उसके पुनरुद्धार का सौभाग्य मिला। उस कार्यक्रम में उपस्थित होना मेरे सार्वजनिक जीवन के सबसे विशेष और अविस्मरणीय क्षणों में से एक बन गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भारत की प्राचीन परंपरा सदियों से संवाद और विचार-विमर्श का सम्मान करती आई है। डॉ. मुखर्जी इस लोकतांत्रिक भावना के सशक्त प्रतीक थे। उन्होंने पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल होना इसलिए स्वीकार किया, क्योंकि वे मानते थे कि देश की आजादी के शुरुआती वर्षों में राष्ट्र निर्माण का दायित्व राजनीतिक मतभेदों से कहीं ऊपर है। उन्होंने पूरी निष्ठा और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी जिम्मेदारियों को  निभाया। लेकिन जब उन्हें लगा कि राष्ट्रीय महत्व के कुछ प्रश्नों पर देशहित में अलग मार्ग अपनाना आवश्यक है, तो उन्होंने पूरी गरिमा के साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन उस राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए समर्पित कर दिया, जिसे वे राष्ट्र के लिए आवश्यक मानते थे।  </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">75 वर्ष पहले पंडित नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए। इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा प्रहार माना गया। तब डॉ. मुखर्जी इसके सबसे मुखर आलोचक रहे थे। वे भली-भांति समझ चुके थे कि कांग्रेस किस हद तक जा सकती है। समय के साथ उनकी यह आशंका सही साबित हुई। जो पार्टी 75 वर्ष पहले पहला संविधान संशोधन लेकर आई थी, उसी ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपा। इतना ही नहीं, 50 वर्ष पहले 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर एक बार फिर लोकतांत्रिक मूल्यों की बुनियाद पर कुठाराघात किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">डॉ. मुखर्जी अपनी मानवीय संवेदनाओं और सेवाभाव के लिए भी विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 1943 में जब बंगाल भीषण अकाल की त्रासदी से जूझ रहा था, तब उन्होंने पीड़ितों की सेवा में स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर दिया था। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि लोगों को भोजन मिल सके, जिसके लिए कई कैंटीन और रिलीफ सेंटर शुरू किए गए। एक ओर वे लोगों की पीड़ा से बहुत व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश हुकूमत की असंवेदनशीलता से अत्यंत आक्रोशित भी थे। उन्होंने अपनी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए पंचाशेर मन्वंतर नाम की एक किताब भी लिखी। 1942 में जब मेदिनीपुर में भीषण चक्रवात आया, तब उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों का नेतृत्व किया। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कोलकाता के एक कॉलेज में युवाओं को संबोधित करते हुए डॉ. मुखर्जी ने उनसे आग्रह किया था, ‘’आप जो भी कार्य करें, उसे पूरी गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। किसी भी काम को कभी अधूरा न छोड़ें। तब तक स्वयं को संतुष्ट न मानें, जब तक आपने उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान न दे दिया हो।’’ आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रयास करें, जिसकी उन्होंने परिकल्पना की थी। एक ऐसा भारत जो सशक्त हो, एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर और संवेदनशील हो। देश के युवाओं पर मुझे पूरा विश्वास है कि वे इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए बढ़-चढ़कर भागीदारी करेंगे और इस संकल्प को साकार करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ जुट जाएंगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<blockquote class="format1"><strong>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी</strong></blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 17:49:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनकापुर विधायक के प्रतिनिधि के पिता का निधन, सरयू घाट पर अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नवाबगंज (गोंडा)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">मनकापुर विधायक रमापति शास्त्री के प्रतिनिधि वेदप्रकाश दूबे के पिता श्री देवी प्रसाद दूबे का शुक्रवार की रात 98 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">          नवाबगंज गिर्द के अगमपुर स्थिति आवास पर शनिवार को शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह,विधायक रमापति शास्त्री, प्रमुख प्रतिनिधि सुमित भूषण सिंह, गोंडा सांसद प्रतिनिधि कमलेश पांडेय,नगरपालिका अध्यक्ष डॉ. सत्येन्द्र सिंह, भाजपा नेता जनार्दन तिवारी, सूर्य लाल दूबे, दुर्गेश गुप्ता, बाबूलाल शास्त्री, रवि श्रीवास्तव, प्रिंस</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अनेक</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173913/mankapur-mla-representatives-father-passes-away-funeral-at-saryu-ghat"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/36.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>स्वतंत्र प्रभात </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>नवाबगंज (गोंडा)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">मनकापुर विधायक रमापति शास्त्री के प्रतिनिधि वेदप्रकाश दूबे के पिता श्री देवी प्रसाद दूबे का शुक्रवार की रात 98 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">     नवाबगंज गिर्द के अगमपुर स्थिति आवास पर शनिवार को शोक व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह,विधायक रमापति शास्त्री, प्रमुख प्रतिनिधि सुमित भूषण सिंह, गोंडा सांसद प्रतिनिधि कमलेश पांडेय,नगरपालिका अध्यक्ष डॉ. सत्येन्द्र सिंह, भाजपा नेता जनार्दन तिवारी, सूर्य लाल दूबे, दुर्गेश गुप्ता, बाबूलाल शास्त्री, रवि श्रीवास्तव, प्रिंस श्रीवास्तव, प्रधान दुर्गा सिंह, मुकेश पाण्डेय सहित</div>
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<div style="text-align:justify;">अनेक गणमान्य लोगों ने पहुंचकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को सांत्वना दी।दिवंगत का अंतिम संस्कार शनिवार को सरयू घाट पर विधि-विधान से किया गया, जहां परिजनों और क्षेत्रीय लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:18:24 +0530</pubDate>
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