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                <title>education policy UP - Swatantra Prabhat</title>
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                <description>education policy UP RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शिक्षामित्र सम्मान समारोह में 18 हजार मानदेय पर दी बधाई</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज ।</strong> जनपद के जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह का आयोजन किया गयाजिसमे प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षामित्रों को सम्मानित करते हुए उनके मानदेय को 18 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;">  </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने मंच से 27 शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह का सजीव प्रसारण भी किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने देखा।</div>
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<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम से पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा</div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/178279/congratulations-on-18-thousand-honorarium-in-shikshamitra-felicitation-ceremony"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-05/img-20260505-wa0175-(1).jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>प्रयागराज ।</strong> जनपद के जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह का आयोजन किया गयाजिसमे प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शामिल हुए। कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षामित्रों को सम्मानित करते हुए उनके मानदेय को 18 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने मंच से 27 शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय का प्रतीकात्मक चेक प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह का सजीव प्रसारण भी किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने देखा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम से पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके साथ ही विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उत्साहपूर्ण बना दिया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा तथा कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की गई है। उन्होंने शिक्षामित्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में उनकी अहम भागीदारी है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले लोग सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने से कतराते थे, लेकिन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के तहत विद्यालयों में व्यापक सुधार हुए हैं। अब अभिभावक निजी स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डीबीटी के माध्यम से बच्चों को ड्रेस, जूते आदि के लिए आर्थिक सहायता सीधे खाते में भेजी जा रही है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">उपमुख्यमंत्री ने कहा कि “डबल इंजन सरकार” बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। युवाओं को रोजगार और सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता के साथ अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">इस अवसर पर फूलपुर के सांसद प्रवीण पटेल ने शिक्षामित्रों को प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ बताते हुए कहा कि वे बच्चों के नामांकन और शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने मानदेय वृद्धि पर सभी शिक्षामित्रों को शुभकामनाएं दीं और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की योजनाओं की सराहना की।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वी.के. सिंह ने शिक्षामित्रों को बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर उन्हें आदर्श नागरिक बनाने का आह्वान किया। वहीं जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने शिक्षामित्र योजना के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1999 में शुरू हुई इस योजना के तहत प्रदेश में लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों की नियुक्ति की गई थी। प्रयागराज में कुल 2834 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम के अंत में मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षा विभाग के कर्मियों और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों की उपस्थिति रही।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पूर्वांचल-पूर्वी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 22:37:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Swatantra Prabhat UP]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा का 'बाजार' या 'संस्कार'—दोषी कौन? व्यवस्था, समाज या मानसिकता?</title>
                                    <description><![CDATA[<div style="text-align:justify;"><strong>बृजभूषण तिवारी </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहाँ हर पक्ष के पास अपने तर्क हैं और हर दिल में एक शिकायत। गोंडा से शुरू हुआ निजी स्कूलों के विरुद्ध आक्रोश आज पूरे प्रदेश की एक सामूहिक आवाज बन चुका है। लेकिन इस बहस के शोर में क्या हम उस बुनियादी सच को देख पा रहे हैं जो हमारी आँखों के सामने है? यह संपादकीय किसी का पक्ष लेने के लिए नहीं, बल्कि समाज और सरकार के सामने उस आईने को रखने के लिए है जिसमें हम सभी का चेहरा साफ दिखाई दे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1007446493.jpg" alt="शिक्षा का 'बाजार' या 'संस्कार'—दोषी कौन? व्यवस्था, समाज या मानसिकता?" width="294" height="196" /></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>निजी</strong></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/175554/market-or-culture-of-education-which-system-is-to"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-8,-2026,-08_36_27-pm.png" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बृजभूषण तिवारी </strong></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहाँ हर पक्ष के पास अपने तर्क हैं और हर दिल में एक शिकायत। गोंडा से शुरू हुआ निजी स्कूलों के विरुद्ध आक्रोश आज पूरे प्रदेश की एक सामूहिक आवाज बन चुका है। लेकिन इस बहस के शोर में क्या हम उस बुनियादी सच को देख पा रहे हैं जो हमारी आँखों के सामने है? यह संपादकीय किसी का पक्ष लेने के लिए नहीं, बल्कि समाज और सरकार के सामने उस आईने को रखने के लिए है जिसमें हम सभी का चेहरा साफ दिखाई दे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/2026-04/1007446493.jpg" alt="शिक्षा का 'बाजार' या 'संस्कार'—दोषी कौन? व्यवस्था, समाज या मानसिकता?" width="294" height="196"></img></div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>निजी स्कूलों की 'मजबूरी' बनाम 'मनमानी'</strong></div><div style="text-align:justify;">हमें धरातल की सच्चाई स्वीकार करनी होगी कि निजी स्कूल बिना किसी 'सरकारी ग्रांट' के चलते हैं। एक संस्थान को चलाने के लिए बिजली के भारी व्यावसायिक बिल, सुरक्षा मानक, आधुनिक लैब और सैकड़ों कर्मचारियों का वेतन—यह सब एक विशाल आर्थिक बोझ है। यदि स्कूल प्रबंधन आर्थिक संतुलन नहीं बनाएगा, तो गुणवत्ता का गिरना तय है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">किन्तु, प्रश्न तब उठता है जब यह 'प्रबंधन' एक 'सिंडिकेट' का रूप ले लेता है। किताबों के नाम पर कमीशनखोरी, हर साल यूनिफॉर्म का बदल जाना और अभिभावकों को विशेष दुकानों का बंधक बनाना—यह 'मजबूरी' नहीं, बल्कि 'नैतिक पतन' है। निजी संस्थानों को समझना होगा कि वे समाज का निर्माण कर रहे हैं, किसी वस्तु का उत्पादन नहीं। मुनाफे की भूख जब शिक्षा की शुचिता को निगलने लगे, तो समाज का आक्रोश स्वाभाविक है।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>समाज का विरोधाभास: विरोध की हुंकार, पर निजी का ही प्यार?</strong></div><div style="text-align:justify;">संपादकीय का सबसे तीखा सवाल उन अभिभावकों से है जो निजी स्कूलों की फीस पर तो सवाल उठाते हैं, लेकिन अपने ही क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक, जूनियर और एडेड विद्यालयों की ओर कदम बढ़ाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। सरकार ने करोड़ों खर्च कर 'ऑपरेशन कायाकल्प' के जरिए स्कूलों को संवारा है। वहां TET/CTET उत्तीर्ण उच्च शिक्षित शिक्षक तैनात हैं, जो योग्यता में किसी भी निजी स्कूल के शिक्षक से कहीं आगे हैं।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;">फिर भी, एक चपरासी से लेकर बड़े अधिकारी तक का बच्चा निजी कॉन्वेंट की कतार में खड़ा है। जब तक समाज सरकारी व्यवस्था पर विश्वास नहीं जताएगा और वहां अपने बच्चों को नहीं भेजेगा, तब तक निजी स्कूलों का एकाधिकार (Monopoly) खत्म नहीं होगा। हम विरोध तो करते हैं, लेकिन विकल्प के तौर पर अपनी ही सरकारी व्यवस्था को अपनाने का साहस नहीं जुटा पाते।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>सरकार की जवाबदेही: नीति बनाम नीयत</strong></div><div style="text-align:justify;">सरकार के पास नियम तो कड़े हैं, पर उनका 'धरातल' पर उतरना अभी बाकी है। समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसा साहसी कानून बने कि "समस्त सरकारी सेवकों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों के बच्चे अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही पढ़ेंगे।" सोचिए, जिस दिन जिलाधिकारी, बीएसए और पुलिस कप्तान का बच्चा टाट-पट्टी पर बैठकर सरकारी स्कूल में पढ़ेगा, उस दिन वहां की शिक्षा, पंखे, मिड-डे मील और ब्लैकबोर्ड की गुणवत्ता रातों-रात बदल जाएगी। जब व्यवस्था चलाने वालों का निजी हित व्यवस्था से जुड़ेगा, तभी वास्तविक क्रांति आएगी। बिना जवाबदेही के सरकारी स्कूल केवल 'गरीबों का ठिकाना' बनकर रह जाएंगे।</div><div style="text-align:justify;"><br /></div><div style="text-align:justify;"><strong>आईना हमारे सामने है</strong></div><div style="text-align:justify;">आज शिक्षा का स्तर बच्चे के 'पिता की जेब' तय कर रही है, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। यदि हमें उत्तर प्रदेश के भविष्य को संवारना है, तो तीन स्तरों पर काम करना होगा:स्कूलों को: लाभ की सीमा तय करनी होगी और अनैतिक कमीशनखोरी बंद करनी होगी।समाज को: सरकारी स्कूलों पर भरोसा करना होगा और वहां के प्रबंधन से सवाल पूछने की हिम्मत जुटानी होगी।सरकार को: केवल निर्देश नहीं, बल्कि 'समान शिक्षा संहिता' लागू करनी होगी जहाँ अमीर और गरीब का बच्चा एक ही छत के  नीचे पढ़े। शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है। यदि आज हमने इस आईने में अपनी कमियों को नहीं देखा, तो आने वाला कल हमें कभी माफ नहीं करेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वतंत्र विचार</category>
                                            <category>Featured</category>
                                            <category>संपादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 20:40:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को  पुरानी पेंशन योजना  में शामिल किए जाने पर एमएलसी ने  खुशी जताई</title>
                                    <description><![CDATA[<div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर :</strong> प्रदेश के  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने  मिलकर प्रदेश के समस्त विषय विशेषज्ञ शिक्षकों  कों पुरानी पेंशन योजना में सम्मिलित किए जाने  धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया । शिक्षक विधायक ने कहा की प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को वित्त विभाग के शासनादेश के माध्यम से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना में सम्मिलित किए जाने का मार्ग प्रशस्त करना अत्यंत सराहनीय एवं ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय न केवल शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि उनके मनोबल एवं समर्पण को भी</div></div></div></div>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.swatantraprabhat.com/article/173893/mlc-expressed-happiness-over-the-inclusion-of-subject-specialist-teachers"><img src="https://www.swatantraprabhat.com/media/400/2026-03/hindi-divas13.jpg" alt=""></a><br /><div>
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<div style="text-align:justify;"><strong>सिद्धार्थनगर :</strong> प्रदेश के  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने  मिलकर प्रदेश के समस्त विषय विशेषज्ञ शिक्षकों  कों पुरानी पेंशन योजना में सम्मिलित किए जाने  धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया । शिक्षक विधायक ने कहा की प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को वित्त विभाग के शासनादेश के माध्यम से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना में सम्मिलित किए जाने का मार्ग प्रशस्त करना अत्यंत सराहनीय एवं ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय न केवल शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि उनके मनोबल एवं समर्पण को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। आपके इस संवेदनशील एवं शिक्षकों के हित में लिए गए निर्णय के लिए हम सभी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की तरफ़ से आपका हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।</div>
</div>
</div>
</div>
<div class="adL" style="text-align:justify;"> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>आपका शहर</category>
                                            <category>पश्चिमी उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 20:05:14 +0530</pubDate>
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